थियोसोफिकल सोसाइटी
थियोसोफिकल सोसाइटी का परिचय
उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में विकसित थियोसोफिकल सोसाइटी एक अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक और दार्शनिक संस्था थी। इसका उद्देश्य मानवता की सार्वभौमिक एकता की भावना को बढ़ावा देना, विश्व के विभिन्न धर्मों और दर्शनों का तुलनात्मक अध्ययन करना तथा प्रकृति और मनुष्य की छिपी हुई आध्यात्मिक शक्तियों के अध्ययन को प्रोत्साहित करना था।
भारत में इस संस्था ने विशेष रूप से प्राचीन भारतीय धर्म, दर्शन और संस्कृति के प्रति शिक्षित भारतीयों में नया आत्मविश्वास पैदा करने में भूमिका निभाई। आगे एनी बेसेंट के नेतृत्व में यह संस्था शिक्षा, सामाजिक सुधार और भारतीय स्वशासन के प्रश्नों से भी निकट रूप से जुड़ गई।
थियोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना
थियोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना 1875 ई. में अमेरिका के न्यूयॉर्क नगर में हुई।
इसके प्रमुख संस्थापकों में मैडम हेलेना पेट्रोव्ना ब्लावत्स्की और कर्नल हेनरी स्टील ऑल्काट का स्थान सबसे महत्वपूर्ण था। इनके साथ विलियम क्वान जज सहित अन्य सदस्य भी संस्था की स्थापना से जुड़े थे।
17 नवंबर 1875 ई. को कर्नल ऑल्काट ने संस्था का उद्घाटन भाषण दिया और इसी तिथि को थियोसोफिकल सोसाइटी का स्थापना दिवस माना गया।
कर्नल ऑल्काट थियोसोफिकल सोसाइटी के प्रथम अध्यक्ष बने और 1907 में अपनी मृत्यु तक इस पद पर रहे।
परीक्षा के लिए
थियोसोफिकल सोसाइटी — 1875 ई. — न्यूयॉर्क — ब्लावत्स्की और कर्नल ऑल्काट।
भारत आगमन
थियोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना के कुछ वर्षों बाद ब्लावत्स्की और कर्नल ऑल्काट का ध्यान भारत और भारतीय धार्मिक-दर्शन परंपराओं की ओर अधिक बढ़ा।
1879 ई. में ब्लावत्स्की और ऑल्काट भारत आए। प्रारंभिक समय में उन्होंने बंबई को अपनी गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया।
भारत में उन्होंने हिंदू और बौद्ध दर्शन, कर्म, पुनर्जन्म और प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं के अध्ययन तथा प्रचार पर विशेष ध्यान दिया।
अड्यार में अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय
1882 ई. में थियोसोफिकल सोसाइटी का स्थायी अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय मद्रास के अड्यार में स्थापित किया गया।
अड्यार वर्तमान चेन्नई का एक क्षेत्र है। यहाँ से थियोसोफिकल सोसाइटी की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों का संचालन होने लगा।
इसके बाद अड्यार विश्व स्तर पर थियोसोफिकल आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण संस्थागत केंद्र बन गया।
याद रखें
1882 ई. — अड्यार, मद्रास — थियोसोफिकल सोसाइटी का अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय।
थियोसोफिकल सोसाइटी के प्रमुख उद्देश्य
थियोसोफिकल सोसाइटी का प्रमुख उद्देश्य बिना जाति, धर्म, लिंग या रंग के भेद के मानवता के सार्वभौमिक बंधुत्व की भावना विकसित करना था।
इसने धर्म, दर्शन और विज्ञान के तुलनात्मक अध्ययन को प्रोत्साहित किया।
संस्था मनुष्य और प्रकृति से संबंधित उन रहस्यमय तथा आध्यात्मिक नियमों के अध्ययन में भी रुचि रखती थी जिन्हें सामान्य ज्ञान से पूरी तरह समझा नहीं गया था।
भारत में थियोसोफिकल आंदोलन ने हिंदू, बौद्ध और अन्य प्राचीन भारतीय धार्मिक-दर्शन परंपराओं के अध्ययन को विशेष महत्व दिया।
एनी बेसेंट
एनी बेसेंट का जन्म 1 अक्टूबर 1847 ई. को लंदन में हुआ था। प्रारंभिक जीवन में वे सामाजिक सुधार, महिला अधिकार, श्रमिक अधिकार और स्वतंत्र चिंतन से जुड़े आंदोलनों में सक्रिय थीं।
बाद में वे मैडम ब्लावत्स्की की रचनाओं और थियोसोफिकल विचारों से प्रभावित हुईं।
21 मई 1889 ई. को एनी बेसेंट थियोसोफिकल सोसाइटी की सदस्य बनीं। इसलिए उनकी सदस्यता की तिथि 1888 ई. लिखना सही नहीं है।
इसके बाद वे थियोसोफिकल आंदोलन की सबसे प्रभावशाली वक्ताओं और नेताओं में शामिल हो गईं।
भ्रम से बचें
एनी बेसेंट थियोसोफिकल सोसाइटी में 1889 ई. में शामिल हुईं, 1888 ई. में नहीं।
एनी बेसेंट का भारत आगमन
1893 ई. में एनी बेसेंट भारत आईं। भारत आने के बाद उन्होंने देश के विभिन्न भागों की यात्राएँ कीं और भारतीय दर्शन तथा संस्कृति के समर्थन में अनेक व्याख्यान दिए।
उन्होंने भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की प्रशंसा की तथा भारतीयों को अपनी प्राचीन सभ्यता के प्रति आत्मविश्वास विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
आगे उन्होंने बनारस को अपनी प्रमुख कर्मभूमि बनाया और शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक कार्य शुरू किया।
थियोसोफिकल सोसाइटी की अध्यक्ष
थियोसोफिकल सोसाइटी के प्रथम अध्यक्ष कर्नल हेनरी स्टील ऑल्काट थे।
1907 ई. में ऑल्काट की मृत्यु के बाद एनी बेसेंट थियोसोफिकल सोसाइटी की दूसरी अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं।
उन्होंने 1907 से 1933 ई. में अपनी मृत्यु तक इस पद पर कार्य किया।
उनके नेतृत्व में थियोसोफिकल सोसाइटी की गतिविधियाँ धार्मिक और आध्यात्मिक अध्ययन के साथ शिक्षा, सामाजिक सेवा और भारत के सार्वजनिक जीवन तक विस्तृत हुईं।
परीक्षा के लिए
प्रथम अध्यक्ष — कर्नल ऑल्काट।
द्वितीय अध्यक्ष — एनी बेसेंट, 1907 ई.
सेंट्रल हिंदू कॉलेज
भारत में शिक्षा के क्षेत्र में एनी बेसेंट का सबसे महत्वपूर्ण योगदान सेंट्रल हिंदू कॉलेज की स्थापना थी।
1898 ई. में बनारस में एनी बेसेंट ने सेंट्रल हिंदू स्कूल और कॉलेज की स्थापना की।
इस संस्था का उद्देश्य आधुनिक शिक्षा को भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों के साथ जोड़ना था।
इस कार्य में भगवान दास तथा अनेक अन्य भारतीय शिक्षाविदों और थियोसोफिकल कार्यकर्ताओं ने भी एनी बेसेंट का सहयोग किया।
याद रखें
1898 ई. — बनारस — सेंट्रल हिंदू कॉलेज — एनी बेसेंट।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से संबंध
सेंट्रल हिंदू कॉलेज आगे चलकर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना का एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक आधार बना।
पंडित मदन मोहन मालवीय ने एक बड़े भारतीय विश्वविद्यालय की स्थापना की योजना को आगे बढ़ाया और एनी बेसेंट सहित अन्य शिक्षाविदों तथा समर्थकों के सहयोग से यह योजना साकार हुई।
1916 ई. में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। सेंट्रल हिंदू कॉलेज को इस नए विश्वविद्यालय की शैक्षणिक संरचना में सम्मिलित किया गया।
इसलिए यह कहना अधिक उचित है कि एनी बेसेंट द्वारा स्थापित सेंट्रल हिंदू कॉलेज बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण आधार और केंद्रक बना, न कि केवल उसका नाम बदलकर विश्वविद्यालय कर दिया गया।
भ्रम से बचें
1898 — सेंट्रल हिंदू कॉलेज — एनी बेसेंट।
1916 — बनारस हिंदू विश्वविद्यालय — मदन मोहन मालवीय के प्रयासों से, एनी बेसेंट सहित अनेक सहयोगियों के योगदान के साथ।
भारतीय संस्कृति के प्रति दृष्टिकोण
थियोसोफिकल आंदोलन के नेताओं ने भारतीय दर्शन और धर्म को केवल अंधविश्वास के रूप में देखने वाली औपनिवेशिक दृष्टि का विरोध किया।
उन्होंने वेदांत, उपनिषद, कर्म, पुनर्जन्म और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं के अध्ययन को विश्व स्तर पर प्रचारित किया।
इससे शिक्षित भारतीयों के एक वर्ग में अपनी प्राचीन संस्कृति और धार्मिक-दर्शन परंपरा के प्रति नया आत्मसम्मान विकसित हुआ।
इस कारण थियोसोफिकल आंदोलन को उन्नीसवीं शताब्दी के भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण की एक महत्वपूर्ण धारा के रूप में भी देखा जाता है।
एनी बेसेंट और भारतीय स्वशासन
एनी बेसेंट का कार्य केवल थियोसोफिकल सोसाइटी और शिक्षा तक सीमित नहीं रहा। वे आगे भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में भी सक्रिय हुईं।
उन्होंने भारत को स्वशासन दिलाने की माँग का समर्थन किया और 1916 ई. में होमरूल आंदोलन को व्यापक रूप से आगे बढ़ाया।
उन्होंने भारतीय राजनीतिक प्रश्नों पर जागरूकता फैलाने के लिए समाचार-पत्रों और सार्वजनिक भाषणों का भी उपयोग किया।
1917 ई. में एनी बेसेंट भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं। वे कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष थीं।
परीक्षा के लिए
1916 — होमरूल आंदोलन।
1917 — एनी बेसेंट भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष।
प्रमुख व्यक्तित्व — एक नजर में
| व्यक्ति | प्रमुख भूमिका |
|---|---|
| मैडम ब्लावत्स्की | थियोसोफिकल सोसाइटी की प्रमुख संस्थापक |
| कर्नल हेनरी स्टील ऑल्काट | सह-संस्थापक और प्रथम अध्यक्ष |
| विलियम क्वान जज | स्थापना से जुड़े प्रमुख सदस्यों में एक |
| एनी बेसेंट | 1889 में सदस्य; 1907 में दूसरी अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष |
| भगवान दास | एनी बेसेंट के शिक्षा संबंधी कार्यों के प्रमुख भारतीय सहयोगी |
| मदन मोहन मालवीय | बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना के प्रमुख प्रेरक |
महत्वपूर्ण तिथियाँ
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1875 | न्यूयॉर्क में थियोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना |
| 17 नवंबर 1875 | थियोसोफिकल सोसाइटी का स्थापना दिवस |
| 1879 | ब्लावत्स्की और ऑल्काट का भारत आगमन |
| 1882 | अड्यार, मद्रास में अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय |
| 21 मई 1889 | एनी बेसेंट थियोसोफिकल सोसाइटी की सदस्य बनीं |
| 1893 | एनी बेसेंट का भारत आगमन |
| 1898 | बनारस में सेंट्रल हिंदू कॉलेज की स्थापना |
| 1907 | एनी बेसेंट थियोसोफिकल सोसाइटी की अध्यक्ष बनीं |
| 1916 | बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना; होमरूल आंदोलन का विस्तार |
| 1917 | एनी बेसेंट भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं |
परीक्षा में भ्रमित करने वाले तथ्य
थियोसोफिकल सोसाइटी — 1875 ई. — न्यूयॉर्क।
इसके प्रमुख संस्थापक मैडम ब्लावत्स्की और कर्नल हेनरी स्टील ऑल्काट थे; विलियम क्वान जज सहित अन्य लोग भी स्थापना से जुड़े थे।
प्रथम अध्यक्ष — कर्नल ऑल्काट।
1882 ई. — अड्यार, मद्रास — अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय।
एनी बेसेंट 1888 नहीं बल्कि 1889 ई. में थियोसोफिकल सोसाइटी की सदस्य बनीं।
1907 ई. — एनी बेसेंट दूसरी अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं।
1898 ई. — सेंट्रल हिंदू कॉलेज — बनारस — एनी बेसेंट।
सेंट्रल हिंदू कॉलेज सीधे केवल नाम बदलकर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय नहीं बना; यह 1916 में स्थापित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण शैक्षणिक आधार बना।
1917 ई. — एनी बेसेंट भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष बनीं।
अंतिम त्वरित पुनरावृत्ति
1875 ई. में न्यूयॉर्क में थियोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना हुई।
इसके प्रमुख संस्थापक मैडम ब्लावत्स्की और कर्नल हेनरी स्टील ऑल्काट थे।
17 नवंबर 1875 थियोसोफिकल सोसाइटी का स्थापना दिवस माना जाता है।
कर्नल ऑल्काट इसके प्रथम अध्यक्ष थे।
1879 ई. में ब्लावत्स्की और ऑल्काट भारत आए।
1882 ई. में अड्यार, मद्रास में इसका स्थायी अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय स्थापित किया गया।
थियोसोफिकल सोसाइटी ने सार्वभौमिक बंधुत्व, तुलनात्मक धर्म-दर्शन और आध्यात्मिक अध्ययन पर बल दिया।
21 मई 1889 ई. को एनी बेसेंट थियोसोफिकल सोसाइटी की सदस्य बनीं।
1893 ई. में एनी बेसेंट भारत आईं।
1898 ई. में उन्होंने बनारस में सेंट्रल हिंदू कॉलेज की स्थापना की।
1907 ई. में एनी बेसेंट थियोसोफिकल सोसाइटी की दूसरी अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं।
सेंट्रल हिंदू कॉलेज आगे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के विकास का महत्वपूर्ण आधार बना।
1916 ई. में मदन मोहन मालवीय के प्रयासों से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना हुई, जिसमें एनी बेसेंट और अन्य सहयोगियों का भी महत्वपूर्ण योगदान था।
एनी बेसेंट ने 1916 के होमरूल आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1917 ई. में एनी बेसेंट भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष बनीं।