मिनीरत्न, नवरत्न एवं महारत्न
केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को प्राप्त वित्तीय एवं परिचालन स्वायत्तता
रत्न श्रेणियों का अर्थ
भारत सरकार केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ उत्कृष्ट उपक्रमों को उनके वित्तीय प्रदर्शन, संचालन क्षमता और प्रबंधकीय दक्षता के आधार पर अधिक वित्तीय एवं परिचालन स्वायत्तता प्रदान करती है। इस व्यवस्था के अंतर्गत मुख्यतः महारत्न, नवरत्न और मिनीरत्न श्रेणियाँ आती हैं।
इन श्रेणियों का उद्देश्य सफल सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को प्रत्येक व्यावसायिक निर्णय के लिए सरकार से अलग-अलग अनुमति लेने की आवश्यकता कम करना और उन्हें अधिक प्रतिस्पर्धी तथा व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाना है।
रत्न श्रेणियों का क्रम
स्वायत्तता के आधार पर सामान्य क्रम
मिनीरत्न
अच्छा वित्तीय प्रदर्शन करने वाले सार्वजनिक उपक्रम
नवरत्न
उच्च प्रदर्शन और अधिक व्यावसायिक स्वायत्तता वाले उपक्रम
महारत्न
सबसे बड़े और वैश्विक स्तर पर सक्रिय केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम
🎯 याद रखने का क्रम
मिनीरत्न
मिनीरत्न की दो श्रेणियाँ
मिनीरत्न दर्जा उन केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को दिया जाता है जिन्होंने अच्छा वित्तीय प्रदर्शन किया हो और जिन्हें सरकार अधिक वित्तीय तथा परिचालन स्वतंत्रता देना चाहती हो।
मिनीरत्न कंपनियों को दो भागों में बाँटा गया है—मिनीरत्न श्रेणी-I और मिनीरत्न श्रेणी-II।
पुराने 2024 के आँकड़ों में मिनीरत्न श्रेणी-I की संख्या 62 और श्रेणी-II की संख्या 12, अर्थात कुल 74 बताई जाती थी। कंपनियों के उन्नयन, पुनर्गठन, विलय अथवा रत्न दर्जे में बदलाव के कारण यह संख्या स्थायी नहीं रहती।
विभागीय सार्वजनिक उद्यम की जनवरी 2026 में उपलब्ध नवीन सूची के अनुसार मिनीरत्न-I के 49 और मिनीरत्न-II के 9 उपक्रम हैं। इस प्रकार वर्तमान सूची में कुल 58 मिनीरत्न उपक्रम हैं।
⚠️ परीक्षा-सावधानी
मिनीरत्न कंपनियों की संख्या समय के साथ बदलती रहती है। इसलिए किसी पुराने वर्ष की संख्या को वर्तमान संख्या न मानें।
मिनीरत्न श्रेणी-I की पात्रता
लाभ और वित्तीय स्थिति से संबंधित शर्तें
मिनीरत्न श्रेणी-I के लिए सामान्य पात्रता में कंपनी का पिछले तीन वर्षों में लगातार लाभ अर्जित करना आवश्यक है।
इन तीन वर्षों में से कम-से-कम एक वर्ष में उसका कर-पूर्व लाभ 30 करोड़ रुपये या उससे अधिक होना चाहिए। इसे केवल “शुद्ध लाभ 30 करोड़ रुपये” लिखना सही नहीं है, क्योंकि मानक में कर-पूर्व लाभ का उल्लेख होता है।
कंपनी की निवल संपत्ति सकारात्मक होनी चाहिए तथा वह गंभीर वित्तीय संकट वाली स्थिति में नहीं होनी चाहिए।
मिनीरत्न श्रेणी-I उपक्रमों को निर्धारित सीमा के भीतर पूँजीगत निवेश, संयुक्त उपक्रम, सहायक कंपनी और अन्य व्यावसायिक निर्णयों में सामान्य सार्वजनिक उपक्रमों की तुलना में अधिक स्वायत्तता दी जाती है।
मिनीरत्न श्रेणी-II की पात्रता
लगातार लाभ और सकारात्मक निवल संपत्ति
मिनीरत्न श्रेणी-II बनने के लिए केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम का पिछले तीन वर्षों में लगातार लाभ कमाना आवश्यक है।
इसके साथ कंपनी की निवल संपत्ति सकारात्मक होनी चाहिए।
श्रेणी-II में श्रेणी-I की तरह किसी एक वर्ष में 30 करोड़ रुपये के कर-पूर्व लाभ की अतिरिक्त शर्त नहीं होती।
इन कंपनियों को भी निर्धारित सीमा तक निवेश और परिचालन संबंधी निर्णय लेने की स्वतंत्रता प्रदान की जाती है, लेकिन उनकी शक्तियाँ श्रेणी-I और नवरत्न कंपनियों की तुलना में कम होती हैं।
प्रमुख मिनीरत्न कंपनियाँ
वर्तमान श्रेणी को ध्यान में रखकर
भारत संचार निगम लिमिटेड वर्तमान सूची में मिनीरत्न-I है।
भारत डायनामिक्स लिमिटेड भी मिनीरत्न-I श्रेणी में शामिल है।
ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड वर्तमान सूची में मिनीरत्न-II है।
इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन को पहले मिनीरत्न के उदाहरण के रूप में पढ़ा जाता था, लेकिन वर्तमान सूची में वह नवरत्न कंपनी है।
ये सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम दूरसंचार, रक्षा, रेलवे, प्रसारण, परिवहन और अन्य क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों तथा रोजगार में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
🎯 बड़ा बदलाव
आईआरसीटीसी = अब नवरत्न, इसलिए इसे वर्तमान मिनीरत्न सूची में न रखें।
नवरत्न
उच्च प्रदर्शन वाले केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम
नवरत्न कंपनियाँ वे केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ हैं जिन्हें बेहतर वित्तीय प्रदर्शन, प्रबंधन क्षमता और व्यावसायिक दक्षता के आधार पर अधिक स्वायत्तता प्रदान की जाती है।
2024 की कुछ अध्ययन सामग्रियों में नवरत्न कंपनियों की संख्या 24 दी गई थी। बाद में अनेक कंपनियों को नवरत्न दर्जा मिलने और कुछ नवरत्न कंपनियों के महारत्न बनने के कारण सूची बदल गई।
जनवरी 2026 की विभागीय सार्वजनिक उद्यम सूची में कुल 26 नवरत्न कंपनियाँ हैं।
नवरत्न बनने की प्रमुख शर्तें
प्रदर्शन आधारित उन्नयन
नवरत्न दर्जे के लिए कंपनी का सामान्यतः अनुसूची-A तथा मिनीरत्न श्रेणी-I केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम होना आवश्यक है।
कंपनी के प्रदर्शन का मूल्यांकन विभिन्न वित्तीय तथा परिचालन मानकों के आधार पर किया जाता है। पारंपरिक नवरत्न मूल्यांकन व्यवस्था में छह प्रमुख प्रदर्शन मानकों पर कुल 100 अंकों में कम-से-कम 60 अंक प्राप्त करना महत्वपूर्ण शर्त रही है।
इन मानकों में निवल लाभ, निवल संपत्ति, उत्पादन लागत, सेवा लागत, पूँजी नियोजन, कारोबार तथा अंतर-क्षेत्रीय प्रदर्शन जैसे वित्तीय पहलुओं का मूल्यांकन किया जाता है।
कंपनी के निदेशक मंडल में आवश्यक संख्या में गैर-सरकारी अथवा स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति सहित कॉरपोरेट प्रशासन संबंधी शर्तों का पालन भी महत्वपूर्ण होता है। इसे हर स्थिति में “चार स्वतंत्र निदेशक अनिवार्य” जैसी स्थायी संख्या के रूप में याद करना उचित नहीं है, क्योंकि बोर्ड संरचना कंपनी और लागू नियमों के अनुसार होती है।
नवरत्न कंपनियों की स्वायत्तता
निवेश और व्यावसायिक निर्णय
नवरत्न कंपनियों के निदेशक मंडल को सरकार की पूर्व अनुमति के बिना निर्धारित वित्तीय सीमा तक देश या विदेश में निवेश करने की अधिक स्वतंत्रता प्राप्त होती है।
एक परियोजना में निवेश की सीमा सामान्यतः 1,000 करोड़ रुपये अथवा कंपनी की निवल संपत्ति के 15 प्रतिशत से संबंधित निर्धारित सीमा के अधीन होती है। कुल वार्षिक निवेश पर भी निवल संपत्ति आधारित सीमा लागू होती है।
नवरत्न उपक्रम संयुक्त उपक्रम स्थापित करने, रणनीतिक साझेदारी करने, सहायक कंपनियाँ बनाने और विदेशों में निवेश संबंधी निर्णय लेने में सामान्य सार्वजनिक उपक्रमों की अपेक्षा अधिक स्वतंत्र होते हैं।
वर्तमान 26 नवरत्न कंपनियाँ
जनवरी 2026 की आधिकारिक सूची
| क्रम | नवरत्न कंपनी |
|---|---|
| 1 | भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड |
| 2 | केंद्रीय भंडारण निगम |
| 3 | कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड |
| 4 | इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड |
| 5 | हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड |
| 6 | इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन लिमिटेड |
| 7 | इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड |
| 8 | इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी लिमिटेड |
| 9 | इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड |
| 10 | महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड |
| 11 | मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड |
| 12 | नेशनल एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड |
| 13 | नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड |
| 14 | एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड |
| 15 | एनएचपीसी लिमिटेड |
| 16 | एनएलसी इंडिया लिमिटेड |
| 17 | एनएमडीसी लिमिटेड |
| 18 | ओएनजीसी विदेश लिमिटेड |
| 19 | रेल विकास निगम लिमिटेड |
| 20 | रेलटेल कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड |
| 21 | राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड |
| 22 | राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड |
| 23 | राइट्स लिमिटेड |
| 24 | शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड |
| 25 | एसजेवीएन लिमिटेड |
| 26 | सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया |
पुरानी नवरत्न सूची में हुए प्रमुख बदलाव
पुराने और वर्तमान दर्जे में अंतर
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को पहले नवरत्न सूची में पढ़ा जाता था, लेकिन अब यह महारत्न है। इसकी ऐतिहासिक शुरुआत 1940 में हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट के रूप में हुई; 1964 में पुनर्गठन और विलय के बाद हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड का वर्तमान स्वरूप बना। इसलिए 1940 और 1964 दोनों वर्ष अलग संदर्भ में मिलते हैं। इसका प्रमुख केंद्र बेंगलुरु है।
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड — स्थापना 1954, बेंगलुरु — वर्तमान में नवरत्न है।
एनएलसी इंडिया लिमिटेड — 1956 में स्थापित — वर्तमान में नवरत्न है। इसका प्रमुख केंद्र नेवेली, तमिलनाडु है।
स्टेट ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड — 1956 में स्थापित — पुरानी सूची में नवरत्न के रूप में दिया जाना वर्तमान स्थिति के अनुसार सही नहीं है।
एनएमडीसी लिमिटेड — स्थापना 1958, मुख्यालय हैदराबाद — वर्तमान में नवरत्न है।
ऑयल इंडिया लिमिटेड — 1959 में कंपनी के रूप में स्थापित — अब महारत्न है। इसका परिचालन मुख्यालय दुलियाजान और कॉरपोरेट कार्यालय नोएडा से जुड़ा है; इसे दीमापुर मुख्यालय लिखना सही नहीं है।
शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड — 1961, मुंबई — वर्तमान में नवरत्न है।
भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड — 1964 — अब महारत्न है।
इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड — 1965, नई दिल्ली — वर्तमान में नवरत्न है।
आरईसी लिमिटेड — 1969 में स्थापित — अब महारत्न है।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड — 1974 में अपने वर्तमान नाम और स्वरूप में स्थापित — अब महारत्न है।
एनएचपीसी लिमिटेड — 1975, फरीदाबाद/राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र — वर्तमान में नवरत्न है।
भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड का वर्तमान सरकारी कंपनी स्वरूप 1970 के दशक में विकसित हुआ; अब यह महारत्न है।
टेलीकम्युनिकेशंस कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड — 1978, नई दिल्ली — वर्तमान सूची में मिनीरत्न-I है, नवरत्न नहीं।
नेशनल एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड — 1981, भुवनेश्वर — वर्तमान में नवरत्न है।
राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड — 1982, विशाखापत्तनम — वर्तमान में नवरत्न है।
गेल (इंडिया) लिमिटेड — 1984, नई दिल्ली — अब महारत्न है।
इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी — 1987, नई दिल्ली — वर्तमान में नवरत्न है।
कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड — 1988, नई दिल्ली — वर्तमान में नवरत्न है।
मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड — 1988 — वर्तमान सूची में मिनीरत्न-I है, नवरत्न नहीं।
टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड — 1988 — वर्तमान सूची में मिनीरत्न-I है, नवरत्न नहीं।
पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड — 1989 — अब महारत्न है।
भारत संचार निगम लिमिटेड — 2000, नई दिल्ली — वर्तमान सूची में मिनीरत्न-I है, नवरत्न नहीं।
नेवेली उत्तर प्रदेश पावर लिमिटेड को 24 नवरत्न कंपनियों की आधिकारिक सूची में शामिल करना सही नहीं है। यह एनएलसी इंडिया और उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम से संबंधित संयुक्त उपक्रम है।
महारत्न
रत्न श्रेणी का सर्वोच्च स्तर
महारत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले उपक्रमों को दिया जाने वाला सर्वोच्च रत्न दर्जा है। इसे 2010 में शुरू किया गया था ताकि बड़े नवरत्न उपक्रम वैश्विक स्तर पर अधिक स्वतंत्रता से निवेश और विस्तार कर सकें।
महारत्न कंपनियों को उत्कृष्ट वित्तीय प्रदर्शन, बड़े कारोबार, मजबूत निवल संपत्ति, लाभप्रदता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपस्थिति के आधार पर अधिक स्वायत्तता दी जाती है।
अक्टूबर 2024 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को महारत्न का दर्जा मिलने के बाद महारत्न कंपनियों की संख्या 14 हो गई थी। जनवरी 2026 की विभागीय सूची में भी 14 महारत्न दर्ज हैं।
महारत्न बनने की प्रमुख शर्तें
बड़े नवरत्न उपक्रमों के लिए उच्च वित्तीय मानक
महारत्न दर्जे के लिए कंपनी को पहले से नवरत्न दर्जा प्राप्त होना चाहिए।
कंपनी का भारतीय शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना तथा सार्वजनिक हिस्सेदारी संबंधी निर्धारित नियमों का पालन करना भी पात्रता का हिस्सा है।
पिछले तीन वर्षों का औसत वार्षिक कारोबार 25,000 करोड़ रुपये से अधिक होना चाहिए।
पिछले तीन वर्षों की औसत वार्षिक निवल संपत्ति 15,000 करोड़ रुपये से अधिक होनी चाहिए।
पिछले तीन वर्षों का औसत वार्षिक कर-पश्चात शुद्ध लाभ 5,000 करोड़ रुपये से अधिक होना चाहिए।
कंपनी की महत्वपूर्ण वैश्विक उपस्थिति अथवा अंतरराष्ट्रीय संचालन होना भी आवश्यक है।
🎯 महारत्न का सूत्र
पहले नवरत्न + ₹25,000 करोड़ कारोबार + ₹15,000 करोड़ निवल संपत्ति + ₹5,000 करोड़ शुद्ध लाभ + वैश्विक उपस्थिति
महारत्न की निवेश स्वायत्तता
बड़े निवेश निर्णयों की स्वतंत्रता
महारत्न कंपनी का निदेशक मंडल सरकार की पूर्व अनुमति के बिना किसी एक परियोजना में 5,000 करोड़ रुपये अथवा कंपनी की निवल संपत्ति के 15 प्रतिशत तक, निर्धारित नियमों के अधीन निवेश निर्णय ले सकता है।
इसके साथ वार्षिक स्तर पर कुल निवेश की सीमा सामान्यतः कंपनी की निवल संपत्ति के 30 प्रतिशत से संबंधित सीमा के अधीन रहती है।
महारत्न कंपनियों को विदेशी संयुक्त उपक्रम, सहायक कंपनियाँ, रणनीतिक निवेश, विलय और वैश्विक विस्तार के मामलों में सामान्य केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों की तुलना में अधिक स्वायत्तता प्राप्त होती है।
भारत की 14 महारत्न कंपनियाँ
जनवरी 2026 की आधिकारिक सूची
| क्रम | महारत्न कंपनी | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|---|
| 1 | भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड | भारी विद्युत एवं इंजीनियरिंग उपकरण; मुख्यालय नई दिल्ली |
| 2 | भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड | पेट्रोलियम क्षेत्र; मुख्यालय मुंबई |
| 3 | कोल इंडिया लिमिटेड | 1975; मुख्यालय कोलकाता |
| 4 | गेल (इंडिया) लिमिटेड | 1984; प्राकृतिक गैस क्षेत्र; मुख्यालय नई दिल्ली |
| 5 | हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड | ऐतिहासिक शुरुआत 1940; वर्तमान कंपनी संरचना 1964; मुख्यालय बेंगलुरु |
| 6 | हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड | 1974 में वर्तमान स्वरूप; मुख्यालय मुंबई |
| 7 | इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड | 1964 में इंडियन ऑयल कंपनी और इंडियन रिफाइनरीज के विलय से वर्तमान स्वरूप; मुख्यालय नई दिल्ली |
| 8 | एनटीपीसी लिमिटेड | 1975; विद्युत उत्पादन; मुख्यालय नई दिल्ली |
| 9 | तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड | 1956; तेल एवं गैस अन्वेषण; मुख्यालय नई दिल्ली |
| 10 | ऑयल इंडिया लिमिटेड | 1959; तेल एवं गैस क्षेत्र |
| 11 | पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड | 1986; विद्युत क्षेत्र का वित्तपोषण; मुख्यालय नई दिल्ली |
| 12 | पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड | 1989; विद्युत पारेषण; प्रमुख कार्यालय गुरुग्राम |
| 13 | आरईसी लिमिटेड | 1969; विद्युत एवं आधारभूत संरचना वित्तपोषण |
| 14 | स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड | इस्पात क्षेत्र; मुख्यालय नई दिल्ली |
2024 की महारत्न सूची से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
स्थापना वर्ष और नामों में होने वाले भ्रम का समाधान
भारत पेट्रोलियम के इतिहास की जड़ें 1952 की बर्मा शेल रिफाइनरीज से जुड़ी हैं, जबकि राष्ट्रीयकरण के बाद वर्तमान भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन नाम 1970 के दशक में आया। इसलिए केवल 1952 को वर्तमान बीपीसीएल की स्थापना कहना अधूरा हो सकता है।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम का वर्तमान स्वरूप 1974 में बना। इसे सीधे 1952 में स्थापित एचपीसीएल कहना सही नहीं है।
ओएनजीसी की स्थापना 1956 में हुई।
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया का गठन 1973 में हुआ था। इसलिए इसे 1956 में स्थापित लिखना सही नहीं है।
भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स का गठन 1964 में हुआ।
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स के इतिहास में 1940 और 1964 दोनों वर्ष आते हैं—1940 में हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट की स्थापना और 1964 में विलय के बाद वर्तमान एचएएल का गठन।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन का वर्तमान स्वरूप 1964 के विलय से बना।
ऑयल इंडिया का गठन 1959 में हुआ; 1981 में यह भारत सरकार की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी बनी। इसलिए 1959 और 1981 को अलग संदर्भ में समझना चाहिए।
एनटीपीसी और कोल इंडिया दोनों की स्थापना 1975 में हुई।
पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन 1986 में स्थापित हुई।
आरईसी 1969 में स्थापित हुई।
गेल 1984 में स्थापित हुई।
पावर ग्रिड 1989 में स्थापित हुई।
वर्तमान संख्या
जनवरी 2026 की स्थिति
| श्रेणी | संख्या |
|---|---|
| महारत्न | 14 |
| नवरत्न | 26 |
| मिनीरत्न-I | 49 |
| मिनीरत्न-II | 9 |
| कुल मिनीरत्न | 58 |
📗 परीक्षा के लिए नवीनतम स्थिति
14 महारत्न + 26 नवरत्न + 49 मिनीरत्न-I + 9 मिनीरत्न-II
तीनों श्रेणियों में मुख्य अंतर
त्वरित तुलना
| आधार | मिनीरत्न | नवरत्न | महारत्न |
|---|---|---|---|
| स्तर | प्रारंभिक विशेष स्वायत्तता | उच्च स्वायत्तता | सर्वोच्च स्वायत्तता |
| प्रमुख आधार | लगातार लाभ और वित्तीय क्षमता | उच्च वित्तीय एवं परिचालन प्रदर्शन | विशाल आकार, मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और वैश्विक उपस्थिति |
| आगे बढ़ने का सामान्य क्रम | मिनीरत्न-I | मिनीरत्न-I से नवरत्न | नवरत्न से महारत्न |
| निवेश शक्ति | सीमित | अधिक | सबसे अधिक |
सबसे महत्वपूर्ण श्रेणी परिवर्तन
पुरानी पुस्तकों से प्रश्न करते समय सावधानी
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड — अब महारत्न।
भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड — महारत्न।
भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड — महारत्न।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड — महारत्न।
ऑयल इंडिया लिमिटेड — महारत्न।
गेल (इंडिया) लिमिटेड — महारत्न।
आरईसी लिमिटेड — महारत्न।
पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड — महारत्न।
इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन — नवरत्न।
इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी — नवरत्न।
भारत संचार निगम लिमिटेड — मिनीरत्न-I।
मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड — मिनीरत्न-I।
टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड — मिनीरत्न-I।
टेलीकम्युनिकेशंस कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड — मिनीरत्न-I।
त्वरित पुनरावृत्ति
परीक्षा से पहले एक नज़र में
⚡ याद रखने योग्य
मिनीरत्न की दो श्रेणियाँ होती हैं—श्रेणी-I और श्रेणी-II।
मिनीरत्न-I के लिए लगातार तीन वर्षों का लाभ और कम-से-कम एक वर्ष में 30 करोड़ रुपये या उससे अधिक कर-पूर्व लाभ महत्वपूर्ण शर्त है।
मिनीरत्न-II के लिए लगातार तीन वर्षों का लाभ और सकारात्मक निवल संपत्ति महत्वपूर्ण है।
नवरत्न के लिए सामान्यतः अनुसूची-A और मिनीरत्न-I का दर्जा तथा निर्धारित प्रदर्शन मानकों में उच्च अंक आवश्यक होते हैं।
महारत्न बनने से पहले नवरत्न होना आवश्यक है।
महारत्न के वित्तीय मानक: औसत कारोबार 25,000 करोड़ रुपये से अधिक, औसत निवल संपत्ति 15,000 करोड़ रुपये से अधिक और औसत शुद्ध लाभ 5,000 करोड़ रुपये से अधिक।
महारत्न की एक परियोजना में निवेश शक्ति सामान्यतः 5,000 करोड़ रुपये अथवा निवल संपत्ति के 15 प्रतिशत की निर्धारित सीमा से जुड़ी है।
HAL अक्टूबर 2024 में महारत्न बना और महारत्न कंपनियों की संख्या 14 हो गई।
⚡ अंतिम पुनरावृत्ति बिंदु
रत्न दर्जा मुख्यतः केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को अधिक वित्तीय और परिचालन स्वायत्तता देने की व्यवस्था है।
सामान्य क्रम — मिनीरत्न → नवरत्न → महारत्न।
मिनीरत्न दो श्रेणियों—मिनीरत्न-I और मिनीरत्न-II—में बाँटे जाते हैं।
जनवरी 2026 की सूची के अनुसार 49 मिनीरत्न-I और 9 मिनीरत्न-II हैं।
जनवरी 2026 की सूची के अनुसार 26 नवरत्न कंपनियाँ हैं।
जनवरी 2026 की सूची के अनुसार 14 महारत्न कंपनियाँ हैं।
आईआरसीटीसी वर्तमान में नवरत्न है; इसे मिनीरत्न याद न करें।
बीएसएनएल वर्तमान में मिनीरत्न-I है।
एचएएल वर्तमान में महारत्न है और अक्टूबर 2024 में इसे यह दर्जा मिला।
बीएचईएल, बीपीसीएल, कोल इंडिया, गेल, एचएएल, एचपीसीएल, आईओसीएल, एनटीपीसी, ओएनजीसी, ऑयल इंडिया, पीएफसी, पावर ग्रिड, आरईसी और सेल वर्तमान 14 महारत्न हैं।
पुरानी प्रतियोगी परीक्षा पुस्तकों में दी गई रत्न कंपनियों की संख्या तथा सूची को वर्तमान स्थिति समझकर याद नहीं करना चाहिए, क्योंकि कंपनियों का दर्जा समय-समय पर बदलता रहता है।