प्रमुख आयोग, समितियाँ एवं संस्थाएँ
सच्चर, मंडल, ठक्कर, नानावटी, कोठारी, वर्मा, लोकपाल, मानवाधिकार आयोग एवं लोक सेवा आयोग
आयोग और समितियाँ
भारत में विभिन्न सामाजिक, प्रशासनिक, संवैधानिक, शैक्षिक, पुलिस और चुनावी समस्याओं का अध्ययन करने तथा सरकार को सुझाव देने के लिए समय-समय पर आयोग और समितियाँ गठित की गई हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं में इनके गठन का वर्ष, अध्यक्ष, उद्देश्य और प्रमुख सिफारिश विशेष रूप से पूछे जाते हैं।
सच्चर समिति
मुस्लिम समुदाय की सामाजिक-आर्थिक एवं शैक्षिक स्थिति
भारत सरकार ने 2005 में न्यायमूर्ति राजिंदर सच्चर की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति गठित की।
समिति का उद्देश्य भारत के मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति का अध्ययन करना था।
समिति ने शिक्षा, सरकारी सेवाओं, बैंकिंग एवं ऋण, रोजगार, बुनियादी सुविधाओं और सार्वजनिक संस्थाओं में मुस्लिम समुदाय की भागीदारी का अध्ययन किया।
समिति ने शिक्षा और कौशल के अवसर बढ़ाने, सरकारी आँकड़ों में समुदाय-आधारित सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बेहतर ढंग से मापने, ऋण और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच बढ़ाने तथा समान अवसर को प्रोत्साहित करने से संबंधित कई सुझाव दिए।
सच्चर समिति की रिपोर्ट 2006 में प्रस्तुत की गई।
🎯 याद रखें
सच्चर समिति — 2005 — राजिंदर सच्चर — मुस्लिम समुदाय की स्थिति — रिपोर्ट 2006।
मंडल आयोग
द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग
केंद्र सरकार ने 1979 में बी. पी. मंडल की अध्यक्षता में द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया।
इसका मुख्य उद्देश्य सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान करना और उनके उत्थान के उपाय सुझाना था।
आयोग ने केंद्र सरकार की सेवाओं और पदों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की प्रमुख सिफारिश की।
आयोग की रिपोर्ट 1980 में प्रस्तुत हुई।
1990 में केंद्र सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए केंद्रीय सेवाओं में 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की दिशा में निर्णय लिया।
⚠️ परीक्षा-सावधानी
मंडल आयोग की प्रसिद्ध 27 प्रतिशत सिफारिश मुख्यतः सरकारी सेवाओं और पदों के संदर्भ में याद रखें। केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में वर्तमान अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण का संवैधानिक और वैधानिक ढाँचा बाद के संशोधनों और कानूनों से भी जुड़ा है।
ठक्कर आयोग
इंदिरा गांधी की हत्या की जाँच
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 31 अक्टूबर 1984 को हत्या के बाद न्यायमूर्ति एम. पी. ठक्कर की अध्यक्षता में जाँच आयोग गठित किया गया।
आयोग का उद्देश्य हत्या की परिस्थितियों, सुरक्षा संबंधी चूकों तथा संभावित साजिश से जुड़े प्रश्नों की जाँच करना था।
ठक्कर आयोग का विषय 1984 के सिख-विरोधी दंगों की सामान्य जाँच नहीं था।
⚠️ ठक्कर और नानावटी में अंतर
ठक्कर आयोग → इंदिरा गांधी की हत्या।
नानावटी आयोग → 1984 के सिख-विरोधी दंगे।
वेंकटचलैया आयोग
संविधान की कार्यप्रणाली की समीक्षा
भारत सरकार ने 2000 में पूर्व मुख्य न्यायाधीश एम. एन. वेंकटचलैया की अध्यक्षता में संविधान की कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय आयोग गठित किया।
इस आयोग का उद्देश्य संविधान के मूल ढाँचे को क्षति पहुँचाए बिना उसके लगभग पाँच दशकों के कामकाज की समीक्षा करना तथा शासन में सुधार के उपाय सुझाना था।
आयोग ने चुनाव सुधार, संसद और विधानमंडलों की कार्यप्रणाली, न्यायपालिका, केंद्र-राज्य संबंध, मौलिक अधिकार, नीति-निदेशक तत्व, प्रशासनिक उत्तरदायित्व तथा संवैधानिक संस्थाओं सहित अनेक क्षेत्रों पर सुझाव दिए।
आयोग ने अपनी रिपोर्ट 2002 में प्रस्तुत की।
दिनेश गोस्वामी समिति
चुनाव सुधार — 1990
1990 में दिनेश गोस्वामी की अध्यक्षता में चुनाव सुधारों से संबंधित समिति गठित की गई।
समिति ने भारतीय चुनाव प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष और प्रभावी बनाने के लिए कई सुधारों पर विचार किया।
चुनावी खर्च, चुनावी अनियमितताओं, पुनर्मतदान, चुनाव आयोग की भूमिका और चुनाव प्रक्रिया में सुधार से जुड़े अनेक सुझाव दिए गए।
चुनावों में धनबल और अनुचित प्रभाव को नियंत्रित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
नानावटी आयोग
1984 के सिख-विरोधी दंगों की जाँच
केंद्र सरकार ने 2000 में न्यायमूर्ति जी. टी. नानावटी की अध्यक्षता में आयोग गठित किया।
आयोग का उद्देश्य 1984 में दिल्ली और देश के अन्य भागों में हुए सिख-विरोधी दंगों की घटनाओं, कारणों और जिम्मेदारियों की जाँच करना था।
आयोग ने विभिन्न घटनाओं में पुलिस, प्रशासन और कुछ राजनीतिक व्यक्तियों की भूमिका से संबंधित साक्ष्यों की जाँच की।
आयोग की रिपोर्ट 2005 में प्रस्तुत की गई।
📗 सुरक्षित परीक्षा तथ्य
नानावटी आयोग — 2000 — 1984 सिख-विरोधी दंगे — रिपोर्ट 2005।
कोठारी आयोग
शिक्षा आयोग — 1964–66
भारत सरकार ने 1964 में डॉ. दौलत सिंह कोठारी की अध्यक्षता में शिक्षा आयोग गठित किया।
इसे सामान्यतः कोठारी आयोग कहा जाता है।
आयोग ने 1964 से 1966 तक भारतीय शिक्षा व्यवस्था का व्यापक अध्ययन किया।
इसने पूरे देश में शिक्षा के समान ढाँचे की दिशा में 10+2+3 प्रणाली अपनाने की प्रमुख सिफारिश की।
इसने शिक्षा के अवसरों में समानता, विज्ञान एवं व्यावसायिक शिक्षा, शिक्षक-गुणवत्ता और राष्ट्रीय विकास में शिक्षा की भूमिका पर बल दिया।
आयोग ने शिक्षा पर राष्ट्रीय आय का लगभग 6 प्रतिशत व्यय करने की दिशा में भी बल दिया।
🎯 सूत्र
कोठारी आयोग → 1964–66 → शिक्षा → 10+2+3।
श्रीकृष्ण आयोग
मुंबई दंगे 1992–93
महाराष्ट्र सरकार ने 1993 में न्यायमूर्ति बी. एन. श्रीकृष्ण की अध्यक्षता में आयोग गठित किया।
इसका प्रमुख उद्देश्य दिसंबर 1992 और जनवरी 1993 में मुंबई में हुए सांप्रदायिक दंगों की परिस्थितियों और कारणों की जाँच करना था।
आयोग ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका तथा विभिन्न संगठनों और व्यक्तियों की भूमिका की भी समीक्षा की।
आयोग की रिपोर्ट 1998 में प्रस्तुत हुई।
राष्ट्रीय पुलिस आयोग
पुलिस सुधार
राष्ट्रीय पुलिस आयोग का गठन 1977 में धर्मवीर की अध्यक्षता में किया गया।
आयोग ने 1979 से 1981 के बीच पुलिस व्यवस्था से संबंधित कई रिपोर्टें प्रस्तुत कीं।
आयोग ने पुलिस को अनुचित राजनीतिक दबाव से बचाने, पुलिस जवाबदेही बढ़ाने, शिकायत-व्यवस्था मजबूत करने और पुलिस प्रशासन में व्यावसायिकता बढ़ाने पर जोर दिया।
राज्य सुरक्षा आयोग जैसी संस्थागत व्यवस्था की अवधारणा भी पुलिस सुधार संबंधी प्रमुख सिफारिशों में रही।
पुलिस के आधुनिकीकरण, प्रशिक्षण और जाँच व्यवस्था में सुधार को भी महत्वपूर्ण माना गया।
न्यायमूर्ति जे. एस. वर्मा समिति
महिलाओं के विरुद्ध यौन अपराधों से संबंधित कानून
दिसंबर 2012 की दिल्ली सामूहिक बलात्कार घटना के बाद केंद्र सरकार ने 23 दिसंबर 2012 को न्यायमूर्ति जे. एस. वर्मा की अध्यक्षता में समिति गठित की।
समिति का उद्देश्य महिलाओं के विरुद्ध यौन अपराधों से निपटने वाले आपराधिक कानूनों में आवश्यक संशोधन सुझाना था।
समिति ने बलात्कार और अन्य यौन अपराधों की परिभाषा तथा दंड संबंधी कानूनों को अधिक प्रभावी बनाने, पुलिस की जवाबदेही बढ़ाने और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अनेक सुझाव दिए।
समिति ने अपनी रिपोर्ट केवल लगभग एक महीने में 23 जनवरी 2013 को प्रस्तुत कर दी।
इसके बाद आपराधिक कानून में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए।
वोहरा समिति
राजनीति और अपराध के गठजोड़ का अध्ययन
एन. एन. वोहरा समिति का गठन 1993 में किया गया।
इसका उद्देश्य अपराध सिंडिकेट, माफिया संगठनों, नौकरशाही और राजनीतिक तंत्र के बीच संभावित गठजोड़ का अध्ययन करना था।
प्रतियोगी परीक्षाओं में इसे सामान्यतः राजनीतिज्ञ-अपराधी गठजोड़ की जाँच से संबंधित समिति के रूप में पूछा जाता है।
🎯 एक लाइन
वोहरा समिति → राजनीति + अपराध + माफिया गठजोड़।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना 12 अक्टूबर 1993 को की गई।
यह मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत स्थापित वैधानिक निकाय है।
इसलिए यह संवैधानिक निकाय नहीं है, लेकिन इसे केवल सामान्य सरकारी समिति भी नहीं माना जाता; यह संसद के कानून से निर्मित वैधानिक संस्था है।
2019 के संशोधन के बाद आयोग का अध्यक्ष ऐसा व्यक्ति हो सकता है जो भारत का मुख्य न्यायाधीश या सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश रह चुका हो।
⚠️ शब्द सही रखें
यदि पुराने नोट में “मंडवाधिकार आयोग” लिखा हो तो संदर्भ के अनुसार सही शब्द मानवाधिकार आयोग है।
राज्य मानवाधिकार आयोग
वर्तमान पात्रता
राज्य मानवाधिकार आयोग भी मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत गठित वैधानिक निकाय है।
2019 के संशोधन के बाद राज्य मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष ऐसा व्यक्ति हो सकता है जो किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश रह चुका हो।
इसलिए केवल “सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश ही अध्यक्ष बन सकता है” लिखना वर्तमान कानून की पूरी स्थिति नहीं बताता।
लोक सेवा आयोग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1919 से 1926
भारत में स्वतंत्र लोक सेवा आयोग की स्थापना का विचार ब्रिटिश काल में विकसित हुआ।
भारत शासन अधिनियम, 1919 में लोक सेवा आयोग स्थापित करने का प्रावधान किया गया।
बाद में ली आयोग ने लोक सेवा आयोग के गठन की दिशा में महत्वपूर्ण सिफारिश की।
भारत में पहला लोक सेवा आयोग 1 अक्टूबर 1926 को स्थापित हुआ।
इसके प्रथम अध्यक्ष सर रॉस बार्कर थे।
🎯 क्रम
1919 अधिनियम → ली आयोग → 1 अक्टूबर 1926 प्रथम लोक सेवा आयोग।
संघ और राज्य लोक सेवा आयोग
अनुच्छेद 315 से 323
| अनुच्छेद | विषय |
|---|---|
| 315 | संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग। |
| 316 | अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति तथा कार्यकाल। |
| 317 | सदस्य को हटाने और निलंबित करने की प्रक्रिया। |
| 318 | सदस्यों और कर्मचारियों की सेवा-शर्तों से संबंधित विनियम। |
| 319 | पद छोड़ने के बाद अन्य पद धारण करने से संबंधित प्रावधान। |
| 320 | लोक सेवा आयोग के कार्य। |
| 322 | लोक सेवा आयोग के व्यय। |
| 323 | लोक सेवा आयोग की रिपोर्ट। |
राज्य लोक सेवा आयोग
नियुक्ति और व्यय
राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य का राज्यपाल करता है।
संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।
राज्य लोक सेवा आयोग के व्यय संबंधित राज्य की संचित निधि पर भारित होते हैं।
इसी प्रकार संघ लोक सेवा आयोग के व्यय भारत की संचित निधि पर भारित होते हैं।
लोक सेवा आयोग में सदस्यों की संख्या
संविधान में 10 सदस्य निश्चित नहीं
भारतीय संविधान यह निर्धारित नहीं करता कि प्रत्येक लोक सेवा आयोग में अध्यक्ष के अतिरिक्त हमेशा ठीक 10 सदस्य ही होंगे।
संविधान का अनुच्छेद 318 राष्ट्रपति या राज्यपाल को, जैसा लागू हो, आयोग के सदस्यों की संख्या और उनकी सेवा-शर्तों से संबंधित विनियम बनाने की शक्ति देता है।
इसलिए प्रतियोगी परीक्षा में “लोक सेवा आयोग = अध्यक्ष + अनिवार्य 10 सदस्य” को सार्वभौमिक संवैधानिक तथ्य नहीं मानना चाहिए।
संघ लोक सेवा आयोग की प्रथम महिला अध्यक्ष
रोज मिलियन बैथ्यू
रोज मिलियन बैथ्यू संघ लोक सेवा आयोग की प्रथम महिला अध्यक्ष थीं।
उन्होंने 1992 से 1996 तक संघ लोक सेवा आयोग का नेतृत्व किया।
🎯 परीक्षा तथ्य
संघ लोक सेवा आयोग की प्रथम महिला अध्यक्ष — रोज मिलियन बैथ्यू।
राजमन्नार समिति और अखिल भारतीय सेवाएँ
राज्य स्वायत्तता से संबंधित सुझाव
तमिलनाडु सरकार द्वारा गठित राजमन्नार समिति केंद्र-राज्य संबंधों में राज्यों को अधिक स्वायत्तता देने के पक्ष में थी।
इसने अखिल भारतीय सेवाओं की व्यवस्था पर भी गंभीर पुनर्विचार और राज्यों की भूमिका मजबूत करने से संबंधित सुझाव दिए।
प्रतियोगी परीक्षा की कई पुस्तकों में इसके साथ भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा को समाप्त करने की सिफारिश वाला तथ्य दिया जाता है।
इसे व्यापक संदर्भ में याद रखें—राजमन्नार समिति का मूल रुख केंद्र की प्रशासनिक पकड़ कम कर राज्यों की स्वायत्तता बढ़ाना था।
भारत का लोकपाल
लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013
लोकपाल केंद्र स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच से संबंधित एक वैधानिक संस्था है।
इसका गठन लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के अंतर्गत किया गया।
लोकपाल में एक अध्यक्ष और अधिकतम आठ अन्य सदस्य हो सकते हैं।
इन सदस्यों में कम से कम 50 प्रतिशत न्यायिक सदस्य होने चाहिए।
लोकपाल के सदस्यों में कम से कम 50 प्रतिशत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और महिलाओं में से होने की वैधानिक व्यवस्था है।
लोकपाल की चयन समिति
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता
लोकपाल के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा चयन समिति की सिफारिश पर की जाती है।
चयन समिति का अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है।
इसमें लोकसभा अध्यक्ष सदस्य होता है।
लोकसभा में विपक्ष का नेता सदस्य होता है।
भारत का मुख्य न्यायाधीश अथवा उनके द्वारा नामित सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश सदस्य होता है।
एक प्रख्यात विधिवेत्ता भी चयन समिति में शामिल होता है।
⚠️ प्रथम लोकपाल की चयन समिति
चयन समिति की वैधानिक संरचना को याद करना अधिक सुरक्षित है। किसी विशेष वर्ष में पद रिक्त होने, विपक्ष के नेता की स्थिति अथवा मुख्य न्यायाधीश द्वारा नामित व्यक्ति के कारण वास्तविक बैठक की उपस्थिति अलग हो सकती है।
भारत के प्रथम लोकपाल
न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष
राष्ट्रपति ने 19 मार्च 2019 को न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष को भारत के प्रथम लोकपाल अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया।
उन्होंने 23 मार्च 2019 को पद की शपथ ली।
उनके साथ चार न्यायिक और चार गैर-न्यायिक सदस्य भी नियुक्त किए गए।
🎯 याद रखें
भारत के प्रथम लोकपाल — न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष — 2019।
लोकपाल का कार्यकाल
5 वर्ष या 70 वर्ष
लोकपाल के अध्यक्ष और सदस्य का कार्यकाल कानून द्वारा निर्धारित है।
सामान्य परीक्षा तथ्य के अनुसार कार्यकाल 5 वर्ष अथवा 70 वर्ष की आयु, जो पहले हो के रूप में याद किया जाता है।
लोकपाल वैधानिक निकाय है, संवैधानिक निकाय नहीं।
लोकायुक्त
राज्य स्तर की भ्रष्टाचार-रोधी संस्था
लोकायुक्त राज्य स्तर पर सार्वजनिक पदाधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार एवं कदाचार संबंधी शिकायतों की जाँच से जुड़ी संस्था है।
लोकायुक्त की संरचना, नियुक्ति, अधिकार और रिपोर्ट प्रस्तुत करने की प्रक्रिया अलग-अलग राज्यों के कानूनों के अनुसार भिन्न हो सकती है।
इसलिए “हर राज्य का लोकायुक्त अपनी रिपोर्ट केवल राज्यपाल को ही देता है” को पूरे भारत के लिए एक समान सार्वभौमिक नियम नहीं माना जाना चाहिए।
महत्वपूर्ण भ्रम और सही तथ्य
एक बार में अंतिम सुधार
गलत: ठक्कर आयोग ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों की रिपोर्ट दी।
सही: ठक्कर आयोग इंदिरा गांधी की हत्या की जाँच से संबंधित था; दंगों की प्रमुख बाद की जाँच नानावटी आयोग ने की।
अधूरा: मंडल आयोग ने वर्तमान शिक्षा संस्थानों में 27 प्रतिशत आरक्षण लागू किया।
सही: उसकी प्रसिद्ध 27 प्रतिशत सिफारिश सरकारी सेवाओं/पदों में अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण से संबंधित थी; शिक्षा का वर्तमान ढाँचा बाद के संवैधानिक और वैधानिक विकास से भी जुड़ा है।
गलत: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग संवैधानिक निकाय है।
सही: यह मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 द्वारा स्थापित वैधानिक निकाय है।
पुराना: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष केवल सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश ही हो सकता है।
सही: वर्तमान कानून में भारत का मुख्य न्यायाधीश या सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश रह चुका व्यक्ति पात्र हो सकता है।
पुराना: राज्य मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष केवल उच्च न्यायालय का पूर्व मुख्य न्यायाधीश हो सकता है।
सही: वर्तमान व्यवस्था में उच्च न्यायालय का पूर्व मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश पात्र हो सकता है।
गलत: भारत में लोक सेवा आयोग पहली बार सीधे ली आयोग ने स्थापित कर दिया।
सही: 1919 के अधिनियम में प्रावधान आया; ली आयोग की सिफारिश के बाद पहला लोक सेवा आयोग 1926 में स्थापित हुआ।
गलत: प्रत्येक लोक सेवा आयोग में अध्यक्ष के अलावा निश्चित रूप से 10 सदस्य होते हैं।
सही: संविधान पूरे भारत के लिए ऐसी निश्चित संख्या तय नहीं करता।
अधूरा: लोकपाल = अध्यक्ष + 8 सदस्य अनिवार्य।
सही: कानून में अध्यक्ष + अधिकतम 8 सदस्य की व्यवस्था है।
अधूरा: प्रत्येक राज्य का लोकायुक्त अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को ही देता है।
सही: लोकायुक्त व्यवस्था राज्य कानूनों पर निर्भर करती है; रिपोर्ट प्रक्रिया राज्यवार अलग हो सकती है।
⚡ अंतिम पुनरावृत्ति
सच्चर समिति — 2005 — मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति — रिपोर्ट 2006।
मंडल आयोग — 1979 — बी. पी. मंडल — अन्य पिछड़ा वर्ग — 27 प्रतिशत आरक्षण की प्रमुख सिफारिश।
ठक्कर आयोग — 1984 — इंदिरा गांधी की हत्या की जाँच।
वेंकटचलैया आयोग — 2000 — संविधान की कार्यप्रणाली की समीक्षा — रिपोर्ट 2002।
दिनेश गोस्वामी समिति — 1990 — चुनाव सुधार।
नानावटी आयोग — 2000 — 1984 के सिख-विरोधी दंगे — रिपोर्ट 2005।
कोठारी आयोग — 1964–66 — शिक्षा — 10+2+3।
श्रीकृष्ण आयोग — 1993 — मुंबई दंगे 1992–93 — रिपोर्ट 1998।
राष्ट्रीय पुलिस आयोग — 1977 — पुलिस सुधार।
न्यायमूर्ति वर्मा समिति — 2012 — महिलाओं के विरुद्ध यौन अपराधों से संबंधित कानूनों में सुधार।
वोहरा समिति — 1993 — अपराधियों, माफिया, नौकरशाही और राजनीति के गठजोड़ का अध्ययन।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग — 12 अक्टूबर 1993 — वैधानिक निकाय।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का आधार — मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष — भारत का मुख्य न्यायाधीश या सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश रह चुका व्यक्ति।
राज्य मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष — उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश रह चुका व्यक्ति।
भारत शासन अधिनियम 1919 — लोक सेवा आयोग का प्रावधान।
प्रथम लोक सेवा आयोग — 1 अक्टूबर 1926।
प्रथम अध्यक्ष — सर रॉस बार्कर।
संघ एवं राज्य लोक सेवा आयोग — अनुच्छेद 315 से 323।
राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्य — राज्यपाल द्वारा नियुक्त।
राज्य लोक सेवा आयोग का व्यय — राज्य की संचित निधि पर भारित।
संघ लोक सेवा आयोग की प्रथम महिला अध्यक्ष — रोज मिलियन बैथ्यू।
लोकपाल — लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 — वैधानिक संस्था।
लोकपाल — अध्यक्ष + अधिकतम 8 सदस्य।
लोकपाल चयन समिति का अध्यक्ष — प्रधानमंत्री।
प्रथम लोकपाल — न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष — नियुक्ति 19 मार्च 2019 — शपथ 23 मार्च 2019।
लोकपाल कार्यकाल — 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु, जो पहले हो।
सबसे छोटा क्रम — सच्चर मुस्लिम → मंडल पिछड़ा वर्ग → ठक्कर इंदिरा हत्या → गोस्वामी चुनाव → नानावटी 1984 दंगे → कोठारी शिक्षा → श्रीकृष्ण मुंबई → पुलिस आयोग सुधार → वर्मा महिला सुरक्षा → वोहरा अपराध-राजनीति।