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भारतीय संविधान की रचना
MAKING OF THE INDIAN CONSTITUTION

भारतीय संविधान की रचना

संविधान सभा की मांग से संविधान के लागू होने तक की संपूर्ण संवैधानिक यात्रा

भारतीय संविधान का निर्माण

भारतीय संविधान का निर्माण संविधान सभा ने किया। संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना, 1946 के आधार पर किया गया था।

संविधान सभा प्रत्यक्ष सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर निर्वाचित संस्था नहीं थी। ब्रिटिश भारतीय प्रांतों के प्रतिनिधियों का चुनाव संबंधित प्रांतीय विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया गया, जबकि देशी रियासतों के प्रतिनिधियों को रियासतों द्वारा नामित किया जाना था।

संविधान निर्माण केवल प्रारूप समिति का कार्य नहीं था। संविधान सभा, उसकी विभिन्न समितियों, संवैधानिक सलाहकार बी. एन. राव, प्रारूप समिति और अनेक सदस्यों के लंबे विचार-विमर्श के बाद भारतीय संविधान ने अंतिम रूप प्राप्त किया।

01

संविधान सभा की मांग का विकास

भारतीयों द्वारा अपना संविधान स्वयं बनाने की दिशा में विकास

1934 में एम. एन. रॉय ने संविधान सभा की अवधारणा को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया। प्रतियोगी परीक्षाओं में सामान्यतः उन्हें भारत में संविधान सभा का विचार सर्वप्रथम प्रस्तुत करने वाला व्यक्ति माना जाता है।

इसी अवधि में संविधान सभा की मांग भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में अधिक स्पष्ट होने लगी। मई 1934 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने संविधान सभा द्वारा संविधान निर्माण की योजना को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया। कई परीक्षा पुस्तकों में इसके लिए 1935 भी दिया जाता है, इसलिए दोनों वर्ष दिखाई दे सकते हैं; ऐतिहासिक कार्यवाही में मई 1934 का उल्लेख अधिक स्पष्ट मिलता है।

1938 में जवाहरलाल नेहरू ने कांग्रेस की ओर से यह स्पष्ट किया कि स्वतंत्र भारत का संविधान ऐसी संविधान सभा द्वारा बनाया जाना चाहिए जो भारतीय जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व करे और जिस पर किसी बाहरी सत्ता का हस्तक्षेप न हो।

1940 के अगस्त प्रस्ताव में ब्रिटिश सरकार ने पहली बार इस सिद्धांत को स्वीकार किया कि भारत की भावी संवैधानिक व्यवस्था के निर्माण में भारतीयों की निर्णायक भूमिका होगी।

1942 के क्रिप्स मिशन ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद भारत के लिए संविधान निर्माण करने वाली संस्था गठित करने का प्रस्ताव दिया, लेकिन तत्कालीन राजनीतिक मतभेदों के कारण यह योजना स्वीकार नहीं हुई।

1946 के कैबिनेट मिशन ने संविधान सभा के गठन, उसकी सदस्य-संख्या, प्रतिनिधित्व और निर्वाचन की व्यावहारिक योजना प्रस्तुत की। अंततः इसी योजना के आधार पर संविधान सभा अस्तित्व में आई।

🎯 महत्वपूर्ण क्रम

एम. एन. रॉय → संविधान सभा का विचार
कांग्रेस → संविधान सभा की राजनीतिक मांग
अगस्त प्रस्ताव → भारतीयों द्वारा संविधान निर्माण के सिद्धांत की स्वीकृति
क्रिप्स मिशन → युद्धोत्तर संविधान निर्माण संस्था का प्रस्ताव
कैबिनेट मिशन → वास्तविक संविधान सभा गठन की योजना

02

कैबिनेट मिशन, 1946

संविधान सभा गठन की व्यावहारिक योजना

ब्रिटिश सरकार ने 1946 में भारत की संवैधानिक समस्या के समाधान के लिए तीन ब्रिटिश मंत्रियों का एक प्रतिनिधिमंडल भारत भेजा, जिसे कैबिनेट मिशन कहा गया।

लॉर्ड पैथिक-लॉरेंस उस समय भारत सचिव थे और मिशन के प्रमुख सदस्य थे।

सर स्टैफर्ड क्रिप्स ब्रिटिश सरकार में व्यापार बोर्ड के अध्यक्ष थे। वे इससे पहले 1942 के क्रिप्स मिशन से भी जुड़े हुए थे।

ए. वी. अलेक्जेंडर ब्रिटिश सरकार में नौसेना से संबंधित मंत्री थे।

कैबिनेट मिशन ने संविधान सभा की कुल सदस्य-संख्या, प्रांतों और रियासतों के प्रतिनिधित्व तथा सदस्यों के निर्वाचन की प्रक्रिया निर्धारित की।

सदस्य तत्कालीन पद
लॉर्ड पैथिक-लॉरेंस भारत सचिव
सर स्टैफर्ड क्रिप्स व्यापार बोर्ड के अध्यक्ष
ए. वी. अलेक्जेंडर नौसेना मंत्री
03

संविधान सभा की मूल संरचना

389 सदस्यों वाली प्रस्तावित सभा

389

संविधान सभा की कुल निर्धारित सदस्य-संख्या

296

ब्रिटिश भारतीय क्षेत्रों से कुल प्रतिनिधि

93

देशी रियासतों के लिए निर्धारित स्थान

कैबिनेट मिशन योजना के अनुसार संविधान सभा की कुल सदस्य-संख्या 389 निर्धारित की गई।

इनमें 292 सदस्य ब्रिटिश भारतीय प्रांतों से और 4 सदस्य मुख्य आयुक्त प्रांतों से आने थे।

इस प्रकार ब्रिटिश भारतीय क्षेत्रों से कुल सदस्य संख्या 296 थी।

इसके अतिरिक्त 93 स्थान देशी रियासतों के लिए निर्धारित किए गए थे।

📗 292 और 296 का अंतर

292 = ब्रिटिश भारतीय प्रांत
4 = मुख्य आयुक्त प्रांत
292 + 4 = 296 ब्रिटिश भारतीय सीटें
296 + 93 रियासतें = 389 कुल सीटें

04

सदस्यों के चुनाव की पद्धति

प्रत्यक्ष चुनाव नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व

संविधान सभा का चुनाव सीधे भारत की पूरी वयस्क जनता ने नहीं किया था। ब्रिटिश भारतीय प्रांतों के प्रतिनिधियों का चुनाव संबंधित प्रांतीय विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया गया।

चुनाव में आनुपातिक प्रतिनिधित्व तथा एकल संक्रमणीय मत की पद्धति अपनाई गई।

प्रतिनिधित्व का अनुपात मोटे तौर पर प्रति दस लाख जनसंख्या पर एक स्थान के आधार पर निर्धारित किया गया था।

प्रांतीय सीटों को मुख्य रूप से सामान्य, मुस्लिम और सिख समुदायों में उनकी जनसंख्या के अनुपात के अनुसार विभाजित किया गया था।

प्रत्येक समुदाय से संबंधित प्रांतीय विधानसभा सदस्य अपने समुदाय के संविधान सभा प्रतिनिधियों का चुनाव करते थे।

देशी रियासतों के प्रतिनिधियों का चुनाव इसी प्रकार प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा नहीं किया गया था। उन्हें संबंधित रियासतों द्वारा निर्धारित प्रक्रिया से नामित किया जाना था।

⚠️ भ्रम से बचें

संविधान सभा प्रत्यक्ष सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार से निर्वाचित नहीं थी। भारत में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर पहला आम चुनाव स्वतंत्रता और संविधान लागू होने के बाद 1951–52 में हुआ।

05

भारत विभाजन के बाद संविधान सभा

389 से घटकर 299 सदस्य

1947 में भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों के प्रतिनिधि भारतीय संविधान सभा से अलग हो गए। इसके बाद भारतीय संविधान सभा की निर्धारित कुल सदस्य-संख्या 299 रह गई।

इन 299 सदस्यों में 229 प्रतिनिधि प्रांतों से तथा 70 प्रतिनिधि देशी रियासतों से थे।

संविधान सभा में कुल 15 महिला सदस्यों ने विभिन्न चरणों में भाग लिया। इनमें सरोजिनी नायडू, हंसा मेहता, दुर्गाबाई देशमुख, राजकुमारी अमृत कौर, सुचेता कृपलानी, अम्मू स्वामीनाथन और दक्षिणायनी वेलायुधन जैसी प्रमुख महिलाएँ शामिल थीं।

संविधान सभा की प्रारंभिक सामुदायिक संरचना में अनुसूचित जातियों के लिए 33 प्रतिनिधियों का उल्लेख मिलता है। इसे विभाजन के बाद की 299 सदस्यीय संरचना का स्वतः अलग स्थिर आंकड़ा मानने के बजाय संविधान सभा के प्रतिनिधित्व संबंधी तथ्य के रूप में पढ़ना अधिक सुरक्षित है।

📗 विभाजन के बाद का सूत्र

229 प्रांतीय प्रतिनिधि + 70 रियासतों के प्रतिनिधि = 299 सदस्य

06

संविधान सभा की पहली बैठक

9 दिसंबर 1946 का ऐतिहासिक दिन

संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को नई दिल्ली के संविधान भवन में हुई। यही भवन आज संसद भवन के केंद्रीय कक्ष के रूप में जाना जाता है।

पहली बैठक में 207 सदस्य उपस्थित थे।

सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्यों में से एक डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष बनाया गया।

11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष चुने गए।

एच. सी. मुखर्जी संविधान सभा के उपाध्यक्ष चुने गए। आगे चलकर वी. टी. कृष्णमाचारी को भी उपाध्यक्ष बनाया गया।

प्रसिद्ध विधिवेत्ता बी. एन. राव संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार नियुक्त किए गए। संविधान के प्रारंभिक संवैधानिक मसौदे और विभिन्न देशों की संवैधानिक व्यवस्थाओं के अध्ययन में उनकी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका थी।

मुस्लिम लीग ने संविधान सभा की पहली बैठक का बहिष्कार किया और पाकिस्तान के लिए अलग संविधान सभा की मांग पर जोर दिया।

पद व्यक्ति
अस्थायी अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा
स्थायी अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद
उपाध्यक्ष एच. सी. मुखर्जी
अन्य उपाध्यक्ष वी. टी. कृष्णमाचारी
संवैधानिक सलाहकार बी. एन. राव
07

उद्देश्य प्रस्ताव

संविधान की मूल राजनीतिक और दार्शनिक दिशा

जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में 13 दिसंबर 1946 को ऐतिहासिक उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

लंबे विचार-विमर्श के बाद उद्देश्य प्रस्ताव को 22 जनवरी 1947 को संविधान सभा ने स्वीकार किया।

इस प्रस्ताव में भारत को स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र बनाने, लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित करने तथा सभी नागरिकों के लिए न्याय, समानता और स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की मूल भावना व्यक्त की गई।

इसमें अल्पसंख्यकों, पिछड़े क्षेत्रों और विभिन्न समुदायों के हितों की सुरक्षा की भावना भी शामिल थी।

आगे चलकर उद्देश्य प्रस्ताव के मूल आदर्श भारतीय संविधान की प्रस्तावना में दिखाई दिए। इसी कारण इसे प्रस्तावना का वैचारिक आधार माना जाता है।

🎯 तिथि याद रखें

13 दिसंबर 1946 — उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत
22 जनवरी 1947 — उद्देश्य प्रस्ताव स्वीकार

08

देशी रियासतें और हैदराबाद

संविधान सभा में रियासतों का प्रतिनिधित्व

कैबिनेट मिशन योजना के अनुसार देशी रियासतों के लिए संविधान सभा में 93 स्थान निर्धारित किए गए थे, लेकिन प्रारंभ में सभी रियासतों ने अपने प्रतिनिधि नहीं भेजे।

हैदराबाद उन प्रमुख देशी रियासतों में था जिसने संविधान सभा के प्रारंभिक चरण में अपने प्रतिनिधि नहीं भेजे।

रियासतों की भागीदारी धीरे-धीरे बढ़ी और स्वतंत्रता के बाद भारतीय संघ में उनके एकीकरण के साथ संविधान सभा का स्वरूप अधिक व्यापक हुआ।

⚠️ सावधानी

तेज बहादुर सप्रू और जयप्रकाश नारायण द्वारा संविधान सभा की सदस्यता अस्वीकार करने जैसे कथन अलग-अलग पुस्तकों में मिलते हैं, लेकिन इन्हें संविधान सभा से जुड़े मुख्य निर्विवाद तथ्यों की श्रेणी में रखना उचित नहीं है।

09

संविधान सभा की प्रमुख समितियाँ

विभिन्न संवैधानिक विषयों पर विस्तृत कार्य

संविधान सभा ने संविधान के विभिन्न विषयों का विस्तार से अध्ययन करने के लिए अनेक समितियाँ और उपसमितियाँ गठित कीं।

प्रतियोगी परीक्षा की परंपरा में सामान्यतः 22 समितियाँ—8 प्रमुख और 14 अन्य बताया जाता है। विभिन्न आधिकारिक अभिलेखों में समितियों और उपसमितियों का वर्गीकरण अलग ढंग से किया गया है, इसलिए 22 = 8 प्रमुख + 14 अन्य को मुख्यतः प्रचलित परीक्षा-वर्गीकरण के रूप में याद रखना चाहिए।

समिति अध्यक्ष
प्रारूप समिति डॉ. बी. आर. आंबेडकर
संघ शक्ति समिति जवाहरलाल नेहरू
संघ संविधान समिति जवाहरलाल नेहरू
राज्यों से वार्ता संबंधी समिति जवाहरलाल नेहरू
प्रांतीय संविधान समिति सरदार वल्लभभाई पटेल
मौलिक अधिकार, अल्पसंख्यक तथा जनजातीय एवं बहिष्कृत क्षेत्रों पर परामर्श समिति सरदार वल्लभभाई पटेल
प्रक्रिया नियम समिति डॉ. राजेंद्र प्रसाद
संचालन समिति डॉ. राजेंद्र प्रसाद
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महत्वपूर्ण उपसमितियाँ

मौलिक अधिकार, अल्पसंख्यक और जनजातीय क्षेत्र

समिति / उपसमिति अध्यक्ष
मौलिक अधिकार उपसमिति जे. बी. कृपलानी
अल्पसंख्यक उपसमिति एच. सी. मुखर्जी
उत्तर-पूर्व सीमांत एवं असम के जनजातीय क्षेत्रों से संबंधित उपसमिति गोपीनाथ बोरदोलोई
राष्ट्रीय ध्वज संबंधी तदर्थ समिति डॉ. राजेंद्र प्रसाद

📗 सबसे अधिक पूछी जाने वाली जोड़ियाँ

प्रारूप समिति — डॉ. आंबेडकर
संघ शक्ति समिति — जवाहरलाल नेहरू
प्रांतीय संविधान समिति — सरदार पटेल
परामर्श समिति — सरदार पटेल
प्रक्रिया नियम समिति — डॉ. राजेंद्र प्रसाद

11

प्रारूप समिति

29 अगस्त 1947 को गठित सात सदस्यीय समिति

संविधान सभा ने 29 अगस्त 1947 को प्रारूप समिति का गठन किया।

इस समिति में प्रारंभ में 7 सदस्य थे और डॉ. बी. आर. आंबेडकर इसके अध्यक्ष चुने गए।

सदस्य विशेष तथ्य
डॉ. बी. आर. आंबेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष
एन. गोपालस्वामी आयंगार मूल सदस्य
अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर प्रसिद्ध विधिवेत्ता
के. एम. मुंशी मूल सदस्य
सैयद मोहम्मद सादुल्ला मूल सदस्य
बी. एल. मित्तर बाद में उनके स्थान पर एन. माधव राव
डी. पी. खेतान उनकी मृत्यु के बाद टी. टी. कृष्णमाचारी

डॉ. आंबेडकर प्रारंभ में बंगाल से संविधान सभा के लिए निर्वाचित हुए थे। भारत विभाजन के बाद उनका निर्वाचन क्षेत्र पाकिस्तान में चला गया और उनकी संविधान सभा सदस्यता समाप्त होने की स्थिति उत्पन्न हुई।

इसके बाद वे बंबई प्रांत से पुनः संविधान सभा के लिए निर्वाचित हुए और संविधान निर्माण में अपनी भूमिका जारी रखी।

12

बी. एन. राव और डॉ. आंबेडकर की भूमिका

दो महत्वपूर्ण भूमिकाओं का अंतर

बी. एन. राव

संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार। विभिन्न संवैधानिक व्यवस्थाओं का अध्ययन किया और प्रारंभिक संवैधानिक मसौदा तैयार करने में केंद्रीय भूमिका निभाई।

डॉ. बी. आर. आंबेडकर

प्रारूप समिति के अध्यक्ष। मसौदे की समीक्षा, कानूनी रूप-रचना, संशोधन और संविधान सभा के समक्ष प्रस्तुत करने में प्रमुख भूमिका।

संविधान का प्रारंभिक मसौदा तैयार करने में बी. एन. राव की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी। प्रारूप समिति को संविधान सभा के निर्णयों के आधार पर संवैधानिक सलाहकार द्वारा तैयार मसौदा उपलब्ध कराया गया।

प्रारूप समिति ने इस मसौदे की विस्तृत समीक्षा की, उसमें आवश्यक संशोधन किए और सभा के निर्णयों को विधिक एवं संवैधानिक भाषा में व्यवस्थित रूप दिया।

प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में डॉ. बी. आर. आंबेडकर ने संविधान के प्रारूप को सभा में प्रस्तुत करने और उस पर उठे प्रश्नों तथा संशोधनों का उत्तर देने में केंद्रीय भूमिका निभाई।

⚠️ भ्रम से बचें

बी. एन. राव = संवैधानिक सलाहकार
डॉ. आंबेडकर = प्रारूप समिति के अध्यक्ष

13

संविधान के प्रारूप की यात्रा

प्रारंभिक मसौदे से संविधान सभा तक

संविधान सभा की विभिन्न समितियों के निर्णयों के आधार पर संवैधानिक सलाहकार बी. एन. राव के कार्यालय ने प्रारंभिक मसौदा तैयार किया।

प्रारूप समिति ने इस मसौदे की समीक्षा कर उसमें व्यापक संशोधन और आवश्यक संवैधानिक प्रावधान जोड़े।

प्रारूप समिति ने अपना संशोधित प्रारूप 21 फरवरी 1948 को संविधान सभा के अध्यक्ष को सौंपा।

इसके बाद प्रारूप को जनता, प्रांतीय सरकारों और अन्य संस्थाओं के विचार एवं सुझावों के लिए प्रसारित किया गया।

सुझावों और टिप्पणियों पर विचार करने के बाद संशोधित प्रारूप संविधान सभा के समक्ष लाया गया।

4 नवंबर 1948 को डॉ. बी. आर. आंबेडकर ने संविधान का प्रारूप संविधान सभा में औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया।

🎯 तारीखों की जोड़ी

29 अगस्त 1947 — प्रारूप समिति गठित
21 फरवरी 1948 — प्रारूप समिति का मसौदा अध्यक्ष को सौंपा गया
4 नवंबर 1948 — डॉ. आंबेडकर ने प्रारूप सभा में प्रस्तुत किया

14

संविधान निर्माण में लगा समय

लगभग तीन वर्ष की विस्तृत विचार-विमर्श प्रक्रिया

संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई और संविधान को 26 नवंबर 1949 को स्वीकार किया गया। इस प्रकार संविधान निर्माण में सामान्यतः 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन का समय बताया जाता है।

संविधान सभा ने संविधान निर्माण के लिए 11 प्रमुख सत्रों में कार्य किया।

बैठक-दिवस की गणना अलग अभिलेखीय वर्गीकरण में 165, 166 अथवा 167 के रूप में मिल सकती है। इसका कारण यह है कि कुछ गणनाएँ केवल संविधान निर्माण के मुख्य कार्य-दिवस गिनती हैं, जबकि डिजिटल अभिलेख सभी पूर्ण सभा बैठकों को अलग ढंग से गिनते हैं। परीक्षा में प्रचलित आंकड़ा लगभग 165 दिन है।

संविधान के प्रारूप पर विस्तृत विचार-विमर्श के लिए लगभग 114 दिन लगाए गए।

संविधान के प्रारूप से संबंधित कुल 7,635 संशोधन प्रस्तावित किए गए, जिनमें से 2,473 संशोधन संविधान सभा में वास्तव में प्रस्तुत और विचारित किए गए।

2 वर्ष 11 माह 18 दिन

संविधान निर्माण की अवधि

11

प्रमुख सत्र

114 दिन

प्रारूप पर विस्तृत चर्चा

7,635

प्रस्तावित संशोधन

📗 संशोधनों का अंतर

7,635 = कुल प्रस्तावित संशोधन
2,473 = सभा में प्रस्तुत/विचारित संशोधन

15

संविधान निर्माण की महत्वपूर्ण तिथियाँ

1946 से 1950 तक का क्रम

तिथि घटना
9 दिसंबर 1946 संविधान सभा की पहली बैठक
11 दिसंबर 1946 डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्थायी अध्यक्ष निर्वाचित
13 दिसंबर 1946 जवाहरलाल नेहरू ने उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया
22 जनवरी 1947 उद्देश्य प्रस्ताव स्वीकार किया गया
22 जुलाई 1947 राष्ट्रीय ध्वज अपनाया गया
29 अगस्त 1947 प्रारूप समिति गठित हुई
21 फरवरी 1948 प्रारूप समिति ने मसौदा संविधान सभा अध्यक्ष को सौंपा
4 नवंबर 1948 डॉ. आंबेडकर ने प्रारूप संविधान सभा में प्रस्तुत किया
26 नवंबर 1949 संविधान अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया गया
24 जनवरी 1950 संविधान पर सदस्यों के हस्ताक्षर; राष्ट्रगान संबंधी घोषणा; डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रपति निर्वाचित
26 जनवरी 1950 संविधान पूर्ण रूप से लागू; भारत गणराज्य बना
16

राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और वंदे मातरम्

संविधान सभा से जुड़े राष्ट्रीय प्रतीक

संविधान सभा ने वर्तमान भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को 22 जुलाई 1947 को अपनाया।

24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की कि शब्द और संगीत से युक्त ‘जन गण मन’ भारत का राष्ट्रगान होगा।

उसी घोषणा में स्वतंत्रता आंदोलन में ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले ‘वंदे मातरम्’ को ‘जन गण मन’ के समान सम्मान और समान दर्जा दिए जाने की बात कही गई।

इसी दिन डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति निर्वाचित घोषित किए गए।

🎯 तीन महत्वपूर्ण तथ्य

राष्ट्रीय ध्वज — 22 जुलाई 1947
राष्ट्रगान संबंधी घोषणा — 24 जनवरी 1950
संविधान लागू — 26 जनवरी 1950

17

मूल संविधान

26 जनवरी 1950 को लागू संविधान का मूल स्वरूप

26 जनवरी 1950 को लागू हुए भारतीय संविधान के मूल स्वरूप में 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियाँ थीं।

आज संविधान में संशोधनों के कारण अनुच्छेदों, भागों और अनुसूचियों की संख्या एवं संरचना मूल स्वरूप से बदल चुकी है, इसलिए परीक्षा में प्रश्न पढ़ते समय यह देखना आवश्यक है कि पूछा गया है ‘मूल संविधान’ या वर्तमान संविधान।

संविधान को 26 जनवरी को लागू करने का विशेष कारण राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ा था। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज दिवस मनाया था।

इस ऐतिहासिक स्मृति को सम्मान देने के लिए संविधान को 26 नवंबर 1949 को स्वीकार करने के बावजूद उसके अधिकांश प्रावधानों को 26 जनवरी 1950 से लागू किया गया।

📗 मूल संविधान

395 अनुच्छेद + 22 भाग + 8 अनुसूचियाँ

18

26 नवंबर और 26 जनवरी का अंतर

अंगीकरण और लागू होने की तिथि

26 नवंबर 1949

संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया गया।

26 जनवरी 1950

संविधान के अधिकांश प्रावधान लागू हुए और भारत गणराज्य बना।

⚠️ भ्रम से बचें

संविधान बनने/अंगीकृत होने की तारीख — 26 नवंबर 1949
संविधान पूर्ण रूप से लागू होने की तारीख — 26 जनवरी 1950

19

संविधान पर हस्ताक्षर

24 जनवरी 1950 की अंतिम ऐतिहासिक बैठक

संविधान सभा की अंतिम बैठक 24 जनवरी 1950 को हुई।

संविधान पर कुल 284 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए।

सदस्यों के हस्ताक्षर के लिए संविधान की तीन प्रतियाँ रखी गई थीं—एक हस्तलिखित और अलंकृत अंग्रेजी प्रति, एक मुद्रित अंग्रेजी प्रति तथा एक हस्तलिखित हिंदी प्रति।

मूल संविधान की प्रसिद्ध हस्तलिखित अंग्रेजी प्रति को प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा ने सुंदर सुलेख में लिखा।

मूल संविधान के पृष्ठों का कलात्मक अलंकरण नंदलाल बोस और शांतिनिकेतन के कलाकारों ने किया।

20

संविधान सभा की दोहरी भूमिका

संविधान निर्माण और विधायिका दोनों का कार्य

संविधान सभा ने केवल भारत का संविधान ही नहीं बनाया, बल्कि स्वतंत्रता के बाद उसने देश की विधायिका के रूप में भी कार्य किया।

15 अगस्त 1947 के बाद भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम के प्रभाव से संविधान सभा अपने संविधान निर्माण के कार्य में पूर्ण रूप से संप्रभु संस्था बन गई।

संविधान निर्माण का कार्य करते समय सभा की अध्यक्षता डॉ. राजेंद्र प्रसाद करते थे।

जब संविधान सभा विधायी कार्य करती थी, तब उसका काम अलग बैठक के रूप में किया जाता था। बाद में इस विधायी स्वरूप में जी. वी. मावलंकर प्रमुख पीठासीन अधिकारी बने।

26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के बाद संविधान सभा का विधायी स्वरूप अस्थायी संसद में परिवर्तित हो गया, जो नए आम चुनावों के बाद संसद बनने तक कार्य करती रही।

21

डॉ. बी. आर. आंबेडकर की भूमिका

प्रारूप समिति के अध्यक्ष और संविधान के प्रमुख शिल्पकार

डॉ. बी. आर. आंबेडकर भारतीय संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। संविधान के प्रावधानों को सुव्यवस्थित विधिक रूप देने, विभिन्न प्रावधानों का बचाव करने और संविधान सभा की विस्तृत बहसों में उनका अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान था।

इसी कारण उन्हें सामान्यतः भारतीय संविधान का प्रमुख शिल्पकार कहा जाता है।

हालाँकि भारतीय संविधान किसी एक व्यक्ति की अकेली रचना नहीं था। संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, बी. एन. राव, प्रारूप समिति के अन्य सदस्य, विभिन्न समितियाँ और संविधान सभा के सैकड़ों सदस्यों ने इसके निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसलिए सबसे सटीक समझ यह है कि डॉ. आंबेडकर संविधान के प्रमुख शिल्पकार और प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे, जबकि भारतीय संविधान संविधान सभा के सामूहिक प्रयास का परिणाम था।

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सबसे महत्वपूर्ण भ्रम और उनके सही तथ्य

परीक्षा में गलती से बचाने वाले बिंदु

गलत: संविधान सभा प्रत्यक्ष रूप से भारत की जनता द्वारा चुनी गई थी।
सही: प्रांतीय प्रतिनिधियों का चुनाव प्रांतीय विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों ने किया।

गलत: संविधान सभा के सभी 389 सदस्य निर्वाचित थे।
सही: देशी रियासतों के लिए निर्धारित प्रतिनिधियों को रियासतों द्वारा नामित किया जाना था।

भ्रम: 292 और 296 दोनों को प्रांतों की संख्या समझ लेना।
सही: 292 ब्रिटिश भारतीय प्रांत + 4 मुख्य आयुक्त प्रांत = 296 ब्रिटिश भारतीय सीटें।

गलत: संविधान सभा विभाजन के बाद भी 389 सदस्यों की रही।
सही: विभाजन के बाद सदस्य-संख्या 299 रह गई—229 प्रांत + 70 रियासतें।

गलत: डॉ. राजेंद्र प्रसाद पहली बैठक से स्थायी अध्यक्ष थे।
सही: 9 दिसंबर को डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा अस्थायी अध्यक्ष थे; 11 दिसंबर को डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्थायी अध्यक्ष चुने गए।

गलत: बी. एन. राव प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे।
सही: बी. एन. राव संवैधानिक सलाहकार और डॉ. बी. आर. आंबेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे।

गलत: संविधान का प्रारूप शुरू से केवल डॉ. आंबेडकर ने अकेले लिखा।
सही: प्रारंभिक संवैधानिक मसौदे में बी. एन. राव की बड़ी भूमिका थी; प्रारूप समिति ने उसे संशोधित और व्यवस्थित किया।

गलत: 26 नवंबर 1949 को ही संविधान पूर्ण रूप से लागू हो गया।
सही: संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत हुआ और अधिकांश प्रावधान 26 जनवरी 1950 से लागू हुए।

गलत: मूल संविधान में वर्तमान जैसी ही अनुसूचियाँ थीं।
सही: मूल संविधान में 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियाँ थीं।

अति-सरलीकरण: भारतीय संविधान केवल डॉ. आंबेडकर की रचना है।
सही: डॉ. आंबेडकर इसके प्रमुख शिल्पकार और प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे; संविधान सामूहिक संवैधानिक प्रयास का परिणाम था।

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एक नज़र में पूरा अध्याय

सबसे अधिक पूछे जाने वाले तथ्य

प्रश्न / तथ्य उत्तर
संविधान सभा का स्पष्ट विचार एम. एन. रॉय, 1934
संविधान सभा गठन का आधार कैबिनेट मिशन योजना, 1946
मूल निर्धारित सदस्य-संख्या 389
विभाजन के बाद सदस्य-संख्या 299
पहली बैठक 9 दिसंबर 1946
पहली बैठक में उपस्थित सदस्य 207
अस्थायी अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा
स्थायी अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद
संवैधानिक सलाहकार बी. एन. राव
उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत 13 दिसंबर 1946
उद्देश्य प्रस्ताव स्वीकार 22 जनवरी 1947
राष्ट्रीय ध्वज अपनाया गया 22 जुलाई 1947
प्रारूप समिति का गठन 29 अगस्त 1947
प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. बी. आर. आंबेडकर
प्रारूप सभा में प्रस्तुत 4 नवंबर 1948
संविधान निर्माण का समय 2 वर्ष, 11 महीने, 18 दिन
प्रस्तावित संशोधन 7,635
सभा में प्रस्तुत/विचारित संशोधन 2,473
संविधान अंगीकृत 26 नवंबर 1949
संविधान पर अंतिम हस्ताक्षर 24 जनवरी 1950
हस्ताक्षर करने वाले सदस्य 284
संविधान लागू 26 जनवरी 1950
मूल संविधान 395 अनुच्छेद, 22 भाग, 8 अनुसूचियाँ
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तिथियों का क्रम

एक बार में याद करने की विधि

🧠 पूरा क्रम

1934 — संविधान सभा का विचार 1946 — कैबिनेट मिशन 9 दिसंबर 1946 — पहली बैठक 13 दिसंबर 1946 — उद्देश्य प्रस्ताव 22 जनवरी 1947 — उद्देश्य प्रस्ताव स्वीकृत 22 जुलाई 1947 — राष्ट्रीय ध्वज 29 अगस्त 1947 — प्रारूप समिति 4 नवंबर 1948 — प्रारूप प्रस्तुत 26 नवंबर 1949 — संविधान अंगीकृत 24 जनवरी 1950 — हस्ताक्षर 26 जनवरी 1950 — संविधान लागू

⚡ अंतिम पुनरावृत्ति

भारतीय संविधान का निर्माण संविधान सभा ने किया और संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना, 1946 के आधार पर हुआ।

संविधान सभा प्रत्यक्ष सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार से निर्वाचित नहीं थी।

एम. एन. रॉय — 1934 — संविधान सभा की स्पष्ट अवधारणा से जुड़े प्रमुख नाम।

मूल संविधान सभा — 389 सदस्य = 292 प्रांत + 4 मुख्य आयुक्त प्रांत + 93 देशी रियासतें।

विभाजन के बाद — 299 सदस्य = 229 प्रांत + 70 रियासतें।

पहली बैठक — 9 दिसंबर 1946 — 207 सदस्य उपस्थित — अस्थायी अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा।

स्थायी अध्यक्ष — डॉ. राजेंद्र प्रसाद — 11 दिसंबर 1946।

संवैधानिक सलाहकार — बी. एन. राव।

उद्देश्य प्रस्ताव — जवाहरलाल नेहरू — 13 दिसंबर 1946; स्वीकार — 22 जनवरी 1947।

राष्ट्रीय ध्वज — 22 जुलाई 1947।

प्रारूप समिति — 29 अगस्त 1947 — 7 मूल सदस्य — अध्यक्ष डॉ. बी. आर. आंबेडकर।

बी. एन. राव ने प्रारंभिक संवैधानिक मसौदे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई; प्रारूप समिति ने उसकी समीक्षा और संशोधन किया।

डॉ. आंबेडकर ने 4 नवंबर 1948 को प्रारूप संविधान सभा में प्रस्तुत किया।

संविधान निर्माण का सामान्य परीक्षा-समय — 2 वर्ष, 11 महीने, 18 दिन।

7,635 संशोधन प्रस्तावित; 2,473 सभा में प्रस्तुत/विचारित।

26 नवंबर 1949 — संविधान अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित।

24 जनवरी 1950 — सदस्यों के हस्ताक्षर; राष्ट्रगान संबंधी घोषणा; डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रपति निर्वाचित।

संविधान पर कुल 284 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए।

मूल संविधान की हस्तलिखित अंग्रेजी प्रति — प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा; अलंकरण — नंदलाल बोस और शांतिनिकेतन के कलाकार।

मूल संविधान — 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियाँ।

26 जनवरी 1950 — संविधान लागू हुआ और भारत गणराज्य बना।

26 जनवरी का चयन 26 जनवरी 1930 के पूर्ण स्वराज दिवस की ऐतिहासिक स्मृति से जुड़ा था।

डॉ. बी. आर. आंबेडकर भारतीय संविधान के प्रमुख शिल्पकार और प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे, जबकि संविधान का निर्माण संविधान सभा के सामूहिक प्रयास से हुआ।

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