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लॉर्ड लिनलिथगो
LORD LINLITHGOW

लॉर्ड लिनलिथगो

1936–1943 — प्रांतीय चुनाव, द्वितीय विश्व युद्ध, पाकिस्तान प्रस्ताव, क्रिप्स मिशन और भारत छोड़ो आंदोलन

लॉर्ड लिनलिथगो का कार्यकाल

लॉर्ड लिनलिथगो 1936 से 1943 तक भारत के वायसराय एवं गवर्नर-जनरल रहे। उनका कार्यकाल ब्रिटिश भारत के वायसरायों में सबसे लंबे कार्यकालों में गिना जाता है। भारत सरकार अधिनियम, 1935 के अंतर्गत प्रांतीय स्वायत्तता लागू होना, 1937 के प्रांतीय चुनाव, द्वितीय विश्व युद्ध, कांग्रेस मंत्रिमंडलों का त्यागपत्र, फॉरवर्ड ब्लॉक, अगस्त प्रस्ताव, मुस्लिम लीग का लाहौर प्रस्ताव, व्यक्तिगत सत्याग्रह, क्रिप्स मिशन और भारत छोड़ो आंदोलन जैसी महत्वपूर्ण घटनाएँ इसी काल में हुईं।

01

1937 के प्रांतीय चुनाव

भारत सरकार अधिनियम, 1935 के अंतर्गत चुनाव

लॉर्ड लिनलिथगो के कार्यकाल में भारत सरकार अधिनियम, 1935 के प्रांतीय प्रावधान लागू किए गए और 1937 में प्रांतीय विधानसभाओं के चुनाव हुए।

इन्हें भारत में पहली बार हुए चुनाव कहना सही नहीं होगा। इससे पहले भी ब्रिटिश भारत में सीमित निर्वाचन व्यवस्था मौजूद थी। 1937 के चुनावों की विशेषता यह थी कि ये भारत सरकार अधिनियम, 1935 के अंतर्गत नई प्रांतीय स्वायत्तता व्यवस्था के अनुसार कराए गए थे।

चुनावों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया और बाद में अनेक प्रांतों में कांग्रेस मंत्रिमंडल बने। मद्रास, बंबई, संयुक्त प्रांत, बिहार, मध्य प्रांत, उड़ीसा और उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत सहित कई क्षेत्रों में कांग्रेस सरकारें बनीं।

प्रांतीय स्वायत्तता के अंतर्गत प्रांतों में मंत्रियों को पहले की अपेक्षा अधिक अधिकार मिले, लेकिन राज्यपालों के पास विशेष एवं विवेकाधीन शक्तियाँ बनी रहीं।

🎯 परीक्षा में ध्यान रखें

1937 — भारत सरकार अधिनियम, 1935 के अंतर्गत प्रांतीय चुनाव और प्रांतीय स्वायत्तता। इसे “भारत का प्रथम चुनाव” न लिखें।

02

सुभाषचंद्र बोस और फॉरवर्ड ब्लॉक

1939

1939 में कांग्रेस के त्रिपुरी अधिवेशन के समय सुभाषचंद्र बोस और कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व के बीच राजनीतिक मतभेद काफी बढ़ गए। बोस ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में गांधीजी द्वारा समर्थित पट्टाभि सीतारमैया को पराजित किया था।

कार्यसमिति के गठन और आंदोलन की भावी रणनीति को लेकर मतभेदों के कारण सुभाषचंद्र बोस ने 29 अप्रैल 1939 को कांग्रेस अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया। उनके स्थान पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद कांग्रेस अध्यक्ष बने।

इसके बाद सुभाषचंद्र बोस ने 3 मई 1939 को कांग्रेस के भीतर वामपंथी और साम्राज्यवाद-विरोधी शक्तियों को संगठित करने के उद्देश्य से फॉरवर्ड ब्लॉक के गठन की घोषणा की।

इसलिए “1 मई 1939 को फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना” के स्थान पर 3 मई 1939 याद करना अधिक सुरक्षित है।

📗 याद रखने योग्य क्रम

त्रिपुरी संकट 29 अप्रैल — अध्यक्ष पद से त्यागपत्र 3 मई — फॉरवर्ड ब्लॉक
03

द्वितीय विश्व युद्ध

1939

1 सितंबर 1939 को जर्मनी द्वारा पोलैंड पर आक्रमण के साथ यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत मानी जाती है। इसके बाद 3 सितंबर 1939 को ब्रिटेन और फ्रांस ने जर्मनी के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी।

ब्रिटेन के युद्ध में शामिल होने के साथ वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो ने भारतीय राजनीतिक नेतृत्व से पूर्व परामर्श किए बिना भारत को भी युद्धरत देश घोषित कर दिया। इस निर्णय का कांग्रेस ने तीव्र विरोध किया।

कांग्रेस की मांग थी कि ब्रिटेन स्पष्ट करे कि यदि वह लोकतंत्र की रक्षा के लिए युद्ध कर रहा है तो भारत को भी स्वतंत्रता और वास्तविक राजनीतिक अधिकार मिलने चाहिए। संतोषजनक उत्तर न मिलने पर 1939 में कांग्रेस के प्रांतीय मंत्रिमंडलों ने त्यागपत्र दे दिया

मुस्लिम लीग ने कांग्रेस मंत्रिमंडलों के त्यागपत्र के बाद 22 दिसंबर 1939 को “मुक्ति दिवस” मनाया।

🎯 महत्वपूर्ण तथ्य

1 सितंबर 1939 — जर्मनी का पोलैंड पर आक्रमण — द्वितीय विश्व युद्ध का आरंभ। भारत को युद्ध में शामिल करने का निर्णय लिनलिथगो ने भारतीय नेतृत्व की सहमति के बिना किया।

04

विंस्टन चर्चिल ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने

1940

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 10 मई 1940 को विंस्टन चर्चिल ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने। उन्होंने नेविल चेम्बरलेन का स्थान लिया।

चर्चिल का प्रधानमंत्रित्व भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण था, क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत की संवैधानिक स्थिति से जुड़े अगस्त प्रस्ताव, क्रिप्स मिशन और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे घटनाक्रम ब्रिटेन में उनके प्रधानमंत्रित्व के दौरान हुए।

05

मुस्लिम लीग का लाहौर प्रस्ताव

1940

मार्च 1940 में अखिल भारतीय मुस्लिम लीग का अधिवेशन लाहौर में आयोजित हुआ। इस अधिवेशन की अध्यक्षता मोहम्मद अली जिन्ना ने की।

23 मार्च 1940 को बंगाल के मुख्यमंत्री ए. के. फजलुल हक ने प्रसिद्ध लाहौर प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसे बाद में पाकिस्तान प्रस्ताव के नाम से प्रसिद्धि मिली। प्रस्ताव को अगले दिन स्वीकार किया गया।

इस प्रस्ताव के मूल प्रारूप से पंजाब के मुख्यमंत्री सर सिकंदर हयात खाँ का संबंध था, लेकिन मुस्लिम लीग की विषय समिति ने मूल प्रारूप में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए थे। इसलिए अंतिम प्रस्ताव को केवल सिकंदर हयात खाँ द्वारा तैयार किया गया अपरिवर्तित प्रस्ताव समझना सही नहीं है।

लाहौर प्रस्ताव में उत्तर-पश्चिमी और पूर्वी भारत के उन क्षेत्रों को, जहाँ मुसलमान बहुसंख्यक थे, इस प्रकार समूहबद्ध करने की बात कही गई कि वे स्वतंत्र राज्य बनें और उनकी घटक इकाइयाँ स्वायत्त एवं संप्रभु हों।

महत्वपूर्ण बात यह है कि मूल लाहौर प्रस्ताव में “पाकिस्तान” शब्द का प्रयोग नहीं किया गया था। बाद में यह प्रस्ताव पाकिस्तान की मांग के राजनीतिक आधार के रूप में प्रसिद्ध हुआ।

🎯 भ्रम-मुक्त तथ्य

लाहौर अधिवेशन — 1940 — अध्यक्ष जिन्ना — प्रस्ताव प्रस्तुत करने वाले ए. के. फजलुल हक — मूल प्रारूप से सिकंदर हयात खाँ का संबंध — प्रस्ताव में सीधे “पाकिस्तान” शब्द नहीं था।

06

अगस्त प्रस्ताव

1940

8 अगस्त 1940 को वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो ने ब्रिटिश सरकार की ओर से एक संवैधानिक प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसे अगस्त प्रस्ताव कहा जाता है। इसका उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीय राजनीतिक सहयोग प्राप्त करना था।

इसमें वायसराय की कार्यकारिणी परिषद का विस्तार करने, युद्ध के बाद भारतीय प्रतिनिधियों को नई संवैधानिक व्यवस्था तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल करने तथा अल्पसंख्यकों की सहमति को महत्व देने जैसी बातें शामिल थीं।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अगस्त प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया, क्योंकि इसमें तत्काल राष्ट्रीय सरकार या वास्तविक सत्ता हस्तांतरण की उसकी मांग पूरी नहीं हुई थी।

मुस्लिम लीग भी प्रस्ताव से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुई और उसने इसे स्वीकार नहीं किया। लीग अपने अलग राजनीतिक और संवैधानिक दावों की स्पष्ट स्वीकृति चाहती थी।

इसलिए यह कहना गलत है कि “कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों ने अगस्त प्रस्ताव स्वीकार कर लिया था।”

⚠️ सबसे जरूरी सुधार

अगस्त प्रस्ताव, 1940 को कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों द्वारा स्वीकार किया गया था — यह गलत है। दोनों प्रमुख दल इससे संतुष्ट नहीं थे।

07

व्यक्तिगत सत्याग्रह

1940–1941

अगस्त प्रस्ताव से असंतुष्ट कांग्रेस ने तत्काल व्यापक जनआंदोलन शुरू करने के बजाय गांधीजी के नेतृत्व में व्यक्तिगत सत्याग्रह प्रारंभ किया। इसका आरंभ 17 अक्टूबर 1940 को हुआ।

इस आंदोलन का प्रमुख उद्देश्य भारतीयों के इस अधिकार को व्यक्त करना था कि वे ब्रिटिश युद्ध-नीति का अहिंसक विरोध कर सकते हैं तथा भारत को उसकी इच्छा के विरुद्ध युद्ध में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।

आचार्य विनोबा भावे प्रथम व्यक्तिगत सत्याग्रही चुने गए। जवाहरलाल नेहरू दूसरे प्रमुख व्यक्तिगत सत्याग्रही थे।

🎯 परीक्षा तथ्य

व्यक्तिगत सत्याग्रह — 1940 — प्रथम सत्याग्रही विनोबा भावे।

08

क्रिप्स मिशन का भारत आगमन

1942

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान की तेज सैन्य प्रगति और भारत में बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच ब्रिटिश सरकार ने सर स्टैफर्ड क्रिप्स को भारत भेजा। क्रिप्स मिशन मार्च 1942 में भारत पहुँचा।

मिशन का उद्देश्य भारतीय नेताओं से समझौता कर युद्ध में भारतीय सहयोग प्राप्त करना था। प्रस्ताव में युद्ध समाप्त होने के बाद भारत को डोमिनियन स्टेटस प्रदान करने और संविधान निर्माण की व्यवस्था करने की बात थी।

प्रस्ताव में प्रांतों को भावी भारतीय संघ से बाहर रहने का विकल्प भी दिया गया था। कांग्रेस तत्काल सत्ता हस्तांतरण तथा रक्षा विभाग पर वास्तविक भारतीय नियंत्रण चाहती थी, जबकि मुस्लिम लीग अलग पाकिस्तान की मांग के स्पष्ट समाधान से संतुष्ट नहीं थी।

अंततः क्रिप्स मिशन असफल रहा। इसकी विफलता ने भारतीय राजनीति में निराशा और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध असंतोष को और बढ़ाया।

📗 क्रम याद रखें

अगस्त प्रस्ताव — 1940 → व्यक्तिगत सत्याग्रह — 1940 → क्रिप्स मिशन — 1942 → भारत छोड़ो आंदोलन — 1942।

09

भारत छोड़ो प्रस्ताव

1942

क्रिप्स मिशन की विफलता के बाद कांग्रेस ने ब्रिटिश शासन को समाप्त करने के लिए निर्णायक आंदोलन की दिशा में कदम बढ़ाया।

14 जुलाई 1942 को वर्धा में कांग्रेस कार्यसमिति ने ब्रिटिश शासन से भारत छोड़ने की मांग वाला प्रस्ताव स्वीकार किया। यही प्रस्ताव आगे भारत छोड़ो आंदोलन का आधार बना।

इसके बाद 8 अगस्त 1942 को बंबई के ग्वालिया टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक में भारत छोड़ो प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति दी गई। इस मैदान को बाद में अगस्त क्रांति मैदान के नाम से जाना गया।

इस अवसर पर महात्मा गांधी ने देशवासियों को प्रसिद्ध संदेश “करो या मरो” दिया।

इसलिए 14 जुलाई और 8 अगस्त 1942 दोनों तिथियाँ महत्वपूर्ण हैं—14 जुलाई को कांग्रेस कार्यसमिति ने वर्धा में प्रस्ताव स्वीकार किया और 8 अगस्त को अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने बंबई में उसे अनुमोदित किया।

🎯 तारीखों का भ्रम समाप्त करें

14 जुलाई — वर्धा — कांग्रेस कार्यसमिति 8 अगस्त — बंबई — अंतिम स्वीकृति 9 अगस्त — नेताओं की गिरफ्तारी
10

भारत छोड़ो आंदोलन

अगस्त 1942

9 अगस्त 1942 की सुबह महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद सहित कांग्रेस के अधिकांश शीर्ष नेताओं को ब्रिटिश सरकार ने गिरफ्तार कर लिया।

गांधीजी को पुणे के आगा खाँ महल में नजरबंद किया गया, जबकि अनेक कांग्रेस नेताओं को विभिन्न जेलों में रखा गया। शीर्ष नेतृत्व की गिरफ्तारी के बावजूद आंदोलन देश के अनेक भागों में स्वतः फैल गया।

भारत छोड़ो आंदोलन में विद्यार्थियों, किसानों, मजदूरों और आम जनता ने व्यापक भागीदारी की। ब्रिटिश सरकार ने आंदोलन को दबाने के लिए बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियाँ और कठोर दमन किया।

कुछ क्षेत्रों में ब्रिटिश प्रशासन को चुनौती देते हुए समानांतर सरकारें भी बनीं। बलिया, सतारा और तामलुक इससे जुड़े प्रमुख उदाहरणों में गिने जाते हैं।

भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के अंतिम बड़े जनआंदोलनों में से एक था और इसने स्पष्ट कर दिया कि ब्रिटिश शासन को लंबे समय तक भारतीय जनसमर्थन के बिना बनाए रखना कठिन होगा।

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द्वितीय विश्व युद्ध और भारत

महत्वपूर्ण संबंध

लॉर्ड लिनलिथगो के कार्यकाल की अधिकांश प्रमुख राजनीतिक घटनाएँ प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़ी थीं। भारत को बिना भारतीय नेतृत्व की सहमति के युद्ध में शामिल किए जाने ने ब्रिटिश सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ा दिया।

युद्ध के कारण ब्रिटिश सरकार को भारतीय संसाधनों, सैनिकों और राजनीतिक सहयोग की आवश्यकता थी। इसी आवश्यकता की पृष्ठभूमि में अगस्त प्रस्ताव और क्रिप्स मिशन जैसे संवैधानिक प्रयास किए गए।

दूसरी ओर भारतीय नेताओं का तर्क था कि ब्रिटेन यदि विश्व में स्वतंत्रता और लोकतंत्र की रक्षा का दावा करता है तो उसे भारत को भी स्वतंत्रता देनी चाहिए। यही राजनीतिक गतिरोध अंततः 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन तक पहुँचा।

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बंगाल का भीषण अकाल

1943

1943 का बंगाल अकाल भी लॉर्ड लिनलिथगो के कार्यकाल के अंतिम चरण की अत्यंत गंभीर घटना थी। बंगाल और आसपास के क्षेत्रों में खाद्यान्न संकट, युद्धकालीन परिस्थितियों, मूल्य-वृद्धि, वितरण संबंधी समस्याओं तथा प्रशासनिक विफलताओं ने स्थिति को भयावह बना दिया।

अकाल में बहुत बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु हुई। विभिन्न अध्ययनों में मृतकों की संख्या अलग-अलग दी गई है, इसलिए प्रतियोगी नोट्स में किसी एक अनुमान को पूर्णतः निर्विवाद संख्या के रूप में याद करना उचित नहीं है।

यह अकाल ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की युद्धकालीन नीतियों और खाद्य प्रबंधन की गंभीर विफलताओं से संबंधित महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना माना जाता है।

13

महत्वपूर्ण घटनाक्रम

1937 से 1943

वर्ष घटना मुख्य तथ्य
1937 प्रांतीय चुनाव भारत सरकार अधिनियम, 1935 के अंतर्गत
1939 फॉरवर्ड ब्लॉक 3 मई — सुभाषचंद्र बोस
1 सितंबर 1939 द्वितीय विश्व युद्ध जर्मनी ने पोलैंड पर आक्रमण किया
1939 कांग्रेस मंत्रिमंडलों का त्यागपत्र भारत को बिना परामर्श युद्ध में शामिल करने का विरोध
10 मई 1940 विंस्टन चर्चिल प्रधानमंत्री बने नेविल चेम्बरलेन के उत्तराधिकारी
मार्च 1940 लाहौर प्रस्ताव फजलुल हक ने प्रस्तुत किया
8 अगस्त 1940 अगस्त प्रस्ताव लॉर्ड लिनलिथगो द्वारा घोषित
अक्टूबर 1940 व्यक्तिगत सत्याग्रह प्रथम सत्याग्रही विनोबा भावे
मार्च 1942 क्रिप्स मिशन सर स्टैफर्ड क्रिप्स भारत आए
14 जुलाई 1942 भारत छोड़ो प्रस्ताव वर्धा में कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा स्वीकार
8 अगस्त 1942 भारत छोड़ो प्रस्ताव की अंतिम स्वीकृति बंबई में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति
9 अगस्त 1942 भारत छोड़ो आंदोलन शीर्ष कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी
1943 बंगाल अकाल लिनलिथगो के कार्यकाल के अंतिम चरण की गंभीर घटना
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त्वरित पुनरावृत्ति

एक क्रम में याद करें

⚡ प्रमुख घटनाओं का क्रम

प्रांतीय चुनाव — 1937 फॉरवर्ड ब्लॉक — 1939 द्वितीय विश्व युद्ध — 1939 लाहौर प्रस्ताव — 1940 अगस्त प्रस्ताव — 1940 व्यक्तिगत सत्याग्रह — 1940 क्रिप्स मिशन — 1942 भारत छोड़ो — 1942

⚡ अंतिम पुनरावृत्ति

लॉर्ड लिनलिथगो — 1936–1943; 1944 तक लिखना सही नहीं है।

1937 के प्रांतीय चुनाव — भारत सरकार अधिनियम, 1935 के अंतर्गत हुए; इन्हें भारत का प्रथम चुनाव न समझें।

सुभाषचंद्र बोस ने 29 अप्रैल 1939 को कांग्रेस अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दिया और 3 मई 1939 को फॉरवर्ड ब्लॉक के गठन की घोषणा की।

1 सितंबर 1939 — जर्मनी ने पोलैंड पर आक्रमण किया और द्वितीय विश्व युद्ध आरंभ हुआ।

लॉर्ड लिनलिथगो ने भारतीय नेताओं से परामर्श किए बिना भारत को युद्ध में शामिल घोषित किया; इसके विरोध में 1939 में कांग्रेस मंत्रिमंडलों ने त्यागपत्र दिया।

विंस्टन चर्चिल — 10 मई 1940 को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने।

लाहौर प्रस्ताव — मार्च 1940 — मुस्लिम लीग का अधिवेशन; अध्यक्ष जिन्ना; मूल प्रारूप से सिकंदर हयात खाँ का संबंध; ए. के. फजलुल हक ने प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

लाहौर प्रस्ताव में सीधे “पाकिस्तान” शब्द का प्रयोग नहीं किया गया था; बाद में यह पाकिस्तान प्रस्ताव के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

अगस्त प्रस्ताव — 8 अगस्त 1940 — लॉर्ड लिनलिथगो द्वारा घोषित; कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों इससे संतुष्ट नहीं हुए।

व्यक्तिगत सत्याग्रह — 1940 — प्रथम सत्याग्रही विनोबा भावे।

क्रिप्स मिशन — मार्च 1942 — सर स्टैफर्ड क्रिप्स भारत आए; मिशन असफल रहा।

14 जुलाई 1942 — वर्धा में कांग्रेस कार्यसमिति ने भारत छोड़ो प्रस्ताव स्वीकार किया।

8 अगस्त 1942 — बंबई में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने भारत छोड़ो प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति दी; गांधीजी ने “करो या मरो” का संदेश दिया।

9 अगस्त 1942 — गांधीजी सहित अधिकांश शीर्ष कांग्रेस नेता गिरफ्तार किए गए और भारत छोड़ो आंदोलन पूरे देश में फैल गया।

1943 का बंगाल अकाल — लिनलिथगो के कार्यकाल के अंतिम चरण की अत्यंत गंभीर घटना।

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