\n\n\n\n\n
VidyaGlobe
आकाशगंगा एवं उसके प्रकार
GALAXIES & THEIR TYPES

आकाशगंगा एवं उसके प्रकार

आकाशगंगाओं की संरचना, प्रमुख प्रकार, हबल वर्गीकरण एवं महत्वपूर्ण तथ्य

आकाशगंगा

आकाशगंगा तारों, तारकीय अवशेषों, ग्रह प्रणालियों, गैस, धूल तथा अदृश्य पदार्थ के विशाल समूह से बनी गुरुत्वाकर्षण से बँधी खगोलीय संरचना है।

कुछ आकाशगंगाएँ केवल कुछ हजार या लाखों तारों वाली छोटी संरचनाएँ होती हैं, जबकि विशाल आकाशगंगाओं में खरबों तारे तक हो सकते हैं।

अनेक बड़ी आकाशगंगाओं के केंद्र में अतिविशाल कृष्ण विवर पाया जाता है।

हमारा सौरमंडल मिल्की वे आकाशगंगा में स्थित है।

01

ब्रह्मांड में आकाशगंगाओं की संख्या

सटीक संख्या अभी ज्ञात नहीं

ब्रह्मांड में आकाशगंगाओं की वास्तविक कुल संख्या ज्ञात नहीं है। हम केवल प्रेक्षणीय ब्रह्मांड के भीतर दिखाई देने योग्य या अनुमानित आकाशगंगाओं के बारे में अध्ययन कर सकते हैं।

हबल अंतरिक्ष दूरबीन से प्राप्त गहरे प्रेक्षणों के आधार पर किए गए एक अध्ययन में प्रेक्षणीय ब्रह्मांड में आकाशगंगाओं की संख्या लगभग 2 ट्रिलियन अर्थात 2 लाख करोड़ तक होने का अनुमान लगाया गया।

यह संख्या कोई निश्चित गणना नहीं है, बल्कि बहुत धुंधली और वर्तमान उपकरणों से प्रत्यक्ष रूप से न दिखाई देने वाली छोटी आकाशगंगाओं को शामिल करके किया गया वैज्ञानिक अनुमान है।

⚠️ 2 ट्रिलियन को निश्चित तथ्य न समझें

“ब्रह्मांड में ठीक 2 ट्रिलियन आकाशगंगाएँ हैं” लिखना सही नहीं है।

अधिक सुरक्षित तथ्य — कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार प्रेक्षणीय ब्रह्मांड में आकाशगंगाओं की संख्या 2 ट्रिलियन तक हो सकती है।

02

आकाशगंगा की संरचना

तारे से लेकर अदृश्य पदार्थ तक

तारे

आकाशगंगा के चमकीले दृश्यमान घटक

गैस और धूल

नए तारों के निर्माण की महत्वपूर्ण सामग्री

ग्रह प्रणालियाँ

अनेक तारों के चारों ओर ग्रह और अन्य छोटे पिंड हो सकते हैं

अदृश्य पदार्थ

आकाशगंगाओं के गुरुत्वीय व्यवहार में महत्वपूर्ण भूमिका

आकाशगंगा केवल तारों का समूह नहीं होती। इसमें तारे, तारकीय अवशेष, गैस, धूल, ग्रह प्रणालियाँ और अदृश्य पदार्थ शामिल होते हैं।

इन सभी को आकाशगंगा का सामूहिक गुरुत्वाकर्षण एक साथ बाँधे रखता है।

03

हबल का आकाशगंगा वर्गीकरण

आकृति के आधार पर वर्गीकरण

खगोलशास्त्री एडविन हबल ने आकाशगंगाओं की दिखाई देने वाली आकृति के आधार पर एक प्रसिद्ध वर्गीकरण प्रणाली विकसित की।

सरल अध्ययन में आकाशगंगाओं को मुख्यतः सर्पिल, दीर्घवृत्तीय और अनियमित श्रेणियों में रखा जाता है।

अधिक विस्तृत हबल क्रम में लेंटिक्युलर आकाशगंगा को भी सर्पिल और दीर्घवृत्तीय संरचनाओं के बीच की महत्वपूर्ण आकृति के रूप में रखा जाता है।

⚠️ बौनी आकाशगंगा चौथा हबल प्रकार नहीं

बौनी आकाशगंगा मुख्यतः आकाशगंगा के छोटे आकार और कम द्रव्यमान को दर्शाती है।

बौनी आकाशगंगा स्वयं बौनी दीर्घवृत्तीय, बौनी गोलाकार या बौनी अनियमित आदि हो सकती है। इसलिए इसे सर्पिल, दीर्घवृत्तीय और अनियमित के समान एक स्वतंत्र मुख्य आकृति-श्रेणी मानना उचित नहीं है।

04

सर्पिल आकाशगंगा

चकती और घुमावदार भुजाओं वाली आकाशगंगा

सर्पिल आकाशगंगाओं में एक चपटी चकती, केंद्रीय उभार तथा केंद्र से बाहर की ओर फैली घुमावदार सर्पिल भुजाएँ दिखाई देती हैं।

इनकी भुजाओं में गैस और धूल अपेक्षाकृत अधिक होती है, जिसके कारण यहाँ नए तारों का निर्माण सक्रिय रह सकता है।

सर्पिल आकाशगंगाओं के केंद्र में सामान्यतः पुराने तारों की संख्या अधिक होती है।

मिल्की वे एक दंडयुक्त सर्पिल आकाशगंगा है।

एंड्रोमेडा भी एक बड़ी सर्पिल आकाशगंगा है और मिल्की वे की प्रमुख पड़ोसी विशाल आकाशगंगाओं में से एक है।

05

दंडयुक्त सर्पिल आकाशगंगा

केंद्र में तारों की दंडाकार संरचना

कुछ सर्पिल आकाशगंगाओं के केंद्र में तारों की एक दंड जैसी लंबी संरचना दिखाई देती है।

ऐसी आकाशगंगाओं को दंडयुक्त सर्पिल आकाशगंगा कहा जाता है।

इनकी सर्पिल भुजाएँ सामान्यतः केंद्रीय दंड के सिरों से बाहर की ओर निकलती हैं।

हमारी मिल्की वे इसी प्रकार की आकाशगंगा है।

🎯 परीक्षा का महत्वपूर्ण तथ्य

मिल्की वे — दंडयुक्त सर्पिल आकाशगंगा

06

दीर्घवृत्तीय आकाशगंगा

गोल से अंडाकार आकार तक

दीर्घवृत्तीय आकाशगंगाएँ लगभग गोलाकार से लेकर अत्यधिक अंडाकार आकृति तक हो सकती हैं।

इनमें स्पष्ट सर्पिल भुजाएँ नहीं होतीं।

इनमें सामान्यतः गैस और धूल की मात्रा कम तथा पुराने तारों की संख्या अधिक होती है।

गैस और धूल कम होने के कारण अधिकांश विशाल दीर्घवृत्तीय आकाशगंगाओं में नए तारों के निर्माण की दर सर्पिल आकाशगंगाओं की तुलना में कम होती है।

हबल वर्गीकरण में दीर्घवृत्तीय आकाशगंगाओं को उनकी आकृति के आधार पर E0 से E7 तक दर्शाया जाता है।

E0 लगभग गोलाकार तथा E7 अधिक लंबी अंडाकार आकृति को दर्शाता है।

07

लेंटिक्युलर आकाशगंगा

सर्पिल और दीर्घवृत्तीय के बीच की संरचना

लेंटिक्युलर आकाशगंगाओं में सर्पिल आकाशगंगा की तरह चकती और केंद्रीय उभार पाया जाता है, लेकिन इनमें स्पष्ट सर्पिल भुजाएँ नहीं होतीं।

इनमें सामान्यतः पुराने तारों की संख्या अधिक तथा गैस और धूल कम होती है।

हबल क्रम में इन्हें सामान्यतः S0 प्रकार से दर्शाया जाता है।

आकृति की दृष्टि से ये सर्पिल और दीर्घवृत्तीय आकाशगंगाओं के बीच की संरचना जैसी दिखाई देती हैं।

08

अनियमित आकाशगंगा

निश्चित नियमित आकार का अभाव

अनियमित आकाशगंगाओं में सर्पिल या दीर्घवृत्तीय जैसी स्पष्ट नियमित आकृति नहीं होती।

इनमें कई बार बड़ी मात्रा में गैस और धूल पाई जाती है और नए तारों का सक्रिय निर्माण हो सकता है।

अन्य आकाशगंगाओं के गुरुत्वीय प्रभाव या टक्कर के कारण भी किसी आकाशगंगा की संरचना अनियमित हो सकती है।

बड़ा मैगेलैनिक बादल और छोटा मैगेलैनिक बादल मिल्की वे की उपग्रह बौनी अनियमित आकाशगंगाओं के प्रसिद्ध उदाहरण हैं।

09

बौनी आकाशगंगा

छोटी लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण आकाशगंगाएँ

बौनी आकाशगंगाएँ सामान्य विशाल आकाशगंगाओं की तुलना में छोटी और कम द्रव्यमान वाली होती हैं।

इनमें तारों की संख्या विशाल आकाशगंगाओं की तुलना में बहुत कम हो सकती है। कुछ बौनी आकाशगंगाओं में केवल लाखों तारे होते हैं, जबकि विशाल आकाशगंगाओं में अरबों या खरबों तारे हो सकते हैं।

बौनी आकाशगंगा कोई एक निश्चित आकृति नहीं है। यह बौनी दीर्घवृत्तीय, बौनी गोलाकार या बौनी अनियमित आदि हो सकती है।

बड़ी आकाशगंगाओं के आसपास अनेक छोटी बौनी आकाशगंगाएँ उपग्रह के रूप में परिक्रमा कर सकती हैं।

मिल्की वे के आसपास भी अनेक बौनी उपग्रह आकाशगंगाएँ मौजूद हैं।

10

मिल्की वे आकाशगंगा

हमारी आकाशगंगा

हमारा सूर्य और पूरा सौरमंडल मिल्की वे आकाशगंगा का हिस्सा है।

मिल्की वे एक दंडयुक्त सर्पिल आकाशगंगा है।

इसमें लगभग 100 अरब से 400 अरब तारे होने का अनुमान लगाया जाता है।

मिल्की वे का व्यास लगभग 1 लाख प्रकाश-वर्ष के आसपास माना जाता है, हालाँकि इसकी बाहरी संरचना और प्रभामंडल इससे कहीं अधिक दूर तक फैले हैं।

हमारा सौरमंडल आकाशगंगा के केंद्र में नहीं, बल्कि इसकी चकती में स्थित ओरायन भुजा क्षेत्र में है।

मिल्की वे के केंद्र में सैजिटेरियस ए* नामक अतिविशाल कृष्ण विवर स्थित है।

11

एंड्रोमेडा आकाशगंगा

मिल्की वे की प्रमुख विशाल पड़ोसी

एंड्रोमेडा हमारी मिल्की वे के निकट स्थित एक विशाल सर्पिल आकाशगंगा है।

इसे M31 नाम से भी जाना जाता है।

यह मिल्की वे और अन्य छोटी आकाशगंगाओं के साथ स्थानीय समूह का हिस्सा है।

एंड्रोमेडा लगभग 25 लाख प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है।

यह पृथ्वी से नंगी आँखों द्वारा दिखाई देने वाली सबसे दूरस्थ प्रमुख खगोलीय वस्तुओं में से एक है, यदि आकाश पर्याप्त अंधकारमय हो।

12

आकाशगंगाओं का सरल वर्गीकरण

एक नज़र में

प्रकार विशेषता उदाहरण
सर्पिल चकती और घुमावदार भुजाएँ एंड्रोमेडा
दंडयुक्त सर्पिल केंद्र में तारों का दंड और उससे निकलती भुजाएँ मिल्की वे
दीर्घवृत्तीय गोल या अंडाकार; गैस-धूल अपेक्षाकृत कम M87 जैसी आकाशगंगाएँ
लेंटिक्युलर चकती होती है लेकिन स्पष्ट सर्पिल भुजाएँ नहीं S0 प्रकार
अनियमित कोई स्पष्ट नियमित आकृति नहीं मैगेलैनिक बादल
बौनी छोटा आकार; अलग-अलग आकृतियों में हो सकती है बौनी अनियमित आकाशगंगाएँ
13

परीक्षा में होने वाले प्रमुख भ्रम

एक बार में सही याद करें

ब्रह्मांड में ठीक 2 ट्रिलियन आकाशगंगाएँ हैं — निश्चित तथ्य नहीं। यह प्रेक्षणीय ब्रह्मांड के लिए एक वैज्ञानिक अनुमान है।

हबल ने चार मुख्य प्रकार — सर्पिल, दीर्घवृत्तीय, अनियमित और बौनी बताए — यह वर्गीकरण सही रूप में प्रस्तुत नहीं करता।

सरल आकृति वर्गीकरण में सर्पिल, दीर्घवृत्तीय और अनियमित मुख्य प्रकार हैं। विस्तृत हबल क्रम में लेंटिक्युलर भी महत्वपूर्ण है।

बौनी आकाशगंगा एक अलग हबल आकृति है — गलत। “बौनी” मुख्यतः छोटे आकार की श्रेणी है।

मिल्की वे केवल सामान्य सर्पिल आकाशगंगा है — अधिक सटीक रूप में यह दंडयुक्त सर्पिल आकाशगंगा है।

मैगेलैनिक बादल सामान्य अनियमित आकाशगंगाएँ मात्र हैं — अधिक सटीक रूप में ये मिल्की वे की बौनी अनियमित उपग्रह आकाशगंगाएँ हैं।

14

अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य

त्वरित परीक्षा पुनरावृत्ति

प्रश्न उत्तर
हमारी आकाशगंगा मिल्की वे
मिल्की वे का प्रकार दंडयुक्त सर्पिल
मिल्की वे में तारों का अनुमान लगभग 100–400 अरब
मिल्की वे का लगभग व्यास लगभग 1 लाख प्रकाश-वर्ष
मिल्की वे के केंद्र का कृष्ण विवर सैजिटेरियस ए*
प्रमुख पड़ोसी विशाल आकाशगंगा एंड्रोमेडा
एंड्रोमेडा का दूसरा नाम M31
एंड्रोमेडा की दूरी लगभग 25 लाख प्रकाश-वर्ष
हबल से संबंधित मुख्य विषय आकाशगंगाओं का आकृति-वर्गीकरण
सरल मुख्य प्रकार सर्पिल, दीर्घवृत्तीय, अनियमित
S0 प्रकार लेंटिक्युलर आकाशगंगा
मैगेलैनिक बादल बौनी अनियमित आकाशगंगाएँ
2 ट्रिलियन का तथ्य प्रेक्षणीय ब्रह्मांड के लिए एक अनुमान

⚡ अंतिम त्वरित पुनरावृत्ति

आकाशगंगा = तारे + गैस + धूल + तारकीय अवशेष + ग्रह प्रणालियाँ + अदृश्य पदार्थ

इन सभी को गुरुत्वाकर्षण एक साथ बाँधे रखता है।

प्रेक्षणीय ब्रह्मांड में आकाशगंगाओं की संख्या 2 ट्रिलियन तक होने का अनुमान लगाया गया है; इसे निश्चित संख्या न मानें।

सरल मुख्य आकृति प्रकार — सर्पिल + दीर्घवृत्तीय + अनियमित

विस्तृत हबल क्रम में — लेंटिक्युलर भी महत्वपूर्ण।

बौनी = आकार की श्रेणी, अलग मुख्य हबल आकृति नहीं

सर्पिल — घुमावदार भुजाएँ

दीर्घवृत्तीय — गोल/अंडाकार + सामान्यतः पुराने तारे + कम गैस और धूल

लेंटिक्युलर — चकती है लेकिन स्पष्ट सर्पिल भुजाएँ नहीं

अनियमित — निश्चित नियमित आकार नहीं

मिल्की वे — दंडयुक्त सर्पिल आकाशगंगा

सौरमंडल — मिल्की वे में

मिल्की वे — लगभग 100–400 अरब तारे

मिल्की वे का व्यास — लगभग 1 लाख प्रकाश-वर्ष

मिल्की वे के केंद्र में — सैजिटेरियस ए*

एंड्रोमेडा — M31 — विशाल सर्पिल आकाशगंगा — लगभग 25 लाख प्रकाश-वर्ष दूर

बड़ा और छोटा मैगेलैनिक बादल — मिल्की वे की बौनी अनियमित उपग्रह आकाशगंगाएँ

Scroll to Top