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भारतीय संविधान के स्रोत
FOREIGN SOURCES OF THE INDIAN CONSTITUTION

भारतीय संविधान के विदेशी स्रोत

विभिन्न देशों से ग्रहण की गई संवैधानिक विशेषताएँ और परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण तथ्य

भारतीय संविधान और विदेशी संवैधानिक स्रोत

भारतीय संविधान निर्माताओं ने दुनिया के अनेक देशों की संवैधानिक व्यवस्थाओं का अध्ययन किया और भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल उपयोगी सिद्धांतों तथा संस्थाओं को अपनाया।

इसका अर्थ यह नहीं है कि भारतीय संविधान किसी एक विदेशी संविधान की नकल है। अलग-अलग देशों से उपयोगी संवैधानिक विशेषताएँ ली गईं और उन्हें भारत की सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक और ऐतिहासिक आवश्यकताओं के अनुसार बदला गया।

भारतीय संविधान पर ब्रिटेन, अमेरिका, आयरलैंड, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, सोवियत संघ, जापान, दक्षिण अफ्रीका और फ्रांस जैसे देशों की संवैधानिक व्यवस्थाओं का प्रभाव दिखाई देता है।

01

ब्रिटिश संविधान

संसदीय शासन व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत

भारतीय संविधान की शासन प्रणाली पर ब्रिटिश संवैधानिक व्यवस्था का अत्यंत व्यापक प्रभाव है।

भारत ने ब्रिटेन से संसदीय शासन प्रणाली का सिद्धांत अपनाया। इस व्यवस्था में वास्तविक कार्यपालिका मंत्रिपरिषद होती है और वह विधायिका के प्रति उत्तरदायी रहती है।

प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की व्यवस्था भी ब्रिटिश संसदीय प्रणाली से प्रभावित है।

भारत ने ब्रिटेन से मंत्रिमंडलीय शासन और मंत्रिपरिषद की सामूहिक उत्तरदायित्व की अवधारणा ग्रहण की।

एकल नागरिकता की व्यवस्था भी ब्रिटिश संवैधानिक परंपरा से प्रभावित है। भारत संघात्मक व्यवस्था वाला देश होने के बावजूद केवल भारतीय नागरिकता प्रदान करता है।

विधि का शासन अर्थात कानून की सर्वोच्चता और कानून के समक्ष समानता की अवधारणा पर ब्रिटिश विधिवेत्ता ए. वी. डाइसी के विचारों का प्रभाव माना जाता है।

भारत की विधि निर्माण की संसदीय प्रक्रिया पर भी ब्रिटिश व्यवस्था का प्रभाव है।

संसदीय विशेषाधिकार की अवधारणा भी ब्रिटिश संसद से प्रभावित है।

केंद्र में द्विसदनीय विधानमंडल अर्थात संसद के दो सदनों की व्यवस्था पर भी ब्रिटिश संसदीय परंपरा का प्रभाव माना जाता है।

चुनाव में किसी निर्वाचन क्षेत्र में सर्वाधिक मत पाने वाला उम्मीदवार निर्वाचित होता है। इस सर्वाधिक मत आधारित निर्वाचन प्रणाली की जड़ें भी ब्रिटिश निर्वाचन व्यवस्था में हैं।

🎯 ब्रिटेन से प्रमुख विशेषताएँ

संसदीय शासन + मंत्रिमंडलीय प्रणाली + प्रधानमंत्री का पद + सामूहिक उत्तरदायित्व + एकल नागरिकता + विधि का शासन + विधायी प्रक्रिया + संसदीय विशेषाधिकार + द्विसदनीयता + सर्वाधिक मत आधारित निर्वाचन।

02

संयुक्त राज्य अमेरिका का संविधान

अधिकार, न्यायपालिका और संवैधानिक सर्वोच्चता

भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों पर संयुक्त राज्य अमेरिका के अधिकार-पत्र की संवैधानिक परंपरा का महत्वपूर्ण प्रभाव है।

संविधान द्वारा नागरिकों को न्यायालय में प्रवर्तनीय अधिकार प्रदान करने की अवधारणा अमेरिकी संवैधानिक व्यवस्था से प्रभावित है।

भारत की स्वतंत्र न्यायपालिका और न्यायपालिका को कार्यपालिका तथा विधायिका के अनुचित हस्तक्षेप से सुरक्षित रखने की अवधारणा पर अमेरिकी व्यवस्था का प्रभाव माना जाता है।

न्यायिक पुनर्विलोकन का सिद्धांत भी अमेरिकी संवैधानिक व्यवस्था से प्रभावित है। इसके अंतर्गत न्यायालय ऐसे कानूनों या सरकारी कार्यों की संवैधानिकता की जाँच कर सकते हैं जो संविधान के विरुद्ध हों।

भारत में सर्वोच्च न्यायालय को संविधान का संरक्षक माना जाता है। सर्वोच्च न्यायालय वाली संघीय न्यायिक संरचना पर अमेरिकी संवैधानिक अनुभव का महत्वपूर्ण प्रभाव है।

संविधान की सर्वोच्चता अर्थात सरकार की सभी संस्थाओं का संविधान के अधीन होना अमेरिकी लिखित संविधान की प्रमुख विशेषताओं में से है और भारतीय व्यवस्था में भी यह मूल सिद्धांत है।

भारत में राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया पर भी अमेरिकी संवैधानिक व्यवस्था का प्रभाव माना जाता है।

उपराष्ट्रपति के पद की अवधारणा भी अमेरिकी संविधान से प्रभावित मानी जाती है।

न्यायाधीशों को हटाने की कठिन प्रक्रिया तथा न्यायपालिका की संस्थागत स्वतंत्रता पर भी अमेरिकी संवैधानिक परंपरा का प्रभाव देखा जाता है।

🎯 अमेरिका से याद रखें

मौलिक अधिकार + न्यायपालिका की स्वतंत्रता + न्यायिक पुनर्विलोकन + संविधान की सर्वोच्चता + राष्ट्रपति पर महाभियोग + उपराष्ट्रपति का पद।

⚠️ सावधानी

केवल “सर्वोच्च न्यायालय अमेरिका से लिया गया” कहना बहुत सामान्य कथन है। अधिक सही समझ यह है कि भारत की संघीय सर्वोच्च न्यायपालिका, न्यायिक स्वतंत्रता और न्यायिक पुनर्विलोकन पर अमेरिकी संवैधानिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण प्रभाव है।

03

आयरलैंड का संविधान

राज्य के नीति-निदेशक तत्व और राज्यसभा में मनोनयन

भारतीय संविधान के राज्य के नीति-निदेशक तत्व आयरलैंड के संविधान से प्रभावित हैं।

नीति-निदेशक तत्व राज्य को ऐसी सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था बनाने की दिशा बताते हैं जिसमें सामाजिक न्याय और लोककल्याण को बढ़ावा दिया जा सके।

भारत के राष्ट्रपति के निर्वाचन में अपनाई गई निर्वाचक मंडल और आनुपातिक प्रतिनिधित्व की पद्धति पर आयरिश व्यवस्था का प्रभाव माना जाता है।

राज्यसभा में विशिष्ट क्षेत्रों के विशेषज्ञ व्यक्तियों को राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत करने की संवैधानिक व्यवस्था भी आयरलैंड की परंपरा से प्रभावित मानी जाती है।

भारत का राष्ट्रपति राज्यसभा के लिए 12 सदस्यों को मनोनीत कर सकता है, जिन्हें साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव हो।

⚠️ महत्वपूर्ण सुधार

राज्यसभा के मनोनीत सदस्यों के क्षेत्रों में “सेवा, साहित्य, कला एवं विज्ञान” कहने के बजाय संवैधानिक शब्दों को याद रखें— साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा।

🎯 आयरलैंड से

राज्य के नीति-निदेशक तत्व + राष्ट्रपति के निर्वाचन की पद्धति पर प्रभाव + राज्यसभा में विशिष्ट व्यक्तियों के मनोनयन की अवधारणा।

04

कनाडा का संविधान

शक्तिशाली केंद्र वाली संघीय व्यवस्था

भारत की संघात्मक व्यवस्था पर कनाडा के संविधान का महत्वपूर्ण प्रभाव है।

भारत में संघीय शासन व्यवस्था होते हुए भी केंद्र को राज्यों की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक शक्तिशाली बनाया गया है। इसे अक्सर शक्तिशाली केंद्र वाला संघ कहा जाता है।

अवशिष्ट शक्तियाँ केंद्र के पास रखने की व्यवस्था कनाडा के संविधान से प्रभावित मानी जाती है।

संघ और राज्यों के बीच संवैधानिक रूप से शक्तियों के वितरण की व्यवस्था पर भी कनाडाई संघीय अनुभव का प्रभाव दिखाई देता है।

राज्यों के राज्यपाल की नियुक्ति केंद्र द्वारा किए जाने की व्यवस्था पर भी कनाडा की संवैधानिक व्यवस्था का प्रभाव माना जाता है।

सर्वोच्च न्यायालय की सलाहकारी अधिकारिता की अवधारणा भी कनाडाई संवैधानिक व्यवस्था से प्रभावित मानी जाती है।

🎯 कनाडा से याद रखें

शक्तिशाली केंद्र वाला संघ + अवशिष्ट शक्तियाँ केंद्र में + राज्यपाल की नियुक्ति + सर्वोच्च न्यायालय की सलाहकारी अधिकारिता।

05

ऑस्ट्रेलिया का संविधान

समवर्ती सूची और केंद्र-राज्य संबंध

भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची में संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची का प्रावधान है। समवर्ती सूची की अवधारणा पर ऑस्ट्रेलियाई संघीय व्यवस्था का प्रभाव माना जाता है।

समवर्ती सूची में ऐसे विषय रखे जाते हैं जिन पर संसद और राज्य विधानमंडल दोनों कानून बना सकते हैं।

भारत के केंद्र-राज्य संबंधों की कुछ संघीय विशेषताओं पर भी ऑस्ट्रेलियाई संवैधानिक व्यवस्था का प्रभाव माना जाता है।

देश के विभिन्न भागों के बीच व्यापार, वाणिज्य और आवागमन की स्वतंत्रता की अवधारणा पर भी ऑस्ट्रेलिया का प्रभाव माना जाता है।

संसद के दोनों सदनों के बीच किसी साधारण विधेयक पर गतिरोध होने की स्थिति में संयुक्त बैठक की व्यवस्था भी ऑस्ट्रेलियाई संविधान से प्रभावित है।

भारतीय संविधान की प्रस्तावना की कुछ अभिव्यक्तियों के संदर्भ में भी ऑस्ट्रेलियाई प्रभाव का उल्लेख परीक्षा पुस्तकों में मिलता है, लेकिन प्रस्तावना की पूरी भाषा को सीधे ऑस्ट्रेलिया से लिया हुआ कहना उचित नहीं है।

🎯 ऑस्ट्रेलिया से

समवर्ती सूची + व्यापार एवं वाणिज्य की स्वतंत्रता + संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक।

⚠️ प्रस्तावना वाला तथ्य

“प्रस्तावना की पूरी भाषा ऑस्ट्रेलिया से ली गई” कहना सही नहीं है। परीक्षा पुस्तकों में कुछ अभिव्यक्तियों पर ऑस्ट्रेलियाई प्रभाव का उल्लेख मिलता है, जबकि भारतीय प्रस्तावना का मूल वैचारिक आधार संविधान सभा का उद्देश्य प्रस्ताव था।

06

जर्मनी का संविधान

आपातकालीन व्यवस्था से संबंधित प्रभाव

भारतीय संविधान के आपातकालीन उपबंधों पर जर्मनी के वाइमर संविधान की आपातकालीन व्यवस्था का प्रभाव माना जाता है।

विशेष रूप से आपातकाल के दौरान राज्य की शक्तियों में वृद्धि और कुछ अधिकारों के प्रवर्तन पर प्रतिबंध या उनके निलंबन की अवधारणा को जर्मन संवैधानिक अनुभव से जोड़ा जाता है।

हालाँकि भारत के आपातकालीन प्रावधान भारतीय संघीय व्यवस्था और देश की आवश्यकताओं के अनुसार अलग एवं अधिक विस्तृत रूप में बनाए गए हैं।

🎯 एक पंक्ति

जर्मनी का वाइमर संविधान — आपातकाल में मौलिक अधिकारों के निलंबन से संबंधित अवधारणा।

07

सोवियत संघ का संविधान

मूल कर्तव्य और सामाजिक-आर्थिक न्याय

भारतीय संविधान में नागरिकों के मूल कर्तव्यों की अवधारणा तत्कालीन सोवियत संघ की संवैधानिक व्यवस्था से प्रभावित मानी जाती है।

मूल संविधान, 1950 में मूल कर्तव्यों का अलग भाग नहीं था। इन्हें बाद में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया।

मूल कर्तव्यों को संविधान के भाग 4-क में अनुच्छेद 51-क के अंतर्गत रखा गया है।

भारतीय प्रस्तावना में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की व्यापक समाजवादी प्रेरणा को भी परीक्षा पुस्तकों में सोवियत संवैधानिक विचार से जोड़ा जाता है।

🎯 सोवियत संघ से

मूल कर्तव्य + सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की प्रेरणा।

📗 मूल कर्तव्यों की तिथि

42वाँ संविधान संशोधन, 1976 → मूल कर्तव्य जोड़े गए।

08

जापान का संविधान

विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया

भारतीय संविधान में “विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया” की अभिव्यक्ति जापानी संविधान से प्रभावित है।

यह अवधारणा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 से जुड़ी है, जिसके अनुसार किसी व्यक्ति को उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जा सकता है।

भारतीय न्यायपालिका ने समय के साथ अनुच्छेद 21 की व्यापक व्याख्या की है और प्रक्रिया को न्यायपूर्ण, उचित और तर्कसंगत होने की आवश्यकता से जोड़ा है।

🎯 एक पंक्ति

जापान — विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया — अनुच्छेद 21।

09

दक्षिण अफ्रीका का संविधान

संविधान संशोधन और राज्यसभा निर्वाचन

भारतीय संविधान में संविधान संशोधन की प्रक्रिया पर दक्षिण अफ्रीका की संवैधानिक व्यवस्था का प्रभाव माना जाता है।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 368 संविधान संशोधन की प्रक्रिया से संबंधित है। विभिन्न प्रकार के प्रावधानों को बदलने के लिए अलग-अलग बहुमत की आवश्यकता होती है।

इसके अतिरिक्त राज्यसभा के निर्वाचित सदस्यों के निर्वाचन की पद्धति पर भी दक्षिण अफ्रीकी व्यवस्था का प्रभाव माना जाता है।

राज्यसभा में राज्यों के प्रतिनिधि संबंधित राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व तथा एकल संक्रमणीय मत पद्धति से चुने जाते हैं।

🎯 दक्षिण अफ्रीका से दो तथ्य

संविधान संशोधन की प्रक्रिया + राज्यसभा सदस्यों के निर्वाचन की पद्धति।

10

फ्रांस का संविधान

गणतंत्र तथा स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व

भारतीय संविधान में गणतंत्र की अवधारणा पर फ्रांसीसी संवैधानिक परंपरा का प्रभाव माना जाता है।

भारतीय संविधान की प्रस्तावना में प्रयुक्त स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों का संबंध फ्रांसीसी क्रांति के प्रसिद्ध आदर्शों से जोड़ा जाता है।

इन आदर्शों को भारतीय परिस्थितियों में व्यापक लोकतांत्रिक और सामाजिक अर्थ प्रदान किया गया है।

🎯 फ्रांस से

गणतंत्र + स्वतंत्रता + समानता + बंधुत्व।

11

भारत शासन अधिनियम, 1935 का प्रभाव

भारतीय संविधान का सबसे बड़ा प्रशासनिक स्रोत

भारत शासन अधिनियम, 1935 कोई विदेशी देश का संविधान नहीं था, लेकिन भारतीय संविधान के प्रशासनिक प्रावधानों का यह अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत था।

भारत के संविधान में संघीय ढाँचा, राज्यपाल का पद, लोक सेवा आयोग, न्यायिक व्यवस्था, आपातकालीन प्रशासन की कुछ संरचनाएँ तथा केंद्र-राज्य प्रशासनिक संबंधों के कई तत्व 1935 के अधिनियम के अनुभव से विकसित हुए।

भारतीय संविधान निर्माताओं ने 1935 के अधिनियम को जस का तस स्वीकार नहीं किया, बल्कि उसकी उपयोगी प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लोकतांत्रिक और उत्तरदायी शासन के अनुरूप परिवर्तित किया।

📗 परीक्षा-सावधानी

भारत शासन अधिनियम, 1935 को किसी विदेशी संविधान के नाम के साथ न मिलाएँ। यह ब्रिटिश संसद द्वारा भारत के शासन के लिए बनाया गया अधिनियम था और भारतीय संविधान का महत्वपूर्ण प्रशासनिक स्रोत बना।

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सभी विदेशी स्रोत — एक नज़र में

परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण सारणी

देश / संविधान भारतीय संविधान पर प्रमुख प्रभाव
ब्रिटेन संसदीय शासन, मंत्रिमंडलीय प्रणाली, प्रधानमंत्री का पद, सामूहिक उत्तरदायित्व, एकल नागरिकता, विधि का शासन, संसदीय विशेषाधिकार, विधायी प्रक्रिया, द्विसदनीयता, सर्वाधिक मत आधारित निर्वाचन
संयुक्त राज्य अमेरिका मौलिक अधिकार, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, न्यायिक पुनर्विलोकन, संविधान की सर्वोच्चता, राष्ट्रपति पर महाभियोग, उपराष्ट्रपति का पद
आयरलैंड राज्य के नीति-निदेशक तत्व, राष्ट्रपति निर्वाचन की पद्धति पर प्रभाव, राज्यसभा में विशिष्ट व्यक्तियों का मनोनयन
कनाडा शक्तिशाली केंद्र वाला संघ, अवशिष्ट शक्तियाँ केंद्र में, राज्यपाल की नियुक्ति, सर्वोच्च न्यायालय की सलाहकारी अधिकारिता
ऑस्ट्रेलिया समवर्ती सूची, व्यापार एवं वाणिज्य की स्वतंत्रता, संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक
जर्मनी आपातकाल में अधिकारों के निलंबन से संबंधित संवैधानिक अवधारणा
सोवियत संघ मूल कर्तव्य तथा सामाजिक-आर्थिक न्याय की प्रेरणा
जापान विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया
दक्षिण अफ्रीका संविधान संशोधन की प्रक्रिया तथा राज्यसभा सदस्यों के निर्वाचन की पद्धति
फ्रांस गणतंत्र तथा स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व
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सबसे महत्वपूर्ण भ्रम और सही तथ्य

परीक्षा में होने वाली सामान्य गलतियाँ

गलत: राज्यसभा में राष्ट्रपति समाज, सेवा, साहित्य, कला और विज्ञान से सदस्य चुनता है।
सही: संवैधानिक क्षेत्र हैं—साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा।

गलत: आयरलैंड से राज्यसभा के सभी सदस्यों की निर्वाचन प्रणाली ली गई।
सही: विशिष्ट व्यक्तियों के मनोनयन की अवधारणा आयरलैंड से प्रभावित मानी जाती है; राज्यसभा के निर्वाचित सदस्यों की निर्वाचन पद्धति दक्षिण अफ्रीका से प्रभावित मानी जाती है।

गलत: अमेरिका से केवल मौलिक अधिकार लिए गए।
सही: मौलिक अधिकारों के साथ न्यायिक पुनर्विलोकन, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, महाभियोग तथा उपराष्ट्रपति जैसे तत्व भी अमेरिकी प्रभाव से जुड़े हैं।

गलत: कनाडा से केवल संघीय व्यवस्था ली गई।
सही: शक्तिशाली केंद्र, अवशिष्ट शक्तियाँ केंद्र में और राज्यपाल की नियुक्ति जैसे तत्व भी कनाडाई प्रभाव से जुड़े हैं।

गलत: ऑस्ट्रेलिया से प्रस्तावना पूरी तरह ली गई।
सही: समवर्ती सूची, संयुक्त बैठक और व्यापार-वाणिज्य की स्वतंत्रता ऑस्ट्रेलिया से जुड़े अधिक सुरक्षित परीक्षा-तथ्य हैं।

गलत: जर्मनी से भारत की पूरी आपातकालीन व्यवस्था हूबहू ली गई।
सही: आपातकाल में अधिकारों के निलंबन की अवधारणा पर वाइमर जर्मनी का प्रभाव माना जाता है; भारतीय व्यवस्था अलग और विस्तृत है।

गलत: मूल कर्तव्य 1950 से ही संविधान में थे।
सही: मूल कर्तव्य 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़े गए।

गलत: जापान से मौलिक अधिकार लिए गए।
सही: जापान से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया की अभिव्यक्ति ली गई मानी जाती है।

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देश के नाम से एक शब्द में याद करें

तेज पुनरावृत्ति की सरल विधि

🧠 त्वरित स्मरण

ब्रिटेन — संसद अमेरिका — अधिकार आयरलैंड — नीति कनाडा — मजबूत केंद्र ऑस्ट्रेलिया — समवर्ती जर्मनी — आपातकाल सोवियत संघ — कर्तव्य जापान — प्रक्रिया दक्षिण अफ्रीका — संशोधन फ्रांस — गणतंत्र
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बार-बार पूछे जाने वाले देश–विशेषता युग्म

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उच्च प्राथमिकता

मूल कर्तव्य — सोवियत संघ।

राज्य के नीति-निदेशक तत्व — आयरलैंड।

मौलिक अधिकार — संयुक्त राज्य अमेरिका।

विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया — जापान।

आपातकाल में अधिकारों के निलंबन की अवधारणा — जर्मनी।

संविधान संशोधन की प्रक्रिया — दक्षिण अफ्रीका।

राज्यसभा सदस्यों की निर्वाचन पद्धति — दक्षिण अफ्रीका।

समवर्ती सूची — ऑस्ट्रेलिया।

संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक — ऑस्ट्रेलिया।

अवशिष्ट शक्तियाँ केंद्र में — कनाडा।

संसदीय शासन — ब्रिटेन।

एकल नागरिकता — ब्रिटेन।

न्यायिक पुनर्विलोकन — संयुक्त राज्य अमेरिका।

स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व — फ्रांस।

⚡ अंतिम पुनरावृत्ति

ब्रिटेन — संसदीय प्रणाली, मंत्रिमंडलीय शासन, प्रधानमंत्री, सामूहिक उत्तरदायित्व, एकल नागरिकता, विधि का शासन, विधायी प्रक्रिया, संसदीय विशेषाधिकार और सर्वाधिक मत आधारित निर्वाचन।

अमेरिका — मौलिक अधिकार, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, न्यायिक पुनर्विलोकन, संवैधानिक सर्वोच्चता, राष्ट्रपति पर महाभियोग और उपराष्ट्रपति।

आयरलैंड — राज्य के नीति-निदेशक तत्व, राष्ट्रपति निर्वाचन की पद्धति पर प्रभाव तथा राज्यसभा में विशिष्ट व्यक्तियों के मनोनयन की अवधारणा।

राज्यसभा के 12 मनोनीत सदस्य — साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा से विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्ति।

कनाडा — शक्तिशाली केंद्र वाला संघ, केंद्र के पास अवशिष्ट शक्तियाँ, राज्यपाल की नियुक्ति और सर्वोच्च न्यायालय की सलाहकारी अधिकारिता।

ऑस्ट्रेलिया — समवर्ती सूची, व्यापार एवं वाणिज्य की स्वतंत्रता तथा संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक।

जर्मनी — आपातकाल में अधिकारों के निलंबन से संबंधित अवधारणा।

सोवियत संघ — मूल कर्तव्य तथा सामाजिक-आर्थिक न्याय की प्रेरणा।

मूल कर्तव्य — 42वाँ संविधान संशोधन, 1976 — भाग 4-क — अनुच्छेद 51-क।

जापान — विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया — अनुच्छेद 21।

दक्षिण अफ्रीका — संविधान संशोधन की प्रक्रिया तथा राज्यसभा सदस्यों की निर्वाचन पद्धति।

फ्रांस — गणतंत्र तथा स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व।

सबसे छोटा याद करने का क्रम — ब्रिटेन संसद → अमेरिका अधिकार → आयरलैंड नीति → कनाडा केंद्र → ऑस्ट्रेलिया समवर्ती → जर्मनी आपातकाल → सोवियत संघ कर्तव्य → जापान प्रक्रिया → दक्षिण अफ्रीका संशोधन → फ्रांस गणतंत्र।

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