मोहिनीअट्टम
केरल की लास्य-प्रधान शास्त्रीय नृत्य शैली और उसके प्रमुख कलाकार
मोहिनीअट्टम का परिचय
मोहिनीअट्टम भारत की प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैलियों में से एक है और इसका उद्भव केरल में हुआ। यह अपनी कोमल, लयपूर्ण और लास्य-प्रधान गतियों के लिए प्रसिद्ध है।
“मोहिनीअट्टम” नाम में “मोहिनी” का संबंध भगवान विष्णु के मोहिनी रूप से माना जाता है, जबकि “अट्टम” का अर्थ नृत्य या अभिनय से है।
यह नृत्य मुख्यतः लास्य शैली पर आधारित है। इसमें शरीर की कोमल गति, भाव-अभिनय, हाथों की मुद्राएँ और धीमी तथा गोलाकार गतियाँ विशेष महत्व रखती हैं।
परंपरागत रूप से मोहिनीअट्टम मुख्यतः महिलाओं द्वारा प्रस्तुत किया जाता रहा है, हालांकि वर्तमान समय में पुरुष कलाकार भी इसका अभ्यास और प्रदर्शन करते हैं।
मोहिनीअट्टम की वेशभूषा इसकी विशेष पहचान है। सामान्यतः नृत्यांगना सफेद या हाथीदाँत रंग की पोशाक पर सुनहरी किनारी पहनती है। बालों का जूड़ा प्रायः सिर के एक ओर बनाया जाता है और उसमें फूल लगाए जाते हैं।
इसके संगीत में मुख्यतः दक्षिण भारतीय संगीत परंपरा का प्रभाव मिलता है। गीतों में मलयालम और संस्कृत के मिश्रित रूप मणिप्रवालम् का भी प्रयोग मिलता है।
मोहिनीअट्टम का विकास और पुनरुत्थान
केरल की परंपरा से आधुनिक मंच तक
मोहिनीअट्टम की परंपरा केरल में विकसित हुई। इसके इतिहास में मंदिर-संस्कृति, राजाश्रय और केरल की स्थानीय प्रदर्शन परंपराओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
त्रावणकोर के महाराजा स्वाति तिरुनाल के काल में 19वीं शताब्दी में मोहिनीअट्टम को महत्वपूर्ण राजाश्रय मिला और इसकी प्रस्तुति तथा संगीत-रचना को बढ़ावा मिला।
20वीं शताब्दी में यह नृत्य शैली कमजोर पड़ने लगी थी। इसके पुनरुत्थान में कवि वल्लथोल नारायण मेनन और केरल कलामंडलम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
केरल कलामंडलम की स्थापना 1930 में हुई। इस संस्था ने कथकली के साथ मोहिनीअट्टम जैसी केरल की परंपरागत कलाओं के संरक्षण और प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया।
आधुनिक मोहिनीअट्टम के पुनरुत्थान, प्रशिक्षण और संरचना में कलामंडलम कल्याणीकुट्टी अम्मा का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्हें मोहिनीअट्टम की प्रमुख पुनरुद्धारक हस्तियों में गिना जाता है।
🎯 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण
मोहिनीअट्टम — केरल की शास्त्रीय नृत्य शैली।
मुख्य प्रकृति — लास्य प्रधान।
पुनरुत्थान — वल्लथोल नारायण मेनन और केरल कलामंडलम।
प्रमुख पुनरुद्धारक नृत्यांगना — कलामंडलम कल्याणीकुट्टी अम्मा।
मोहिनीअट्टम के प्रमुख कलाकार
महत्वपूर्ण नाम एक नज़र में
भारती शिवाजी
मोहिनीअट्टम की प्रमुख नृत्यांगना और शोधकर्ता।
रागिनी देवी
भारतीय शास्त्रीय नृत्य के प्रचार और अध्ययन से जुड़ी महत्वपूर्ण कलाकार।
कल्याणीकुट्टी अम्मा
आधुनिक मोहिनीअट्टम की प्रमुख पुनरुद्धारक।
शांता राव
दक्षिण भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपराओं की प्रसिद्ध कलाकार।
कलामंडलम क्षेमवती
केरल की प्रसिद्ध मोहिनीअट्टम नृत्यांगना।
डॉ. सुनंदा नायर
मोहिनीअट्टम की प्रमुख समकालीन नृत्यांगना और शोधकर्ता।
जया प्रभा मेनन
मोहिनीअट्टम नृत्यांगना और नृत्य-निर्देशिका।
स्मिता राजन
कल्याणीकुट्टी अम्मा की परंपरा की प्रमुख नृत्यांगना।
राधा दत्ता
मोहिनीअट्टम सहित भारतीय नृत्य परंपराओं से जुड़ी कलाकार।
कलामंडलम कल्याणीकुट्टी अम्मा
मोहिनीअट्टम के पुनरुत्थान की प्रमुख हस्ती
कलामंडलम कल्याणीकुट्टी अम्मा केरल की प्रसिद्ध मोहिनीअट्टम नृत्यांगना, गुरु और शोधकर्ता थीं। आधुनिक काल में मोहिनीअट्टम को पुनर्जीवित और व्यवस्थित करने में उनका असाधारण योगदान माना जाता है।
उनका जन्म 1915 में हुआ और निधन 1999 में हुआ।
उन्होंने केरल कलामंडलम में मोहिनीअट्टम का प्रशिक्षण प्राप्त किया और बाद में इस नृत्य शैली के प्रशिक्षण, शोध और प्रसार को अपना जीवन समर्पित किया।
उन्होंने मोहिनीअट्टम की परंपरागत तकनीक, अभिनय और प्रस्तुति-पद्धति को व्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी कारण उन्हें अक्सर “मोहिनीअट्टम की जननी” जैसी सम्मानजनक उपाधि से याद किया जाता है।
उन्हें केरल संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1974 तथा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1978 से सम्मानित किया गया।
📗 याद रखें
कल्याणीकुट्टी अम्मा — मोहिनीअट्टम के पुनरुत्थान, शोध और प्रशिक्षण की प्रमुख हस्ती।
भारती शिवाजी
मोहिनीअट्टम नृत्यांगना और शोधकर्ता
भारती शिवाजी मोहिनीअट्टम की प्रमुख नृत्यांगना, गुरु, नृत्य-निर्देशिका और शोधकर्ता हैं। उनका जन्म तमिलनाडु में हुआ, लेकिन उन्होंने मोहिनीअट्टम के अध्ययन, पुनर्व्याख्या और प्रचार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने कलामंडलम कल्याणीकुट्टी अम्मा सहित मोहिनीअट्टम की पारंपरिक गुरुओं से प्रशिक्षण प्राप्त किया।
भारती शिवाजी ने मोहिनीअट्टम को केरल के बाहर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार तथा पद्म श्री सहित महत्वपूर्ण सम्मानों से सम्मानित किया गया।
मोहिनीअट्टम पर उनका शोध और लेखन भी महत्वपूर्ण है।
रागिनी देवी
भारतीय नृत्य की अध्ययनशील कलाकार
रागिनी देवी भारतीय शास्त्रीय नृत्य के अध्ययन और प्रचार से जुड़ी महत्वपूर्ण नृत्यांगना थीं। उनका मूल नाम एस्थर लुएला शर्मन था और वे अमेरिका में जन्मी थीं।
भारत आने के बाद उन्होंने भारतीय संस्कृति और नृत्य परंपराओं का अध्ययन किया और “रागिनी देवी” नाम अपनाया।
उन्होंने भारतीय शास्त्रीय नृत्य की विभिन्न परंपराओं के प्रचार में योगदान दिया। मोहिनीअट्टम से उनका संबंध इसके अध्ययन और प्रस्तुति-परंपरा के व्यापक प्रचार के संदर्भ में पढ़ा जाता है।
प्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना इंद्राणी रहमान उनकी पुत्री थीं।
शांता राव
अनेक दक्षिण भारतीय नृत्य परंपराओं की कलाकार
शांता राव भारत की प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना थीं। उन्होंने भरतनाट्यम, कथकली और मोहिनीअट्टम सहित दक्षिण भारत की विभिन्न नृत्य परंपराओं का अध्ययन और प्रदर्शन किया।
इसलिए शांता राव को केवल एक नृत्य शैली तक सीमित करके नहीं पढ़ना चाहिए। मोहिनीअट्टम के साथ उनका नाम भारतीय शास्त्रीय नृत्यों की बहु-शैली परंपरा में जुड़ता है।
कलामंडलम क्षेमवती
केरल की प्रसिद्ध मोहिनीअट्टम नृत्यांगना
कलामंडलम क्षेमवती केरल की प्रसिद्ध मोहिनीअट्टम नृत्यांगना और गुरु हैं। उनका प्रशिक्षण केरल कलामंडलम की परंपरा से जुड़ा है।
उन्होंने मोहिनीअट्टम की परंपरागत शैली के संरक्षण और नई पीढ़ी तक इसके प्रशिक्षण को पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्हें नृत्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्म श्री सहित महत्वपूर्ण सम्मान प्राप्त हुए हैं।
🎯 परीक्षा तथ्य
कलामंडलम क्षेमवती — मोहिनीअट्टम — केरल।
डॉ. सुनंदा नायर
मोहिनीअट्टम नृत्यांगना और शोधकर्ता
डॉ. सुनंदा नायर मोहिनीअट्टम की प्रसिद्ध समकालीन नृत्यांगना, गुरु और शोधकर्ता हैं।
वे प्रसिद्ध मोहिनीअट्टम नृत्यांगना और विदुषी डॉ. कनक रेले की शिष्या रही हैं और नालंदा परंपरा से जुड़ी हैं।
उन्होंने मोहिनीअट्टम में उच्च शिक्षा और शोध किया तथा इस नृत्य शैली की अभिव्यक्ति और स्त्री-सौंदर्य संबंधी पक्षों पर अकादमिक कार्य भी किया।
उन्हें केरल संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं।
जया प्रभा मेनन
समकालीन मोहिनीअट्टम की प्रमुख नृत्यांगना
जया प्रभा मेनन केरल में जन्मी प्रसिद्ध मोहिनीअट्टम नृत्यांगना और नृत्य-निर्देशिका हैं।
उन्होंने भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी का भी प्रशिक्षण लिया, लेकिन उनकी प्रमुख पहचान मोहिनीअट्टम से है।
मोहिनीअट्टम में उन्होंने भारती शिवाजी के मार्गदर्शन में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया।
उन्हें केरल संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2015 से सम्मानित किया गया।
स्मिता राजन
कल्याणीकुट्टी अम्मा की पारिवारिक नृत्य परंपरा
स्मिता राजन केरल की प्रसिद्ध मोहिनीअट्टम नृत्यांगना हैं। वे महान मोहिनीअट्टम गुरु कलामंडलम कल्याणीकुट्टी अम्मा की नातिन हैं।
उनकी माता श्रीदेवी राजन भी प्रसिद्ध मोहिनीअट्टम नृत्यांगना और गुरु हैं। इस प्रकार स्मिता राजन मोहिनीअट्टम की एक महत्वपूर्ण पारिवारिक गुरु-शिष्य परंपरा का प्रतिनिधित्व करती हैं।
स्मिता राजन ने मोहिनीअट्टम के साथ भरतनाट्यम, कथकली और कुचिपुड़ी का भी प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
उन्हें केरल संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2014 प्राप्त हुआ।
राधा दत्ता
मोहिनीअट्टम और भारतीय नृत्य परंपरा
राधा दत्ता का नाम मोहिनीअट्टम से जुड़े कलाकारों में मिलता है। उन्होंने मोहिनीअट्टम सहित भारतीय नृत्य की विभिन्न शैलियों का अभ्यास और प्रदर्शन किया है।
उनका संबंध स्मिता राजन की नृत्य-परंपरा से भी बताया जाता है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में राधा दत्ता का नाम मोहिनीअट्टम कलाकार के रूप में पूछा जा चुका है, इसलिए उनका नाम याद रखना उपयोगी है।
हेमामालिनी और श्रीदेवी — नाम में सावधानी
फिल्मी कलाकारों और मोहिनीअट्टम कलाकारों में भ्रम से बचें
हेमामालिनी प्रसिद्ध अभिनेत्री होने के साथ प्रशिक्षित शास्त्रीय नृत्यांगना हैं, लेकिन उनकी मुख्य शास्त्रीय पहचान भरतनाट्यम से है। उन्हें मोहिनीअट्टम की प्रमुख पारंपरिक नृत्यांगनाओं की मानक सूची में रखना उचित नहीं है।
कुछ सामान्य ज्ञान पुस्तकों में हेमामालिनी का नाम मोहिनीअट्टम से जुड़ी सूची में मिलता है, पर परीक्षा में उनकी मुख्य नृत्य पहचान भरतनाट्यम के रूप में याद रखना अधिक सुरक्षित है।
“श्रीदेवी” नाम में भी विशेष सावधानी आवश्यक है। प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री श्रीदेवी को मोहिनीअट्टम की मानक प्रमुख नृत्यांगना नहीं माना जाता।
मोहिनीअट्टम के संदर्भ में अधिक महत्वपूर्ण नाम श्रीदेवी राजन है, जो कलामंडलम कल्याणीकुट्टी अम्मा की पुत्री और मोहिनीअट्टम की प्रसिद्ध नृत्यांगना एवं गुरु हैं।
इसलिए मोहिनीअट्टम के कलाकारों की सूची में केवल “श्रीदेवी” लिखे होने पर उसे सीधे फिल्म अभिनेत्री श्रीदेवी से नहीं जोड़ना चाहिए।
⚠️ परीक्षा में भ्रम से बचें
हेमामालिनी — मुख्य शास्त्रीय पहचान भरतनाट्यम।
श्रीदेवी राजन — मोहिनीअट्टम की महत्वपूर्ण नृत्यांगना।
फिल्म अभिनेत्री श्रीदेवी — मोहिनीअट्टम की मानक प्रमुख कलाकार नहीं।
डॉ. कनक रेले
मोहिनीअट्टम की विदुषी और पुनरुद्धारक
डॉ. कनक रेले आधुनिक मोहिनीअट्टम की सबसे महत्वपूर्ण विदुषियों, नृत्यांगनाओं और शोधकर्ताओं में गिनी जाती हैं।
उन्होंने मोहिनीअट्टम की परंपरागत शैली का गहन अध्ययन किया और उसकी तकनीक को शैक्षणिक तथा शोध-आधारित स्वरूप प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने मुंबई में नालंदा नृत्य अनुसंधान केंद्र की स्थापना की और नृत्य शिक्षा को विश्वविद्यालयीय अध्ययन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डॉ. सुनंदा नायर सहित अनेक प्रमुख कलाकार उनकी परंपरा से जुड़े हैं।
📗 अत्यंत महत्वपूर्ण
कल्याणीकुट्टी अम्मा + कनक रेले + भारती शिवाजी — आधुनिक मोहिनीअट्टम के अध्ययन, पुनरुत्थान और प्रसार के तीन अत्यंत महत्वपूर्ण नाम।
मोहिनीअट्टम की प्रमुख विशेषताएँ
नृत्य शैली की पहचान
| विशेषता | मुख्य तथ्य |
|---|---|
| संबंधित राज्य | केरल |
| नृत्य की प्रकृति | कोमल, लास्य-प्रधान और भावपूर्ण |
| नाम का संबंध | भगवान विष्णु के मोहिनी रूप से |
| पारंपरिक प्रस्तुति | मुख्यतः महिला एकल नृत्य |
| वेशभूषा | सफेद या हाथीदाँत रंग की पोशाक पर सुनहरी किनारी |
| मुख्य भाव | लास्य, कोमलता और भाव-अभिनय |
| भाषायी परंपरा | मलयालम, संस्कृत तथा मणिप्रवालम् |
| पुनरुत्थान | वल्लथोल नारायण मेनन और केरल कलामंडलम |
| प्रमुख गुरु | कलामंडलम कल्याणीकुट्टी अम्मा |
प्रमुख कलाकार — एक नज़र में
त्वरित परीक्षा तालिका
| कलाकार | मुख्य पहचान |
|---|---|
| कलामंडलम कल्याणीकुट्टी अम्मा | मोहिनीअट्टम के पुनरुत्थान की प्रमुख गुरु |
| भारती शिवाजी | मोहिनीअट्टम नृत्यांगना, गुरु और शोधकर्ता |
| रागिनी देवी | भारतीय शास्त्रीय नृत्य के प्रचार और अध्ययन से जुड़ी कलाकार |
| शांता राव | मोहिनीअट्टम सहित अनेक दक्षिण भारतीय नृत्य शैलियों की कलाकार |
| कलामंडलम क्षेमवती | केरल की प्रमुख मोहिनीअट्टम नृत्यांगना |
| डॉ. सुनंदा नायर | मोहिनीअट्टम नृत्यांगना और शोधकर्ता |
| जया प्रभा मेनन | मोहिनीअट्टम नृत्यांगना; भारती शिवाजी की परंपरा से जुड़ी |
| स्मिता राजन | कल्याणीकुट्टी अम्मा की नातिन; मोहिनीअट्टम नृत्यांगना |
| राधा दत्ता | मोहिनीअट्टम से जुड़ी कलाकार |
| श्रीदेवी राजन | कल्याणीकुट्टी अम्मा की पुत्री; मोहिनीअट्टम गुरु |
| डॉ. कनक रेले | आधुनिक मोहिनीअट्टम की प्रमुख विदुषी और शोधकर्ता |
त्वरित पुनरावृत्ति
एसएससी और रेलवे के लिए
⚡ एक नज़र में
⚡ अंतिम पुनरावृत्ति बिंदु
मोहिनीअट्टम — केरल की प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैली।
यह मुख्यतः लास्य-प्रधान, कोमल और भावपूर्ण नृत्य है।
मोहिनीअट्टम का नाम भगवान विष्णु के मोहिनी रूप से जुड़ा है।
महाराजा स्वाति तिरुनाल के काल में इसे महत्वपूर्ण राजाश्रय मिला।
वल्लथोल नारायण मेनन और केरल कलामंडलम ने आधुनिक पुनरुत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कलामंडलम कल्याणीकुट्टी अम्मा आधुनिक मोहिनीअट्टम की प्रमुख पुनरुद्धारक, गुरु और शोधकर्ता थीं।
भारती शिवाजी ने मोहिनीअट्टम के शोध और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रचार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कलामंडलम क्षेमवती केरल की प्रसिद्ध मोहिनीअट्टम नृत्यांगना हैं।
डॉ. सुनंदा नायर कनक रेले की परंपरा से जुड़ी प्रमुख मोहिनीअट्टम नृत्यांगना हैं।
जया प्रभा मेनन की मुख्य पहचान मोहिनीअट्टम से है और उन्होंने भारती शिवाजी से भी प्रशिक्षण लिया।
स्मिता राजन कल्याणीकुट्टी अम्मा की नातिन और मोहिनीअट्टम की प्रमुख कलाकार हैं।
श्रीदेवी राजन कल्याणीकुट्टी अम्मा की पुत्री और मोहिनीअट्टम गुरु हैं; उन्हें फिल्म अभिनेत्री श्रीदेवी से अलग समझें।
हेमामालिनी की मुख्य शास्त्रीय पहचान भरतनाट्यम से है; उन्हें मोहिनीअट्टम की मानक प्रमुख नृत्यांगना के रूप में याद करना सुरक्षित नहीं है।
डॉ. कनक रेले आधुनिक मोहिनीअट्टम की प्रमुख विदुषी, शोधकर्ता और गुरु थीं।