होमरूल लीग आंदोलन
भारत में स्वशासन की मांग का नया चरण
होमरूल लीग आंदोलन 1916 ई. में बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत भारत के लिए स्वशासन अर्थात अपने शासन में भारतीयों की अधिक भागीदारी प्राप्त करना था।
तिलक और एनी बेसेंट ने अलग-अलग होमरूल लीग स्थापित कीं, लेकिन दोनों का उद्देश्य समान था। दोनों नेताओं ने अपने-अपने कार्यक्षेत्र में सभाओं, भाषणों, समाचार-पत्रों और प्रचार के माध्यम से स्वशासन की मांग को जनता तक पहुँचाया।
होमरूल आंदोलन की पृष्ठभूमि
1907 के सूरत विभाजन के बाद भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की सक्रियता कुछ समय के लिए कमजोर हुई थी। इसके साथ ही ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियों ने भी राष्ट्रवादी गतिविधियों को प्रभावित किया।
1914 ई. में प्रथम विश्व युद्ध प्रारंभ होने के बाद भारतीय नेताओं को आशा थी कि युद्ध में भारत के सहयोग के बदले ब्रिटिश सरकार भारतीयों को अधिक राजनीतिक अधिकार प्रदान करेगी।
इसी समय बाल गंगाधर तिलक मांडले कारावास से वापस आ चुके थे और एनी बेसेंट भी भारतीय राजनीति में अधिक सक्रिय हो रही थीं।
इन परिस्थितियों में भारत में स्वशासन की मांग को संगठित रूप देने के लिए होमरूल आंदोलन प्रारंभ हुआ।
होमरूल का अर्थ
होमरूल का अर्थ था—भारत के लिए स्वशासन।
इस आंदोलन का तत्काल उद्देश्य ब्रिटिश शासन से पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त करना नहीं था, बल्कि ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत भारत को स्वशासी व्यवस्था प्रदान कराना था।
इस आंदोलन पर आयरलैंड के होमरूल आंदोलन का भी प्रभाव था। एनी बेसेंट आयरलैंड में स्वशासन से संबंधित राजनीतिक विचारों से परिचित थीं।
परीक्षा के लिए
होमरूल = ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत भारत के लिए स्वशासन की मांग।
तिलक की होमरूल लीग
बाल गंगाधर तिलक ने अप्रैल 1916 ई. में बेलगाम में अपनी होमरूल लीग स्थापित की।
तिलक की लीग का मुख्य कार्यक्षेत्र महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रांत और बरार के क्षेत्र थे।
तिलक ने सभाओं और भाषणों के माध्यम से स्वशासन के विचार को जनता तक पहुँचाया तथा राष्ट्रवादी राजनीतिक गतिविधियों को पुनः सक्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनका प्रसिद्ध उद्घोष “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा” भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में अत्यंत लोकप्रिय हुआ।
याद रखें
बाल गंगाधर तिलक → अप्रैल 1916 → बेलगाम → होमरूल लीग।
एनी बेसेंट की होमरूल लीग
एनी बेसेंट ने सितंबर 1916 ई. में अपनी अखिल भारतीय होमरूल लीग की स्थापना की।
उनकी लीग का कार्यक्षेत्र तिलक की लीग के लिए निर्धारित क्षेत्रों को छोड़कर भारत के अधिकांश अन्य भागों में फैला हुआ था।
एनी बेसेंट के सहयोगियों में जॉर्ज अरुंडेल, बी. पी. वाडिया और सी. पी. रामास्वामी अय्यर जैसे नेता महत्वपूर्ण थे।
एनी बेसेंट ने पूरे देश में स्वशासन की मांग का प्रचार किया और होमरूल आंदोलन को अखिल भारतीय स्वरूप प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
याद रखें
एनी बेसेंट → सितंबर 1916 → अखिल भारतीय होमरूल लीग।
तिलक और एनी बेसेंट की दो लीग
| तथ्य | तिलक की लीग | एनी बेसेंट की लीग |
|---|---|---|
| स्थापना | अप्रैल 1916 | सितंबर 1916 |
| प्रमुख नेता | बाल गंगाधर तिलक | एनी बेसेंट |
| मुख्य उद्देश्य | भारत के लिए स्वशासन | भारत के लिए स्वशासन |
| मुख्य कार्यक्षेत्र | महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रांत और बरार | भारत के अन्य अधिकांश क्षेत्र |
भ्रम से बचें
तिलक और एनी बेसेंट ने एक ही संयुक्त लीग स्थापित नहीं की थी। दोनों ने अपनी अलग-अलग होमरूल लीग स्थापित की थीं और उनके कार्यक्षेत्र भी अलग निर्धारित थे, लेकिन दोनों का मुख्य राजनीतिक उद्देश्य भारत के लिए स्वशासन प्राप्त करना था।
एनी बेसेंट के समाचार-पत्र
एनी बेसेंट ने होमरूल आंदोलन और स्वशासन की मांग के प्रचार के लिए पत्रकारिता का प्रभावी उपयोग किया।
उन्होंने “न्यू इंडिया” नामक दैनिक समाचार-पत्र के माध्यम से ब्रिटिश शासन की नीतियों की आलोचना की और भारत के लिए स्वशासन की मांग को लोकप्रिय बनाया।
उनका एक अन्य महत्वपूर्ण प्रकाशन “कॉमनवील” था, जिसका उपयोग भी राष्ट्रवादी राजनीतिक विचारों और होमरूल की मांग के प्रचार के लिए किया गया।
परीक्षा के लिए
एनी बेसेंट → न्यू इंडिया + कॉमनवील → होमरूल आंदोलन के प्रचार के प्रमुख माध्यम।
सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी और आंदोलन
गोपालकृष्ण गोखले ने 1905 ई. में सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी की स्थापना की थी।
1915 में गोखले की मृत्यु के बाद संगठन के भीतर होमरूल आंदोलन को लेकर मतभेद थे और संस्था ने औपचारिक रूप से होमरूल लीग में विलय या पूर्ण संगठनात्मक भागीदारी नहीं की।
इसके बावजूद सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी से जुड़े कुछ सदस्यों ने होमरूल आंदोलन के विचारों और स्वशासन की मांग के प्रचार में सहयोग किया।
इसलिए यह कहना कि सोसाइटी के सभी सदस्यों को होमरूल लीग में प्रवेश की पूर्णतः मनाही थी, ऐतिहासिक स्थिति को अत्यधिक सरल बना देता है।
सरकार का दमन और एनी बेसेंट की नजरबंदी
होमरूल आंदोलन के तेजी से फैलने से ब्रिटिश सरकार चिंतित हो गई और उसने आंदोलन को नियंत्रित करने के लिए दमनात्मक कदम उठाए।
1917 ई. में एनी बेसेंट को बी. पी. वाडिया और जॉर्ज अरुंडेल के साथ नजरबंद कर दिया गया।
एनी बेसेंट की नजरबंदी का पूरे देश में विरोध हुआ और इससे होमरूल आंदोलन को और अधिक जनसमर्थन मिला।
बढ़ते राजनीतिक दबाव के कारण बाद में एनी बेसेंट को रिहा कर दिया गया।
महत्वपूर्ण
1917 → एनी बेसेंट की नजरबंदी → व्यापक विरोध → होमरूल आंदोलन को अधिक समर्थन।
एनी बेसेंट बनीं कांग्रेस अध्यक्ष
होमरूल आंदोलन के दौरान एनी बेसेंट की लोकप्रियता और राजनीतिक प्रभाव में तेजी से वृद्धि हुई।
1917 ई. में कलकत्ता में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन की अध्यक्ष एनी बेसेंट बनीं।
वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष थीं।
परीक्षा में बहुत महत्वपूर्ण
कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष → एनी बेसेंट → कलकत्ता अधिवेशन → 1917।
वैलेंटाइन शिरोल और बाल गंगाधर तिलक
ब्रिटिश पत्रकार और लेखक वैलेंटाइन शिरोल ने भारतीय राष्ट्रवाद और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध बढ़ते असंतोष पर लेख लिखे, जो बाद में “इंडियन अनरेस्ट” नामक पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुए।
शिरोल ने बाल गंगाधर तिलक को भारत में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध बढ़ती राजनीतिक अशांति के प्रमुख प्रेरकों में प्रस्तुत किया। इसी संदर्भ में तिलक के लिए “भारतीय अशांति का जनक” कथन प्रसिद्ध हुआ।
तिलक ने शिरोल के इन आरोपों को अपनी प्रतिष्ठा के लिए हानिकारक माना और उनके विरुद्ध इंग्लैंड में मानहानि का मुकदमा दायर किया।
तिलक इस मानहानि के मुकदमे में सफल नहीं हुए।
याद रखें
वैलेंटाइन शिरोल → इंडियन अनरेस्ट → तिलक को “भारतीय अशांति का जनक” कहा गया → तिलक ने मानहानि का मुकदमा किया।
होमरूल और लखनऊ अधिवेशन
होमरूल आंदोलन ने 1916 में भारतीय राष्ट्रीय राजनीति में सक्रियता और राजनीतिक एकता का वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इसी वर्ष लखनऊ में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का महत्वपूर्ण अधिवेशन आयोजित हुआ, जिसमें उदारवादी और उग्रवादी नेताओं का पुनर्मिलन हुआ।
इसी समय कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच लखनऊ समझौता भी हुआ।
इस प्रकार 1916 का वर्ष भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में होमरूल आंदोलन, कांग्रेस के पुनर्मिलन और कांग्रेस-लीग समझौते के कारण विशेष महत्व रखता है।
मॉन्टेग्यू घोषणा और होमरूल आंदोलन
होमरूल आंदोलन और भारत में बढ़ते राजनीतिक दबाव की पृष्ठभूमि में ब्रिटिश सरकार को भारतीय संवैधानिक सुधारों के संबंध में अपनी नीति स्पष्ट करनी पड़ी।
20 अगस्त 1917 को भारत सचिव एडविन मॉन्टेग्यू ने भारत में क्रमिक रूप से उत्तरदायी शासन के विकास की नीति की घोषणा की।
इस घोषणा के बाद होमरूल आंदोलन की तत्काल राजनीतिक तीव्रता धीरे-धीरे कम होने लगी।
आगे गांधीजी के नेतृत्व में व्यापक जन-आंदोलनों के उदय के साथ भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का स्वरूप भी बदल गया।
होमरूल आंदोलन का महत्व
होमरूल आंदोलन ने सूरत विभाजन के बाद कमजोर पड़ी राष्ट्रीय राजनीतिक गतिविधियों को पुनः सक्रिय किया।
इसने स्वशासन की मांग को जनता के बीच व्यापक रूप से लोकप्रिय बनाया और राष्ट्रवादी राजनीति को नए क्षेत्रों तथा नए सामाजिक वर्गों तक पहुँचाया।
इस आंदोलन ने बाल गंगाधर तिलक को पुनः अखिल भारतीय राजनीति में प्रमुख स्थान दिलाने और एनी बेसेंट को राष्ट्रीय आंदोलन की अग्रणी नेता बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आंदोलन ने कांग्रेस के उदारवादी और उग्रवादी नेताओं के बीच बढ़ती निकटता के लिए भी अनुकूल वातावरण बनाया।
होमरूल आंदोलन ने आगे आने वाले गांधीवादी जन-आंदोलनों से पहले भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में राजनीतिक सक्रियता की एक नई लहर उत्पन्न की।
घटनाओं का सही क्रम
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1905 | गोपालकृष्ण गोखले द्वारा सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी की स्थापना |
| 1914 | बाल गंगाधर तिलक मांडले कारावास से रिहा |
| 1914 | प्रथम विश्व युद्ध प्रारंभ |
| अप्रैल 1916 | तिलक द्वारा बेलगाम में होमरूल लीग की स्थापना |
| सितंबर 1916 | एनी बेसेंट द्वारा अखिल भारतीय होमरूल लीग की स्थापना |
| 1916 | लखनऊ में कांग्रेस के उदारवादी और उग्रवादी नेताओं का पुनर्मिलन |
| 1916 | कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच लखनऊ समझौता |
| 1917 | एनी बेसेंट की नजरबंदी और व्यापक विरोध |
| 20 अगस्त 1917 | मॉन्टेग्यू घोषणा |
| 1917 | एनी बेसेंट कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष बनीं |
परीक्षा में भ्रमित करने वाले तथ्य
होमरूल आंदोलन 1916 में प्रारंभ हुआ।
तिलक और एनी बेसेंट ने एक संयुक्त लीग नहीं बनाई थी; दोनों की अलग-अलग होमरूल लीग थीं।
तिलक की होमरूल लीग → अप्रैल 1916 → बेलगाम।
एनी बेसेंट की अखिल भारतीय होमरूल लीग → सितंबर 1916।
दोनों लीगों का मुख्य उद्देश्य भारत के लिए स्वशासन प्राप्त करना था।
एनी बेसेंट के प्रमुख पत्र न्यू इंडिया और कॉमनवील थे।
1917 में एनी बेसेंट को नजरबंद किया गया, जिसका पूरे देश में विरोध हुआ।
एनी बेसेंट 1917 में कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष बनीं।
वैलेंटाइन शिरोल → इंडियन अनरेस्ट → बाल गंगाधर तिलक से “भारतीय अशांति का जनक” कथन जुड़ा।
तिलक ने शिरोल के विरुद्ध इंग्लैंड में मानहानि का मुकदमा किया, लेकिन वे मुकदमा नहीं जीत सके।
अंतिम त्वरित पुनरावृत्ति
होमरूल लीग आंदोलन 1916 ई. में बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ।
इसका प्रमुख उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत भारत के लिए स्वशासन प्राप्त करना था।
बाल गंगाधर तिलक ने अप्रैल 1916 में बेलगाम में अपनी होमरूल लीग स्थापित की।
तिलक की लीग का प्रमुख कार्यक्षेत्र महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रांत और बरार था।
एनी बेसेंट ने सितंबर 1916 में अपनी अखिल भारतीय होमरूल लीग स्थापित की।
तिलक और एनी बेसेंट ने अलग-अलग लीग स्थापित की थीं, लेकिन दोनों का उद्देश्य समान था।
एनी बेसेंट ने आंदोलन के प्रचार के लिए न्यू इंडिया और कॉमनवील जैसे प्रकाशनों का उपयोग किया।
गोखले द्वारा स्थापित सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी के भीतर होमरूल आंदोलन को लेकर मतभेद थे, लेकिन उसके कुछ सदस्यों ने स्वशासन के प्रचार में सहयोग किया।
ब्रिटिश सरकार ने आंदोलन को दबाने का प्रयास किया और 1917 में एनी बेसेंट को नजरबंद कर दिया।
उनकी नजरबंदी के विरोध ने होमरूल आंदोलन की लोकप्रियता को और बढ़ाया।
1917 में एनी बेसेंट भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष बनीं।
ब्रिटिश लेखक वैलेंटाइन शिरोल की पुस्तक इंडियन अनरेस्ट में तिलक को भारत में राजनीतिक अशांति के प्रमुख प्रेरक के रूप में प्रस्तुत किया गया और उनसे “भारतीय अशांति का जनक” कथन जुड़ा।
तिलक ने शिरोल के विरुद्ध इंग्लैंड में मानहानि का मुकदमा किया, लेकिन वे उसमें सफल नहीं हुए।
होमरूल आंदोलन ने स्वशासन की मांग को लोकप्रिय बनाया, राष्ट्रीय आंदोलन को पुनः सक्रिय किया और 1916 की राजनीतिक एकता के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया।
परीक्षा के लिए मुख्य क्रम है — 1914 तिलक की रिहाई → अप्रैल 1916 तिलक की होमरूल लीग → सितंबर 1916 एनी बेसेंट की होमरूल लीग → 1916 लखनऊ अधिवेशन एवं लखनऊ समझौता → 1917 एनी बेसेंट की नजरबंदी → 1917 मॉन्टेग्यू घोषणा → 1917 एनी बेसेंट कांग्रेस अध्यक्ष।