सिकंदर का भारत अभियान
मकदूनिया से झेलम और व्यास तक
सिकंदर का परिचय
सिकंदर महान प्राचीन मकदूनिया का शासक था। उसने यूनान से लेकर मिस्र, फारस, मध्य एशिया और उत्तर-पश्चिमी भारतीय उपमहाद्वीप तक विशाल साम्राज्य स्थापित किया।
उसका भारत अभियान 326 ईसा पूर्व में पंजाब क्षेत्र तक पहुँचा। भारतीय इतिहास में उसका अभियान विशेष रूप से राजा पोरस के साथ झेलम के युद्ध और व्यास नदी पर उसकी सेना के आगे बढ़ने से इनकार करने के कारण प्रसिद्ध है।
सिकंदर का जन्म
356 ईसा पूर्व
सिकंदर का जन्म 356 ईसा पूर्व में मकदूनिया की राजधानी पेला में हुआ था।
उसका पूरा नाम अलेक्जेंडर तृतीय था। इतिहास में वह सिकंदर महान के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
सिकंदर के पिता फिलिप द्वितीय
मकदूनिया का शक्तिशाली शासक
सिकंदर के पिता फिलिप द्वितीय थे।
फिलिप द्वितीय 359 ईसा पूर्व में मकदूनिया का शासक बना और उसने मकदूनिया की सेना को अत्यंत शक्तिशाली बनाया।
उसने यूनानी राज्यों पर अपना प्रभुत्व स्थापित किया और फारसी साम्राज्य पर आक्रमण की योजना बनाई।
फिलिप द्वितीय की 336 ईसा पूर्व में हत्या कर दी गई। उसकी मृत्यु के बाद सिकंदर मकदूनिया का राजा बना।
परीक्षा बिंदु
फिलिप द्वितीय — शासन 359–336 ईसा पूर्व।
अरस्तू का शिष्य
सिकंदर की शिक्षा
सिकंदर ने प्रसिद्ध यूनानी दार्शनिक अरस्तू से शिक्षा प्राप्त की थी।
फिलिप द्वितीय ने अरस्तू को युवराज सिकंदर की शिक्षा के लिए नियुक्त किया था।
सिकंदर ने दर्शन, राजनीति, साहित्य, चिकित्सा और यूनानी संस्कृति का अध्ययन किया।
एक साथ याद करें
सिकंदर — गुरु अरस्तू।
सिकंदर का विश्व-विजय अभियान
फारस से भारत तक
राजा बनने के बाद सिकंदर ने फारसी साम्राज्य के विरुद्ध अभियान शुरू किया।
उसने फारस के आखेमनी शासक दारा तृतीय को पराजित किया और फारसी साम्राज्य के विशाल क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया।
इसके बाद वह मध्य एशिया से होता हुआ उत्तर-पश्चिमी भारतीय उपमहाद्वीप की ओर बढ़ा।
भारत अभियान
327–326 ईसा पूर्व
सिकंदर ने लगभग 327 ईसा पूर्व में हिंदूकुश पार कर भारतीय उपमहाद्वीप की दिशा में अभियान शुरू किया।
326 ईसा पूर्व में वह सिंधु नदी पार कर पंजाब क्षेत्र में पहुँचा।
इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं में 326 ईसा पूर्व सिकंदर के भारत अभियान की प्रमुख तिथि के रूप में याद की जाती है।
तक्षशिला का शासक आम्भी
सिकंदर का सहयोगी
तक्षशिला के शासक आम्भी ने सिकंदर का विरोध नहीं किया।
उसने सिकंदर की अधीनता स्वीकार की और उसका सहयोगी बन गया।
आम्भी और राजा पोरस के बीच पहले से राजनीतिक शत्रुता थी।
राजा पोरस
झेलम और चिनाब के बीच का शासक
राजा पोरस का राज्य झेलम और चिनाब नदियों के बीच के क्षेत्र में था।
उसने सिकंदर की अधीनता स्वीकार करने से इनकार किया।
इसके बाद दोनों सेनाओं के बीच प्रसिद्ध झेलम का युद्ध हुआ।
हाइडेस्पीज का युद्ध
झेलम का युद्ध — 326 ईसा पूर्व
सिकंदर और राजा पोरस के बीच 326 ईसा पूर्व में झेलम नदी के तट पर युद्ध हुआ।
यूनानी लोग झेलम नदी को हाइडेस्पीज कहते थे। इसलिए इस युद्ध को हाइडेस्पीज का युद्ध भी कहा जाता है।
वैदिक परंपरा में झेलम नदी का प्राचीन नाम वितस्ता था।
पोरस की सेना में युद्ध हाथियों का विशेष महत्व था।
युद्ध में सिकंदर विजयी हुआ, लेकिन पोरस के साहस और युद्ध-कौशल से प्रभावित होकर उसने पोरस को उसका राज्य वापस दे दिया और उसके अधिकार क्षेत्र का विस्तार भी किया।
तीनों नाम याद रखें
हाइडेस्पीज = झेलम = वितस्ता।
हाइडेस्पीज का युद्ध — सिकंदर बनाम पोरस — 326 ईसा पूर्व।
पोरस और सिकंदर का प्रसिद्ध प्रसंग
राजा के समान व्यवहार
यूनानी परंपरा के अनुसार युद्ध के बाद सिकंदर ने पोरस से पूछा कि उसके साथ कैसा व्यवहार किया जाए।
पोरस ने उत्तर दिया — “एक राजा के साथ जैसा व्यवहार किया जाता है।”
पोरस के आत्मसम्मान और साहस से प्रभावित होकर सिकंदर ने उसे पुनः शासक बनाया।
बुकेफाला नगर
सिकंदर के प्रिय घोड़े की स्मृति
सिकंदर के प्रिय घोड़े का नाम बुकेफालस था।
झेलम के युद्ध के आसपास बुकेफालस की मृत्यु हो गई।
सिकंदर ने अपने प्रिय घोड़े की स्मृति में झेलम नदी के क्षेत्र में बुकेफाला नामक नगर बसाया।
इसी क्षेत्र में उसने अपनी विजय की स्मृति में निकाया नामक एक अन्य नगर भी स्थापित किया।
व्यास नदी पर सेना का विद्रोह
अभियान का अंतिम पूर्वी बिंदु
पंजाब में आगे बढ़ते हुए सिकंदर की सेना व्यास नदी तक पहुँची।
यूनानी स्रोतों में व्यास नदी को हाइफेसिस कहा गया है, जबकि इसका प्राचीन भारतीय नाम विपाशा है।
लंबे अभियानों, मानसून, लगातार युद्ध और आगे विशाल भारतीय सेनाओं की खबरों के कारण सिकंदर के सैनिकों ने व्यास नदी पार कर आगे बढ़ने से इनकार कर दिया।
सिकंदर ने सैनिकों को आगे बढ़ने के लिए मनाने का प्रयास किया, लेकिन अंततः उसे लौटने का निर्णय लेना पड़ा।
तीनों नाम
हाइफेसिस = व्यास = विपाशा।
मगध की विशाल शक्ति का प्रभाव
नंद साम्राज्य
सिकंदर के समय गंगा घाटी में नंद वंश का शक्तिशाली मगध साम्राज्य था।
यूनानी विवरणों में गंगा के पार स्थित राज्य की विशाल पैदल सेना, घुड़सवार सेना, रथों और युद्ध-हाथियों का वर्णन मिलता है।
आगे की कठिनाइयों और विशाल भारतीय शक्तियों की जानकारी ने सैनिकों के मनोबल पर भी प्रभाव डाला।
भारत से वापसी
326–325 ईसा पूर्व
व्यास से वापस लौटने के बाद सिकंदर झेलम और सिंधु नदी के मार्ग से दक्षिण की ओर बढ़ा।
उसने सिंधु नदी के निचले क्षेत्रों तक अभियान चलाया।
325 ईसा पूर्व में उसने भारत से पश्चिम की ओर वापसी आरंभ की।
सिकंदर स्वयं अपनी सेना के एक भाग के साथ गेड्रोसिया अर्थात मकरान के कठिन स्थल मार्ग से लौटा।
इसलिए यह कहना सही है कि उसकी सेना का एक बड़ा भाग स्थल मार्ग से लौटा, लेकिन उसकी पूरी सेना एक ही स्थल मार्ग से वापस नहीं गई थी।
नियार्कस का समुद्री अभियान
जल सेनापति
सिकंदर के प्रमुख नौसैनिक अधिकारी का नाम नियार्कस था।
सिकंदर ने उसे अपने बेड़े के साथ सिंधु नदी के मुहाने से फारस की खाड़ी की ओर समुद्री मार्ग से लौटने का कार्य सौंपा।
नियार्कस की यात्रा से भारतीय महासागर और फारस की खाड़ी के बीच के समुद्री मार्गों की महत्वपूर्ण जानकारी मिली।
याद रखें
सिकंदर का जल सेनापति — नियार्कस।
सेल्युकस निकेटर
सिकंदर का अधिकारी और बाद का शासक
सेल्युकस निकेटर सिकंदर की सेना का एक महत्वपूर्ण मकदूनियाई अधिकारी और सेनापति था।
सिकंदर की मृत्यु के बाद उसके विशाल साम्राज्य के उत्तराधिकार के लिए उसके सेनापतियों में संघर्ष हुआ।
सेल्युकस बाद में सेल्यूकिड साम्राज्य का संस्थापक बना।
लगभग 305 ईसा पूर्व में सेल्युकस ने भारत की दिशा में अभियान किया, जहाँ उसका सामना चंद्रगुप्त मौर्य से हुआ।
बाद में दोनों के बीच संधि हुई और सेल्युकस ने मेगास्थनीज को चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में राजदूत के रूप में भेजा।
नामों का क्रम
सिकंदर → सेल्युकस निकेटर → चंद्रगुप्त मौर्य → मेगास्थनीज।
सिकंदर की मृत्यु
बेबीलोन — 323 ईसा पूर्व
भारत से लौटने के कुछ वर्षों बाद सिकंदर की मृत्यु 323 ईसा पूर्व में बेबीलोन में हुई।
मृत्यु के समय उसकी आयु लगभग 32 वर्ष थी और वह अपने 33वें वर्ष में था।
उसकी मृत्यु का सटीक कारण निश्चित नहीं है। प्राचीन स्रोतों में बीमारी का वर्णन मिलता है।
सिकंदर के भारत अभियान का प्रभाव
भारत और यूनानी जगत के संपर्क
सिकंदर का भारतीय अभियान मुख्यतः उत्तर-पश्चिमी भारतीय उपमहाद्वीप तक सीमित रहा। वह गंगा घाटी या मगध तक नहीं पहुँचा।
उसके अभियान के बाद उत्तर-पश्चिम भारत और यूनानी जगत के बीच राजनीतिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक संपर्क और बढ़े।
उसके द्वारा छोड़े गए प्रशासकीय क्षेत्रों में बाद में राजनीतिक परिवर्तन हुए और कुछ ही वर्षों में चंद्रगुप्त मौर्य उत्तर-पश्चिम की राजनीति में उभरा।
सिकंदर के अभियान का विवरण देने वाले यूनानी लेखकों की रचनाएँ प्राचीन भारत के इतिहास के महत्वपूर्ण विदेशी स्रोत हैं।
प्रमुख नदियों के यूनानी और भारतीय नाम
परीक्षा में बहुत महत्वपूर्ण
| यूनानी नाम | वर्तमान नाम | प्राचीन भारतीय नाम |
|---|---|---|
| हाइडेस्पीज | झेलम | वितस्ता |
| एसीनेस | चिनाब | असिक्नी / चंद्रभागा |
| हाइड्राओटेस | रावी | परुष्णी |
| हाइफेसिस | व्यास | विपाशा |
| इंडस | सिंधु | सिंधु |
सिकंदर का संक्षिप्त कालक्रम
356 से 323 ईसा पूर्व
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 356 ईसा पूर्व | सिकंदर का जन्म |
| 336 ईसा पूर्व | फिलिप द्वितीय की हत्या; सिकंदर मकदूनिया का राजा बना |
| 327 ईसा पूर्व | उत्तर-पश्चिमी भारतीय क्षेत्र की ओर अभियान |
| 326 ईसा पूर्व | झेलम का युद्ध — सिकंदर और पोरस |
| 326 ईसा पूर्व | व्यास नदी पर सेना ने आगे बढ़ने से इनकार किया |
| 325 ईसा पूर्व | भारत से पश्चिम की ओर वापसी |
| 323 ईसा पूर्व | बेबीलोन में सिकंदर की मृत्यु |
अंतिम त्वरित पुनरावृत्ति
सिकंदर का जन्म — 356 ईसा पूर्व — पेला।
पिता — फिलिप द्वितीय।
फिलिप द्वितीय — 359–336 ईसा पूर्व।
सिकंदर का गुरु — अरस्तू।
भारत अभियान की प्रमुख तिथि — 326 ईसा पूर्व।
तक्षशिला का शासक आम्भी — सिकंदर का सहयोगी।
राजा पोरस — झेलम और चिनाब के बीच का शासक।
हाइडेस्पीज का युद्ध — 326 ईसा पूर्व — सिकंदर बनाम पोरस।
हाइडेस्पीज = झेलम = वितस्ता।
पोरस की सेना — युद्ध हाथियों के लिए प्रसिद्ध।
सिकंदर का प्रिय घोड़ा — बुकेफालस।
बुकेफालस की स्मृति में — बुकेफाला नगर।
विजय की स्मृति में — निकाया नगर।
हाइफेसिस = व्यास = विपाशा।
व्यास नदी पर सिकंदर की सेना ने आगे बढ़ने से इनकार किया।
325 ईसा पूर्व — भारत से वापसी।
जल सेनापति — नियार्कस।
सेल्युकस निकेटर — सिकंदर का प्रमुख सैन्य अधिकारी; बाद में सेल्यूकिड साम्राज्य का संस्थापक।
सेल्युकस का बाद में चंद्रगुप्त मौर्य से संघर्ष और संधि हुई।
मेगास्थनीज — सेल्युकस का राजदूत — चंद्रगुप्त मौर्य का दरबार।
सिकंदर की मृत्यु — 323 ईसा पूर्व — बेबीलोन।
मृत्यु के समय — लगभग 32 वर्ष; 33वाँ वर्ष चल रहा था।
सिकंदर मगध तक नहीं पहुँचा; उसका भारतीय अभियान उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र तक सीमित रहा।