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लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय
LORD HARDINGE II

लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय

1910–1916 — दिल्ली दरबार, राजधानी परिवर्तन, क्रांतिकारी गतिविधियाँ और प्रथम विश्व युद्ध

लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय का शासनकाल

लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय 1910 से 1916 तक भारत का वायसराय रहा। उसका कार्यकाल भारतीय इतिहास में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के कारण याद किया जाता है। इसी समय 1911 का दिल्ली दरबार आयोजित हुआ, भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा हुई, बंगाल विभाजन रद्द किया गया, रवीन्द्रनाथ टैगोर को साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला, प्रथम विश्व युद्ध प्रारंभ हुआ और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना हुई।

01

लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय

भारत का वायसराय — 1910 से 1916

लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय ने 1910 में भारत के वायसराय का पद ग्रहण किया। वह लॉर्ड मिंटो द्वितीय के बाद भारत का वायसराय बना और 1916 तक इस पद पर रहा।

उसका कार्यकाल ब्रिटिश भारतीय प्रशासन में बड़े राजनीतिक परिवर्तनों, क्रांतिकारी गतिविधियों और विश्व राजनीति में आए महत्वपूर्ण बदलावों से जुड़ा था।

1916 में उसके बाद लॉर्ड चेम्सफोर्ड भारत का वायसराय बना।

🎯 परीक्षा के लिए

लॉर्ड मिंटो द्वितीय → लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय → लॉर्ड चेम्सफोर्ड वायसरायों का महत्वपूर्ण क्रम है।

02

1911 का दिल्ली दरबार

सम्राट जॉर्ज पंचम की भारत यात्रा

1911 में सम्राट जॉर्ज पंचम और महारानी मैरी की भारत यात्रा के अवसर पर दिल्ली में एक भव्य दरबार आयोजित किया गया, जिसे दिल्ली दरबार, 1911 कहा जाता है।

यह दरबार 12 दिसंबर 1911 को आयोजित हुआ। जॉर्ज पंचम भारत आने वाला एकमात्र ब्रिटिश सम्राट था जिसने स्वयं दिल्ली दरबार में उपस्थित होकर भारतीय साम्राज्य से संबंधित महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं।

इस दरबार का आयोजन जॉर्ज पंचम के ब्रिटिश सम्राट तथा भारत के सम्राट के रूप में राज्यारोहण के उपलक्ष्य में किया गया था।

📗 याद रखें

दिल्ली दरबार — 12 दिसंबर 1911 — जॉर्ज पंचम और महारानी मैरी।

03

राजधानी कलकत्ता से दिल्ली

12 दिसंबर 1911 की ऐतिहासिक घोषणा

12 दिसंबर 1911 को दिल्ली दरबार में ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम ने भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा की।

राजधानी परिवर्तन का प्रशासनिक क्रियान्वयन इसके बाद किया गया और 1912 से दिल्ली ब्रिटिश भारत की राजधानी के रूप में कार्य करने लगी।

दिल्ली को राजधानी बनाने के पीछे उसका ऐतिहासिक महत्व, उत्तर भारत में उसकी केंद्रीय स्थिति तथा ब्रिटिश साम्राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक रणनीति प्रमुख कारण थे।

🎯 अत्यंत महत्वपूर्ण

1911 → दिल्ली दरबार → जॉर्ज पंचम → राजधानी कलकत्ता से दिल्ली।

04

बंगाल विभाजन की समाप्ति

1911 की महत्वपूर्ण घोषणा

1905 में लॉर्ड कर्जन द्वारा किया गया बंगाल विभाजन भारतीय राष्ट्रवादियों के तीव्र विरोध का प्रमुख कारण बना था। इसके विरोध में स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन व्यापक रूप से चला।

लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय के समय 1911 में बंगाल विभाजन को रद्द करने की घोषणा की गई।

बंगाल का पुनर्गठन किया गया, जबकि बिहार और उड़ीसा को बंगाल से अलग कर एक नया प्रांत बनाया गया। असम को भी अलग प्रशासनिक इकाई के रूप में पुनर्गठित किया गया।

🔎 महत्वपूर्ण संबंध

1905 — बंगाल विभाजन → 1911 — बंगाल विभाजन रद्द।

05

हार्डिंग पर बम हमला

23 दिसंबर 1912 — दिल्ली

राजधानी दिल्ली स्थानांतरित किए जाने के बाद 23 दिसंबर 1912 को लॉर्ड हार्डिंग के दिल्ली में औपचारिक प्रवेश के अवसर पर चांदनी चौक से गुजर रहे उसके जुलूस पर बम फेंका गया

बम लॉर्ड हार्डिंग के हाथी के हौदे पर फेंका गया। इस हमले में हार्डिंग घायल हुआ, लेकिन उसकी जान बच गई।

यह घटना दिल्ली षड्यंत्र मामला या दिल्ली-लाहौर षड्यंत्र के नाम से प्रसिद्ध हुई। इसके पीछे क्रांतिकारी गतिविधियों का नेतृत्व रासबिहारी बोस से जुड़ा था।

इस षड्यंत्र से बसंत कुमार विश्वास, मास्टर अमीरचंद, अवध बिहारी और भाई बालमुकुंद जैसे क्रांतिकारियों के नाम भी जुड़े हैं।

🎯 परीक्षा के लिए

23 दिसंबर 1912 → चांदनी चौक → लॉर्ड हार्डिंग पर बम हमला → रासबिहारी बोस।

06

रवीन्द्रनाथ टैगोर और नोबेल पुरस्कार

1913 का ऐतिहासिक सम्मान

1913 में रवीन्द्रनाथ टैगोर को साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

वे साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले एशियाई बने।

टैगोर को यह सम्मान उनकी काव्य प्रतिभा के लिए प्रदान किया गया। उनकी प्रसिद्ध काव्य-कृति ‘गीतांजलि’ ने विश्व स्तर पर उन्हें विशेष पहचान दिलाई।

रवीन्द्रनाथ टैगोर भारत के राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के रचयिता भी हैं।

📗 याद रखें

रवीन्द्रनाथ टैगोर → 1913 → साहित्य का नोबेल पुरस्कार → पहले एशियाई नोबेल पुरस्कार विजेता।

07

प्रथम विश्व युद्ध

28 जुलाई 1914 से शुरुआत

28 जुलाई 1914 को प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत हुई, जब ऑस्ट्रिया-हंगरी ने सर्बिया के विरुद्ध युद्ध की घोषणा की।

इससे पहले 28 जून 1914 को ऑस्ट्रिया-हंगरी के युवराज आर्चड्यूक फ्रांज फर्डिनेंड की सारायेवो में हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद यूरोपीय देशों के बीच तनाव तेजी से बढ़ा।

चूँकि उस समय भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था, इसलिए भारत भी स्वतः ब्रिटेन की ओर से प्रथम विश्व युद्ध में शामिल हो गया

युद्ध में बड़ी संख्या में भारतीय सैनिकों ने यूरोप, पश्चिम एशिया और अन्य मोर्चों पर ब्रिटिश साम्राज्य की ओर से भाग लिया।

प्रथम विश्व युद्ध 1914 से 1918 तक चला।

08

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय

1916 — वाराणसी

1916 में वाराणसी में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की गई।

इसके प्रमुख संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय थे। विश्वविद्यालय की स्थापना में एनी बेसेंट सहित अनेक राष्ट्रीय नेताओं और शिक्षाविदों का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

विश्वविद्यालय की स्थापना का उद्देश्य भारतीय परंपरा और आधुनिक शिक्षा के बीच समन्वय स्थापित करना तथा भारतीय युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए एक प्रमुख राष्ट्रीय संस्थान उपलब्ध कराना था।

🎯 परीक्षा के लिए

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय → 1916 → वाराणसी → पंडित मदन मोहन मालवीय।

09

हिंदू महासभा

1915 — अखिल भारतीय संगठन

हिंदू महासभा को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के साथ 1916 में वाराणसी में स्थापित संस्था मानना सही नहीं है। दोनों घटनाएँ अलग-अलग हैं।

अखिल भारतीय स्तर पर हिंदू महासभा का गठन 1915 से जोड़ा जाता है। इसका प्रथम अखिल भारतीय अधिवेशन हरिद्वार में आयोजित हुआ।

पंडित मदन मोहन मालवीय हिंदू महासभा के निर्माण और विकास से जुड़े प्रमुख नेताओं में थे।

इसलिए परीक्षा में दोनों तथ्यों को अलग याद रखना चाहिए— 1915 में हिंदू महासभा और 1916 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय

🔎 भ्रम न रखें

1915 — हिंदू महासभा
1916 — बनारस हिंदू विश्वविद्यालय

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महत्वपूर्ण घटनाएँ — एक नजर में

त्वरित परीक्षा पुनरावृत्ति

वर्ष घटना
1910 लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय भारत का वायसराय बना।
1911 जॉर्ज पंचम की भारत यात्रा और दिल्ली दरबार।
12 दिसंबर 1911 राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा।
1911 बंगाल विभाजन रद्द करने की घोषणा।
23 दिसंबर 1912 चांदनी चौक में लॉर्ड हार्डिंग पर बम हमला।
1913 रवीन्द्रनाथ टैगोर को साहित्य का नोबेल पुरस्कार।
28 जुलाई 1914 प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत।
1915 अखिल भारतीय हिंदू महासभा का गठन।
1916 बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना।
1916 हार्डिंग का कार्यकाल समाप्त; लॉर्ड चेम्सफोर्ड वायसराय बना।
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त्वरित रिविजन

एक क्रम में पूरा अध्याय

⚡ याद रखने का क्रम

हार्डिंग द्वितीय 1911 दिल्ली दरबार राजधानी दिल्ली बंगाल विभाजन रद्द 1912 बम हमला 1913 टैगोर नोबेल 1914 प्रथम विश्व युद्ध 1915 हिंदू महासभा 1916 बनारस हिंदू विश्वविद्यालय

⚡ अंतिम पुनरावृत्ति

लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय 1910 से 1916 तक भारत का वायसराय रहा।

1911 में सम्राट जॉर्ज पंचम की भारत यात्रा के अवसर पर दिल्ली दरबार आयोजित किया गया।

12 दिसंबर 1911 को भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा की गई।

इसी समय 1905 के बंगाल विभाजन को 1911 में रद्द करने की घोषणा की गई।

23 दिसंबर 1912 को दिल्ली के चांदनी चौक में लॉर्ड हार्डिंग पर बम हमला हुआ। इस क्रांतिकारी षड्यंत्र से रासबिहारी बोस का नाम प्रमुख रूप से जुड़ा है।

1913 में रवीन्द्रनाथ टैगोर को साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ।

28 जुलाई 1914 को प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत हुई। भारत ब्रिटिश शासन के अधीन होने के कारण ब्रिटेन की ओर से युद्ध में शामिल हुआ।

हिंदू महासभा का अखिल भारतीय गठन 1915 से जुड़ा है। इसे 1916 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के साथ स्थापित संस्था नहीं मानना चाहिए।

1916 में वाराणसी में पंडित मदन मोहन मालवीय के नेतृत्व में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना हुई।

1916 में लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय के बाद लॉर्ड चेम्सफोर्ड भारत का वायसराय बना।

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