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लॉर्ड चेम्सफोर्ड
LORD CHELMSFORD

लॉर्ड चेम्सफोर्ड

1916–1921 — होमरूल आंदोलन से असहयोग आंदोलन तक

लॉर्ड चेम्सफोर्ड का कार्यकाल

लॉर्ड चेम्सफोर्ड 1916 से 1921 तक भारत के वायसराय एवं गवर्नर-जनरल रहे। उनका कार्यकाल भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के अत्यंत महत्वपूर्ण चरण से जुड़ा था। होमरूल आंदोलन, लखनऊ अधिवेशन एवं लखनऊ समझौता, चंपारण और खेड़ा सत्याग्रह, अहमदाबाद मिल हड़ताल, मांटेग्यू घोषणा, रॉलेट एक्ट, जलियांवाला बाग हत्याकांड, खिलाफत आंदोलन और असहयोग आंदोलन जैसी महत्वपूर्ण घटनाएँ इसी काल में हुईं।

01

महिला विश्वविद्यालय की स्थापना

Women’s University — 1916

धोंडो केशव कर्वे महिला शिक्षा और विधवा पुनर्विवाह के प्रमुख समर्थकों में थे। उनके प्रयासों से 1916 में भारतीय महिला विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। यह भारत में महिलाओं के लिए स्थापित प्रथम विश्वविद्यालय माना जाता है।

प्रतियोगी पुस्तकों में इसे प्रायः पुणे में डी. के. कर्वे द्वारा महिला विश्वविद्यालय की स्थापना के रूप में लिखा मिलता है। अधिक सटीक रूप में विश्वविद्यालय की स्थापना 1916 में बंबई में हुई थी; कर्वे की महिला-शिक्षा संबंधी संस्थाओं और गतिविधियों का पुणे से गहरा संबंध था और बाद में विश्वविद्यालय का मुख्यालय भी पुणे स्थानांतरित हुआ।

उद्योगपति सर विठ्ठलदास ठाकरेसी के सहयोग के बाद विश्वविद्यालय का नाम उनकी माता श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकरेसी की स्मृति में रखा गया और यह आगे चलकर एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

🎯 परीक्षा तथ्य

1916 — डी. के. कर्वे — भारतीय महिला विश्वविद्यालय — भारत का प्रथम महिला विश्वविद्यालय।

02

होमरूल लीग आंदोलन

Home Rule League Movement

1916 में बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट ने अलग-अलग होमरूल लीगों की स्थापना की। इनका उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत भारत के लिए स्वशासन की मांग को लोकप्रिय बनाना था।

बाल गंगाधर तिलक ने अप्रैल 1916 में अपनी होमरूल लीग स्थापित की। इसका प्रमुख कार्यक्षेत्र महाराष्ट्र के कुछ भागों, कर्नाटक, मध्य प्रांत और बरार आदि क्षेत्रों में था।

एनी बेसेंट ने सितंबर 1916 में अपनी अखिल भारतीय होमरूल लीग स्थापित की। उनकी लीग का कार्यक्षेत्र तिलक की लीग से अधिक व्यापक था और देश के अनेक क्षेत्रों में इसकी शाखाएँ स्थापित की गईं।

होमरूल आंदोलन ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय राजनीति में स्वशासन की मांग को नई गति दी और राष्ट्रीय आंदोलन के पुनरुत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

📗 भ्रम न रखें

1916 में एक नहीं बल्कि दो अलग-अलग होमरूल लीगें थीं — एक तिलक की और दूसरी एनी बेसेंट की।

03

कांग्रेस का लखनऊ अधिवेशन

Lucknow Session — 1916

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का लखनऊ अधिवेशन दिसंबर 1916 में आयोजित हुआ। इसकी अध्यक्षता अंबिका चरण मजूमदार ने की।

इस अधिवेशन का एक बड़ा महत्व यह था कि कांग्रेस के नरमपंथी और गरमपंथी गुटों का पुनर्मिलन हुआ। 1907 के सूरत विभाजन के बाद दोनों धाराएँ अलग हो गई थीं।

इसी समय कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच प्रसिद्ध लखनऊ समझौता, 1916 हुआ। दोनों संगठनों ने संवैधानिक सुधारों की संयुक्त मांगों पर सहमति बनाई।

लखनऊ समझौते में कांग्रेस ने मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की व्यवस्था स्वीकार की। यह व्यवस्था इससे पहले 1909 के मार्ले-मिंटो सुधारों द्वारा लागू की जा चुकी थी।

🎯 लखनऊ 1916 के तीन महत्वपूर्ण तथ्य

नरमपंथी–गरमपंथी पुनर्मिलन + कांग्रेस–मुस्लिम लीग लखनऊ समझौता + अध्यक्ष अंबिका चरण मजूमदार।

04

गांधीजी और प्रारंभिक सत्याग्रह

Gandhian Movements

महात्मा गांधी 9 जनवरी 1915 को दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे। इसलिए उनकी स्वदेश वापसी को चेम्सफोर्ड के कार्यकाल की घटना नहीं माना जाता, क्योंकि चेम्सफोर्ड ने 1916 में पद संभाला।

गांधीजी ने 1915 में अहमदाबाद के कोचरब में सत्याग्रह आश्रम स्थापित किया। 1917 में आश्रम को साबरमती नदी के किनारे स्थानांतरित किया गया, जिसके बाद यह साबरमती आश्रम के नाम से प्रसिद्ध हुआ। अतः “साबरमती आश्रम की स्थापना 1916” लिखना सटीक नहीं है।

1917 का चंपारण सत्याग्रह भारत में गांधीजी का पहला महत्वपूर्ण सत्याग्रह माना जाता है। यह बिहार के चंपारण में नील की खेती करने वाले किसानों की समस्याओं से संबंधित था।

1918 का अहमदाबाद मिल आंदोलन कपड़ा मिल मजदूरों और मिल मालिकों के बीच वेतन से संबंधित विवाद से जुड़ा था। गांधीजी ने मजदूरों के समर्थन में सत्याग्रह और उपवास का सहारा लिया।

1918 का खेड़ा सत्याग्रह गुजरात के खेड़ा जिले के किसानों से संबंधित था। फसल खराब होने के बावजूद भू-राजस्व वसूली के विरोध में आंदोलन किया गया। इस आंदोलन में सरदार वल्लभभाई पटेल सहित स्थानीय नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

⚡ गांधीजी के प्रारंभिक आंदोलनों का क्रम

चंपारण — 1917 अहमदाबाद — 1918 खेड़ा — 1918
05

मांटेग्यू घोषणा, 1917

Montagu Declaration — 1917

20 अगस्त 1917 को भारत सचिव एडविन सैमुअल मांटेग्यू ने ब्रिटिश संसद में भारत के संबंध में एक महत्वपूर्ण घोषणा की। इसे मांटेग्यू घोषणा कहा जाता है।

इस घोषणा में भारत के प्रशासन में भारतीयों की बढ़ती भागीदारी तथा उत्तरदायी शासन की क्रमिक स्थापना को ब्रिटिश नीति का उद्देश्य बताया गया।

मांटेग्यू घोषणा के बाद भारत सचिव मांटेग्यू और वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड ने संवैधानिक सुधारों की योजना तैयार की। इन्हीं सुधारों ने आगे चलकर भारत सरकार अधिनियम, 1919 का आधार तैयार किया।

06

भारत सरकार अधिनियम, 1919

Government of India Act — 1919

भारत सरकार अधिनियम, 1919 मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों पर आधारित था। इस अधिनियम ने भारतीय शासन व्यवस्था में कुछ महत्वपूर्ण संवैधानिक परिवर्तन किए।

इसकी सबसे प्रसिद्ध विशेषता प्रांतों में द्वैध शासन की स्थापना थी। प्रांतीय विषयों को आरक्षित विषय और हस्तांतरित विषय दो भागों में बाँटा गया।

आरक्षित विषयों का प्रशासन गवर्नर और उसकी कार्यकारी परिषद के नियंत्रण में रहा, जबकि हस्तांतरित विषय भारतीय मंत्रियों को दिए गए, जो प्रांतीय विधान परिषद के प्रति उत्तरदायी थे।

केंद्र में पहली बार द्विसदनीय विधानमंडल की व्यवस्था की गई। इसके अंतर्गत राज्य परिषद और केंद्रीय विधान सभा की व्यवस्था की गई।

इस अधिनियम ने मताधिकार का विस्तार किया, लेकिन मतदान का अधिकार सार्वभौमिक नहीं था और सीमित योग्यता पर आधारित था। पृथक निर्वाचक मंडल की व्यवस्था को भी आगे बढ़ाया गया।

🎯 सबसे महत्वपूर्ण तथ्य

भारत सरकार अधिनियम, 1919 — प्रांतों में द्वैध शासन।

07

सैडलर आयोग, 1917

Sadler Commission — 1917

1917 में सैडलर आयोग की नियुक्ति की गई। इसके अध्यक्ष माइकल अर्नेस्ट सैडलर थे। इसे कलकत्ता विश्वविद्यालय आयोग भी कहा जाता है।

इसे केवल “भारत की पूरी शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए बनाया गया आयोग” कहना अत्यधिक व्यापक होगा। इसका मुख्य उद्देश्य कलकत्ता विश्वविद्यालय की समस्याओं और उच्च शिक्षा की स्थिति की जाँच करना था, लेकिन आयोग ने माध्यमिक और विश्वविद्यालय शिक्षा के संबंध पर भी व्यापक सुझाव दिए।

आयोग ने विद्यालयी शिक्षा को 12 वर्ष का करने और इंटरमीडिएट स्तर को विश्वविद्यालय से अलग करने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए। इसके सुझावों ने आगे भारत में माध्यमिक और उच्च शिक्षा के विकास को प्रभावित किया।

08

रॉलेट एक्ट, 1919

Rowlatt Act — 1919

1919 में रॉलेट एक्ट पारित किया गया। इसका आधार न्यायमूर्ति सिडनी रॉलेट की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशें थीं।

इस कानून ने सरकार को क्रांतिकारी गतिविधियों के संदेह में व्यक्तियों को बिना सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के हिरासत में रखने जैसी कठोर शक्तियाँ प्रदान कीं। भारतीयों ने इसे नागरिक स्वतंत्रताओं पर हमला माना।

गांधीजी ने रॉलेट एक्ट के विरोध में रॉलेट सत्याग्रह शुरू किया। 6 अप्रैल 1919 को देशव्यापी हड़ताल और विरोध का आह्वान किया गया।

इस कानून को भारतीय राष्ट्रवादियों ने व्यापक रूप से काला कानून कहा।

09

जलियांवाला बाग हत्याकांड

Jallianwala Bagh Massacre — 1919

13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन पंजाब के अमृतसर स्थित जलियांवाला बाग में एकत्रित लोगों पर ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड डायर के आदेश पर सैनिकों ने गोलीबारी की।

पंजाब में डॉ. सैफुद्दीन किचलू और डॉ. सत्यपाल की गिरफ्तारी के बाद तनाव बढ़ गया था। जलियांवाला बाग में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे और डायर सैनिकों के साथ वहाँ पहुँचा।

सरकारी आँकड़ों के अनुसार 379 लोगों की मृत्यु हुई और 1,200 के लगभग घायल बताए गए, जबकि भारतीय स्रोतों और अन्य अनुमानों में मृतकों की संख्या इससे अधिक मानी गई।

इस घटना की जाँच के लिए ब्रिटिश सरकार ने हंटर समिति नियुक्त की।

रवीन्द्रनाथ टैगोर ने जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रदान की गई अपनी नाइटहुड की उपाधि त्याग दी।

🎯 याद रखें

13 अप्रैल 1919 — अमृतसर — जलियांवाला बाग — जनरल डायर।

10

खिलाफत आंदोलन

Khilafat Movement

प्रथम विश्व युद्ध के बाद तुर्की के सुल्तान और खलीफा की स्थिति को लेकर भारतीय मुसलमानों में असंतोष बढ़ा। इसी पृष्ठभूमि में भारत में खिलाफत आंदोलन विकसित हुआ।

इसके प्रमुख नेताओं में मौलाना मोहम्मद अली, मौलाना शौकत अली, मौलाना अबुल कलाम आजाद और हकीम अजमल खाँ आदि शामिल थे। मोहम्मद अली और शौकत अली को संयुक्त रूप से अली बंधु कहा जाता है।

महात्मा गांधी ने खिलाफत आंदोलन का समर्थन किया और इसे ब्रिटिश शासन के विरुद्ध व्यापक जनआंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया। इससे कुछ समय के लिए हिंदू-मुस्लिम राजनीतिक एकता को भी बल मिला।

11

असहयोग आंदोलन

Non-Cooperation Movement — 1920

असहयोग आंदोलन 1920 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ। इसके पीछे रॉलेट एक्ट, जलियांवाला बाग हत्याकांड, पंजाब में ब्रिटिश दमन और खिलाफत प्रश्न जैसे कारण महत्वपूर्ण थे।

सितंबर 1920 के कलकत्ता विशेष अधिवेशन में कांग्रेस ने असहयोग कार्यक्रम को स्वीकार किया और दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन में इसे अधिक व्यवस्थित रूप प्रदान किया गया।

आंदोलन के कार्यक्रम में सरकारी उपाधियों का त्याग, सरकारी शिक्षण संस्थाओं और अदालतों का बहिष्कार, विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार तथा स्वदेशी को प्रोत्साहन देना शामिल था।

असहयोग और खिलाफत आंदोलन इस काल में एक-दूसरे से निकटता से जुड़े और गांधीजी ने दोनों को ब्रिटिश शासन के विरुद्ध व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास किया।

📗 महत्वपूर्ण अंतर

खिलाफत आंदोलन का विकास 1919 से हुआ, जबकि कांग्रेस का असहयोग आंदोलन 1920 में औपचारिक रूप से व्यापक कार्यक्रम के रूप में सामने आया। दोनों को एक ही आंदोलन न समझें।

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बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु

Death of Bal Gangadhar Tilak — 1920

महान राष्ट्रवादी नेता बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु 1 अगस्त 1920 को बंबई में हुई। उनकी मृत्यु लॉर्ड चेम्सफोर्ड के कार्यकाल में हुई थी।

तिलक को लोकप्रिय रूप से लोकमान्य तिलक कहा जाता था। उनका प्रसिद्ध उद्घोष था — “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा।”

तिलक ने राष्ट्रीय आंदोलन को जनसाधारण तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गणपति उत्सव और शिवाजी उत्सव के सार्वजनिक आयोजन तथा केसरी और मराठा समाचार पत्रों के माध्यम से उन्होंने राष्ट्रवादी चेतना के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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महत्वपूर्ण घटनाक्रम

Important Timeline

वर्षघटनामुख्य तथ्य
1916महिला विश्वविद्यालयडी. के. कर्वे के प्रयासों से स्थापना
1916होमरूल लीगतिलक और एनी बेसेंट की अलग-अलग लीगें
1916लखनऊ अधिवेशनकांग्रेस पुनर्मिलन और लखनऊ समझौता
1917चंपारण सत्याग्रहभारत में गांधीजी का पहला महत्वपूर्ण सत्याग्रह
1917मांटेग्यू घोषणाउत्तरदायी शासन की क्रमिक स्थापना का लक्ष्य
1917सैडलर आयोगकलकत्ता विश्वविद्यालय एवं शिक्षा संबंधी जाँच
1918अहमदाबाद आंदोलनमिल मजदूरों से संबंधित
1918खेड़ा सत्याग्रहकिसानों के भू-राजस्व का प्रश्न
1919रॉलेट एक्टदमनकारी कानून
1919जलियांवाला बाग13 अप्रैल, अमृतसर
1919भारत सरकार अधिनियमप्रांतों में द्वैध शासन
1919–20खिलाफत आंदोलनअली बंधु प्रमुख नेताओं में
1920तिलक की मृत्यु1 अगस्त 1920
1920असहयोग आंदोलनगांधीजी के नेतृत्व में व्यापक आंदोलन
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त्वरित पुनरावृत्ति

Quick Revision

⚡ क्रम से याद करें

होमरूल — 1916 लखनऊ — 1916 चंपारण — 1917 मांटेग्यू घोषणा — 1917 अहमदाबाद/खेड़ा — 1918 रॉलेट एक्ट — 1919 जलियांवाला बाग — 1919 असहयोग — 1920

⚡ अंतिम पुनरावृत्ति

लॉर्ड चेम्सफोर्ड — 1916–1921 — भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के अत्यंत महत्वपूर्ण दौर के वायसराय।

1916 — डी. के. कर्वे के प्रयासों से भारत के प्रथम महिला विश्वविद्यालय की स्थापना।

1916 — तिलक और एनी बेसेंट ने अलग-अलग होमरूल लीगों की स्थापना की।

लखनऊ अधिवेशन, 1916 — अध्यक्ष अंबिका चरण मजूमदार; नरमपंथी-गरमपंथी पुनर्मिलन तथा कांग्रेस-मुस्लिम लीग लखनऊ समझौता।

गांधीजी भारत लौटे — 1915; कोचरब आश्रम — 1915; वर्तमान साबरमती स्थल पर आश्रम — 1917।

गांधीजी के प्रारंभिक आंदोलन — चंपारण 1917, अहमदाबाद 1918 और खेड़ा 1918।

मांटेग्यू घोषणा — 20 अगस्त 1917 — भारत में उत्तरदायी शासन की क्रमिक स्थापना की दिशा में घोषणा।

सैडलर आयोग — 1917 — कलकत्ता विश्वविद्यालय की समस्याओं तथा शिक्षा व्यवस्था से संबंधित महत्वपूर्ण आयोग।

भारत सरकार अधिनियम, 1919 — प्रांतों में द्वैध शासन इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता।

रॉलेट एक्ट — 1919 — दमनकारी कानून; इसके विरुद्ध गांधीजी का रॉलेट सत्याग्रह।

जलियांवाला बाग हत्याकांड — 13 अप्रैल 1919 — अमृतसर — जनरल डायर।

खिलाफत आंदोलन — प्रथम विश्व युद्ध के बाद खलीफा के प्रश्न से संबंधित; अली बंधु इसके प्रमुख नेताओं में थे।

असहयोग आंदोलन — 1920 — गांधीजी के नेतृत्व में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध व्यापक जनआंदोलन।

बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु — 1 अगस्त 1920।

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