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नीति आयोग, योजना आयोग एवं वरीयता क्रम
NITI AAYOG & PLANNING IN INDIA

नीति आयोग, योजना आयोग एवं वरीयता क्रम

स्थापना, संरचना, उद्देश्य, शासी परिषद, राष्ट्रीय विकास परिषद और महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य

नीति आयोग

नीति आयोग भारत सरकार का सर्वोच्च सार्वजनिक नीति विचार-मंच है। इसका कार्य सरकार को नीतिगत दिशा, दीर्घकालिक रणनीति, तकनीकी सलाह और विकास संबंधी सुझाव देना है।

नीति आयोग की स्थापना 1 जनवरी 2015 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के संकल्प द्वारा की गई थी।

नीति आयोग ने पूर्ववर्ती योजना आयोग का स्थान लिया और विकास नियोजन में ऊपर से नीचे निर्देश देने की पुरानी पद्धति के स्थान पर राज्यों की भागीदारी और सहकारी संघवाद पर अधिक बल दिया।

01

नीति आयोग की स्थापना

1 जनवरी 2015

नीति आयोग का गठन 1 जनवरी 2015 को भारत सरकार के केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा पारित संकल्प के माध्यम से किया गया।

इसका पूर्ण नाम भारत परिवर्तन के लिए राष्ट्रीय संस्थान है।

इसे योजना आयोग के स्थान पर गठित किया गया।

योजना आयोग की स्थापना 15 मार्च 1950 को हुई थी और नई संस्थागत व्यवस्था अपनाए जाने के साथ उसकी भूमिका समाप्त कर नीति आयोग बनाया गया।

🎯 सबसे महत्वपूर्ण

योजना आयोग — 15 मार्च 1950।
नीति आयोग — 1 जनवरी 2015।

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संवैधानिक स्थिति

संवैधानिक या वैधानिक?

नीति आयोग का उल्लेख भारतीय संविधान के किसी अनुच्छेद में नहीं है।

इसका गठन संसद द्वारा पारित किसी विशेष अधिनियम से भी नहीं किया गया है।

इसलिए नीति आयोग को गैर-संवैधानिक और गैर-वैधानिक कार्यकारी निकाय माना जाता है।

इसकी स्थापना केंद्रीय मंत्रिमंडल के संकल्प द्वारा हुई है।

⚠️ महत्वपूर्ण सुधार

नीति आयोग की स्थापना राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदित संवैधानिक प्रावधान के आधार पर नहीं हुई। सही तथ्य है—केंद्रीय मंत्रिमंडल का संकल्प, 1 जनवरी 2015।

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नीति आयोग का अध्यक्ष

प्रधानमंत्री

भारत का प्रधानमंत्री नीति आयोग का अध्यक्ष होता है।

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता नीति आयोग को केंद्र और राज्यों के बीच उच्च स्तरीय नीति समन्वय का मंच प्रदान करती है।

🎯 एक पंक्ति

नीति आयोग का पदेन अध्यक्ष — भारत का प्रधानमंत्री।

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नीति आयोग की प्रमुख संरचना

राष्ट्रीय और संघीय भागीदारी

नीति आयोग की संरचना में अध्यक्ष के रूप में प्रधानमंत्री शामिल होते हैं।

इसके अतिरिक्त एक उपाध्यक्ष होता है।

नीति आयोग में पूर्णकालिक सदस्य होते हैं।

प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्रियों को पदेन सदस्य के रूप में शामिल किया जा सकता है।

विशिष्ट ज्ञान और अनुभव वाले विशेषज्ञों तथा अन्य पदाधिकारियों को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया जा सकता है।

नीति आयोग में एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी होता है।

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नीति आयोग की शासी परिषद

सहकारी संघवाद का प्रमुख मंच

नीति आयोग की शासी परिषद केंद्र और राज्यों के बीच विकास नीति से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण संस्थागत मंचों में से एक है।

इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करता है।

इसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होते हैं।

विधानमंडल वाले संघ राज्यक्षेत्रों के मुख्यमंत्री तथा अन्य संघ राज्यक्षेत्रों के उपराज्यपाल या संबंधित प्रशासक व्यवस्था के अनुसार शामिल होते हैं।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष, पूर्णकालिक सदस्य, पदेन सदस्य और विशेष आमंत्रित सदस्य भी निर्धारित संरचना के अनुसार इसमें शामिल हो सकते हैं।

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सहकारी संघवाद

सशक्त राज्य से सशक्त राष्ट्र

नीति आयोग की प्रमुख विशेषताओं में सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना शामिल है।

इसका मूल विचार है कि सशक्त राज्यों से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है।

यह राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों को राष्ट्रीय विकास एजेंडे के निर्माण और क्रियान्वयन में भागीदारी का मंच प्रदान करता है।

राज्यों के अनुभवों, समस्याओं और सफल नीतियों को आपस में साझा करने में भी नीति आयोग भूमिका निभाता है।

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नीति आयोग के प्रमुख उद्देश्य

दीर्घकालिक विकास और नीति निर्माण

राज्यों की सक्रिय भागीदारी से राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं और रणनीतियों का साझा दृष्टिकोण विकसित करना।

देश के दीर्घकालिक आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए नीति और रणनीति तैयार करना।

राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों को रणनीतिक तथा तकनीकी सलाह देना।

गरीबी कम करने और विकास के लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने पर बल देना।

प्रौद्योगिकी, नवाचार और क्षमता निर्माण को प्रोत्साहित करना।

सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की निगरानी तथा परिणामों का मूल्यांकन करना।

राष्ट्रीय विकास नीतियों में आवश्यकतानुसार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हितों को भी ध्यान में रखना।

भारत की वैश्विक आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता और सतत विकास की क्षमता बढ़ाने के लिए नीतिगत सुझाव देना।

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नीति आयोग के प्रमुख कार्य

नीति, निगरानी और मूल्यांकन

केंद्र सरकार को दीर्घकालिक विकास नीतियों और रणनीतियों पर सलाह देना।

राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों के साथ विकास संबंधी मुद्दों पर सहयोग करना।

सरकारी कार्यक्रमों के प्रभाव का मूल्यांकन करना और आवश्यक सुधार सुझाना।

पिछड़े क्षेत्रों और कमजोर सामाजिक वर्गों के विकास के लिए नीतिगत सहायता देना।

नई तकनीक, अनुसंधान, नवाचार और श्रेष्ठ प्रशासनिक प्रथाओं को बढ़ावा देना।

विभिन्न मंत्रालयों, राज्यों और विशेषज्ञ संस्थाओं के बीच नीति संबंधी सहयोग बढ़ाना।

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नीति आयोग और योजना आयोग में अंतर

पुरानी और नई व्यवस्था

आधार योजना आयोग नीति आयोग
स्थापना 15 मार्च 1950 1 जनवरी 2015
अध्यक्ष प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री
स्थिति गैर-संवैधानिक कार्यकारी निकाय गैर-संवैधानिक एवं गैर-वैधानिक कार्यकारी निकाय
मुख्य दृष्टिकोण केंद्रीकृत पंचवर्षीय नियोजन नीति, रणनीति और सहकारी संघवाद
राज्यों की भूमिका तुलनात्मक रूप से केंद्रीकृत व्यवस्था शासी परिषद के माध्यम से सक्रिय भागीदारी
धन आवंटन योजना संसाधनों के आवंटन में महत्वपूर्ण भूमिका योजना आयोग जैसी केंद्रीय धन-आवंटन संस्था नहीं
पंचवर्षीय योजना मुख्य व्यवस्था पुरानी पंचवर्षीय योजना प्रणाली नहीं
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योजना आयोग

15 मार्च 1950

योजना आयोग की स्थापना 15 मार्च 1950 को भारत सरकार के मंत्रिमंडलीय संकल्प द्वारा की गई थी।

यह भी संविधान द्वारा निर्मित संस्था नहीं थी।

भारत के प्रधानमंत्री योजना आयोग के पदेन अध्यक्ष होते थे।

योजना आयोग के प्रथम अध्यक्ष के रूप में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू थे।

योजना आयोग का प्रमुख कार्य देश की पंचवर्षीय योजनाएँ तैयार करना और विकास के लिए उपलब्ध संसाधनों के उपयोग से संबंधित योजना बनाना था।

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के. संथानम का कथन

योजना आयोग और भारतीय संघवाद

भारतीय संघवाद की व्यवहारिक स्थिति की आलोचना करते हुए के. संथानम से यह विचार जोड़ा जाता है कि योजना आयोग की वित्तीय और नियोजन संबंधी भूमिका ने संघीय व्यवस्था पर केंद्र के प्रभाव को बहुत मजबूत कर दिया था।

प्रतियोगी परीक्षा सामग्री में उनके नाम से यह कथन प्रचलित है कि योजना आयोग ने संघ का स्थान ले लिया और देश अनेक अर्थों में एकात्मक व्यवस्था की तरह कार्य करने लगा।

इसे संविधान का औपचारिक कथन नहीं, बल्कि भारतीय संघवाद और योजना आयोग की भूमिका पर एक विद्वतापूर्ण आलोचनात्मक टिप्पणी के रूप में समझना चाहिए।

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राष्ट्रीय विकास परिषद

6 अगस्त 1952

राष्ट्रीय विकास परिषद की स्थापना 6 अगस्त 1952 को की गई थी।

इसकी अध्यक्षता भारत का प्रधानमंत्री करता था।

ऐतिहासिक व्यवस्था में इसमें केंद्रीय मंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्री, संघ राज्यक्षेत्रों के प्रतिनिधि तथा योजना आयोग के सदस्य शामिल होते थे।

इसका प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय योजनाओं पर केंद्र और राज्यों के बीच विचार-विमर्श तथा समन्वय करना था।

⚠️ वर्ष सुधार

राष्ट्रीय विकास परिषद — अगस्त 1954 नहीं।
सही — 6 अगस्त 1952।

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राष्ट्रीय विकास परिषद और नीति आयोग

पुराने तथ्य को वर्तमान व्यवस्था से न मिलाएँ

राष्ट्रीय विकास परिषद का ऐतिहासिक विकास योजना आयोग और पंचवर्षीय योजनाओं की व्यवस्था से जुड़ा था।

ऐतिहासिक रूप से इसे केंद्र सरकार, योजना आयोग और राज्य सरकारों के बीच विकास-योजनाओं पर एक महत्वपूर्ण सेतु माना जाता था।

नीति आयोग बनने के बाद विकास नीति में राज्यों की संस्थागत भागीदारी के लिए नीति आयोग की शासी परिषद प्रमुख मंच है।

इसलिए वर्तमान नोट्स में “राष्ट्रीय विकास परिषद नीति आयोग और राज्य सरकारों के बीच समन्वयकर्ता है” लिखना उचित नहीं है।

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वरीयता क्रम

राजकीय एवं समारोहिक अवसरों के लिए

भारत सरकार की वरीयता तालिका विभिन्न उच्च पदाधिकारियों और विशिष्ट व्यक्तियों का राजकीय तथा समारोहिक अवसरों पर स्थान निर्धारित करती है।

यह तालिका दैनिक प्रशासनिक शक्तियों, संवैधानिक अधिकारों अथवा सरकारी निर्णय लेने की श्रेष्ठता निर्धारित नहीं करती।

अर्थात किसी व्यक्ति का वरीयता क्रम में ऊपर होना उसे दूसरे पदाधिकारी पर प्रशासनिक नियंत्रण नहीं देता।

🎯 सबसे महत्वपूर्ण सावधानी

वरीयता क्रम = केवल राजकीय एवं समारोहिक अवसरों के लिए।

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भारत का प्रमुख वरीयता क्रम

परीक्षा के लिए आवश्यक शीर्ष प्रविष्टियाँ

क्रम पद / व्यक्ति
1 भारत के राष्ट्रपति
2 भारत के उपराष्ट्रपति
3 भारत के प्रधानमंत्री
4 राज्यों के राज्यपाल अपने-अपने राज्यों में
5 भारत के पूर्व राष्ट्रपति
5-क उपप्रधानमंत्री, यदि पद पर कोई हो
6 भारत के मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा अध्यक्ष
7 संघ के कैबिनेट मंत्री; अपने राज्यों में मुख्यमंत्री; पूर्व प्रधानमंत्री; लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेता तथा आधिकारिक तालिका में इसी क्रम की अन्य प्रविष्टियाँ
7-क भारत रत्न से सम्मानित व्यक्ति
8 भारत में मान्यता प्राप्त राजदूत/उच्चायुक्त; अपने राज्यों से बाहर राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री आदि
9 सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश
9-क संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक
10 राज्यसभा के उपसभापति, लोकसभा उपाध्यक्ष, संघ के राज्य मंत्री तथा आधिकारिक तालिका में इस श्रेणी के अन्य पदाधिकारी
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नीति आयोग के उपाध्यक्ष और वरीयता क्रम

कैबिनेट मंत्री का दर्जा और वरीयता तालिका अलग विषय

नीति आयोग के उपाध्यक्ष को सरकार द्वारा नियुक्ति और सेवा-शर्तों के अनुसार कैबिनेट मंत्री के समकक्ष दर्जा दिया जा सकता है।

लेकिन कैबिनेट मंत्री के समकक्ष दर्जा और गृह मंत्रालय की औपचारिक वरीयता तालिका में कैबिनेट मंत्री के समान क्रमांक पर होना एक ही बात नहीं मानी जानी चाहिए।

पुरानी आधिकारिक वरीयता तालिका के क्रम 7 में योजना आयोग के उपाध्यक्ष की प्रविष्टि है।

योजना आयोग समाप्त होने के बाद इस पुराने तथ्य को सीधे “क्रम 7 = नीति आयोग उपाध्यक्ष” में बदल देना परीक्षा की दृष्टि से सुरक्षित नहीं है, जब तक प्रश्न किसी विशेष सरकारी अधिसूचना या दर्जे के बारे में न हो।

⚠️ परीक्षा में सुरक्षित उत्तर

नीति आयोग उपाध्यक्ष को कैबिनेट मंत्री के समकक्ष दर्जा दिया जा सकता है; इसे बिना स्रोत के औपचारिक वरीयता क्रम संख्या 7 न लिखें।

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नीति आयोग और धन आवंटन

योजना आयोग से बड़ा अंतर

नीति आयोग स्वयं राज्यों को योजना आयोग जैसी व्यवस्था में केंद्रीय योजना धन आवंटित करने वाली संस्था नहीं है।

करों के संवैधानिक बँटवारे में वित्त आयोग की भूमिका अलग है।

केंद्रीय मंत्रालयों और वित्तीय व्यवस्था के माध्यम से विभिन्न योजनाओं के लिए संसाधन प्रदान किए जाते हैं।

नीति आयोग मुख्यतः नीति, रणनीति, तकनीकी सहयोग, अनुसंधान, मूल्यांकन और राज्यों के साथ समन्वय पर केंद्रित है।

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विकास की निगरानी और मूल्यांकन

परिणाम आधारित नीति

नीति आयोग सरकारी कार्यक्रमों के परिणामों और प्रभाव का अध्ययन तथा मूल्यांकन करने में भूमिका निभाता है।

इसके अंतर्गत विकास निगरानी एवं मूल्यांकन से संबंधित संस्थागत व्यवस्था कार्य करती है।

इसका उद्देश्य केवल यह देखना नहीं है कि योजना पर कितना धन खर्च हुआ, बल्कि यह भी देखना है कि योजना से वास्तविक परिणाम क्या प्राप्त हुए।

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आकांक्षी जिला और आकांक्षी प्रखंड

क्षेत्रीय असमानता कम करने का प्रयास

नीति आयोग पिछड़े और विकास की चुनौती वाले क्षेत्रों में सुधार के लिए आकांक्षी जिला कार्यक्रम और आकांक्षी प्रखंड जैसी पहलों से भी जुड़ा है।

इन कार्यक्रमों में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, बुनियादी ढाँचा, वित्तीय समावेशन और अन्य विकास संकेतकों पर सुधार को प्रोत्साहित किया जाता है।

राज्यों और जिलों की तुलना तथा श्रेष्ठ प्रथाओं के आदान-प्रदान के माध्यम से प्रतिस्पर्धी और सहकारी संघवाद दोनों को बढ़ावा मिलता है।

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महत्वपूर्ण भ्रम और सही तथ्य

एक बार में अंतिम सुधार

गलत: नीति आयोग एक संवैधानिक निकाय है।
सही: यह गैर-संवैधानिक और गैर-वैधानिक कार्यकारी निकाय है।

गलत: नीति आयोग को संसद के कानून से बनाया गया।
सही: इसका गठन 1 जनवरी 2015 के केंद्रीय मंत्रिमंडल के संकल्प से हुआ।

गलत: नीति आयोग का गठन राष्ट्रपति द्वारा किया गया।
सही: इसका गठन केंद्रीय मंत्रिमंडल के संकल्प द्वारा हुआ।

गलत: राष्ट्रीय विकास परिषद की स्थापना अगस्त 1954 में हुई।
सही: स्थापना 6 अगस्त 1952 में हुई।

अधूरा: राष्ट्रीय विकास परिषद वर्तमान में नीति आयोग और राज्य सरकारों के बीच मुख्य समन्वयकर्ता है।
सही: यह ऐतिहासिक रूप से योजना आयोग-युग की विकास योजना व्यवस्था से जुड़ी थी; नीति आयोग की शासी परिषद वर्तमान सहकारी संघवाद का प्रमुख मंच है।

गलत: नीति आयोग योजना आयोग की तरह राज्यों को योजना धन बाँटता है।
सही: नीति आयोग का मुख्य कार्य नीति, रणनीति, तकनीकी सलाह, सहयोग और मूल्यांकन है।

अधूरा: नीति आयोग केवल गरीबी और बेरोजगारी योजनाएँ बनाता है।
सही: इसका क्षेत्र आर्थिक नीति, सामाजिक क्षेत्र, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, आधारभूत संरचना, सतत विकास, राज्यों का सहयोग और अनेक अन्य क्षेत्रों तक विस्तृत है।

अधूरा: राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना नीति आयोग का मुख्य स्वतंत्र कार्य है।
सही: आर्थिक रणनीति और नीति में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हितों को आवश्यकतानुसार समाहित करना इसके मूल उद्देश्यों में शामिल विचारों में से एक है; नीति आयोग देश की सुरक्षा एजेंसी नहीं है।

अधूरा: वरीयता क्रम में ऊँचा स्थान अधिक सरकारी शक्ति दर्शाता है।
सही: वरीयता तालिका मुख्यतः राजकीय और समारोहिक अवसरों के लिए है।

असुरक्षित तथ्य: नीति आयोग का उपाध्यक्ष स्वतः वरीयता क्रम संख्या 7 पर है।
सही: कैबिनेट मंत्री का दर्जा और औपचारिक वरीयता क्रम को अलग समझें; आधिकारिक पुरानी तालिका में यह प्रविष्टि योजना आयोग के उपाध्यक्ष की है।

⚡ अंतिम पुनरावृत्ति

योजना आयोग — स्थापना 15 मार्च 1950।

योजना आयोग — गैर-संवैधानिक निकाय।

योजना आयोग का अध्यक्ष — प्रधानमंत्री।

प्रथम अध्यक्ष — पंडित जवाहरलाल नेहरू।

नीति आयोग — स्थापना 1 जनवरी 2015।

नीति आयोग ने योजना आयोग का स्थान लिया।

नीति आयोग — गैर-संवैधानिक + गैर-वैधानिक कार्यकारी निकाय।

नीति आयोग की स्थापना — केंद्रीय मंत्रिमंडल का संकल्प।

नीति आयोग का अध्यक्ष — प्रधानमंत्री।

मुख्य आधार — सहकारी संघवाद।

शासी परिषद — प्रधानमंत्री + राज्यों के मुख्यमंत्री + संघ राज्यक्षेत्रों के निर्धारित प्रतिनिधि + नीति आयोग के अन्य निर्धारित सदस्य।

नीति आयोग — नीति एवं रणनीति का प्रमुख विचार-मंच।

यह योजना आयोग जैसी धन-आवंटन संस्था नहीं है।

मुख्य कार्य — दीर्घकालिक रणनीति, नीति सलाह, तकनीकी सहायता, निगरानी और मूल्यांकन।

राष्ट्रीय विकास परिषद — 6 अगस्त 1952।

राष्ट्रीय विकास परिषद का अध्यक्ष — प्रधानमंत्री।

राष्ट्रीय विकास परिषद — ऐतिहासिक रूप से केंद्र + योजना आयोग + राज्यों के विकास समन्वय का मंच।

वर्तमान नीति व्यवस्था में राज्यों की भागीदारी का प्रमुख मंच — नीति आयोग की शासी परिषद।

वरीयता क्रम 1 — राष्ट्रपति।

वरीयता क्रम 2 — उपराष्ट्रपति।

वरीयता क्रम 3 — प्रधानमंत्री।

वरीयता क्रम 4 — अपने राज्यों में राज्यपाल।

वरीयता क्रम 5 — पूर्व राष्ट्रपति।

वरीयता क्रम 6 — भारत के मुख्य न्यायाधीश एवं लोकसभा अध्यक्ष।

वरीयता क्रम 7 — संघ के कैबिनेट मंत्री, अपने राज्य में मुख्यमंत्री, पूर्व प्रधानमंत्री, दोनों सदनों के विपक्ष के नेता आदि।

वरीयता क्रम 7-क — भारत रत्न से सम्मानित व्यक्ति।

वरीयता क्रम 9 — सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश।

वरीयता क्रम 9-क — संघ लोक सेवा आयोग अध्यक्ष + मुख्य निर्वाचन आयुक्त + नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक।

वरीयता क्रम 10 — राज्यसभा उपसभापति, लोकसभा उपाध्यक्ष, संघ के राज्य मंत्री आदि।

वरीयता तालिका — केवल राजकीय एवं समारोहिक अवसरों के लिए।

सबसे छोटा क्रम — 1950 योजना आयोग → 1952 राष्ट्रीय विकास परिषद → 2015 नीति आयोग → सहकारी संघवाद → शासी परिषद → नीति एवं रणनीति।

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