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भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेद

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भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेद
IMPORTANT ARTICLES OF THE INDIAN CONSTITUTION

भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेद

संघ, नागरिकता, मूल अधिकार, नीति-निदेशक तत्व, राष्ट्रपति, संसद, न्यायपालिका और आपातकाल

भारतीय संविधान के अनुच्छेद

भारतीय संविधान के प्रत्येक भाग में किसी विशेष संवैधानिक विषय से संबंधित अनुच्छेद रखे गए हैं। परीक्षा की दृष्टि से केवल अनुच्छेद संख्या याद करना पर्याप्त नहीं है; अनुच्छेद का सटीक विषय और उससे मिलता-जुलता दूसरा अनुच्छेद भी समझना आवश्यक है।

प्रस्तावना किसी अनुच्छेद का हिस्सा नहीं है। संविधान का भाग 1 अनुच्छेद 1 से 4 तक है और नागरिकता संबंधी भाग 2 अनुच्छेद 5 से प्रारंभ होता है।

01

भाग 1 — संघ और उसका राज्यक्षेत्र

अनुच्छेद 1 से 4

अनुच्छेद 1 — संघ का नाम और राज्यक्षेत्र: भारत अर्थात् इंडिया को राज्यों का संघ कहा गया है। भारत के राज्यक्षेत्र में राज्य, पहली अनुसूची में निर्दिष्ट संघ राज्यक्षेत्र तथा भारत द्वारा अर्जित अन्य राज्यक्षेत्र शामिल हो सकते हैं।

अनुच्छेद 2 — नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना: संसद कानून द्वारा ऐसे नियम और शर्तों पर नए राज्यों को भारत के संघ में प्रवेश दे सकती है अथवा नए राज्य स्थापित कर सकती है।

अनुच्छेद 3 — नए राज्यों का निर्माण और वर्तमान राज्यों में परिवर्तन: संसद नए राज्य का निर्माण कर सकती है तथा किसी राज्य का क्षेत्र बढ़ा या घटा सकती है, उसकी सीमाओं में परिवर्तन कर सकती है या उसका नाम बदल सकती है।

अनुच्छेद 3 से संबंधित विधेयक संसद में राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। प्रभावित राज्य से संबंधित प्रस्ताव होने पर राष्ट्रपति उसे संबंधित राज्य विधानमंडल से उसके विचार जानने के लिए भेजता है। राज्य विधानमंडल की राय संसद पर बाध्यकारी नहीं होती।

अनुच्छेद 4: अनुच्छेद 2 और 3 के अंतर्गत बनाए गए कानून पहली और चौथी अनुसूची में आवश्यक परिवर्तन तथा पूरक, आनुषंगिक और परिणामिक प्रावधान कर सकते हैं। ऐसे कानून को अनुच्छेद 368 के अर्थ में संविधान संशोधन नहीं माना जाता।

⚠️ महत्वपूर्ण सुधार

प्रस्तावना अनुच्छेद 1 नहीं है। अनुच्छेद 1 का विषय है—संघ का नाम और राज्यक्षेत्र।

02

भाग 2 — नागरिकता

अनुच्छेद 5 से 11

अनुच्छेद 5 — संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता: 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के समय भारत में अधिवास तथा जन्म, माता-पिता के जन्म अथवा निर्धारित अवधि तक सामान्य निवास के आधार पर नागरिकता से संबंधित प्रावधान।

अनुच्छेद 6 — पाकिस्तान से भारत आए व्यक्तियों की नागरिकता: पाकिस्तान से भारत प्रवास करने वाले कुछ व्यक्तियों की संविधान प्रारंभ के समय नागरिकता से संबंधित विशेष प्रावधान।

अनुच्छेद 7 — भारत से पाकिस्तान चले गए व्यक्तियों से संबंधित प्रावधान: 1 मार्च 1947 के बाद भारत से पाकिस्तान चले गए व्यक्तियों की नागरिकता से संबंधित व्यवस्था; स्थायी पुनर्वास अनुमति लेकर लौटने वालों के लिए विशेष प्रावधान भी था।

अनुच्छेद 8 — भारत के बाहर रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों की नागरिकता: विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के कुछ व्यक्तियों के लिए भारतीय राजनयिक या वाणिज्यदूत प्रतिनिधि के समक्ष पंजीकरण के आधार पर नागरिकता का प्रावधान।

अनुच्छेद 9 — विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से प्राप्त करना: जिसने स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर ली हो, वह अनुच्छेद 5, 6 या 8 के आधार पर भारतीय नागरिक नहीं रहेगा।

अनुच्छेद 10 — नागरिकता अधिकारों का बने रहना: पूर्ववर्ती अनुच्छेदों के अंतर्गत नागरिक माने गए व्यक्ति संसद द्वारा बनाए गए कानूनों के अधीन नागरिक बने रहेंगे।

अनुच्छेद 11 — संसद की शक्ति: संसद को नागरिकता की प्राप्ति, समाप्ति और उससे संबंधित सभी विषयों पर कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है।

🎯 क्रम याद रखें

5 — प्रारंभ की नागरिकता | 6 — पाकिस्तान से भारत | 7 — भारत से पाकिस्तान | 8 — विदेश में भारतीय मूल | 9 — विदेशी नागरिकता | 10 — निरंतरता | 11 — संसद की शक्ति

03

भाग 3 — मूल अधिकार

अनुच्छेद 12 से 35

अनुच्छेद 12 — राज्य की परिभाषा: मूल अधिकारों के संदर्भ में राज्य में भारत सरकार और संसद, राज्य सरकारें और विधानमंडल तथा भारत के राज्यक्षेत्र में या भारत सरकार के नियंत्रण के अधीन स्थानीय और अन्य प्राधिकरण शामिल हैं।

अनुच्छेद 13 — मूल अधिकारों के विरुद्ध कानून: मूल अधिकारों से असंगत कानून उस असंगति की सीमा तक शून्य होंगे। राज्य ऐसा कानून नहीं बना सकता जो मूल अधिकारों को छीनता या कम करता हो।

⚠️ अनुच्छेद 13

इसे “मूल अधिकारों का निलंबन” न लिखें। इसका मुख्य विषय है—मूल अधिकारों के विरुद्ध या उनका अल्पीकरण करने वाले कानूनों की असंवैधानिकता।

04

समानता का अधिकार

अनुच्छेद 14 से 18

अनुच्छेद 14 — विधि के समक्ष समानता: राज्य किसी व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता अथवा कानूनों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा।

अनुच्छेद 15 — भेदभाव का निषेध: राज्य केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर नागरिकों के विरुद्ध भेदभाव नहीं करेगा। महिलाओं, बच्चों, सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं।

अनुच्छेद 16 — लोक नियोजन में अवसर की समानता: राज्य के अधीन रोजगार या नियुक्ति के मामलों में सभी नागरिकों के लिए अवसर की समानता का प्रावधान करता है।

अनुच्छेद 17 — अस्पृश्यता का अंत: अस्पृश्यता समाप्त की गई है और उसका किसी भी रूप में व्यवहार निषिद्ध है।

अनुच्छेद 18 — उपाधियों का अंत: राज्य सैन्य या शैक्षणिक विशिष्टताओं को छोड़कर अन्य उपाधियाँ प्रदान नहीं करेगा।

05

स्वतंत्रता का अधिकार

अनुच्छेद 19 से 22

अनुच्छेद 19 भारतीय नागरिकों को छह प्रमुख स्वतंत्रताएँ प्रदान करता है। ये स्वतंत्रताएँ निरपेक्ष नहीं हैं और संविधान में निर्धारित आधारों पर युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

1. वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।

2. शांतिपूर्वक और बिना हथियार सभा करने की स्वतंत्रता।

3. संघ, संगठन या सहकारी समिति बनाने की स्वतंत्रता।

4. भारत के पूरे राज्यक्षेत्र में स्वतंत्र रूप से घूमने की स्वतंत्रता।

5. भारत के किसी भी भाग में निवास और बसने की स्वतंत्रता।

6. कोई वृत्ति अपनाने अथवा कोई उपजीविका, व्यापार या कारोबार करने की स्वतंत्रता।

अनुच्छेद 20 — अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण: इसमें पूर्वव्यापी दंडात्मक कानून से संरक्षण, एक ही अपराध के लिए दो बार दंडित न किए जाने तथा स्वयं के विरुद्ध गवाही देने के लिए बाध्य न किए जाने का संरक्षण शामिल है।

अनुच्छेद 21 — जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण: किसी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित किया जा सकता है।

अनुच्छेद 21-क — शिक्षा का अधिकार: राज्य 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को कानून द्वारा निर्धारित तरीके से निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराएगा।

अनुच्छेद 22 — गिरफ्तारी और निरोध से संरक्षण: गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार बताने, अपनी पसंद के विधिक परामर्शदाता से परामर्श करने और सामान्य परिस्थितियों में 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किए जाने का अधिकार है। निवारक निरोध से संबंधित अलग प्रावधान भी इसी अनुच्छेद में हैं।

⚠️ अनुच्छेद 20 और 22 में अंतर

अनुच्छेद 20 = अपराध में दोषसिद्धि से संरक्षण।
अनुच्छेद 22 = गिरफ्तारी और निरोध से संबंधित संरक्षण।

06

शोषण के विरुद्ध अधिकार

अनुच्छेद 23 और 24

अनुच्छेद 23 — मानव तस्करी और बलात् श्रम का निषेध: मानव तस्करी, बेगार और इसी प्रकार के अन्य बलात् श्रम को प्रतिबंधित करता है।

अनुच्छेद 24 — बाल श्रम पर संवैधानिक निषेध: 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे को किसी कारखाने या खान में काम पर नहीं लगाया जा सकता और न ही किसी अन्य जोखिमपूर्ण नियोजन में लगाया जा सकता है।

07

धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार

अनुच्छेद 25 से 28

अनुच्छेद 25 — अंतःकरण और धर्म की स्वतंत्रता: लोक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य के अधीन धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता।

अनुच्छेद 26 — धार्मिक मामलों का प्रबंधन: प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय को निर्धारित शर्तों के अधीन धार्मिक और धर्मार्थ संस्थाओं की स्थापना तथा अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने का अधिकार।

अनुच्छेद 27 — किसी विशेष धर्म की अभिवृद्धि हेतु कर: किसी व्यक्ति को ऐसे कर देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता जिसकी आय विशेष रूप से किसी एक धर्म या धार्मिक संप्रदाय के प्रचार या पालन पर खर्च की जाए।

अनुच्छेद 28 — धार्मिक शिक्षा और उपासना: पूर्णतः राज्य निधि से संचालित शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी; कुछ संस्थाओं के लिए अपवाद हैं। किसी मान्यताप्राप्त या राज्य सहायता प्राप्त संस्थान में व्यक्ति को उसकी सहमति के बिना धार्मिक शिक्षा या उपासना में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

08

सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार

अनुच्छेद 29 और 30

अनुच्छेद 29 — भाषा, लिपि और संस्कृति का संरक्षण: भारत के किसी भी भाग में रहने वाले नागरिकों के ऐसे वर्ग को, जिसकी अपनी विशिष्ट भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे सुरक्षित रखने का अधिकार है।

राज्य द्वारा संचालित अथवा राज्य से सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थान में केवल धर्म, मूलवंश, जाति या भाषा के आधार पर किसी नागरिक को प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता।

अनुच्छेद 30 — अल्पसंख्यकों के शिक्षण संस्थान: धार्मिक अथवा भाषायी अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद की शिक्षण संस्थाएँ स्थापित और प्रशासित करने का अधिकार है।

📗 अंतर याद रखें

29 = भाषा, लिपि और संस्कृति का संरक्षण।
30 = धार्मिक और भाषायी अल्पसंख्यकों की शिक्षण संस्थाएँ।

09

अनुच्छेद 31 से 35

संपत्ति, संवैधानिक उपचार और विशेष प्रावधान

अनुच्छेद 31 — संपत्ति का मौलिक अधिकार: यह अनुच्छेद अब निरसित है। संपत्ति का अधिकार अब मौलिक अधिकार नहीं है। वर्तमान में अनुच्छेद 300-क के अनुसार किसी व्यक्ति को विधि के प्राधिकार के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।

अनुच्छेद 32 — संवैधानिक उपचारों का अधिकार: मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार सुनिश्चित करता है। सर्वोच्च न्यायालय बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार-पृच्छा और उत्प्रेषण जैसी रिट जारी कर सकता है।

अनुच्छेद 33: संसद सशस्त्र बलों, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने वाले बलों, खुफिया संगठनों आदि के सदस्यों पर मूल अधिकारों के प्रयोग को उनके कर्तव्यों और अनुशासन की आवश्यकता के अनुसार सीमित या संशोधित कर सकती है।

अनुच्छेद 34 — मार्शल लॉ: भारत के किसी क्षेत्र में मार्शल लॉ लागू रहने की स्थिति में मूल अधिकारों पर प्रतिबंध से जुड़े कार्यों के संबंध में संसद क्षतिपूर्ति या वैधानिक संरक्षण देने का प्रावधान कर सकती है।

अनुच्छेद 35: भाग 3 के कुछ विशिष्ट प्रावधानों को प्रभावी बनाने के लिए कानून बनाने की शक्ति विशेष रूप से संसद को देता है।

⚠️ दो बड़े सुधार

अनुच्छेद 31 = अब निरसित। संपत्ति का अधिकार अब अनुच्छेद 300-क में।
अनुच्छेद 34 = जम्मू-कश्मीर नहीं; मार्शल लॉ से संबंधित।

10

राज्य के नीति-निदेशक तत्व

अनुच्छेद 36 से 51

अनुच्छेद 36 — राज्य की परिभाषा: भाग 4 में राज्य का अर्थ सामान्यतः भाग 3 के अनुच्छेद 12 के समान है।

अनुच्छेद 37: नीति-निदेशक तत्व न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, लेकिन देश के शासन में मूलभूत हैं और कानून बनाते समय इन्हें लागू करना राज्य का कर्तव्य है।

अनुच्छेद 38: राज्य ऐसी सामाजिक व्यवस्था स्थापित करने का प्रयास करेगा जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय राष्ट्रीय जीवन की सभी संस्थाओं को प्रेरित करे।

अनुच्छेद 38(2): राज्य आय में असमानताओं को कम करने और व्यक्तियों तथा विभिन्न क्षेत्रों या व्यवसायों के समूहों के बीच अवसर, सुविधाओं और स्थिति की असमानताओं को समाप्त करने का प्रयास करेगा।

अनुच्छेद 39(क): पुरुष और महिला नागरिकों को समान रूप से जीविका के पर्याप्त साधन प्राप्त करने का अधिकार हो।

अनुच्छेद 39(ख): समुदाय के भौतिक संसाधनों का स्वामित्व और नियंत्रण इस प्रकार वितरित हो कि उससे सामूहिक हित की सर्वोत्तम पूर्ति हो।

अनुच्छेद 39(ग): आर्थिक व्यवस्था ऐसी न हो कि धन और उत्पादन के साधनों का संकेंद्रण जनसाधारण के लिए हानिकारक हो।

अनुच्छेद 39(घ): पुरुष और महिला दोनों को समान कार्य के लिए समान वेतन।

अनुच्छेद 39(ङ): पुरुष और महिला कर्मकारों के स्वास्थ्य और शक्ति तथा बालकों की सुकुमार अवस्था का दुरुपयोग न हो।

अनुच्छेद 39(च): बच्चों को स्वस्थ, स्वतंत्र और गरिमामय वातावरण में विकास के अवसर तथा शोषण और नैतिक या भौतिक परित्याग से संरक्षण मिले।

अनुच्छेद 39-क: समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता सुनिश्चित करने का प्रयास।

अनुच्छेद 40: ग्राम पंचायतों का संगठन और उन्हें स्वशासन की इकाइयों के रूप में आवश्यक शक्तियाँ प्रदान करना।

अनुच्छेद 41: राज्य अपनी आर्थिक क्षमता और विकास की सीमा के भीतर काम, शिक्षा तथा बेरोजगारी, वृद्धावस्था, बीमारी, अक्षमता आदि स्थितियों में लोक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा।

अनुच्छेद 42: काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाओं तथा प्रसूति सहायता का प्रावधान।

अनुच्छेद 43: कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी, सम्मानजनक जीवन स्तर और सामाजिक-सांस्कृतिक अवसरों की व्यवस्था का प्रयास।

अनुच्छेद 43-क: उद्योगों के प्रबंधन में कर्मकारों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास।

अनुच्छेद 43-ख: सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कार्यप्रणाली, लोकतांत्रिक नियंत्रण और व्यावसायिक प्रबंधन को प्रोत्साहन।

अनुच्छेद 44: पूरे भारत में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास।

अनुच्छेद 45: राज्य सभी बच्चों को छह वर्ष की आयु पूरी होने तक प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा।

अनुच्छेद 46: अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा समाज के अन्य कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की विशेष देखभाल तथा सामाजिक अन्याय और शोषण से संरक्षण।

अनुच्छेद 47: पोषण स्तर, जीवन स्तर और लोक स्वास्थ्य में सुधार राज्य के प्राथमिक कर्तव्यों में है; स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मादक पेय और औषधियों के उपभोग पर रोक लगाने का प्रयास भी किया जाएगा, सिवाय औषधीय प्रयोजनों के।

अनुच्छेद 48: कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक आधार पर संगठित करना तथा गायों, बछड़ों और अन्य दुधारू व भारवाही पशुओं की नस्लों के संरक्षण और सुधार तथा उनके वध के निषेध के लिए कदम उठाना।

अनुच्छेद 48-क: पर्यावरण का संरक्षण और सुधार तथा देश के वन और वन्यजीवों की रक्षा।

अनुच्छेद 49: राष्ट्रीय महत्व घोषित स्मारकों, स्थानों और कलात्मक अथवा ऐतिहासिक वस्तुओं की रक्षा।

अनुच्छेद 50: राज्य की लोक सेवाओं में न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करना।

अनुच्छेद 51: अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि, राष्ट्रों के बीच सम्मानपूर्ण संबंध, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान और मध्यस्थता द्वारा अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान को प्रोत्साहन।

⚠️ अनुच्छेद 45 का वर्तमान स्वरूप

अब अनुच्छेद 45 का विषय 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा है। 6 से 14 वर्ष की निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा अनुच्छेद 21-क में है।

11

राष्ट्रपति से संबंधित महत्वपूर्ण अनुच्छेद

भाग 5 — संघ की कार्यपालिका

अनुच्छेदविषय
52भारत का एक राष्ट्रपति होगा।
53संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी।
54राष्ट्रपति का निर्वाचन।
56राष्ट्रपति की पदावधि — सामान्यतः पाँच वर्ष।
60राष्ट्रपति की शपथ या प्रतिज्ञान।
61संविधान के उल्लंघन के लिए राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया।
72राष्ट्रपति की क्षमा, दंड-लघुकरण, परिहार, विराम या दंडादेश के निलंबन/परिवर्तन की शक्ति।
85संसद के सदनों को बुलाना, सत्रावसान करना और लोकसभा को भंग करना।
123संसद के अवकाश के दौरान राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति।
143राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय से विधि या तथ्य के महत्वपूर्ण प्रश्न पर परामर्श मांगना।

⚠️ अनुच्छेद 52 और 53

52 = राष्ट्रपति का पद।
53 = संघ की कार्यपालिका शक्ति।

12

उपराष्ट्रपति और केंद्रीय मंत्रिपरिषद

महत्वपूर्ण अनुच्छेद

अनुच्छेद 63: भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा।

अनुच्छेद 64: उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होगा।

अनुच्छेद 67: उपराष्ट्रपति की पदावधि सामान्यतः पाँच वर्ष होती है।

अनुच्छेद 74: राष्ट्रपति की सहायता और सलाह के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद होगी।

अनुच्छेद 75: प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है। मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है।

अनुच्छेद 78: प्रधानमंत्री का कर्तव्य है कि वह संघ प्रशासन और विधायी प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के निर्णयों की जानकारी राष्ट्रपति को दे और राष्ट्रपति द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराए।

13

प्रमुख संवैधानिक पद और निकाय

महान्यायवादी से निर्वाचन आयोग तक

अनुच्छेदपद / निकाय
76भारत का महान्यायवादी — भारत सरकार का सर्वोच्च विधि अधिकारी।
148भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक — संघ और राज्यों के सरकारी खातों तथा व्यय के लेखा-परीक्षण से संबंधित संवैधानिक पद।
280वित्त आयोग — राष्ट्रपति द्वारा सामान्यतः प्रत्येक पाँच वर्ष पर या आवश्यकता होने पर गठित।
315संघ लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा आयोगों की व्यवस्था।
324संसद, राज्य विधानमंडलों तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण निर्वाचन आयोग में निहित।
14

संसद से संबंधित अनुच्छेद

राज्यसभा, लोकसभा और विधायी प्रक्रिया

अनुच्छेदविषय
79संसद का गठन — राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा।
80राज्यसभा की संरचना।
81लोकसभा की संरचना।
89उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति; राज्यसभा अपने सदस्यों में से उपसभापति चुनेगी।
93लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव।
100सदनों में मतदान; मत बराबर होने की स्थिति में सभापति या अध्यक्ष को निर्णायक मत का अधिकार।
105संसद के सदनों, उनके सदस्यों और समितियों की शक्तियाँ, विशेषाधिकार और उन्मुक्तियाँ।
108कुछ परिस्थितियों में संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक।
110धन विधेयक की परिभाषा; किसी विधेयक के धन विधेयक होने पर लोकसभा अध्यक्ष का निर्णय अंतिम।
112वार्षिक वित्तीय विवरण, जिसे सामान्यतः केंद्रीय बजट कहा जाता है।
117वित्तीय विधेयकों से संबंधित विशेष प्रावधान।
15

सर्वोच्च न्यायालय

महत्वपूर्ण अनुच्छेद

अनुच्छेद 124: भारत के सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना और गठन तथा उसके न्यायाधीशों से संबंधित मूल प्रावधान।

अनुच्छेद 131: सर्वोच्च न्यायालय की मूल अधिकारिता—केंद्र और राज्यों अथवा राज्यों के बीच कुछ प्रकार के संवैधानिक विवाद सीधे सर्वोच्च न्यायालय में लाए जा सकते हैं।

अनुच्छेद 137: सर्वोच्च न्यायालय को अपने द्वारा सुनाए गए निर्णय या आदेश की समीक्षा करने की शक्ति।

न्यायिक पुनर्विलोकन किसी एक अनुच्छेद 137 तक सीमित नहीं है। इसकी संवैधानिक नींव अनुच्छेद 13, 32, 136, 226 आदि सहित संविधान के विभिन्न प्रावधानों और संवैधानिक सर्वोच्चता में निहित है।

⚠️ बड़ा भ्रम

अनुच्छेद 137 = अपने निर्णय या आदेश की समीक्षा।
इसे अकेले “न्यायिक पुनर्विलोकन का अनुच्छेद” न लिखें।

16

राज्यपाल और राज्य मंत्रिपरिषद

भाग 6 के महत्वपूर्ण अनुच्छेद

अनुच्छेदविषय
152भाग 6 के प्रयोजन के लिए राज्य से संबंधित परिभाषा।
153प्रत्येक राज्य के लिए राज्यपाल; एक ही व्यक्ति दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल हो सकता है।
154राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित।
155राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा।
161राज्यपाल की क्षमा आदि की शक्ति, राज्य की कार्यपालिका शक्ति के क्षेत्र से संबंधित अपराधों में।
163राज्यपाल की सहायता और सलाह के लिए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद।
164मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करता है; अन्य मंत्रियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सलाह पर।
165राज्य का महाधिवक्ता — राज्य सरकार का सर्वोच्च विधि अधिकारी।
17

राज्य विधानमंडल और उच्च न्यायालय

महत्वपूर्ण अनुच्छेद

अनुच्छेद 168: राज्यों में विधानमंडल की संरचना। कुछ राज्यों में एक सदन और कुछ में विधानसभा तथा विधान परिषद—दो सदन हो सकते हैं।

अनुच्छेद 169: संबंधित राज्य विधानसभा द्वारा विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित किए जाने पर संसद कानून द्वारा विधान परिषद का सृजन या उन्मूलन कर सकती है।

अनुच्छेद 214: प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय होगा; संविधान अन्य व्यवस्थाओं की भी अनुमति देता है।

अनुच्छेद 226: उच्च न्यायालय मूल अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ अन्य प्रयोजनों के लिए भी रिट जारी कर सकता है।

📗 अनुच्छेद 32 और 226

32 — मूल अधिकारों के प्रवर्तन हेतु सर्वोच्च न्यायालय।
226 — मूल अधिकारों के साथ अन्य विधिक अधिकारों के लिए भी उच्च न्यायालय की रिट शक्ति।

18

केंद्र-राज्य संबंध और वित्त

महत्वपूर्ण अनुच्छेद

अनुच्छेद 249: यदि राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से राष्ट्रीय हित में प्रस्ताव पारित करे, तो संसद निर्धारित अवधि के लिए राज्य सूची के किसी विषय पर कानून बना सकती है।

अनुच्छेद 262: अंतरराज्यीय नदी या नदी-घाटी के जल के उपयोग, वितरण या नियंत्रण से संबंधित विवादों के निर्णय के लिए संसद कानून बना सकती है।

अनुच्छेद 263: राष्ट्रपति सार्वजनिक हित में अंतरराज्यीय परिषद की स्थापना कर सकता है।

अनुच्छेद 266: भारत और प्रत्येक राज्य की संचित निधि तथा लोक लेखे से संबंधित प्रावधान।

अनुच्छेद 267: भारत और राज्यों की आकस्मिकता निधि से संबंधित प्रावधान।

⚠️ सही शब्द

अनुच्छेद 267 को सामान्य भाषा में “आपातकालीन निधि” कहा जाता है, लेकिन संवैधानिक रूप से सही नाम आकस्मिकता निधि है।

19

अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग

प्रतिनिधित्व, सेवाएँ और संवैधानिक आयोग

अनुच्छेद 330: लोकसभा में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों के आरक्षण से संबंधित प्रावधान।

अनुच्छेद 332: राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों के आरक्षण से संबंधित प्रावधान।

अनुच्छेद 335: संघ या राज्य की सेवाओं और पदों पर नियुक्तियों में प्रशासनिक दक्षता बनाए रखने के साथ अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के दावों को ध्यान में रखने का प्रावधान।

अनुच्छेद 335 को अकेले “सरकारी सेवा में आरक्षण देने वाला अनुच्छेद” कहना पूर्णतः सटीक नहीं है। सेवाओं में आरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था अनुच्छेद 16 के विभिन्न उपबंधों सहित अन्य प्रावधानों से भी संबंधित है।

अनुच्छेद 338: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग।

अनुच्छेद 338-क: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग।

अनुच्छेद 338-ख: राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा। यह प्रावधान 102वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2018 से जोड़ा गया।

अनुच्छेद 343: संघ की राजभाषा हिंदी और उसकी लिपि देवनागरी होगी; संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए अंकों के अंतरराष्ट्रीय रूप से संबंधित प्रावधान भी इसी अनुच्छेद में हैं।

⚠️ दो सुधार

338-ख = राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग — 102वाँ संशोधन, 2018; 103वाँ नहीं।
335 = एससी/एसटी के सेवाओं और पदों में दावों को ध्यान में रखने का प्रावधान; केवल “आरक्षण अनुच्छेद” कहना अधूरा है।

20

पंचायतों से संबंधित अनुच्छेद

अनुच्छेद 243 से 243-ओ

पंचायतों से संबंधित संवैधानिक प्रावधान भाग 9 में अनुच्छेद 243 से 243-ओ तक दिए गए हैं।

अनुच्छेद 243: पंचायत संबंधी शब्दों की परिभाषाएँ।

अनुच्छेद 243-क: ग्राम सभा।

अनुच्छेद 243-ख: ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर पंचायतों का गठन।

अनुच्छेद 243-ग: पंचायतों की संरचना।

अनुच्छेद 243-घ: पंचायतों में सीटों का आरक्षण।

अनुच्छेद 243-ङ: पंचायतों की अवधि।

अनुच्छेद 243-छ: पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व।

अनुच्छेद 243-ट: पंचायतों के चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण राज्य निर्वाचन आयोग में निहित।

अनुच्छेद 243-ओ: पंचायत चुनाव संबंधी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप पर रोक से संबंधित प्रावधान।

⚠️ सुधार

“अनुच्छेद 243-क से ओ = ग्राम पंचायत” कहना अधूरा है। पूरा भाग 9 अनुच्छेद 243 से 243-ओ तक पंचायत व्यवस्था से संबंधित है।

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आपातकालीन प्रावधान

तीन प्रकार के संवैधानिक आपातकाल

अनुच्छेदप्रावधान
352 राष्ट्रीय आपातकाल — युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर।
356 राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता — सामान्यतः राष्ट्रपति शासन कहा जाता है।
360 वित्तीय आपातकाल — भारत या उसके किसी भाग की वित्तीय स्थिरता या साख को खतरा होने पर।
368 संविधान संशोधन की संसद की शक्ति और प्रक्रिया। यह आपातकालीन अनुच्छेद नहीं है; यह भाग 20 में है।

⚠️ अनुच्छेद 368

अनुच्छेद 368 को आपातकालीन प्रावधानों की सूची के साथ याद किया जाता है, लेकिन यह भाग 18 का आपातकालीन प्रावधान नहीं है। यह भाग 20 — संविधान का संशोधन है।

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सबसे महत्वपूर्ण सुधार

परीक्षा में इन गलतियों से बचें

गलत: अनुच्छेद 1 = प्रस्तावना।
सही: अनुच्छेद 1 = भारत अर्थात् इंडिया, राज्यों का संघ; प्रस्तावना अलग है।

गलत: भाग 1 अनुच्छेद 1 से 5।
सही: भाग 1 = अनुच्छेद 1–4; भाग 2 अनुच्छेद 5 से शुरू।

गलत: अनुच्छेद 2 संसद को केवल राज्य क्षेत्र बदलने की शक्ति देता है।
सही: अनुच्छेद 2 नए राज्यों के प्रवेश या स्थापना से संबंधित है; वर्तमान राज्यों के क्षेत्र/सीमा/नाम में परिवर्तन मुख्यतः अनुच्छेद 3 में है।

गलत: अनुच्छेद 4 पहले चार अनुच्छेदों में संविधान संशोधन की सामान्य प्रक्रिया है।
सही: यह अनुच्छेद 2 और 3 के कानूनों से पहली/चौथी अनुसूची आदि में आवश्यक परिवर्तन से संबंधित है और ऐसा कानून अनुच्छेद 368 वाला संशोधन नहीं माना जाता।

गलत: अनुच्छेद 6 विदेशी नागरिकों की सामान्य नागरिकता प्राप्ति।
सही: यह विभाजन के समय पाकिस्तान से भारत आए कुछ व्यक्तियों की नागरिकता से संबंधित है।

गलत: अनुच्छेद 7 नागरिकता समाप्ति का सामान्य नियम।
सही: यह विभाजन के दौरान भारत से पाकिस्तान प्रवास करने वाले व्यक्तियों से संबंधित है।

गलत: अनुच्छेद 13 मूल अधिकार निलंबित करता है।
सही: यह मूल अधिकारों से असंगत कानूनों से संबंधित है।

अधूरा: अनुच्छेद 16 = केवल समानता।
सही: लोक नियोजन में अवसर की समानता।

गलत: अनुच्छेद 20 गिरफ्तारी और निरोध।
सही: दोषसिद्धि संबंधी संरक्षण; गिरफ्तारी-निरोध मुख्यतः अनुच्छेद 22।

गलत: अनुच्छेद 34 जम्मू-कश्मीर का विशेष प्रावधान।
सही: मार्शल लॉ के दौरान मूल अधिकारों पर प्रतिबंध से जुड़े कार्यों से संबंधित।

पुराना: अनुच्छेद 31 = वर्तमान मौलिक संपत्ति अधिकार।
सही: अनुच्छेद 31 निरसित; संपत्ति का अधिकार अब अनुच्छेद 300-क में संवैधानिक/कानूनी अधिकार है।

गलत: अनुच्छेद 45 = 6 वर्ष से कम बच्चों की निःशुल्क अनिवार्य शिक्षा।
सही: प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा; 6–14 वर्ष की शिक्षा अनुच्छेद 21-क।

गलत: अनुच्छेद 52 = राष्ट्रपति की कार्यपालिका शक्ति।
सही: 52 राष्ट्रपति के पद के बारे में; 53 संघ की कार्यपालिका शक्ति के बारे में।

गलत: अनुच्छेद 137 = न्यायिक पुनर्विलोकन का एकमात्र आधार।
सही: यह सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपने निर्णयों और आदेशों की समीक्षा से संबंधित है।

अधूरा: अनुच्छेद 226 केवल मूल अधिकारों की रिट।
सही: उच्च न्यायालय मूल अधिकारों के साथ अन्य प्रयोजनों के लिए भी रिट जारी कर सकता है।

गलत: अनुच्छेद 335 सीधे एससी/एसटी आरक्षण देता है।
सही: यह सेवाओं और पदों में उनके दावों को प्रशासनिक दक्षता के साथ ध्यान में रखने से संबंधित है।

गलत: अनुच्छेद 338-ख = 103वाँ संशोधन।
सही: राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का संवैधानिक दर्जा — 102वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2018।

गलत: अनुच्छेद 368 आपातकालीन प्रावधान है।
सही: यह संविधान संशोधन से संबंधित भाग 20 का अनुच्छेद है।

⚡ अंतिम पुनरावृत्ति

1 — भारत राज्यों का संघ।

2 — नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना।

3 — राज्य का गठन, क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन।

4 — अनुच्छेद 2 और 3 के कानून तथा अनुसूचियों में संबंधित परिवर्तन।

5–11 — संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता।

12 — राज्य की परिभाषा; 13 — मूल अधिकारों के विरुद्ध कानून।

14–18 — समानता का अधिकार।

19–22 — स्वतंत्रता का अधिकार।

21-क — 6 से 14 वर्ष के बच्चों की निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा।

23–24 — शोषण के विरुद्ध अधिकार।

25–28 — धार्मिक स्वतंत्रता।

29–30 — सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार।

31 — निरसित; संपत्ति का वर्तमान प्रावधान अनुच्छेद 300-क।

32 — संवैधानिक उपचारों का अधिकार।

34 — मार्शल लॉ; जम्मू-कश्मीर नहीं।

36–51 — राज्य के नीति-निदेशक तत्व।

39-क — समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता।

44 — समान नागरिक संहिता।

45 — 6 वर्ष से कम बच्चों की प्रारंभिक देखभाल और शिक्षा।

48-क — पर्यावरण, वन और वन्यजीव संरक्षण।

50 — कार्यपालिका और न्यायपालिका का पृथक्करण।

51 — अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा।

52 — राष्ट्रपति; 53 — संघ की कार्यपालिका शक्ति; 54 — राष्ट्रपति निर्वाचन।

61 — राष्ट्रपति पर महाभियोग; 72 — क्षमादान शक्ति।

63 — उपराष्ट्रपति; 64 — राज्यसभा का पदेन सभापति।

74 — राष्ट्रपति की सहायता और सलाह के लिए मंत्रिपरिषद।

76 — भारत का महान्यायवादी।

79 — संसद; 80 — राज्यसभा; 81 — लोकसभा।

108 — संयुक्त बैठक; 110 — धन विधेयक; 112 — वार्षिक वित्तीय विवरण।

123 — राष्ट्रपति की अध्यादेश शक्ति।

124 — सर्वोच्च न्यायालय; 131 — मूल अधिकारिता; 137 — अपने निर्णय की समीक्षा।

143 — राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श।

148 — नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक।

153 — राज्यपाल; 154 — राज्य की कार्यपालिका शक्ति; 155 — राज्यपाल की नियुक्ति।

161 — राज्यपाल की क्षमा शक्ति।

163 — राज्य मंत्रिपरिषद; 164 — मुख्यमंत्री और मंत्री।

165 — राज्य का महाधिवक्ता।

168 — राज्य विधानमंडल; 169 — विधान परिषद का सृजन या उन्मूलन।

214 — उच्च न्यायालय; 226 — उच्च न्यायालय की रिट शक्ति।

249 — राष्ट्रीय हित में राज्य सूची पर संसद की कानून बनाने की शक्ति।

262 — अंतरराज्यीय जल विवाद; 263 — अंतरराज्यीय परिषद।

266 — संचित निधि और लोक लेखे; 267 — आकस्मिकता निधि।

280 — वित्त आयोग; 315 — लोक सेवा आयोग; 324 — निर्वाचन आयोग।

330 — लोकसभा में एससी/एसटी आरक्षण; 332 — विधानसभा में एससी/एसटी आरक्षण।

338 — राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग; 338-क — राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग; 338-ख — राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग।

343 — संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी।

352 — राष्ट्रीय आपातकाल; 356 — राष्ट्रपति शासन; 360 — वित्तीय आपातकाल।

368 — संविधान संशोधन की शक्ति और प्रक्रिया।

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