नदी द्वारा उत्पन्न स्थलाकृतियाँ
अपरदन, परिवहन एवं निक्षेपण से निर्मित प्रमुख नदी स्थलरूप
नदियाँ स्थलाकृतियों का निर्माण कैसे करती हैं?
नदियाँ पृथ्वी की सतह को लगातार बदलती रहती हैं। नदी अपने प्रवाह के दौरान मुख्यतः अपरदन, परिवहन और निक्षेपण की क्रियाएँ करती है। ऊपरी भाग में ढाल अधिक होने के कारण अपरदन अधिक प्रभावी होता है, जबकि निचले भाग में ढाल और वेग कम होने पर निक्षेपण का महत्व बढ़ जाता है।
नदी द्वारा किए गए अपरदन से वी-आकार की घाटी, गार्ज, कैनियन, जलप्रपात और जलगर्तिका जैसे स्थलरूप बनते हैं। नदी द्वारा निक्षेपण और पार्श्व अपरदन से जलोढ़ पंख, बाढ़ का मैदान, प्राकृतिक तटबंध, विसर्प, गोखुर झील और डेल्टा जैसी स्थलाकृतियाँ विकसित होती हैं।
नदी की तीन प्रमुख क्रियाएँ
अपरदन में नदी अपने प्रवाह के मार्ग में आने वाली चट्टानों और मिट्टी को काटती तथा घिसती है। नदी की ऊपरी अवस्था में तीव्र ढाल और तेज वेग के कारण ऊर्ध्वाधर या अधोमुखी अपरदन अधिक होता है।
परिवहन के दौरान नदी अपने साथ मिट्टी, बालू, गाद, कंकड़ और शैल-खंडों को बहाकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाती है।
निक्षेपण तब होता है जब नदी का वेग और वहन क्षमता कम हो जाती है। ऐसी स्थिति में नदी अपने साथ लाए गए अवसादों को जमा करने लगती है।
वी-आकार की घाटी
नदी की युवावस्था में ढाल अधिक होने के कारण नदी का अधोमुखी या लंबवत कटाव बहुत तीव्र होता है। नदी अपने तल को लगातार गहरा करती जाती है और दोनों ओर की ढालों पर अपक्षय तथा भूस्खलन होते रहते हैं।
इस प्रक्रिया से संकरी और गहरी घाटी विकसित होती है, जिसका अनुप्रस्थ आकार अंग्रेज़ी अक्षर V जैसा दिखाई देता है। इसे वी-आकार की घाटी कहा जाता है।
गार्ज एवं कैनियन
नदी द्वारा लंबे समय तक किए गए तीव्र अधोमुखी अपरदन से अत्यंत गहरी और संकरी घाटी विकसित हो सकती है। बहुत तीव्र ढाल वाली संकरी नदी घाटी को सामान्यतः गार्ज कहा जाता है।
कैनियन भी गहरी घाटी होती है, लेकिन इसमें प्रायः दीवारें सीढ़ीनुमा या खड़ी होती हैं और यह शुष्क अथवा अर्ध-शुष्क पठारी क्षेत्रों की क्षैतिज शैल-परतों में विशेष रूप से विकसित हो सकती है।
इसलिए गार्ज और कैनियन दोनों नदी के गहरे लंबवत कटाव से संबंधित स्थलरूप हैं, लेकिन उनकी आकृति और चट्टानी संरचना में अंतर हो सकता है।
कोलोराडो नदी पर स्थित ग्रैंड कैनियन विश्व का प्रसिद्ध कैनियन है। कोलोराडो नदी ने लाखों वर्षों तक कोलोराडो पठार को काटते हुए इस विशाल कैनियन को विकसित किया है।
🎯 परीक्षा में याद रखें
ग्रैंड कैनियन — कोलोराडो नदी — संयुक्त राज्य अमेरिका।
जलप्रपात
जब नदी का जल अपने मार्ग में किसी खड़े अथवा अत्यधिक तीव्र ढाल से अचानक नीचे गिरता है, तब इस स्थलरूप को जलप्रपात कहते हैं।
जलप्रपात प्रायः वहाँ विकसित होता है जहाँ नदी के मार्ग में कठोर और मुलायम चट्टानों की परतें मिलती हैं। मुलायम चट्टान का अपरदन अपेक्षाकृत तेजी से होता है, जबकि कठोर चट्टान अधिक समय तक बनी रहती है। इससे नदी के तल में अचानक ऊँचाई का अंतर विकसित हो सकता है।
भ्रंश, भू-पर्पटी की गति, लावा की परत, हिमानी घाटियों अथवा नदी के पुनर्यौवन के कारण भी जलप्रपात विकसित हो सकते हैं।
क्षिप्रिका
जब नदी के तल में अचानक ढाल बढ़ जाती है अथवा कठोर चट्टानों, शैल-खंडों और असमान नदी तल के कारण जल बहुत तेजी एवं अशांत रूप में प्रवाहित होने लगता है, तो ऐसे भाग को क्षिप्रिका कहा जाता है।
क्षिप्रिका में जलप्रपात की तरह जल एक ही स्थान से बड़ी ऊँचाई से सीधे नीचे नहीं गिरता, बल्कि नदी का जल तीव्र और अशांत गति से ढाल पर बहता है।
🎯 अंतर याद रखें
जलप्रपात में जल अचानक ऊँचाई से नीचे गिरता है, जबकि क्षिप्रिका में जल तीव्र ढाल पर अत्यधिक वेग और अशांत रूप से बहता है।
विश्व के प्रमुख जलप्रपात
| जलप्रपात | लगभग ऊँचाई | अवस्थिति | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|---|---|
| एंजेल | 979 मीटर | वेनेजुएला | विश्व का सर्वाधिक ऊँचा अविच्छिन्न जलप्रपात |
| ब्राउनी | लगभग 836 मीटर | न्यूजीलैंड | इसकी ऊँचाई के अलग-अलग मापन मिलते हैं |
| टुगेला | पारंपरिक मान लगभग 948 मीटर | दक्षिण अफ्रीका | नई माप-पद्धतियों में लगभग 983 मीटर तक के दावे; विश्व के सबसे ऊँचे जलप्रपातों में |
| सदरलैण्ड | लगभग 580–581 मीटर | न्यूजीलैंड | तीन प्रमुख चरणों में गिरता है |
| नियाग्रा | लगभग 51 मीटर तक | संयुक्त राज्य अमेरिका–कनाडा सीमा | नियाग्रा नदी पर; विशाल जलप्रवाह के लिए प्रसिद्ध |
| विक्टोरिया | लगभग 108 मीटर | जाम्बेजी नदी, जांबिया–जिम्बाब्वे सीमा | अत्यंत चौड़े जलपर्दे के लिए प्रसिद्ध |
| योसेमाइट | 739 मीटर | कैलिफोर्निया, संयुक्त राज्य अमेरिका | उत्तर अमेरिका के प्रसिद्ध ऊँचे जलप्रपातों में |
| मुल्टनोमाह | लगभग 189 मीटर | ओरेगन, संयुक्त राज्य अमेरिका | लगभग 620 फीट ऊँचा दो-स्तरीय जलप्रपात |
| जोग | लगभग 253 मीटर | कर्नाटक, भारत | शरावती नदी पर स्थित |
| ग्रैण्ड फॉल्स / चर्चिल फॉल्स | लगभग 75 मीटर | लैब्राडोर, कनाडा | पूर्व नाम ग्रैण्ड फॉल्स; वर्तमान नाम चर्चिल फॉल्स |
⚠️ ऊँचाई संबंधी सावधानी
जलप्रपातों की ऊँचाई अलग-अलग स्रोतों में कुल गिरावट, सबसे बड़ी एकल गिरावट या बहु-स्तरीय गिरावट के आधार पर अलग मिल सकती है। इसी कारण ब्राउनी और टुगेला जैसे जलप्रपातों की ऊँचाई तथा विश्व क्रम में अंतर मिलता है।
एंजेल जलप्रपात
एंजेल जलप्रपात वेनेजुएला में स्थित है और इसकी कुल ऊँचाई लगभग 979 मीटर मानी जाती है। इसे विश्व का सबसे ऊँचा अविच्छिन्न जलप्रपात माना जाता है।
यह वेनेजुएला के कनाइमा राष्ट्रीय उद्यान में आयान-तेपुई से नीचे गिरता है। इसका जल अंततः चुरून तथा कारोनी नदी तंत्र से जुड़ता है।
इसलिए केवल “कारोनी नदी पर एंजेल जलप्रपात” कहना सामान्य परीक्षा-सरलीकरण है; अधिक स्पष्ट रूप में इसे कारोनी नदी तंत्र से संबंधित माना जा सकता है।
नियाग्रा जलप्रपात
नियाग्रा जलप्रपात संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित प्रसिद्ध जलप्रपात समूह है। यह नियाग्रा नदी पर स्थित है, जो एरी झील से ओंटारियो झील की ओर बहती है।
इसकी ऊँचाई लगभग 51 मीटर तक मानी जाती है। यह संसार का सबसे ऊँचा जलप्रपात नहीं है, लेकिन भारी जलप्रवाह, पर्यटन और जलविद्युत उत्पादन के कारण अत्यंत प्रसिद्ध है।
विक्टोरिया जलप्रपात
विक्टोरिया जलप्रपात अफ्रीका की जाम्बेजी नदी पर जांबिया और जिम्बाब्वे की सीमा पर स्थित है। इसकी अधिकतम ऊँचाई लगभग 108 मीटर तथा चौड़ाई लगभग 1.7 किलोमीटर है।
ऊँचाई और चौड़ाई के संयुक्त विस्तार के कारण यह विश्व के सबसे विशाल और प्रभावशाली जलप्रपातों में गिना जाता है।
जोग जलप्रपात
जोग जलप्रपात कर्नाटक में शरावती नदी पर स्थित है। इसकी ऊँचाई लगभग 253 मीटर है।
यह जलप्रपात मुख्य रूप से राजा, रानी, रोअरर और रॉकेट नामक चार प्रमुख धाराओं के रूप में प्रसिद्ध है।
जोग भारत के सबसे प्रसिद्ध ऊँचे जलप्रपातों में से एक है, लेकिन इसे भारत का सबसे ऊँचा जलप्रपात कहना सुरक्षित नहीं है। कुल ऊँचाई के आधार पर भारत में इससे ऊँचे अन्य जलप्रपात भी हैं।
जलगर्तिका
नदी के चट्टानी तल पर जल के तीव्र प्रवाह और भँवरों के साथ घूमते हुए कंकड़-पत्थरों की घर्षण क्रिया से गोल अथवा बेलनाकार गड्ढे बनने लगते हैं। इन्हें जलगर्तिका कहते हैं।
प्रारंभ में चट्टान की छोटी दरार या गड्ढे में कंकड़ फँस जाते हैं। नदी का भँवर इन कंकड़ों को लगातार घुमाता है, जिससे वे चट्टान को घिसते हुए गड्ढे को अधिक गहरा और चौड़ा कर देते हैं।
इसलिए जलगर्तिका का निर्माण केवल जल-दाब से नहीं, बल्कि जल के भँवर और उसके साथ घूमने वाले शैल-खंडों के घर्षण से मुख्य रूप से होता है।
जलोढ़ पंख
जब कोई तीव्र प्रवाह वाली पर्वतीय नदी या धारा पर्वत से निकलकर अचानक समतल मैदान में प्रवेश करती है, तो उसकी ढाल और वेग तेजी से कम हो जाते हैं।
नदी की वहन क्षमता कम होने से उसके साथ लाए गए कंकड़, बजरी, बालू और अन्य अवसाद पर्वत के आधार के पास जमा होने लगते हैं।
ये पदार्थ अर्द्धवृत्ताकार या पंख के समान फैलकर जमा होते हैं, इसलिए इस स्थलरूप को जलोढ़ पंख कहा जाता है।
कई जलोढ़ पंख आपस में मिलकर पर्वत-पाद के साथ विस्तृत निक्षेपात्मक मैदान बना सकते हैं।
🎯 निर्माण क्रम
पर्वतीय नदी → मैदान में प्रवेश → वेग कम → मोटे अवसाद का निक्षेप → जलोढ़ पंख।
नदी वेदिका
नदी वेदिका नदी घाटी के किनारों पर दिखाई देने वाली सीढ़ीनुमा या सोपानी सतह होती है। यह प्रायः किसी पुराने नदी तल या पुराने बाढ़ मैदान का अवशेष होती है।
जब नदी में पुनर्यौवन होता है और नदी अपने पुराने तल को फिर से गहराई तक काटने लगती है, तब पुराना बाढ़ मैदान वर्तमान नदी तल से ऊपर रह जाता है। यही ऊँची सपाट सतह नदी वेदिका बन सकती है।
नदी के पुनर्यौवन का कारण भू-पर्पटी का उत्थान, समुद्र तल का गिरना अथवा नदी के आधार तल में अन्य परिवर्तन हो सकता है।
⚠️ शब्द-सुधार
“नवोन्मेष” की जगह इस स्थलरूप के लिए नदी का पुनर्यौवन शब्द अधिक उपयुक्त है।
नदी विसर्प
समतल मैदानों में नदी की ढाल कम होने पर नदी सीधे मार्ग में बहने के बजाय कई स्थानों पर घुमावदार मोड़ बनाने लगती है। इन घुमावदार मोड़ों को नदी विसर्प कहा जाता है।
विसर्प के बाहरी किनारे पर जल का वेग अधिक होने से अपरदन होता है, जबकि अंदरूनी किनारे पर वेग कम होने के कारण निक्षेपण होता है। इस संयुक्त प्रक्रिया से विसर्प धीरे-धीरे बड़ा और अधिक घुमावदार होता जाता है।
नदी विसर्प मुख्यतः नदी की मध्य और निचली अवस्था में विस्तृत बाढ़ मैदानों पर अच्छे से विकसित होते हैं। इसे केवल मार्ग में अवरोध का परिणाम मानना सही नहीं है।
🎯 सबसे महत्वपूर्ण
विसर्प का बाहरी किनारा = अपरदन
विसर्प का अंदरूनी किनारा = निक्षेपण
प्राकृतिक तटबंध
बाढ़ के समय नदी का जल अपने सामान्य किनारों को पार करके आसपास के बाढ़ मैदान में फैल जाता है। नदी से बाहर निकलते ही जल का वेग कम होने लगता है और उसमें उपस्थित भारी अवसाद सबसे पहले नदी के किनारों के निकट जमा हो जाते हैं।
लगातार आने वाली बाढ़ों के दौरान इस प्रक्रिया के दोहराए जाने से नदी के दोनों किनारों के साथ लंबे, कम ऊँचाई वाले प्राकृतिक कटक विकसित हो जाते हैं। इन्हें प्राकृतिक तटबंध कहा जाता है।
ये मानव द्वारा बनाए गए बाँध नहीं होते, बल्कि नदी द्वारा स्वयं किए गए अवसादी निक्षेप से निर्मित होते हैं।
बाढ़ का मैदान
नदी की निचली घाटी में नदी के दोनों ओर स्थित विस्तृत और लगभग समतल क्षेत्र, जो बाढ़ के समय जलमग्न हो सकता है, बाढ़ का मैदान कहलाता है।
बार-बार आने वाली बाढ़ के दौरान नदी द्वारा लाई गई महीन गाद और मिट्टी इस क्षेत्र में जमा होती रहती है, जिससे बाढ़ का मैदान विकसित और विस्तृत होता है।
नियमित जलोढ़ निक्षेप के कारण अनेक नदी बाढ़ मैदान कृषि के लिए अत्यंत उपजाऊ होते हैं।
छाड़न या गोखुर झील
नदी के विसर्प लगातार बड़े होते-होते ऐसी स्थिति में पहुँच सकते हैं जहाँ दो मोड़ों के बीच की दूरी बहुत कम रह जाती है। बाढ़ या तेज प्रवाह के दौरान नदी इस संकरे भाग को काटकर एक नया और छोटा सीधा मार्ग बना सकती है।
नया मार्ग बनने के बाद पुराना विसर्प मुख्य नदी से धीरे-धीरे अलग हो जाता है। नदी से अलग हुआ यह अर्द्धचंद्राकार या घोड़े की नाल के आकार का जलभाग छाड़न झील या गोखुर झील कहलाता है।
समय के साथ इसमें गाद और वनस्पति जमा होने से यह झील उथली होकर समाप्त भी हो सकती है।
डेल्टा
नदी जब समुद्र या झील में प्रवेश करती है, तो सामान्यतः उसका वेग बहुत कम हो जाता है। इससे नदी द्वारा लाए गए बालू, गाद, मिट्टी और अन्य अवसाद उसके मुहाने के आसपास जमा होने लगते हैं।
लंबे समय तक निक्षेप होने से नदी-मुहाने पर विस्तृत निम्न भूभाग विकसित हो सकता है, जिसे डेल्टा कहा जाता है।
डेल्टा शब्द ग्रीक अक्षर Δ से संबंधित है, क्योंकि नील नदी का प्रसिद्ध डेल्टा त्रिकोणीय आकृति से इसकी तुलना का आधार बना। हालांकि सभी डेल्टा त्रिकोणाकार नहीं होते।
डेल्टा क्षेत्र में मुख्य नदी कई छोटी शाखाओं में विभाजित हो सकती है। इन शाखाओं को वितरिकाएँ कहा जाता है।
गंगा–ब्रह्मपुत्र–मेघना डेल्टा
गंगा–ब्रह्मपुत्र–मेघना नदी तंत्र बंगाल की खाड़ी के तट पर विशाल डेल्टा का निर्माण करता है। इसका विस्तार भारत और बांग्लादेश दोनों में है।
इसे सामान्यतः विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा माना जाता है। इसके समुद्रतटीय भाग में विकसित विशाल मैंग्रोव क्षेत्र सुंदरबन के नाम से प्रसिद्ध है।
यह डेल्टा नदियों द्वारा हिमालय और अन्य क्षेत्रों से लाए गए विशाल मात्रा में अवसादों के लगातार निक्षेप से विकसित हुआ है।
🎯 परीक्षा में याद रखें
विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा — गंगा–ब्रह्मपुत्र–मेघना डेल्टा।
प्रसिद्ध मैंग्रोव क्षेत्र — सुंदरबन।
अपरदनात्मक एवं निक्षेपात्मक स्थलरूप
| स्थलरूप | मुख्य प्रक्रिया | विशेषता |
|---|---|---|
| वी-आकार की घाटी | अधोमुखी अपरदन | नदी की युवावस्था में प्रमुख |
| गार्ज | तीव्र अधोमुखी अपरदन | गहरी एवं संकरी घाटी |
| कैनियन | गहरा नदी अपरदन | विशाल गहरी घाटी; ग्रैंड कैनियन प्रसिद्ध |
| जलप्रपात | अपरदन एवं संरचनात्मक अंतर | जल का अचानक ऊँचाई से गिरना |
| जलगर्तिका | घर्षण | नदी तल में गोल गड्ढे |
| जलोढ़ पंख | निक्षेपण | पर्वत-पाद पर पंखाकार जमाव |
| नदी वेदिका | पुनर्यौवन एवं पुनः अपरदन | घाटी के किनारे सीढ़ीनुमा पुरानी सतह |
| विसर्प | पार्श्व अपरदन + निक्षेपण | नदी के घुमावदार मोड़ |
| प्राकृतिक तटबंध | बाढ़कालीन निक्षेपण | नदी किनारे लंबे निम्न कटक |
| गोखुर झील | विसर्प कटाव | मुख्य नदी से अलग पुराना विसर्प |
| बाढ़ का मैदान | बार-बार निक्षेपण | नदी के दोनों ओर विस्तृत समतल क्षेत्र |
| डेल्टा | नदी-मुहाने पर निक्षेपण | अवसाद से निर्मित विस्तृत भूभाग |
नदी की अवस्था और स्थलरूप
| नदी की अवस्था | प्रमुख क्रिया | प्रमुख स्थलरूप |
|---|---|---|
| युवावस्था | तीव्र अधोमुखी अपरदन | वी-आकार घाटी, गार्ज, जलप्रपात, क्षिप्रिका, जलगर्तिका |
| प्रौढ़ावस्था | पार्श्व अपरदन एवं परिवहन | चौड़ी घाटी, विसर्प, बाढ़ मैदान का विकास |
| वृद्धावस्था/निचला प्रवाह | निक्षेपण की प्रधानता | विशाल विसर्प, प्राकृतिक तटबंध, गोखुर झील, विस्तृत बाढ़ मैदान और डेल्टा |
भ्रम पैदा करने वाले प्रमुख तथ्य
भ्रम: गार्ज और कैनियन बिल्कुल एक ही स्थलरूप हैं।
सही: दोनों गहरी नदी घाटियाँ हैं, लेकिन कैनियन प्रायः अधिक विस्तृत तथा सीढ़ीनुमा/खड़ी चट्टानी दीवारों वाला हो सकता है।
भ्रम: कठोर चट्टान मिलते ही हमेशा क्षिप्रिका बनती है।
सही: नदी तल की अचानक ढाल, असमानता और कठोर शैल-खंडों के कारण तेज तथा अशांत प्रवाह से क्षिप्रिका विकसित होती है।
भ्रम: नदी वेदिका नवोन्मेष से बनती है।
सही: नदी के पुनर्यौवन और पुनः अधोमुखी कटाव से पुराना बाढ़ मैदान ऊपर छूट सकता है और नदी वेदिका बनती है।
भ्रम: विसर्प केवल नदी के मार्ग में अवरोध आने के कारण बनते हैं।
सही: कम ढाल वाले मैदान में पार्श्व अपरदन एवं निक्षेपण विसर्प निर्माण की मुख्य प्रक्रिया है।
भ्रम: मुल्टनोमाह जलप्रपात 250 मीटर ऊँचा है।
सही: इसकी कुल ऊँचाई लगभग 189 मीटर है।
भ्रम: लैब्राडोर का ग्रैण्ड फॉल्स 160 मीटर ऊँचा है।
सही: पुराने ग्रैण्ड फॉल्स का वर्तमान नाम चर्चिल फॉल्स है और इसकी ऊँचाई लगभग 75 मीटर मानी जाती है।
भ्रम: सभी डेल्टा ग्रीक अक्षर Δ जैसे त्रिकोणाकार होते हैं।
सही: डेल्टा कई आकृतियों के हो सकते हैं; त्रिकोणाकार स्वरूप केवल एक प्रकार है।
त्वरित पुनरावृत्ति
⚡ स्थलरूपों का क्रम
🎯 प्रमुख जोड़ियाँ
ग्रैंड कैनियन — कोलोराडो नदी
एंजेल जलप्रपात — वेनेजुएला — लगभग 979 मीटर
टुगेला — दक्षिण अफ्रीका
नियाग्रा — संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा सीमा
विक्टोरिया — जाम्बेजी नदी — जांबिया और जिम्बाब्वे सीमा
योसेमाइट — कैलिफोर्निया — लगभग 739 मीटर
मुल्टनोमाह — ओरेगन — लगभग 189 मीटर
जोग — शरावती नदी — कर्नाटक — लगभग 253 मीटर
गंगा–ब्रह्मपुत्र–मेघना — विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा
⚡ अंतिम पुनरावृत्ति बिंदु
नदी की तीन प्रमुख क्रियाएँ — अपरदन, परिवहन और निक्षेपण।
नदी के तीव्र अधोमुखी अपरदन से वी-आकार की घाटी, गार्ज और कैनियन विकसित होते हैं।
ग्रैंड कैनियन — कोलोराडो नदी द्वारा निर्मित प्रसिद्ध कैनियन।
नदी का जल अचानक तीव्र ढाल से नीचे गिरने पर जलप्रपात बनता है।
क्षिप्रिका में नदी तीव्र ढाल और असमान नदी तल पर अत्यधिक वेग एवं अशांत रूप से प्रवाहित होती है।
एंजेल जलप्रपात — वेनेजुएला — लगभग 979 मीटर — विश्व का सर्वाधिक ऊँचा अविच्छिन्न जलप्रपात।
विक्टोरिया जलप्रपात — जाम्बेजी नदी — जांबिया और जिम्बाब्वे सीमा।
नियाग्रा जलप्रपात — संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा की सीमा — नियाग्रा नदी।
जोग जलप्रपात — शरावती नदी — कर्नाटक — लगभग 253 मीटर।
नदी तल में भँवरों के साथ घूमते कंकड़-पत्थरों के घर्षण से जलगर्तिका बनती है।
पर्वत से मैदान में प्रवेश करते समय नदी का वेग कम होने पर पंखाकार अवसाद जमा होते हैं, जिन्हें जलोढ़ पंख कहते हैं।
नदी के पुनर्यौवन एवं पुनः गहरे कटाव से पुराने बाढ़ मैदान का भाग ऊपर छूट जाने पर नदी वेदिका बन सकती है।
नदी के घुमावदार मार्ग को विसर्प कहते हैं। इसके बाहरी किनारे पर अपरदन तथा अंदरूनी किनारे पर निक्षेपण होता है।
बाढ़ के समय नदी किनारे मोटे अवसादों के बार-बार जमने से प्राकृतिक तटबंध बनते हैं।
विसर्प के कटकर मुख्य नदी से अलग हो जाने पर छाड़न या गोखुर झील बनती है।
नदी के मुहाने पर अवसाद जमा होने से डेल्टा बनता है। सभी डेल्टा त्रिकोणाकार होना आवश्यक नहीं है।
गंगा–ब्रह्मपुत्र–मेघना डेल्टा विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा माना जाता है और इसका प्रसिद्ध मैंग्रोव क्षेत्र सुंदरबन है।