बहुउद्देशीय नदी घाटी एवं जलविद्युत परियोजनाएँ
बाँध, नदियाँ, संयुक्त परियोजनाएँ, जलविद्युत केंद्र एवं परीक्षा उपयोगी तथ्य
बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएँ
ऐसी नदी घाटी परियोजनाएँ जिनका उपयोग एक साथ सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण, पेयजल, जल भंडारण, मत्स्य पालन, नौवहन अथवा क्षेत्रीय विकास जैसे अनेक उद्देश्यों के लिए किया जाता है, बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएँ कहलाती हैं।
स्वतंत्रता के बाद भारत में बड़े बाँध और नदी घाटी परियोजनाएँ आर्थिक विकास तथा कृषि विस्तार के महत्वपूर्ण साधन बने। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने बड़े बाँधों और विकास परियोजनाओं को “आधुनिक भारत के मंदिर” के रूप में प्रसिद्ध रूप से वर्णित किया था।
भाखड़ा–नांगल परियोजना
सतलुज नदी की प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजना
भाखड़ा–नांगल परियोजना उत्तर-पश्चिम भारत की सबसे प्रसिद्ध बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं में से एक है। इसका निर्माण सतलुज नदी पर किया गया है।
भाखड़ा बाँध हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर क्षेत्र में सतलुज नदी पर स्थित है। बाँध के पीछे निर्मित विशाल जलाशय को गोविंद सागर कहा जाता है।
इस परियोजना से सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन और जल आपूर्ति में विशेष लाभ हुआ है। वर्तमान भाखड़ा–ब्यास व्यवस्था से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान प्रमुख रूप से लाभान्वित होते हैं।
ऐतिहासिक रूप से भाखड़ा–नांगल परियोजना के निर्माण में तत्कालीन पंजाब और राजस्थान की भागीदारी थी। 1966 में पंजाब के पुनर्गठन के बाद हरियाणा भी इसके लाभ एवं प्रबंधन व्यवस्था का महत्वपूर्ण भाग बना।
🎯 परीक्षा तथ्य
भाखड़ा–नांगल — सतलुज नदी — गोविंद सागर जलाशय — पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान को प्रमुख लाभ।
सरदार सरोवर परियोजना
नर्मदा घाटी की प्रमुख परियोजना
सरदार सरोवर बाँध नर्मदा नदी पर गुजरात में स्थित विशाल बहुउद्देशीय परियोजना है। इसका उद्देश्य सिंचाई, पेयजल और जलविद्युत उत्पादन सहित विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करना है।
नर्मदा जल विवाद से संबंधित व्यवस्था में गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान चारों राज्यों के हित जुड़े हुए हैं। सरदार सरोवर परियोजना से विशेष रूप से गुजरात और राजस्थान को सिंचाई एवं पेयजल तथा परियोजना से जुड़े राज्यों को विद्युत लाभ प्राप्त होता है।
नर्मदा घाटी परियोजनाओं में सरदार सरोवर के अलावा इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएँ भी शामिल हैं।
ओंकारेश्वर परियोजना
नर्मदा नदी पर जलविद्युत एवं सिंचाई परियोजना
ओंकारेश्वर परियोजना मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी पर स्थित है। यह नर्मदा घाटी विकास की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है।
ओंकारेश्वर जलविद्युत स्टेशन की स्थापित क्षमता 520 मेगावाट है। परियोजना सिंचाई तथा विद्युत उत्पादन दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।
📗 याद रखें
ओंकारेश्वर — नर्मदा नदी — मध्य प्रदेश।
दामोदर घाटी परियोजना
स्वतंत्र भारत की प्रारंभिक बहुउद्देशीय घाटी परियोजना
दामोदर घाटी परियोजना झारखंड और पश्चिम बंगाल में फैली दामोदर नदी घाटी के विकास से संबंधित है। दामोदर नदी में आने वाली विनाशकारी बाढ़ों को नियंत्रित करना इसकी स्थापना के प्रमुख उद्देश्यों में था।
दामोदर घाटी निगम की स्थापना संसद के अधिनियम द्वारा 1948 में की गई। इसका कार्यक्षेत्र वर्तमान झारखंड और पश्चिम बंगाल में फैला है।
इस परियोजना का स्वरूप अमेरिका की टेनेसी घाटी प्राधिकरण योजना से प्रेरित माना जाता है। इसका उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, विद्युत उत्पादन तथा घाटी क्षेत्र का समन्वित विकास करना था।
दामोदर घाटी के प्रमुख बाँध
नदी और बाँध का सही मिलान
| बाँध | नदी | राज्य |
|---|---|---|
| तिलैया | बराकर | झारखंड |
| मैथन | बराकर | झारखंड |
| पंचेत | दामोदर | झारखंड–पश्चिम बंगाल सीमा क्षेत्र |
| कोनार | कोनार | झारखंड |
⚠️ महत्वपूर्ण अंतर
तिलैया और मैथन = बराकर नदी, लेकिन पंचेत = दामोदर नदी और कोनार बाँध = कोनार नदी। इन्हें सभी को बराकर नदी पर नहीं मानना चाहिए।
हीराकुंड बाँध
महानदी की प्रमुख परियोजना
हीराकुंड बाँध ओडिशा में महानदी पर संबलपुर के निकट स्थित है। यह स्वतंत्रता के बाद विकसित भारत की सबसे महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय परियोजनाओं में से एक है।
परियोजना का उपयोग मुख्यतः बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन के लिए किया जाता है। महानदी की निचली घाटी में बाढ़ नियंत्रण में इसका विशेष महत्व है।
🎯 सीधा प्रश्न
हीराकुंड बाँध — महानदी — ओडिशा।
भारत में जलविद्युत का प्रारंभ
सिद्रापोंग और शिवसमुद्रम में अंतर
भारत में विद्युत उत्पादन के इतिहास में सिद्रापोंग जलविद्युत स्टेशन का विशेष स्थान है। इसकी स्थापना दार्जिलिंग, वर्तमान पश्चिम बंगाल में की गई थी।
सिद्रापोंग में 1897 में 130 किलोवाट क्षमता की पहली जलविद्युत इकाई चालू हुई। इसे भारत का प्रथम तथा सबसे पुराना जलविद्युत स्टेशन माना जाता है।
इसलिए सिद्रापोंग को असम में स्थित बताना गलत है। यह दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल में स्थित है।
शिवसमुद्रम जलविद्युत केंद्र कर्नाटक में कावेरी नदी पर स्थित एक अत्यंत पुराना और ऐतिहासिक जलविद्युत केंद्र है। इसकी शुरुआत बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में हुई और इसका उपयोग कोलार गोल्ड फील्ड्स सहित दूरस्थ क्षेत्रों तक बिजली पहुँचाने में किया गया।
इसलिए परीक्षा में अंतर याद रखें—भारत का पहला जलविद्युत स्टेशन = सिद्रापोंग, दार्जिलिंग; जबकि शिवसमुद्रम = भारत के अत्यंत प्राचीन एवं महत्वपूर्ण बड़े जलविद्युत केंद्रों में से एक।
🎯 सबसे महत्वपूर्ण तथ्य
सिद्रापोंग — दार्जिलिंग — पश्चिम बंगाल — 1897 — भारत का पहला जलविद्युत स्टेशन।
नागार्जुन सागर परियोजना
कृष्णा नदी की प्रमुख परियोजना
नागार्जुन सागर बाँध कृष्णा नदी पर स्थित भारत की प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजनाओं में से एक है।
यह परियोजना वर्तमान तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से संबंधित अंतर्राज्यीय परियोजना है तथा दोनों राज्यों के सिंचाई क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यह परियोजना सिंचाई के साथ जलविद्युत उत्पादन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
📗 याद रखें
नागार्जुन सागर — कृष्णा नदी — तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश।
पोलावरम परियोजना
गोदावरी की बहुउद्देशीय परियोजना
पोलावरम बहुउद्देशीय परियोजना आंध्र प्रदेश में गोदावरी नदी पर विकसित की जा रही विशाल सिंचाई परियोजना है।
परियोजना का उद्देश्य सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन, पेयजल तथा गोदावरी के जल को अन्य क्षेत्रों तक पहुँचाना है।
पोलावरम परियोजना के कारण होने वाले संभावित डूब क्षेत्र और पुनर्वास से संबंधित प्रश्नों में आंध्र प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के हित सीधे जुड़े रहे हैं। तेलंगाना का संबंध भी गोदावरी बेसिन, राज्य पुनर्गठन और परियोजना से जुड़े विभिन्न जल एवं प्रशासनिक मुद्दों के कारण चर्चा में रहा है।
इसे केवल “चार राज्यों की संयुक्त परियोजना” कहना उचित नहीं है; इसे आंध्र प्रदेश की राष्ट्रीय परियोजना तथा अंतर्राज्यीय प्रभाव वाली गोदावरी परियोजना के रूप में समझना अधिक सही है।
चंबल घाटी परियोजना
मध्य प्रदेश और राजस्थान की महत्वपूर्ण परियोजना
चंबल घाटी परियोजना चंबल नदी के जल संसाधनों के विकास के लिए बनाई गई बहुउद्देशीय परियोजना है और इसका संबंध मुख्यतः मध्य प्रदेश और राजस्थान से है।
गांधी सागर बाँध चंबल परियोजना का महत्वपूर्ण भाग है और मध्य प्रदेश में स्थित है।
राणा प्रताप सागर बाँध राजस्थान में चंबल नदी पर स्थित है। इसके नीचे जवाहर सागर बाँध भी राजस्थान में स्थित है।
चंबल परियोजना से सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन दोनों में लाभ मिलता है।
टिहरी बाँध
उत्तराखंड की भागीरथी परियोजना
टिहरी बाँध उत्तराखंड में भागीरथी नदी पर स्थित भारत की सबसे महत्वपूर्ण बाँध परियोजनाओं में से एक है।
यह परियोजना जलविद्युत उत्पादन, सिंचाई और पेयजल आपूर्ति के लिए विकसित की गई है।
भागीरथी देवप्रयाग में अलकनंदा से मिलकर गंगा का निर्माण करती है, इसलिए टिहरी परियोजना गंगा नदी तंत्र की अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना है।
🎯 परीक्षा तथ्य
टिहरी बाँध — भागीरथी नदी — उत्तराखंड।
तपोवन–विष्णुगाड परियोजना
उत्तराखंड की प्रमुख जलविद्युत परियोजना
तपोवन–विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना उत्तराखंड के चमोली क्षेत्र में स्थित महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजना है।
यह परियोजना धौलीगंगा नदी की जलविद्युत क्षमता के उपयोग से संबंधित है और अलकनंदा नदी तंत्र का भाग है।
नाम को “तपोवन–विष्णुगाड” के रूप में याद करना चाहिए; इसे “तपोवन और बिष्णुगढ़” दो अलग परियोजनाएँ समझना सही नहीं है।
पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना
भारत–नेपाल संयुक्त परियोजना
पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना भारत और नेपाल की संयुक्त प्रस्तावित परियोजना है। इसका विकास दोनों देशों की सीमा बनाने वाली महाकाली या काली नदी पर किया जाना है।
भारत की ओर परियोजना क्षेत्र उत्तराखंड के पिथौरागढ़ और चंपावत क्षेत्र के निकट है।
भारत और नेपाल के बीच महाकाली संधि फरवरी 1996 में हुई थी। इसी संधि के अंतर्गत पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना को दोनों देशों द्वारा संयुक्त रूप से विकसित करने पर सहमति हुई।
परियोजना का उद्देश्य जलविद्युत उत्पादन, सिंचाई तथा जल संसाधनों का संयुक्त उपयोग है।
🎯 सीधा मिलान
पंचेश्वर — भारत एवं नेपाल — महाकाली/काली नदी — महाकाली संधि 1996।
भारत–भूटान जलविद्युत सहयोग
हिमालयी जलविद्युत विकास
भारत और भूटान के बीच जलविद्युत क्षेत्र में लंबे समय से विशेष सहयोग रहा है। भारत ने भूटान की कई बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं के विकास में वित्तीय और तकनीकी सहयोग दिया है।
चुखा, ताला और मांगदेछू भारत–भूटान जलविद्युत सहयोग की प्रमुख परियोजनाएँ हैं। इन परियोजनाओं से उत्पन्न विद्युत का एक महत्वपूर्ण भाग भारत को निर्यात किया जाता रहा है।
जलढाका परियोजना को चुखा, ताला और मांगदेछू की तरह भूटान के भीतर निर्मित भारत–भूटान संयुक्त जलविद्युत परियोजनाओं की सूची में नहीं रखना चाहिए। जलढाका जलविद्युत परियोजना मुख्यतः पश्चिम बंगाल के जलढाका नदी क्षेत्र में स्थित भारतीय परियोजना है, यद्यपि इसका जलग्रहण क्षेत्र भूटान से आने वाली हिमालयी नदियों से संबंधित है।
⚠️ भ्रम से बचें
चुखा + ताला + मांगदेछू = भूटान में भारत के सहयोग से विकसित प्रमुख परियोजनाएँ।
जलढाका = पश्चिम बंगाल में स्थित भारतीय जलविद्युत परियोजना।
तेलुगू गंगा परियोजना
चेन्नई पेयजल एवं कृष्णा जल से संबंधित परियोजना
तेलुगू गंगा परियोजना का प्रमुख उद्देश्य कृष्णा नदी तंत्र से जल लेकर चेन्नई महानगर को पेयजल उपलब्ध कराना तथा आंध्र प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा प्रदान करना है।
चेन्नई के लिए कृष्णा जल उपलब्ध कराने की व्यवस्था में तत्कालीन कृष्णा बेसिन राज्यों महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश द्वारा अपने-अपने हिस्से से जल देने पर सहमति बनी थी तथा इसका लाभ तमिलनाडु को मिलता है।
इसलिए इसे केवल “तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक की तीन-राज्य संयुक्त परियोजना” कहना अधूरा है। परीक्षा में कृष्णा जल → चेन्नई पेयजल इसका सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है।
मयूराक्षी परियोजना
पश्चिम बंगाल की महत्वपूर्ण परियोजना
मयूराक्षी परियोजना मुख्यतः पश्चिम बंगाल में मयूराक्षी नदी के जल के उपयोग से संबंधित सिंचाई परियोजना है।
इस परियोजना से संबंधित महत्वपूर्ण बाँध मसानजोर बाँध है, जो वर्तमान झारखंड के दुमका क्षेत्र में मयूराक्षी नदी पर स्थित है।
इस परियोजना का मुख्य लाभ पश्चिम बंगाल के कृषि क्षेत्रों को सिंचाई प्रदान करना है।
कालपोंग जलविद्युत परियोजना
अंडमान एवं निकोबार की परियोजना
कालपोंग जलविद्युत परियोजना अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में स्थित है।
यह उत्तर अंडमान क्षेत्र की महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजना है और द्वीप समूह के विद्युत विकास में इसका विशेष महत्व है।
📗 याद रखें
कालपोंग — अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह।
अलमट्टी बाँध
कृष्णा नदी पर कर्नाटक की परियोजना
अलमट्टी बाँध कर्नाटक में कृष्णा नदी पर निर्मित है।
यह ऊपरी कृष्णा परियोजना का महत्वपूर्ण भाग है और सिंचाई तथा जलविद्युत उत्पादन में उपयोगी है।
🎯 मिलान
अलमट्टी — कृष्णा नदी — कर्नाटक।
किशनगंगा परियोजना
जम्मू-कश्मीर की जलविद्युत परियोजना
किशनगंगा जलविद्युत परियोजना जम्मू-कश्मीर में स्थित महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजना है। इसकी स्थापित क्षमता 330 मेगावाट है।
यह किशनगंगा नदी के जल का उपयोग करती है। किशनगंगा नदी पाकिस्तान में प्रवेश करने के बाद नीलम नदी के नाम से जानी जाती है और आगे झेलम में मिलती है।
यह परियोजना सिंधु जल संधि के संदर्भ में भी भारत और पाकिस्तान के बीच चर्चित रही है।
बगलिहार जलविद्युत परियोजना
चिनाब नदी की महत्वपूर्ण परियोजना
बगलिहार जलविद्युत परियोजना जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर स्थित है।
यह जम्मू-कश्मीर की प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं में शामिल है और सिंधु नदी प्रणाली के चिनाब बेसिन की जलविद्युत क्षमता का उपयोग करती है।
बगलिहार परियोजना भी भारत–पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि से संबंधित चर्चाओं में महत्वपूर्ण रही है।
🎯 याद रखें
बगलिहार — चिनाब — जम्मू-कश्मीर।
दुलहस्ती जलविद्युत स्टेशन
चिनाब नदी पर एनएचपीसी परियोजना
दुलहस्ती जलविद्युत स्टेशन जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ क्षेत्र में चिनाब नदी पर स्थित है।
इसकी स्थापित क्षमता 390 मेगावाट है और इसका संचालन एनएचपीसी द्वारा किया जाता है।
चिनाब नदी पर स्थित प्रमुख परियोजनाओं में दुलहस्ती और बगलिहार दोनों का नाम विशेष रूप से याद रखना चाहिए।
तीस्ता जलविद्युत परियोजनाएँ
सिक्किम और तीस्ता नदी
तीस्ता नदी सिक्किम की प्रमुख नदी है और इसके बेसिन में अनेक जलविद्युत परियोजनाएँ विकसित की गई हैं।
तीस्ता–V जलविद्युत स्टेशन सिक्किम में स्थित है और इसकी स्थापित क्षमता 510 मेगावाट है।
तीस्ता नदी पर विभिन्न चरणों में कई जलविद्युत परियोजनाएँ प्रस्तावित अथवा विकसित की गई हैं। इसलिए “तीस्ता जलविद्युत परियोजना” किसी एक बाँध का नाम नहीं बल्कि तीस्ता बेसिन की अनेक परियोजनाओं के लिए सामान्य संदर्भ भी हो सकता है।
सुयल और हिमाचल की जलविद्युत परियोजनाएँ
नामों में भ्रम से बचें
हिमाचल प्रदेश भारत के प्रमुख जलविद्युत उत्पादक राज्यों में से एक है और यहाँ सतलुज, ब्यास तथा रावी नदी तंत्र पर अनेक परियोजनाएँ स्थित हैं।
पुरानी सामान्य ज्ञान पुस्तकों में “सुइल नदी परियोजना” अथवा इससे मिलते-जुलते नाम मिल सकते हैं। परीक्षा में इसे बैरा–सियूल जलविद्युत परियोजना से भ्रमित नहीं करना चाहिए।
बैरा–सियूल जलविद्युत स्टेशन हिमाचल प्रदेश में स्थित एनएचपीसी की परियोजना है और इसकी स्थापित क्षमता 180 मेगावाट है।
कल्पसर परियोजना
गुजरात की प्रस्तावित विशाल जल परियोजना
कल्पसर परियोजना गुजरात की एक महत्वाकांक्षी प्रस्तावित जल संसाधन परियोजना है। इसका विचार खंभात की खाड़ी में बाँध या अवरोध बनाकर विशाल मीठे जल के भंडारण से संबंधित है।
इसका उद्देश्य जल संग्रह, सिंचाई, पेयजल तथा क्षेत्रीय संपर्क जैसी अनेक आवश्यकताओं को पूरा करना है।
यह सामान्य नदी बाँध परियोजना की तुलना में बहुत बड़े तटीय जल प्रबंधन विचार से संबंधित है।
मेजा बाँध
राजस्थान की कोठारी नदी परियोजना
मेजा बाँध राजस्थान के भीलवाड़ा क्षेत्र में कोठारी नदी पर स्थित है।
कोठारी नदी बनास नदी की सहायक नदी है। मेजा जलाशय का उपयोग मुख्यतः क्षेत्रीय सिंचाई और जल आपूर्ति के लिए किया जाता है।
तुंगभद्रा परियोजना
कर्नाटक–आंध्र प्रदेश अंतर्राज्यीय परियोजना
तुंगभद्रा परियोजना कृष्णा नदी की प्रमुख सहायक तुंगभद्रा नदी पर विकसित महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय परियोजना है।
तुंगभद्रा बाँध कर्नाटक में होसपेट के निकट स्थित है। परियोजना के लाभ और जल प्रबंधन का संबंध कर्नाटक तथा आंध्र प्रदेश दोनों से है।
इस परियोजना का उपयोग सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन तथा क्षेत्रीय जल प्रबंधन के लिए किया जाता है।
इसे “मल्लपुरम के निकट” स्थित बताना सही नहीं है। बाँध होसपेट क्षेत्र में स्थित है।
इसे निर्विवाद रूप से “दक्षिण भारत की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना” कहना भी सुरक्षित नहीं है। इसे दक्षिण भारत की प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजनाओं में से एक कहना अधिक सही है।
🎯 सही मिलान
तुंगभद्रा बाँध — तुंगभद्रा नदी — कर्नाटक में होसपेट के निकट — कर्नाटक एवं आंध्र प्रदेश से संबंधित अंतर्राज्यीय परियोजना।
कावेरी जल विवाद
चार राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेश से संबंधित विवाद
कावेरी नदी जल बँटवारा विवाद दक्षिण भारत के सबसे महत्वपूर्ण अंतर्राज्यीय नदी जल विवादों में से एक है।
कावेरी के जल वितरण में कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी चारों पक्षों के हित जुड़े हुए हैं।
कावेरी का उद्गम कर्नाटक के पश्चिमी घाट में तलाकावेरी से होता है और यह तमिलनाडु से होकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के निर्णय और उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के आधार पर राज्यों के बीच जल आवंटन की व्यवस्था निर्धारित की गई है।
प्रमुख परियोजनाएँ और नदियाँ
एक नज़र में नदी–परियोजना मिलान
| परियोजना / बाँध | नदी | मुख्य राज्य / क्षेत्र |
|---|---|---|
| भाखड़ा–नांगल | सतलुज | हिमाचल प्रदेश / उत्तर-पश्चिम भारत |
| सरदार सरोवर | नर्मदा | गुजरात |
| ओंकारेश्वर | नर्मदा | मध्य प्रदेश |
| हीराकुंड | महानदी | ओडिशा |
| नागार्जुन सागर | कृष्णा | तेलंगाना–आंध्र प्रदेश |
| पोलावरम | गोदावरी | आंध्र प्रदेश |
| गांधी सागर | चंबल | मध्य प्रदेश |
| जवाहर सागर | चंबल | राजस्थान |
| टिहरी | भागीरथी | उत्तराखंड |
| तिलैया | बराकर | झारखंड |
| मैथन | बराकर | झारखंड |
| पंचेत | दामोदर | झारखंड–पश्चिम बंगाल क्षेत्र |
| अलमट्टी | कृष्णा | कर्नाटक |
| बगलिहार | चिनाब | जम्मू-कश्मीर |
| दुलहस्ती | चिनाब | जम्मू-कश्मीर |
| मेजा | कोठारी | राजस्थान |
| तीस्ता–V | तीस्ता | सिक्किम |
| तुंगभद्रा बाँध | तुंगभद्रा | कर्नाटक |
| पंचेश्वर | महाकाली/काली | भारत–नेपाल सीमा |
प्रमुख संयुक्त एवं अंतर्राज्यीय परियोजनाएँ
किन राज्यों या देशों से संबंध है
| परियोजना / विषय | संबंधित राज्य / देश | मुख्य तथ्य |
|---|---|---|
| भाखड़ा–ब्यास व्यवस्था | पंजाब, हरियाणा, राजस्थान | सतलुज–ब्यास जल एवं विद्युत लाभ |
| सरदार सरोवर | गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान | नर्मदा घाटी जल-वितरण एवं विद्युत लाभ |
| दामोदर घाटी | झारखंड, पश्चिम बंगाल तथा केंद्र | दामोदर घाटी निगम |
| नागार्जुन सागर | तेलंगाना, आंध्र प्रदेश | कृष्णा नदी |
| तुंगभद्रा परियोजना | कर्नाटक, आंध्र प्रदेश | तुंगभद्रा नदी |
| पंचेश्वर | भारत, नेपाल | महाकाली नदी |
| कावेरी जल बँटवारा | कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी | अंतर्राज्यीय जल विवाद |
| चुखा, ताला, मांगदेछू | भारत–भूटान सहयोग | भूटान की जलविद्युत परियोजनाएँ |
परीक्षा में भ्रमित करने वाले तथ्य
सही तथ्य एक साथ याद करें
| भ्रमित करने वाला कथन | सही तथ्य |
|---|---|
| भारत का पहला जलविद्युत स्टेशन शिवसमुद्रम है | भारत का पहला जलविद्युत स्टेशन सिद्रापोंग, दार्जिलिंग है; यह 1897 में चालू हुआ। |
| सिद्रापोंग असम में है | सिद्रापोंग दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल में है। |
| तिलैया, मैथन और पंचेत सभी बराकर नदी पर हैं | तिलैया व मैथन = बराकर; पंचेत = दामोदर। |
| कोनार बाँध बराकर नदी पर है | कोनार बाँध कोनार नदी पर है। |
| जलढाका भूटान की भारत-सहयोगी परियोजना है | चुखा, ताला और मांगदेछू भूटान की प्रमुख भारत-सहयोगी परियोजनाएँ हैं; जलढाका पश्चिम बंगाल में है। |
| तुंगभद्रा बाँध मल्लपुरम के पास है | तुंगभद्रा बाँध कर्नाटक में होसपेट के निकट है। |
| तुंगभद्रा निश्चित रूप से दक्षिण भारत की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय परियोजना है | यह दक्षिण भारत की प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजनाओं में से एक है। |
| तपोवन और विष्णुगढ़ दो अलग उत्तराखंड परियोजनाएँ हैं | प्रमुख परियोजना का नाम तपोवन–विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना है। |
| पोलावरम चार राज्यों की संयुक्त परियोजना है | यह आंध्र प्रदेश में गोदावरी पर राष्ट्रीय परियोजना है, जिसके अंतर्राज्यीय प्रभाव और विवाद अन्य राज्यों से जुड़े हैं। |
| तेलुगू गंगा केवल तीन राज्यों की संयुक्त परियोजना है | चेन्नई के लिए कृष्णा जल उपलब्ध कराने में महाराष्ट्र, कर्नाटक और तत्कालीन आंध्र प्रदेश के जल हिस्से तथा तमिलनाडु का लाभ जुड़ा है। |
त्वरित रिविजन
एक बार में प्रमुख परियोजनाएँ याद करें
⚡ नदी–परियोजना क्रम
⚡ अंतिम रिविजन बिंदु
भाखड़ा–नांगल परियोजना — सतलुज नदी; गोविंद सागर जलाशय; पंजाब, हरियाणा और राजस्थान प्रमुख लाभार्थी।
सरदार सरोवर — नर्मदा नदी — गुजरात; गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के हित संबंधित।
ओंकारेश्वर — नर्मदा नदी — मध्य प्रदेश।
दामोदर घाटी निगम — स्थापना 1948 — झारखंड एवं पश्चिम बंगाल क्षेत्र।
तिलैया और मैथन — बराकर नदी; पंचेत — दामोदर नदी; कोनार — कोनार नदी।
हीराकुंड — महानदी — ओडिशा।
भारत का पहला जलविद्युत स्टेशन — सिद्रापोंग, दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल — 1897।
शिवसमुद्रम — कर्नाटक — कावेरी नदी — भारत के अत्यंत पुराने जलविद्युत केंद्रों में से एक।
नागार्जुन सागर — कृष्णा नदी — तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश।
पोलावरम — गोदावरी नदी — आंध्र प्रदेश की राष्ट्रीय परियोजना; ओडिशा और छत्तीसगढ़ सहित अंतर्राज्यीय प्रभाव।
गांधी सागर, राणा प्रताप सागर और जवाहर सागर — चंबल नदी परियोजना से संबंधित।
टिहरी बाँध — भागीरथी नदी — उत्तराखंड।
तपोवन–विष्णुगाड — उत्तराखंड — धौलीगंगा नदी तंत्र।
पंचेश्वर — भारत–नेपाल संयुक्त प्रस्तावित परियोजना — महाकाली/काली नदी।
महाकाली संधि — भारत और नेपाल — 1996।
चुखा, ताला और मांगदेछू — भूटान में भारत के सहयोग से विकसित प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएँ।
जलढाका — पश्चिम बंगाल की जलविद्युत परियोजना; इसे भूटान के भीतर स्थित परियोजना न मानें।
तेलुगू गंगा — कृष्णा जल को चेन्नई तक पहुँचाने से संबंधित महत्वपूर्ण परियोजना।
मयूराक्षी परियोजना — पश्चिम बंगाल को प्रमुख सिंचाई लाभ; मसानजोर बाँध वर्तमान झारखंड में मयूराक्षी नदी पर है।
कालपोंग जलविद्युत परियोजना — अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह।
अलमट्टी बाँध — कृष्णा नदी — कर्नाटक।
किशनगंगा परियोजना — जम्मू-कश्मीर — किशनगंगा नदी।
मेजा बाँध — कोठारी नदी — राजस्थान।
बगलिहार — चिनाब नदी — जम्मू-कश्मीर।
बैरा–सियूल — हिमाचल प्रदेश की प्रमुख जलविद्युत परियोजना।
कल्पसर परियोजना — गुजरात — खंभात की खाड़ी से संबंधित प्रस्तावित विशाल जल परियोजना।
तीस्ता–V — तीस्ता नदी — सिक्किम — 510 मेगावाट।
दुलहस्ती — चिनाब नदी — जम्मू-कश्मीर — 390 मेगावाट।
तुंगभद्रा बाँध — तुंगभद्रा नदी — कर्नाटक में होसपेट के निकट; कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से संबंधित अंतर्राज्यीय परियोजना।
कावेरी जल विवाद — कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के मध्य।
“आधुनिक भारत के मंदिर” — बड़े बाँधों एवं विकास परियोजनाओं के संदर्भ में जवाहरलाल नेहरू से जुड़ा प्रसिद्ध कथन।