राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013
खाद्यान्न का कानूनी अधिकार, पोषण सुरक्षा, बच्चों एवं महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का उद्देश्य
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 का उद्देश्य देश के पात्र लोगों को पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न तथा पोषण संबंधी सहायता उपलब्ध कराकर सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए खाद्य एवं पोषण सुरक्षा प्रदान करना है।
इस अधिनियम की विशेषता यह है कि खाद्य सुरक्षा को केवल सरकारी कल्याणकारी कार्यक्रम न मानकर पात्र लाभार्थियों के लिए कानूनी अधिकार के रूप में स्थापित किया गया।
अधिनियम और महत्वपूर्ण तिथि
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम को अधिनियम संख्या 20, वर्ष 2013 के रूप में लागू किया गया।
तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इस अधिनियम को 10 सितंबर 2013 को स्वीकृति प्रदान की।
अधिनियम में इसके प्रावधानों को 5 जुलाई 2013 से प्रभावी माना गया।
🎯 परीक्षा तथ्य
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम — 2013 — राष्ट्रपति की स्वीकृति 10 सितंबर 2013
जनसंख्या कवरेज
इस अधिनियम के तहत लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से ग्रामीण और शहरी आबादी के एक बड़े हिस्से को खाद्यान्न उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया।
अधिनियम के अनुसार अधिकतम 75% ग्रामीण जनसंख्या और 50% शहरी जनसंख्या को लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत कवर किया जा सकता है।
इस प्रकार मूल रूप से देश की लगभग दो-तिहाई जनसंख्या को खाद्य सुरक्षा के दायरे में लाने की व्यवस्था की गई।
🎯 याद रखने का तरीका
लाभार्थियों की दो मुख्य श्रेणियाँ
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत खाद्यान्न प्राप्त करने वाले परिवार मुख्यतः दो श्रेणियों में बाँटे जाते हैं— अंत्योदय अन्न योजना परिवार और प्राथमिकता प्राप्त परिवार।
दोनों श्रेणियों की खाद्यान्न पात्रता एक समान नहीं है। इसी कारण 5 किलोग्राम प्रति व्यक्ति और 35 किलोग्राम प्रति परिवार वाले प्रावधानों को अलग-अलग समझना बहुत जरूरी है।
प्राथमिकता प्राप्त परिवारों की पात्रता
प्राथमिकता प्राप्त परिवार के प्रत्येक पात्र सदस्य को प्रति माह 5 किलोग्राम खाद्यान्न प्राप्त करने का अधिकार दिया गया।
यह अधिकार व्यक्ति आधारित है। उदाहरण के लिए यदि किसी प्राथमिकता प्राप्त परिवार में पाँच पात्र सदस्य हैं, तो उस परिवार की कुल मासिक पात्रता 25 किलोग्राम होगी।
📗 याद रखें
प्राथमिकता प्राप्त परिवार = प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम प्रति माह
अंत्योदय अन्न योजना परिवारों की पात्रता
अंत्योदय अन्न योजना के अंतर्गत आने वाले परिवारों को प्रति परिवार 35 किलोग्राम खाद्यान्न प्रति माह प्राप्त करने का अधिकार दिया गया।
अंत्योदय अन्न योजना अत्यंत गरीब और कमजोर परिवारों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने से संबंधित है।
इसलिए यह कहना कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत हर परिवार को 35 किलोग्राम अनाज मिलता है, सही नहीं है।
⚠️ सबसे महत्वपूर्ण सुधार
35 किलोग्राम प्रति परिवार = केवल अंत्योदय अन्न योजना परिवार
5 किलोग्राम प्रति व्यक्ति = प्राथमिकता प्राप्त परिवार
अधिनियम में निर्धारित प्रारंभिक खाद्यान्न कीमतें
अधिनियम की प्रारंभिक व्यवस्था में पात्र लाभार्थियों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न अत्यधिक रियायती कीमतों पर उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया था।
अधिनियम के प्रारंभिक तीन वर्षों के लिए चावल की कीमत ₹3 प्रति किलोग्राम, गेहूँ की कीमत ₹2 प्रति किलोग्राम और मोटे अनाज की कीमत ₹1 प्रति किलोग्राम निर्धारित की गई थी।
इसलिए ₹3, ₹2 और ₹1 वाली दरें अधिनियम की मूल प्रारंभिक केंद्रीय निर्गमन कीमतें थीं।
🎯 प्रसिद्ध सूत्र
वर्तमान खाद्यान्न व्यवस्था
₹3, ₹2 और ₹1 प्रति किलोग्राम वाली दरों को वर्तमान में पात्र लाभार्थियों द्वारा भुगतान की जाने वाली कीमत नहीं समझना चाहिए।
वर्तमान व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत आने वाले अंत्योदय अन्न योजना और प्राथमिकता प्राप्त परिवारों को उनकी निर्धारित पात्रता के अनुसार खाद्यान्न निःशुल्क दिया जा रहा है।
केंद्र सरकार ने इस निःशुल्क खाद्यान्न व्यवस्था को 1 जनवरी 2024 से पाँच वर्षों के लिए जारी रखने का निर्णय लिया है।
मात्रा की पात्रता वही रहती है—अंत्योदय परिवारों को 35 किलोग्राम प्रति परिवार प्रति माह और प्राथमिकता प्राप्त परिवारों को 5 किलोग्राम प्रति व्यक्ति प्रति माह।
⚠️ पुराने और वर्तमान तथ्य में अंतर
अधिनियम की प्रारंभिक दरें: ₹3 चावल, ₹2 गेहूँ, ₹1 मोटा अनाज।
वर्तमान व्यवस्था: पात्र लाभार्थियों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न निःशुल्क।
6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चे
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में बच्चों की पोषण सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों को स्थानीय आंगनवाड़ी के माध्यम से आयु के अनुसार निर्धारित पोषण मानकों वाला भोजन निःशुल्क उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
छह माह से कम आयु के बच्चों के लिए मुख्य पोषण आधार स्तनपान होता है, इसलिए अधिनियम में भोजन संबंधी पात्रता छह माह की आयु से शुरू होती है।
6 से 14 वर्ष तक के बच्चे
6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को, जो विद्यालय में पढ़ते हैं, निर्धारित पोषण मानकों के अनुसार निःशुल्क मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
इस प्रकार “6 माह से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को एक ही प्रकार का पोषक आहार” कहना अधूरा है।
6 माह से 6 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए आंगनवाड़ी आधारित पोषण व्यवस्था और 6 से 14 वर्ष के विद्यालय जाने वाले बच्चों के लिए विद्यालय आधारित भोजन व्यवस्था का प्रावधान अलग-अलग है।
🎯 आयु के अनुसार अंतर
कुपोषित बच्चों के लिए प्रावधान
अधिनियम में कुपोषण से प्रभावित बच्चों के लिए भी विशेष पोषण सहायता का प्रावधान किया गया है।
6 माह से 6 वर्ष आयु वर्ग के ऐसे बच्चे जो कुपोषित पाए जाते हैं, उन्हें निर्धारित पोषण मानकों के अनुसार अतिरिक्त या विशेष पोषण सहायता उपलब्ध कराई जानी है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल खाद्यान्न देना नहीं, बल्कि बच्चों में पोषण संबंधी कमी को दूर करना भी है।
गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के अधिकार
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के लिए भी विशेष पोषण अधिकार प्रदान करता है।
गर्भावस्था के दौरान तथा बच्चे के जन्म के बाद छह माह तक निर्धारित पोषण मानकों के अनुसार निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
इसके अतिरिक्त पात्र महिलाओं के लिए कम-से-कम ₹6,000 का मातृत्व लाभ देने का प्रावधान अधिनियम में किया गया है।
सरकारी सेवा या ऐसी किसी व्यवस्था से समान मातृत्व लाभ प्राप्त करने वाली महिलाओं के संबंध में अधिनियम में अलग अपवाद भी दिए गए हैं।
🎯 महत्वपूर्ण
गर्भवती/धात्री महिला — पोषण सहायता + कम-से-कम ₹6,000 मातृत्व लाभ का प्रावधान
परिवार की महिला मुखिया
अधिनियम में महिलाओं को परिवार की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में विशेष स्थान दिया गया है।
राशन कार्ड जारी करने के उद्देश्य से परिवार की 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की सबसे बड़ी महिला को सामान्यतः परिवार का मुखिया माना जाता है।
यदि परिवार में 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिला उपलब्ध न हो, तो निर्धारित व्यवस्था के अनुसार पुरुष सदस्य अस्थायी रूप से मुखिया हो सकता है; महिला सदस्य के 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर उसे मुखिया माना जा सकता है।
खाद्य सुरक्षा भत्ता
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम केवल खाद्यान्न की पात्रता घोषित नहीं करता, बल्कि पात्र व्यक्ति को खाद्यान्न या निर्धारित भोजन उपलब्ध न होने की स्थिति के लिए भी प्रावधान करता है।
यदि पात्र लाभार्थी को निर्धारित खाद्यान्न या भोजन उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो वह नियमों के अनुसार खाद्य सुरक्षा भत्ता प्राप्त करने का अधिकारी हो सकता है।
यह प्रावधान खाद्य सुरक्षा को कानूनी अधिकार बनाने की महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है।
पारदर्शिता और शिकायत निवारण
अधिनियम में खाद्यान्न वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए शिकायत निवारण की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है।
राज्यों में जिला स्तर पर शिकायत निवारण अधिकारी तथा राज्य खाद्य आयोग जैसी व्यवस्थाओं का प्रावधान किया गया।
लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के रिकॉर्ड सार्वजनिक करने, सामाजिक लेखा-परीक्षा और सतर्कता समितियों जैसे उपाय भी पारदर्शिता बढ़ाने से जुड़े हैं।
मुख्य प्रावधान — एक नज़र में
| लाभार्थी/प्रावधान | अधिकार |
|---|---|
| प्राथमिकता प्राप्त परिवार | प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम खाद्यान्न प्रति माह |
| अंत्योदय अन्न योजना परिवार | प्रति परिवार 35 किलोग्राम खाद्यान्न प्रति माह |
| 6 माह–6 वर्ष के बच्चे | आंगनवाड़ी के माध्यम से आयु-अनुकूल पोषण |
| 6–14 वर्ष के बच्चे | विद्यालय में निर्धारित पोषण मानकों वाला भोजन |
| गर्भवती एवं धात्री महिलाएँ | पोषण सहायता तथा पात्रता के अनुसार मातृत्व लाभ |
| ग्रामीण कवरेज | अधिकतम 75% |
| शहरी कवरेज | अधिकतम 50% |
महत्वपूर्ण भ्रम और सही तथ्य
भ्रम: अधिनियम के तहत प्रत्येक परिवार को 35 किलोग्राम अनाज मिलता है।
सही: 35 किलोग्राम प्रति परिवार की पात्रता अंत्योदय अन्न योजना परिवारों के लिए है; प्राथमिकता प्राप्त परिवारों को प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम मिलता है।
भ्रम: वर्तमान में लाभार्थियों से चावल ₹3, गेहूँ ₹2 और मोटा अनाज ₹1 प्रति किलोग्राम लिया जाता है।
सही: ये अधिनियम की प्रारंभिक रियायती दरें थीं; वर्तमान व्यवस्था में पात्र लाभार्थियों को निर्धारित खाद्यान्न निःशुल्क दिया जा रहा है।
भ्रम: 6 माह से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को बिल्कुल समान तरीके से भोजन दिया जाता है।
सही: 6 माह–6 वर्ष के बच्चों की व्यवस्था आंगनवाड़ी से और 6–14 वर्ष के विद्यालयी बच्चों की व्यवस्था विद्यालयी भोजन से जुड़ी है।
भ्रम: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम केवल राशन देने का कानून है।
सही: इसमें बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं के पोषण, मातृत्व लाभ, खाद्य सुरक्षा भत्ता और शिकायत निवारण जैसे प्रावधान भी हैं।
भ्रम: राष्ट्रपति की स्वीकृति 10 सितंबर 2013 होने के कारण अधिनियम केवल उसी दिन से लागू हुआ।
सही: अधिनियम को राष्ट्रपति की स्वीकृति 10 सितंबर 2013 को मिली, लेकिन इसके प्रावधान 5 जुलाई 2013 से प्रभावी माने गए।
त्वरित पुनरावृत्ति
⚡ एक नज़र में
⚡ अंतिम पुनरावृत्ति बिंदु
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 खाद्य और पोषण सुरक्षा को कानूनी अधिकार प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण कानून है।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इसे 10 सितंबर 2013 को स्वीकृति दी।
अधिनियम के प्रावधान 5 जुलाई 2013 से प्रभावी माने गए।
अधिनियम के तहत अधिकतम 75% ग्रामीण और 50% शहरी जनसंख्या को लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के दायरे में लाने का प्रावधान है।
प्राथमिकता प्राप्त परिवार = प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम खाद्यान्न प्रति माह।
अंत्योदय अन्न योजना परिवार = प्रति परिवार 35 किलोग्राम खाद्यान्न प्रति माह।
अधिनियम की प्रारंभिक कीमतें थीं— चावल ₹3, गेहूँ ₹2 और मोटा अनाज ₹1 प्रति किलोग्राम।
वर्तमान व्यवस्था में पात्र लाभार्थियों को उनकी निर्धारित पात्रता के अनुसार खाद्यान्न निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।
6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए आंगनवाड़ी आधारित पोषण और 6 से 14 वर्ष के विद्यालयी बच्चों के लिए विद्यालयी भोजन का प्रावधान है।
गर्भवती और धात्री महिलाओं के लिए पोषण सहायता तथा अधिनियम में कम-से-कम ₹6,000 मातृत्व लाभ का प्रावधान है।
परिवार की 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की सबसे बड़ी महिला को राशन कार्ड के लिए परिवार का मुखिया मानने का प्रावधान है।
खाद्यान्न या निर्धारित भोजन न मिलने पर पात्र व्यक्ति के लिए खाद्य सुरक्षा भत्ता का भी प्रावधान है।