पठार
निर्माण, प्रकार, प्रमुख विशेषताएँ और विश्व के महत्वपूर्ण पठार
पठार क्या है?
पठार एक विस्तृत, अपेक्षाकृत समतल अथवा हल्के ऊबड़-खाबड़ शीर्ष वाला ऊँचा भूभाग होता है, जो अपने आसपास के क्षेत्र की तुलना में अधिक ऊँचाई पर स्थित होता है।
पठार का शीर्ष सामान्यतः चौड़ा होता है और इसके एक या अधिक किनारे तीव्र ढाल वाले हो सकते हैं। इसी मेज जैसी आकृति के कारण पठार को मेजनुमा भूभाग भी कहा जाता है।
पठार समुद्र तल से कुछ सौ मीटर से लेकर कई हजार मीटर तक ऊँचे हो सकते हैं। इनका निर्माण भूगर्भीय उत्थान, भ्रंशन, ज्वालामुखीय लावा प्रवाह तथा लंबे समय तक होने वाले अपरदन जैसी विभिन्न प्रक्रियाओं से होता है।
पठारों की प्रमुख विशेषताएँ
ऊँचाई, सतह और ढाल
पठार अपने आसपास के मैदानों या निम्न भूभागों की तुलना में ऊँचे होते हैं, लेकिन पर्वतों की तरह इनके शिखर सामान्यतः नुकीले नहीं होते।
इनका ऊपरी भाग विस्तृत तथा अपेक्षाकृत समतल हो सकता है, जबकि किनारे तीव्र ढाल वाले हो सकते हैं।
नदियाँ पठारों को काटकर गहरी घाटियाँ और कंदराएँ बना सकती हैं। इसी कारण बहुत से पुराने पठार आज अत्यधिक विच्छेदित दिखाई देते हैं।
कई पठारी क्षेत्रों में प्राचीन कठोर चट्टानें और खनिज पाए जाते हैं, इसलिए अनेक पठार खनिज संसाधनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं।
पठारों का वर्गीकरण
निर्माण और अवस्थिति के आधार पर
पठारों का वर्गीकरण केवल एक आधार पर नहीं किया जाता। उन्हें उत्पत्ति या निर्माण तथा अवस्थिति दोनों आधारों पर अलग-अलग प्रकारों में बाँटा जा सकता है।
निर्माण की दृष्टि से विवर्तनिक या संरचनात्मक, ज्वालामुखीय और अपरदनात्मक या अवशिष्ट पठार महत्वपूर्ण हैं।
अवस्थिति की दृष्टि से अंतर्पर्वतीय, पर्वतपदीय और महाद्वीपीय पठार जैसे प्रकार बताए जाते हैं।
🎯 परीक्षा में ध्यान रखें
अंतर्पर्वतीय पठार और महाद्वीपीय पठार एक ही प्रकार नहीं हैं। अंतर्पर्वतीय पठार ऊँची पर्वत श्रेणियों के बीच घिरा होता है, जबकि महाद्वीपीय पठार किसी महाद्वीप के विस्तृत आंतरिक भाग में स्थित हो सकता है।
संरचनात्मक या विवर्तनिक पठार
भू-पर्पटी की आंतरिक हलचलों से निर्माण
पृथ्वी की आंतरिक शक्तियों के कारण किसी विस्तृत भूभाग का उत्थान होने या भ्रंशों के कारण भूखंड ऊपर उठ जाने से बनने वाले पठारों को संरचनात्मक या विवर्तनिक पठार कहा जाता है।
इनका निर्माण प्लेट विवर्तनिक गतिविधियों, भू-पर्पटी के उत्थान, वलन तथा भ्रंशन जैसी प्रक्रियाओं से जुड़ा हो सकता है।
कोलोराडो पठार एक प्रमुख उदाहरण है। इसका व्यापक क्षेत्र ऊपर उठा, जिसके बाद नदियों के गहरे अपरदन ने इसमें अनेक घाटियाँ और कंदराएँ विकसित कीं।
डेक्कन क्षेत्र में भी विवर्तनिक उत्थान का प्रभाव रहा है, लेकिन डेक्कन ट्रैप का विशाल भाग मुख्यतः ज्वालामुखीय बेसाल्टिक लावा प्रवाहों से निर्मित है। इसलिए इसे केवल संरचनात्मक पठार के उदाहरण के रूप में याद करना उचित नहीं है।
ज्वालामुखीय पठार
विशाल लावा प्रवाह से निर्माण
जब विस्तृत क्षेत्र में दरारों या भ्रंशों से बार-बार बड़ी मात्रा में लावा निकलकर फैलता है और ठंडा होकर परतों में जम जाता है, तो विशाल ज्वालामुखीय पठार का निर्माण हो सकता है।
लावा की अनेक परतें एक-दूसरे के ऊपर जमा होकर मोटे बेसाल्टिक क्षेत्र का निर्माण करती हैं।
भारत का डेक्कन ट्रैप इसका विश्व प्रसिद्ध उदाहरण है। यह विशाल बेसाल्टिक लावा प्रवाहों से निर्मित क्षेत्र है।
संयुक्त राज्य अमेरिका का कोलंबिया पठार भी बड़े बेसाल्टिक लावा प्रवाहों से संबंधित महत्वपूर्ण उदाहरण है।
📗 महत्वपूर्ण तथ्य
डेक्कन ट्रैप — ज्वालामुखीय उत्पत्ति — बेसाल्ट चट्टान — काली मिट्टी का संबंध परीक्षा में बहुत महत्वपूर्ण है।
अवशिष्ट या अपरदनात्मक पठार
दीर्घकालीन अपरदन से निर्मित भूभाग
लंबे समय तक नदियों, वायु और अन्य अपरदनकारी शक्तियों के कार्य से आसपास की अपेक्षाकृत कोमल चट्टानें कटती जाती हैं, जबकि कठोर चट्टानी भाग अपेक्षाकृत ऊँचे रह जाते हैं।
ऐसे बचे हुए या अत्यधिक अपरदित ऊँचे भूभागों को अवशिष्ट अथवा अपरदनात्मक पठार कहा जाता है।
इन पठारों की सतह प्रायः नदियों द्वारा काटी हुई तथा असमान होती है, इसलिए इन्हें कई बार विच्छेदित पठार के रूप में भी देखा जाता है।
भारत का छोटानागपुर पठार एक अत्यंत प्राचीन पठारी क्षेत्र है, जिसे लंबे अपरदन और विच्छेदन ने वर्तमान रूप दिया है।
संयुक्त राज्य अमेरिका का ओजार्क पठार भी लंबे अपरदन से प्रभावित पठारी क्षेत्र का उदाहरण है।
अंतर्पर्वतीय पठार
पर्वत श्रेणियों के बीच स्थित पठार
वे पठार जो ऊँची पर्वत श्रेणियों से घिरे होते हैं, अंतर्पर्वतीय पठार कहलाते हैं।
इनका निर्माण सामान्यतः बड़े पैमाने पर प्लेटों के टकराव, भू-पर्पटी के संपीडन तथा व्यापक उत्थान से संबंधित होता है।
तिब्बती पठार विश्व का सबसे प्रसिद्ध और सर्वाधिक ऊँचा विशाल पठार है। इसकी औसत ऊँचाई लगभग 4,500 मीटर के आसपास है।
तिब्बती पठार के दक्षिण में हिमालय तथा उत्तर में कुनलुन जैसी विशाल पर्वत श्रेणियाँ स्थित हैं।
🎯 परीक्षा बिंदु
विश्व का सबसे ऊँचा और सबसे विशाल उच्च पठार — तिब्बती पठार।
महाद्वीपीय पठार
महाद्वीप के विस्तृत आंतरिक भूभाग
महाद्वीप के विस्तृत आंतरिक भाग में स्थित और आसपास के क्षेत्रों की तुलना में ऊँचे विस्तृत भूभागों को सामान्यतः महाद्वीपीय पठार कहा जाता है।
इनकी उत्पत्ति अलग-अलग भूगर्भीय प्रक्रियाओं से हो सकती है, इसलिए महाद्वीपीय पठार शब्द मुख्यतः उनकी अवस्थिति को दर्शाता है।
अफ्रीका के विशाल पठारी भूभाग तथा ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी भाग के पठारी क्षेत्र इसके प्रमुख उदाहरणों में गिने जाते हैं।
तिब्बती पठार
विश्व का सर्वोच्च विशाल पठार
तिब्बती पठार एशिया में स्थित विश्व का सबसे ऊँचा विशाल पठार है और इसकी औसत ऊँचाई लगभग 4,500 मीटर है।
इसका मुख्य विस्तार चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र और छिंगहाई सहित आसपास के उच्च भूभागों में है।
इसके दक्षिणी किनारे पर हिमालय स्थित है, जिसके पार भारत, नेपाल और भूटान के क्षेत्र आते हैं। इसलिए इसे सरल रूप में सीधे “चीन, भारत और नेपाल में फैला पठार” कहना पूरी तरह शुद्ध नहीं है; इसका मुख्य पठारी विस्तार चीन में है।
तिब्बती पठार को अपनी अत्यधिक ऊँचाई के कारण प्रायः विश्व की छत कहा जाता है।
यह एशिया की अनेक बड़ी नदियों के उद्गम क्षेत्रों के निकट स्थित है और एशियाई जलवायु तथा मानसून व्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है।
डेक्कन पठार
भारत का विशाल प्रायद्वीपीय पठार
डेक्कन पठार भारत के प्रायद्वीपीय भाग का एक विशाल पठारी क्षेत्र है।
इसके बड़े उत्तर-पश्चिमी भाग में व्यापक बेसाल्टिक लावा प्रवाह पाए जाते हैं, जिन्हें डेक्कन ट्रैप कहा जाता है।
डेक्कन ट्रैप का निर्माण विशाल ज्वालामुखीय लावा प्रवाहों से हुआ था और यहाँ सीढ़ीनुमा बेसाल्टिक भू-आकृतियाँ पाई जाती हैं।
बेसाल्टिक चट्टानों के अपक्षय से इस क्षेत्र में कई स्थानों पर उपजाऊ काली मिट्टी विकसित हुई है, जो विशेष रूप से कपास की खेती के लिए प्रसिद्ध है।
कोलोराडो पठार
संयुक्त राज्य अमेरिका
कोलोराडो पठार संयुक्त राज्य अमेरिका के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित है।
इसका विस्तार मुख्यतः एरिजोना, यूटा, कोलोराडो और न्यू मेक्सिको के क्षेत्रों में है।
इस पठार का विशाल भाग भूगर्भीय उत्थान के बाद नदियों द्वारा अत्यधिक काटा गया है।
विश्व प्रसिद्ध ग्रैंड कैन्यन इसी कोलोराडो पठार के क्षेत्र में कोलोराडो नदी द्वारा निर्मित विशाल कंदरा है।
पैटागोनियन पठार
अर्जेंटीना का शुष्क पठारी क्षेत्र
पैटागोनियन पठार दक्षिण अमेरिका के अर्जेंटीना में स्थित है।
यह सामान्यतः शुष्क, ठंडा और तेज हवाओं वाला क्षेत्र है।
इसके पश्चिम में एंडीज पर्वत स्थित है और पूर्व की ओर इसका भूभाग अटलांटिक महासागर की दिशा में क्रमशः नीचे होता जाता है।
कम वर्षा और कठोर जलवायु के कारण यहाँ वनस्पति अपेक्षाकृत विरल पाई जाती है।
मध्य साइबेरियाई पठार
रूस का विशाल ठंडा पठारी प्रदेश
रूस के साइबेरिया क्षेत्र में स्थित प्रमुख पठार को मध्य साइबेरियाई पठार कहा जाता है।
कई सामान्य सूचियों में “साइबेरियाई पठार” और “मध्य साइबेरियाई पठार” अलग-अलग लिखे मिलते हैं, लेकिन परीक्षा में अधिक सटीक प्रमुख भौगोलिक नाम मध्य साइबेरियाई पठार है।
यह अत्यंत ठंडी महाद्वीपीय जलवायु वाला विस्तृत क्षेत्र है और इसके बड़े भाग में टैगा या शंकुधारी वन पाए जाते हैं।
इस क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना में विशाल बेसाल्टिक लावा क्षेत्र भी महत्वपूर्ण हैं।
📗 भ्रम से बचें
“साइबेरियाई पठार” और “मध्य साइबेरियाई पठार” को दो पूरी तरह अलग प्रमुख विश्व पठारों की तरह याद करने की आवश्यकता नहीं है।
ईरानी पठार
दक्षिण-पश्चिम एशिया
ईरानी पठार दक्षिण-पश्चिम एशिया का एक विस्तृत उच्च भूभाग है।
इसका मुख्य विस्तार ईरान में है और इसका व्यापक भौगोलिक क्षेत्र अफगानिस्तान तथा पाकिस्तान के कुछ भागों से भी संबंधित माना जाता है।
यह कई पर्वत श्रेणियों, मरुस्थलीय बेसिनों और ऊँचे शुष्क क्षेत्रों से बना जटिल भूभाग है।
यहाँ की जलवायु सामान्यतः शुष्क से अर्ध-शुष्क है।
अफ्रीकी पठार
पठारों का महाद्वीप
अफ्रीका का बहुत बड़ा भाग ऊँचे पठारी धरातल से बना है। इसी कारण अफ्रीका को कई बार पठारी महाद्वीप कहा जाता है।
यह कोई एक अकेला पठार नहीं है, बल्कि अनेक उच्चभूमियों, बेसिनों और पठारी क्षेत्रों का व्यापक समूह है।
पूर्वी अफ्रीका में ऊँचे पठार, भ्रंश घाटियाँ और ज्वालामुखीय उच्चभूमियाँ विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
अफ्रीका की अनेक नदियाँ ऊँचे पठारी भागों से निकलती हैं, इसलिए कई स्थानों पर जलप्रपात और तीव्र ढाल वाली नदी घाटियाँ पाई जाती हैं।
कैनेडियन शील्ड
प्राचीन कठोर चट्टानों का क्षेत्र
कैनेडियन शील्ड कनाडा और आसपास के उत्तर अमेरिकी क्षेत्रों में फैला अत्यंत प्राचीन भूगर्भीय क्षेत्र है।
यह पृथ्वी की अत्यंत पुरानी आग्नेय और कायांतरित चट्टानों से निर्मित है।
इसे केवल सामान्य पठार मानने की तुलना में प्राचीन भू-ढाल या शील्ड क्षेत्र कहना अधिक सटीक है, हालांकि कई सामान्य भूगोल सूचियों में इसे पठारी उच्चभूमि के साथ शामिल किया जाता है।
यह क्षेत्र लौह अयस्क, निकल, ताँबा, सोना और अन्य खनिज संसाधनों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
हिमानी अपरदन के कारण इस क्षेत्र में बहुत बड़ी संख्या में झीलें भी पाई जाती हैं।
ब्राज़ीलियाई पठार
दक्षिण अमेरिका का विशाल उच्च भूभाग
ब्राज़ीलियाई पठार ब्राज़ील के पूर्वी, मध्य और दक्षिणी भागों में फैला विशाल उच्च भूभाग है।
यह अत्यंत प्राचीन चट्टानों से बना है और लंबे समय तक अपरदन से इसका वर्तमान स्वरूप विकसित हुआ है।
यह क्षेत्र लौह अयस्क तथा अन्य खनिजों की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
इसके अनेक भाग कृषि तथा पशुपालन के लिए भी उपयोग किए जाते हैं।
ब्राज़ील की कई महत्वपूर्ण नदियाँ और उनकी सहायक नदियाँ इसी उच्चभूमि से निकलती हैं।
पश्चिमी ऑस्ट्रेलियाई पठार
प्राचीन और शुष्क उच्चभूमि
पश्चिमी ऑस्ट्रेलियाई पठार ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी और मध्य भाग के विशाल प्राचीन भूभाग का हिस्सा है।
यह अत्यंत पुरानी कठोर चट्टानों से बना क्षेत्र है और लंबे समय से अपरदन के प्रभाव में रहा है।
इसके बड़े भाग में शुष्क तथा अति-शुष्क जलवायु पाई जाती है।
ग्रेट विक्टोरिया मरुस्थल, ग्रेट सैंडी मरुस्थल और गिब्सन मरुस्थल जैसे विशाल शुष्क क्षेत्र इसी व्यापक भूभाग से जुड़े हैं।
यह क्षेत्र लौह अयस्क, सोना, निकल तथा अन्य खनिजों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
इथियोपियाई पठार
पूर्वी अफ्रीका की उच्चभूमि
इथियोपियाई पठार पूर्वी अफ्रीका में इथियोपिया के बड़े भाग में फैली विशाल उच्चभूमि है।
यह व्यापक ज्वालामुखीय गतिविधियों और भू-पर्पटी के उत्थान से प्रभावित क्षेत्र है।
यह अफ्रीका की सबसे ऊँची और व्यापक उच्चभूमियों में से एक है।
इथियोपियाई पठार को गहरी नदी घाटियों ने अनेक भागों में काट दिया है।
नीली नील नदी का उद्गम इथियोपियाई उच्चभूमि में स्थित ताना झील से होता है।
🎯 परीक्षा सावधानी
इथियोपियाई पठार को सामान्य रूप से अफ्रीका की प्रमुख उच्चभूमियों में से एक कहना सुरक्षित है। “अफ्रीका का सबसे ऊँचा पठार” जैसी अति-निश्चित पंक्ति से बचना बेहतर है, क्योंकि अफ्रीका की उच्चभूमियों का वर्गीकरण और औसत ऊँचाई अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न है।
विश्व के प्रमुख पठार
स्थान और मुख्य विशेषता
| पठार या उच्चभूमि | स्थान | प्रमुख विशेषता |
|---|---|---|
| तिब्बती पठार | मुख्यतः चीन | विश्व का सर्वाधिक ऊँचा विशाल पठार; औसत ऊँचाई लगभग 4,500 मीटर |
| डेक्कन पठार | भारत | विशाल प्रायद्वीपीय पठार; डेक्कन ट्रैप क्षेत्र ज्वालामुखीय बेसाल्ट से निर्मित |
| कोलोराडो पठार | संयुक्त राज्य अमेरिका | ग्रैंड कैन्यन इसी क्षेत्र में स्थित |
| पैटागोनियन पठार | अर्जेंटीना | शुष्क, ठंडा और तेज हवाओं वाला क्षेत्र |
| मध्य साइबेरियाई पठार | रूस | ठंडा, विस्तृत तथा अनेक भागों में वनों से आच्छादित |
| ईरानी पठार | ईरान तथा आसपास का क्षेत्र | शुष्क, पर्वतीय और अंतर्देशीय उच्चभूमि |
| अफ्रीकी पठारी भूभाग | अफ्रीका | महाद्वीप का बहुत बड़ा भाग उच्च पठारी धरातल से बना |
| कैनेडियन शील्ड | कनाडा | अत्यंत प्राचीन चट्टानें और समृद्ध खनिज संसाधन |
| ब्राज़ीलियाई पठार | ब्राज़ील | खनिज और कृषि की दृष्टि से महत्वपूर्ण |
| पश्चिमी ऑस्ट्रेलियाई पठार | ऑस्ट्रेलिया | प्राचीन, शुष्क और खनिज-संपन्न क्षेत्र |
| इथियोपियाई पठार | इथियोपिया | पूर्वी अफ्रीका की अत्यंत ऊँची ज्वालामुखीय उच्चभूमि |
पठारों का आर्थिक महत्व
खनिज, कृषि और जलविद्युत
पठारी क्षेत्रों में प्राचीन आग्नेय और कायांतरित चट्टानों के व्यापक विस्तार के कारण अनेक महत्वपूर्ण खनिज पाए जाते हैं।
भारत का छोटानागपुर पठार कोयला, लौह अयस्क, अभ्रक, बॉक्साइट तथा अन्य खनिज संसाधनों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पठारों के किनारों पर नदियाँ तीव्र ढाल से नीचे उतरती हैं, इसलिए अनेक स्थानों पर जलप्रपात बनते हैं और जलविद्युत उत्पादन की संभावनाएँ बढ़ती हैं।
ज्वालामुखीय पठारों में बेसाल्ट के अपक्षय से उपजाऊ मिट्टी विकसित हो सकती है। डेक्कन क्षेत्र की काली मिट्टी इसका प्रमुख उदाहरण है।
कई पठारी क्षेत्रों में पशुपालन, वन संसाधन, पर्यटन और खनन भी महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधियाँ हैं।
महत्वपूर्ण अंतर
पर्वत, पठार और मैदान
| आधार | पर्वत | पठार | मैदान |
|---|---|---|---|
| ऊँचाई | अधिक | आसपास से ऊँचा | सामान्यतः कम ऊँचाई |
| ऊपरी सतह | नुकीली या शिखरयुक्त | विस्तृत और अपेक्षाकृत समतल | समतल या हल्की ढाल |
| ढाल | तीव्र | किनारों पर तीव्र हो सकती है | कम |
| खनिज | कई क्षेत्रों में उपलब्ध | अनेक पठार खनिज-संपन्न | मुख्यतः कृषि और निक्षेपित मिट्टी के लिए महत्वपूर्ण |
एक नज़र में याद रखें
महत्वपूर्ण जोड़ी
⚡ अंतिम पुनरावृत्ति बिंदु
पठार आसपास के भूभाग की तुलना में ऊँचा तथा विस्तृत और अपेक्षाकृत समतल शीर्ष वाला भू-आकार है।
पठार को उसकी मेजनुमा आकृति के कारण मेजनुमा भूभाग भी कहा जाता है।
पठारों का निर्माण भू-पर्पटी के उत्थान, भ्रंशन, विशाल लावा प्रवाह और लंबे अपरदन से हो सकता है।
संरचनात्मक या विवर्तनिक पठार आंतरिक भूगर्भीय हलचलों और उत्थान से संबंधित होते हैं।
ज्वालामुखीय पठार विशाल लावा प्रवाहों के जमने से बनते हैं।
डेक्कन ट्रैप भारत का प्रमुख विशाल बेसाल्टिक ज्वालामुखीय क्षेत्र है।
अवशिष्ट या अपरदनात्मक पठार लंबे अपरदन और भूभाग के विच्छेदन से विकसित होते हैं।
अंतर्पर्वतीय पठार पर्वत श्रेणियों के बीच स्थित होते हैं।
तिब्बती पठार विश्व का सबसे ऊँचा विशाल पठार है और इसकी औसत ऊँचाई लगभग 4,500 मीटर है।
तिब्बती पठार का मुख्य विस्तार चीन में है; भारत और नेपाल इसके दक्षिण में हिमालय के पार स्थित हैं।
कोलोराडो पठार संयुक्त राज्य अमेरिका में है और ग्रैंड कैन्यन इसी पठारी क्षेत्र में स्थित है।
पैटागोनियन पठार अर्जेंटीना में स्थित शुष्क और ठंडा क्षेत्र है।
मध्य साइबेरियाई पठार रूस में स्थित विशाल ठंडा पठारी क्षेत्र है।
ईरानी पठार मुख्यतः ईरान तथा आसपास के अफगानिस्तान और पाकिस्तान के क्षेत्रों से संबंधित है।
अफ्रीका के बहुत बड़े भाग में पठारी धरातल पाया जाता है, इसलिए इसे सामान्यतः पठारी महाद्वीप कहा जाता है।
कैनेडियन शील्ड अत्यंत प्राचीन चट्टानों से निर्मित और खनिज-संपन्न भूगर्भीय क्षेत्र है।
ब्राज़ीलियाई पठार खनिज और कृषि की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
पश्चिमी ऑस्ट्रेलियाई पठार प्राचीन, शुष्क और खनिज-संपन्न क्षेत्र है।
इथियोपियाई पठार पूर्वी अफ्रीका की प्रमुख ऊँची ज्वालामुखीय उच्चभूमि है।
पठारी क्षेत्रों में खनिज, जलविद्युत, कृषि, वन, पशुपालन और पर्यटन की महत्वपूर्ण संभावनाएँ पाई जाती हैं।