मणिपुरी
मणिपुर की शास्त्रीय नृत्य परंपरा, रासलीला, प्रमुख गुरु एवं प्रसिद्ध कलाकार
मणिपुरी नृत्य
मणिपुरी भारत की प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैलियों में से एक है, जिसका उद्गम पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर में हुआ। इस नृत्य की प्रमुख पहचान कोमल, गोलाकार और प्रवाहपूर्ण शारीरिक गतियाँ तथा भक्ति-प्रधान भाव हैं।
मणिपुरी नृत्य का सबसे प्रसिद्ध रूप रासलीला है, जिसमें राधा-कृष्ण और गोपियों की कृष्ण-भक्ति तथा दिव्य प्रेम को प्रस्तुत किया जाता है। इसके साथ ही मणिपुर की नृत्य परंपरा में नट-संकीर्तन, पुंग चोलोम और लाई हराओबा जैसी महत्वपूर्ण परंपराएँ भी जुड़ी हुई हैं।
मणिपुरी नृत्य में अन्य कई शास्त्रीय नृत्य शैलियों की तुलना में चेहरे के भाव अपेक्षाकृत संयमित और शरीर की गतियाँ अधिक कोमल दिखाई देती हैं। रासलीला में भक्ति और आध्यात्मिक प्रेम प्रमुख भाव होते हैं।
मणिपुरी नृत्य की प्रमुख विशेषताएँ
शैली, भाव और प्रस्तुति
- मणिपुरी नृत्य का उद्गम मणिपुर में हुआ।
- इसका सर्वाधिक प्रसिद्ध शास्त्रीय रूप रासलीला है।
- रासलीला की विषय-वस्तु मुख्य रूप से राधा-कृष्ण की भक्ति और प्रेम से संबंधित है।
- इस नृत्य की गतियाँ सामान्यतः कोमल, गोलाकार और प्रवाहपूर्ण होती हैं।
- नर्तकियों के शरीर में कठोर झटकों की अपेक्षा सौम्य और नियंत्रित गतियों को महत्व दिया जाता है।
- पुरुषों की प्रस्तुतियों में पुंग चोलोम जैसी अत्यंत ऊर्जावान और कलाबाजीपूर्ण शैली भी दिखाई देती है।
- मणिपुरी परंपरा में नट-संकीर्तन का विशेष स्थान है, जिसमें गायन, वादन और नृत्य का समन्वय होता है।
🎯 परीक्षा तथ्य
मणिपुरी — मणिपुर — रासलीला — राधा-कृष्ण भक्ति — कोमल एवं गोलाकार गतियाँ।
रासलीला
मणिपुरी की प्रमुख भक्ति परंपरा
रासलीला मणिपुरी नृत्य का सर्वाधिक प्रसिद्ध रूप है। इसमें भगवान कृष्ण, राधा और गोपियों की कथाओं के माध्यम से भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक समर्पण को प्रस्तुत किया जाता है।
मणिपुर में वैष्णव धर्म के प्रसार के बाद राधा-कृष्ण भक्ति का प्रभाव नृत्य परंपरा पर अत्यंत गहरा हुआ। मणिपुर के राजा भाग्यचंद्र का नाम रासलीला के व्यवस्थित विकास से विशेष रूप से जोड़ा जाता है।
रासलीला में महिला नर्तकियों की वेशभूषा अत्यंत विशिष्ट होती है। गोपियों द्वारा पहनी जाने वाली बेलनाकार, सजी हुई लंबी स्कर्ट को सामान्यतः पोटलोई कहा जाता है।
📗 याद रखें
रासलीला = राधा + कृष्ण + गोपियाँ + वैष्णव भक्ति।
झावेरी बहनें
मणिपुरी के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रसार में योगदान
झावेरी बहनें मणिपुरी नृत्य के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। चारों बहनों के नाम नयना झावेरी, रंजना झावेरी, सुवर्णा झावेरी और दर्शना झावेरी हैं।
चारों बहनों ने महान मणिपुरी गुरु बिपिन सिंह से प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने मणिपुरी नृत्य की मंदिर और पारंपरिक प्रस्तुति को भारत के बड़े शहरों तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1950 के दशक से झावेरी बहनों ने देश-विदेश में एक साथ प्रस्तुतियाँ देना शुरू किया। वे ऐसी गैर-मणिपुरी कलाकारों में थीं जिन्होंने मणिपुरी नृत्य को अपने जीवन का प्रमुख साधना-क्षेत्र बनाया।
वर्ष 1956 में झावेरी बहनों ने इंफाल के राजमहल परिसर स्थित गोविंदजी मंदिर में मणिपुरी नृत्य प्रस्तुत किया। इसे उनकी नृत्य-यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जाता है।
चारों झावेरी बहनें
दर्शना झावेरी
झावेरी बहनों में सबसे छोटी
दर्शना झावेरी झावेरी बहनों में सबसे छोटी हैं और आधुनिक समय की प्रमुख मणिपुरी नृत्यांगनाओं तथा गुरुओं में गिनी जाती हैं। उन्होंने गुरु बिपिन सिंह से मणिपुरी नृत्य का गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया।
उन्होंने रासलीला के अतिरिक्त मणिपुरी नृत्य की विभिन्न पारंपरिक विधाओं का अध्ययन किया और लंबे समय तक शिक्षण, शोध तथा प्रस्तुति के माध्यम से इस शैली का संरक्षण किया।
दर्शना झावेरी को वर्ष 1996 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार तथा वर्ष 2002 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
🎯 परीक्षा तथ्य
दर्शना झावेरी — मणिपुरी — संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1996 — पद्म श्री 2002।
गुरु बिपिन सिंह
आधुनिक मणिपुरी के प्रमुख गुरु
गुरु बिपिन सिंह 20वीं शताब्दी के सबसे महत्वपूर्ण मणिपुरी नृत्य गुरुओं, नृत्य-संयोजकों और शिक्षकों में से एक थे। उन्होंने मणिपुरी की परंपरागत विधाओं का अध्ययन करके उन्हें व्यवस्थित मंचीय रूप देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
झावेरी बहनें उनकी प्रमुख शिष्याओं में थीं। उनकी नृत्य परंपरा से कलावती देवी और बिम्बावती देवी भी निकट रूप से जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने महिलाओं के मणिपुरी नृत्य प्रशिक्षण के लिए इंफाल में गोविंदजी नर्तनालय की स्थापना से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा बाद में मणिपुरी नर्तनालय की स्थापना में भी योगदान दिया।
गुरु बिपिन सिंह को वर्ष 1966 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
गुरु मैसनाम अमूबी सिंह
मणिपुरी के महान गुरु
मैसनाम अमूबी सिंह मणिपुरी नृत्य के महान गुरुओं में से एक थे। सामान्य प्रतियोगी परीक्षा की कुछ पुस्तकों में उनका नाम “गुरु अमली सिंह” जैसे रूप में लिखा मिलता है, जिससे नाम को लेकर भ्रम उत्पन्न हो सकता है। प्रमुख दस्तावेज़ी नाम गुरु मैसनाम अमूबी सिंह है।
उन्होंने मणिपुरी नृत्य की पारंपरिक शैली के विकास, संरक्षण और व्यवस्थित प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें मणिपुरी में एकल नृत्य की संभावनाओं को विकसित करने वाले महत्वपूर्ण गुरुओं में भी गिना जाता है।
वे जवाहरलाल नेहरू मणिपुर नृत्य अकादमी के आरंभिक प्रमुख गुरुओं से जुड़े रहे और संस्था में प्रशिक्षण व्यवस्था के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान था।
उन्हें वर्ष 1956 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला। वे मणिपुर से इस पुरस्कार को प्राप्त करने वाले शुरुआती और अत्यंत महत्वपूर्ण कलाकारों में थे। वर्ष 1970 में पद्म श्री से भी उन्हें सम्मानित किया गया।
⚠️ नाम में सावधानी
पुरानी सामान्य ज्ञान सूचियों में मिलने वाले “गुरु अमली सिंह” को बिना जाँच के न लिखें। प्रमाणित प्रमुख मणिपुरी गुरु का नाम मैसनाम अमूबी सिंह है।
राजकुमार सिंघजीत सिंह
मणिपुरी के महान गुरु, नर्तक और विद्वान
राजकुमार सिंघजीत सिंह मणिपुरी नृत्य के महान कलाकार, गुरु, नृत्य-संयोजक और विद्वान थे। उनका जन्म वर्ष 1931 में मणिपुर में हुआ था।
वे मणिपुरी की रासलीला के साथ-साथ पुंग चोलोम जैसी ऊर्जावान पुरुष नृत्य परंपराओं के भी प्रमुख ज्ञाता और प्रस्तुतकर्ता थे।
उन्होंने अपनी पत्नी और प्रसिद्ध नृत्यांगना चारु सिजा माथुर के साथ मणिपुरी नृत्य के प्रशिक्षण और प्रचार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्हें वर्ष 1984 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, वर्ष 1986 में पद्म श्री तथा बाद में संगीत नाटक अकादमी की सर्वोच्च फेलोशिप से सम्मानित किया गया।
🎯 परीक्षा तथ्य
राजकुमार सिंघजीत सिंह — मणिपुरी — संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1984 — पद्म श्री 1986।
चारु माथुर
मणिपुरी की प्रमुख नृत्यांगना
आपकी सूची में दिया गया चारु माथुर नाम प्रसिद्ध मणिपुरी नृत्यांगना चारु सिजा माथुर से संबंधित है। वे मणिपुरी नृत्य के प्रमुख गुरु राजकुमार सिंघजीत सिंह की पत्नी और कलात्मक सहयोगी थीं।
उन्होंने मणिपुरी नृत्य के प्रदर्शन, शिक्षण और नृत्य-संयोजन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया और राजकुमार सिंघजीत सिंह के साथ मिलकर इस नृत्य शैली को व्यापक मंच प्रदान किया।
📗 नाम याद रखें
चारु माथुर = चारु सिजा माथुर — मणिपुरी नृत्यांगना — राजकुमार सिंघजीत सिंह से कलात्मक संबंध।
कलावती देवी
गुरु बिपिन सिंह की परंपरा
कलावती देवी मणिपुरी नृत्य की प्रसिद्ध कलाकार और गुरु हैं। उनका नाम गुरु बिपिन सिंह की मणिपुरी नृत्य परंपरा से विशेष रूप से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने रासलीला और मणिपुरी की अन्य पारंपरिक विधाओं को मंच पर प्रस्तुत करने तथा नई पीढ़ी को प्रशिक्षण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गुरु बिपिन सिंह, कलावती देवी तथा झावेरी बहनों के संयुक्त प्रयासों से मणिपुरी नर्तनालय की स्थापना हुई, जिसने मणिपुरी नृत्य के प्रशिक्षण और प्रचार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कलावती देवी और गुरु बिपिन सिंह की पुत्री बिम्बावती देवी ने भी आगे चलकर इस नृत्य परंपरा को आगे बढ़ाया।
बिम्बावती देवी
मणिपुरी की नई पीढ़ी की प्रमुख कलाकार
बिम्बावती देवी प्रसिद्ध मणिपुरी नृत्यांगना हैं। वे महान मणिपुरी गुरु बिपिन सिंह और कलावती देवी की पुत्री हैं।
उन्होंने बहुत कम आयु से मणिपुरी नृत्य और संगीत का प्रशिक्षण प्राप्त किया। नृत्य के साथ उन्होंने पुंग वादन तथा मणिपुर की युद्धकला थांग-ता का भी प्रशिक्षण लिया।
बिम्बावती देवी ने अपने माता-पिता से प्राप्त मणिपुरी नृत्य परंपरा को मंचीय प्रस्तुतियों, प्रशिक्षण और नृत्य-संयोजन के माध्यम से आगे बढ़ाया।
एल. बिनो देवी
मणिपुरी की प्रमुख कलाकार
आपकी सूची में दिया गया एल. बिनो देवी नाम मणिपुरी नृत्य से संबंधित प्रसिद्ध कलाकार लाइपुबाम बिनो देवी के संदर्भ में पढ़ा जाता है।
वे मणिपुरी नृत्य की प्रमुख कलाकारों में गिनी जाती हैं और उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली।
उन्हें वर्ष 2009 के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मणिपुरी नृत्य के क्षेत्र में प्रदान किया गया।
🎯 परीक्षा तथ्य
एल. बिनो देवी — मणिपुरी नृत्य — संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार।
गुरु नीलेश्वर मुखर्जी
मणिपुरी के प्रारंभिक प्रसार से जुड़ा महत्वपूर्ण नाम
गुरु नीलेश्वर मुखर्जी मणिपुरी नृत्य से जुड़े महत्वपूर्ण गुरु और कलाकार थे। प्रतियोगी परीक्षाओं में उनका नाम मणिपुरी नृत्य के साथ पूछा जा चुका है।
उनका नाम विशेष रूप से मणिपुरी नृत्य के शांतिनिकेतन तक पहुँचने और रवीन्द्रनाथ ठाकुर के समय इसके प्रसार से जुड़ी परंपरा में मिलता है।
रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने मणिपुरी रास से प्रभावित होकर इस नृत्य शैली को शांतिनिकेतन की कला-शिक्षा में स्थान दिया। इस प्रक्रिया से नीलेश्वर मुखर्जी जैसे गुरुओं का नाम जुड़ा मिलता है।
🎯 परीक्षा में सीधा प्रश्न
गुरु नीलेश्वर मुखर्जी किस शास्त्रीय नृत्य के प्रतिपादक थे? — मणिपुरी।
नलकुमार सिंह
मणिपुरी कलाकार-सूचियों में प्रमुख नाम
नलकुमार सिंह का नाम अनेक प्रतियोगी परीक्षा तथा भारतीय नृत्य संबंधी कलाकार-सूचियों में मणिपुरी नृत्य के प्रमुख कलाकारों के साथ दिया जाता है।
इस नाम के संबंध में विस्तृत एवं एकसमान जीवन-वृत्त प्रमुख मानक स्रोतों में आसानी से उपलब्ध नहीं मिलता, इसलिए इसे किसी अन्य समान नाम वाले कलाकार के साथ जोड़कर अतिरिक्त जीवनी तथ्य याद करना उचित नहीं है।
परीक्षा के लिए सुरक्षित संबंध है — नलकुमार सिंह = मणिपुरी नृत्य।
सविता मेहता और निर्मला मेहता
मणिपुरी से जुड़े प्रमुख नाम
सविता मेहता का नाम मणिपुरी नृत्य की प्रमुख कलाकार-सूचियों में मिलता है और प्रतियोगी परीक्षाओं में उन्हें मणिपुरी नृत्य से जोड़कर पढ़ा जाता है।
निर्मला मेहता भी मणिपुरी नृत्य से संबंधित कलाकारों की पारंपरिक सामान्य ज्ञान सूची में शामिल हैं।
इन दोनों नामों के साथ अत्यधिक विशिष्ट पुरस्कार या जीवनी संबंधी तथ्य बिना प्रमाणित संदर्भ के नहीं जोड़ने चाहिए। परीक्षा के लिए उनका मुख्य संबंध मणिपुरी नृत्य से याद रखना पर्याप्त है।
मणिपुरी के प्रमुख कलाकार
सभी महत्वपूर्ण नाम एक स्थान पर
| कलाकार | मुख्य पहचान |
|---|---|
| नयना झावेरी | झावेरी बहनें; गुरु बिपिन सिंह की शिष्या |
| सुवर्णा झावेरी | झावेरी बहनें; मणिपुरी की प्रमुख नृत्यांगना |
| रंजना झावेरी | झावेरी बहनें; मणिपुरी का प्रचार एवं प्रशिक्षण |
| दर्शना झावेरी | झावेरी बहनों में सबसे छोटी; पद्म श्री 2002 |
| गुरु मैसनाम अमूबी सिंह | महान मणिपुरी गुरु; पद्म श्री 1970 |
| नलकुमार सिंह | मणिपुरी से जुड़ा प्रमुख कलाकार नाम |
| एल. बिनो देवी | लाइपुबाम बिनो देवी; मणिपुरी नृत्य |
| चारु माथुर | चारु सिजा माथुर; प्रमुख मणिपुरी नृत्यांगना |
| सविता मेहता | मणिपुरी से जुड़ी कलाकार |
| कलावती देवी | प्रमुख गुरु; गुरु बिपिन सिंह की नृत्य परंपरा |
| बिम्बावती देवी | गुरु बिपिन सिंह और कलावती देवी की पुत्री |
| निर्मला मेहता | मणिपुरी से जुड़ी कलाकार |
| राजकुमार सिंघजीत सिंह | महान मणिपुरी गुरु; पद्म श्री 1986 |
| गुरु नीलेश्वर मुखर्जी | मणिपुरी गुरु; शांतिनिकेतन से जुड़ी परंपरा |
नामों में महत्वपूर्ण सावधानियाँ
परीक्षा में भ्रम से बचने के लिए
- झावेरी बहनें चार हैं — नयना, रंजना, सुवर्णा और दर्शना झावेरी।
- दर्शना झावेरी झावेरी बहनों में सबसे छोटी हैं।
- पुरानी सूचियों में मिलने वाले “गुरु अमली सिंह” नाम को सावधानी से पढ़ें; प्रसिद्ध प्रमाणित गुरु मैसनाम अमूबी सिंह हैं।
- एल. बिनो देवी का नाम लाइपुबाम बिनो देवी के रूप में मिलता है।
- चारु माथुर का विस्तृत नाम चारु सिजा माथुर मिलता है।
- बिम्बावती देवी गुरु बिपिन सिंह और कलावती देवी की पुत्री हैं।
- राजकुमार सिंघजीत सिंह और गुरु बिपिन सिंह अलग-अलग महान मणिपुरी गुरु हैं; दोनों नामों को आपस में न मिलाएँ।
- गुरु नीलेश्वर मुखर्जी को मणिपुरी नृत्य से जोड़कर याद करें।
- नलकुमार सिंह, सविता मेहता और निर्मला मेहता जैसे नाम सामान्य कलाकार-सूचियों में मिलते हैं; इनके साथ बिना प्रमाणित स्रोत के अतिरिक्त पुरस्कार या जीवनी तथ्य न जोड़ें।
त्वरित पुनरावृत्ति
परीक्षा से पहले एक नज़र
⚡ अंतिम पुनरावृत्ति
मणिपुरी — मणिपुर की प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैली; रासलीला इसका सर्वाधिक प्रसिद्ध रूप है।
रासलीला — राधा, कृष्ण और गोपियों की भक्ति एवं दिव्य प्रेम पर आधारित।
झावेरी बहनें — नयना झावेरी, रंजना झावेरी, सुवर्णा झावेरी और दर्शना झावेरी।
झावेरी बहनों के गुरु — गुरु बिपिन सिंह।
दर्शना झावेरी — संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1996 तथा पद्म श्री 2002।
गुरु मैसनाम अमूबी सिंह — मणिपुरी के महान गुरु; संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1956 और पद्म श्री 1970।
राजकुमार सिंघजीत सिंह — प्रमुख मणिपुरी गुरु; संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1984 और पद्म श्री 1986।
कलावती देवी — गुरु बिपिन सिंह की मणिपुरी नृत्य परंपरा की प्रमुख कलाकार और गुरु।
बिम्बावती देवी — गुरु बिपिन सिंह और कलावती देवी की पुत्री तथा प्रमुख मणिपुरी नृत्यांगना।
एल. बिनो देवी — लाइपुबाम बिनो देवी; मणिपुरी नृत्य से संबंधित प्रमुख कलाकार।
चारु माथुर — चारु सिजा माथुर; राजकुमार सिंघजीत सिंह के साथ मणिपुरी नृत्य के प्रचार और प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण योगदान।
गुरु नीलेश्वर मुखर्जी — मणिपुरी नृत्य से संबंधित महत्वपूर्ण गुरु; शांतिनिकेतन तक मणिपुरी के प्रसार से जुड़ा नाम।
अन्य महत्वपूर्ण नाम — नलकुमार सिंह, सविता मेहता और निर्मला मेहता।
आपके सभी मुख्य कलाकार: नयना झावेरी, सुवर्णा झावेरी, रंजना झावेरी, दर्शना झावेरी, गुरु मैसनाम अमूबी सिंह, नलकुमार सिंह, एल. बिनो देवी, चारु माथुर, सविता मेहता, कलावती देवी, बिम्बावती देवी, निर्मला मेहता, राजकुमार सिंघजीत सिंह और गुरु नीलेश्वर मुखर्जी।