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ओडिसी नृत्य के प्रमुख कलाकार
ODISSI DANCE

ओडिसी नृत्य के प्रमुख कलाकार

प्रमुख नृत्य गुरु, नृत्यांगनाएँ, पुरस्कार एवं परीक्षा-उपयोगी तथ्य

ओडिसी नृत्य

ओडिसी भारत की प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैलियों में से एक है और इसका उद्गम वर्तमान ओडिशा से माना जाता है। इसका ऐतिहासिक संबंध जगन्नाथ मंदिर की महारी परंपरा, गोतिपुआ परंपरा और ओडिशा की मंदिर-मूर्तिकला से जुड़ा हुआ है।

ओडिसी की प्रमुख पहचान त्रिभंगी और चौक जैसी मुद्राएँ हैं। त्रिभंगी में शरीर सिर, धड़ और घुटनों के स्तर पर तीन मोड़ों में दिखाई देता है, जबकि चौक भगवान जगन्नाथ से जुड़ी दृढ़ एवं संतुलित मुद्रा मानी जाती है।

20वीं शताब्दी में गुरु केलुचरण महापात्र सहित अनेक गुरुओं और कलाकारों ने ओडिसी को पुनर्गठित, मंचीय रूप से विकसित और विश्व स्तर पर लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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ओडिसी के प्रमुख कलाकार

Major Exponents

हरेकृष्ण बेहरा ओडिसी के प्रमुख गुरु और कलाकारों में गिने जाते हैं। उन्होंने ओडिसी के प्रशिक्षण और प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सोनल मानसिंह भारत की प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना हैं। वे विशेष रूप से ओडिसी और भरतनाट्यम दोनों में अपनी विशिष्ट पहचान के लिए जानी जाती हैं।

किरण सहगल ओडिसी की प्रमुख नृत्यांगनाओं में गिनी जाती हैं और इस नृत्य शैली के मंचीय प्रसार में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

रानी कर्णा ओडिसी की प्रमुख नृत्यांगना और गुरु थीं। उन्होंने ओडिसी को ओडिशा से बाहर विशेष रूप से पूर्वी भारत में लोकप्रिय बनाने में योगदान दिया।

संयुक्ता पाणिग्रही ओडिसी की सर्वाधिक प्रसिद्ध नृत्यांगनाओं में से एक थीं। उन्होंने ओडिसी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाने में बड़ी भूमिका निभाई।

कालीचरण पटनायक ओडिशा के प्रमुख साहित्यकार, संगीतकार, रंगकर्मी और सांस्कृतिक व्यक्तित्व थे। उनका योगदान ओडिसी संगीत और नृत्य के विकास से भी जुड़ा था। इसलिए उन्हें केवल नर्तक के रूप में सीमित करके पढ़ना उचित नहीं है।

इंद्राणी रहमान भारतीय शास्त्रीय नृत्य की प्रसिद्ध नृत्यांगना थीं और ओडिसी को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले आरंभिक कलाकारों में उनका महत्वपूर्ण स्थान है।

दुर्गाचरण रणवीर ओडिसी के प्रसिद्ध गुरु और नर्तक हैं। वे गुरु देवप्रसाद दास की परंपरा से जुड़े प्रमुख कलाकारों में माने जाते हैं।

शर्मिला विश्वास प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना, गुरु और नृत्य-संयोजक हैं। उनका प्रशिक्षण गुरु केलुचरण महापात्र की परंपरा से जुड़ा है।

मोहन महापात्र नाम कुछ सामान्य ओडिसी कलाकार-सूचियों में मिलता है, लेकिन प्रमुख मानक स्रोतों में स्वतंत्र प्रमुख ओडिसी नर्तक के रूप में इसकी पहचान स्पष्ट नहीं मिलती। परीक्षा में इसे अत्यधिक निश्चित तथ्य के रूप में न पढ़ें।

सुजाता महापात्र प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना हैं। उन्होंने गुरु केलुचरण महापात्र से उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त किया और उनकी नृत्य-परंपरा को आगे बढ़ाया।

मिनाती मिश्रा ओडिसी की प्रतिष्ठित नृत्यांगना, अभिनेत्री और शिक्षिका थीं तथा ओडिसी के आरंभिक आधुनिक मंचीय विकास से जुड़ी प्रमुख कलाकारों में गिनी जाती हैं।

कुमकुम मोहंती ओडिसी की प्रसिद्ध नृत्यांगना और गुरु हैं। उन्हें विशेष रूप से अभिनय की उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है। वे गुरु केलुचरण महापात्र की प्रमुख शिष्याओं में से एक रही हैं।

🎯 परीक्षा तथ्य

कुमकुम मोहंती को वर्ष 2005 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया। इसलिए कलाकारों की सामूहिक सूची के बाद लिखा “पद्म श्री 2005” विशेष रूप से कुमकुम मोहंती से संबंधित है।

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माइकल जैक्सन और ओडिसी

Black or White — 1991

वर्ष 1991 में माइकल जैक्सन के प्रसिद्ध संगीत वीडियो “ब्लैक ऑर व्हाइट” में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की ओडिसी शैली से जुड़ा प्रदर्शन भी दिखाया गया था।

इस वीडियो में ओडिसी नृत्य प्रस्तुत करने वाली कलाकार का सही नाम यमुना संगरसिवम है। वे ओडिसी में प्रशिक्षित नृत्यांगना थीं और उन्होंने माइकल जैक्सन के साथ वीडियो के एक हिस्से में नृत्य किया था।

इस तथ्य को प्रतियोगी परीक्षाओं में इस प्रकार पूछा गया है कि माइकल जैक्सन के 1991 के संगीत वीडियो “ब्लैक ऑर व्हाइट” में कौन-सा भारतीय शास्त्रीय नृत्य प्रदर्शित किया गया था—इसका उत्तर ओडिसी है।

⚠️ नाम याद रखें

यमुना सागर शिवम सही नाम नहीं है। सही नाम यमुना संगरसिवम है।

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गुरु केलुचरण महापात्र

Guru Kelucharan Mohapatra

गुरु केलुचरण महापात्र का जन्म 8 जनवरी 1926 को ओडिशा के पुरी जिले के रघुराजपुर में हुआ था। उनका निधन 7 अप्रैल 2004 को हुआ। वे आधुनिक ओडिसी नृत्य के सबसे महत्वपूर्ण गुरुओं और पुनरुद्धारकों में गिने जाते हैं।

उनके प्रारंभिक कलात्मक जीवन का संबंध गोतिपुआ परंपरा और रंगमंच से रहा। बाद में उन्होंने ओडिसी की मुद्राओं, अभिनय, लय और नृत्य-रचनाओं को व्यवस्थित एवं विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनके सक्रिय कलात्मक जीवन को लगभग 1930 के दशक के मध्य से 2004 तक समझना अधिक उचित है। केवल “1935–2001” लिखना उनके संपूर्ण कलात्मक जीवन को सही रूप से व्यक्त नहीं करता।

20वीं शताब्दी के मध्य में ओडिसी का आधुनिक शास्त्रीय स्वरूप विकसित करने में केलुचरण महापात्र, पंकज चरण दास, देवप्रसाद दास और मायाधर राउत जैसे गुरुओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

इसलिए ओडिसी के पुनरुद्धार का पूरा श्रेय केवल एक व्यक्ति को देना ठीक नहीं है, लेकिन केलुचरण महापात्र इसकी पुनर्स्थापना, प्रशिक्षण, नृत्य-रचना और वैश्विक लोकप्रियता के सबसे प्रमुख व्यक्तित्वों में थे।

प्रमुख पुरस्कार

पुरस्कार वर्ष
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1966
पद्म श्री 1974
पद्म भूषण 1988
संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप 1991
पद्म विभूषण 2000

🎯 बहुत महत्वपूर्ण

केलुचरण महापात्र — ओडिसी — पद्म श्री 1974 — पद्म भूषण 1988 — पद्म विभूषण 2000

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श्रीजन की स्थापना

Srjan

गुरु केलुचरण महापात्र ने ओडिसी नृत्य के व्यवस्थित प्रशिक्षण और अपनी नृत्य-परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए भुवनेश्वर में “श्रीजन — गुरु केलुचरण महापात्र ओडिसी नृत्यबासा” की स्थापना की।

श्रीजन की स्थापना वर्ष 1993 में हुई थी। कई सामान्य पुस्तकों या पुराने नोट्स में इसका वर्ष 1994 लिखा मिलता है, लेकिन संस्था के आधिकारिक विवरण में स्थापना वर्ष 1993 दिया गया है।

इस संस्था के माध्यम से भारत और विदेशों के विद्यार्थियों को ओडिसी नृत्य की शिक्षा दी गई तथा नई नृत्य-रचनाओं, कार्यशालाओं और प्रस्तुतियों के माध्यम से ओडिसी को आगे बढ़ाया गया।

बाद में गुरु केलुचरण महापात्र के पुत्र और शिष्य रतिकांत महापात्र ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया।

⚠️ परीक्षा में भ्रम

1994 नहीं — श्रीजन की स्थापना 1993 में हुई थी।

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केलुचरण महापात्र की प्रमुख शिष्याएँ

Prominent Disciples

संयुक्ता पाणिग्रही गुरु केलुचरण महापात्र की सर्वाधिक प्रसिद्ध शिष्याओं में थीं। उन्होंने गुरु की नृत्य-रचनाओं को मंच पर लोकप्रिय बनाने और ओडिसी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सोनल मानसिंह ने भी गुरु केलुचरण महापात्र से ओडिसी की शिक्षा प्राप्त की और आगे चलकर भारत की प्रमुख शास्त्रीय नृत्यांगनाओं में स्थान बनाया।

प्रियंबदा मोहंती हेजमादी आधुनिक ओडिसी के आरंभिक विकास से जुड़ी प्रमुख नृत्यांगना हैं। पुराने नोट्स में उनका नाम कभी-कभी केवल “प्रियवंदा मोहंती” लिखा मिलता है; उनका प्रचलित पूरा नाम प्रियंबदा मोहंती हेजमादी है।

यामिनी कृष्णमूर्ति मुख्य रूप से भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी की महान नृत्यांगना के रूप में प्रसिद्ध हैं, लेकिन उन्होंने ओडिसी का भी प्रशिक्षण लिया। इसलिए उन्हें केवल ओडिसी नृत्यांगना के रूप में वर्गीकृत करना उचित नहीं है।

इसके अतिरिक्त कुमकुम मोहंती, माधवी मुदगल, शर्मिला विश्वास और सुजाता महापात्र सहित अनेक प्रमुख कलाकार गुरु केलुचरण महापात्र की नृत्य-परंपरा से जुड़े रहे हैं।

📗 भ्रम से बचें

यामिनी कृष्णमूर्ति = मुख्य पहचान भरतनाट्यम एवं कुचिपुड़ी; उन्होंने ओडिसी भी सीखा। सोनल मानसिंह = ओडिसी और भरतनाट्यम दोनों की प्रमुख कलाकार।

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माधवी मुदगल

Madhavi Mudgal

माधवी मुदगल भारत की प्रमुख ओडिसी नृत्यांगनाओं और गुरुओं में से एक हैं। उनका संबंध दिल्ली से है और उन्होंने ओडिसी की शिक्षा गुरु केलुचरण महापात्र से प्राप्त की। इसलिए उन्हें “ओडिशा की कलाकार” कहने की अपेक्षा प्रमुख ओडिसी नृत्यांगना कहना अधिक सही है।

माधवी मुदगल ने ओडिसी की शास्त्रीय परंपरा, सौंदर्य, अभिनय और नृत्य-रचना को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उन्हें वर्ष 1984 में संस्कृति पुरस्कार प्राप्त हुआ।

भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1990 में पद्म श्री से सम्मानित किया।

उन्हें वर्ष 1997 में पेरिस शहर द्वारा “ग्रांद मेदाय द ला विल” सम्मान प्रदान किया गया।

उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भी प्रदान किया गया। यह सम्मान अकादमी की पुरस्कार सूची में 1999–2000 पुरस्कार-वर्ष के अंतर्गत दर्ज मिलता है और सामान्य परीक्षा पुस्तकों में इसे प्रायः 2000 लिखा जाता है।

सम्मान वर्ष
संस्कृति पुरस्कार 1984
पद्म श्री 1990
ग्रांद मेदाय द ला विल, पेरिस 1997
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1999–2000 पुरस्कार-वर्ष
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कुमकुम मोहंती

Kumkum Mohanty

कुमकुम मोहंती का जन्म कटक, ओडिशा में हुआ और उन्होंने गुरु केलुचरण महापात्र से ओडिसी का प्रशिक्षण प्राप्त किया। वे गुरु की आरंभिक और प्रमुख शिष्याओं में गिनी जाती हैं।

वे विशेष रूप से ओडिसी के अभिनय पक्ष के लिए प्रसिद्ध हैं। ओडिसी की मुद्राओं, भाव-अभिव्यक्ति और प्रशिक्षण पद्धति के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

उन्होंने ओडिसी अनुसंधान और संस्थागत विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा ओडिसी अनुसंधान केंद्र की स्थापना से जुड़ी रहीं।

उन्हें 1994 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और 2005 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

🎯 परीक्षा में पूछा गया तथ्य

कुमकुम मोहंती — ओडिसी — पद्म श्री 2005

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महत्वपूर्ण कलाकारों का त्वरित मिलान

Quick Artist Matching

कलाकार मुख्य पहचान
केलुचरण महापात्र आधुनिक ओडिसी के प्रमुख गुरु एवं पुनरुद्धारक
संयुक्ता पाणिग्रही ओडिसी की प्रसिद्ध नृत्यांगना; अंतरराष्ट्रीय प्रसार
सोनल मानसिंह ओडिसी एवं भरतनाट्यम
इंद्राणी रहमान ओडिसी को व्यापक मंचीय पहचान दिलाने वाली आरंभिक कलाकार
कुमकुम मोहंती अभिनय के लिए प्रसिद्ध; पद्म श्री 2005
माधवी मुदगल प्रमुख ओडिसी नृत्यांगना; पद्म श्री 1990
सुजाता महापात्र केलुचरण महापात्र की परंपरा की प्रमुख नृत्यांगना
शर्मिला विश्वास ओडिसी नृत्यांगना, गुरु और नृत्य-संयोजक
दुर्गाचरण रणवीर देवप्रसाद दास परंपरा के प्रमुख गुरु
मिनाती मिश्रा प्रमुख ओडिसी नृत्यांगना एवं शिक्षिका
रानी कर्णा प्रमुख ओडिसी नृत्यांगना एवं गुरु
किरण सहगल प्रमुख ओडिसी नृत्यांगना
हरेकृष्ण बेहरा ओडिसी गुरु एवं कलाकार
कालीचरण पटनायक ओडिसी संगीत, नृत्य एवं ओड़िया रंगमंच में योगदान
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परीक्षा में भ्रम पैदा करने वाले तथ्य

Important Corrections

  • श्रीजन की स्थापना 1994 नहीं, 1993 में गुरु केलुचरण महापात्र ने की थी।
  • माइकल जैक्सन के “ब्लैक ऑर व्हाइट” वीडियो में ओडिसी प्रस्तुत करने वाली कलाकार यमुना संगरसिवम थीं।
  • कुमकुम मोहंती को पद्म श्री 2005 में मिला था।
  • माधवी मुदगल को पद्म श्री 1990 में मिला था।
  • केलुचरण महापात्र को पद्म विभूषण 2000 में दिया गया था।
  • ओडिसी के आधुनिक पुनरुद्धार का पूरा श्रेय केवल केलुचरण महापात्र को देना उचित नहीं है; वे इसके सबसे प्रमुख पुनरुद्धारकों में से एक थे।
  • कालीचरण पटनायक को केवल नर्तक नहीं समझें; उनका योगदान संगीत, नृत्य, साहित्य और रंगमंच तक विस्तृत था।
  • यामिनी कृष्णमूर्ति मुख्यतः भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी के लिए प्रसिद्ध हैं; उन्होंने ओडिसी का भी प्रशिक्षण लिया था।
  • सोनल मानसिंह को केवल एक नृत्य शैली से न जोड़ें; उनकी प्रमुख पहचान ओडिसी और भरतनाट्यम दोनों से है।
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त्वरित पुनरावृत्ति

Quick Revision

ओडिसी—ओडिशा केलुचरण महापात्र—महान गुरु श्रीजन—1993 पद्म विभूषण—2000 माधवी मुदगल—पद्म श्री 1990 कुमकुम मोहंती—पद्म श्री 2005 यमुना संगरसिवम—ब्लैक ऑर व्हाइट

⚡ अंतिम पुनरावृत्ति

ओडिसी — ओडिशा की प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैली; इसकी विशिष्ट मुद्राएँ त्रिभंगी और चौक हैं।

गुरु केलुचरण महापात्र आधुनिक ओडिसी के सबसे प्रमुख गुरुओं और पुनरुद्धारकों में से एक थे।

केलुचरण महापात्र के प्रमुख सम्मान — संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1966, पद्म श्री 1974, पद्म भूषण 1988, संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप 1991 और पद्म विभूषण 2000।

श्रीजन — गुरु केलुचरण महापात्र द्वारा भुवनेश्वर में 1993 में स्थापित ओडिसी प्रशिक्षण संस्था।

संयुक्ता पाणिग्रही, सोनल मानसिंह, कुमकुम मोहंती, माधवी मुदगल, शर्मिला विश्वास और सुजाता महापात्र केलुचरण महापात्र की नृत्य-परंपरा से जुड़े प्रमुख नाम हैं।

माधवी मुदगल — संस्कृति पुरस्कार 1984, पद्म श्री 1990, पेरिस का प्रतिष्ठित सम्मान 1997 तथा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार।

कुमकुम मोहंती — गुरु केलुचरण महापात्र की प्रमुख शिष्या; अभिनय के लिए प्रसिद्ध; पद्म श्री 2005।

1991 — माइकल जैक्सन — “ब्लैक ऑर व्हाइट” — ओडिसी — यमुना संगरसिवम

सोनल मानसिंह — ओडिसी और भरतनाट्यम; यामिनी कृष्णमूर्ति — मुख्यतः भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी, साथ ही ओडिसी का प्रशिक्षण।

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