भारतीय संविधान के भाग, अनुसूचियाँ एवं नागरिकता
संविधान की संरचना, 12 अनुसूचियाँ और भारतीय नागरिकता के महत्वपूर्ण प्रावधान
भारतीय संविधान की संरचना
भारतीय संविधान को विभिन्न भागों, अनुच्छेदों और अनुसूचियों में व्यवस्थित किया गया है। प्रत्येक भाग किसी विशेष संवैधानिक विषय से संबंधित है, जबकि अनुसूचियों में राज्यों, पदाधिकारियों, शपथ, भाषाओं, विधायी सूचियों, पंचायतों और नगरपालिकाओं जैसे विषयों का विस्तृत विवरण दिया गया है।
मूल संविधान में 22 भाग और 8 अनुसूचियाँ थीं। बाद के संविधान संशोधनों द्वारा नए भाग और अनुसूचियाँ जोड़ी गईं। इसलिए वर्तमान संरचना पढ़ते समय केवल मूल 22 भागों की पुरानी सूची पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
संविधान के भाग 1 से भाग 4-क
संघ, नागरिकता, मूल अधिकार, नीति-निदेशक तत्व और मूल कर्तव्य
| भाग | विषय | अनुच्छेद |
|---|---|---|
| भाग 1 | संघ और उसका राज्यक्षेत्र | 1 से 4 |
| भाग 2 | नागरिकता | 5 से 11 |
| भाग 3 | मूल अधिकार | 12 से 35 |
| भाग 4 | राज्य के नीति-निदेशक तत्व | 36 से 51 |
| भाग 4-क | मूल कर्तव्य | 51-क |
🎯 याद रखें
भाग 3 = मूल अधिकार
भाग 4 = नीति-निदेशक तत्व
भाग 4-क = मूल कर्तव्य
भाग 5 से भाग 8
संघ, राज्य और संघ राज्यक्षेत्र
| भाग | विषय | अनुच्छेद |
|---|---|---|
| भाग 5 | संघ | 52 से 151 |
| भाग 6 | राज्य | 152 से 237 |
| भाग 7 | पहली अनुसूची के भाग ख के राज्य | अनुच्छेद 238 — निरसित |
| भाग 8 | संघ राज्यक्षेत्र | 239 से 242 |
⚠️ भाग 7 अब लागू नहीं है
भाग 7 और अनुच्छेद 238 को संविधान के 7वें संशोधन अधिनियम, 1956 द्वारा निरसित कर दिया गया। पुरानी पुस्तकों में इसका नाम दिखाई देता है, लेकिन वर्तमान संविधान में यह प्रभावी भाग नहीं है।
📗 संघ राज्यक्षेत्र
भाग 8 में अनुच्छेद 239, 239-क, 239-कक, 239-कख, 239-ख, 240 और 241 जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान आते हैं। अनुच्छेद 242 निरसित है।
भाग 9, 9-क और 9-ख
पंचायतें, नगरपालिकाएँ और सहकारी समितियाँ
| भाग | विषय | अनुच्छेद |
|---|---|---|
| भाग 9 | पंचायतें | 243 से 243-ओ |
| भाग 9-क | नगरपालिकाएँ | 243-पी से 243-जेडजी |
| भाग 9-ख | सहकारी समितियाँ | 243-जेडएच से 243-जेडटी |
⚠️ महत्वपूर्ण सुधार
“भाग 9 — पंचायत — केवल अनुच्छेद 243” लिखना अधूरा है। पंचायतों का पूरा भाग अनुच्छेद 243 से 243-ओ तक है।
🎯 संशोधन
73वाँ संविधान संशोधन — पंचायतों से संबंधित।
74वाँ संविधान संशोधन — नगरपालिकाओं से संबंधित।
भाग 10 से भाग 14-क
जनजातीय क्षेत्र, केंद्र-राज्य संबंध, वित्त, सेवाएँ और अधिकरण
| भाग | विषय | अनुच्छेद |
|---|---|---|
| भाग 10 | अनुसूचित और जनजातीय क्षेत्र | 244 और 244-क |
| भाग 11 | संघ और राज्यों के बीच संबंध | 245 से 263 |
| भाग 12 | वित्त, संपत्ति, संविदाएँ और वाद | 264 से 300-क |
| भाग 13 | भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर व्यापार, वाणिज्य और समागम | 301 से 307 |
| भाग 14 | संघ और राज्यों के अधीन सेवाएँ | 308 से 323 |
| भाग 14-क | अधिकरण | 323-क और 323-ख |
📗 भाग 14-क
अनुच्छेद 323-क — प्रशासनिक अधिकरण
अनुच्छेद 323-ख — अन्य विषयों के अधिकरण
भाग 15 से भाग 18
निर्वाचन, विशेष उपबंध, राजभाषा और आपातकाल
| भाग | विषय | अनुच्छेद |
|---|---|---|
| भाग 15 | निर्वाचन | 324 से 329 |
| भाग 16 | कुछ वर्गों के संबंध में विशेष उपबंध | 330 से 342-क |
| भाग 17 | राजभाषा | 343 से 351 |
| भाग 18 | आपात उपबंध | 352 से 360 |
⚠️ भाग 16 में नया विस्तार
पुरानी पुस्तकों में भाग 16 को केवल 330 से 342 तक लिखा मिल सकता है। बाद में अनुच्छेद 342-क सहित अन्य नए प्रावधान जुड़े हैं, इसलिए वर्तमान अध्ययन में इसे केवल पुराने अनुच्छेद-क्रम तक सीमित न करें।
भाग 19 से भाग 22
प्रकीर्ण प्रावधान से संविधान के प्रारंभ तक
| भाग | विषय | अनुच्छेद |
|---|---|---|
| भाग 19 | प्रकीर्ण | 361 से 367 |
| भाग 20 | संविधान का संशोधन | 368 |
| भाग 21 | अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध | 369 से 392 |
| भाग 22 | संक्षिप्त नाम, प्रारंभ, हिंदी में प्राधिकृत पाठ और निरसन | 393 से 395 |
📗 भाग 19
भाग 19 में राष्ट्रपति और राज्यपाल जैसे संवैधानिक पदाधिकारियों को कुछ परिस्थितियों में संरक्षण देने वाले अनुच्छेद 361 सहित विभिन्न प्रकीर्ण प्रावधान आते हैं।
पहली से चौथी अनुसूची
राज्य, संवैधानिक पद, शपथ और राज्यसभा
पहली अनुसूची में भारत के राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों तथा उनके राज्यक्षेत्र का विवरण दिया गया है। वर्तमान में भारत में 28 राज्य और 8 संघ राज्यक्षेत्र हैं।
दूसरी अनुसूची में राष्ट्रपति, राज्यपाल, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, राज्यसभा और विधान परिषदों के सभापति-उपसभापति, सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीश तथा नियंत्रक-महालेखा परीक्षक जैसे संवैधानिक पदों से संबंधित वेतन, भत्तों और विशेषाधिकारों के प्रावधान हैं।
तीसरी अनुसूची में केंद्रीय एवं राज्य मंत्रियों, संसद और राज्य विधानमंडल के सदस्यों, न्यायाधीशों तथा कुछ अन्य संवैधानिक पदाधिकारियों द्वारा ली जाने वाली शपथ या प्रतिज्ञान के प्रारूप दिए गए हैं।
चौथी अनुसूची में राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों को राज्यसभा में आवंटित सीटों का विवरण दिया गया है।
पाँचवीं से आठवीं अनुसूची
जनजातीय क्षेत्र, विधायी सूचियाँ और भाषाएँ
पाँचवीं अनुसूची अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन एवं नियंत्रण से संबंधित है।
छठी अनुसूची विशेष रूप से असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित है। इसके अंतर्गत स्वायत्त जिला और क्षेत्रीय परिषदों की व्यवस्था की गई है।
सातवीं अनुसूची में केंद्र और राज्यों के बीच विधायी विषयों का वितरण तीन सूचियों में किया गया है—संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची।
आठवीं अनुसूची में संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त भाषाओं को रखा गया है। वर्तमान में इसमें 22 भाषाएँ हैं।
⚠️ सातवीं अनुसूची
“संघ सूची, राज्य सूची एवं दसवीं समवर्ती सूची” गलत है। सही है—संघ सूची + राज्य सूची + समवर्ती सूची।
नौवीं से बारहवीं अनुसूची
कानूनों की सुरक्षा, दल-बदल, पंचायत और नगरपालिका
नौवीं अनुसूची को प्रथम संविधान संशोधन, 1951 द्वारा जोड़ा गया था। प्रारंभिक उद्देश्य मुख्य रूप से भूमि सुधार और जमींदारी उन्मूलन से संबंधित कानूनों को संवैधानिक चुनौतियों से सुरक्षा देना था।
बाद में अन्य प्रकार के कानून भी नौवीं अनुसूची में जोड़े गए। इसलिए इसे केवल “भूमि सुधार संबंधी अधिनियमों की सूची” कहना अधूरा है।
दसवीं अनुसूची दल परिवर्तन के आधार पर संसद और राज्य विधानमंडलों के सदस्यों की निरर्हता से संबंधित है। इसे सामान्यतः दल-बदल विरोधी कानून कहा जाता है।
ग्यारहवीं अनुसूची पंचायतों की शक्तियों, प्राधिकार और उत्तरदायित्व से संबंधित विषयों की सूची देती है। इसमें 29 विषय हैं।
बारहवीं अनुसूची नगरपालिकाओं की शक्तियों, प्राधिकार और उत्तरदायित्व से संबंधित विषयों को सूचीबद्ध करती है। इसमें 18 विषय हैं।
🎯 जल्दी याद करें
10वीं = दल-बदल
11वीं = पंचायत — 29 विषय
12वीं = नगरपालिका — 18 विषय
12 अनुसूचियाँ — एक नज़र में
त्वरित परीक्षा पुनरावृत्ति
| अनुसूची | मुख्य विषय |
|---|---|
| पहली | राज्य और संघ राज्यक्षेत्र |
| दूसरी | प्रमुख संवैधानिक पदों से संबंधित वेतन, भत्ते एवं विशेषाधिकार |
| तीसरी | शपथ और प्रतिज्ञान के प्रारूप |
| चौथी | राज्यसभा में सीटों का आवंटन |
| पाँचवीं | अनुसूचित क्षेत्र और अनुसूचित जनजातियाँ |
| छठी | असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्र |
| सातवीं | संघ, राज्य और समवर्ती सूची |
| आठवीं | मान्यता प्राप्त भाषाएँ |
| नौवीं | विशिष्ट कानूनों को संवैधानिक संरक्षण से संबंधित सूची |
| दसवीं | दल-बदल के आधार पर निरर्हता |
| ग्यारहवीं | पंचायतें — 29 विषय |
| बारहवीं | नगरपालिकाएँ — 18 विषय |
भारतीय नागरिकता
संविधान और नागरिकता अधिनियम की मूल व्यवस्था
भारतीय संविधान का भाग 2 और अनुच्छेद 5 से 11 संविधान लागू होने के समय नागरिकता से संबंधित हैं।
संविधान ने नागरिकता के विस्तृत भविष्यकालीन कानून बनाने की शक्ति संसद को दी। इसी शक्ति के आधार पर संसद ने नागरिकता अधिनियम, 1955 बनाया।
भारत में एकल नागरिकता की व्यवस्था है। अर्थात किसी व्यक्ति की अलग-अलग “भारत की नागरिकता” और “राज्य की नागरिकता” नहीं होती।
भारतीय संविधान में एकल नागरिकता की व्यवस्था पर ब्रिटिश संवैधानिक व्यवस्था का प्रभाव माना जाता है।
भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के पाँच तरीके
नागरिकता अधिनियम, 1955 के अंतर्गत
| क्रम | नागरिकता प्राप्त करने का आधार |
|---|---|
| 1 | जन्म द्वारा |
| 2 | वंश द्वारा |
| 3 | पंजीकरण द्वारा |
| 4 | देशीकरण द्वारा |
| 5 | राज्यक्षेत्र के भारत में सम्मिलित होने द्वारा |
📗 भाषा-सुधार
“भूमि के अर्जन द्वारा” की जगह “राज्यक्षेत्र के भारत में सम्मिलित होने द्वारा” अधिक सही संवैधानिक अभिव्यक्ति है।
नागरिकता समाप्त होने के तरीके
परित्याग, पर्यवसान और वंचना
भारतीय नागरिकता तीन प्रमुख तरीकों से समाप्त हो सकती है—परित्याग, पर्यवसान और वंचना।
परित्याग में कोई भारतीय नागरिक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार स्वेच्छा से अपनी भारतीय नागरिकता छोड़ सकता है।
पर्यवसान की स्थिति सामान्यतः तब उत्पन्न होती है जब कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त करता है और नागरिकता अधिनियम के संबंधित प्रावधान लागू होते हैं।
वंचना में केंद्र सरकार कानून में निर्धारित विशेष परिस्थितियों में कुछ प्रकार से नागरिकता प्राप्त व्यक्तियों की नागरिकता आदेश द्वारा समाप्त कर सकती है।
🎯 तीन शब्द
परित्याग + पर्यवसान + वंचना
सात वर्ष विदेश रहने वाला नियम
एक बहुत सामान्य लेकिन भ्रामक तथ्य
यह कहना कि “भारत से लगातार सात वर्ष बाहर रहने पर किसी भी भारतीय नागरिक की नागरिकता अपने-आप समाप्त हो जाती है” सही नहीं है।
सात वर्ष लगातार भारत से बाहर रहने का उल्लेख नागरिकता अधिनियम में वंचना से संबंधित कुछ विशेष परिस्थितियों में आता है। यह प्रत्येक जन्मजात भारतीय नागरिक पर स्वतः लागू होने वाला नियम नहीं है।
ऐसी स्थिति में भी नागरिकता केवल सात वर्ष पूरे होते ही अपने-आप समाप्त नहीं हो जाती; कानून में निर्धारित शर्तों और केंद्र सरकार की प्रक्रिया का महत्व होता है।
❌ परीक्षा में गलत न करें
7 वर्ष विदेश = नागरिकता स्वतः समाप्त — गलत।
इसे नागरिकता की वंचना से जुड़ी विशेष वैधानिक परिस्थिति के रूप में पढ़ें।
नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019
विशिष्ट समुदायों के लिए विशेष नागरिकता व्यवस्था
नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 ने अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से भारत आए कुछ निर्दिष्ट अल्पसंख्यक समुदायों के लिए नागरिकता प्राप्त करने की विशेष व्यवस्था की।
इसमें हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय शामिल हैं।
यह व्यवस्था उन पात्र व्यक्तियों से संबंधित है जो 31 दिसंबर 2014 या उससे पहले भारत में प्रवेश कर चुके थे और कानून में निर्धारित अन्य शर्तें पूरी करते हैं।
इस अधिनियम का अर्थ यह नहीं है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के इन छह समुदायों के सभी लोगों को स्वतः भारतीय नागरिकता मिल जाती है। पात्र व्यक्ति को निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत आवेदन और आवश्यक शर्तें पूरी करनी होती हैं।
इस विशेष श्रेणी के लिए देशीकरण से संबंधित निवास अवधि की आवश्यकता को सामान्य 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष किया गया।
नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 को लागू करने के लिए संबंधित नागरिकता संशोधन नियम, 2024 को 11 मार्च 2024 को अधिसूचित किया गया।
🎯 सीएए सूत्र
3 देश — अफगानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान
6 समुदाय — हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई
कट-ऑफ — 31 दिसंबर 2014
प्रवासी भारतीय दिवस
भारतीय प्रवासी समुदाय से संबंध
प्रवासी भारतीय दिवस का संबंध विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों और भारत के बीच संबंध मजबूत करने से है।
इसका आयोजन 9 जनवरी से जुड़ा है क्योंकि महात्मा गांधी 9 जनवरी 1915 को दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे।
प्रारंभ में इसका आयोजन प्रतिवर्ष किया जाता था। बाद में इसे द्विवार्षिक अर्थात प्रत्येक दो वर्ष में आयोजित करने की व्यवस्था अपनाई गई।
लक्ष्मीमल सिंघवी समिति
भारतीय प्रवासी समुदाय और ओसीआई की पृष्ठभूमि
डॉ. लक्ष्मीमल सिंघवी की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति का संबंध भारतीय प्रवासी समुदाय की स्थिति और भारत के साथ उनके संबंधों के अध्ययन से था।
समिति ने कुछ देशों में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों के लिए दोहरी नागरिकता जैसी सुविधाओं की दिशा में सुझाव दिए।
आगे चलकर विदेशी भारतीय नागरिक कार्डधारक की व्यवस्था विकसित हुई, लेकिन इसे वास्तविक अर्थ में भारत की दोहरी नागरिकता नहीं समझना चाहिए।
⚠️ महत्वपूर्ण
ओसीआई = भारत की दोहरी नागरिकता नहीं है। ओसीआई कार्डधारक भारतीय नागरिक नहीं माना जाता और उसे नागरिकों के सभी राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं होते।
पीआईओ और ओसीआई
पुरानी पीआईओ योजना अब अलग रूप में लागू नहीं
पुरानी व्यवस्था में भारतीय मूल का व्यक्ति कार्ड और विदेशी भारतीय नागरिक कार्ड अलग-अलग व्यवस्थाएँ थीं।
बाद में पीआईओ कार्ड योजना का ओसीआई कार्ड योजना में विलय कर दिया गया। इसलिए वर्तमान संदर्भ में पुराने पीआईओ कार्डधारक वाले तथ्यों को ओसीआई व्यवस्था के साथ समझना चाहिए।
ओसीआई कार्डधारक को भारत में कई प्रकार की दीर्घकालीन सुविधाएँ प्राप्त होती हैं, लेकिन वह भारत का पूर्ण नागरिक नहीं होता।
ओसीआई कार्डधारक को सामान्यतः कृषि भूमि, फार्म हाउस या बागान संपत्ति खरीदने का वही अधिकार प्राप्त नहीं होता जो भारतीय नागरिक को प्राप्त हो सकता है।
⚠️ पीआईओ शब्द
पुरानी पुस्तक में यदि लिखा हो—“पीआईओ कार्डधारक कृषि भूमि नहीं खरीद सकता”—तो वर्तमान व्यवस्था में ध्यान रखें कि पीआईओ कार्ड योजना ओसीआई में विलय हो चुकी है।
एकल और दोहरी नागरिकता
भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका में अंतर
भारत में एकल नागरिकता का सिद्धांत अपनाया गया है। व्यक्ति भारत का नागरिक होता है; उसकी अलग से बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र या किसी अन्य राज्य की संवैधानिक नागरिकता नहीं होती।
इसके विपरीत संयुक्त राज्य अमेरिका की संघीय व्यवस्था में व्यक्ति को संयुक्त राज्य अमेरिका की नागरिकता के साथ संबंधित राज्य की नागरिकता का भी संवैधानिक दर्जा प्राप्त होता है।
इसी कारण प्रतियोगी परीक्षाओं में भारत की एकल नागरिकता और अमेरिका की दोहरी स्तर वाली संघीय नागरिकता का अंतर पूछा जाता है।
🎯 याद रखें
भारत — एकल नागरिकता
अमेरिका — संघीय एवं राज्य स्तर की नागरिकता
महत्वपूर्ण गलतियाँ और सही तथ्य
परीक्षा में भ्रम से बचें
गलत: भाग 9 केवल अनुच्छेद 243 है।
सही: पंचायतों का भाग 243 से 243-ओ तक है।
अधूरा: संविधान में केवल भाग 1 से 22 हैं।
सही: मूल क्रम के बीच बाद में भाग 4-क, 9-क, 9-ख और 14-क जैसे भाग जोड़े गए।
गलत: भाग 7 वर्तमान में प्रभावी है।
सही: भाग 7 और अनुच्छेद 238 को 7वें संविधान संशोधन द्वारा निरसित किया गया।
गलत: सातवीं अनुसूची में दसवीं समवर्ती सूची है।
सही: सातवीं अनुसूची में संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची हैं।
अधूरा: नौवीं अनुसूची केवल भूमि सुधार कानूनों की सूची है।
सही: प्रारंभिक उद्देश्य भूमि सुधार कानूनों को संरक्षण देना था, लेकिन बाद में अन्य कानून भी इसमें जोड़े गए।
गलत: सात वर्ष विदेश रहने पर हर भारतीय की नागरिकता अपने-आप समाप्त हो जाती है।
सही: ऐसा कोई सार्वभौमिक स्वतः समाप्ति नियम नहीं है।
गलत: सीएए के अंतर्गत छह समुदायों के सभी विदेशी लोगों को स्वतः नागरिकता मिल जाती है।
सही: पात्रता, प्रवेश की तारीख और वैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
पुराना: पीआईओ कार्ड एक अलग वर्तमान योजना है।
सही: पीआईओ कार्ड योजना को ओसीआई योजना में मिला दिया गया है।
गलत: ओसीआई कार्ड भारत की दोहरी नागरिकता है।
सही: ओसीआई भारत की पूर्ण या दोहरी नागरिकता नहीं है।
त्वरित पुनरावृत्ति
भाग, अनुसूची और नागरिकता एक साथ
🧠 भाग याद करें
🧠 अंतिम भाग
⚡ अंतिम पुनरावृत्ति
भाग 1 — संघ और उसका राज्यक्षेत्र — अनुच्छेद 1 से 4।
भाग 2 — नागरिकता — अनुच्छेद 5 से 11।
भाग 3 — मूल अधिकार — अनुच्छेद 12 से 35।
भाग 4 — राज्य के नीति-निदेशक तत्व — अनुच्छेद 36 से 51।
भाग 4-क — मूल कर्तव्य — अनुच्छेद 51-क।
भाग 5 — संघ — अनुच्छेद 52 से 151।
भाग 6 — राज्य — अनुच्छेद 152 से 237।
भाग 7 — निरसित; अनुच्छेद 238 निरसित।
भाग 8 — संघ राज्यक्षेत्र।
भाग 9 — पंचायतें — अनुच्छेद 243 से 243-ओ।
भाग 9-क — नगरपालिकाएँ — अनुच्छेद 243-पी से 243-जेडजी।
भाग 9-ख — सहकारी समितियाँ — अनुच्छेद 243-जेडएच से 243-जेडटी।
भाग 10 — अनुसूचित और जनजातीय क्षेत्र — अनुच्छेद 244 और 244-क।
भाग 11 — संघ और राज्यों के संबंध — अनुच्छेद 245 से 263।
भाग 12 — वित्त, संपत्ति, संविदाएँ और वाद — अनुच्छेद 264 से 300-क।
भाग 13 — व्यापार, वाणिज्य और समागम — अनुच्छेद 301 से 307।
भाग 14 — संघ और राज्यों के अधीन सेवाएँ — अनुच्छेद 308 से 323।
भाग 14-क — अधिकरण — अनुच्छेद 323-क और 323-ख।
भाग 15 — निर्वाचन — अनुच्छेद 324 से 329।
भाग 17 — राजभाषा — अनुच्छेद 343 से 351।
भाग 18 — आपात उपबंध — अनुच्छेद 352 से 360।
भाग 20 — संविधान संशोधन — अनुच्छेद 368।
भारतीय संविधान में वर्तमान में 12 अनुसूचियाँ हैं।
सातवीं अनुसूची — संघ सूची + राज्य सूची + समवर्ती सूची।
आठवीं अनुसूची — 22 भाषाएँ।
दसवीं अनुसूची — दल-बदल विरोधी प्रावधान।
ग्यारहवीं अनुसूची — पंचायत — 29 विषय।
बारहवीं अनुसूची — नगरपालिका — 18 विषय।
नागरिकता प्राप्ति — जन्म, वंश, पंजीकरण, देशीकरण और राज्यक्षेत्र के भारत में सम्मिलित होने द्वारा।
नागरिकता समाप्ति — परित्याग, पर्यवसान और वंचना।
सात वर्ष विदेश रहने मात्र से भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त नहीं होती।
सीएए, 2019 — अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के निर्दिष्ट हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी एवं ईसाई समुदायों के पात्र व्यक्तियों से संबंधित विशेष प्रावधान।
सीएए की महत्वपूर्ण कट-ऑफ तारीख — 31 दिसंबर 2014।
पीआईओ कार्ड योजना का ओसीआई योजना में विलय हो चुका है।
ओसीआई कार्ड भारत की दोहरी नागरिकता नहीं है।
भारत — एकल नागरिकता; इसका संवैधानिक प्रभाव ब्रिटिश व्यवस्था से जुड़ा माना जाता है।