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लॉर्ड माउंटबेटन
LORD MOUNTBATTEN

लॉर्ड माउंटबेटन

1947–1948 — सत्ता हस्तांतरण, भारत विभाजन और स्वतंत्रता

लॉर्ड माउंटबेटन का कार्यकाल

लॉर्ड लुई माउंटबेटन ब्रिटिश भारत के अंतिम वायसराय थे। उनके कार्यकाल में भारत में ब्रिटिश शासन का अंत हुआ, भारत और पाकिस्तान दो नए स्वतंत्र डोमिनियन बने तथा स्वतंत्र भारत में माउंटबेटन पहले गवर्नर-जनरल बने।

उनका कार्यकाल मुख्य रूप से 3 जून योजना, भारत का विभाजन, रेडक्लिफ सीमा आयोग, भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम और सत्ता हस्तांतरण से जुड़ा हुआ है।

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अंतिम वायसराय

1947 में भारत आगमन

लॉर्ड माउंटबेटन ने मार्च 1947 में लॉर्ड वेवेल का स्थान लेकर भारत के अंतिम वायसराय के रूप में कार्यभार संभाला।

ब्रिटिश सरकार ने उन्हें भारत में सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को पूरा करने और कांग्रेस तथा मुस्लिम लीग के बीच राजनीतिक गतिरोध का समाधान निकालने की जिम्मेदारी दी थी।

भारत की राजनीतिक परिस्थितियों और बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा को देखते हुए माउंटबेटन इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि सत्ता हस्तांतरण को पहले से निर्धारित समय से शीघ्र पूरा करना आवश्यक है।

🎯 परीक्षा के लिए

लॉर्ड वेवेल → लॉर्ड माउंटबेटन → ब्रिटिश भारत के अंतिम वायसराय।

02

3 जून की माउंटबेटन योजना

भारत विभाजन की योजना

3 जून 1947 को भारत में सत्ता हस्तांतरण और विभाजन से संबंधित योजना की घोषणा की गई। यह योजना माउंटबेटन योजना या 3 जून योजना के नाम से प्रसिद्ध हुई।

इस योजना में ब्रिटिश भारत को दो नए राजनीतिक क्षेत्रों — भारत और पाकिस्तान — में बाँटकर सत्ता हस्तांतरित करने का मार्ग स्वीकार किया गया।

कांग्रेस और मुस्लिम लीग सहित प्रमुख राजनीतिक पक्षों द्वारा योजना स्वीकार किए जाने के बाद भारत के विभाजन और स्वतंत्रता की संवैधानिक प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ी।

योजना के अनुसार पंजाब और बंगाल के विभाजन का प्रश्न उनकी विधानसभाओं के संबंधित भागों के निर्णय के आधार पर तय किया जाना था।

📗 याद रखें

3 जून 1947 → माउंटबेटन योजना → भारत विभाजन और सत्ता हस्तांतरण।

03

पंजाब और बंगाल का विभाजन

दो प्रांतों का बँटवारा

भारत और पाकिस्तान के निर्माण के साथ पंजाब और बंगाल प्रांतों का भी विभाजन किया गया।

बंगाल के विभाजन से पूर्वी बंगाल पाकिस्तान में और पश्चिम बंगाल भारत में शामिल हुआ।

इसी प्रकार पंजाब के विभाजन से पश्चिमी पंजाब पाकिस्तान में तथा पूर्वी पंजाब भारत में शामिल हुआ।

04

रेडक्लिफ सीमा आयोग

पंजाब और बंगाल की सीमाओं का निर्धारण

पंजाब और बंगाल के विभाजन के बाद दोनों नए देशों के बीच सीमा निर्धारित करने के लिए दो सीमा आयोग बनाए गए — एक पंजाब के लिए और दूसरा बंगाल के लिए।

दोनों आयोगों के अध्यक्ष ब्रिटिश न्यायविद सर सिरिल रेडक्लिफ थे। इसी कारण विभाजन के बाद निर्धारित भारत-पाकिस्तान सीमा को सामान्यतः रेडक्लिफ रेखा कहा गया।

रेडक्लिफ को अत्यंत कम समय में जनसंख्या, धार्मिक बहुलता और अन्य प्रशासनिक तथ्यों के आधार पर सीमा निर्धारित करने का कठिन कार्य दिया गया।

रेडक्लिफ निर्णय 17 अगस्त 1947 को सार्वजनिक किया गया, अर्थात भारत और पाकिस्तान की स्वतंत्रता के बाद अंतिम सीमा-निर्णय औपचारिक रूप से सामने आया।

🔎 भ्रम न रखें

एक ही संयुक्त आयोग के बजाय पंजाब और बंगाल के लिए अलग-अलग सीमा आयोग थे, लेकिन दोनों के अध्यक्ष सर सिरिल रेडक्लिफ थे।

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भारतीय स्वतंत्रता विधेयक

4 जुलाई 1947

4 जुलाई 1947 को ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ कॉमन्स में भारतीय स्वतंत्रता विधेयक प्रस्तुत किया गया।

यह विधेयक ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली द्वारा प्रस्तुत किया गया था। इसलिए इसे किसी व्यक्ति या देश के नाम “इटली” से जोड़ना सही नहीं है।

इस विधेयक ने 3 जून योजना को कानूनी रूप देने और भारत में ब्रिटिश सत्ता समाप्त करने का संवैधानिक मार्ग तैयार किया।

🎯 परीक्षा के लिए

4 जुलाई 1947 → भारतीय स्वतंत्रता विधेयक → प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली।

06

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947

18 जुलाई 1947 को राजकीय स्वीकृति

ब्रिटिश संसद से पारित होने के बाद भारतीय स्वतंत्रता विधेयक को 18 जुलाई 1947 को राजकीय स्वीकृति मिली और यह भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 बन गया।

इस अधिनियम के अनुसार 15 अगस्त 1947 से भारत में दो स्वतंत्र डोमिनियन — भारत और पाकिस्तान — स्थापित किए जाने थे।

अधिनियम ने ब्रिटिश संसद के भारत पर विधायी नियंत्रण की समाप्ति तथा दोनों नए डोमिनियनों को अपने शासन के लिए कानून बनाने की शक्ति प्रदान की।

भारत और पाकिस्तान के लिए अलग-अलग गवर्नर-जनरल की व्यवस्था भी अधिनियम में की गई थी।

📗 महत्वपूर्ण तिथियाँ

4 जुलाई 1947 — विधेयक प्रस्तुत
18 जुलाई 1947 — भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम
15 अगस्त 1947 — भारत में नया संवैधानिक शासन प्रभावी

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भारत और पाकिस्तान का निर्माण

दो स्वतंत्र डोमिनियन

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम के आधार पर ब्रिटिश भारत का विभाजन हुआ और भारत तथा पाकिस्तान दो स्वतंत्र डोमिनियन बने।

पाकिस्तान ने 14 अगस्त 1947 को अपनी स्वतंत्रता का उत्सव मनाया, जबकि भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ।

स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू बने, जबकि पाकिस्तान के पहले गवर्नर-जनरल मोहम्मद अली जिन्ना बने।

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स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल

लॉर्ड माउंटबेटन

15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन समाप्त होने के साथ वायसराय का पद समाप्त हो गया।

इसके बाद लॉर्ड माउंटबेटन स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल बने।

उन्होंने स्वतंत्र भारत के गवर्नर-जनरल के रूप में 21 जून 1948 तक कार्य किया।

उनके बाद चक्रवर्ती राजगोपालाचारी भारत के गवर्नर-जनरल बने। वे स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय तथा अंतिम गवर्नर-जनरल थे।

🔎 दोनों को अलग याद रखें

स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल — लॉर्ड माउंटबेटन
प्रथम भारतीय गवर्नर-जनरल — चक्रवर्ती राजगोपालाचारी

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देशी रियासतों का प्रश्न

ब्रिटिश सर्वोच्चता का अंत

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम के साथ देशी रियासतों पर ब्रिटिश सर्वोच्चता समाप्त हो गई। ब्रिटिश सरकार और रियासतों के बीच पुरानी संधियाँ भी समाप्त होने लगीं।

इसके बाद रियासतों के सामने भारत या पाकिस्तान में शामिल होने का प्रश्न आया। भारत की ओर से रियासतों के एकीकरण में सरदार वल्लभभाई पटेल और वी. पी. मेनन की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही।

जूनागढ़, हैदराबाद और जम्मू-कश्मीर जैसी कुछ रियासतों का प्रश्न विशेष रूप से जटिल रहा और उनका समाधान अलग-अलग परिस्थितियों में हुआ।

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माउंटबेटन और सत्ता हस्तांतरण

भारत में ब्रिटिश शासन का अंत

माउंटबेटन को प्रारंभ में जून 1948 तक सत्ता हस्तांतरित करने की ब्रिटिश योजना के संदर्भ में भारत भेजा गया था, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों के कारण सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को बहुत तेज कर दिया गया।

3 जून योजना के बाद केवल कुछ सप्ताह के भीतर भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम पारित हुआ और 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हो गया।

इस प्रकार माउंटबेटन का कार्यकाल ब्रिटिश शासन के अंतिम चरण और स्वतंत्र भारत की शुरुआत — दोनों से जुड़ा हुआ है।

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महत्वपूर्ण घटनाएँ — एक नजर में

त्वरित परीक्षा पुनरावृत्ति

तिथि / वर्ष प्रमुख घटना
मार्च 1947 लॉर्ड माउंटबेटन ने अंतिम वायसराय के रूप में कार्यभार संभाला।
3 जून 1947 माउंटबेटन योजना की घोषणा।
1947 पंजाब और बंगाल के लिए सीमा आयोग; अध्यक्ष — सर सिरिल रेडक्लिफ।
4 जुलाई 1947 ब्रिटिश संसद में भारतीय स्वतंत्रता विधेयक प्रस्तुत।
18 जुलाई 1947 भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम को राजकीय स्वीकृति।
14 अगस्त 1947 पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस।
15 अगस्त 1947 भारत स्वतंत्र; माउंटबेटन स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल बने।
17 अगस्त 1947 रेडक्लिफ सीमा निर्णय सार्वजनिक किया गया।
21 जून 1948 माउंटबेटन का गवर्नर-जनरल का कार्यकाल समाप्त।
1948 चक्रवर्ती राजगोपालाचारी भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल बने।
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त्वरित रिविजन

एक क्रम में पूरा अध्याय

⚡ याद रखने का क्रम

माउंटबेटन अंतिम वायसराय 3 जून योजना रेडक्लिफ आयोग 4 जुलाई विधेयक 18 जुलाई अधिनियम भारत-पाकिस्तान 15 अगस्त स्वतंत्रता प्रथम गवर्नर-जनरल

⚡ अंतिम पुनरावृत्ति

लॉर्ड माउंटबेटन ब्रिटिश भारत के अंतिम वायसराय थे।

3 जून 1947 को भारत विभाजन और सत्ता हस्तांतरण से संबंधित माउंटबेटन योजना की घोषणा हुई।

पंजाब और बंगाल के विभाजन के लिए अलग-अलग सीमा आयोग बनाए गए, जिनके अध्यक्ष सर सिरिल रेडक्लिफ थे।

4 जुलाई 1947 को ब्रिटिश संसद में प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली द्वारा भारतीय स्वतंत्रता विधेयक प्रस्तुत किया गया।

18 जुलाई 1947 को यह भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 बना।

इस अधिनियम ने भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियन स्थापित करने का प्रावधान किया।

15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ और लॉर्ड माउंटबेटन स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल बने।

चक्रवर्ती राजगोपालाचारी स्वतंत्र भारत के प्रथम भारतीय तथा अंतिम गवर्नर-जनरल बने।

रेडक्लिफ सीमा निर्णय 17 अगस्त 1947 को सार्वजनिक किया गया।

माउंटबेटन ने 21 जून 1948 तक स्वतंत्र भारत के गवर्नर-जनरल के रूप में कार्य किया।

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