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विदेशी यात्रियों एवं लेखकों से मिलने वाली प्रमुख जानकारी
FOREIGN ACCOUNTS OF INDIA

विदेशी यात्रियों एवं लेखकों से मिलने वाली प्रमुख जानकारी

यूनानी-रोमन, चीनी, अरब-फारसी एवं अन्य विदेशी विवरण

विदेशी विवरणों का ऐतिहासिक महत्व

प्राचीन और मध्यकालीन भारत के इतिहास को जानने के लिए विदेशी यात्रियों, राजदूतों, भूगोलवेत्ताओं और लेखकों के विवरण महत्वपूर्ण साहित्यिक स्रोत हैं। इनसे भारत की राजनीतिक व्यवस्था, प्रशासन, समाज, धर्म, शिक्षा, नगरों, व्यापार और बंदरगाहों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।

सभी विदेशी लेखक स्वयं भारत नहीं आए थे। कुछ लेखकों ने दूसरे यात्रियों, व्यापारियों अथवा पहले से उपलब्ध विवरणों के आधार पर भारत के बारे में लिखा। इसलिए विदेशी विवरणों को अन्य साहित्यिक, अभिलेखीय और पुरातात्त्विक स्रोतों के साथ मिलाकर समझना चाहिए।

01

यूनानी एवं रोमन लेखक

Greek & Roman Writers

भारत के बारे में जानकारी देने वाले प्रमुख यूनानी और रोमन लेखकों में टेसियस, हेरोडोटस, मेगास्थनीज, डायमेकस, डायोनिसियस, टॉलेमी और प्लिनी के नाम महत्वपूर्ण हैं।

इनके विवरण प्राचीन भारत, मौर्यकालीन राजनीति, भारत के भूगोल और भारत के विदेशी व्यापार को समझने में विशेष रूप से उपयोगी हैं।

02

टेसियस

Ctesias

टेसियस या Ctesias प्राचीन यूनानी चिकित्सक और लेखक था। वह फारसी राजा Artaxerxes II के शाही दरबार में चिकित्सक के रूप में कार्य करता था।

टेसियस ने भारत के विषय में Indica नामक एक ग्रंथ लिखा था। इसकी मूल प्रति आज उपलब्ध नहीं है और इसकी सामग्री बाद के लेखकों द्वारा दिए गए उद्धरणों से ज्ञात होती है।

टेसियस स्वयं भारत आया था, इसका विश्वसनीय प्रमाण नहीं है। भारत के बारे में उसकी जानकारी मुख्यतः फारसी दरबार, यात्रियों और सुनी-सुनाई कथाओं से प्राप्त हुई थी। इसी कारण उसके विवरण में वास्तविक सूचनाओं के साथ कई काल्पनिक बातें भी मिलती हैं।

⚠️ Indica को लेकर सबसे महत्वपूर्ण अंतर

टेसियस और मेगास्थनीज दोनों ने “Indica” नाम से अलग-अलग ग्रंथ लिखे थे।

टेसियस की Indica पहले की रचना थी और उसकी जानकारी मुख्यतः फारसी स्रोतों तथा सुनी-सुनाई बातों पर आधारित थी।

मेगास्थनीज की Indica अलग रचना थी और मौर्यकालीन भारत के इतिहास के लिए अधिक महत्वपूर्ण है।

03

हेरोडोटस

Herodotus

यूनानी इतिहासकार हेरोडोटस को परंपरागत रूप से “इतिहास का पिता” कहा जाता है। उसकी प्रसिद्ध कृति Histories है।

वह पाँचवीं शताब्दी ईसा पूर्व का लेखक था। उसने फारसी साम्राज्य के अधीन भारतीय क्षेत्रों, भारतीय सैनिकों और भारत से प्राप्त होने वाले कर तथा राजस्व से संबंधित जानकारी दी।

हेरोडोटस स्वयं भारत आया था, इसका प्रमाण नहीं है। भारत संबंधी उसका विवरण मुख्यतः फारसी साम्राज्य से संबंधित सूचनाओं पर आधारित था।

🎯 Exam Point

हेरोडोटस → इतिहास का पिता → Histories

04

मेगास्थनीज

Megasthenes

मेगास्थनीज यूनानी शासक सेल्युकस प्रथम निकेटर (Seleucus I Nicator) का राजदूत था। वह मौर्य शासक चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में भारत आया।

मेगास्थनीज ने भी भारत पर Indica नामक ग्रंथ लिखा। यह टेसियस की Indica से पूरी तरह अलग रचना थी।

मेगास्थनीज की Indica से चंद्रगुप्त मौर्य के समय के प्रशासन, समाज, पाटलिपुत्र, सेना, कृषि, नगर-व्यवस्था और आर्थिक जीवन की महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।

मेगास्थनीज की मूल Indica आज उपलब्ध नहीं है। इसके अंश बाद के यूनानी-रोमन लेखकों Strabo, Arrian, Diodorus और Pliny की रचनाओं में सुरक्षित हैं।

उसने मौर्य राजधानी पाटलिपुत्र का विस्तृत वर्णन भी किया।

🎯 याद रखने का क्रम

Seleucus I Nicator → Megasthenes → Chandragupta Maurya → Indica

📗 Indica Final Revision

Ctesias → Indica → फारसी स्रोतों पर आधारित प्रारंभिक विवरण

Megasthenes → Indica → चंद्रगुप्त मौर्य के समय का विवरण

05

डायमेकस

Deimachus

डायमेकस (Deimachus) यूनानी राजदूत था। उसे सेल्यूकिड शासक Antiochus I Soter ने मौर्य शासक बिंदुसार के दरबार में भेजा था।

इससे मौर्य साम्राज्य और पश्चिम एशिया के हेलेनिस्टिक राज्यों के बीच राजनयिक संबंधों का प्रमाण मिलता है।

⚠️ शासक न मिलाएँ

मेगास्थनीज → चंद्रगुप्त मौर्य

डायमेकस → बिंदुसार

06

डायोनिसियस

Dionysius

डायोनिसियस (Dionysius) को मिस्र के टॉलेमिक शासक Ptolemy II Philadelphus ने मौर्यकालीन भारत भेजा था।

उसके भारत भेजे जाने की सूचना रोमन लेखक प्लिनी से मिलती है। इससे मौर्य भारत और भूमध्यसागरीय दुनिया के बीच राजनयिक संपर्क का संकेत मिलता है।

कुछ पुरानी सामान्य ज्ञान पुस्तकों में डायोनिसियस को सीधे अशोक के दरबार में आया राजदूत बताया जाता है। उसे बिंदुसार अथवा अशोक के काल से जोड़ा गया है, लेकिन उपलब्ध प्राचीन स्रोत स्पष्ट रूप से यह निश्चित नहीं करते कि वह किस मौर्य शासक के दरबार में आया था।

📗 परीक्षा के लिए सुरक्षित तथ्य

Dionysius → Ptolemy II Philadelphus द्वारा Mauryan India भेजा गया दूत।

07

टॉलेमी

Claudius Ptolemy

क्लॉडियस टॉलेमी (Claudius Ptolemy) दूसरी शताब्दी ईस्वी का प्रसिद्ध यूनानी-रोमन भूगोलवेत्ता था।

उसकी प्रसिद्ध कृति Geographia या Geography है। इसमें भारत के अनेक स्थानों, नगरों, नदियों, समुद्री तटों और व्यापारिक केंद्रों की जानकारी मिलती है।

इसलिए “टॉलेमी ने भारत का भूगोल नामक पुस्तक लिखी” वाक्य को इस अर्थ में समझना चाहिए कि उसकी Geographia में भारत का विस्तृत भूगोल दिया गया है; उसकी पुस्तक का नाम “भारत का भूगोल” नहीं था।

⚠️ Ptolemy नाम के दो अलग व्यक्ति

Ptolemy II Philadelphus → मिस्र का शासक → Dionysius को भारत भेजने से संबंधित।

Claudius Ptolemy → दूसरी शताब्दी का भूगोलवेत्ता → Geographia का लेखक।

दोनों अलग-अलग व्यक्ति थे।

08

प्लिनी

Pliny the Elder

प्लिनी द एल्डर प्रथम शताब्दी ईस्वी का रोमन लेखक और प्रकृतिवेत्ता था। उसकी प्रसिद्ध कृति Natural History है।

इस ग्रंथ से भारत की प्राकृतिक संपदा, वनस्पति, पशुओं और विशेष रूप से भारत-रोम व्यापार से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।

प्लिनी ने भारत और अन्य पूर्वी क्षेत्रों की ओर रोमन धन के बड़े प्रवाह पर चिंता व्यक्त की थी। इससे भारत और रोमन साम्राज्य के बीच सक्रिय व्यापार का पता चलता है।

09

पेरिप्लस ऑफ द एरिथ्रियन सी

Periplus of the Erythraean Sea

Periplus of the Erythraean Sea प्राचीन समुद्री व्यापार के अध्ययन का अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसके लेखक का नाम ज्ञात नहीं है।

इसे सामान्यतः पहली शताब्दी ईस्वी की रचना माना जाता है। पुरानी पुस्तकों में लगभग 80 ईस्वी जैसी तिथियाँ मिलती हैं, लेकिन इसकी सटीक रचना-तिथि निश्चित नहीं है।

इस ग्रंथ से भारत के बंदरगाहों, समुद्री मार्गों, व्यापारिक वस्तुओं, आयात और निर्यात की विस्तृत जानकारी मिलती है।

इसमें पश्चिमी भारत के महत्वपूर्ण बंदरगाह भृगुकच्छ — Barygaza, वर्तमान Bharuch का भी उल्लेख मिलता है।

🎯 Exam Point

Periplus of the Erythraean Sea → अज्ञात लेखक → भारतीय बंदरगाह एवं समुद्री व्यापार।

10

चीनी यात्री

Chinese Buddhist Pilgrims

भारत आने वाले प्रसिद्ध चीनी यात्रियों का मुख्य उद्देश्य बौद्ध धर्म का अध्ययन, बौद्ध ग्रंथों का संग्रह और बौद्ध तीर्थस्थलों की यात्रा था।

इनमें फाहियान, सुंग युन, ह्वेनसांग और इत्सिंग विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

11

फाहियान

Faxian / Fa-Hien

चीनी बौद्ध यात्री फाहियान लगभग 399 ईस्वी में चीन से अपनी यात्रा पर निकला। उसकी भारतीय यात्रा का महत्वपूर्ण भाग चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य के शासनकाल में हुआ।

उसका मुख्य उद्देश्य बौद्ध धर्म का अध्ययन, बौद्ध पवित्र स्थानों की यात्रा और बौद्ध ग्रंथों को प्राप्त करना था।

उसने मध्य भारत सहित कई क्षेत्रों की सामाजिक, धार्मिक और प्रशासनिक परिस्थितियों का वर्णन किया तथा पाटलिपुत्र की भी यात्रा की।

उसकी पूरी विदेश-यात्रा लगभग 399 से 414 ईस्वी तक चली। इसलिए “फाहियान 14 वर्ष भारत में रहा” कहना सही नहीं है। लगभग 14–15 वर्ष उसकी पूरी लंबी यात्रा से संबंधित हैं।

उसका यात्रा-वृत्तांत Foguo Ji / Fo-Kuo-Chi, अर्थात Record of Buddhist Kingdoms के नाम से प्रसिद्ध है।

⚠️ सबसे महत्वपूर्ण अंतर

फाहियान चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में भारत आया था।

लेकिन वह चंद्रगुप्त द्वितीय का राजदूत नहीं था। वह मुख्य रूप से बौद्ध तीर्थयात्री और भिक्षु था।

12

सुंग युन

Song Yun

चीनी बौद्ध यात्री सुंग युन (Song Yun) छठी शताब्दी ईस्वी के प्रारंभ में भारत और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों की यात्रा पर आया। उसकी यात्रा लगभग 518 ईस्वी से संबंधित मानी जाती है।

उसका उद्देश्य बौद्ध ग्रंथों और धार्मिक सामग्री का संग्रह करना था। उसके साथ Huisheng नामक एक अन्य बौद्ध यात्री भी था।

उसके विवरण से गांधार और आसपास के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में बौद्ध धर्म की स्थिति की जानकारी मिलती है।

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ह्वेनसांग

Xuanzang / Hiuen Tsang

चीनी बौद्ध यात्री ह्वेनसांग या Xuanzang ने लगभग 629 ईस्वी में चीन से भारत की ओर अपनी यात्रा शुरू की। उस समय उत्तर भारत में हर्षवर्धन का शासन था।

उसने मध्य एशिया से होकर यात्रा की और कपिशा, गांधार, कश्मीर, पंजाब, कन्नौज, मगध तथा अन्य भारतीय क्षेत्रों का भ्रमण किया।

पुरानी पुस्तकों में कपिशा को उसका “भारत में प्रथम राज्य” कहा जाता है। कपिशा वर्तमान अफगानिस्तान क्षेत्र में स्थित था, हालाँकि वह प्राचीन भारतीय सांस्कृतिक क्षेत्र से निकटता से जुड़ा था। इसलिए इसे सीधे वर्तमान भारत का पहला राज्य समझना उचित नहीं है।

ह्वेनसांग ने भारत और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय तक यात्रा और अध्ययन किया और 645 ईस्वी में चीन लौट गया।

इस प्रकार 629 से 645 तक की लगभग 16 वर्ष की अवधि उसकी पूरी विदेश-यात्रा से संबंधित है; इसे पूरे 15–16 वर्ष केवल भारत में निवास के रूप में नहीं समझना चाहिए।

14

ह्वेनसांग और नालंदा

Xuanzang at Nalanda

ह्वेनसांग ने प्रसिद्ध नालंदा महाविहार में अध्ययन किया। उस समय नालंदा बौद्ध शिक्षा और दर्शन का अत्यंत प्रतिष्ठित केंद्र था।

ह्वेनसांग के समय नालंदा के प्रसिद्ध आचार्य शीलभद्र थे। ह्वेनसांग ने उनके अधीन विशेष रूप से योगाचार बौद्ध दर्शन का अध्ययन किया।

नालंदा केवल बौद्ध दर्शन का केंद्र नहीं था। यहाँ व्याकरण, तर्कशास्त्र, चिकित्सा और अन्य विषयों का भी अध्ययन किया जाता था।

🎯 Exam Formula

ह्वेनसांग → हर्षवर्धन → नालंदा → शीलभद्र

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ह्वेनसांग का यात्रा-विवरण

Da Tang Xiyu Ji / Si-Yu-Ki

ह्वेनसांग की यात्राओं पर आधारित प्रसिद्ध चीनी ग्रंथ Da Tang Xiyu Ji, अर्थात Great Tang Records on the Western Regions है।

भारतीय इतिहास की पुरानी पुस्तकों में इसे सामान्यतः Si-Yu-Ki / सी-यू-की नाम से लिखा जाता है।

यह विवरण ह्वेनसांग की यात्रा से प्राप्त सामग्री पर आधारित था और इसके संकलन में उसके शिष्य Bianji की भी भूमिका थी। इसलिए केवल “ह्वेनसांग ने Si-Yu-Ki नामक पुस्तक स्वयं लिखी” कहना कुछ अधिक सरल कथन है।

इस ग्रंथ से हर्षकालीन भारत के राज्यों, धर्म, शिक्षा, समाज और भूगोल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।

16

ह्वेनसांग से मिलने वाली अन्य जानकारी

Other Historical Information

ह्वेनसांग के विवरण में सिंध क्षेत्र के शासक के बारे में भी जानकारी मिलती है। पुरानी परीक्षा पुस्तकों में उसके विवरण के आधार पर “सिंध का राजा शूद्र था” लिखा मिलता है। इसे ह्वेनसांग द्वारा दी गई सामाजिक पहचान के संदर्भ में पढ़ना चाहिए।

हर्षवर्धन द्वारा आयोजित धार्मिक समारोहों, विशेष रूप से प्रयाग की सभा के विवरण में बुद्ध, सूर्य और शिव की प्रतिमाओं से संबंधित पूजा और सम्मान का उल्लेख मिलता है।

⚠️ यहाँ Confusion न करें

बुद्ध, सूर्य और शिव की प्रतिमाओं के पूजन का वर्णन हर्ष के धार्मिक समारोह के संदर्भ में है।

इससे यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि ह्वेनसांग स्वयं तीनों का व्यक्तिगत उपासक था।

17

इत्सिंग

Yijing / I-Tsing

चीनी बौद्ध यात्री इत्सिंग या Yijing सातवीं शताब्दी ईस्वी के उत्तरार्ध में भारत आया।

वह लगभग 671 ईस्वी में चीन से निकला और दक्षिण-पूर्व एशिया होते हुए समुद्री मार्ग से भारत पहुँचा।

उसने नालंदा में बौद्ध धर्म और संस्कृत का अध्ययन किया।

उसके विवरणों से नालंदा की शिक्षा-व्यवस्था, बौद्ध भिक्षुओं की दिनचर्या, विनय नियम तथा भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बौद्ध संबंधों की जानकारी मिलती है।

⚠️ नालंदा और विक्रमशिला

इत्सिंग → नालंदा ✔

इत्सिंग → विक्रमशिला ✘

विक्रमशिला की स्थापना बाद में पाल शासक धर्मपाल के समय हुई। इसलिए सातवीं शताब्दी के इत्सिंग द्वारा विक्रमशिला का वर्णन संभव नहीं है।

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चीनी यात्रियों का सार

Chinese Travellers at a Glance

यात्री समय / संबंधित काल प्रमुख जानकारी
फाहियान चंद्रगुप्त द्वितीय का काल Foguo Ji / Fo-Kuo-Chi; बौद्ध धर्म और गुप्तकालीन समाज
सुंग युन लगभग 518 ई. बौद्ध ग्रंथों की खोज; गांधार क्षेत्र
ह्वेनसांग हर्षवर्धन का काल नालंदा; शीलभद्र; Da Tang Xiyu Ji
इत्सिंग 7वीं शताब्दी का उत्तरार्ध नालंदा; बौद्ध शिक्षा एवं भिक्षु जीवन
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अरबी एवं फारसी विवरण

Arab-Persian Accounts

मध्यकालीन भारत के इतिहास के लिए अरब और फारसी विद्वानों तथा यात्रियों के विवरण विशेष महत्व रखते हैं।

इनमें अलबरूनी और इब्न बतूता सबसे अधिक महत्वपूर्ण लेखकों और यात्रियों में गिने जाते हैं।

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अलबरूनी

Al-Biruni

महान विद्वान अलबरूनी का जन्म 973 ईस्वी में ख्वारिज्म में हुआ था। उसका जन्मस्थान वर्तमान उज्बेकिस्तान क्षेत्र में पड़ता है।

इसलिए उसे सीधे “तुर्कमेनिस्तान का लेखक” कहना सही नहीं है। ख्वारिज्म का ऐतिहासिक क्षेत्र वर्तमान उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के कुछ भागों में फैला था।

महमूद गजनवी द्वारा ख्वारिज्म पर अधिकार किए जाने के बाद अलबरूनी गजनी से जुड़ा। इसके बाद उसे भारतीय उपमहाद्वीप, विशेष रूप से पंजाब और उत्तर-पश्चिमी भारत की संस्कृति का अध्ययन करने का अवसर मिला।

इसलिए “अलबरूनी महमूद गजनवी के साथ भारत आया” प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रचलित सामान्य कथन है, लेकिन इसे यह नहीं समझना चाहिए कि वह प्रत्येक भारतीय सैन्य अभियान में महमूद का नियमित साथी था।

अलबरूनी ने संस्कृत सीखी और भारतीय धर्म, दर्शन, गणित, खगोलशास्त्र, भूगोल, सामाजिक व्यवस्था और रीति-रिवाजों का गहन अध्ययन किया।

21

किताब-उल-हिंद

Kitab al-Hind

अलबरूनी की भारत संबंधी प्रसिद्ध कृति Kitab al-Hind / Kitab-ul-Hind है। यह कृति अरबी भाषा में लिखी गई थी।

इसके विस्तृत अरबी शीर्षक की शुरुआत Tahqiq ma li-l-Hind से होती है। इसी कारण अलग-अलग पुस्तकों में इसके नाम के कुछ अलग रूप दिखाई देते हैं।

इस ग्रंथ में भारतीय धर्म, दर्शन, विज्ञान, गणित, खगोलशास्त्र, भूगोल, सामाजिक व्यवस्था और रीति-रिवाजों का विस्तृत वर्णन मिलता है।

किताब-उल-हिंद को विषयों के आधार पर व्यवस्थित किया गया है और यह लगभग 80 अध्यायों में विभाजित है।

⚠️ पुस्तक के नाम में Confusion न करें

परीक्षा के लिए सबसे सुरक्षित नाम — Kitab-ul-Hind / Kitab al-Hind

इसे केवल “तारीख-ए-हिंद” नाम से याद करना उचित नहीं है।

🎯 Exam Formula

अलबरूनी → ख्वारिज्म → महमूद गजनवी का काल → संस्कृत का अध्ययन → अरबी → Kitab-ul-Hind

22

इब्न बतूता

Ibn Battuta

इब्न बतूता मोरक्को का प्रसिद्ध यात्री था। वह चौदहवीं शताब्दी में भारत आया और 1333 ईस्वी में दिल्ली पहुँचा।

उस समय दिल्ली सल्तनत का शासक मुहम्मद बिन तुगलक था। उसने इब्न बतूता की विद्वता से प्रभावित होकर उसे दिल्ली का काजी अर्थात न्यायाधीश नियुक्त किया।

इब्न बतूता ने दिल्ली सल्तनत के नगरों, बाजारों, सड़क और डाक व्यवस्था, दरबार, व्यापार तथा सामाजिक जीवन का विस्तृत वर्णन किया।

बाद में मुहम्मद बिन तुगलक ने उसे चीन के लिए राजदूत बनाकर भी भेजा।

23

इब्न बतूता का रेहला

Rihla

इब्न बतूता की यात्राओं का प्रसिद्ध विवरण Rihla / रेहला के नाम से जाना जाता है।

अपनी लंबी यात्राओं के बाद इब्न बतूता ने अपने अनुभव इब्न जुज़य्य (Ibn Juzayy) को सुनाए। इब्न जुज़य्य ने उसकी dictation और यात्रा-विवरणों के आधार पर उन्हें अरबी भाषा में साहित्यिक रूप से संकलित किया।

इसलिए परीक्षा में “Rihla — Ibn Battuta” pairing सही है, लेकिन अधिक पूर्ण तथ्य यह है कि इसके साहित्यिक संकलन का कार्य Ibn Juzayy ने किया था।

⚠️ Rihla में यही अंतर याद रखें

यात्राएँ और विवरण → Ibn Battuta

विवरणों का साहित्यिक संकलन → Ibn Juzayy

🎯 Exam Formula

Ibn Battuta → Morocco → 1333 → Muhammad bin Tughlaq → Qazi → Rihla

24

अन्य महत्वपूर्ण अरब लेखक

Other Arab Accounts

नौवीं शताब्दी के अरब व्यापारी सुलेमान के विवरणों से भारत के व्यापार और तत्कालीन भारतीय राज्यों की जानकारी मिलती है।

दसवीं शताब्दी के अरब लेखक और यात्री अल-मसूदी ने भी भारत के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उसकी प्रसिद्ध कृतियों में Muruj al-Dhahab शामिल है।

25

तारानाथ

Tāranātha

तारानाथ प्रसिद्ध तिब्बती बौद्ध विद्वान और इतिहासकार था। वह सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी के समय से संबंधित है।

उसकी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कृति History of Buddhism in India है, जिसकी रचना लगभग 1608 ईस्वी में हुई।

इस ग्रंथ से भारतीय बौद्ध धर्म के इतिहास, बौद्ध आचार्यों और विभिन्न राजवंशों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।

⚠️ Kangyur और Tengyur

Kangyur और Tengyur तारानाथ द्वारा लिखे गए दो ग्रंथ नहीं हैं।

ये तिब्बती बौद्ध धर्मग्रंथों के विशाल canonical collections हैं, जिनका निर्माण और संपादन कई शताब्दियों में हुआ।

तारानाथ की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कृति → History of Buddhism in India

26

मार्को पोलो

Marco Polo

मार्को पोलो वेनिस का प्रसिद्ध यूरोपीय यात्री था। वह तेरहवीं शताब्दी के अंतिम भाग में एशिया की यात्रा के दौरान दक्षिण भारत के समुद्री क्षेत्रों में पहुँचा।

लगभग 1292–1293 ईस्वी के आसपास उसने दक्षिण भारत के पांड्य राज्य और उससे जुड़े क्षेत्रों का वर्णन किया।

उसके विवरण से दक्षिण भारत के मोती व्यापार, समुद्री व्यापार, बंदरगाहों, सामाजिक रीति-रिवाज और आर्थिक जीवन की महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।

उसकी यात्राओं का विवरण सामान्यतः The Travels of Marco Polo के नाम से प्रसिद्ध है।

🎯 Exam Point

Marco Polo → 13वीं शताब्दी → पांड्य राज्य → दक्षिण भारत।

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लेखक, ग्रंथ एवं संबंधित शासक

Master Revision Table

लेखक / यात्री ग्रंथ / विवरण मुख्य संबंध
Ctesias Indica फारसी दरबार; भारत की प्रारंभिक यूनानी जानकारी
Herodotus Histories इतिहास का पिता
Megasthenes Indica Seleucus I → Chandragupta Maurya
Deimachus Antiochus I → Bindusara
Dionysius Ptolemy II द्वारा Mauryan India भेजा गया
Claudius Ptolemy Geographia भारत का भूगोल
Pliny Natural History भारत-रोम व्यापार
अज्ञात लेखक Periplus of the Erythraean Sea भारतीय बंदरगाह और समुद्री व्यापार
फाहियान Foguo Ji / Fo-Kuo-Chi चंद्रगुप्त द्वितीय का काल
ह्वेनसांग Da Tang Xiyu Ji / Si-Yu-Ki हर्षवर्धन; नालंदा; शीलभद्र
इत्सिंग यात्रा एवं बौद्ध विवरण नालंदा
अलबरूनी Kitab-ul-Hind महमूद गजनवी का काल
इब्न बतूता Rihla मुहम्मद बिन तुगलक
तारानाथ History of Buddhism in India भारतीय बौद्ध धर्म
मार्को पोलो Travels पांड्य राज्य / दक्षिण भारत
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सबसे ज्यादा Confuse होने वाले तथ्य

Do Not Confuse

⚠️ Indica

Ctesias → Indica और Megasthenes → Indica — दोनों अलग-अलग लेखकों की अलग-अलग रचनाएँ थीं।

⚠️ Ptolemy

Ptolemy II Philadelphus → मिस्र का शासक

Claudius Ptolemy → Geographia लिखने वाला भूगोलवेत्ता

⚠️ Fa-Hien

चंद्रगुप्त द्वितीय के काल में आया ✔
चंद्रगुप्त द्वितीय का राजदूत ✘

⚠️ Xuanzang और I-Tsing

दोनों का संबंध नालंदा से है, लेकिन शीलभद्र के अधीन अध्ययन का प्रसिद्ध विवरण ह्वेनसांग से जुड़ा है।

⚠️ I-Tsing और Vikramshila

I-Tsing → Nalanda ✔
I-Tsing → Vikramshila ✘

⚠️ Kitab-ul-Hind और Rihla

Al-Biruni → Kitab-ul-Hind

Ibn Battuta → Rihla

⚠️ Rihla का संकलन

यात्रा एवं अनुभव → Ibn Battuta

उनका साहित्यिक संकलन → Ibn Juzayy

⚠️ Taranatha

History of Buddhism in India → Taranatha

Kangyur और Tengyur → Taranatha की व्यक्तिगत रचनाएँ नहीं।

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Quick Revision

SSC / Railway Rapid Recall

⚡ सबसे महत्वपूर्ण Pairings

Ctesias—Indica Megasthenes—Indica Fa-Hien—Chandragupta II Xuanzang—Harsha
Al-Biruni—Kitab-ul-Hind Ibn Battuta—Rihla Marco Polo—Pandya

टेसियस — फारसी राजा Artaxerxes II के दरबार का चिकित्सक; Indica।

हेरोडोटस — इतिहास का पिता; Histories।

मेगास्थनीज — Seleucus I का दूत; Chandragupta Maurya; Indica।

डायमेकस — Antiochus I का दूत; Bindusara।

डायोनिसियस — Ptolemy II द्वारा Mauryan India भेजा गया दूत; exact Mauryan ruler निश्चित नहीं।

Claudius Ptolemy — दूसरी शताब्दी; Geographia।

Pliny — Natural History; भारत-रोम व्यापार।

Periplus — अज्ञात लेखक; समुद्री व्यापार और बंदरगाह।

फाहियान — Chandragupta II का काल; Foguo Ji; राजदूत नहीं।

सुंग युन — लगभग 518 ई.; बौद्ध ग्रंथों की खोज।

ह्वेनसांग — 629 में यात्रा आरंभ; Harsha; Nalanda; Shilabhadra; 645 में चीन वापसी।

इत्सिंग — सातवीं शताब्दी; Nalanda; Vikramshila से संबंधित नहीं।

अलबरूनी — 973 ई.; Khwarizm; Kitab-ul-Hind; Arabic।

इब्न बतूता — Morocco; 1333; Muhammad bin Tughlaq; Qazi; Rihla।

Ibn Juzayy — Ibn Battuta के यात्रा-विवरणों के साहित्यिक संकलन से संबंधित।

तारानाथ — तिब्बती बौद्ध इतिहासकार; History of Buddhism in India।

मार्को पोलो — 13वीं शताब्दी के अंत में पांड्य क्षेत्र का विवरण।

⚡ Final Revision Points

टेसियस और मेगास्थनीज दोनों की अलग-अलग Indica थीं।

हेरोडोटस — इतिहास का पिता।

Megasthenes → Seleucus I → Chandragupta Maurya → Indica।

Deimachus → Antiochus I → Bindusara।

Dionysius → Ptolemy II → Mauryan India; उसे निश्चित रूप से अशोक का राजदूत कहना सुरक्षित नहीं है।

Claudius Ptolemy → Geographia; उसे Ptolemy II से न मिलाएँ।

Pliny → Natural History → India-Rome trade।

Periplus of the Erythraean Sea → अज्ञात लेखक → भारतीय समुद्री व्यापार।

Fa-Hien → Chandragupta II के शासनकाल में भारत आया; वह उसका राजदूत नहीं था।

Xuanzang → Harsha → Nalanda → Shilabhadra → Da Tang Xiyu Ji।

I-Tsing → Nalanda ✔; Vikramshila ✘।

Al-Biruni → 973 ई. → Khwarizm → Kitab-ul-Hind → Arabic।

Ibn Battuta → 1333 ई. → Muhammad bin Tughlaq → Qazi → Rihla।

Rihla के यात्रा-अनुभव Ibn Battuta के थे; उनके विवरण का साहित्यिक संकलन Ibn Juzayy ने किया।

Taranatha → History of Buddhism in India; Kangyur और Tengyur उसकी व्यक्तिगत रचनाएँ नहीं हैं।

Marco Polo → 13वीं शताब्दी → Pandya kingdom → South India।

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