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मुस्लिम लीग की स्थापना (1906)
FOUNDATION OF MUSLIM LEAGUE

मुस्लिम लीग की स्थापना
(1906)

अखिल भारतीय मुस्लिम लीग

बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में भारतीय राजनीति में सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व का प्रश्न तेजी से महत्वपूर्ण होने लगा। 1905 के बंगाल विभाजन, 1906 के शिमला प्रतिनिधिमंडल और उसी वर्ष अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना इस राजनीतिक परिवर्तन की प्रमुख घटनाएँ थीं।

30 दिसंबर 1906 ई. को ढाका में अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना हुई। आगे यह संगठन भारतीय राजनीति की अत्यंत महत्वपूर्ण राजनीतिक शक्ति बन गया।

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मुस्लिम लीग की पृष्ठभूमि

उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम दशकों और बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में ब्रिटिश भारत में राजनीतिक प्रतिनिधित्व का प्रश्न महत्वपूर्ण होता जा रहा था।

इसी समय 1905 में लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल का विभाजन किया गया। विभाजन के बाद भारतीय राजनीति में हिंदू-मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व का प्रश्न और अधिक प्रमुख हुआ।

मुस्लिम अभिजात वर्ग के एक हिस्से में यह धारणा विकसित हुई कि प्रतिनिधित्व आधारित राजनीतिक व्यवस्था में मुसलमानों के राजनीतिक हितों के लिए अलग सुरक्षा और प्रतिनिधित्व आवश्यक है।

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शिमला प्रतिनिधिमंडल — 1906

1 अक्टूबर 1906 ई. को मुस्लिम नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल आगा खान के नेतृत्व में शिमला में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड मिंटो से मिला।

इसे इतिहास में शिमला प्रतिनिधिमंडल के नाम से जाना जाता है।

प्रतिनिधिमंडल ने मुसलमानों के राजनीतिक हितों की सुरक्षा के लिए विधान परिषदों में विशेष प्रतिनिधित्व की मांग की।

इसकी सबसे महत्वपूर्ण मांग यह थी कि मुसलमानों के प्रतिनिधि चुनने के लिए पृथक निर्वाचन मंडल की व्यवस्था की जाए।

इस व्यवस्था का अर्थ था कि मुस्लिम प्रतिनिधियों के चुनाव के लिए मुस्लिम मतदाताओं को अलग निर्वाचन व्यवस्था प्राप्त हो।

लॉर्ड मिंटो ने मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल की राजनीतिक प्रतिनिधित्व संबंधी मांगों के प्रति सकारात्मक रुख दिखाया।

परीक्षा के लिए

1 अक्टूबर 1906 → शिमला प्रतिनिधिमंडल → नेतृत्व आगा खान → वायसराय लॉर्ड मिंटो → पृथक निर्वाचन की मांग।

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अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना

30 दिसंबर 1906 ई. को ढाका में अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना हुई।

इसकी स्थापना ढाका में आयोजित मुहम्मडन एजुकेशनल कॉन्फ्रेंस के अधिवेशन के अवसर पर हुई।

मुस्लिम लीग की स्थापना में नवाब सलीमुल्लाह खां, नवाब मोहसिन-उल-मुल्क और नवाब वकार-उल-मुल्क जैसे नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

आगा खान भी मुस्लिम लीग के प्रारंभिक प्रमुख नेताओं में थे और आगे संगठन के प्रथम स्थायी अध्यक्ष बने।

बहुत महत्वपूर्ण

अखिल भारतीय मुस्लिम लीग — 30 दिसंबर 1906 — ढाका।

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मुस्लिम लीग के प्रारंभिक उद्देश्य

मुस्लिम लीग का प्रारंभिक उद्देश्य भारतीय मुसलमानों के राजनीतिक अधिकारों और हितों की रक्षा करना तथा उनकी राजनीतिक मांगों को ब्रिटिश सरकार के समक्ष प्रस्तुत करना था।

इसके प्रारंभिक उद्देश्यों में ब्रिटिश सरकार के प्रति मुसलमानों में निष्ठा की भावना को बढ़ावा देना भी सम्मिलित था।

संगठन का एक उद्देश्य यह भी था कि मुसलमानों और अन्य समुदायों के बीच ऐसी शत्रुता उत्पन्न न हो जो मुस्लिम लीग के अन्य उद्देश्यों के विरुद्ध हो।

इस प्रकार प्रारंभिक मुस्लिम लीग तत्काल ब्रिटिश शासन से पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त करने के उद्देश्य से स्थापित संगठन नहीं थी।

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अमृतसर अधिवेशन — 1908

1908 ई. में अमृतसर में मुस्लिम लीग का महत्वपूर्ण अधिवेशन आयोजित हुआ।

इस अधिवेशन में मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल की मांग को स्पष्ट रूप से दोहराया और मजबूत किया गया।

मुस्लिम नेतृत्व केवल सीटों के आरक्षण से संतुष्ट नहीं था, बल्कि ऐसा पृथक निर्वाचन चाहता था जिसमें मुस्लिम प्रतिनिधियों के निर्वाचन में मुस्लिम मतदाताओं की अलग भूमिका सुनिश्चित हो।

इसलिए 1908 का अमृतसर अधिवेशन पृथक निर्वाचन की मांग के विकास में महत्वपूर्ण पड़ाव था।

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मार्ले-मिंटो सुधार — 1909

मुस्लिम नेताओं द्वारा की जा रही पृथक निर्वाचन की मांग को अंततः 1909 के भारतीय परिषद अधिनियम के माध्यम से स्वीकार किया गया।

इन संवैधानिक सुधारों को मार्ले-मिंटो सुधार कहा जाता है।

इनका नाम भारत सचिव जॉन मार्ले और भारत के वायसराय लॉर्ड मिंटो के नाम पर पड़ा।

इन सुधारों की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल की व्यवस्था का प्रारंभ शामिल था।

इसके अंतर्गत मुस्लिम मतदाताओं को मुस्लिम प्रतिनिधियों के निर्वाचन के लिए पृथक निर्वाचन व्यवस्था प्रदान की गई।

इसके साथ केंद्रीय और प्रांतीय विधान परिषदों का विस्तार भी किया गया तथा उनमें भारतीय सदस्यों की भागीदारी बढ़ाई गई।

अत्यंत महत्वपूर्ण

मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल को कानूनी मान्यता — भारतीय परिषद अधिनियम, 1909 अर्थात मार्ले-मिंटो सुधार।

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घटनाओं का सही क्रम

वर्ष / तिथि घटना
1905 लॉर्ड कर्जन के समय बंगाल विभाजन
1 अक्टूबर 1906 आगा खान के नेतृत्व में शिमला प्रतिनिधिमंडल की लॉर्ड मिंटो से भेंट
30 दिसंबर 1906 ढाका में अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना
1908 मुस्लिम लीग का अमृतसर अधिवेशन; पृथक निर्वाचन की मांग पर विशेष बल
1909 मार्ले-मिंटो सुधार द्वारा मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन की व्यवस्था
1916 कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच लखनऊ समझौता
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शिमला प्रतिनिधिमंडल और मुस्लिम लीग में अंतर

शिमला प्रतिनिधिमंडल — 1 अक्टूबर 1906 को लॉर्ड मिंटो से मिला था।

मुस्लिम लीग — 30 दिसंबर 1906 को ढाका में स्थापित हुई।

इसलिए शिमला प्रतिनिधिमंडल को मुस्लिम लीग का प्रतिनिधिमंडल लिखना कालक्रम की दृष्टि से ठीक नहीं होगा, क्योंकि प्रतिनिधिमंडल की घटना मुस्लिम लीग की औपचारिक स्थापना से पहले हुई थी।

दोनों घटनाएँ एक ही वर्ष में हुईं और भारतीय मुस्लिम राजनीति के संगठनात्मक विकास में महत्वपूर्ण थीं, लेकिन दोनों को अलग-अलग घटनाओं के रूप में याद रखना चाहिए।

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परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रमुख तथ्य

अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना — 30 दिसंबर 1906 ई.

स्थापना स्थान — ढाका।

शिमला प्रतिनिधिमंडल — 1 अक्टूबर 1906।

शिमला प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व — आगा खान।

उस समय भारत का वायसराय — लॉर्ड मिंटो।

शिमला प्रतिनिधिमंडल की सबसे महत्वपूर्ण मांगों में मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन शामिल था।

1908 — मुस्लिम लीग का अमृतसर अधिवेशन पृथक निर्वाचन की मांग से संबंधित महत्वपूर्ण घटना है।

1909 के मार्ले-मिंटो सुधार द्वारा मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन की व्यवस्था लागू की गई।

मार्ले-मिंटो सुधार का कानूनी आधार भारतीय परिषद अधिनियम, 1909 था।

अंतिम त्वरित पुनरावृत्ति

1905 के बंगाल विभाजन के बाद भारतीय राजनीति में सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व का प्रश्न अधिक महत्वपूर्ण हो गया।

1 अक्टूबर 1906 को आगा खान के नेतृत्व में मुस्लिम नेताओं का शिमला प्रतिनिधिमंडल वायसराय लॉर्ड मिंटो से मिला।

इस प्रतिनिधिमंडल ने मुसलमानों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की सुरक्षा तथा पृथक निर्वाचन की मांग की।

30 दिसंबर 1906 को ढाका में अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना हुई।

इसकी स्थापना में नवाब सलीमुल्लाह खां, नवाब मोहसिन-उल-मुल्क और नवाब वकार-उल-मुल्क जैसे नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

आगा खान मुस्लिम लीग के प्रारंभिक प्रमुख नेताओं में रहे और संगठन के प्रथम स्थायी अध्यक्ष बने।

मुस्लिम लीग का प्रारंभिक उद्देश्य मुसलमानों के राजनीतिक अधिकारों और हितों की रक्षा करना था।

1908 के अमृतसर अधिवेशन में पृथक निर्वाचन की मांग को स्पष्ट रूप से दोहराया गया।

अंततः भारतीय परिषद अधिनियम, 1909 अर्थात मार्ले-मिंटो सुधार के द्वारा मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल की व्यवस्था की गई।

सबसे महत्वपूर्ण क्रम है — 1905 बंगाल विभाजन → 1 अक्टूबर 1906 शिमला प्रतिनिधिमंडल → 30 दिसंबर 1906 मुस्लिम लीग की स्थापना → 1908 अमृतसर अधिवेशन → 1909 मार्ले-मिंटो सुधार।

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