दिल्ली दरबार
(1911)
दिल्ली दरबार और नई राजधानी
1911 का दिल्ली दरबार ब्रिटिश भारत के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना थी। यह दरबार ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम और महारानी मैरी के भारत आगमन तथा उनके राज्याभिषेक के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।
इसी दरबार में 12 दिसंबर 1911 को ब्रिटिश भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने और 1905 में किए गए बंगाल विभाजन को समाप्त करने की महत्वपूर्ण घोषणाएँ की गईं।
1911 का दिल्ली दरबार
दिल्ली दरबार का आयोजन दिसंबर 1911 ई. में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय के शासनकाल में किया गया।
इस दरबार में ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम और उनकी पत्नी महारानी मैरी स्वयं उपस्थित हुए।
यह दरबार उनके ब्रिटेन के सम्राट तथा भारत के सम्राट और साम्राज्ञी के रूप में राज्याभिषेक की घोषणा और उत्सव से संबंधित था।
इसलिए महारानी का नाम “विलियम मेरी” नहीं बल्कि केवल महारानी मैरी था।
परीक्षा के लिए
1911 का दिल्ली दरबार → जॉर्ज पंचम + महारानी मैरी → वायसराय लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय।
दिल्ली दरबार की परंपरा
ब्रिटिश शासनकाल में दिल्ली में कुल तीन प्रमुख शाही दरबार आयोजित किए गए।
1877 का दिल्ली दरबार महारानी विक्टोरिया को भारत की साम्राज्ञी घोषित किए जाने से संबंधित था और इसका आयोजन लॉर्ड लिटन के समय हुआ।
1903 का दिल्ली दरबार एडवर्ड सप्तम के राज्याभिषेक के उपलक्ष्य में लॉर्ड कर्जन के समय आयोजित किया गया।
1911 का तीसरा दिल्ली दरबार जॉर्ज पंचम और महारानी मैरी से संबंधित था। इसकी विशेषता यह थी कि ब्रिटिश सम्राट स्वयं भारत आए और दरबार में उपस्थित हुए।
12 दिसंबर 1911 की ऐतिहासिक घोषणाएँ
12 दिसंबर 1911 ई. को दिल्ली दरबार में जॉर्ज पंचम ने दो अत्यंत महत्वपूर्ण प्रशासनिक घोषणाएँ कीं।
पहली घोषणा के अनुसार 1905 के बंगाल विभाजन को समाप्त किया जाना था।
दूसरी घोषणा के अनुसार ब्रिटिश भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित किया जाना था।
इन दोनों घोषणाओं का भारतीय प्रशासन और राष्ट्रीय आंदोलन पर दूरगामी प्रभाव पड़ा।
बहुत महत्वपूर्ण
12 दिसंबर 1911 → बंगाल विभाजन समाप्त करने की घोषणा + राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा।
बंगाल विभाजन की समाप्ति
लॉर्ड कर्जन ने 1905 ई. में बंगाल का विभाजन किया था। इसके विरोध में व्यापक स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन शुरू हुआ।
लगातार राजनीतिक विरोध और बदलती प्रशासनिक परिस्थितियों के बीच 1911 में ब्रिटिश सरकार ने 1905 की विभाजन व्यवस्था को समाप्त करने का निर्णय लिया।
12 दिसंबर 1911 को दिल्ली दरबार में बंगाल विभाजन को समाप्त करने की घोषणा की गई।
इसके बाद बंगाली भाषी क्षेत्रों को पुनः संगठित किया गया तथा बिहार और उड़ीसा को अलग प्रशासनिक इकाई बनाने की दिशा अपनाई गई।
अरुंडेल समिति से जुड़ा भ्रम
कई प्रतियोगी परीक्षा पुस्तकों में बंगाल विभाजन की समाप्ति को अरुंडेल समिति की सिफारिश से जोड़ दिया जाता है।
लेकिन अरुंडेल समिति मुख्य रूप से राजनीतिक और संवैधानिक प्रतिनिधित्व संबंधी सुधारों पर विचार करने वाली समिति थी तथा इसका संबंध मार्ले-मिंटो सुधारों की पृष्ठभूमि से अधिक स्पष्ट रूप से था।
इसलिए अंतिम परीक्षा नोट में यह लिखना अधिक सुरक्षित है कि 1905 का बंगाल विभाजन 1911 में लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय के समय समाप्त किया गया और इसकी घोषणा जॉर्ज पंचम ने दिल्ली दरबार में की।
राजधानी कलकत्ता से दिल्ली
ब्रिटिश भारत की राजधानी लंबे समय तक कलकत्ता थी।
12 दिसंबर 1911 को जॉर्ज पंचम ने घोषणा की कि भारत सरकार की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित की जाएगी।
दिल्ली को चुनने के पीछे इसका ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्व प्रमुख था। दिल्ली लंबे समय तक अनेक भारतीय साम्राज्यों की राजधानी रही थी और उत्तर भारत के महत्वपूर्ण राजनीतिक केंद्रों में से एक थी।
राजधानी के स्थानांतरण के बाद एक नए प्रशासनिक नगर के निर्माण की योजना बनाई गई, जो आगे नई दिल्ली के रूप में विकसित हुआ।
1 अप्रैल 1912 से जुड़ा महत्वपूर्ण तथ्य
कई सामान्य ज्ञान पुस्तकों में 1 अप्रैल 1912 को दिल्ली के राजधानी बनने की तिथि के रूप में लिखा मिलता है।
लेकिन राजधानी स्थानांतरण की आधिकारिक घोषणा 12 दिसंबर 1911 को दिल्ली दरबार में हो चुकी थी और 1912 से नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू होने लगी।
1 अप्रैल 1912 की तिथि बंगाल के प्रशासनिक पुनर्गठन तथा बिहार एवं उड़ीसा को बंगाल से अलग नए प्रांत के रूप में स्थापित किए जाने से भी स्पष्ट रूप से जुड़ी हुई है।
इसलिए परीक्षा में सबसे सुरक्षित क्रम है—12 दिसंबर 1911 राजधानी स्थानांतरण की घोषणा → 1912 से दिल्ली में नई केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था → 1931 में नई दिल्ली नगर का औपचारिक उद्घाटन।
नई दिल्ली की योजना
राजधानी स्थानांतरण के बाद ब्रिटिश सरकार ने पुरानी दिल्ली के दक्षिण में एक नए प्रशासनिक नगर के निर्माण की योजना बनाई।
नई दिल्ली की नगर-योजना और प्रमुख सरकारी भवनों के निर्माण से सर एडविन लुटियंस और सर हर्बर्ट बेकर प्रमुख रूप से जुड़े थे।
रायसीना पहाड़ी के आसपास नए प्रशासनिक क्षेत्र का विकास किया गया और चौड़ी सड़कों, विशाल सरकारी भवनों तथा नियोजित आवासीय क्षेत्रों का निर्माण किया गया।
नई दिल्ली की योजना में राजपथ क्षेत्र, सचिवालय परिसर और वायसराय भवन जैसे विशाल प्रशासनिक भवन केंद्रीय स्थान रखते थे।
याद रखें
नई दिल्ली की योजना → एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर।
वायसराय भवन — वर्तमान राष्ट्रपति भवन
नई राजधानी के सबसे महत्वपूर्ण भवनों में वायसराय भवन था, जिसे स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रपति भवन के रूप में जाना जाने लगा।
इस विशाल भवन की मुख्य वास्तु-रचना सर एडविन लुटियंस ने तैयार की।
इसके निर्माण का कार्य 1912 के आसपास शुरू हुआ और लंबी निर्माण प्रक्रिया के बाद 1929 ई. में भवन पूरा हुआ।
भारत की स्वतंत्रता के बाद यह गवर्नर-जनरल का निवास बना और गणतंत्र स्थापित होने पर राष्ट्रपति भवन कहलाया।
संसद भवन और सचिवालय
नई दिल्ली के प्रमुख प्रशासनिक भवनों की योजना में लुटियंस और हर्बर्ट बेकर दोनों का योगदान था।
हर्बर्ट बेकर नई दिल्ली के विशाल सचिवालय भवनों की वास्तुकला से विशेष रूप से जुड़े थे।
वर्तमान पुराना संसद भवन भी लुटियंस और बेकर की वास्तु योजना से संबंधित महत्वपूर्ण भवन था।
इसलिए परीक्षा में यह लिखना कि नई दिल्ली के सभी प्रमुख भवन केवल लुटियंस ने अकेले बनाए थे, सही नहीं होगा।
इंडिया गेट
नई दिल्ली के प्रमुख स्मारकों में इंडिया गेट का विशेष स्थान है।
इसकी वास्तु योजना सर एडविन लुटियंस ने तैयार की थी।
इसका निर्माण प्रथम विश्व युद्ध और अन्य सैन्य अभियानों में मारे गए भारतीय सैनिकों की स्मृति में युद्ध स्मारक के रूप में किया गया।
इसका मूल नाम अखिल भारतीय युद्ध स्मारक था और बाद में यह इंडिया गेट के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
लॉर्ड इरविन — वायसराय भवन के प्रथम निवासी
वायसराय भवन के निर्माण के बाद लॉर्ड इरविन इसमें निवास करने वाले प्रथम ब्रिटिश वायसराय बने।
भवन के निर्माण की शुरुआत लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय के समय हुई थी, लेकिन इसका निर्माण उनके कार्यकाल में पूरा नहीं हो पाया।
लगभग सत्रह वर्षों के निर्माण के बाद यह भवन 1929 में पूरा हुआ और लॉर्ड इरविन इसके प्रथम आधिकारिक निवासी बने।
परीक्षा के लिए
वायसराय भवन के प्रथम निवासी — लॉर्ड इरविन।
नई दिल्ली का औपचारिक उद्घाटन
राजधानी स्थानांतरण की घोषणा 1911 में होने के बावजूद नई दिल्ली के विशाल सरकारी नगर को तैयार होने में लगभग दो दशक लगे।
नई दिल्ली के भवनों, सड़कों और प्रशासनिक ढाँचे का निर्माण धीरे-धीरे पूरा हुआ।
15 फरवरी 1931 ई. को नई दिल्ली को नए निर्मित शाही राजधानी नगर के रूप में औपचारिक रूप से खोला गया।
इस प्रकार 1911 की राजधानी स्थानांतरण घोषणा और 1931 में नई दिल्ली नगर के औपचारिक उद्घाटन को अलग-अलग घटनाओं के रूप में याद रखना चाहिए।
भ्रम से बचें
1911 → राजधानी दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा।
1931 → निर्मित नई दिल्ली नगर का औपचारिक उद्घाटन।
महत्वपूर्ण व्यक्तित्व
| व्यक्ति | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|
| जॉर्ज पंचम | 1911 के दिल्ली दरबार में उपस्थित ब्रिटिश सम्राट; राजधानी स्थानांतरण की घोषणा |
| महारानी मैरी | जॉर्ज पंचम के साथ 1911 के दिल्ली दरबार में उपस्थित |
| लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय | 1911 के दिल्ली दरबार के समय भारत के वायसराय |
| एडविन लुटियंस | नई दिल्ली की योजना और वायसराय भवन के प्रमुख वास्तुकार |
| हर्बर्ट बेकर | नई दिल्ली की योजना और सचिवालय सहित प्रमुख भवनों से जुड़े वास्तुकार |
| लॉर्ड इरविन | वायसराय भवन में निवास करने वाले प्रथम वायसराय |
महत्वपूर्ण तिथियाँ
| वर्ष / तिथि | घटना |
|---|---|
| 1877 | प्रथम दिल्ली दरबार — लॉर्ड लिटन के समय |
| 1903 | द्वितीय दिल्ली दरबार — लॉर्ड कर्जन के समय |
| 1905 | लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल विभाजन |
| 12 दिसंबर 1911 | तृतीय दिल्ली दरबार; बंगाल विभाजन समाप्त करने और राजधानी दिल्ली ले जाने की घोषणा |
| 1912 | दिल्ली में नई केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था का विकास आरंभ |
| 1 अप्रैल 1912 | बिहार एवं उड़ीसा बंगाल से अलग नए प्रशासनिक प्रांत के रूप में प्रभावी |
| 1929 | वायसराय भवन का निर्माण पूर्ण |
| 15 फरवरी 1931 | नई दिल्ली का औपचारिक उद्घाटन |
परीक्षा में भ्रमित करने वाले तथ्य
1911 का दिल्ली दरबार — लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय के समय।
दरबार में जॉर्ज पंचम और महारानी मैरी उपस्थित थे।
12 दिसंबर 1911 को राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा हुई।
इसी अवसर पर 1905 के बंगाल विभाजन को समाप्त करने की घोषणा भी की गई।
बंगाल विभाजन की समाप्ति को सीधे अरुंडेल समिति की सिफारिश से जोड़ना सुरक्षित ऐतिहासिक तथ्य नहीं है।
1 अप्रैल 1912 को दिल्ली पहली बार राजधानी बनी ऐसा अकेला तथ्य याद करने के बजाय 12 दिसंबर 1911 की घोषणा को मुख्य तिथि रखें।
1 अप्रैल 1912 बिहार एवं उड़ीसा के बंगाल से अलग प्रशासनिक प्रांत बनने की महत्वपूर्ण तिथि भी है।
नई दिल्ली की योजना से एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर दोनों जुड़े थे।
वायसराय भवन — प्रमुख वास्तुकार एडविन लुटियंस।
वायसराय भवन में रहने वाले प्रथम वायसराय — लॉर्ड इरविन।
15 फरवरी 1931 — निर्मित नई दिल्ली का औपचारिक उद्घाटन।
अंतिम त्वरित पुनरावृत्ति
दिसंबर 1911 में लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय के समय दिल्ली दरबार आयोजित हुआ।
इसमें ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम और महारानी मैरी उपस्थित हुए।
यह ब्रिटिश शासनकाल का तीसरा दिल्ली दरबार था।
12 दिसंबर 1911 को जॉर्ज पंचम ने ब्रिटिश भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा की।
इसी दिन 1905 के बंगाल विभाजन को समाप्त करने की घोषणा की गई।
अरुंडेल समिति को बंगाल विभाजन की समाप्ति का सीधा कारण नहीं लिखना चाहिए।
राजधानी स्थानांतरण के बाद एक नए प्रशासनिक नगर नई दिल्ली के निर्माण की योजना तैयार की गई।
नई दिल्ली की योजना से सर एडविन लुटियंस और सर हर्बर्ट बेकर प्रमुख रूप से जुड़े थे।
वायसराय भवन की मुख्य वास्तु-योजना एडविन लुटियंस ने तैयार की। यही भवन आज राष्ट्रपति भवन है।
हर्बर्ट बेकर सचिवालय और नई दिल्ली के अन्य प्रमुख प्रशासनिक भवनों से जुड़े थे।
इंडिया गेट की वास्तु योजना भी एडविन लुटियंस ने तैयार की।
वायसराय भवन का निर्माण लगभग 1929 में पूरा हुआ।
लॉर्ड इरविन वायसराय भवन में निवास करने वाले प्रथम वायसराय थे।
15 फरवरी 1931 को निर्मित नई दिल्ली का औपचारिक उद्घाटन हुआ।
परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्रम है — 1905 बंगाल विभाजन → 12 दिसंबर 1911 दिल्ली दरबार → बंगाल विभाजन समाप्त → राजधानी दिल्ली स्थानांतरण की घोषणा → नई दिल्ली का निर्माण → 1929 वायसराय भवन पूर्ण → 1931 नई दिल्ली का औपचारिक उद्घाटन।