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भारत के प्रमुख राज्यवार मेले एवं उत्सव
STATES & FESTIVALS OF INDIA

भारत के प्रमुख राज्यवार मेले एवं उत्सव

राज्य, केंद्रशासित प्रदेश, जनजातीय पर्व, धार्मिक मेले और सांस्कृतिक महोत्सव

भारत के राज्यवार मेले एवं उत्सव

भारत के अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में धार्मिक, कृषि, फसल, जनजातीय, सांस्कृतिक और पर्यटन से जुड़े अनेक मेले एवं उत्सव मनाए जाते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर उत्सव–राज्य, मेला–स्थान और जनजाति–उत्सव का मिलान पूछा जाता है।

कुछ नाम वास्तव में त्योहार न होकर लोकनृत्य, धार्मिक अनुष्ठान, खेल या आधुनिक पर्यटन आयोजन हैं। ऐसे नामों को उनकी सही पहचान के साथ याद करना अधिक उपयोगी है।

01

उत्तर प्रदेश

प्रयागराज, मेरठ, बुंदेलखंड और ब्रज क्षेत्र के प्रमुख आयोजन

कुंभ महोत्सव — प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में कुंभ का आयोजन प्रयागराज में गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम पर होता है। कुंभ के चार परंपरागत स्थल हैं—प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक; इनमें हरिद्वार उत्तराखंड, उज्जैन मध्य प्रदेश और नासिक महाराष्ट्र में हैं। इसलिए चारों स्थानों को उत्तर प्रदेश में नहीं रखना चाहिए।

शाकंभरी देवी उत्सव: सहारनपुर जिले में स्थित शाकंभरी देवी शक्तिपीठ से संबंधित मेला और धार्मिक आयोजन उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण स्थानीय धार्मिक उत्सवों में गिना जाता है।

कजली महोत्सव: बुंदेलखंड, विशेषकर महोबा क्षेत्र की कजली परंपरा से जुड़ा सांस्कृतिक उत्सव है। इसमें लोकगीत और बुंदेली संस्कृति प्रमुख होती है।

श्रावणी मेला: श्रावण मास में उत्तर प्रदेश के अनेक शिवालयों में स्थानीय मेले लगते हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध श्रावणी मेला सुल्तानगंज, बिहार से देवघर, झारखंड की कांवर यात्रा से विशेष रूप से जुड़ा है। इसलिए इसे केवल उत्तर प्रदेश का प्रमुख राज्य-विशिष्ट मेला मानना उचित नहीं है।

नौचंदी मेला: मेरठ में आयोजित प्रसिद्ध ऐतिहासिक मेला है। यह धार्मिक-सांस्कृतिक समन्वय और व्यापारिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध है।

कालिंजर महोत्सव: बांदा जिले के ऐतिहासिक कालिंजर दुर्ग में बुंदेलखंड की संस्कृति, लोककला, संगीत और इतिहास को प्रदर्शित करने वाला महोत्सव आयोजित किया जाता है।

आयुर्वेद महोत्सव: उत्तर प्रदेश में समय-समय पर आयुर्वेद से जुड़े सरकारी और संस्थागत आयोजन होते हैं। इसे प्राचीन राज्य-विशिष्ट लोकपर्व की अपेक्षा आधुनिक स्वास्थ्य एवं आयुर्वेदिक आयोजन के रूप में समझना अधिक सही है।

बटेश्वर मेला: आगरा जिले के बटेश्वर में यमुना के किनारे आयोजित प्रसिद्ध धार्मिक और परंपरागत पशु मेला है।

ढाई घाट मेला: शाहजहांपुर क्षेत्र के ढाई घाट से जुड़ा स्थानीय धार्मिक मेला है। बटेश्वर और ढाई घाट दो अलग मेले हैं; इन्हें एक संयुक्त नाम न समझें।

🎯 बहुत महत्वपूर्ण

कुंभ — प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन, नासिक। उत्तर प्रदेश वाला स्थल — प्रयागराज।

02

राजस्थान

लोकसंस्कृति, रेगिस्तान और धार्मिक मेलों का राज्य

गणगौर उत्सव: शिव और पार्वती के स्वरूप ईसर–गौरी की पूजा से जुड़ा राजस्थान का अत्यंत महत्वपूर्ण उत्सव है।

चंद्रभागा मेला: झालावाड़ जिले के झालरापाटन क्षेत्र में चंद्रभागा नदी के किनारे आयोजित प्रसिद्ध धार्मिक एवं पशु मेला है।

मोमासर उत्सव: बीकानेर जिले के मोमासर क्षेत्र में राजस्थानी लोककला और ग्रामीण संस्कृति से जुड़ा सांस्कृतिक आयोजन होता है। इसे गणगौर या पुष्कर जैसे प्राचीन राज्यव्यापी धार्मिक पर्व की श्रेणी में न रखें।

मरु महोत्सव: जैसलमेर में आयोजित राजस्थान का प्रसिद्ध रेगिस्तानी सांस्कृतिक महोत्सव है।

पुष्कर मेला: अजमेर जिले के पुष्कर में आयोजित विश्वप्रसिद्ध धार्मिक और पशु मेला है।

मत्स्य उत्सव: अलवर में आयोजित सांस्कृतिक महोत्सव है।

बूंदी उत्सव: बूंदी की कला, लोकसंस्कृति और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा पर्यटन-सांस्कृतिक उत्सव है।

कोलायत मेला: बीकानेर जिले के कोलायत में कपिल मुनि से जुड़ा प्रसिद्ध धार्मिक मेला है।

अन्य महत्वपूर्ण: राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं में तीज, मारवाड़ महोत्सव, बीकानेर ऊंट महोत्सव और मेवाड़ उत्सव भी महत्वपूर्ण हैं।

03

मेघालय

गारो, खासी और जयंतिया समुदायों के उत्सव

वांगला: गारो समुदाय का प्रसिद्ध फसल कटाई के बाद मनाया जाने वाला उत्सव है। इसे सौ ढोलों के उत्सव के रूप में भी जाना जाता है।

स्ट्रॉबेरी उत्सव: मेघालय में स्ट्रॉबेरी उत्पादन और पर्यटन को बढ़ावा देने से जुड़ा आधुनिक कृषि-पर्यटन महोत्सव है।

नॉन्गक्रेम: खासी समुदाय का महत्वपूर्ण धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सव है।

बेहदीनखलम: जयंतिया समुदाय का प्रसिद्ध उत्सव है, जिसका संबंध रोग और विपत्ति से रक्षा की पारंपरिक मान्यताओं तथा सामुदायिक समृद्धि से है।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण: शिलांग में आयोजित चेरी ब्लॉसम महोत्सव मेघालय का प्रसिद्ध आधुनिक पर्यटन-सांस्कृतिक आयोजन है।

04

कर्नाटक

विजयनगर विरासत, कोडव संस्कृति और पारंपरिक खेल

हम्पी उत्सव: विजयनगर साम्राज्य की ऐतिहासिक राजधानी हम्पी की सांस्कृतिक विरासत को समर्पित प्रमुख उत्सव है।

करगा: विशेष रूप से बेंगलुरु करगा द्रौपदी से जुड़ा प्राचीन धार्मिक लोकउत्सव है।

उगादी: कर्नाटक सहित दक्कन के कई क्षेत्रों में नववर्ष के रूप में मनाया जाता है।

पट्टदकल उत्सव: पट्टदकल की चालुक्यकालीन विरासत से संबंधित नृत्य एवं सांस्कृतिक महोत्सव है।

कंबाला: तटीय कर्नाटक का पारंपरिक भैंसा-दौड़ खेल है। यह मूल रूप से त्योहार से जुड़ा ग्रामीण खेल है, केवल धार्मिक पर्व नहीं।

कैलपोध: कर्नाटक के कोडगु क्षेत्र की कोडव समुदाय से संबंधित पारंपरिक उत्सव परंपरा है।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण: मैसूर दशहरा कर्नाटक का अत्यंत प्रसिद्ध राज्योत्सव है और प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है।

05

मध्य प्रदेश

मालवा, बुंदेलखंड और जनजातीय परंपराएँ

काकसार: जनजातीय नृत्य और उत्सवी परंपरा से जुड़ा नाम है। यह विशेष रूप से गोंड–मारिया सांस्कृतिक क्षेत्र से संबंधित माना जाता है। मध्य प्रदेश और पुराने व्यापक मध्य भारतीय जनजातीय सांस्कृतिक संदर्भों में इसका उल्लेख मिलता है।

मड़ई: जनजातीय मेला-उत्सव परंपरा है। वर्तमान समय में इसकी सबसे मजबूत पहचान छत्तीसगढ़ से है, लेकिन मध्य भारत की जनजातीय सांस्कृतिक परंपराओं में इसका व्यापक संबंध मिलता है।

पीर बुधन मेला: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के सांवरा क्षेत्र में मुस्लिम संत पीर बुधन की स्मृति से जुड़ा मेला है।

घड़ल्या: मालवा क्षेत्र की लोकपरंपरा है, जिसमें बालिकाएँ छिद्रयुक्त मिट्टी के घड़े और दीपक के साथ घर-घर जाकर लोकगीत गाती हैं।

रसनावा: मध्य प्रदेश के जनजातीय सांस्कृतिक उत्सवों में उल्लिखित परंपरा है और विशेष रूप से बैगा समुदाय से इसका संबंध बताया जाता है।

हरीरी: कुछ सामान्य ज्ञान सूचियों में मध्य प्रदेश के स्थानीय/जनजातीय पर्व के रूप में यह नाम मिलता है। इसे व्यापक राज्य-स्तरीय उत्सव की अपेक्षा स्थानीय परंपरा के रूप में पढ़ना अधिक सुरक्षित है।

अतिरिक्त अत्यंत महत्वपूर्ण: मध्य प्रदेश से खजुराहो नृत्य महोत्सव, तानसेन समारोह, भगोरिया हाट, लोकरंग और उज्जैन का सिंहस्थ कुंभ भी अवश्य याद रखें।

06

हिमाचल प्रदेश

लाहौल, किन्नौर, कुल्लू और पर्वतीय मेलों की परंपरा

डूंगरी महोत्सव: मनाली की हिडिंबा देवी परंपरा से जुड़ा स्थानीय उत्सव है।

माहा साजी: हिमाचल के कुछ पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय कृषि और ऋतु-परिवर्तन से जुड़े पर्व-नाम के रूप में इसका उल्लेख मिलता है। इसे राज्यव्यापी एकरूप पर्व न समझें।

पोरी उत्सव: लाहौल क्षेत्र का प्रसिद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव है।

हलड़ा: लाहौल क्षेत्र में नववर्ष/शीत ऋतु से जुड़ा प्रमुख पारंपरिक पर्व है।

गोची: लाहौल क्षेत्र का महत्वपूर्ण सामुदायिक पर्व है। इसे कई जगह गलत वर्तनी में “गोथी” लिखा जाता है; मानक नाम गोची अधिक प्रचलित है।

नलवाड़ी मेला: बिलासपुर का प्रसिद्ध पशु और सांस्कृतिक मेला है।

चैत्र नवरात्र मेला: हिमाचल के शक्तिपीठों—जैसे ज्वालामुखी, चिंतपूर्णी और नैना देवी—में चैत्र नवरात्र के अवसर पर बड़े मेले लगते हैं।

फुलैच उत्सव: किन्नौर का प्रसिद्ध फूलों का उत्सव है।

कोयल संगीत महोत्सव: स्थानीय/आधुनिक संगीत आयोजन के रूप में इस नाम का प्रयोग मिलता है; इसे कुल्लू दशहरा जैसे प्राचीन राज्योत्सव के बराबर न रखें।

साजो: किन्नौर क्षेत्र का पारंपरिक धार्मिक पर्व है।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण: कुल्लू दशहरा हिमाचल प्रदेश का सबसे अधिक परीक्षा-उपयोगी उत्सवों में से एक है।

07

केरल

ओणम, मंदिर उत्सव और नौका दौड़

अट्टुकाल पोंगाला: तिरुवनंतपुरम के अट्टुकाल भगवती मंदिर से जुड़ा विशाल धार्मिक आयोजन है, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएँ पोंगाला अर्पित करती हैं।

थेय्यम: उत्तरी केरल की प्रसिद्ध अनुष्ठानिक लोक-प्रदर्शन परंपरा है। इसे केवल सामान्य त्योहार कहना अधूरा है।

अरट्टू: केरल के अनेक मंदिरों में देवप्रतिमा के पवित्र स्नान और शोभायात्रा से जुड़ा धार्मिक अनुष्ठान/मंदिरोत्सव है।

विशु: केरल का महत्वपूर्ण नववर्ष और कृषि-ऋतु से जुड़ा पर्व है।

ओणम: केरल का प्रमुख फसल और सांस्कृतिक उत्सव है। इसकी मुख्य पारंपरिक अवधि अथम से तिरुवोणम तक लगभग 10 दिनों की मानी जाती है।

त्रिशूर पूरम: त्रिशूर के वडक्कुनाथन मंदिर से संबंधित विश्वप्रसिद्ध मंदिरोत्सव है।

वल्लम कली: केरल की पारंपरिक नौका दौड़ है। पुन्नमदा झील विशेष रूप से आलप्पुझा की प्रसिद्ध नेहरू ट्रॉफी नौका दौड़ से संबंधित है; सभी वल्लम कली केवल पुन्नमदा झील पर नहीं होतीं।

08

हरियाणा

लोकदेवता, शिल्प और सांस्कृतिक मेले

गुग्गा नवमी: लोकदेवता गुग्गा पीर की पूजा से संबंधित प्रसिद्ध पर्व है।

गुग्गानवमी: यह गुग्गा नवमी का ही दूसरा लेखन रूप है; इसे अलग त्योहार न समझें।

गुग्गा पीर: यह उसी धार्मिक परंपरा के लोकदेवता का नाम है, अलग तीसरा पर्व नहीं।

पिंजौर हेरिटेज उत्सव: पिंजौर के यादविंद्र गार्डन की विरासत से जुड़ा सांस्कृतिक आयोजन है।

गणगौर: हरियाणा के कुछ क्षेत्रों में भी मनाया जाता है, लेकिन इसकी मुख्य और सबसे प्रसिद्ध राज्यीय पहचान राजस्थान से है।

सूरजकुंड मेला: फरीदाबाद के सूरजकुंड में आयोजित प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला है।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण: कुरुक्षेत्र का अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव भी हरियाणा का महत्वपूर्ण आयोजन है।

09

तेलंगाना

महिला, देवी और जनजातीय उत्सव

अलाई-बलाई: तेलंगाना की सांस्कृतिक एकता और सामुदायिक मिलन से जुड़ा लोकप्रिय आयोजन है।

मेदारम जातरा: सम्मक्का–सरलम्मा से जुड़ा विशाल जनजातीय धार्मिक मेला है।

बोनालू: देवी महाकाली की पूजा से संबंधित तेलंगाना का प्रमुख उत्सव है।

बथुकम्मा: फूलों से जुड़ा प्रसिद्ध महिला उत्सव और तेलंगाना की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है।

तेलंगाना दशहरा: दशहरा व्यापक भारतीय पर्व है और तेलंगाना में भी बड़े स्तर पर मनाया जाता है। इसे अलग स्वतंत्र राज्य-विशिष्ट पर्व की अपेक्षा तेलंगाना की दशहरा परंपरा के रूप में पढ़ना बेहतर है।

10

पंजाब

सिख धार्मिक परंपरा और कृषि उत्सव

गुरुपर्व: सिख गुरुओं के जन्म और महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़े धार्मिक पर्वों का सामान्य नाम है।

लोहड़ी: शीत ऋतु और फसल चक्र से जुड़ा पंजाब का लोकप्रिय लोकपर्व है।

बैसाखी: रबी फसल कटाई से जुड़ा प्रमुख पर्व है और सिख परंपरा में खालसा पंथ की स्थापना से भी विशेष महत्व रखता है।

होला मोहल्ला: आनंदपुर साहिब से विशेष रूप से जुड़ा सिख धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सव है।

11

महाराष्ट्र

गणेशोत्सव, कृषि और कला महोत्सव

पोला: बैलों के सम्मान से जुड़ा कृषि पर्व है।

एलीफेंटा महोत्सव: मुंबई के निकट एलीफेंटा गुफाओं की विरासत से जुड़ा सांस्कृतिक और संगीत-नृत्य आयोजन है।

कोजागरी पूर्णिमा: आश्विन पूर्णिमा को मनाया जाने वाला धार्मिक-सांस्कृतिक पर्व है।

विठोबा: इसे केवल त्योहार का नाम न समझें। महाराष्ट्र में भगवान विठोबा से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण परंपरा पंढरपुर वारी और आषाढ़ी एकादशी है।

नारली पूर्णिमा: तटीय महाराष्ट्र के मछुआरा समुदायों से विशेष रूप से जुड़ा पर्व है।

गणेश चतुर्थी: महाराष्ट्र का सबसे प्रसिद्ध सार्वजनिक धार्मिक उत्सवों में से एक है।

आयुध पूजा: विजयादशमी से जुड़ी शस्त्र और औजार पूजा परंपरा है। इसकी सबसे विशिष्ट पहचान दक्षिण भारतीय राज्यों में अधिक है, हालांकि महाराष्ट्र में भी संबंधित पूजा परंपराएँ मिलती हैं।

काला घोड़ा महोत्सव: मुंबई का प्रसिद्ध कला और सांस्कृतिक महोत्सव है।

गुड़ी पड़वा: महाराष्ट्र का पारंपरिक नववर्ष पर्व है।

बाणगंगा महोत्सव: मुंबई के बाणगंगा क्षेत्र से जुड़ा शास्त्रीय संगीत महोत्सव है।

12

मिजोरम

कूट उत्सव और कृषि चक्र

मिम कूट: मिजो समुदाय का फसल से संबंधित पारंपरिक उत्सव है।

थालफवांग कूट: खेतों की निराई और कृषि कार्य के एक चरण की समाप्ति से जुड़ा पारंपरिक उत्सव है।

चापचार कूट: झूम खेती के लिए जंगल की सफाई के बाद लकड़ी सूखने की अवधि से जुड़ा मिजोरम का अत्यंत प्रसिद्ध उत्सव है।

13

तमिलनाडु

पोंगल, मंदिर और तमिल सांस्कृतिक परंपराएँ

जल्लीकट्टू: पोंगल के समय विशेष रूप से मनाया जाने वाला पारंपरिक सांड-संबंधी खेल है। इसे केवल त्योहार न कहें।

पोंगल: तमिलनाडु का प्रमुख फसल उत्सव है और सामान्यतः चार दिनों—भोगी, थाई पोंगल, मट्टू पोंगल और कानुम पोंगल—से जुड़ा माना जाता है।

थाइपुसम: भगवान मुरुगन से संबंधित महत्वपूर्ण तमिल धार्मिक उत्सव है।

चित्रै उत्सव: मदुरै का प्रसिद्ध मंदिरोत्सव है, जिसका संबंध देवी मीनाक्षी और भगवान सुंदरेश्वर के विवाह तथा कल्लाझगर परंपरा से है।

14

मणिपुर

मैतेई और जनजातीय धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सव

कांग रथ यात्रा: मणिपुर में भगवान जगन्नाथ से संबंधित रथयात्रा परंपरा है।

चुमफा: मणिपुर के तांगखुल नागा समुदाय से जुड़ा फसल उत्सव माना जाता है।

डोल जात्रा: मणिपुर में होली के समय की विशिष्ट परंपरा याओशांग के नाम से प्रसिद्ध है। “आओ सांग” की जगह याओशांग सही नाम याद रखें।

लाई हराओबा: मैतेई समुदाय का अत्यंत महत्वपूर्ण पारंपरिक धार्मिक उत्सव है।

चेरी ब्लॉसम: चेरी ब्लॉसम आयोजन पूर्वोत्तर के विभिन्न क्षेत्रों में हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध शिलांग चेरी ब्लॉसम महोत्सव मेघालय से जुड़ा है। इसे मणिपुर का मुख्य पारंपरिक उत्सव न मानें।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण: मणिपुर का संगाई महोत्सव राज्य का प्रमुख आधुनिक पर्यटन-सांस्कृतिक उत्सव है।

15

ओडिशा

पूर्व नाम उड़ीसा — कृषि, लोकनृत्य और धार्मिक मेले

नुआखाई: पश्चिमी ओडिशा का प्रमुख नई फसल का उत्सव है।

राजा परबा: वर्षा, पृथ्वी और नारीत्व से जुड़ा ओडिशा का प्रसिद्ध उत्सव है।

छाऊ: यह स्वयं त्योहार नहीं, बल्कि प्रसिद्ध नृत्य शैली है। ओडिशा का मयूरभंज छाऊ विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

धनु जात्रा: बरगढ़ में आयोजित विशाल खुले मंच का नाट्य-उत्सव है, जिसमें कृष्ण–कंस कथा प्रस्तुत की जाती है।

बाली जात्रा: कटक का प्रसिद्ध ऐतिहासिक मेला है, जो प्राचीन समुद्री व्यापार की स्मृति से जुड़ा है।

कोणार्क महोत्सव: कोणार्क सूर्य मंदिर की पृष्ठभूमि में आयोजित प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य महोत्सव है।

मिट्टी कला महोत्सव: ओडिशा की मृद्भांड और टेराकोटा शिल्प परंपरा से संबंधित सांस्कृतिक आयोजन है।

दलखाई: यह मुख्यतः पश्चिमी ओडिशा का प्रसिद्ध लोकनृत्य और लोकगीत परंपरा है; इसे स्वतंत्र प्रमुख त्योहार की बजाय नृत्य-परंपरा के रूप में पढ़ें।

अतिरिक्त अत्यंत महत्वपूर्ण: पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा ओडिशा का सर्वाधिक प्रसिद्ध धार्मिक उत्सवों में से एक है।

16

त्रिपुरा

जनजातीय पूजा और सांस्कृतिक परंपराएँ

संतरा महोत्सव: जंपुई पहाड़ियों में संतरा उत्पादन और पर्यटन से जुड़ा उत्सव रहा है।

बीजू: चकमा समुदाय का नववर्ष और कृषि-ऋतु से जुड़ा उत्सव है।

गरिया पूजा: त्रिपुरा के जनजातीय समुदायों का प्रमुख कृषि और समृद्धि से जुड़ा पर्व है।

खारची पूजा: त्रिपुरा का अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सव है, जिसमें चौदह देवताओं की पूजा की जाती है।

होजागिरी: रियांग/ब्रू समुदाय का प्रसिद्ध लोकनृत्य है और संबंधित धार्मिक-सांस्कृतिक अवसरों पर प्रस्तुत किया जाता है।

केर पूजा: त्रिपुरा का पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान और पर्व है।

खम्पुई: कुछ सामान्य ज्ञान सूचियों में त्रिपुरा के स्थानीय सांस्कृतिक आयोजन के रूप में यह नाम मिलता है; इसे खारची या गरिया पूजा जितना सर्वमान्य प्रमुख त्योहार न मानें।

हॉर्नबिल: राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हॉर्नबिल महोत्सव नागालैंड का है, त्रिपुरा का नहीं।

17

सिक्किम

बौद्ध और हिमालयी नववर्ष उत्सव

लोसर: तिब्बती बौद्ध नववर्ष उत्सव है।

सागा दावा: बौद्ध धर्म में भगवान बुद्ध के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं से संबंधित पवित्र पर्व है।

लोसूंग: सिक्किम का फसल और नववर्ष से जुड़ा महत्वपूर्ण उत्सव है।

सोनम ल्होसार: विशेष रूप से तमांग समुदाय से संबंधित नववर्ष उत्सव है।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण: सिक्किम का पांग ल्हाबसोल पर्व कंचनजंघा की संरक्षक देवता के रूप में पूजा से जुड़ा है।

18

नागालैंड

जनजाति और उत्सव का मिलान

येमशे: पोचुरी नागा समुदाय का प्रमुख फसल उत्सव है।

मोआत्सू: आओ नागा समुदाय का प्रसिद्ध उत्सव है।

आंगमोंग: इस रूप में नाम मानक प्रमुख नागा त्योहारों में स्पष्ट नहीं है। इससे मिलते-जुलते और परीक्षा में महत्वपूर्ण नाम टोक्हू एमोंग है, जो लोथा नागा समुदाय का उत्सव है।

सेक्रेन्यी: अंगामी नागा समुदाय का प्रमुख शुद्धिकरण और सामुदायिक उत्सव है।

हॉर्नबिल महोत्सव: नागालैंड का सर्वाधिक प्रसिद्ध आधुनिक सांस्कृतिक महोत्सव है, जिसमें राज्य की विभिन्न नागा जनजातियों की संस्कृति एक मंच पर प्रदर्शित होती है।

🎯 मिलान

येमशे—पोचुरी | मोआत्सू—आओ | टोक्हू एमोंग—लोथा | सेक्रेन्यी—अंगामी।

19

उत्तराखंड

ऋतु और कृषि आधारित पर्व

घी उत्सव: इसे घी संक्रांति या ओलगिया भी कहा जाता है। यह कृषि और पशुधन से जुड़ा पारंपरिक पर्व है।

हरेला: हरियाली, कृषि और पर्यावरण से जुड़ा कुमाऊँ क्षेत्र का प्रमुख लोकपर्व है।

फूल देई: वसंत ऋतु का प्रसिद्ध बाल एवं लोकपर्व है, जिसमें घरों की देहरी पर फूल सजाए जाते हैं।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण: कुंभ के चार स्थलों में से हरिद्वार उत्तराखंड में है।

20

झारखंड

आदिवासी कृषि और प्रकृति पूजा

जितिया: संतान की दीर्घायु से जुड़ा व्रत-पर्व है और झारखंड सहित पूर्वी भारत के कई क्षेत्रों में मनाया जाता है।

हल पुण्या: कृषि चक्र और खेत जोतने की शुरुआत से जुड़ा स्थानीय कृषि पर्व है।

सरहुल: प्रकृति और साल वृक्ष की पूजा से जुड़ा झारखंड का अत्यंत महत्वपूर्ण आदिवासी पर्व है।

भगता पर्व: जनजातीय धार्मिक और सामुदायिक परंपरा से जुड़ा पर्व है।

सोहराय: फसल, पशुधन और घरों की पारंपरिक चित्रकला से जुड़ा प्रमुख आदिवासी पर्व है।

धनबनी: इस नाम का प्रयोग कुछ स्थानीय जीके सूचियों में मिलता है, लेकिन इसे झारखंड के सर्वमान्य प्रमुख राज्यव्यापी त्योहारों में नहीं गिना जाता। स्थानीय क्षेत्रीय परंपरा के रूप में पढ़ना अधिक सुरक्षित है।

फगुआ: होली की झारखंडी और भोजपुरी-मगही क्षेत्रीय लोकपरंपरा से जुड़ा नाम है।

टुसू: मकर संक्रांति और नई फसल से जुड़ा महत्वपूर्ण लोकपर्व है।

मुंडा मेला: मुंडा समुदाय के विभिन्न स्थानीय धार्मिक-सामुदायिक मेलों के संदर्भ में नाम मिलता है; यह एक ही राज्यव्यापी निश्चित पर्व का नाम नहीं है।

चांडी पर्व: देवी/स्थानीय ग्रामदेवी पूजा से संबंधित क्षेत्रीय धार्मिक परंपरा के रूप में इसका उल्लेख मिलता है।

21

गोवा

ईसाई पर्व, लोकनृत्य और पर्यटन उत्सव

थ्री किंग्स उत्सव: गोवा के ईसाई समुदाय से जुड़ा प्रसिद्ध धार्मिक पर्व है।

फुगड़ी: यह मुख्यतः गोवा का महिला लोकनृत्य है, स्वतंत्र त्योहार नहीं।

तरंगमेल: गोवा की पारंपरिक लोकनृत्य परंपरा है।

कुनबी: कुनबी समुदाय की प्रसिद्ध लोकनृत्य शैली है। इसे त्योहार न समझें।

सेंट फ्रांसिस जेवियर पर्व: ओल्ड गोवा में बेसिलिका ऑफ बॉम जीसस से जुड़ा प्रमुख ईसाई धार्मिक पर्व है।

अंगूर महोत्सव: गोवा में अंगूर, भोजन और जीवनशैली से जुड़ा आधुनिक पर्यटन आयोजन ग्रेप एस्केपेड के नाम से प्रसिद्ध रहा है।

बोंडेराम: दिवर द्वीप का प्रसिद्ध ध्वज और सांस्कृतिक उत्सव है। “बोडरम” की अपेक्षा बोंडेराम सही नाम है।

साओ जोआओ: वर्षा ऋतु में मनाया जाने वाला प्रसिद्ध ईसाई-सांस्कृतिक उत्सव है।

थैंक्सगिविंग: ईसाई समुदायों में धन्यवाद प्रार्थना और फसल-संबंधी स्थानीय आयोजनों के रूप मिलते हैं, लेकिन इसे गोवा का विशिष्ट प्रमुख राज्योत्सव मानना सुरक्षित नहीं है।

शिगमो: गोवा का प्रमुख वसंत और लोक-सांस्कृतिक उत्सव है।

अतिरिक्त अत्यंत महत्वपूर्ण: गोवा कार्निवल राज्य का सबसे प्रसिद्ध पर्यटन-सांस्कृतिक आयोजनों में से एक है।

22

असम

बिहू और जनजातीय फसल उत्सव

बिहू: असम का सबसे प्रसिद्ध उत्सव है। इसके तीन प्रमुख रूप हैं—रोंगाली/बोहाग बिहू, कोंगाली/काती बिहू और भोगाली/माघ बिहू

जोनबील मेला: मोरीगांव क्षेत्र का प्रसिद्ध जनजातीय मेला है, जिसमें पारंपरिक वस्तु-विनिमय की परंपरा विशेष आकर्षण है।

चाय महोत्सव: असम के चाय उद्योग और पर्यटन से जुड़ा आधुनिक सांस्कृतिक आयोजन है।

ब्विसागु: बोडो समुदाय का नववर्ष और वसंत उत्सव है।

अली-आये-लिगांग: मिसिंग समुदाय का कृषि और बीज-बुवाई से जुड़ा प्रमुख उत्सव है।

अंबुबाची: गुवाहाटी के कामाख्या मंदिर का प्रसिद्ध धार्मिक मेला है।

देवधनी: देवी पूजा से जुड़ी अनुष्ठानिक नृत्य और धार्मिक परंपरा है।

रोंगकेर: कार्बी समुदाय का महत्वपूर्ण धार्मिक-सामुदायिक उत्सव है।

बैखो: राभा समुदाय का पारंपरिक उत्सव है।

देहिंग पटकाई उत्सव: ऊपरी असम की संस्कृति, प्रकृति और पर्यटन से जुड़ा महोत्सव है।

23

बिहार

सूर्य पूजा, लोकपरंपरा और कृषि पर्व

सरहुल: बिहार के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में भी मनाया जाता है, हालांकि इसकी प्रमुख राज्यीय पहचान झारखंड से है।

छठ पूजा: सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का बिहार का अत्यंत प्रसिद्ध पर्व है।

करमा: आदिवासी और ग्रामीण समुदायों में करम वृक्ष से जुड़ा प्रकृति और सामुदायिक पर्व है।

सामा–चकेवा: विशेष रूप से मिथिला क्षेत्र का भाई-बहन के प्रेम से जुड़ा लोकपर्व है।

बिहुला: अंग क्षेत्र, विशेषकर भागलपुर और आसपास, की लोकधार्मिक परंपरा से जुड़ा पर्व है।

जितिया: माताओं द्वारा संतान की दीर्घायु के लिए किया जाने वाला व्रत है।

सोहराय: बिहार के कुछ आदिवासी क्षेत्रों में भी मनाया जाता है, हालांकि इसकी मजबूत पहचान झारखंड की आदिवासी संस्कृति से है।

अतिरिक्त अत्यंत महत्वपूर्ण: बिहार का सोनपुर मेला भारत के सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक पशु मेलों में गिना जाता है।

24

आंध्र प्रदेश

मंदिर और तटीय पर्यटन उत्सव

कल्याणोत्सव: आंध्र प्रदेश के विभिन्न मंदिरों में देव-विवाह से जुड़ी कल्याणोत्सव परंपराएँ होती हैं। केवल “कल्याणोत्सव” एक ही राज्यव्यापी निश्चित मेले का नाम नहीं है।

दुर्गम्मा उत्सव: स्थानीय ग्रामदेवी दुर्गम्मा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रीय धार्मिक उत्सव और जातराएँ आंध्र प्रदेश में आयोजित होती हैं।

येल्लम्मा जातरा: देवी येल्लम्मा की पूजा दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों—आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक—में मिलती है। इसलिए इसे केवल एक राज्य तक सीमित न करें।

फ्लेमिंगो उत्सव: नेल्लोर क्षेत्र के पुलिकट झील और नेलापट्टू पक्षी अभयारण्य से जुड़ा प्रसिद्ध पक्षी और पर्यटन महोत्सव है।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण: आंध्र प्रदेश में उगादी और तिरुमला ब्रह्मोत्सव भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

25

छत्तीसगढ़

कृषि और आदिवासी उत्सवों की समृद्ध परंपरा

पोला: बैलों और कृषि कार्य से जुड़ा प्रमुख ग्रामीण पर्व है।

भोजली: हरियाली, कृषि और युवतियों की लोकपरंपरा से जुड़ा पर्व है।

मेघनाद पर्व: कुछ जनजातीय समुदायों में मेघनाद से संबंधित धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा के रूप में मनाया जाता है।

हरेली: छत्तीसगढ़ का प्रमुख कृषि पर्व है और खेती के औजारों तथा पशुधन की पूजा से जुड़ा है।

मड़ई: छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों का अत्यंत महत्वपूर्ण घूमंतू मेला-उत्सव है।

छेरछेरा: पौष पूर्णिमा के आसपास नई फसल और अन्नदान से जुड़ा प्रमुख लोकपर्व है।

अतिरिक्त अत्यंत महत्वपूर्ण: बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ की सबसे विशिष्ट और प्रसिद्ध सांस्कृतिक-धार्मिक परंपराओं में से एक है।

26

अरुणाचल प्रदेश

जनजाति–उत्सव मिलान अत्यंत महत्वपूर्ण

लोकू: नोक्ते समुदाय का महत्वपूर्ण कृषि उत्सव है।

जीरो उत्सव: जीरो घाटी का प्रसिद्ध आधुनिक संगीत महोत्सव है।

मोपिन: गालो समुदाय का समृद्धि और फसल से जुड़ा उत्सव है।

द्री: अपातानी समुदाय का प्रमुख कृषि उत्सव है।

सोलुंग: आदि समुदाय का कृषि एवं फसल उत्सव है।

पांगसाऊ पास उत्सव: अरुणाचल के पूर्वी क्षेत्र में इतिहास, जनजातीय संस्कृति और सीमा-पार सांस्कृतिक संबंधों से जुड़ा पर्यटन उत्सव है।

पक्के पागा हॉर्नबिल उत्सव: पक्के क्षेत्र में हॉर्नबिल पक्षियों और प्रकृति संरक्षण से जुड़ा समुदाय-आधारित उत्सव है। इसे नागालैंड के हॉर्नबिल महोत्सव से अलग समझें।

लोसर: विशेष रूप से मोनपा समुदाय में तिब्बती बौद्ध नववर्ष के रूप में मनाया जाता है।

न्योकुम: न्यीशी समुदाय का प्रमुख धार्मिक-कृषि उत्सव है।

सांगकेन: खामती और सिंगफो सहित थेरवाद बौद्ध समुदायों का जल और नववर्ष से जुड़ा उत्सव है।

27

गुजरात

कच्छ, पतंग, नृत्य और पर्यटन आयोजन

रण महोत्सव: कच्छ के सफेद रण में आयोजित गुजरात का विश्वप्रसिद्ध पर्यटन-सांस्कृतिक महोत्सव है।

खेल महोत्सव: गुजरात में विभिन्न सरकारी खेल आयोजनों और खेल महाकुंभ का आयोजन होता है; यह पारंपरिक धार्मिक त्योहार नहीं है।

पतंग महोत्सव: मकर संक्रांति के अवसर पर गुजरात में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव अत्यंत प्रसिद्ध है।

मोढेरा उत्सव: मोढेरा सूर्य मंदिर परिसर से जुड़ा शास्त्रीय नृत्य और सांस्कृतिक महोत्सव है।

माधवपुर मेला: माधवपुर घेड में भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के विवाह की परंपरा से जुड़ा प्रसिद्ध मेला है।

पैराग्लाइडिंग उत्सव: गुजरात के पर्यटन क्षेत्रों में आयोजित आधुनिक साहसिक-पर्यटन गतिविधियों और आयोजनों से जुड़ा नाम है।

बीच उत्सव: समुद्र तटीय पर्यटन को बढ़ावा देने वाले आधुनिक आयोजनों के लिए प्रयुक्त नाम है; इसे प्राचीन राज्य-विशिष्ट पर्व न मानें।

उत्तरायण: गुजरात में मकर संक्रांति का अत्यंत लोकप्रिय नाम है और इसी अवसर पर व्यापक पतंगबाजी होती है। इसलिए उत्तरायण और पतंग महोत्सव परस्पर जुड़े हैं, पूर्णतः अलग पर्व नहीं।

श्यामलाजी मेला: अरावली जिले के श्यामलाजी मंदिर से जुड़ा प्रसिद्ध आदिवासी और धार्मिक मेला है।

अतिरिक्त अत्यंत महत्वपूर्ण: गुजरात का नवरात्रि और गरबा राज्य की सबसे प्रसिद्ध सांस्कृतिक पहचानों में से एक है।

28

जम्मू और कश्मीर

कश्मीर घाटी के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन आयोजन

खीर भवानी मेला: कश्मीर घाटी के तुलमुल्ला स्थित माता खीर भवानी मंदिर का प्रसिद्ध धार्मिक मेला है।

शिकारा महोत्सव: श्रीनगर और डल झील की शिकारा संस्कृति से जुड़ा पर्यटन आयोजन है।

हेमिस महोत्सव: यह वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था में लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश के हेमिस मठ से संबंधित है, जम्मू-कश्मीर से नहीं। पुराने स्रोतों में इसे जम्मू-कश्मीर के अंतर्गत इसलिए पाया जाता है क्योंकि 2019 से पहले लद्दाख तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य का भाग था।

दोस्मोचे उत्सव: यह भी मुख्यतः लद्दाख की बौद्ध मठीय परंपरा से जुड़ा उत्सव है।

ट्यूलिप महोत्सव: श्रीनगर के इंदिरा गांधी स्मारक ट्यूलिप गार्डन से जुड़ा प्रसिद्ध वसंत पर्यटन आयोजन है।

⚠️ परीक्षा में नया प्रशासनिक विभाजन याद रखें

हेमिस और दोस्मोचे — लद्दाख। खीर भवानी और श्रीनगर ट्यूलिप उत्सव — जम्मू और कश्मीर।

29

पश्चिम बंगाल

दुर्गा पूजा, नववर्ष और गंगासागर

तीस्ता चाय महोत्सव: दार्जिलिंग–उत्तर बंगाल क्षेत्र की चाय और पर्यटन से जुड़े आयोजनों के संदर्भ में इस नाम का प्रयोग मिलता है।

डोल जात्रा: होली से जुड़ा बंगाल का वैष्णव धार्मिक-सांस्कृतिक पर्व है।

दुर्गा पूजा: पश्चिम बंगाल का सर्वाधिक प्रसिद्ध धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सव है।

नबो बोरशो: बंगाली नववर्ष का नाम है।

जगद्धात्री पूजा: विशेष रूप से चंदननगर और आसपास के क्षेत्रों में अत्यंत प्रसिद्ध है।

पोइला बैशाख: बंगाली नववर्ष का पहला दिन है। इसलिए नबो बोरशो और पोइला बैशाख एक ही नववर्ष परंपरा से जुड़े हैं, दो अलग प्रमुख त्योहार नहीं।

गंगासागर मेला: मकर संक्रांति के समय सागर द्वीप में आयोजित विशाल धार्मिक मेला है।

30

दिल्ली

आधुनिक आयोजन और सांस्कृतिक उत्सव

हैप्पीनेस उत्सव: दिल्ली सरकार के शिक्षा और खुशी-पाठ्यक्रम से जुड़े कार्यक्रमों में इस प्रकार के आयोजन हुए हैं। यह दिल्ली का पारंपरिक लोकपर्व नहीं है।

ड्रोन उत्सव: दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर के ड्रोन और तकनीकी आयोजन आयोजित हुए हैं। यह आधुनिक तकनीकी महोत्सव है, पारंपरिक राज्योत्सव नहीं।

बसंत उत्सव: दिल्ली के विभिन्न सांस्कृतिक संस्थानों में वसंत से जुड़े आयोजन होते हैं।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण: दिल्ली की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा फूल वालों की सैर अधिक महत्वपूर्ण पारंपरिक उत्सव है।

31

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह

द्वीपीय पर्यटन और विविध समुदायों के आयोजन

मानसून महोत्सव: वर्षा ऋतु में द्वीपीय पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ा आयोजन है।

मरियम्मन उत्सव: द्वीपों में बसे तमिल समुदायों और मरियम्मन मंदिरों से जुड़ी धार्मिक परंपरा है; इसे पूरे केंद्रशासित प्रदेश का एकमात्र प्रमुख त्योहार न समझें।

समुद्र तट महोत्सव: समुद्र तटीय पर्यटन, जलक्रीड़ा और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ा आधुनिक आयोजन है।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण: अंडमान और निकोबार का द्वीप पर्यटन महोत्सव प्रमुख पर्यटन आयोजनों में गिना जाता है।

32

लद्दाख

बौद्ध मठ और हिमालयी उत्सव

कोरजोक उत्सव: त्सो मोरिरी क्षेत्र के कोरजोक मठ से जुड़ा बौद्ध धार्मिक उत्सव है।

हेमिस महोत्सव: हेमिस मठ में गुरु पद्मसंभव से जुड़ा लद्दाख का विश्वप्रसिद्ध बौद्ध उत्सव है।

लोसर: तिब्बती बौद्ध नववर्ष है और लद्दाख का महत्वपूर्ण पर्व है।

सागा दावा: भगवान बुद्ध के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं से संबंधित बौद्ध पर्व है। “शक दावा” की अपेक्षा सागा दावा अधिक प्रचलित लेखन है।

दोस्मोचे: लेह और लद्दाख के मठों में मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण बौद्ध धार्मिक उत्सव है।

33

चंडीगढ़

फूल और उद्यान आधारित आयोजन

गुलदाऊदी उत्सव: सर्दियों में गुलदाऊदी के फूलों की प्रदर्शनी और उद्यान आयोजन से जुड़ा उत्सव है।

रोज उत्सव: चंडीगढ़ के प्रसिद्ध जाकिर हुसैन रोज गार्डन में आयोजित प्रमुख फूल और सांस्कृतिक उत्सव है।

कैक्टस उत्सव: कैक्टस और रसीले पौधों की प्रदर्शनियों से संबंधित उद्यान आयोजन है।

34

पुदुचेरी

पूर्व नाम पांडिचेरी — तमिल और फ्रांसीसी सांस्कृतिक प्रभाव

पोंगल: पुदुचेरी में तमिल सांस्कृतिक प्रभाव के कारण चार दिवसीय पोंगल व्यापक रूप से मनाया जाता है।

फ्रेंच फूड महोत्सव: पुदुचेरी की फ्रांसीसी विरासत और भोजन संस्कृति से जुड़ा आधुनिक पर्यटन-सांस्कृतिक आयोजन है।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण: मासी मगम पुदुचेरी क्षेत्र का महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सव है।

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दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव

जनजातीय संस्कृति और स्थानीय पर्व

तारपा महोत्सव: दादरा और नगर हवेली की जनजातीय संस्कृति और प्रसिद्ध तारपा वाद्य तथा तारपा नृत्य से जुड़ा महत्वपूर्ण सांस्कृतिक उत्सव है।

दिवासो: विशेष रूप से धोड़िया और वारली जनजातियों से जुड़ा पारंपरिक पर्व है। इसे कुछ पुस्तकों में “दिवासोल” भी लिखा मिलता है।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण: इस क्षेत्र में अखातीज, नारियेली पूर्णिमा और मानसून मैजिक जैसे आयोजन भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

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एक जैसे और भ्रम पैदा करने वाले नाम

परीक्षा में गलती से बचें

कुंभ: प्रयागराज—उत्तर प्रदेश; हरिद्वार—उत्तराखंड; उज्जैन—मध्य प्रदेश; नासिक—महाराष्ट्र।

गुग्गा नवमी = गुग्गानवमी; गुग्गा पीर उसी परंपरा के लोकदेवता हैं।

नबो बोरशो और पोइला बैशाख बंगाली नववर्ष की एक ही परंपरा से जुड़े हैं।

उत्तरायण और अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव गुजरात में मकर संक्रांति के अवसर से परस्पर जुड़े हैं।

वल्लम कली सामान्य नौका-दौड़ परंपरा है; पुन्नमदा झील विशेष रूप से नेहरू ट्रॉफी नौका दौड़ से जुड़ी है।

छाऊ, फुगड़ी, कुनबी, दलखाई और होजागिरी मुख्यतः नृत्य-परंपराएँ हैं, केवल त्योहार नहीं।

कंबाला और जल्लीकट्टू पारंपरिक खेल हैं।

थेय्यम अनुष्ठानिक प्रदर्शन परंपरा है।

हॉर्नबिल महोत्सव की मुख्य राज्यीय पहचान नागालैंड से है; अरुणाचल का पक्के पागा हॉर्नबिल उत्सव अलग संरक्षण-आधारित आयोजन है।

हेमिस और दोस्मोचे वर्तमान में लद्दाख से संबंधित हैं, न कि जम्मू और कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश से।

चेरी ब्लॉसम महोत्सव की सबसे प्रसिद्ध पूर्वोत्तर पहचान शिलांग, मेघालय से है।

37

अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य–उत्सव मिलान

एसएससी और रेलवे के लिए

⚡ त्वरित पुनरावृत्ति

प्रयागराज—कुंभ राजस्थान—गणगौर मेघालय—वांगला कर्नाटक—मैसूर दशहरा मध्य प्रदेश—खजुराहो हिमाचल—कुल्लू दशहरा केरल—ओणम हरियाणा—सूरजकुंड तेलंगाना—बथुकम्मा पंजाब—बैसाखी महाराष्ट्र—गणेशोत्सव मिजोरम—चापचार कूट तमिलनाडु—पोंगल मणिपुर—लाई हराओबा ओडिशा—रथयात्रा त्रिपुरा—खारची पूजा सिक्किम—लोसूंग नागालैंड—हॉर्नबिल उत्तराखंड—हरेला झारखंड—सरहुल गोवा—शिगमो असम—बिहू बिहार—छठ आंध्र प्रदेश—उगादी छत्तीसगढ़—बस्तर दशहरा अरुणाचल—द्री गुजरात—नवरात्रि जम्मू-कश्मीर—ट्यूलिप पश्चिम बंगाल—दुर्गा पूजा लद्दाख—हेमिस

⚡ अंतिम पुनरावृत्ति बिंदु

कुंभ के चार स्थान — प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक

वांगला — गारो समुदाय, मेघालय

नॉन्गक्रेम — खासी समुदाय, मेघालय; बेहदीनखलम — जयंतिया समुदाय

कैलपोध — कोडव समुदाय, कर्नाटक; कंबाला — तटीय कर्नाटक का पारंपरिक भैंसा-दौड़ खेल।

फुलैच — किन्नौर, हिमाचल प्रदेश; हलड़ा — लाहौल

ओणम — केरल; वल्लम कली — नौका दौड़; पुन्नमदा झील — नेहरू ट्रॉफी।

बथुकम्मा और बोनालू — तेलंगाना

होला मोहल्ला — पंजाब

चापचार कूट, मिम कूट और थालफवांग कूट — मिजोरम

पोंगल — तमिलनाडु; जल्लीकट्टू — पोंगल से जुड़ा पारंपरिक खेल।

लाई हराओबा और याओशांग — मणिपुर

नुआखाई, राजा परबा, बाली जात्रा और पुरी रथयात्रा — ओडिशा

खारची पूजा और गरिया पूजा — त्रिपुरा

येमशे—पोचुरी; मोआत्सू—आओ; टोक्हू एमोंग—लोथा; सेक्रेन्यी—अंगामी — नागालैंड

सरहुल, सोहराय और टुसू — झारखंड के अत्यंत महत्वपूर्ण जनजातीय/लोकपर्व।

अली-आये-लिगांग—मिसिंग; ब्विसागु—बोडो; रोंगकेर—कार्बी; बैखो—राभा — असम

छठ और सामा-चकेवा — बिहार

हरेली, मड़ई और छेरछेरा — छत्तीसगढ़

मोपिन—गालो; द्री—अपातानी; सोलुंग—आदि; न्योकुम—न्यीशी — अरुणाचल प्रदेश

रण उत्सव, उत्तरायण और नवरात्रि — गुजरात

हेमिस, दोस्मोचे, कोरजोक और लोसर — लद्दाख

तारपा और दिवासो — दादरा और नगर हवेली की महत्वपूर्ण जनजातीय परंपराएँ।

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