\n\n\n\n\n
VidyaGlobe
लॉर्ड वेवेल
LORD WAVELL

लॉर्ड वेवेल

1943–1947 ई. — स्वतंत्रता और सत्ता हस्तांतरण की निर्णायक घटनाएँ

लॉर्ड वेवेल का कार्यकाल

लॉर्ड आर्चिबाल्ड वेवेल ने अक्टूबर 1943 में भारत के वायसराय का पद संभाला और मार्च 1947 तक इस पद पर रहा। उसका कार्यकाल भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अंतिम और अत्यंत महत्वपूर्ण चरण से जुड़ा था। इसी अवधि में सी. आर. फार्मूला, वेवेल योजना, शिमला सम्मेलन, द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति, कैबिनेट मिशन, सीधी कार्यवाही दिवस, अंतरिम सरकार, संविधान सभा की पहली बैठक तथा भारत की स्वतंत्रता के संबंध में ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली की ऐतिहासिक घोषणा जैसी घटनाएँ हुईं।

01

सी. आर. फार्मूला

1944 ई. — कांग्रेस और मुस्लिम लीग में समझौते का प्रयास

सी. राजगोपालाचारी ने 1944 ई. में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच राजनीतिक गतिरोध दूर करने के लिए एक समझौता प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसे सी. आर. फार्मूला या राजगोपालाचारी फार्मूला कहा जाता है।

इस प्रस्ताव का उद्देश्य कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच समझौता कराकर भारत की स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त करना था। इसके अंतर्गत मुस्लिम लीग से भारतीय स्वतंत्रता की माँग का समर्थन करने और अंतरिम सरकार के गठन में कांग्रेस के साथ सहयोग करने की अपेक्षा की गई।

युद्ध समाप्त होने के बाद उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत के उन निकटवर्ती क्षेत्रों में, जहाँ मुसलमान स्पष्ट बहुमत में थे, उनकी सीमा निर्धारित करके जनमत-संग्रह कराने का प्रस्ताव रखा गया था।

यदि जनमत विभाजन के पक्ष में जाता, तो अलग राज्य के गठन की व्यवस्था की जा सकती थी। विभाजन की स्थिति में रक्षा, संचार और वाणिज्य जैसे आवश्यक विषयों पर आपसी समझौते की बात भी की गई थी।

इसी प्रस्ताव की पृष्ठभूमि में सितंबर 1944 में गांधी–जिन्ना वार्ता हुई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी और वार्ता असफल रही।

🎯 याद रखें

सी. आर. फार्मूला — 1944 — सी. राजगोपालाचारी — गांधी–जिन्ना वार्ता की महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि।

02

वेवेल योजना

जून 1945 ई.

भारत में राजनीतिक गतिरोध समाप्त करने के उद्देश्य से लॉर्ड वेवेल ने 14 जून 1945 को एक योजना प्रस्तुत की, जिसे वेवेल योजना कहा जाता है।

योजना का प्रमुख उद्देश्य वायसराय की कार्यकारिणी परिषद का पुनर्गठन करना था। वायसराय और सेनापति को छोड़कर परिषद के अन्य सदस्यों को भारतीय बनाए जाने का प्रस्ताव था।

इसमें कार्यकारिणी परिषद में सवर्ण हिंदुओं और मुसलमानों को समान प्रतिनिधित्व देने का प्रस्ताव रखा गया था। अन्य समुदायों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाना था।

इस योजना पर भारतीय नेताओं से विचार-विमर्श करने के लिए शिमला में एक सम्मेलन बुलाया गया।

03

शिमला सम्मेलन

25 जून – 14 जुलाई 1945

वेवेल योजना पर विचार करने के लिए 25 जून 1945 को शिमला सम्मेलन शुरू हुआ। इसमें कांग्रेस, मुस्लिम लीग और अन्य प्रमुख राजनीतिक पक्षों के नेताओं को आमंत्रित किया गया।

सम्मेलन में सबसे बड़ा विवाद कार्यकारिणी परिषद में मुस्लिम सदस्यों के चयन को लेकर हुआ। मुहम्मद अली जिन्ना चाहते थे कि सभी मुस्लिम सदस्यों को नामित करने का अधिकार केवल मुस्लिम लीग को मिले।

कांग्रेस ने मुस्लिम लीग को भारत के सभी मुसलमानों का एकमात्र प्रतिनिधि मानने से इनकार किया। इसी विवाद के कारण कोई समझौता नहीं हो सका।

अंततः 14 जुलाई 1945 को शिमला सम्मेलन असफल घोषित कर दिया गया।

📌 भ्रम न रखें

वेवेल योजना और शिमला सम्मेलन दोनों 1945 की घटनाएँ हैं। वेवेल योजना पहले प्रस्तुत हुई और उसी पर विचार के लिए शिमला सम्मेलन बुलाया गया।

04

द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति

1945 ई.

लॉर्ड वेवेल के शासनकाल में 1945 ई. में द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हुआ। यूरोप में मई 1945 में जर्मनी की पराजय के साथ युद्ध समाप्त हुआ, जबकि जापान के आत्मसमर्पण के बाद सितंबर 1945 में विश्व युद्ध का अंतिम अंत हुआ।

युद्ध के बाद ब्रिटेन आर्थिक और सैन्य रूप से काफी कमजोर हो चुका था। भारत में भी स्वतंत्रता की माँग अत्यंत प्रबल हो गई थी।

1945 में ब्रिटेन के आम चुनाव में लेबर पार्टी की जीत हुई और क्लीमेंट एटली ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने। नई ब्रिटिश सरकार भारत की संवैधानिक समस्या के समाधान और सत्ता हस्तांतरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ी।

05

आजाद हिंद फौज के मुकदमे

1945–46 ई.

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद आजाद हिंद फौज के अधिकारियों पर दिल्ली के लाल किले में मुकदमे चलाए गए। इन मुकदमों ने पूरे देश में तीव्र राष्ट्रवादी भावना पैदा की।

सबसे प्रसिद्ध मुकदमे में शाहनवाज खाँ, प्रेम कुमार सहगल और गुरबख्श सिंह ढिल्लों पर मुकदमा चलाया गया।

इन तीनों अलग-अलग धार्मिक समुदायों से आने वाले अधिकारियों के पक्ष में देशभर में व्यापक समर्थन ने राष्ट्रीय एकता और ब्रिटिश-विरोधी भावना को मजबूत किया।

06

नौसेना विद्रोह

फरवरी 1946 ई.

वेवेल के समय फरवरी 1946 में रॉयल इंडियन नेवी के भारतीय नौसैनिकों का विद्रोह हुआ। इसकी शुरुआत बंबई में हुई और शीघ्र ही इसका प्रभाव अन्य नौसैनिक केंद्रों तक फैल गया।

नौसैनिकों की शिकायतों में खराब भोजन, नस्लीय भेदभाव, खराब सेवा-स्थितियाँ और ब्रिटिश अधिकारियों का व्यवहार शामिल था। आंदोलन में राजनीतिक और राष्ट्रवादी माँगें भी जुड़ गईं।

इस घटना ने ब्रिटिश शासन को यह संकेत दिया कि भारतीय सशस्त्र बलों में भी असंतोष गंभीर रूप ले सकता है।

07

कैबिनेट मिशन का भारत आगमन

24 मार्च 1946

भारत की संवैधानिक समस्या का समाधान खोजने और सत्ता हस्तांतरण की रूपरेखा तैयार करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने तीन सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल भारत भेजा, जिसे कैबिनेट मिशन कहा जाता है।

कैबिनेट मिशन 24 मार्च 1946 को भारत पहुँचा।

इसके तीन सदस्य थे — लॉर्ड पेथिक-लॉरेंस, सर स्टैफर्ड क्रिप्स और ए. वी. अलेक्जेंडर।

पेथिक-लॉरेंस भारत सचिव थे, स्टैफर्ड क्रिप्स व्यापार मंडल के अध्यक्ष और ए. वी. अलेक्जेंडर नौसेना विभाग के प्रमुख थे।

मिशन ने कांग्रेस, मुस्लिम लीग और अन्य भारतीय नेताओं से बातचीत की। इसका उद्देश्य स्वतंत्र भारत के लिए संवैधानिक व्यवस्था तैयार करना और संविधान सभा के गठन का मार्ग बनाना था।

🧠 तीन सदस्य याद रखें

पेथिक-लॉरेंस + स्टैफर्ड क्रिप्स + ए. वी. अलेक्जेंडर = कैबिनेट मिशन

08

कैबिनेट मिशन योजना

16 मई 1946

कैबिनेट मिशन ने 16 मई 1946 को अपनी प्रमुख संवैधानिक योजना प्रस्तुत की। मिशन ने तत्काल पाकिस्तान की माँग को स्वीकार नहीं किया और भारत को एक संघीय ढाँचे में बनाए रखने का प्रस्ताव रखा।

प्रस्तावित भारतीय संघ के केंद्र के पास मुख्य रूप से विदेश मामले, रक्षा और संचार जैसे विषय रखने की व्यवस्था थी। शेष अधिकांश शक्तियाँ प्रांतों के पास रहने वाली थीं।

प्रांतों को तीन समूहों में बाँटने की योजना भी प्रस्तुत की गई। इसके साथ ही भारत का संविधान बनाने के लिए संविधान सभा गठित करने की व्यवस्था की गई।

सत्ता हस्तांतरण से पहले एक अंतरिम सरकार बनाने का प्रस्ताव भी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा था।

09

सीधी कार्यवाही दिवस

16 अगस्त 1946

कैबिनेट मिशन योजना को लेकर कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच गंभीर मतभेद उत्पन्न हो गए। मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की माँग पर दबाव बढ़ाने के लिए 16 अगस्त 1946 को सीधी कार्यवाही दिवस मनाने का आह्वान किया।

मुस्लिम लीग ने इससे पहले 29 जुलाई 1946 को कैबिनेट मिशन योजना की अपनी पूर्व स्वीकृति वापस ले ली और सीधी कार्यवाही का निर्णय लिया।

सीधी कार्यवाही दिवस के दौरान कलकत्ता में भीषण साम्प्रदायिक हिंसा हुई, जिसे इतिहास में ग्रेट कलकत्ता किलिंग के नाम से भी जाना जाता है।

इसके बाद बंगाल, बिहार, नोआखाली और देश के अन्य क्षेत्रों में भी साम्प्रदायिक तनाव और हिंसा बढ़ी। इससे भारत की राजनीतिक स्थिति और अधिक गंभीर हो गई।

🔥 अत्यंत महत्वपूर्ण

सीधी कार्यवाही दिवस — 16 अगस्त 1946 — मुस्लिम लीग — पाकिस्तान की माँग।

10

अंतरिम सरकार

2 सितंबर 1946

कैबिनेट मिशन की योजना के आधार पर 2 सितंबर 1946 को भारत में अंतरिम सरकार का गठन हुआ।

जवाहरलाल नेहरू वायसराय की कार्यकारिणी परिषद के उपाध्यक्ष बने और व्यवहार में अंतरिम सरकार के प्रमुख की भूमिका निभाई।

प्रारंभ में मुस्लिम लीग अंतरिम सरकार में शामिल नहीं हुई। बाद में अक्टूबर 1946 में मुस्लिम लीग भी अंतरिम सरकार में शामिल हुई।

मुस्लिम लीग की ओर से लियाकत अली खाँ को वित्त विभाग मिला। कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच मतभेदों के कारण अंतरिम सरकार का संचालन लगातार तनावपूर्ण बना रहा।

11

संविधान सभा की पहली बैठक

9 दिसंबर 1946

कैबिनेट मिशन योजना के आधार पर गठित संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को नई दिल्ली के संविधान भवन में हुई।

सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्यों में से एक डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को संविधान सभा का अस्थायी अध्यक्ष बनाया गया। इसलिए पहली बैठक उनकी अध्यक्षता में हुई।

11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष निर्वाचित हुए।

मुस्लिम लीग ने संविधान सभा की पहली बैठक का बहिष्कार किया और उसके सदस्य इसमें शामिल नहीं हुए।

13 दिसंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसे 22 जनवरी 1947 को स्वीकार किया गया। आगे चलकर यही प्रस्ताव भारतीय संविधान की प्रस्तावना का महत्वपूर्ण वैचारिक आधार बना।

🎯 भ्रम न रखें

9 दिसंबर 1946 — पहली बैठक — सच्चिदानंद सिन्हा अस्थायी अध्यक्ष।
11 दिसंबर 1946 — डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्थायी अध्यक्ष।

12

एटली की ऐतिहासिक घोषणा

20 फरवरी 1947

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने 20 फरवरी 1947 को ब्रिटिश संसद में भारत के संबंध में एक अत्यंत महत्वपूर्ण घोषणा की।

उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिटिश सरकार भारत में सत्ता को जिम्मेदार भारतीय हाथों में जून 1948 से पहले हस्तांतरित कर देगी।

इस घोषणा ने पहली बार सत्ता हस्तांतरण के लिए एक निश्चित अंतिम समय-सीमा घोषित कर दी।

इसी घोषणा में यह भी स्पष्ट हुआ कि लॉर्ड वेवेल के स्थान पर लॉर्ड माउंटबेटन को भारत का नया वायसराय बनाया जाएगा।

इसलिए इसे केवल “20 फरवरी 1947 को भारत को स्वतंत्रता देने की घोषणा” के रूप में याद करने की बजाय यह याद रखना अधिक सही है कि एटली ने जून 1948 से पहले भारतीयों को सत्ता हस्तांतरित करने की घोषणा की थी। वास्तविक स्वतंत्रता बाद में 15 अगस्त 1947 को मिली।

📌 महत्वपूर्ण अंतर

20 फरवरी 1947 — सत्ता हस्तांतरण की समय-सीमा घोषित।
15 अगस्त 1947 — भारत वास्तव में स्वतंत्र हुआ।

13

वेवेल के स्थान पर माउंटबेटन

मार्च 1947

ब्रिटिश सरकार ने भारत में तेजी से बिगड़ती राजनीतिक और साम्प्रदायिक स्थिति के बीच लॉर्ड वेवेल को हटाकर लॉर्ड माउंटबेटन को नया वायसराय नियुक्त करने का निर्णय लिया।

लॉर्ड माउंटबेटन ने 24 मार्च 1947 को भारत के वायसराय के रूप में पदभार ग्रहण किया। इसके साथ ही लॉर्ड वेवेल का कार्यकाल समाप्त हुआ।

माउंटबेटन भारत का अंतिम ब्रिटिश वायसराय बना और उसके कार्यकाल में भारत के विभाजन तथा सत्ता हस्तांतरण की अंतिम योजना लागू हुई।

14

वेवेल काल की प्रमुख घटनाएँ

एक नज़र में

वर्ष / तिथिप्रमुख घटना
1944सी. राजगोपालाचारी द्वारा सी. आर. फार्मूला
सितंबर 1944गांधी–जिन्ना वार्ता
14 जून 1945वेवेल योजना की घोषणा
25 जून–14 जुलाई 1945शिमला सम्मेलन
1945द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति
1945–46आजाद हिंद फौज के मुकदमे
फरवरी 1946रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह
24 मार्च 1946कैबिनेट मिशन भारत पहुँचा
16 मई 1946कैबिनेट मिशन योजना
16 अगस्त 1946मुस्लिम लीग का सीधी कार्यवाही दिवस
2 सितंबर 1946अंतरिम सरकार का गठन
9 दिसंबर 1946संविधान सभा की पहली बैठक
11 दिसंबर 1946डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष निर्वाचित
20 फरवरी 1947क्लीमेंट एटली द्वारा सत्ता हस्तांतरण की समय-सीमा की घोषणा
24 मार्च 1947लॉर्ड माउंटबेटन ने वायसराय का पदभार ग्रहण किया
15

घटनाक्रम याद रखें

स्वतंत्रता की ओर बढ़ता भारत

🧠 महत्वपूर्ण क्रम

सी. आर. फार्मूला — 1944 वेवेल योजना — 1945 शिमला सम्मेलन — 1945 कैबिनेट मिशन — 1946 सीधी कार्यवाही — 1946 अंतरिम सरकार — 1946 संविधान सभा — 1946 एटली घोषणा — 1947

⚡ अंतिम त्वरित पुनरावृत्ति

लॉर्ड वेवेल — अक्टूबर 1943 से मार्च 1947।

सी. आर. फार्मूला — 1944 — सी. राजगोपालाचारी।

गांधी–जिन्ना वार्ता — सितंबर 1944 — असफल।

वेवेल योजना — 14 जून 1945।

शिमला सम्मेलन — 25 जून से 14 जुलाई 1945 — असफल।

द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति — 1945।

आजाद हिंद फौज के मुकदमे — 1945–46 — लाल किला।

रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह — फरवरी 1946।

कैबिनेट मिशन भारत आया — 24 मार्च 1946।

कैबिनेट मिशन के सदस्य — पेथिक-लॉरेंस, स्टैफर्ड क्रिप्स और ए. वी. अलेक्जेंडर।

कैबिनेट मिशन योजना — 16 मई 1946।

सीधी कार्यवाही दिवस — 16 अगस्त 1946 — मुस्लिम लीग।

अंतरिम सरकार — 2 सितंबर 1946 — जवाहरलाल नेहरू कार्यकारिणी परिषद के उपाध्यक्ष।

संविधान सभा की प्रथम बैठक — 9 दिसंबर 1946 — अस्थायी अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद — 11 दिसंबर 1946 को संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष निर्वाचित।

उद्देश्य प्रस्ताव — 13 दिसंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू ने प्रस्तुत किया; 22 जनवरी 1947 को स्वीकार।

क्लीमेंट एटली की घोषणा — 20 फरवरी 1947 — जून 1948 से पहले सत्ता हस्तांतरण की समय-सीमा।

लॉर्ड माउंटबेटन — 24 मार्च 1947 को वायसराय बने।

Scroll to Top