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भारत की जनगणना एवं जनसंख्या
CENSUS & POPULATION OF INDIA

भारत की जनगणना एवं जनसंख्या

जनगणना का इतिहास, जनसंख्या, घनत्व, वृद्धि, नगरीकरण, साक्षरता एवं लिंगानुपात

भारत की जनगणना

जनगणना किसी देश की जनसंख्या से संबंधित व्यापक सांख्यिकीय गणना है। इसके माध्यम से जनसंख्या की संख्या, आयु, लिंग, साक्षरता, ग्रामीण–नगरीय निवास, सामाजिक संरचना और अन्य जनसांख्यिकीय विशेषताओं की जानकारी प्राप्त की जाती है।

भारत में जनगणना का संचालन भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय द्वारा गृह मंत्रालय के अंतर्गत किया जाता है। जनगणना के पूर्ण आधिकारिक आँकड़ों में अभी भी 2011 की जनगणना नवीनतम उपलब्ध आधार है।

01

संविधान में जनगणना

संघ सरकार का विषय

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 246 के अंतर्गत संसद और राज्य विधानमंडलों की विधायी शक्तियों का विभाजन सातवीं अनुसूची में दी गई सूचियों के अनुसार किया गया है।

जनगणना संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची की प्रविष्टि 69 में शामिल है। इसलिए जनगणना पर कानून बनाने की शक्ति संसद के पास है।

भारत में जनगणना का संचालन मुख्य रूप से जनगणना अधिनियम, 1948 के अंतर्गत किया जाता है।

🎯 परीक्षा तथ्य

जनगणना — संघ सूची — प्रविष्टि 69 — अनुच्छेद 246 से संबंधित विधायी व्यवस्था।

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भारत में जनगणना का इतिहास

1872 से नियमित जनगणना तक

भारत में पहली व्यापक जनगणना का प्रयास 1872 में लॉर्ड मेयो के काल में किया गया। यह पूरे देश में एक ही दिन अथवा एक ही समय पर नहीं हुई थी, इसलिए इसे असमकालिक जनगणना माना जाता है।

भारत की पहली नियमित और देशव्यापी समकालिक जनगणना 1881 में की गई। इसके बाद सामान्यतः प्रत्येक दस वर्ष पर जनगणना आयोजित करने की परंपरा विकसित हुई।

2011 की जनगणना भारत की 15वीं जनगणना थी और स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद आयोजित 7वीं जनगणना थी।

स्वतंत्रता के बाद 1951, 1961, 1971, 1981, 1991, 2001 और 2011 में कुल सात पूर्ण जनगणनाएँ आयोजित हो चुकी हैं।

🎯 दो तथ्य अलग-अलग याद रखें

1872 — पहली व्यापक लेकिन असमकालिक जनगणना।
1881 — पहली नियमित समकालिक जनगणना।

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जनगणना 2011

15वीं जनगणना और स्वतंत्रता के बाद सातवीं जनगणना

जनगणना 2011 के समय भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त डॉ. सी. चंद्रमौली थे।

2011 की जनगणना भारत की 15वीं और स्वतंत्रता के बाद की सातवीं जनगणना थी।

2011 में भारत की कुल जनसंख्या लगभग 121.09 करोड़ थी। उस समय भारत में विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग 17.5 प्रतिशत निवास करता था।

04

जनगणना 2027

अगली जनगणना की वर्तमान स्थिति

2011 के बाद होने वाली अगली जनगणना कोविड-19 महामारी सहित विभिन्न कारणों से निर्धारित समय पर पूरी नहीं हो सकी।

भारत सरकार ने अब जनगणना 2027 को अधिसूचित किया है। इसका प्रथम चरण अर्थात मकान सूचीकरण एवं आवास गणना 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच निर्धारित किया गया है।

जब तक जनगणना 2027 के अंतिम जनसंख्या आँकड़े जारी नहीं होते, जनसंख्या, साक्षरता, लिंगानुपात और घनत्व जैसे विस्तृत आधिकारिक जनगणना संकेतकों के लिए 2011 के आँकड़े आधार बने रहेंगे।

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जनसंख्या घनत्व

प्रति वर्ग किलोमीटर जनसंख्या

जनसंख्या घनत्व का अर्थ किसी निश्चित क्षेत्रफल में निवास करने वाले व्यक्तियों की संख्या से है। सामान्यतः इसे प्रति वर्ग किलोमीटर व्यक्तियों की संख्या में व्यक्त किया जाता है।

जनगणना 2011 के अनुसार भारत का औसत जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था।

राज्यों में बिहार का जनसंख्या घनत्व सबसे अधिक 1,106 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था।

अरुणाचल प्रदेश का जनसंख्या घनत्व केवल 17 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था, जो राज्यों में सबसे कम था।

भारत — 382 बिहार — 1,106 अरुणाचल प्रदेश — 17
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दशकीय जनसंख्या वृद्धि

2001 से 2011 की वृद्धि

2001 से 2011 के बीच भारत की जनसंख्या की दशकीय वृद्धि दर लगभग 17.7 प्रतिशत रही। प्रारंभिक जनगणना आँकड़ों में इसे 17.64 प्रतिशत भी दिया गया था, इसलिए पुरानी प्रतियोगी पुस्तकों में यही संख्या अधिक मिलती है।

राज्यों में मेघालय ने 2001–2011 के दौरान सबसे अधिक दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर दर्ज की।

नागालैंड ने इस अवधि में नकारात्मक दशकीय वृद्धि दर्ज की और राज्यों में इसकी वृद्धि दर सबसे कम रही।

🎯 परीक्षा तथ्य

सर्वाधिक दशकीय वृद्धि — मेघालय।
सबसे कम/नकारात्मक वृद्धि — नागालैंड।

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1921 — महान विभाजक वर्ष

भारत के जनसांख्यिकीय इतिहास का महत्वपूर्ण वर्ष

भारत की जनसंख्या के इतिहास में 1921 को महान विभाजक वर्ष कहा जाता है।

1911 से 1921 के दशक में भारत की कुल जनसंख्या वृद्धि दर नकारात्मक रही। इसे जन्म वृद्धि दर का नकारात्मक होना नहीं कहा जाना चाहिए।

1921 के बाद भारत की जनसंख्या ने सामान्यतः निरंतर बढ़ती हुई प्रवृत्ति दिखाई। इसी कारण जनसंख्या अध्ययन में 1921 को पुराने स्थिर या धीमी वृद्धि वाले चरण और लगातार वृद्धि वाले अगले चरण के बीच विभाजक वर्ष माना जाता है।

⚠️ अंतर याद रखें

1911–1921 में जनसंख्या की दशकीय वृद्धि नकारात्मक थी; केवल जन्म दर को नकारात्मक नहीं कहा जाता।

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सर्वाधिक और न्यूनतम जनसंख्या वाले राज्य

उत्तर प्रदेश और सिक्किम

जनगणना 2011 के अनुसार उत्तर प्रदेश भारत का सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य था। इसकी जनसंख्या लगभग 19.98 करोड़ थी।

उत्तर प्रदेश में भारत के राज्यों में सबसे अधिक ग्रामीण जनसंख्या भी निवास करती थी।

कुल जनसंख्या में ग्रामीण आबादी के प्रतिशत की दृष्टि से स्थिति अलग है। हिमाचल प्रदेश की लगभग 90 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती थी और यह अत्यधिक ग्रामीण आबादी वाले राज्यों में सबसे ऊपर था।

सिक्किम जनगणना 2011 के अनुसार सबसे कम जनसंख्या वाला राज्य था। इसकी कुल जनसंख्या लगभग 6.10 लाख थी। राज्यों में इसकी ग्रामीण और नगरीय जनसंख्या की निरपेक्ष संख्या भी अत्यंत कम थी।

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भारत की नगरीय जनसंख्या

नगरीय आबादी और नगरीकरण

जनगणना 2011 के अनुसार राज्यों में महाराष्ट्र में सबसे अधिक निरपेक्ष नगरीय जनसंख्या निवास करती थी।

लेकिन कुल आबादी में नगरीय जनसंख्या के प्रतिशत की दृष्टि से गोवा भारत का सर्वाधिक नगरीकृत राज्य था।

सबसे अधिक नगरीकृत तीन राज्यों का प्रमुख क्रम गोवा → मिजोरम → तमिलनाडु था।

इन राज्यों में नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत क्रमशः लगभग 62.17 प्रतिशत, 51.51 प्रतिशत और 48.45 प्रतिशत था।

तमिलनाडु भारत के अत्यधिक नगरीकृत बड़े राज्यों में से एक था। हालांकि “तमिलनाडु में पूरे भारत का नगरीय जनसंख्या घनत्व सर्वाधिक है” को मानक राष्ट्रीय जनगणना ranking के रूप में याद करना सुरक्षित नहीं है।

गोवा मिजोरम तमिलनाडु
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केंद्रशासित प्रदेशों की जनसंख्या

दिल्ली और लक्षद्वीप

जनगणना 2011 के अनुसार दिल्ली सबसे अधिक जनसंख्या वाला केंद्रशासित प्रदेश था। इसकी जनसंख्या लगभग 1.68 करोड़ थी।

लक्षद्वीप सबसे कम जनसंख्या वाला केंद्रशासित प्रदेश था। इसकी जनसंख्या लगभग 64 हजार थी।

2011 की जनगणना के आँकड़े उस समय की प्रशासनिक सीमाओं के अनुसार दिए जाते हैं। इसलिए वर्तमान केंद्रशासित प्रदेशों की संरचना को 2011 की सूची से सीधे नहीं मिलाना चाहिए।

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भारत की साक्षरता

कुल, पुरुष और महिला साक्षरता

जनगणना 2011 में सात वर्ष और उससे अधिक आयु की जनसंख्या के आधार पर भारत की कुल साक्षरता दर 74.04 प्रतिशत थी।

भारत की पुरुष साक्षरता दर 82.14 प्रतिशत और महिला साक्षरता दर 65.46 प्रतिशत थी।

इस प्रकार पुरुष और महिला साक्षरता के बीच पर्याप्त अंतर था, हालांकि पिछले दशकों की तुलना में महिला साक्षरता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई थी।

⚠️ महत्वपूर्ण सुधार

भारत की कुल साक्षरता दर 73.04% नहीं, बल्कि 74.04% है।

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केरल — सर्वाधिक साक्षर राज्य

पुरुष और महिला साक्षरता में भी अग्रणी

जनगणना 2011 के अनुसार केरल भारत का सर्वाधिक साक्षर राज्य था। इसकी कुल साक्षरता दर 94.00 प्रतिशत थी।

केरल की पुरुष साक्षरता दर 96.11 प्रतिशत थी, जो राज्यों में सर्वाधिक थी।

केरल की महिला साक्षरता दर 92.07 प्रतिशत थी और यह भी राज्यों में सर्वाधिक थी।

कुल — 94.00% पुरुष — 96.11% महिला — 92.07%
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बिहार — न्यूनतम साक्षरता

2011 में राज्यों में सबसे कम

जनगणना 2011 के अनुसार बिहार राज्यों में सबसे कम साक्षरता दर वाला राज्य था। इसकी कुल साक्षरता दर 61.80 प्रतिशत थी।

बिहार की पुरुष साक्षरता दर 71.20 प्रतिशत और महिला साक्षरता दर 51.50 प्रतिशत थी।

2011 में राज्यों के बीच तुलना करने पर पुरुष और महिला दोनों साक्षरता दरों में बिहार सबसे निचले स्तर पर था।

कुल — 61.80% पुरुष — 71.20% महिला — 51.50%
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पुरुष–महिला साक्षरता अंतर

मेघालय की विशेष स्थिति

जनगणना 2011 में मेघालय में पुरुष और महिला साक्षरता दरों के बीच अंतर बहुत कम था।

मेघालय की पुरुष और महिला साक्षरता दरों के बीच अंतर लगभग 3 प्रतिशत अंक था, जो राज्यों में सबसे कम अंतरों में से था और सामान्य प्रतियोगी परीक्षाओं में इसे सबसे कम साक्षरता लैंगिक अंतर वाले राज्य के रूप में पूछा जाता है।

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केंद्रशासित प्रदेशों में साक्षरता

2011 की प्रशासनिक सीमाओं के अनुसार

जनगणना 2011 के अनुसार केंद्रशासित प्रदेशों में लक्षद्वीप की साक्षरता दर 91.85 प्रतिशत थी और यह केंद्रशासित प्रदेशों में सबसे अधिक थी।

2011 की अलग प्रशासनिक इकाइयों के आधार पर दादरा और नगर हवेली की साक्षरता दर केंद्रशासित प्रदेशों में सबसे कम थी।

दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव का बाद में विलय करके वर्तमान दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया। इसलिए वर्तमान संयुक्त केंद्रशासित प्रदेश को सीधे एकल 2011 साक्षरता ranking देना उचित नहीं है।

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भारत का लिंगानुपात

प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या

लिंगानुपात से प्रति 1,000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या का बोध होता है।

जनगणना 2011 के अनुसार भारत का कुल लिंगानुपात 943 महिलाएँ प्रति 1,000 पुरुष था।

राज्यों में केरल का लिंगानुपात सबसे अधिक 1,084 था।

राज्यों में हरियाणा का लिंगानुपात सबसे कम 879 महिलाएँ प्रति 1,000 पुरुष था।

भारत — 943 केरल — 1,084 हरियाणा — 879
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बाल लिंगानुपात

0 से 6 वर्ष आयु वर्ग

जनगणना में बाल लिंगानुपात 0 से 6 वर्ष आयु वर्ग में प्रति 1,000 बालकों पर बालिकाओं की संख्या को दर्शाता है।

जनगणना 2011 के अंतिम आँकड़ों के अनुसार भारत का बाल लिंगानुपात 919 बालिकाएँ प्रति 1,000 बालक था।

बाल लिंगानुपात और कुल लिंगानुपात दो अलग संकेतक हैं। इन्हें आपस में नहीं मिलाना चाहिए।

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केरल और बाल जनसंख्या

0–6 वर्ष आयु वर्ग का कम अनुपात

जनगणना 2011 में केरल में 0–6 वर्ष आयु वर्ग की जनसंख्या का अनुपात देश के सबसे कम अनुपातों में था, जो राज्य की कम प्रजनन दर और जनसांख्यिकीय संक्रमण से जुड़ा है।

पुरानी सामान्य ज्ञान पुस्तकों में “केरल में ग्रामीण क्षेत्रों में शिशु जनसंख्या का प्रतिशत सबसे कम है” जैसा कथन मिलता है। इसे सभी राज्यों की सार्वभौमिक राष्ट्रीय ranking के रूप में याद करने की अपेक्षा केरल में बाल जनसंख्या का अनुपात बहुत कम है के रूप में पढ़ना अधिक सुरक्षित है।

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अनुसूचित जनजाति और दंतेवाड़ा

आदिवासी जनसंख्या का उच्च अनुपात

छत्तीसगढ़ का दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिला अत्यधिक आदिवासी जनसंख्या वाले क्षेत्रों में से एक है और वहाँ अनुसूचित जनजातियों का जनसंख्या में बहुत बड़ा हिस्सा है।

हालांकि दंतेवाड़ा को पूरे भारत में सर्वाधिक अनुसूचित जनजाति प्रतिशत वाला जिला कहना सही नहीं है। भारत के पूर्वोत्तर और अन्य आदिवासी बहुल क्षेत्रों के कई जिलों में अनुसूचित जनजाति का प्रतिशत इससे भी अधिक है।

इसलिए परीक्षा के लिए दंतेवाड़ा को छत्तीसगढ़ का प्रमुख आदिवासी बहुल जिला याद करना अधिक सुरक्षित है।

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जनगणना 2011 — प्रमुख आँकड़े

एक नज़र में

संकेतक 2011 का प्रमुख तथ्य
कुल जनसंख्या लगभग 121.09 करोड़
विश्व जनसंख्या में हिस्सा लगभग 17.5%
जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी
सर्वाधिक घनत्व वाला राज्य बिहार — 1,106
सबसे कम घनत्व वाला राज्य अरुणाचल प्रदेश — 17
दशकीय वृद्धि लगभग 17.7%
सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य उत्तर प्रदेश
सबसे कम जनसंख्या वाला राज्य सिक्किम
कुल साक्षरता 74.04%
पुरुष साक्षरता 82.14%
महिला साक्षरता 65.46%
कुल लिंगानुपात 943
बाल लिंगानुपात 919
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राज्यों के महत्वपूर्ण प्रथम और अंतिम स्थान

परीक्षा के लिए त्वरित तुलना

संकेतक सर्वाधिक सबसे कम
कुल जनसंख्या उत्तर प्रदेश सिक्किम
जनसंख्या घनत्व बिहार अरुणाचल प्रदेश
दशकीय वृद्धि मेघालय नागालैंड
साक्षरता केरल बिहार
पुरुष साक्षरता केरल बिहार
महिला साक्षरता केरल बिहार
लिंगानुपात केरल हरियाणा
नगरीकरण प्रतिशत गोवा
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परीक्षा में भ्रम से बचें

महत्वपूर्ण तथ्य एक साथ

भ्रमित करने वाला तथ्य सही एवं सुरक्षित तथ्य
भारत की पहली नियमित जनगणना 1872 में हुई 1872 पहली व्यापक असमकालिक गणना थी; पहली नियमित समकालिक जनगणना 1881 में हुई।
स्वतंत्रता के बाद केवल सात जनगणनाएँ ही रहेंगी 2011 तक सात पूर्ण जनगणनाएँ हुई थीं; जनगणना 2027 की प्रक्रिया अब प्रारंभ हो चुकी है।
भारत की साक्षरता 73.04% जनगणना 2011 के अनुसार 74.04%।
केरल की महिला साक्षरता 92.01% 92.07%।
हरियाणा का लिंगानुपात 878 2011 के अंतिम आँकड़ों में 879।
1911–1921 में जन्म वृद्धि दर नकारात्मक थी कुल दशकीय जनसंख्या वृद्धि नकारात्मक थी; 1921 महान विभाजक वर्ष कहलाता है।
दंतेवाड़ा भारत का सर्वाधिक आदिवासी प्रतिशत वाला जिला है दंतेवाड़ा अत्यधिक आदिवासी बहुल जिला है, पर पूरे भारत में प्रथम कहना सही नहीं है।
तमिलनाडु का नगरीय जनसंख्या घनत्व निश्चित रूप से सर्वाधिक है मानक Census ranking में तमिलनाडु को उच्च नगरीकरण वाले बड़े राज्य के रूप में याद करें; 2011 में नगरीकरण प्रतिशत 48.45% था।
वर्तमान संयुक्त दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव 2011 में एक ही केंद्रशासित प्रदेश था 2011 में दोनों अलग-अलग केंद्रशासित प्रदेश थे; उनका विलय बाद में हुआ।
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त्वरित रिविजन

महत्वपूर्ण आँकड़े एक साथ

⚡ जनगणना क्रम

1872 — पहली असमकालिक 1881 — पहली समकालिक 2011 — 15वीं स्वतंत्रता के बाद 7वीं
घनत्व — 382 साक्षरता — 74.04% लिंगानुपात — 943 बाल लिंगानुपात — 919
जनसंख्या — उत्तर प्रदेश घनत्व — बिहार साक्षरता — केरल लिंगानुपात — केरल

⚡ अंतिम रिविजन बिंदु

जनगणना — संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची की प्रविष्टि 69; अनुच्छेद 246 से संबंधित।

1872 — भारत की पहली व्यापक असमकालिक जनगणना; लॉर्ड मेयो का काल।

1881 — भारत की पहली नियमित समकालिक जनगणना।

2011 — भारत की 15वीं जनगणना और स्वतंत्रता के बाद सातवीं जनगणना।

जनगणना 2011 के आयुक्त — डॉ. सी. चंद्रमौली।

2011 में भारत की जनसंख्या — लगभग 121.09 करोड़; विश्व जनसंख्या में हिस्सा लगभग 17.5 प्रतिशत।

भारत का जनसंख्या घनत्व — 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर।

सर्वाधिक घनत्व वाला राज्य — बिहार — 1,106 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर।

सबसे कम घनत्व वाला राज्य — अरुणाचल प्रदेश — 17 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर।

दशकीय जनसंख्या वृद्धि 2001–2011 — लगभग 17.7 प्रतिशत; प्रारंभिक आँकड़ों में 17.64 प्रतिशत।

सर्वाधिक दशकीय वृद्धि — मेघालय; सबसे कम/नकारात्मक — नागालैंड।

1921 — भारत की जनसंख्या का महान विभाजक वर्ष।

सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य — उत्तर प्रदेश — लगभग 19.98 करोड़।

सर्वाधिक ग्रामीण जनसंख्या की निरपेक्ष संख्या — उत्तर प्रदेश।

ग्रामीण जनसंख्या के बहुत उच्च प्रतिशत में हिमाचल प्रदेश अग्रणी।

सबसे कम जनसंख्या वाला राज्य — सिक्किम — लगभग 6.10 लाख।

सबसे अधिक निरपेक्ष नगरीय जनसंख्या — महाराष्ट्र।

सबसे अधिक नगरीकृत राज्य — गोवा; इसके बाद मिजोरम और तमिलनाडु।

सर्वाधिक जनसंख्या वाला केंद्रशासित प्रदेश, 2011 — दिल्ली।

सबसे कम जनसंख्या वाला केंद्रशासित प्रदेश — लक्षद्वीप।

भारत की कुल साक्षरता — 74.04 प्रतिशत।

पुरुष साक्षरता — 82.14 प्रतिशत; महिला साक्षरता — 65.46 प्रतिशत।

सर्वाधिक साक्षर राज्य — केरल — 94.00 प्रतिशत।

केरल पुरुष साक्षरता — 96.11 प्रतिशत; महिला साक्षरता — 92.07 प्रतिशत।

सबसे कम साक्षर राज्य — बिहार — 61.80 प्रतिशत।

बिहार पुरुष साक्षरता — 71.20 प्रतिशत; महिला साक्षरता — 51.50 प्रतिशत।

केंद्रशासित प्रदेशों में सर्वाधिक साक्षरता, 2011 — लक्षद्वीप — 91.85 प्रतिशत।

भारत का कुल लिंगानुपात — 943 महिलाएँ प्रति 1,000 पुरुष।

बाल लिंगानुपात — 919 बालिकाएँ प्रति 1,000 बालक।

सर्वाधिक लिंगानुपात वाला राज्य — केरल — 1,084।

सबसे कम लिंगानुपात वाला राज्य — हरियाणा — 879।

दंतेवाड़ा — छत्तीसगढ़ का प्रमुख आदिवासी बहुल जिला; इसे भारत में सर्वाधिक आदिवासी प्रतिशत वाला जिला न मानें।

जनगणना 2027 — अगली जनगणना; प्रथम चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के लिए निर्धारित।

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