राष्ट्रीय उद्यान एवं जैव विविधता संरक्षण
राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र और महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य
राष्ट्रीय उद्यान : एक परिचय
भारत में राष्ट्रीय उद्यान ऐसे संरक्षित क्षेत्र हैं जिन्हें वन्यजीवों, प्राकृतिक वनस्पतियों, जैव विविधता और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के लिए अधिसूचित किया जाता है।
इनका उद्देश्य केवल किसी एक वन्यजीव प्रजाति की रक्षा करना नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र, प्राकृतिक आवास, वनस्पति, जल स्रोत तथा जैव विविधता को दीर्घकाल तक सुरक्षित रखना है।
भारत के सभी राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों की राज्यवार विस्तृत सूची स्टैटिक सामान्य ज्ञान के पृथक भाग में पढ़ी जा सकती है। यहाँ राष्ट्रीय उद्यान, प्रमुख संरक्षित क्षेत्र, प्रसिद्ध जीव तथा उनसे जुड़े महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य दिए गए हैं।
राष्ट्रीय उद्यान का कानूनी आधार
वन्यजीव और उनके प्राकृतिक आवास का संरक्षण
भारत में राष्ट्रीय उद्यानों की घोषणा और संरक्षण का प्रमुख कानूनी आधार वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 है।
राष्ट्रीय उद्यान के भीतर वन्यजीवों का शिकार, प्राकृतिक आवास का विनाश तथा वन्य संसाधनों का अनधिकृत दोहन सामान्यतः प्रतिबंधित रहता है।
चराई, संसाधनों का उपयोग और अन्य मानवीय गतिविधियाँ भी कड़े नियमन के अधीन रहती हैं।
किसी गतिविधि की अनुमति केवल वन्यजीव और उनके आवास के संरक्षण, सुधार या प्रबंधन से संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार दी जा सकती है।
पर्यटन भी पूर्णतः स्वतंत्र गतिविधि नहीं है, बल्कि संबंधित राष्ट्रीय उद्यान के संरक्षण नियमों और प्रबंधन योजना के अनुसार नियंत्रित किया जाता है।
⚠️ महत्वपूर्ण अंतर
राष्ट्रीय उद्यान में हर परिस्थिति में “किसी भी प्रकार की गतिविधि पूर्णतः असंभव” कहना अत्यधिक सामान्यीकृत कथन है। संरक्षण एवं प्रबंधन से संबंधित सीमित गतिविधियाँ कानून के अनुसार अनुमति प्राप्त कर सकती हैं।
भारत का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान
जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान
भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान वर्तमान जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान है, जो उत्तराखंड में स्थित है।
इसकी स्थापना 1936 में हुई थी और प्रारंभ में इसे हैली राष्ट्रीय उद्यान कहा जाता था।
बाद में इसका नाम जिम कॉर्बेट के सम्मान में जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान रखा गया।
यह क्षेत्र बाघ, हाथी तथा तराई-भाबर क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है।
🎯 परीक्षा में याद रखें
भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान — जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान — उत्तराखंड — 1936।
भारत में राष्ट्रीय उद्यानों की संख्या
वर्तमान संरक्षित क्षेत्र व्यवस्था
भारत में वर्तमान आधिकारिक जानकारी के अनुसार 106 राष्ट्रीय उद्यान हैं।
ये देश के हिमालयी क्षेत्रों, मरुस्थलों, वर्षावनों, घास के मैदानों, आर्द्रभूमियों, द्वीपों तथा समुद्री क्षेत्रों जैसे विविध पारिस्थितिक तंत्रों का संरक्षण करते हैं।
राष्ट्रीय उद्यानों के अतिरिक्त भारत में वन्यजीव अभयारण्य, संरक्षण आरक्षित क्षेत्र और सामुदायिक आरक्षित क्षेत्र भी संरक्षित क्षेत्र व्यवस्था का हिस्सा हैं।
📗 वर्तमान तथ्य
राष्ट्रीय उद्यान — 106
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान
एक सींग वाला भारतीय गैंडा
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान असम में स्थित है और यह विशेष रूप से एक सींग वाले भारतीय गैंडे के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
यह बाघ, जंगली भैंसा, हाथी, दलदली हिरण तथा अनेक पक्षी प्रजातियों के लिए भी महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास है।
गिर राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्यजीव अभयारण्य
एशियाई सिंह का प्रमुख प्राकृतिक आवास
गिर वन गुजरात में स्थित है और एशियाई सिंह के संरक्षण के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
गिर और उसके आसपास का व्यापक सौराष्ट्र परिदृश्य विश्व में जंगली एशियाई सिंहों का एकमात्र प्राकृतिक क्षेत्र है।
एशियाई सिंहों की आबादी अब केवल गिर राष्ट्रीय उद्यान की प्रशासनिक सीमा के अंदर तक सीमित नहीं है, बल्कि गुजरात के आसपास के अनेक वन एवं तटीय क्षेत्रों तक फैल चुकी है।
🎯 प्रमुख युग्म
गिर — गुजरात — एशियाई सिंह
कान्हा एवं बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान
मध्य प्रदेश के महत्वपूर्ण बाघ क्षेत्र
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश में स्थित है और बाघों के साथ-साथ कठोर भूमि बारहसिंगा के संरक्षण के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
यहाँ रॉयल बंगाल टाइगर भी पाया जाता है, लेकिन कान्हा की विशेष पहचान केवल बाघ तक सीमित नहीं है।
बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान भी मध्य प्रदेश में स्थित प्रसिद्ध बाघ क्षेत्र है।
बांधवगढ़ को 1968 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था।
रणथंभौर और सरिस्का
राजस्थान के प्रसिद्ध बाघ क्षेत्र
रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान के सवाई माधोपुर क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध बाघ आवास है।
रणथंभौर क्षेत्र पहले वन्यजीव अभयारण्य था और बाद में राष्ट्रीय उद्यान तथा बाघ संरक्षण क्षेत्र के रूप में विकसित हुआ।
सरिस्का राजस्थान के अलवर क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध बाघ आरक्षित क्षेत्र और वन्यजीव अभयारण्य है।
सरिस्का को राष्ट्रीय उद्यान के रूप में लिखना उचित नहीं है; इसे सरिस्का बाघ आरक्षित क्षेत्र/वन्यजीव अभयारण्य के रूप में याद रखना अधिक सुरक्षित है।
नामदफा राष्ट्रीय उद्यान
अरुणाचल प्रदेश
नामदफा राष्ट्रीय उद्यान अरुणाचल प्रदेश में स्थित भारत के विशाल संरक्षित क्षेत्रों में से एक है।
पुराने सामान्य ज्ञान स्रोतों में इसके साथ 1974 का वर्ष मिलता है, लेकिन यह इसके प्रारंभिक वन्यजीव अभयारण्य चरण से संबंधित है।
नामदफा को बाद में 1983 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया।
यह अत्यधिक ऊँचाई विविधता, घने वन और समृद्ध जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है।
⚠️ वर्ष में भ्रम न करें
1974 — प्रारंभिक संरक्षित/अभयारण्य चरण
1983 — राष्ट्रीय उद्यान
बांदीपुर एवं नागरहोल
कर्नाटक के महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्र
बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान कर्नाटक में स्थित है और इसे 1974 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया।
यह नीलगिरि जैवमंडल क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है और बाघ तथा हाथी जैसे बड़े स्तनधारियों का प्रमुख आवास है।
नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान भी कर्नाटक में स्थित है। इसका आधिकारिक विस्तारित नाम राजीव गांधी (नागरहोल) राष्ट्रीय उद्यान भी प्रयोग किया जाता है।
महात्मा गांधी समुद्री राष्ट्रीय उद्यान
अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह
महात्मा गांधी समुद्री राष्ट्रीय उद्यान अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में स्थित है।
यह प्रवाल भित्तियों, समुद्री जीवों, मैंग्रोव तथा उष्णकटिबंधीय द्वीपीय जैव विविधता के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।
जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान
मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश का प्रसिद्ध घुघवा जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान वनस्पति जीवाश्मों के लिए प्रसिद्ध है।
पुराने स्रोत इसे मंडला से जोड़ते हैं क्योंकि यह क्षेत्र ऐतिहासिक प्रशासनिक व्यवस्था में मंडला जिले से संबंधित था।
वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था में यह डिंडोरी जिले में स्थित है।
केबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान
विश्व प्रसिद्ध तैरता राष्ट्रीय उद्यान
केबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान मणिपुर में लोकटक झील पर स्थित है।
इसे विश्व का प्रसिद्ध तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान कहा जाता है।
इसकी विशेषता झील पर तैरते हुए वनस्पतिक जैव पदार्थ के भूखंड हैं जिन्हें फुमदी कहा जाता है।
यह मणिपुर के दुर्लभ संगाई हिरण का प्रमुख प्राकृतिक आवास है।
🎯 सीधा प्रश्न
केबुल लामजाओ — मणिपुर — लोकटक झील — फुमदी — संगाई।
दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान
हंगुल या कश्मीरी स्टैग
दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान जम्मू-कश्मीर में स्थित है।
यह विशेष रूप से दुर्लभ हंगुल या कश्मीरी स्टैग के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है।
दाचीगाम को हंगुल का सबसे महत्वपूर्ण शेष प्राकृतिक आवास माना जाता है।
कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान
सिक्किम का उच्च हिमालयी संरक्षित क्षेत्र
कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान सिक्किम में स्थित है और इसकी स्थापना 1977 में की गई थी।
इस राष्ट्रीय उद्यान में हिमालयी वनस्पति, हिम तेंदुआ, लाल पांडा, हिमालयी काला भालू तथा अनेक दुर्लभ जीव पाए जाते हैं।
कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान को उसके प्राकृतिक और सांस्कृतिक दोनों महत्व के कारण यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में भी स्थान प्राप्त है।
सिमिलिपाल
ओडिशा के मयूरभंज का प्रमुख संरक्षित क्षेत्र
सिमिलिपाल ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित अत्यंत महत्वपूर्ण वन्यजीव एवं जैव विविधता क्षेत्र है।
इस क्षेत्र में राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, बाघ आरक्षित क्षेत्र तथा जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र की संरक्षण व्यवस्थाएँ परस्पर संबंधित हैं।
यह बाघ, एशियाई हाथी तथा विशाल साल वनों के लिए प्रसिद्ध है।
केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान
भरतपुर का प्रसिद्ध पक्षी क्षेत्र
राजस्थान के भरतपुर में स्थित केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान को पहले भरतपुर पक्षी अभयारण्य के नाम से जाना जाता था।
यह भारत के प्रसिद्ध पक्षी संरक्षण क्षेत्रों में से एक है और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भी है।
यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से भारत आने वाले साइबेरियन सारस के लिए अत्यंत प्रसिद्ध रहा है।
हालाँकि साइबेरियन सारस का भारत आने वाला पश्चिमी प्रवासी समूह अब यहाँ नियमित रूप से दिखाई नहीं देता। इसलिए इसे “वर्तमान नियमित निवास स्थल” न समझें।
साइलेंट वैली एवं सिंह-पूंछ मकाक
पश्चिमी घाट की विशिष्ट जैव विविधता
साइलेंट वैली राष्ट्रीय उद्यान केरल में स्थित पश्चिमी घाट का महत्वपूर्ण सदाबहार वन क्षेत्र है।
यह दुर्लभ सिंह-पूंछ मकाक के प्रमुख प्राकृतिक आवासों में से एक है।
सिंह-पूंछ मकाक पश्चिमी घाट का स्थानिक जीव है और केवल साइलेंट वैली तक सीमित नहीं है।
मुदुमलाई एवं पेरियार
दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण वन्यजीव क्षेत्र
मुदुमलाई राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्यजीव अभयारण्य तमिलनाडु में स्थित है।
यह नीलगिरि क्षेत्र में कर्नाटक और केरल की सीमाओं के निकट स्थित है। इसलिए इसे “कर्नाटक और केरल में स्थित” कहना सही नहीं है।
पेरियार राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्यजीव अभयारण्य केरल में स्थित है और हाथियों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
पेरियार क्षेत्र बाघ आरक्षित क्षेत्र भी है और पश्चिमी घाट की समृद्ध जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र है।
मानस, गरमपानी और नल सरोवर
महत्वपूर्ण वन्यजीव एवं पक्षी क्षेत्र
मानस राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्यजीव क्षेत्र असम में स्थित है और बाघ, हाथी, एक सींग वाले गैंडे तथा अनेक दुर्लभ जीवों के लिए प्रसिद्ध है।
गरमपानी वन्यजीव अभयारण्य भी असम में स्थित है।
नल सरोवर पक्षी अभयारण्य गुजरात में स्थित महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि और प्रवासी पक्षी क्षेत्र है।
हिम तेंदुआ
उच्च हिमालय का दुर्लभ शिकारी
हिम तेंदुआ भारत के उच्च हिमालयी और ट्रांस-हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है।
यह केवल सिक्किम में ही नहीं, बल्कि लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के उपयुक्त उच्च पर्वतीय आवासों में पाया जाता है।
लद्दाख का हेमिस राष्ट्रीय उद्यान हिम तेंदुए के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
⚠️ सुधार
हिम तेंदुआ केवल सिक्किम में पाया जाता है — यह गलत है।
जंगली गधा और कच्छ का रण
गुजरात का विशिष्ट वन्यजीव
भारतीय जंगली गधा गुजरात के कच्छ के छोटे रण क्षेत्र में विशेष रूप से पाया जाता है।
इसके संरक्षण के लिए भारतीय जंगली गधा अभयारण्य स्थापित किया गया है।
सारस
उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी
सारस क्रेन उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी है।
यह विश्व की सबसे ऊँची उड़ने वाली पक्षी प्रजातियों में से एक है और उत्तर भारत के आर्द्रभूमि तथा कृषि क्षेत्रों में पाया जाता है।
गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र
संकटग्रस्त गिद्धों का संरक्षण
हरियाणा के पिंजौर में स्थापित जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र भारत के सबसे प्रमुख और प्रारंभिक गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्रों में से एक है।
पश्चिम बंगाल के राजाभातखावा में भी गिद्धों के संरक्षण और प्रजनन के लिए महत्वपूर्ण केंद्र स्थापित किया गया।
पुरानी सामान्य ज्ञान पुस्तकों में पिंजौर को भारत का प्रथम और राजाभातखावा को दूसरा गिद्ध प्रजनन केंद्र बताया जाता है। परीक्षा में यह पारंपरिक युग्म पूछा जा सकता है।
🎯 पारंपरिक परीक्षा तथ्य
पिंजौर — हरियाणा
राजाभातखावा — पश्चिम बंगाल
क्वागा
विलुप्त ज़ेब्रा
क्वागा दक्षिण अफ्रीका में पाया जाने वाला मैदानी ज़ेब्रा का एक विलुप्त रूप था।
19वीं शताब्दी में अत्यधिक शिकार के कारण यह विलुप्त हो गया।
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण
भारत की जीव विविधता का वैज्ञानिक अध्ययन
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण भारत में जीव-जंतुओं के सर्वेक्षण, वर्गीकरण और वैज्ञानिक अध्ययन से संबंधित प्रमुख राष्ट्रीय संस्था है।
इसकी स्थापना 1916 में हुई थी।
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण का मुख्यालय कोलकाता में स्थित है।
भारत का प्रमुख वनस्पति उद्यान
कोलकाता का ऐतिहासिक वनस्पति उद्यान
कोलकाता के निकट हावड़ा में स्थित आचार्य जगदीश चंद्र बोस भारतीय वनस्पति उद्यान भारत के सबसे विशाल और प्रसिद्ध ऐतिहासिक वनस्पति उद्यानों में से एक है।
यह विशेष रूप से अपने विशाल महाबरगद वृक्ष और विविध पौध संग्रह के लिए प्रसिद्ध है।
पुरानी सामान्य ज्ञान पुस्तकों में इसे भारत का सबसे बड़ा वनस्पति उद्यान कहा जाता है।
स्वालबार्ड वैश्विक बीज भंडार
विश्व की कृषि आनुवंशिक विविधता का सुरक्षा भंडार
नॉर्वे के स्वालबार्ड में विश्व प्रसिद्ध स्वालबार्ड वैश्विक बीज भंडार स्थित है।
इसे फरवरी 2008 में खोला गया था।
यह दुनिया के विभिन्न जीन बैंकों में संरक्षित महत्वपूर्ण खाद्य एवं कृषि फसलों के बीज नमूनों की सुरक्षित प्रतिलिपियाँ दीर्घकालीन संरक्षण के लिए रखता है।
इसका उद्देश्य विश्व की कृषि फसलों की आनुवंशिक विविधता को प्राकृतिक आपदा, युद्ध, दुर्घटना अथवा अन्य संकट की स्थिति में सुरक्षित बैकअप उपलब्ध कराना है।
इसे सभी विलुप्तप्राय पशु-पौधों के जीनों का अंतरराष्ट्रीय जीन बैंक कहना सही नहीं है। यह मुख्य रूप से फसल-बीज विविधता के संरक्षण से संबंधित है।
⚠️ भ्रम से बचें
स्वालबार्ड = वैश्विक बीज भंडार, न कि सभी पशु-पौधों का सामान्य जीन बैंक।
जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र
संरक्षण और सतत विकास का व्यापक क्षेत्र
जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र ऐसे व्यापक क्षेत्र होते हैं जहाँ जैव विविधता संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों, अनुसंधान, शिक्षा और सतत विकास के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया जाता है।
भारत में कुल 18 जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र घोषित किए गए हैं।
जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र सामान्यतः कोर क्षेत्र, बफर क्षेत्र और संक्रमण क्षेत्र जैसी व्यवस्थाओं पर आधारित होते हैं।
नीलगिरि जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र
भारत का प्रथम जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र
नीलगिरि जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र भारत का प्रथम जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र है।
यह तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के क्षेत्रों में विस्तृत है।
इसे भारत ने 1986 में जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र के रूप में स्थापित किया था।
इसे 2000 में यूनेस्को के विश्व जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र नेटवर्क में शामिल किया गया।
🎯 वर्ष अलग-अलग याद रखें
नीलगिरि — भारत का जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र: 1986
यूनेस्को विश्व नेटवर्क में प्रवेश: 2000
यूनेस्को मान्यता प्राप्त भारतीय जैवमंडल क्षेत्र
विश्व नेटवर्क में भारत की वर्तमान स्थिति
लंबे समय तक भारत के 12 जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र यूनेस्को के विश्व नेटवर्क में शामिल थे।
सितंबर 2025 में हिमाचल प्रदेश के शीत मरुस्थल जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र को भी यूनेस्को विश्व नेटवर्क में शामिल किया गया।
इसके साथ भारत के यूनेस्को मान्यता प्राप्त जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों की संख्या बढ़कर 13 हो गई।
शीत मरुस्थल जैवमंडल क्षेत्र में पिन वैली राष्ट्रीय उद्यान, किब्बर तथा चंद्रताल जैसे उच्च हिमालयी संरक्षित क्षेत्र शामिल हैं।
⚠️ वर्तमान तथ्य
12 — पुराना तथ्य
13 — सितंबर 2025 के बाद वर्तमान संख्या
नोकरेक जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र
मेघालय
नोकरेक जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र मेघालय में स्थित है।
यह गारो पहाड़ियों की जैव विविधता तथा उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय वनस्पतियों के लिए महत्वपूर्ण है।
नंदा देवी जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र
उत्तराखंड
नंदा देवी जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र उत्तराखंड में स्थित उच्च हिमालयी जैव विविधता क्षेत्र है।
इसमें दुर्लभ हिमालयी वनस्पति और अनेक उच्च पर्वतीय जीव पाए जाते हैं।
ग्रेट निकोबार जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र
अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह
अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में ग्रेट निकोबार जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र स्थापित किया गया है।
यह उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन, तटीय पारिस्थितिकी तंत्र तथा दुर्लभ और स्थानिक समुद्री एवं स्थलीय जीव-जंतुओं और वनस्पतियों का संरक्षण करता है।
ग्रेट निकोबार को 2013 में यूनेस्को के विश्व जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र नेटवर्क में शामिल किया गया।
सबसे बड़ा और सबसे छोटा जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र
क्षेत्रफल आधारित महत्वपूर्ण तथ्य
सामान्य भारतीय परीक्षा स्रोतों में कच्छ का रण जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र भारत का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र माना जाता है।
यह गुजरात के विशाल शुष्क एवं लवणीय मरुस्थलीय क्षेत्र में स्थित है।
डिब्रू-सैखोवा जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र असम में स्थित है और सामान्य परीक्षा स्रोतों में इसे भारत के सबसे छोटे जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों में गिना जाता है।
बन्नी घासभूमि
कच्छ की विशाल प्राकृतिक घासभूमि
बन्नी घासभूमि गुजरात के कच्छ जिले में स्थित विशाल शुष्क घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र है।
इसे एशिया की सबसे विस्तृत प्राकृतिक घासभूमियों में से एक माना जाता है।
यह मालधारी पशुपालक समुदायों, घासभूमि जैव विविधता तथा शुष्क क्षेत्र के वन्यजीवों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वाल्मीकि बाघ आरक्षित क्षेत्र
बिहार का प्रमुख बाघ क्षेत्र
वाल्मीकि बाघ आरक्षित क्षेत्र बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में स्थित है।
यह बिहार का प्रमुख बाघ संरक्षण क्षेत्र है और नेपाल की सीमा के समीप तराई पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है।
संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता दशक
2011 से 2020
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2011 से 2020 की अवधि को संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता दशक घोषित किया था।
इसका उद्देश्य जैव विविधता के संरक्षण, उसके सतत उपयोग और जैव विविधता के लगातार होते नुकसान को कम करने के लिए वैश्विक प्रयासों को बढ़ावा देना था।
इसलिए इसे 2011 से 20 नहीं, बल्कि स्पष्ट रूप से 2011–2020 याद करना चाहिए।
राष्ट्रीय उद्यानों के सामने प्रमुख चुनौतियाँ
प्राकृतिक आवास और वन्यजीवों पर दबाव
भारत के राष्ट्रीय उद्यान और अन्य संरक्षित क्षेत्र अवैध शिकार, आवास विखंडन, मानवीय अतिक्रमण, मानव-वन्यजीव संघर्ष, आक्रामक प्रजातियों और जलवायु परिवर्तन जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करते हैं।
संरक्षित क्षेत्रों के बाहर भूमि उपयोग में बदलाव वन्यजीवों के प्राकृतिक गलियारों को प्रभावित कर सकता है।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन, निगरानी, वन्यजीव गलियारों का संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रीय उद्यानों का महत्व
पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता संरक्षण
राष्ट्रीय उद्यान केवल वन्यजीवों के आश्रय स्थल नहीं हैं, बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ये दुर्लभ और संकटग्रस्त जीवों एवं वनस्पतियों के प्राकृतिक आवास सुरक्षित रखते हैं।
वन और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र कार्बन का भंडारण, जल संरक्षण, जलवायु नियमन तथा मिट्टी संरक्षण जैसी महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी सेवाएँ प्रदान करते हैं।
राष्ट्रीय उद्यान वैज्ञानिक अनुसंधान, पर्यावरण शिक्षा और नियंत्रित प्रकृति-आधारित पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उद्यान और पहचान
त्वरित परीक्षा तालिका
| राष्ट्रीय उद्यान/क्षेत्र | राज्य/केंद्रशासित प्रदेश | प्रमुख पहचान |
|---|---|---|
| जिम कॉर्बेट | उत्तराखंड | भारत का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान |
| काजीरंगा | असम | एक सींग वाला गैंडा |
| गिर | गुजरात | एशियाई सिंह |
| कान्हा | मध्य प्रदेश | बाघ एवं कठोर भूमि बारहसिंगा |
| बांधवगढ़ | मध्य प्रदेश | बाघ |
| रणथंभौर | राजस्थान | बाघ |
| हेमिस | लद्दाख | हिम तेंदुआ |
| दाचीगाम | जम्मू-कश्मीर | हंगुल |
| केबुल लामजाओ | मणिपुर | तैरता राष्ट्रीय उद्यान एवं संगाई |
| साइलेंट वैली | केरल | सिंह-पूंछ मकाक |
| पेरियार | केरल | हाथी एवं बाघ |
| कंचनजंगा | सिक्किम | उच्च हिमालयी जैव विविधता |
| नामदफा | अरुणाचल प्रदेश | विशाल पूर्वोत्तर जैव विविधता क्षेत्र |
सबसे अधिक भ्रम वाले तथ्य
परीक्षा में गलती से बचने के लिए
भारत में राष्ट्रीय उद्यान — 106; केवल “100 से अधिक” लिखने की आवश्यकता नहीं।
जिम कॉर्बेट — 1936; भारत का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान।
सरिस्का को राष्ट्रीय उद्यान के स्थान पर बाघ आरक्षित क्षेत्र/वन्यजीव अभयारण्य के रूप में पढ़ना सुरक्षित है।
नामदफा — 1974 प्रारंभिक संरक्षित क्षेत्र से संबंधित वर्ष है; राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा बाद में मिला।
मुदुमलाई तमिलनाडु में है; यह कर्नाटक और केरल की सीमाओं के निकट है।
हिम तेंदुआ केवल सिक्किम में नहीं; यह भारत के कई उच्च हिमालयी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में पाया जाता है।
साइबेरियन सारस के लिए केवलादेव का महत्व ऐतिहासिक है; वह अब नियमित रूप से वहाँ नहीं आता।
स्वालबार्ड सभी जीव-जंतुओं का gene bank नहीं, बल्कि मुख्यतः कृषि फसलों के बीज नमूनों का वैश्विक सुरक्षा भंडार है।
संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता दशक — 2011–2020।
भारत में जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र — 18।
यूनेस्को विश्व नेटवर्क में भारतीय जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र — 13 हैं; 12 वाला तथ्य सितंबर 2025 से पुराना हो गया।
नीलगिरि भारत का पहला जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र है; यूनेस्को नेटवर्क में इसे 2000 में शामिल किया गया।
⚡ अंतिम त्वरित पुनरावृत्ति
भारत का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान — जिम कॉर्बेट — उत्तराखंड — 1936।
भारत में वर्तमान में 106 राष्ट्रीय उद्यान हैं।
काजीरंगा — असम — एक सींग वाला गैंडा।
गिर — गुजरात — एशियाई सिंह।
कान्हा — मध्य प्रदेश — बाघ एवं कठोर भूमि बारहसिंगा।
बांधवगढ़ — मध्य प्रदेश — 1968 — प्रसिद्ध बाघ क्षेत्र।
दाचीगाम — जम्मू-कश्मीर — हंगुल।
केबुल लामजाओ — मणिपुर — लोकटक झील — संगाई।
हेमिस — लद्दाख — हिम तेंदुआ।
साइलेंट वैली — केरल — सिंह-पूंछ मकाक।
पेरियार — केरल — हाथी एवं बाघ।
मुदुमलाई — तमिलनाडु।
मानस एवं गरमपानी — असम।
नल सरोवर — गुजरात।
सारस — उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी।
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण — मुख्यालय कोलकाता।
पिंजौर — हरियाणा — प्रमुख गिद्ध प्रजनन केंद्र।
राजाभातखावा — पश्चिम बंगाल — गिद्ध संरक्षण केंद्र।
कच्छ का छोटा रण — भारतीय जंगली गधा।
बन्नी घासभूमि — कच्छ, गुजरात।
वाल्मीकि बाघ आरक्षित क्षेत्र — पश्चिमी चंपारण, बिहार।
नीलगिरि — भारत का प्रथम जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र।
भारत में कुल 18 जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र हैं।
यूनेस्को विश्व नेटवर्क में भारत के वर्तमान में 13 जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र शामिल हैं।
शीत मरुस्थल जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र सितंबर 2025 में भारत का 13वाँ यूनेस्को जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र बना।
नोकरेक — मेघालय तथा नंदा देवी — उत्तराखंड में स्थित हैं।
ग्रेट निकोबार अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह का महत्वपूर्ण जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र है।
संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता दशक — 2011 से 2020।
स्वालबार्ड वैश्विक बीज भंडार — नॉर्वे — 2008; विश्व की कृषि फसल-बीज विविधता के संरक्षण के लिए।