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भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेद
IMPORTANT ARTICLES OF INDIAN CONSTITUTION

भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेद

राष्ट्रपति, संसद, न्यायपालिका, राज्यपाल, संवैधानिक निकाय और आपातकालीन प्रावधान

महत्वपूर्ण संवैधानिक अनुच्छेद

भारतीय संविधान में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, संसद, सर्वोच्च न्यायालय, राज्यपाल, राज्य विधानमंडल, उच्च न्यायालय, संवैधानिक निकाय, केंद्र-राज्य संबंध, आरक्षण तथा आपातकाल से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण अनुच्छेद दिए गए हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुच्छेद संख्या और उससे संबंधित विषय की सही जोड़ी विशेष रूप से पूछी जाती है।

01

राष्ट्रपति से संबंधित अनुच्छेद

पद, निर्वाचन, कार्यकाल और संवैधानिक शक्तियाँ

अनुच्छेद 52 — भारत का राष्ट्रपति। इस अनुच्छेद में कहा गया है कि भारत का एक राष्ट्रपति होगा। इसे “कार्यपालिका की शक्ति” कहना सही नहीं है। संघ की कार्यपालिका शक्ति का प्रावधान अनुच्छेद 53 में है।

अनुच्छेद 53 — संघ की कार्यपालिका शक्ति। संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होती है और वह इसका प्रयोग संविधान के अनुसार स्वयं अथवा अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करता है।

अनुच्छेद 54 — राष्ट्रपति का निर्वाचन। राष्ट्रपति का चुनाव निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। इसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य तथा राज्यों और विधानमंडल वाले संबंधित केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं।

अनुच्छेद 56 — राष्ट्रपति की पदावधि। राष्ट्रपति अपने पद ग्रहण करने की तिथि से सामान्यतः 5 वर्ष तक पद पर रहता है।

अनुच्छेद 60 — राष्ट्रपति की शपथ या प्रतिज्ञान। राष्ट्रपति को शपथ भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिलाई जाती है। उनकी अनुपस्थिति में सर्वोच्च न्यायालय के उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायाधीश द्वारा शपथ दिलाई जाती है।

अनुच्छेद 61 — राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया। संविधान के उल्लंघन के लिए राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाया जा सकता है। महाभियोग की प्रक्रिया संसद के किसी भी सदन से प्रारंभ हो सकती है।

अनुच्छेद 72 — राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति। राष्ट्रपति को कुछ मामलों में दंड माफ करने, स्थगित करने, कम करने या दंड के स्वरूप में परिवर्तन करने की शक्ति प्राप्त है। मृत्युदंड के मामलों में भी राष्ट्रपति क्षमादान दे सकता है।

अनुच्छेद 85 — संसद के सत्र, सत्रावसान और लोकसभा का विघटन। राष्ट्रपति संसद के प्रत्येक सदन को समय-समय पर बुलाता है, सत्रावसान कर सकता है तथा लोकसभा को भंग कर सकता है। संसद के दो सत्रों के बीच छह महीने से अधिक का अंतर नहीं हो सकता।

अनुच्छेद 123 — राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति। जब संसद के दोनों सदन एक साथ सत्र में न हों और तत्काल कानून बनाने की आवश्यकता हो, तब राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकता है।

अनुच्छेद 143 — सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श। राष्ट्रपति किसी ऐसे विधिक या तथ्यात्मक प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय की राय मांग सकता है जो सार्वजनिक महत्व का हो।

⚠️ महत्वपूर्ण सुधार

अनुच्छेद 52 = राष्ट्रपति का पद, जबकि अनुच्छेद 53 = संघ की कार्यपालिका शक्ति

02

उपराष्ट्रपति से संबंधित अनुच्छेद

पद, सभापति और कार्यकाल

अनुच्छेद 63 — भारत का उपराष्ट्रपति। इस अनुच्छेद में भारत में उपराष्ट्रपति के पद का प्रावधान किया गया है।

अनुच्छेद 64 — उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होगा। उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सदस्य नहीं होता, बल्कि उसका पदेन सभापति होता है।

अनुच्छेद 66 — उपराष्ट्रपति का निर्वाचन। उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से बने निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। इसमें निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्य भाग लेते हैं।

अनुच्छेद 67 — उपराष्ट्रपति की पदावधि। उपराष्ट्रपति का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष होता है।

03

केंद्रीय मंत्रिपरिषद

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के संबंध

अनुच्छेद 74 — राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद। राष्ट्रपति की सहायता और सलाह के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद होती है। राष्ट्रपति सामान्यतः मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करता है।

अनुच्छेद 75 — प्रधानमंत्री और मंत्रियों से संबंधित प्रावधान। प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है। मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।

अनुच्छेद 78 — राष्ट्रपति को जानकारी देने संबंधी प्रधानमंत्री के कर्तव्य। प्रधानमंत्री का दायित्व है कि वह मंत्रिपरिषद के निर्णयों और प्रशासन से संबंधित जानकारी राष्ट्रपति को उपलब्ध कराए।

04

प्रमुख संवैधानिक पद एवं निकाय

महान्यायवादी से निर्वाचन आयोग तक

अनुच्छेद 76 — भारत का महान्यायवादी। महान्यायवादी भारत सरकार का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है। उसकी नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।

अनुच्छेद 148 — भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक। यह संघ और राज्यों के सरकारी वित्तीय खातों तथा सार्वजनिक धन के व्यय की लेखापरीक्षा से संबंधित प्रमुख संवैधानिक प्राधिकरण है।

अनुच्छेद 280 — वित्त आयोग। राष्ट्रपति सामान्यतः प्रत्येक पाँच वर्ष पर वित्त आयोग का गठन करता है। यह केंद्र और राज्यों के बीच करों के वितरण आदि के संबंध में सिफारिश करता है।

अनुच्छेद 315 — संघ लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा आयोग। संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोगों की संवैधानिक व्यवस्था इसी अनुच्छेद में है।

अनुच्छेद 324 — निर्वाचन आयोग। संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति निर्वाचन आयोग में निहित है।

05

संसद से संबंधित महत्वपूर्ण अनुच्छेद

राज्यसभा, लोकसभा, विधेयक और वित्त

अनुच्छेद 79 — संसद का गठन। संसद राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा से मिलकर बनती है।

अनुच्छेद 80 — राज्यसभा की संरचना। इसमें राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों तथा राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्यों का प्रावधान है।

अनुच्छेद 81 — लोकसभा की संरचना। लोकसभा में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधित्व से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।

अनुच्छेद 89 — राज्यसभा के सभापति और उपसभापति। भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है और राज्यसभा अपने सदस्यों में से एक उपसभापति चुनती है।

अनुच्छेद 93 — लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष। लोकसभा अपने सदस्यों में से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करती है।

अनुच्छेद 100 — सदनों में मतदान। सामान्यतः निर्णय उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से होता है। मत बराबर होने पर सभापति या अध्यक्ष निर्णायक मत दे सकता है।

अनुच्छेद 105 — संसद के सदनों, सदस्यों और समितियों की शक्तियाँ, विशेषाधिकार और उन्मुक्तियाँ। इसे केवल “संसद की विशेष शक्ति” कहना अधूरा है।

अनुच्छेद 108 — संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक। कुछ सामान्य विधेयकों पर दोनों सदनों में गतिरोध होने पर राष्ट्रपति संयुक्त बैठक बुला सकता है। धन विधेयक और संविधान संशोधन विधेयक पर संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं है।

अनुच्छेद 110 — धन विधेयक की परिभाषा। कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इस प्रश्न पर लोकसभा अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होता है।

अनुच्छेद 112 — वार्षिक वित्तीय विवरण। इसे सामान्यतः केंद्रीय बजट से जोड़ा जाता है। इसमें आगामी वित्तीय वर्ष के लिए सरकार की अनुमानित प्राप्तियों और व्यय का विवरण संसद के समक्ष रखा जाता है।

अनुच्छेद 117 — वित्तीय विधेयकों से संबंधित विशेष प्रावधान। इसमें वित्तीय विधेयकों को प्रस्तुत करने और उन पर विचार से संबंधित विशेष संवैधानिक नियम दिए गए हैं।

06

सर्वोच्च न्यायालय

गठन, मूल अधिकार-क्षेत्र और निर्णय की समीक्षा

अनुच्छेद 124 — सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना और गठन। इसमें भारत के सर्वोच्च न्यायालय तथा उसके न्यायाधीशों से संबंधित मूल संवैधानिक प्रावधान दिए गए हैं।

अनुच्छेद 131 — सर्वोच्च न्यायालय का मूल अधिकार-क्षेत्र। संघ और राज्यों अथवा राज्यों के बीच कुछ संवैधानिक विवाद सीधे सर्वोच्च न्यायालय में लाए जा सकते हैं।

अनुच्छेद 137 — सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपने निर्णय या आदेश की पुनर्विचार शक्ति। इसे सामान्य रूप से “कानून की न्यायिक समीक्षा” कहना सही नहीं है।

अनुच्छेद 32 — संवैधानिक उपचार का अधिकार। मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सीधे सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार देता है। डॉ. बी. आर. आंबेडकर ने इसे संविधान का “हृदय और आत्मा” कहा था।

⚠️ अनुच्छेद 137 में भ्रम न करें

अनुच्छेद 137 = सर्वोच्च न्यायालय अपने निर्णय या आदेश की समीक्षा कर सकता है।

07

राज्यपाल से संबंधित अनुच्छेद

पद, कार्यपालिका शक्ति और क्षमादान

अनुच्छेद 152 — राज्य से संबंधित परिभाषा। संविधान के भाग VI के प्रयोजन के लिए “राज्य” शब्द की परिभाषा से संबंधित है।

अनुच्छेद 153 — राज्यों के लिए राज्यपाल। प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा। एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है।

अनुच्छेद 154 — राज्य की कार्यपालिका शक्ति। राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होती है।

अनुच्छेद 155 — राज्यपाल की नियुक्ति। राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

अनुच्छेद 156 — राज्यपाल की पदावधि। सामान्यतः राज्यपाल का कार्यकाल पाँच वर्ष होता है, लेकिन वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है।

अनुच्छेद 161 — राज्यपाल की क्षमादान शक्ति। राज्य के कार्यपालिका क्षेत्र से संबंधित कानूनों के अंतर्गत अपराधों के मामलों में राज्यपाल दंड में राहत आदि दे सकता है।

08

राज्य मंत्रिपरिषद

मुख्यमंत्री, मंत्री और महाधिवक्ता

अनुच्छेद 163 — राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद। राज्य में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद होती है, जो राज्यपाल को उसके संवैधानिक कार्यों में सहायता और सलाह देती है।

अनुच्छेद 164 — मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति। मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करता है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है।

अनुच्छेद 165 — राज्य का महाधिवक्ता। महाधिवक्ता राज्य सरकार का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है। उसकी नियुक्ति राज्यपाल करता है।

09

राज्य विधानमंडल

विधानसभा और विधानपरिषद

अनुच्छेद 168 — राज्यों में विधानमंडल का गठन। राज्य विधानमंडल राज्यपाल तथा एक या दो सदनों से मिलकर बन सकता है।

अनुच्छेद 169 — विधानपरिषद का गठन या समाप्ति। संबंधित राज्य की विधानसभा विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित करे तो संसद कानून बनाकर विधानपरिषद का गठन या समाप्ति कर सकती है।

अनुच्छेद 170 — विधानसभाओं की संरचना। राज्य विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।

10

उच्च न्यायालय

गठन और रिट जारी करने की शक्ति

अनुच्छेद 214 — राज्यों के लिए उच्च न्यायालय। प्रत्येक राज्य के लिए उच्च न्यायालय का संवैधानिक प्रावधान है, यद्यपि संसद दो या अधिक राज्यों के लिए साझा उच्च न्यायालय की व्यवस्था कर सकती है।

अनुच्छेद 226 — उच्च न्यायालय की रिट जारी करने की शक्ति। उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ अन्य विधिक अधिकारों की रक्षा के लिए भी रिट जारी कर सकता है। इसलिए इसे केवल मौलिक अधिकारों के संरक्षण तक सीमित समझना सही नहीं है।

उच्च न्यायालय पाँच प्रमुख रिट जारी कर सकता है—बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण और अधिकार-पृच्छा।

11

केंद्र-राज्य संबंध और वित्त

राज्य सूची, नदी विवाद और सरकारी निधियाँ

अनुच्छेद 249 — राष्ट्रीय हित में राज्य सूची पर संसद की कानून बनाने की शक्ति। यदि राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित करे कि राष्ट्रीय हित में ऐसा करना आवश्यक है, तो संसद राज्य सूची के विषय पर कानून बना सकती है।

अनुच्छेद 262 — अंतरराज्यीय नदी जल विवाद। संसद अंतरराज्यीय नदियों और नदी घाटियों के जल से संबंधित विवादों के निपटारे के लिए कानून बना सकती है।

अनुच्छेद 263 — अंतरराज्यीय परिषद। राष्ट्रपति आवश्यकता होने पर राज्यों के बीच समन्वय और विवादों पर विचार के लिए अंतरराज्यीय परिषद की स्थापना कर सकता है।

अनुच्छेद 266 — भारत और राज्यों की संचित निधि तथा लोक लेखा। केंद्र और राज्यों के सरकारी राजस्व और ऋण आदि के लिए संचित निधि की व्यवस्था इसी अनुच्छेद में है।

अनुच्छेद 267 — आकस्मिकता निधि। इसे “आपातकालीन निधि” भी कहा जाता है, लेकिन संवैधानिक नाम आकस्मिकता निधि है।

12

अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग

प्रतिनिधित्व और संवैधानिक आयोग

अनुच्छेद 330 — लोकसभा में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों का आरक्षण।

अनुच्छेद 332 — राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों का आरक्षण।

अनुच्छेद 335 — सेवाओं और पदों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के दावों का विचार। इसे सीधे “सरकारी सेवा में आरक्षण का अनुच्छेद” कहना अधूरा है। यह प्रशासनिक दक्षता बनाए रखते हुए सेवाओं और पदों में उनके दावों पर विचार से संबंधित है।

अनुच्छेद 338 — राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग।

अनुच्छेद 338A — राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग।

अनुच्छेद 338B — राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग। इसे संवैधानिक दर्जा 102वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2018 द्वारा दिया गया था, न कि 103वें संशोधन द्वारा।

⚠️ महत्वपूर्ण सुधार

अनुच्छेद 338B = राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग = 102वाँ संविधान संशोधन, 2018।

13

राजभाषा और पंचायत

हिंदी भाषा और स्थानीय स्वशासन

अनुच्छेद 343 — संघ की राजभाषा। संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी। संघ के राजकीय प्रयोजनों में प्रयुक्त अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप होगा।

अनुच्छेद 243 से 243O — पंचायतों से संबंधित संवैधानिक प्रावधान। पंचायतों से संबंधित पूरा अध्याय संविधान के भाग IX में है। इसलिए इसे केवल “अनुच्छेद 243A से O” कहना अधूरा है।

अनुच्छेद 243A — ग्राम सभा। ग्राम सभा को राज्य विधानमंडल द्वारा कानून के माध्यम से प्रदान की गई शक्तियाँ और कार्य प्राप्त हो सकते हैं।

अनुच्छेद 243B — पंचायतों का गठन।

अनुच्छेद 243D — पंचायतों में आरक्षण।

अनुच्छेद 243E — पंचायतों की अवधि। सामान्य कार्यकाल पाँच वर्ष है।

14

आपातकालीन प्रावधान

राष्ट्रीय, राज्य और वित्तीय आपातकाल

अनुच्छेद 352 — राष्ट्रीय आपातकाल। युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया जा सकता है।

अनुच्छेद 356 — राज्यों में संवैधानिक तंत्र विफल होने पर राष्ट्रपति शासन। यदि राष्ट्रपति को संतोष हो कि किसी राज्य की सरकार संविधान के अनुसार नहीं चलाई जा सकती, तो राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।

अनुच्छेद 360 — वित्तीय आपातकाल। यदि भारत या उसके किसी भाग की वित्तीय स्थिरता या साख को खतरा हो तो वित्तीय आपातकाल घोषित किया जा सकता है। भारत में अब तक वित्तीय आपातकाल घोषित नहीं किया गया है।

अनुच्छेद 368 — संविधान संशोधन की शक्ति और प्रक्रिया। संसद संविधान में संशोधन करने के लिए निर्धारित विशेष प्रक्रिया का पालन करती है। कुछ संघीय प्रावधानों में कम-से-कम आधे राज्यों की स्वीकृति भी आवश्यक होती है।

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सबसे महत्वपूर्ण भ्रम और सही तथ्य

परीक्षा में गलत जोड़ी से बचें

गलत: अनुच्छेद 52 — कार्यपालिका शक्ति। सही: 52 — राष्ट्रपति का पद; 53 — संघ की कार्यपालिका शक्ति।

अधूरा: अनुच्छेद 85 — केवल लोकसभा का सत्र और विघटन। सही: संसद के दोनों सदनों के सत्र और सत्रावसान तथा लोकसभा का विघटन।

अधूरा: अनुच्छेद 100 — केवल बराबर मत होने पर निर्णायक मत। सही: संसद के सदनों में मतदान, रिक्तियों के बावजूद कार्य करने की शक्ति और गणपूर्ति से संबंधित प्रावधान भी इसी अनुच्छेद में हैं।

अधूरा: अनुच्छेद 105 — संसद की विशेष शक्ति। सही: संसद के सदनों, सदस्यों और समितियों की शक्तियाँ, विशेषाधिकार और उन्मुक्तियाँ।

गलत: अनुच्छेद 137 — न्यायिक समीक्षा। सही: सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपने निर्णय या आदेश का पुनर्विचार।

अधूरा: अनुच्छेद 226 — केवल मौलिक अधिकारों के लिए रिट। सही: मौलिक अधिकारों के साथ अन्य विधिक अधिकारों के लिए भी रिट।

अधूरा: अनुच्छेद 267 — आपातकालीन निधि। सही संवैधानिक नाम: आकस्मिकता निधि।

अधूरा: अनुच्छेद 335 — सेवाओं में अनुसूचित जाति/जनजाति आरक्षण। सही: सेवाओं और पदों में उनके दावों पर प्रशासनिक दक्षता के अनुरूप विचार।

गलत: अनुच्छेद 338B — 103वाँ संशोधन। सही: राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग — 102वाँ संविधान संशोधन, 2018।

अधूरा: अनुच्छेद 243A से O — ग्राम पंचायत। सही: पंचायत संबंधी प्रावधान अनुच्छेद 243 से 243O तक हैं।

16

एक नज़र में अनुच्छेद

त्वरित परीक्षा पुनरावृत्ति

अनुच्छेद मुख्य विषय
52भारत का राष्ट्रपति
53संघ की कार्यपालिका शक्ति
54राष्ट्रपति का निर्वाचन
56राष्ट्रपति की पदावधि
60राष्ट्रपति की शपथ
61राष्ट्रपति पर महाभियोग
63उपराष्ट्रपति
64राज्यसभा का पदेन सभापति
67उपराष्ट्रपति की पदावधि
72राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति
74राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने वाली मंत्रिपरिषद
76भारत का महान्यायवादी
78प्रधानमंत्री के राष्ट्रपति के प्रति कर्तव्य
79संसद का गठन
80राज्यसभा की संरचना
81लोकसभा की संरचना
85संसद के सत्र और लोकसभा का विघटन
89राज्यसभा का सभापति और उपसभापति
93लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
100सदनों में मतदान और निर्णायक मत
105संसदीय विशेषाधिकार
108संयुक्त बैठक
110धन विधेयक
112वार्षिक वित्तीय विवरण
117वित्तीय विधेयक
123राष्ट्रपति की अध्यादेश शक्ति
124सर्वोच्च न्यायालय का गठन
131सर्वोच्च न्यायालय का मूल अधिकार-क्षेत्र
137सर्वोच्च न्यायालय की पुनर्विचार शक्ति
143राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श
148नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक
153राज्यपाल
154राज्य की कार्यपालिका शक्ति
155राज्यपाल की नियुक्ति
161राज्यपाल की क्षमादान शक्ति
163राज्य मंत्रिपरिषद
164मुख्यमंत्री और मंत्री
165राज्य का महाधिवक्ता
168राज्य विधानमंडल
169विधानपरिषद का गठन या समाप्ति
214उच्च न्यायालय
226उच्च न्यायालय की रिट शक्ति
249राष्ट्रीय हित में राज्य सूची पर संसद का कानून
262अंतरराज्यीय नदी जल विवाद
263अंतरराज्यीय परिषद
266संचित निधि
267आकस्मिकता निधि
280वित्त आयोग
315लोक सेवा आयोग
324निर्वाचन आयोग
330लोकसभा में अनुसूचित जाति/जनजाति आरक्षण
332विधानसभा में अनुसूचित जाति/जनजाति आरक्षण
335सेवाओं और पदों में अनुसूचित जाति/जनजाति के दावे
338राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग
338Aराष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग
338Bराष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग
343संघ की राजभाषा
352राष्ट्रीय आपातकाल
356राष्ट्रपति शासन
360वित्तीय आपातकाल
368संविधान संशोधन

⚡ अंतिम त्वरित पुनरावृत्ति

52 — राष्ट्रपति का पद; 53 — संघ की कार्यपालिका शक्ति।

54 — राष्ट्रपति निर्वाचन; 56 — कार्यकाल; 60 — शपथ; 61 — महाभियोग।

63 — उपराष्ट्रपति; 64 — राज्यसभा का पदेन सभापति; 67 — पदावधि।

72 — राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति; 161 — राज्यपाल की क्षमादान शक्ति।

74 — केंद्रीय मंत्रिपरिषद; 78 — राष्ट्रपति के प्रति प्रधानमंत्री के कर्तव्य।

76 — महान्यायवादी; 148 — नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक; 280 — वित्त आयोग।

315 — लोक सेवा आयोग; 324 — निर्वाचन आयोग।

79 — संसद; 80 — राज्यसभा; 81 — लोकसभा।

89 — राज्यसभा सभापति; 93 — लोकसभा अध्यक्ष।

108 — संयुक्त बैठक; 110 — धन विधेयक; 112 — वार्षिक वित्तीय विवरण।

123 — राष्ट्रपति की अध्यादेश शक्ति।

124 — सर्वोच्च न्यायालय; 131 — मूल अधिकार-क्षेत्र; 137 — पुनर्विचार शक्ति।

143 — राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श।

153 — राज्यपाल; 154 — राज्य की कार्यपालिका शक्ति; 155 — नियुक्ति।

163 — राज्य मंत्रिपरिषद; 164 — मुख्यमंत्री; 165 — महाधिवक्ता।

168 — राज्य विधानमंडल; 169 — विधानपरिषद का गठन या समाप्ति।

214 — उच्च न्यायालय; 226 — रिट जारी करने की शक्ति।

249 — राज्य सूची पर संसद की विशेष कानून बनाने की शक्ति।

262 — नदी जल विवाद; 263 — अंतरराज्यीय परिषद।

266 — संचित निधि; 267 — आकस्मिकता निधि।

330 — लोकसभा में अनुसूचित जाति/जनजाति आरक्षण; 332 — विधानसभा में आरक्षण।

338 — अनुसूचित जाति आयोग; 338A — अनुसूचित जनजाति आयोग; 338B — पिछड़ा वर्ग आयोग।

343 — संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी।

243 से 243O — पंचायतों से संबंधित प्रावधान।

352 — राष्ट्रीय आपातकाल; 356 — राष्ट्रपति शासन; 360 — वित्तीय आपातकाल।

368 — संविधान संशोधन की शक्ति और प्रक्रिया।

📘 अध्ययन नोट

भारतीय संविधान के प्रत्येक अनुच्छेद का विस्तृत अध्ययन अलग अध्याय “भारतीय संविधान के सम्पूर्ण अनुच्छेद” में किया जा सकता है।

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