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बहमनी राज्य (1347–1527 ई.)
BAHMANI SULTANATE

बहमनी राज्य (1347–1527 ई.)

अलाउद्दीन बहमन शाह से महमूद गवाँ तक — दक्कन की प्रमुख मध्यकालीन शक्ति

बहमनी राज्य का परिचय

बहमनी राज्य दक्कन में स्थापित एक महत्वपूर्ण स्वतंत्र सल्तनत थी। इसकी स्थापना 1347 ई. में मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में हसन गंगू ने की। सिंहासन पर बैठने के बाद उसने अलाउद्दीन हसन बहमन शाह की उपाधि धारण की। इसकी पहली राजधानी गुलबर्गा थी, जिसे बहमनी शासकों ने अहसनाबाद भी कहा। बाद में अहमद शाह प्रथम वली ने राजधानी गुलबर्गा से बीदर स्थानांतरित की। बहमनी राज्य और विजयनगर साम्राज्य के बीच दक्कन में राजनीतिक प्रभुत्व तथा रायचूर दोआब पर नियंत्रण के लिए लंबे समय तक संघर्ष हुआ।

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बहमनी राज्य की स्थापना

Hasan Gangu — 1347 CE

1347 ई. में मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल के दौरान दक्कन में विद्रोही अमीरों ने दिल्ली सल्तनत से स्वतंत्रता स्थापित की। इसी राजनीतिक परिस्थिति में हसन गंगू बहमनी राज्य का संस्थापक बना।

शासक बनने के बाद उसने अलाउद्दीन हसन बहमन शाह की उपाधि धारण की। इसलिए परीक्षा में हसन गंगू = अलाउद्दीन हसन बहमन शाह = बहमनी राज्य का संस्थापक याद रखना महत्वपूर्ण है।

🎯 Exam Point

1347 ई. — हसन गंगू — अलाउद्दीन हसन बहमन शाह — बहमनी राज्य की स्थापना।

02

हसन गंगू नाम से जुड़ी परंपरा

Hasan Gangu / Bahman Shah

हसन बहमन शाह को सामान्य इतिहास और परीक्षा पुस्तकों में हसन गंगू कहा जाता है। उसके “गंगू” नाम के संबंध में एक प्रसिद्ध कथा है कि वह कभी गंगू नामक ब्राह्मण से जुड़ा या उसके यहाँ कार्यरत था।

इस कथा की ऐतिहासिक निश्चितता पर विद्वानों में मतभेद है। इसलिए परीक्षा में संस्थापक का नाम हसन गंगू / अलाउद्दीन हसन बहमन शाह याद रखना पर्याप्त है; गंगू ब्राह्मण वाली कथा को निश्चित ऐतिहासिक तथ्य नहीं मानना चाहिए।

03

प्रथम राजधानी — गुलबर्गा

Gulbarga / Ahsanabad

बहमनी राज्य की प्रारंभिक राजधानी गुलबर्गा थी। बहमनी काल में इसे अहसनाबाद नाम से भी जाना गया। आज गुलबर्गा को कलाबुरगी कहा जाता है और यह कर्नाटक में स्थित है।

गुलबर्गा दक्कन में बहमनी सत्ता का प्रमुख राजनीतिक और सैन्य केंद्र बना। यहाँ का गुलबर्गा किला और जामा मस्जिद बहमनी स्थापत्य से संबंधित महत्वपूर्ण स्मारक हैं।

📗 याद रखें

बहमनी राज्य की पहली राजधानी — गुलबर्गा (अहसनाबाद)।

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विजयनगर-बहमनी संघर्ष

Conflict in the Deccan

बहमनी राज्य और विजयनगर साम्राज्य दक्षिण भारत की दो प्रमुख प्रतिद्वंद्वी शक्तियाँ थीं। दोनों के बीच लंबे समय तक राजनीतिक और सैन्य संघर्ष चलता रहा।

संघर्ष का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र रायचूर दोआब था, जो कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों के बीच का उपजाऊ क्षेत्र था। इसके अतिरिक्त कृष्णा-गोदावरी क्षेत्र और पश्चिमी तट के व्यापारिक मार्गों तथा बंदरगाहों पर नियंत्रण भी प्रतिस्पर्धा के महत्वपूर्ण कारण थे।

🎯 High Yield

रायचूर दोआब = कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों के बीच का क्षेत्र।

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अहमद शाह प्रथम वली

Capital Shift to Bidar

अहमद शाह प्रथम वली बहमनी राज्य का महत्वपूर्ण शासक था। उसके शासनकाल में राजधानी गुलबर्गा से बीदर स्थानांतरित की गई। यह परिवर्तन लगभग 1420 के दशक में हुआ और सामान्यतः 1424 ई. से जोड़ा जाता है।

आपके मूल नोट में “शिहाबुद्दीन अहमद प्रथम” लिखा था। इस संदर्भ में सही और प्रचलित नाम अहमद शाह प्रथम वली है।

बीदर बाद में बहमनी राजनीतिक जीवन, फारसी-दक्कनी संस्कृति, शिक्षा और स्थापत्य का महत्वपूर्ण केंद्र बना।

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बहमनी प्रशासन

Provincial Administration

बहमनी राज्य को प्रशासनिक सुविधा के लिए प्रांतों में बाँटा गया था, जिन्हें सामान्यतः तरफ कहा जाता था। इनके प्रशासक तरफदार कहलाते थे।

प्रारंभिक बहमनी प्रशासन में गुलबर्गा, दौलताबाद, बीदर और बरार जैसे प्रमुख प्रांतीय क्षेत्र महत्वपूर्ण थे। बाद में राज्य के विस्तार के साथ प्रशासनिक इकाइयों में परिवर्तन हुए।

प्रांतीय अधिकारियों की बढ़ती शक्ति को नियंत्रित करना बहमनी सुल्तानों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी रही। महमूद गवाँ ने बाद में इसी समस्या को नियंत्रित करने के लिए प्रशासनिक सुधार किए।

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दक्कनी और अफाकी संघर्ष

Deccanis vs Afaqis

बहमनी दरबार में अमीरों के दो प्रभावशाली समूह विकसित हुए। लंबे समय से दक्कन में बसे मुस्लिम सरदारों को सामान्यतः दक्कनी कहा जाता था, जबकि ईरान, इराक और मध्य एशिया जैसे क्षेत्रों से आए नए विदेशी अमीरों को अफाकी या परदेशी कहा जाता था।

इन दोनों समूहों के बीच पद, प्रभाव और संसाधनों को लेकर लगातार प्रतिस्पर्धा रही। यह गुटबाजी बहमनी राज्य की राजनीतिक अस्थिरता और अंततः उसके विघटन के महत्वपूर्ण कारणों में से एक बनी।

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महमूद गवाँ

Mahmud Gawan

महमूद गवाँ बहमनी राज्य का सबसे प्रसिद्ध मंत्री और प्रशासक था। वह मूलतः फारस से आया था और अपनी योग्यता के कारण बहमनी दरबार में उच्च पद तक पहुँचा। वह विशेष रूप से मुहम्मद शाह तृतीय के शासनकाल में शक्तिशाली वजीर रहा।

उसने राज्य की केंद्रीय सत्ता मजबूत करने, प्रांतीय अधिकारियों पर नियंत्रण स्थापित करने, भूमि-राजस्व व्यवस्था सुधारने और सेना तथा प्रशासन को अधिक संगठित करने का प्रयास किया।

उसने बड़े प्रांतों को विभाजित कर प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत किया और तरफदारों की शक्ति सीमित करने की कोशिश की। उसके सुधार बहमनी प्रशासन के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

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महमूद गवाँ का मदरसा

Mahmud Gawan Madrasa — Bidar

महमूद गवाँ ने बीदर में एक प्रसिद्ध मदरसा बनवाया, जो मध्यकालीन दक्कन के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में था। इसे आज महमूद गवाँ मदरसा के नाम से जाना जाता है।

यह फारसी स्थापत्य प्रभाव, विशाल परिसर और शिक्षा के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध था। यहाँ धार्मिक विषयों के साथ अन्य ज्ञान-विषयों के अध्ययन की भी व्यवस्था थी और एक महत्वपूर्ण पुस्तकालय से इसका संबंध बताया जाता है।

📗 Exam Fact

महमूद गवाँ मदरसा — बीदर।

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महमूद गवाँ की हत्या

Execution — 1481 CE

दरबारी गुटबाजी में महमूद गवाँ के विरोधियों ने उसके विरुद्ध षड्यंत्र किया और एक जाली पत्र के आधार पर उसे राजद्रोह का दोषी सिद्ध करने का प्रयास किया।

1481 ई. में सुल्तान मुहम्मद शाह तृतीय के आदेश पर महमूद गवाँ को मृत्युदंड दिया गया। बाद में सुल्तान को अपनी भूल का एहसास हुआ बताया जाता है।

महमूद गवाँ की मृत्यु से बहमनी राज्य को गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक क्षति पहुँची तथा दक्कनी-अफाकी गुटबाजी और अधिक बढ़ गई।

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बहमनी राज्य का विघटन

Decline of the Sultanate

15वीं शताब्दी के अंत तक बहमनी राज्य कमजोर होने लगा। कमजोर सुल्तान, शक्तिशाली प्रांतीय सरदार, दक्कनी-अफाकी संघर्ष और केंद्रीय प्रशासन की कमजोरी इसके प्रमुख कारण थे।

महमूद गवाँ की मृत्यु के बाद केंद्रीय सत्ता का पतन और तेज हुआ। शक्तिशाली प्रांतीय अधिकारियों ने धीरे-धीरे स्वतंत्र राज्यों की स्थापना कर ली और बहमनी राज्य नाममात्र की सत्ता बनकर रह गया।

बहमनी राजवंश का अंतिम चरण 1527 ई. के आसपास समाप्त माना जाता है, यद्यपि उसका वास्तविक राजनीतिक विघटन इससे पहले ही शुरू हो चुका था।

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पाँच दक्कनी सल्तनतें

Five Deccan Sultanates

बहमनी राज्य के विघटन से दक्कन में पाँच प्रमुख स्वतंत्र सल्तनतें उभरीं। इन्हें सामान्यतः दक्कन की पाँच सल्तनतें कहा जाता है।

राज्यराजवंशप्रमुख केंद्र
अहमदनगरनिजामशाहीअहमदनगर
बीजापुरआदिलशाहीबीजापुर
गोलकुंडाकुतुबशाहीगोलकुंडा/हैदराबाद क्षेत्र
बरारइमादशाहीएलिचपुर
बीदरबरीदशाहीबीदर

🎯 Trick

अहमदनगर–निजाम | बीजापुर–आदिल | गोलकुंडा–कुतुब | बरार–इमाद | बीदर–बरीद

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बहमनी स्थापत्य और संस्कृति

Architecture & Culture

बहमनी स्थापत्य में फारसी, मध्य एशियाई और दक्कनी तत्वों का मिश्रण दिखाई देता है। गुलबर्गा जामा मस्जिद, बीदर किला और महमूद गवाँ मदरसा इससे जुड़े महत्वपूर्ण स्मारक हैं।

बहमनी दरबार ने फारसी भाषा और संस्कृति को संरक्षण दिया, लेकिन स्थानीय दक्कनी परंपराओं के संपर्क से एक विशिष्ट दक्कनी सांस्कृतिक वातावरण भी विकसित हुआ। यही सांस्कृतिक मिश्रण आगे दक्कनी सल्तनतों में और विकसित हुआ।

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Quick Revision

SSC / Railway Rapid Recall

⚡ त्वरित रिविजन

1347—हसन गंगूअलाउद्दीन बहमन शाहगुलबर्गारायचूर दोआबअहमद शाह वलीबीदरमहमूद गवाँ1481—मृत्युपाँच दक्कनी राज्य

⚡ Final Revision Points

1347 ई. में मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में हसन गंगू ने बहमनी राज्य की स्थापना की और अलाउद्दीन हसन बहमन शाह की उपाधि धारण की।

बहमनी राज्य की पहली राजधानी गुलबर्गा (अहसनाबाद) थी।

अहमद शाह प्रथम वली ने राजधानी गुलबर्गा से बीदर स्थानांतरित की। “शिहाबुद्दीन अहमद प्रथम” वाला नाम इस संदर्भ में सही नहीं है।

विजयनगर और बहमनी राज्य के संघर्ष का प्रमुख क्षेत्र रायचूर दोआब था, जो कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों के बीच स्थित है।

बहमनी प्रशासन में प्रांत तरफ और उनके अधिकारी तरफदार कहलाते थे।

बहमनी दरबार में दक्कनी और अफाकी अमीरों की गुटबाजी राज्य की कमजोरी का महत्वपूर्ण कारण बनी।

महमूद गवाँ बहमनी राज्य का प्रसिद्ध वजीर था। उसने प्रशासनिक सुधार किए और बीदर में प्रसिद्ध महमूद गवाँ मदरसा बनवाया।

1481 ई. में षड्यंत्र के कारण मुहम्मद शाह तृतीय के आदेश पर महमूद गवाँ को मृत्युदंड दिया गया।

बहमनी राज्य के विघटन से पाँच दक्कनी सल्तनतें बनीं—अहमदनगर, बीजापुर, गोलकुंडा, बरार और बीदर

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