प्रमुख सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक संस्थाएँ
स्थापना वर्ष, संस्थापक, उद्देश्य और आधुनिक भारत के महत्वपूर्ण संगठन
आधुनिक भारत में संगठनों का विकास
18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से 20वीं शताब्दी तक भारत में अनेक सामाजिक, धार्मिक, शैक्षिक, राजनीतिक और क्रांतिकारी संस्थाएँ स्थापित हुईं। इन संस्थाओं ने सामाजिक सुधार, आधुनिक शिक्षा, धार्मिक पुनर्व्याख्या, राजनीतिक जागरूकता और राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एशियाटिक सोसाइटी — 1784
एशियाटिक सोसाइटी — 1784 — सर विलियम जोन्स। इसकी स्थापना कलकत्ता में प्राच्य भाषाओं, इतिहास, साहित्य, पुरातत्व और एशियाई संस्कृति के अध्ययन के उद्देश्य से की गई थी।
इसका मूल नाम एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल था। प्राचीन भारतीय इतिहास और भाषाओं के अध्ययन को संस्थागत रूप देने में इसका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
आत्मीय सभा — 1815
आत्मीय सभा — 1815 — राजा राममोहन राय। इसकी स्थापना कलकत्ता में धार्मिक और सामाजिक विषयों पर विचार-विमर्श के लिए की गई थी।
आत्मीय सभा में एकेश्वरवाद, मूर्तिपूजा की आलोचना और तत्कालीन सामाजिक कुरीतियों के सुधार जैसे विषयों पर चर्चा होती थी। इसे आगे चलकर ब्रह्म समाज के उदय की महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि माना जाता है।
वेदांत कॉलेज — 1825
वेदांत कॉलेज — 1825 — राजा राममोहन राय। इसे भारतीय दर्शन और आधुनिक पाश्चात्य ज्ञान दोनों प्रकार की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया।
राजा राममोहन राय आधुनिक वैज्ञानिक शिक्षा के समर्थक थे और वे भारतीय दार्शनिक परंपरा के साथ आधुनिक ज्ञान के अध्ययन पर बल देते थे।
युवा बंगाल आंदोलन — 1820 के दशक
युवा बंगाल आंदोलन — हेनरी लुई विवियन डिरोजियो। डिरोजियो 1826 में हिंदू कॉलेज में अध्यापक बने और उनके विद्यार्थियों तथा अनुयायियों के समूह से युवा बंगाल आंदोलन विकसित हुआ।
यह आंदोलन तर्कवाद, स्वतंत्र चिंतन, सामाजिक रूढ़ियों की आलोचना और आधुनिक विचारों के समर्थन के लिए प्रसिद्ध था।
सामान्य प्रतियोगी पुस्तकों में युवा बंगाल आंदोलन — 1826 — डिरोजियो की जोड़ी दी जाती है; 1826 को डिरोजियो के हिंदू कॉलेज से जुड़ने और आंदोलन के आरंभिक चरण के संदर्भ में याद किया जाता है।
ब्रह्म समाज — 1828
ब्रह्म समाज — 1828 — राजा राममोहन राय। इसकी शुरुआत कलकत्ता में ब्रह्म सभा के रूप में हुई और आगे यह ब्रह्म समाज के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
इसने एकेश्वरवाद, धार्मिक सुधार, सामाजिक कुरीतियों के विरोध, स्त्री सुधार और आधुनिक विचारों को प्रोत्साहन दिया।
राजा राममोहन राय की मृत्यु के बाद देवेन्द्रनाथ ठाकुर और बाद में केशवचंद्र सेन ब्रह्म समाज आंदोलन के महत्वपूर्ण नेता बने।
धर्म सभा — 1830
धर्म सभा — 1830 — राधाकांत देव। इसकी स्थापना कलकत्ता में रूढ़िवादी हिंदू समाज के हितों और परंपरागत धार्मिक प्रथाओं की रक्षा के लिए की गई थी।
धर्म सभा सामाजिक सुधार के कई ऐसे प्रयासों का विरोध करती थी जिन्हें वह परंपरागत हिंदू रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप मानती थी।
तत्त्वबोधिनी सभा — 1839
तत्त्वबोधिनी सभा — 1839 — देवेन्द्रनाथ ठाकुर। इसका उद्देश्य धार्मिक और दार्शनिक ज्ञान का प्रसार तथा उपनिषदों और भारतीय दर्शन के अध्ययन को बढ़ावा देना था।
इस संस्था ने ब्रह्म समाज को पुनर्जीवित करने और उसके विचारों को व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बंगाल ब्रिटिश इंडिया सोसाइटी — 1843
1843 में स्थापित राजनीतिक संस्था — बंगाल ब्रिटिश इंडिया सोसाइटी। इसके गठन में जॉर्ज थॉम्पसन के प्रयास तथा द्वारकानाथ ठाकुर, चंद्रमोहन चटर्जी और अन्य भारतीयों का सहयोग महत्वपूर्ण था।
इस संस्था का उद्देश्य ब्रिटिश भारत के लोगों की दशा के बारे में जानकारी एकत्र करना तथा सुधारों के लिए जनमत तैयार करना था।
“ब्रिटिश सार्वजनिक सभा — 1843 — दादाभाई नौरोजी” सही जोड़ी नहीं है। दादाभाई नौरोजी से संबंधित प्रमुख राजनीतिक संस्था ईस्ट इंडिया एसोसिएशन — 1866 है।
⚠️ विशेष रूप से याद रखें
1843 — बंगाल ब्रिटिश इंडिया सोसाइटी — जॉर्ज थॉम्पसन के प्रयास।
1866 — ईस्ट इंडिया एसोसिएशन — दादाभाई नौरोजी।
परमहंस मंडली — 1849
परमहंस मंडली — 1849 — दादोबा पांडुरंग, दुर्गाराम मेहताजी एवं उनके सहयोगी। इसकी स्थापना बम्बई में एक गुप्त सामाजिक-धार्मिक सुधार संस्था के रूप में हुई।
इस संस्था ने जातिगत भेदभाव का विरोध किया तथा विधवा पुनर्विवाह और महिला शिक्षा जैसे सामाजिक सुधारों का समर्थन किया।
इसके विचार गुजरात की मानव धर्म सभा से भी निकट रूप से जुड़े थे।
वेद समाज — 1864
वेद समाज — 1864 — मद्रास। इसकी स्थापना केशवचंद्र सेन के मद्रास प्रवास से प्रेरित होकर हुई। के. श्रीधरालु नायडू इसके प्रमुख नेताओं में थे।
इस पर ब्रह्म समाज का स्पष्ट प्रभाव था। इसने एकेश्वरवाद, जातिगत भेदभाव में सुधार, विधवा पुनर्विवाह और महिला शिक्षा जैसे विचारों को बढ़ावा दिया।
अतः इसे केवल “केशवचंद्र सेन द्वारा स्थापित” लिखने के बजाय केशवचंद्र सेन की प्रेरणा और श्रीधरालु नायडू की भूमिका दोनों को याद रखना अधिक सुरक्षित है।
ईस्ट इंडिया एसोसिएशन — 1866
ईस्ट इंडिया एसोसिएशन — 1866 — दादाभाई नौरोजी। इसकी स्थापना लंदन में की गई थी।
इसका उद्देश्य ब्रिटेन में भारत से संबंधित समस्याओं के बारे में जागरूकता पैदा करना और भारतीय हितों को ब्रिटिश जनता तथा नीति-निर्माताओं के सामने रखना था।
प्रार्थना समाज — 1867
प्रार्थना समाज — 1867 — आत्माराम पांडुरंग। इसकी स्थापना बम्बई में हुई।
महादेव गोविंद रानाडे और रामकृष्ण गोपाल भांडारकर बाद में इसके प्रमुख नेताओं में रहे। इसलिए कई सामान्य ज्ञान पुस्तकों में आत्माराम पांडुरंग के साथ रानाडे का नाम भी दिया जाता है।
प्रार्थना समाज ने जाति व्यवस्था में सुधार, विधवा पुनर्विवाह, महिला शिक्षा और सामाजिक समानता को बढ़ावा दिया।
🎯 संस्थापक और प्रमुख नेता
संस्थापक — आत्माराम पांडुरंग
प्रमुख नेता — एम. जी. रानाडे, आर. जी. भांडारकर
पूना सार्वजनिक सभा — 1870
पूना सार्वजनिक सभा — 1870 — महादेव गोविंद रानाडे, गणेश वासुदेव जोशी एवं अन्य सहयोगी। इसकी स्थापना पुणे में जनता और सरकार के बीच संपर्क स्थापित करने तथा भारतीय हितों को सामने रखने के लिए हुई।
पुरानी पुस्तकों में इसके साथ 1867 भी दिया मिलता है, लेकिन औपचारिक स्थापना के लिए 2 अप्रैल 1870 अधिक मानक और परीक्षा-सुरक्षित वर्ष है।
⚠️ वर्ष सुधार
पूना सार्वजनिक सभा — 1870 याद रखें।
सत्यशोधक समाज — 1873
सत्यशोधक समाज — 1873 — ज्योतिराव गोविंदराव फुले। इसकी स्थापना महाराष्ट्र में सामाजिक समानता और जातिगत शोषण के विरोध के उद्देश्य से की गई थी।
सत्यशोधक समाज ने निम्न और वंचित वर्गों की शिक्षा, महिला शिक्षा और सामाजिक न्याय पर विशेष बल दिया।
सावित्रीबाई फुले ने भी शिक्षा और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आर्य समाज — 1875
आर्य समाज — 1875 — स्वामी दयानंद सरस्वती। इसकी स्थापना बम्बई में हुई।
स्वामी दयानंद ने “वेदों की ओर लौटो” का संदेश दिया। आर्य समाज ने वैदिक धर्म, शिक्षा, सामाजिक सुधार, जातिगत भेदभाव के विरोध और विधवा पुनर्विवाह जैसे विषयों पर बल दिया।
बाद में लाहौर आर्य समाज और उससे जुड़े शिक्षा आंदोलनों ने उत्तर भारत में इसकी गतिविधियों को व्यापक बनाया।
थियोसोफिकल सोसाइटी — 1875
थियोसोफिकल सोसाइटी — 1875 — न्यूयॉर्क। इसके प्रमुख संस्थापकों में हेलेना पेट्रोवना ब्लावात्स्की और कर्नल हेनरी स्टील ऑल्कॉट शामिल थे। विलियम क्वान जज भी इसके आरंभिक संस्थापकों में थे।
1882 में इसका अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय अडयार, मद्रास में स्थापित किया गया।
भारत में आगे चलकर एनी बेसेंट इस संस्था की अत्यंत महत्वपूर्ण नेता बनीं।
⚠️ संस्थापक में भ्रम न करें
केवल मैडम ब्लावात्स्की लिखना अधूरा है। परीक्षा में ब्लावात्स्की और ऑल्कॉट की जोड़ी विशेष रूप से याद रखें।
अलीगढ़ आंदोलन और मुहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज
अलीगढ़ आंदोलन — सर सैयद अहमद खाँ। इसका मुख्य उद्देश्य मुसलमानों में आधुनिक शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना था।
1875 में अलीगढ़ में मदरसतुल उलूम के रूप में विद्यालय की शुरुआत हुई। आगे चलकर 7 जनवरी 1877 को मुहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज स्थापित हुआ।
यही संस्था आगे चलकर 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के रूप में विकसित हुई।
⚠️ 1875 और 1877 में अंतर
1875 — पूर्ववर्ती विद्यालय की शुरुआत
1877 — मुहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज
इंडियन एसोसिएशन — 1876
इंडियन एसोसिएशन — 1876 — सुरेन्द्रनाथ बनर्जी और आनंद मोहन बोस। इसकी स्थापना कलकत्ता में हुई।
इसका उद्देश्य भारतीयों में राजनीतिक जागरूकता बढ़ाना, विभिन्न प्रांतों के लोगों को राजनीतिक रूप से संगठित करना और जनमत तैयार करना था।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस — 1885
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस — 1885 — ए. ओ. ह्यूम की पहल। इसका पहला अधिवेशन 28 दिसंबर 1885 से बम्बई में आयोजित हुआ।
पहले अधिवेशन की अध्यक्षता व्योमेश चंद्र बनर्जी ने की। ए. ओ. ह्यूम कांग्रेस के संगठन और गठन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले व्यक्ति थे।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस आगे चलकर भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संस्था बनी।
🎯 दोनों अलग याद रखें
कांग्रेस की स्थापना/पहल — ए. ओ. ह्यूम
प्रथम अध्यक्ष — व्योमेश चंद्र बनर्जी
देव समाज — 1887
देव समाज — 1887 — शिव नारायण अग्निहोत्री। इसकी स्थापना लाहौर में हुई।
यह सामाजिक और धार्मिक सुधार से जुड़ा आंदोलन था जिसने नैतिक जीवन, सामाजिक सुधार और शिक्षा को महत्व दिया।
शारदा सदन — 1889
शारदा सदन — 1889 — पंडिता रमाबाई। इसकी स्थापना बम्बई में विशेष रूप से विधवाओं और महिलाओं की शिक्षा तथा पुनर्वास के लिए की गई थी।
पंडिता रमाबाई 19वीं शताब्दी के महत्वपूर्ण महिला समाज सुधारकों में थीं और उन्होंने महिला शिक्षा तथा महिलाओं की सामाजिक स्थिति सुधारने के लिए कार्य किया।
रामकृष्ण मिशन — 1897
रामकृष्ण मिशन — 1897 — स्वामी विवेकानंद। इसकी स्थापना उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस के विचारों और शिक्षाओं से प्रेरित होकर हुई।
इस संस्था ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा सहायता, सामाजिक सेवा और आध्यात्मिक विकास के क्षेत्र में कार्य किया।
रामकृष्ण मठ और मिशन का प्रमुख केंद्र बेलूर मठ पश्चिम बंगाल में स्थित है।
अभिनव भारत — 1904
अभिनव भारत संस्था — 1904 — विनायक दामोदर सावरकर और गणेश दामोदर सावरकर। यह एक गुप्त क्रांतिकारी संगठन था।
इसकी जड़ें सावरकर द्वारा पहले गठित मित्र मेला में थीं। 1904 में इसे अभिनव भारत नाम दिया गया।
इस संस्था का उद्देश्य ब्रिटिश शासन के विरुद्ध क्रांतिकारी गतिविधियों के माध्यम से स्वतंत्रता प्राप्त करना था।
सर्वेन्ट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी — 1905
सर्वेन्ट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी — 1905 — गोपाल कृष्ण गोखले। इसकी स्थापना पुणे में हुई।
इसका उद्देश्य राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित कार्यकर्ताओं को तैयार करना, शिक्षा का प्रसार करना तथा सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता बढ़ाना था।
अखिल भारतीय मुस्लिम लीग — 1906
अखिल भारतीय मुस्लिम लीग — 1906 — ढाका। इसकी स्थापना 30 दिसंबर 1906 को हुई।
इसके गठन का प्रस्ताव नवाब सलीमुल्लाह खाँ ने रखा। स्थापना से जुड़े नेताओं में नवाब वकार-उल-मुल्क, मोहसिन-उल-मुल्क और अन्य मुस्लिम नेता भी शामिल थे।
आगा खाँ तृतीय मुस्लिम लीग के प्रथम मानद अध्यक्ष बने। इसलिए आगा खाँ और सलीमुल्लाह दोनों नाम मुस्लिम लीग के प्रारंभिक इतिहास से जुड़े हैं, लेकिन उनकी भूमिकाएँ अलग थीं।
🎯 भ्रम से बचें
स्थापना — ढाका, 1906
प्रस्ताव — नवाब सलीमुल्लाह
प्रथम मानद अध्यक्ष — आगा खाँ तृतीय
विश्वभारती — 1921
विश्वभारती — 1921 — रवीन्द्रनाथ ठाकुर। इसकी स्थापना शांतिनिकेतन, पश्चिम बंगाल में की गई।
रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने शांतिनिकेतन में पहले 1901 में विद्यालय स्थापित किया था। बाद में इसी शैक्षिक प्रयोग का विस्तार करते हुए 1921 में विश्वभारती की स्थापना हुई।
1951 में संसद के अधिनियम द्वारा विश्वभारती को केंद्रीय विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय महत्व की संस्था का दर्जा मिला।
⚠️ महत्वपूर्ण वर्ष सुधार
विश्वभारती — 1912 सही नहीं है। मानक स्थापना-वर्ष 1921 है।
गदर पार्टी — 1913
गदर पार्टी — 1913 — सोहन सिंह भकना, लाला हरदयाल एवं अन्य भारतीय क्रांतिकारी। इसकी स्थापना उत्तरी अमेरिका में भारतीय प्रवासियों द्वारा की गई।
इसका मूल संगठन पैसिफिक कोस्ट हिन्दुस्तान एसोसिएशन था। सोहन सिंह भकना इसके प्रथम अध्यक्ष और लाला हरदयाल प्रमुख नेता तथा महासचिव बने।
इस आंदोलन से करतार सिंह सराभा भी प्रमुख रूप से जुड़े थे। इसका उद्देश्य सशस्त्र क्रांति के माध्यम से ब्रिटिश शासन को समाप्त करना था।
हिन्दू महासभा — 1915
अखिल भारतीय हिन्दू महासभा — 1915। इसका अखिल भारतीय संगठन हरिद्वार में आयोजित सम्मेलन से जुड़ा माना जाता है।
मदन मोहन मालवीय इसके गठन और प्रारंभिक विकास से जुड़े प्रमुख नेताओं में थे। इससे पहले विभिन्न प्रांतों में हिंदू सभाएँ कार्यरत थीं, इसलिए इसकी उत्पत्ति को कभी-कभी एक क्रमिक संगठनात्मक प्रक्रिया के रूप में भी वर्णित किया जाता है।
होमरूल लीग — 1916
होमरूल आंदोलन — 1916 — बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट। दोनों ने एक संयुक्त लीग नहीं, बल्कि अलग-अलग होमरूल लीग स्थापित की थीं।
बाल गंगाधर तिलक ने अप्रैल 1916 में अपनी होमरूल लीग स्थापित की। इसका कार्यक्षेत्र मुख्यतः महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रांत और बरार के कुछ क्षेत्र थे।
एनी बेसेंट ने सितंबर 1916 में अपनी अखिल भारतीय होमरूल लीग शुरू की और इसे देश के अन्य क्षेत्रों में फैलाया।
दोनों का उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर भारत के लिए स्वशासन की मांग को लोकप्रिय बनाना था।
🎯 सबसे महत्वपूर्ण अंतर
तिलक — अप्रैल 1916
एनी बेसेंट — सितंबर 1916
खिलाफत आंदोलन — 1919
खिलाफत आंदोलन — 1919 — अली बंधु। मौलाना मोहम्मद अली और शौकत अली इस आंदोलन के प्रमुख नेताओं में थे।
इसके अन्य प्रमुख नेताओं में मौलाना अबुल कलाम आजाद, हकीम अजमल खाँ और हसरत मोहानी जैसे नेता भी शामिल थे।
यह आंदोलन प्रथम विश्व युद्ध के बाद उस्मानी खलीफा की स्थिति से संबंधित प्रश्न पर शुरू हुआ और कुछ समय के लिए भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन तथा असहयोग आंदोलन से जुड़ गया।
स्वराज पार्टी — 1923
स्वराज पार्टी — 1923 — चितरंजन दास और मोतीलाल नेहरू। इसे प्रारंभ में कांग्रेस-खिलाफत स्वराज पार्टी भी कहा गया।
चितरंजन दास इसके अध्यक्ष और मोतीलाल नेहरू प्रमुख सचिव थे।
असहयोग आंदोलन स्थगित होने के बाद स्वराजवादियों ने विधान परिषदों में प्रवेश करके औपनिवेशिक शासन की नीतियों का भीतर से विरोध करने की रणनीति अपनाई।
फॉरवर्ड ब्लॉक — 1939
फॉरवर्ड ब्लॉक — 1939 — सुभाष चंद्र बोस। कांग्रेस अध्यक्ष पद से जुड़े राजनीतिक मतभेदों के बाद सुभाष चंद्र बोस ने कांग्रेस के भीतर वामपंथी और उग्र राष्ट्रवादी शक्तियों को संगठित करने के लिए इसका गठन किया।
बाद में यह ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के रूप में एक अलग राजनीतिक संगठन के रूप में विकसित हुआ।
सुधार आंदोलन और राजनीतिक संगठन — अंतर
| प्रकार | प्रमुख संस्थाएँ | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|---|
| धार्मिक-सामाजिक सुधार | ब्रह्म समाज, प्रार्थना समाज, आर्य समाज, सत्यशोधक समाज | सामाजिक कुरीतियों और धार्मिक रूढ़ियों में सुधार |
| शैक्षिक सुधार | वेदांत कॉलेज, अलीगढ़ आंदोलन, विश्वभारती | आधुनिक एवं उपयोगी शिक्षा का प्रसार |
| प्रारंभिक राजनीतिक संगठन | ईस्ट इंडिया एसोसिएशन, पूना सार्वजनिक सभा, इंडियन एसोसिएशन | राजनीतिक जागरूकता और भारतीय हितों का प्रतिनिधित्व |
| राष्ट्रीय राजनीतिक संगठन | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, मुस्लिम लीग, हिन्दू महासभा | व्यापक राजनीतिक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक मांगें |
| क्रांतिकारी संगठन | अभिनव भारत, गदर पार्टी | ब्रिटिश शासन के विरुद्ध क्रांतिकारी संघर्ष |
सबसे अधिक भ्रमित करने वाली जोड़ियाँ
| भ्रमित तथ्य | सही तथ्य |
|---|---|
| 1843 — दादाभाई नौरोजी | 1843 — बंगाल ब्रिटिश इंडिया सोसाइटी; दादाभाई नौरोजी की ईस्ट इंडिया एसोसिएशन — 1866 |
| पूना सार्वजनिक सभा — 1867 | मानक स्थापना-वर्ष — 1870 |
| प्रार्थना समाज — रानाडे द्वारा स्थापित | संस्थापक — आत्माराम पांडुरंग; रानाडे प्रमुख नेता |
| वेद समाज — केवल केशवचंद्र सेन | केशवचंद्र सेन की प्रेरणा; श्रीधरालु नायडू की प्रमुख भूमिका |
| थियोसोफिकल सोसाइटी — केवल ब्लावात्स्की | ब्लावात्स्की + हेनरी स्टील ऑल्कॉट + अन्य संस्थापक |
| मुहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज — 1875 | विद्यालय 1875; कॉलेज 1877 |
| विश्वभारती — 1912 | विश्वभारती — 1921 |
| होमरूल लीग — तिलक एवं बेसेंट की एक संस्था | दो अलग-अलग होमरूल लीग — दोनों 1916 |
| मुस्लिम लीग — आगा खाँ और सलीमुल्लाह समान भूमिका | सलीमुल्लाह ने गठन का प्रस्ताव रखा; आगा खाँ प्रथम मानद अध्यक्ष बने |
स्थापना वर्ष — कालक्रम
🧠 त्वरित कालक्रम
⚡ अंतिम त्वरित पुनरावृत्ति
एशियाटिक सोसाइटी — 1784 — विलियम जोन्स।
आत्मीय सभा — 1815 — राजा राममोहन राय।
वेदांत कॉलेज — 1825 — राजा राममोहन राय।
युवा बंगाल आंदोलन — डिरोजियो; 1826 से हिंदू कॉलेज के विद्यार्थियों के बीच प्रभाव।
ब्रह्म समाज — 1828 — राजा राममोहन राय।
धर्म सभा — 1830 — राधाकांत देव।
तत्त्वबोधिनी सभा — 1839 — देवेन्द्रनाथ ठाकुर।
बंगाल ब्रिटिश इंडिया सोसाइटी — 1843 — जॉर्ज थॉम्पसन के प्रयास से।
परमहंस मंडली — 1849 — दादोबा पांडुरंग और दुर्गाराम मेहताजी।
वेद समाज — 1864 — मद्रास — केशवचंद्र सेन की प्रेरणा एवं श्रीधरालु नायडू की प्रमुख भूमिका।
ईस्ट इंडिया एसोसिएशन — 1866 — दादाभाई नौरोजी — लंदन।
प्रार्थना समाज — 1867 — आत्माराम पांडुरंग; एम. जी. रानाडे प्रमुख नेता।
पूना सार्वजनिक सभा — 1870 — एम. जी. रानाडे, जी. वी. जोशी एवं सहयोगी।
सत्यशोधक समाज — 1873 — ज्योतिराव फुले।
आर्य समाज — 1875 — स्वामी दयानंद सरस्वती।
थियोसोफिकल सोसाइटी — 1875 — ब्लावात्स्की एवं हेनरी स्टील ऑल्कॉट सहित अन्य संस्थापक।
अलीगढ़ — 1875 में विद्यालय की शुरुआत; मुहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज — 1877 — सर सैयद अहमद खाँ।
इंडियन एसोसिएशन — 1876 — सुरेन्द्रनाथ बनर्जी और आनंद मोहन बोस।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस — 1885 — ए. ओ. ह्यूम की पहल; प्रथम अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी।
देव समाज — 1887 — शिव नारायण अग्निहोत्री।
शारदा सदन — 1889 — पंडिता रमाबाई।
रामकृष्ण मिशन — 1897 — स्वामी विवेकानंद।
अभिनव भारत — 1904 — विनायक दामोदर सावरकर एवं गणेश दामोदर सावरकर।
सर्वेन्ट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी — 1905 — गोपाल कृष्ण गोखले।
मुस्लिम लीग — 1906 — ढाका; प्रस्ताव नवाब सलीमुल्लाह; प्रथम मानद अध्यक्ष आगा खाँ तृतीय।
गदर पार्टी — 1913 — सोहन सिंह भकना, लाला हरदयाल एवं अन्य क्रांतिकारी।
हिन्दू महासभा — 1915 — मदन मोहन मालवीय प्रारंभिक प्रमुख नेताओं में।
होमरूल आंदोलन — 1916 — तिलक और एनी बेसेंट की अलग-अलग होमरूल लीग।
खिलाफत आंदोलन — 1919 — मोहम्मद अली और शौकत अली प्रमुख नेता।
विश्वभारती — 1921 — रवीन्द्रनाथ ठाकुर — शांतिनिकेतन।
स्वराज पार्टी — 1923 — चितरंजन दास और मोतीलाल नेहरू।
फॉरवर्ड ब्लॉक — 1939 — सुभाष चंद्र बोस।