कैबिनेट मिशन योजना
1946 — सत्ता हस्तांतरण, संविधान सभा और भारत की भावी संवैधानिक व्यवस्था
कैबिनेट मिशन क्यों भेजा गया?
द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद ब्रिटेन में क्लेमेंट एटली के नेतृत्व में लेबर पार्टी की सरकार सत्ता में आई। भारत में स्वतंत्रता की माँग तीव्र हो चुकी थी और कांग्रेस तथा मुस्लिम लीग के बीच भारत के भावी राजनीतिक स्वरूप को लेकर गंभीर मतभेद थे। ऐसी परिस्थिति में ब्रिटिश सरकार ने सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया और भारत के संविधान निर्माण की व्यवस्था पर भारतीय नेताओं से समझौता कराने के उद्देश्य से कैबिनेट मिशन भारत भेजा।
कैबिनेट मिशन का भारत आगमन
मार्च 1946
ब्रिटिश सरकार द्वारा भेजा गया तीन सदस्यीय कैबिनेट मिशन मार्च 1946 में भारत पहुँचा। सामान्यतः इसके भारत आगमन की तिथि 24 मार्च 1946 दी जाती है।
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य भारतीय नेताओं से बातचीत करके भारत में सत्ता हस्तांतरण तथा संविधान निर्माण की प्रक्रिया के लिए स्वीकार्य व्यवस्था तैयार करना था।
कैबिनेट मिशन ने कांग्रेस, मुस्लिम लीग, सिख प्रतिनिधियों, देशी रियासतों तथा अन्य राजनीतिक समूहों के नेताओं से व्यापक बातचीत की।
🎯 ध्यान रखें
24 मार्च 1946 — कैबिनेट मिशन का भारत आगमन।
16 मई 1946 — कैबिनेट मिशन योजना की घोषणा।
कैबिनेट मिशन के तीन सदस्य
ब्रिटिश मंत्रिमंडल के प्रतिनिधि
कैबिनेट मिशन में ब्रिटिश मंत्रिमंडल के तीन प्रमुख सदस्य शामिल थे।
लॉर्ड पेथिक-लॉरेंस उस समय भारत सचिव थे और कैबिनेट मिशन के प्रमुख सदस्य थे।
सर स्टैफर्ड क्रिप्स व्यापार मंडल के अध्यक्ष थे। यही स्टैफर्ड क्रिप्स 1942 के क्रिप्स मिशन के भी प्रमुख थे।
तीसरे सदस्य ए. वी. अलेक्जेंडर थे, जो नौसेना विभाग के प्रमुख पद पर थे।
🔎 तीन नाम याद रखें
लॉर्ड पेथिक-लॉरेंस + सर स्टैफर्ड क्रिप्स + ए. वी. अलेक्जेंडर
कैबिनेट मिशन योजना की घोषणा
16 मई 1946
कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच भारत की भावी राजनीतिक व्यवस्था पर सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद कैबिनेट मिशन और वायसराय ने 16 मई 1946 को अपनी संवैधानिक योजना प्रस्तुत की।
इसी को कैबिनेट मिशन योजना कहा जाता है।
योजना का प्रमुख उद्देश्य भारत को तत्काल विभाजित किए बिना ऐसी संघीय व्यवस्था स्थापित करना था जिसमें केंद्र की शक्तियाँ सीमित हों और प्रांतों को पर्याप्त स्वायत्तता प्राप्त हो।
🎯 बहुत महत्वपूर्ण
कैबिनेट मिशन भारत आया — मार्च 1946
कैबिनेट मिशन योजना घोषित — 16 मई 1946
पाकिस्तान की माँग अस्वीकार
एक संयुक्त भारतीय संघ का प्रस्ताव
मुस्लिम लीग अलग पाकिस्तान की माँग कर रही थी, लेकिन कैबिनेट मिशन ने एक अलग संप्रभु पाकिस्तान राज्य की माँग स्वीकार नहीं की।
मिशन ने भारत के विभाजन के स्थान पर एक भारतीय संघ बनाए रखने का प्रस्ताव दिया।
इस भारतीय संघ में ब्रिटिश भारतीय प्रांतों और देशी रियासतों को शामिल किया जाना था।
केंद्र की सीमित शक्तियाँ
तीन प्रमुख विषय केंद्र के पास
कैबिनेट मिशन योजना में प्रस्तावित भारतीय संघ के केंद्र को केवल कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर अधिकार देने की व्यवस्था थी।
केंद्र के पास मुख्य रूप से विदेश मामले, रक्षा और संचार के विषय रहने थे।
इन विषयों के संचालन के लिए आवश्यक वित्त जुटाने का अधिकार भी संघ को दिया जाना था।
अन्य विषयों और अवशिष्ट शक्तियों का बड़ा भाग प्रांतों के पास रहने वाला था।
🎯 तीन विषय याद रखें
प्रांतों का तीन समूहों में विभाजन
समूह — क, ख और ग
कैबिनेट मिशन योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक ब्रिटिश भारतीय प्रांतों को तीन समूहों में रखने की व्यवस्था थी।
समूह ‘क’ में मुख्यतः हिंदू-बहुल प्रांत — मद्रास, बंबई, संयुक्त प्रांत, बिहार, मध्य प्रांत और उड़ीसा रखे गए।
समूह ‘ख’ में पंजाब, उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत और सिंध शामिल थे।
समूह ‘ग’ में बंगाल और असम को रखा गया।
प्रत्येक समूह अपने समूह से संबंधित विषयों के लिए अलग व्यवस्था बना सकता था। प्रांतों के समूह बनाने का प्रश्न आगे कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच बड़े विवाद का कारण बना।
| समूह | प्रांत |
|---|---|
| समूह क | मद्रास, बंबई, संयुक्त प्रांत, बिहार, मध्य प्रांत और उड़ीसा |
| समूह ख | पंजाब, उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत और सिंध |
| समूह ग | बंगाल और असम |
संविधान सभा की व्यवस्था
कुल प्रस्तावित सदस्य — 389
कैबिनेट मिशन योजना ने भारत का संविधान बनाने के लिए संविधान सभा गठित करने की व्यवस्था प्रस्तुत की।
संविधान सभा की कुल प्रस्तावित सदस्य संख्या 389 थी।
इनमें 292 सदस्य ब्रिटिश भारतीय प्रांतों से, 4 सदस्य मुख्य आयुक्त प्रांतों से और 93 सदस्य देशी रियासतों से आने थे।
ब्रिटिश भारतीय प्रांतों के प्रतिनिधियों का चुनाव प्रांतीय विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से किया जाना था।
देशी रियासतों के 93 प्रतिनिधियों के चयन की व्यवस्था रियासतों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के माध्यम से तय की जानी थी।
🎯 संख्या याद रखें
कुल — 389
ब्रिटिश भारतीय प्रांत — 292
मुख्य आयुक्त प्रांत — 4
देशी रियासतें — 93
जुलाई 1946 के संविधान सभा चुनाव
“गठन” और “चुनाव” में अंतर
कैबिनेट मिशन योजना के आधार पर जुलाई 1946 में संविधान सभा के लिए चुनाव आयोजित किए गए।
इसलिए जुलाई 1946 को सीधे “संविधान सभा का गठन” कहना पूरी तरह सटीक नहीं है। जुलाई में इसके सदस्यों के चुनाव की प्रक्रिया हुई थी।
इन चुनावों में कांग्रेस को सामान्य श्रेणी की अधिकांश सीटों पर बड़ी सफलता मिली, जबकि मुस्लिम लीग ने मुसलमानों के लिए निर्धारित अधिकांश सीटों पर विजय प्राप्त की।
संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को नई दिल्ली में हुई।
🔎 तिथि में भ्रम न रखें
जुलाई 1946 — संविधान सभा के चुनाव।
9 दिसंबर 1946 — संविधान सभा की पहली बैठक।
गांधीजी और कैबिनेट मिशन
समझौते की संभावना
कैबिनेट मिशन के भारत आने के बाद महात्मा गांधी ने मिशन के सदस्यों से कई बार बातचीत की। वे भारत की एकता बनाए रखने और शांतिपूर्ण ढंग से सत्ता हस्तांतरण के पक्ष में थे।
गांधीजी ने मिशन योजना को पूर्णतः आदर्श व्यवस्था नहीं माना, लेकिन उसमें भारत की स्वतंत्रता और संविधान निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना देखी।
कांग्रेस कार्यसमिति ने अंततः 25 जून 1946 को संविधान सभा में भाग लेने संबंधी कैबिनेट मिशन की व्यवस्था को स्वीकार करने का निर्णय किया।
🔎 सही रूप में याद रखें
केवल “गांधीजी ने कैबिनेट मिशन का समर्थन किया” कहना बहुत व्यापक है। अधिक सटीक तथ्य यह है कि गांधीजी ने योजना में आगे बढ़ने की संभावना देखी और कांग्रेस ने संविधान सभा में भाग लेने की व्यवस्था स्वीकार की।
मुस्लिम लीग और कैबिनेट मिशन
स्वीकृति से अस्वीकृति तक
मुस्लिम लीग ने प्रारंभ में कैबिनेट मिशन योजना को स्वीकार किया। उसे प्रांतों के समूहों की व्यवस्था में भविष्य के पाकिस्तान की दिशा में संभावना दिखाई देती थी।
लेकिन कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच प्रांतीय समूहों की अनिवार्यता और संविधान सभा की शक्तियों की व्याख्या को लेकर गंभीर मतभेद उत्पन्न हो गए।
अंततः मुस्लिम लीग ने कैबिनेट मिशन योजना की अपनी स्वीकृति वापस ले ली और पाकिस्तान की माँग को प्राप्त करने के लिए प्रत्यक्ष राजनीतिक संघर्ष का रास्ता अपनाने का निर्णय किया।
सीधी कार्यवाही दिवस
16 अगस्त 1946
मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की माँग को लेकर 16 अगस्त 1946 को सीधी कार्यवाही दिवस मनाने का आह्वान किया।
इस दिन कलकत्ता में भीषण सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु हुई और हजारों लोग घायल हुए।
यह घटना स्वतंत्रता से ठीक पहले बढ़ते हिंदू-मुस्लिम सांप्रदायिक तनाव की सबसे गंभीर घटनाओं में से एक बन गई।
🎯 महत्वपूर्ण
16 अगस्त 1946 — मुस्लिम लीग का सीधी कार्यवाही दिवस।
अंतरिम सरकार का गठन
2 सितंबर 1946
कैबिनेट मिशन ने संविधान निर्माण के साथ-साथ भारत में एक अंतरिम सरकार बनाने का भी प्रस्ताव रखा था, जिसमें प्रमुख भारतीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हों।
2 सितंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम सरकार ने कार्यभार संभाला।
औपचारिक रूप से वायसराय लॉर्ड वेवेल कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष थे, जबकि जवाहरलाल नेहरू उपाध्यक्ष थे। व्यवहार में नेहरू अंतरिम सरकार के प्रमुख की भूमिका निभा रहे थे।
इसलिए परीक्षा में सामान्यतः इसे “जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम सरकार” कहा जाता है।
🔎 पद में भ्रम न रखें
वायसराय वेवेल — कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष।
जवाहरलाल नेहरू — कार्यकारी परिषद के उपाध्यक्ष एवं अंतरिम सरकार के वास्तविक प्रमुख।
मुस्लिम लीग का अंतरिम सरकार में प्रवेश
अक्टूबर 1946
जब 2 सितंबर 1946 को अंतरिम सरकार बनी, उस समय मुस्लिम लीग उसमें शामिल नहीं हुई थी।
बाद में मुस्लिम लीग ने अपना निर्णय बदला और अक्टूबर 1946 में उसके प्रतिनिधि अंतरिम सरकार में शामिल हुए।
मुस्लिम लीग की ओर से लियाकत अली खान को वित्त विभाग मिला। कांग्रेस और मुस्लिम लीग के मंत्रियों के बीच गंभीर राजनीतिक मतभेद बने रहे, जिससे अंतरिम सरकार का कामकाज कठिन होता गया।
🎯 महत्वपूर्ण व्यक्ति
लियाकत अली खान — अंतरिम सरकार में वित्त सदस्य।
संविधान सभा की पहली बैठक
9 दिसंबर 1946
भारत की संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को नई दिल्ली में हुई।
मुस्लिम लीग ने संविधान सभा की प्रारंभिक बैठकों का बहिष्कार किया क्योंकि वह पाकिस्तान की माँग पर अड़ी हुई थी।
संविधान सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष बनाया गया।
इसके बाद 11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष चुने गए।
🎯 अध्यक्ष याद रखें
अस्थायी अध्यक्ष — डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा
स्थायी अध्यक्ष — डॉ. राजेंद्र प्रसाद
कैबिनेट मिशन योजना क्यों विफल हुई?
कांग्रेस और मुस्लिम लीग के मतभेद
कैबिनेट मिशन योजना भारत की एकता बनाए रखते हुए सत्ता हस्तांतरण का अंतिम बड़ा ब्रिटिश प्रयास थी, लेकिन कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच इसके प्रावधानों की व्याख्या को लेकर गंभीर मतभेद पैदा हो गए।
सबसे बड़ा विवाद प्रांतों के समूहों को लेकर था। कांग्रेस प्रांतों को समूह में शामिल होने या न होने की अधिक स्वतंत्रता देना चाहती थी, जबकि मुस्लिम लीग समूह व्यवस्था को पाकिस्तान की दिशा में महत्वपूर्ण मानती थी।
मुस्लिम लीग ने अंततः योजना से अपना समर्थन वापस ले लिया और सीधी कार्यवाही का रास्ता अपनाया।
बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा और कांग्रेस-लीग गतिरोध के कारण कैबिनेट मिशन की संयुक्त भारत वाली मूल योजना अंततः सफल नहीं हो सकी।
महत्वपूर्ण तिथियाँ
एक नज़र में पूरा घटनाक्रम
| तिथि | घटना |
|---|---|
| मार्च 1946 | कैबिनेट मिशन भारत पहुँचा |
| 16 मई 1946 | कैबिनेट मिशन योजना की घोषणा |
| 25 जून 1946 | कांग्रेस कार्यसमिति ने संविधान सभा में भाग लेने की व्यवस्था स्वीकार की |
| जुलाई 1946 | संविधान सभा के लिए चुनाव |
| 16 अगस्त 1946 | मुस्लिम लीग का सीधी कार्यवाही दिवस |
| 2 सितंबर 1946 | जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम सरकार ने कार्यभार संभाला |
| अक्टूबर 1946 | मुस्लिम लीग के प्रतिनिधि अंतरिम सरकार में शामिल हुए |
| 9 दिसंबर 1946 | संविधान सभा की पहली बैठक |
| 11 दिसंबर 1946 | डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष चुने गए |
त्वरित पुनरावृत्ति
पूरा क्रम याद करें
🧠 घटनाक्रम
⚡ अंतिम पुनरावृत्ति
कैबिनेट मिशन मार्च 1946 में भारत आया।
इसके तीन सदस्य थे — लॉर्ड पेथिक-लॉरेंस, सर स्टैफर्ड क्रिप्स और ए. वी. अलेक्जेंडर।
16 मई 1946 को कैबिनेट मिशन योजना घोषित की गई।
कैबिनेट मिशन ने अलग संप्रभु पाकिस्तान की माँग स्वीकार नहीं की और एक भारतीय संघ बनाए रखने का प्रस्ताव रखा।
प्रस्तावित केंद्र के पास मुख्य रूप से विदेश मामले, रक्षा और संचार रखने की व्यवस्था थी।
ब्रिटिश भारतीय प्रांतों को क, ख और ग — तीन समूहों में बाँटने का प्रस्ताव था।
कैबिनेट मिशन योजना में 389 सदस्यीय संविधान सभा की व्यवस्था की गई।
जुलाई 1946 में संविधान सभा के लिए चुनाव हुए। इसलिए जुलाई 1946 को सीधे संविधान सभा की पहली बैठक या पूर्ण गठन की तिथि नहीं मानना चाहिए।
गांधीजी ने योजना में संविधान निर्माण और सत्ता हस्तांतरण की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना देखी तथा कांग्रेस ने संविधान सभा में भाग लेने की व्यवस्था स्वीकार की।
मुस्लिम लीग ने पहले योजना स्वीकार की, लेकिन बाद में अपनी स्वीकृति वापस ले ली।
16 अगस्त 1946 को मुस्लिम लीग ने सीधी कार्यवाही दिवस मनाने का आह्वान किया।
2 सितंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम सरकार ने कार्यभार संभाला।
औपचारिक रूप से वायसराय वेवेल कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष और जवाहरलाल नेहरू उपाध्यक्ष थे।
मुस्लिम लीग बाद में अक्टूबर 1946 में अंतरिम सरकार में शामिल हुई और लियाकत अली खान को वित्त विभाग मिला।
9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक हुई। डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा इसके अस्थायी अध्यक्ष और बाद में डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्थायी अध्यक्ष बने।