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लॉर्ड रीडिंग
LORD READING

लॉर्ड रीडिंग

1921–1926 — असहयोग आंदोलन की वापसी, स्वराज पार्टी, काकोरी कांड और राष्ट्रीय आंदोलन

लॉर्ड रीडिंग का शासनकाल

लॉर्ड रीडिंग 1921 से 1926 तक भारत का वायसराय रहा। उसका कार्यकाल भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के अत्यंत महत्वपूर्ण दौर से जुड़ा था। इसी समय असहयोग आंदोलन अपने चरम पर पहुँचा और चौरी-चौरा की घटना के बाद महात्मा गांधी ने इसे वापस ले लिया। मोपला विद्रोह, स्वराज पार्टी की स्थापना, काकोरी ट्रेन कार्रवाई और साम्यवादी आंदोलन के संगठन जैसी महत्वपूर्ण घटनाएँ भी इसी दौर से संबंधित हैं।

01

लॉर्ड रीडिंग

भारत का वायसराय — 1921 से 1926

लॉर्ड रीडिंग ने 1921 में भारत के वायसराय का पद ग्रहण किया और 1926 तक इस पद पर रहा। वह लॉर्ड चेम्सफोर्ड के बाद भारत का वायसराय बना।

उसके शासनकाल में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन ने कई महत्वपूर्ण मोड़ लिए। असहयोग आंदोलन की समाप्ति के बाद भारतीय राजनीति में विधान परिषदों में प्रवेश कर ब्रिटिश शासन का विरोध करने की नई रणनीति सामने आई, जबकि दूसरी ओर क्रांतिकारी गतिविधियाँ भी तेज हुईं।

1926 में लॉर्ड रीडिंग के बाद लॉर्ड इरविन भारत का वायसराय बना।

🎯 परीक्षा के लिए

लॉर्ड चेम्सफोर्ड → लॉर्ड रीडिंग → लॉर्ड इरविन वायसरायों का महत्वपूर्ण क्रम है।

02

प्रिंस ऑफ वेल्स की भारत यात्रा

1921 — व्यापक विरोध

लॉर्ड रीडिंग के शासनकाल में 1921 में प्रिंस ऑफ वेल्स एडवर्ड भारत आया। उस समय देश में महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन चल रहा था।

राष्ट्रीय आंदोलन के नेताओं ने उसकी यात्रा के बहिष्कार का आह्वान किया। जब 17 नवंबर 1921 को प्रिंस ऑफ वेल्स बंबई पहुँचा, तो उसके स्वागत के बजाय हड़ताल और विरोध प्रदर्शन किए गए।

प्रिंस ऑफ वेल्स की यात्रा का विरोध असहयोग आंदोलन के दौरान ब्रिटिश शासन के प्रति भारतीय जनता के बढ़ते असंतोष का महत्वपूर्ण उदाहरण था।

03

मोपला विद्रोह

1921 — मालाबार, केरल

1921 में केरल के मालाबार क्षेत्र में मोपला या माप्पिला विद्रोह हुआ। मोपला मुख्यतः मालाबार क्षेत्र के मुस्लिम कृषक समुदाय से संबंधित थे।

इस विद्रोह की पृष्ठभूमि जटिल थी। इसमें ब्रिटिश शासन और जमींदारी व्यवस्था के विरुद्ध असंतोष के साथ खिलाफत तथा असहयोग आंदोलन से उत्पन्न राजनीतिक वातावरण का भी प्रभाव था।

विद्रोह के दौरान बाद में व्यापक हिंसा हुई और कई स्थानों पर हिंदुओं के विरुद्ध हत्याएँ, लूटपाट और जबरन धर्मांतरण की घटनाएँ भी दर्ज हुईं। ब्रिटिश सरकार ने विद्रोह को कठोर सैन्य कार्रवाई के माध्यम से दबाया।

इसलिए मोपला विद्रोह को केवल किसान विद्रोह या केवल धार्मिक संघर्ष के रूप में समझना अधूरा है; इसके कृषक, औपनिवेशिक, राजनीतिक और सांप्रदायिक सभी आयाम थे।

📗 याद रखें

मोपला विद्रोह → 1921 → मालाबार, केरल।

04

विश्वभारती की स्थापना

1921 — शांतिनिकेतन

रवीन्द्रनाथ टैगोर ने पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में विश्वभारती की स्थापना की। विश्वभारती की आधिकारिक स्थापना तिथि 22 नवंबर 1921 मानी जाती है।

विश्वभारती की परिकल्पना ऐसे शिक्षा केंद्र के रूप में की गई थी जहाँ भारतीय और विश्व की विभिन्न संस्कृतियों के बीच ज्ञान और विचारों का आदान-प्रदान हो सके।

इसका विकास रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा 1901 में शांतिनिकेतन में स्थापित विद्यालय की पृष्ठभूमि में हुआ था।

बाद में 1951 में संसद के अधिनियम द्वारा विश्वभारती को केंद्रीय विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय महत्त्व की संस्था का दर्जा दिया गया।

🔎 महत्वपूर्ण तथ्य

विश्वभारती → 1921 → रवीन्द्रनाथ टैगोर → शांतिनिकेतन।

05

चौरी-चौरा की घटना

5 फरवरी 1922 — गोरखपुर

5 फरवरी 1922 को संयुक्त प्रांत के गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा में असहयोग आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच संघर्ष हुआ।

पुलिस की कार्रवाई से आक्रोशित भीड़ ने चौरी-चौरा पुलिस थाने में आग लगा दी, जिसमें 22 पुलिसकर्मियों की मृत्यु हो गई।

महात्मा गांधी अहिंसा को आंदोलन का अनिवार्य आधार मानते थे। इस हिंसक घटना से वे अत्यंत व्यथित हुए और उन्होंने असहयोग आंदोलन को स्थगित करने का निर्णय लिया।

इसके बाद 12 फरवरी 1922 को असहयोग आंदोलन औपचारिक रूप से स्थगित कर दिया गया।

🎯 अत्यंत महत्वपूर्ण

5 फरवरी 1922 → चौरी-चौरा घटना → 12 फरवरी 1922 → असहयोग आंदोलन स्थगित।

06

गांधीजी की गिरफ्तारी

1922 — राजद्रोह का मुकदमा

असहयोग आंदोलन स्थगित होने के कुछ समय बाद ब्रिटिश सरकार ने महात्मा गांधी को मार्च 1922 में गिरफ्तार कर लिया।

उन पर उनके लेखों के आधार पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया और छह वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई।

स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उन्हें पूरी सजा काटने से पहले 1924 में रिहा कर दिया गया।

07

स्वराज पार्टी की स्थापना

1923 — सी. आर. दास और मोतीलाल नेहरू

असहयोग आंदोलन की वापसी के बाद कांग्रेस के भीतर आगे की राजनीतिक रणनीति को लेकर मतभेद उत्पन्न हुए।

चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू विधान परिषदों में प्रवेश करके औपनिवेशिक शासन की नीतियों का अंदर से विरोध करना चाहते थे। उनके समर्थकों को परिवर्तनवादी कहा गया।

इसी उद्देश्य से 1923 में चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने स्वराज पार्टी की स्थापना की। इसका औपचारिक नाम कांग्रेस-खिलाफत स्वराज पार्टी था।

चित्तरंजन दास इसके अध्यक्ष और मोतीलाल नेहरू सचिव बने।

वल्लभभाई पटेल, राजेंद्र प्रसाद और सी. राजगोपालाचारी जैसे नेता विधान परिषदों में प्रवेश के बजाय रचनात्मक कार्यक्रम जारी रखने के पक्ष में थे और उन्हें सामान्यतः अपरिवर्तनवादी कहा गया।

🎯 परीक्षा के लिए

स्वराज पार्टी → 1923 → सी. आर. दास + मोतीलाल नेहरू।

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भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन

ताशकंद और कानपुर — दोनों को अलग समझें

भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के आरंभ को समझते समय 1920 के ताशकंद और 1925 के कानपुर को अलग-अलग समझना महत्वपूर्ण है।

एम. एन. राय और उनके सहयोगियों ने 1920 में ताशकंद में एक भारतीय कम्युनिस्ट संगठन स्थापित किया। यह घटना लॉर्ड रीडिंग के 1921 में वायसराय बनने से पहले की है।

भारत के भीतर कम्युनिस्ट गतिविधियाँ इसके बाद विभिन्न क्षेत्रों में विकसित होती रहीं। दिसंबर 1925 में कानपुर में आयोजित कम्युनिस्ट सम्मेलन को भारत में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के संगठित गठन का महत्वपूर्ण चरण माना जाता है।

इस प्रकार परीक्षा में एम. एन. राय — ताशकंद — 1920 और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी — कानपुर — 1925 के संदर्भों को अलग-अलग याद रखना चाहिए।

🔎 भ्रम न रखें

1920 — ताशकंद — एम. एन. राय से संबंधित कम्युनिस्ट संगठन
1925 — कानपुर — भारत में कम्युनिस्ट पार्टी के संगठित गठन का प्रमुख चरण

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काकोरी ट्रेन कार्रवाई

9 अगस्त 1925

लॉर्ड रीडिंग के शासनकाल में 9 अगस्त 1925 को उत्तर प्रदेश में लखनऊ के निकट काकोरी में क्रांतिकारियों ने ट्रेन से ले जाया जा रहा सरकारी खजाना अपने कब्जे में लिया।

यह घटना सामान्यतः काकोरी कांड या काकोरी ट्रेन कार्रवाई के नाम से प्रसिद्ध है। इसका उद्देश्य व्यक्तिगत यात्रियों की संपत्ति लूटना नहीं, बल्कि क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए ब्रिटिश सरकार का धन प्राप्त करना था।

इस घटना को हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के क्रांतिकारियों ने अंजाम दिया।

इससे जुड़े प्रमुख क्रांतिकारियों में राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खाँ, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी, चंद्रशेखर आजाद और सचिंद्रनाथ बख्शी सहित अन्य क्रांतिकारी थे।

मुकदमे के बाद राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खाँ, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी और रोशन सिंह को फाँसी की सजा दी गई, जबकि चंद्रशेखर आजाद गिरफ्तारी से बच निकले।

🎯 अत्यंत महत्वपूर्ण

9 अगस्त 1925 → काकोरी → हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन → राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खाँ।

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स्वामी श्रद्धानंद की हत्या

23 दिसंबर 1926

स्वामी श्रद्धानंद आर्य समाज के प्रमुख नेताओं, शिक्षाविदों और समाज-सुधारकों में से एक थे। उनका मूल नाम मुंशीराम विज था।

उन्होंने शिक्षा और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया और गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना से भी उनका नाम जुड़ा है।

23 दिसंबर 1926 को दिल्ली में अब्दुल रशीद ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी।

यह घटना दिसंबर 1926 में हुई थी। लॉर्ड रीडिंग ने अप्रैल 1926 में वायसराय पद छोड़ दिया था और तब तक लॉर्ड इरविन वायसराय बन चुका था। इसलिए इसे व्यापक 1926 की घटनाओं में पढ़ा जाता है, लेकिन तकनीकी रूप से यह लॉर्ड रीडिंग के वास्तविक कार्यकाल के बाद की घटना है।

🔎 तिथि का ध्यान रखें

लॉर्ड रीडिंग का कार्यकाल समाप्त — अप्रैल 1926
स्वामी श्रद्धानंद की हत्या — 23 दिसंबर 1926

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महत्वपूर्ण घटनाएँ — एक नजर में

त्वरित परीक्षा पुनरावृत्ति

वर्ष घटना
1921 लॉर्ड रीडिंग भारत का वायसराय बना।
1921 प्रिंस ऑफ वेल्स की भारत यात्रा और व्यापक बहिष्कार।
1921 मालाबार में मोपला विद्रोह।
22 नवंबर 1921 रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा शांतिनिकेतन में विश्वभारती की स्थापना।
5 फरवरी 1922 चौरी-चौरा की घटना।
12 फरवरी 1922 असहयोग आंदोलन स्थगित।
1923 सी. आर. दास और मोतीलाल नेहरू द्वारा स्वराज पार्टी की स्थापना।
9 अगस्त 1925 काकोरी ट्रेन कार्रवाई।
दिसंबर 1925 कानपुर कम्युनिस्ट सम्मेलन — भारत में कम्युनिस्ट पार्टी के संगठित गठन का महत्वपूर्ण चरण।
1926 लॉर्ड रीडिंग के बाद लॉर्ड इरविन भारत का वायसराय बना।
23 दिसंबर 1926 स्वामी श्रद्धानंद की हत्या।
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त्वरित रिविजन

एक क्रम में प्रमुख घटनाएँ

⚡ याद रखने का क्रम

1921 रीडिंग प्रिंस ऑफ वेल्स मोपला विद्रोह विश्वभारती 1922 चौरी-चौरा असहयोग आंदोलन स्थगित 1923 स्वराज पार्टी 1925 काकोरी 1925 कानपुर कम्युनिस्ट सम्मेलन

⚡ अंतिम पुनरावृत्ति

लॉर्ड रीडिंग 1921 से 1926 तक भारत का वायसराय रहा।

1921 में प्रिंस ऑफ वेल्स भारत आया और असहयोग आंदोलन के दौरान उसकी यात्रा का व्यापक बहिष्कार हुआ।

1921 में मालाबार, केरल में मोपला विद्रोह हुआ। इसके कृषक, औपनिवेशिक, राजनीतिक और सांप्रदायिक आयाम थे।

22 नवंबर 1921 को रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा शांतिनिकेतन में विश्वभारती की स्थापना की गई।

5 फरवरी 1922 को चौरी-चौरा की घटना हुई और 12 फरवरी 1922 को गांधीजी ने असहयोग आंदोलन स्थगित कर दिया।

1923 में सी. आर. दास और मोतीलाल नेहरू ने स्वराज पार्टी की स्थापना की।

कम्युनिस्ट आंदोलन के संदर्भ में 1920 — ताशकंद — एम. एन. राय तथा 1925 — कानपुर कम्युनिस्ट सम्मेलन को अलग-अलग याद रखें।

9 अगस्त 1925 को काकोरी ट्रेन कार्रवाई हुई। यह हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के क्रांतिकारियों से संबंधित थी।

1926 में लॉर्ड रीडिंग के बाद लॉर्ड इरविन भारत का वायसराय बना।

23 दिसंबर 1926 को स्वामी श्रद्धानंद की हत्या हुई। यह घटना लॉर्ड रीडिंग के पद छोड़ने के बाद लॉर्ड इरविन के वास्तविक कार्यकाल में हुई थी।

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