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महाराष्ट्र में क्रांतिकारी आंदोलन
REVOLUTIONARY MOVEMENT IN MAHARASHTRA

महाराष्ट्र में क्रांतिकारी आंदोलन

महाराष्ट्र में क्रांतिकारी राष्ट्रवाद का विकास

उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में महाराष्ट्र भारतीय क्रांतिकारी राष्ट्रवाद के प्रमुख केंद्रों में से एक बन गया। पुणे और नासिक जैसे क्षेत्रों में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध युवाओं के बीच असंतोष बढ़ा और अनेक गुप्त क्रांतिकारी संगठनों का विकास हुआ।

इस चरण में चापेकर बंधु, विनायक दामोदर सावरकर और गणेश दामोदर सावरकर जैसे क्रांतिकारियों की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही।

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पुणे में प्लेग और ब्रिटिश दमन

1896-97 में पुणे में प्लेग की महामारी फैल गई। महामारी को नियंत्रित करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने कठोर उपाय अपनाए।

पुणे में प्लेग नियंत्रण की जिम्मेदारी वाल्टर चार्ल्स रैंड को दी गई थी, जो प्लेग समिति का प्रमुख अधिकारी था।

प्लेग नियंत्रण के नाम पर घरों की तलाशी, लोगों को जबरन अलग करना और निजी जीवन में हस्तक्षेप जैसे कठोर कदम उठाए गए। इससे स्थानीय जनता में ब्रिटिश प्रशासन के प्रति तीव्र असंतोष उत्पन्न हुआ।

चापेकर बंधु भी इन कार्रवाइयों से अत्यंत आक्रोशित हुए और उन्होंने रैंड को निशाना बनाने का निर्णय लिया।

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चापेकर बंधु और 22 जून 1897 की घटना

22 जून 1897 ई. को महारानी विक्टोरिया के शासन की हीरक जयंती के अवसर पर पुणे में आयोजित समारोह के बाद प्लेग अधिकारी वाल्टर चार्ल्स रैंड पर हमला किया गया।

इस क्रांतिकारी कार्रवाई में दामोदर हरि चापेकर और बालकृष्ण हरि चापेकर प्रमुख रूप से शामिल थे।

इसी घटना में ब्रिटिश सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट चार्ल्स एगर्टन आयर्स्ट को भी गोली लगी और उसकी मृत्यु हो गई।

रैंड भी हमले में गंभीर रूप से घायल हुआ और कुछ दिनों बाद उसकी मृत्यु हो गई।

परीक्षा के लिए

22 जून 1897 → पुणे → चापेकर बंधु → प्लेग अधिकारी रैंड और लेफ्टिनेंट आयर्स्ट पर हमला।

03

चापेकर बंधुओं को फाँसी

रैंड की हत्या के मामले में दामोदर हरि चापेकर को गिरफ्तार किया गया और मुकदमे के बाद उसे मृत्युदंड दिया गया।

18 अप्रैल 1898 ई. को दामोदर हरि चापेकर को फाँसी दे दी गई।

बाद में उनके भाइयों बालकृष्ण हरि चापेकर और वासुदेव हरि चापेकर को भी ब्रिटिश सरकार ने गिरफ्तार किया और 1899 में फाँसी दे दी।

इस प्रकार इतिहास में दामोदर, बालकृष्ण और वासुदेव तीनों को सामूहिक रूप से चापेकर बंधु के नाम से जाना जाता है।

भ्रम से बचें

केवल दामोदर और बालकृष्ण ही नहीं, बल्कि वासुदेव चापेकर भी चापेकर बंधुओं में शामिल थे। रैंड पर 22 जून 1897 की कार्रवाई मुख्य रूप से दामोदर और बालकृष्ण से संबंधित थी।

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मित्र मेला की स्थापना

महाराष्ट्र में क्रांतिकारी गतिविधियों को संगठित करने में विनायक दामोदर सावरकर और उनके बड़े भाई गणेश दामोदर सावरकर की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

1899 ई. में नासिक में मित्र मेला नामक गुप्त क्रांतिकारी संगठन की स्थापना की गई। इसका उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रवादी भावना उत्पन्न करना और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध क्रांतिकारी संगठन तैयार करना था।

विनायक दामोदर सावरकर आगे चलकर महाराष्ट्र के क्रांतिकारी आंदोलन के प्रमुख व्यक्तियों में से एक बने।

याद रखें

मित्र मेला → 1899 → नासिक → विनायक दामोदर सावरकर एवं गणेश दामोदर सावरकर।

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अभिनव भारत की स्थापना

1904 ई. में मित्र मेला का विस्तार करके इसका नाम “अभिनव भारत” रखा गया।

अभिनव भारत एक गुप्त क्रांतिकारी संगठन था जिसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन से भारत की स्वतंत्रता प्राप्त करना था।

इसके संगठनात्मक विकास में विनायक दामोदर सावरकर और गणेश दामोदर सावरकर की प्रमुख भूमिका थी।

अभिनव भारत के निर्माण पर इटली के क्रांतिकारी ज्यूसेपे मैजिनी और उसके क्रांतिकारी संगठन के विचारों का प्रभाव था।

सावरकर ने मैजिनी के राष्ट्रवादी और क्रांतिकारी विचारों का अध्ययन किया तथा उन्हें भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष से जोड़ने का प्रयास किया।

परीक्षा के लिए

1899 → मित्र मेला  →  1904 → अभिनव भारत।

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विनायक दामोदर सावरकर

विनायक दामोदर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 ई. को महाराष्ट्र के नासिक जिले के भगूर में हुआ था।

युवावस्था से ही वे क्रांतिकारी राष्ट्रवादी गतिविधियों से जुड़ गए और मित्र मेला तथा बाद में अभिनव भारत के माध्यम से युवाओं को संगठित किया।

1906 में वे कानून की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए। लंदन में वे इंडिया हाउस से जुड़े और वहाँ भारतीय क्रांतिकारी गतिविधियों के प्रमुख व्यक्तियों में शामिल हो गए।

लंदन में उन्होंने भारतीय क्रांतिकारियों को संगठित करने और भारत में चल रहे क्रांतिकारी आंदोलन से संपर्क बनाए रखने का प्रयास किया।

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1857 के विद्रोह पर सावरकर की पुस्तक

विनायक दामोदर सावरकर ने 1857 के विद्रोह को केवल सैनिक विद्रोह न मानकर भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति के व्यापक संघर्ष के रूप में प्रस्तुत किया।

उन्होंने 1857 की घटनाओं पर प्रसिद्ध पुस्तक “द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस, 1857” लिखी।

इस पुस्तक में 1857 के विद्रोह की व्याख्या भारतीय स्वतंत्रता के लिए राष्ट्रीय संघर्ष के रूप में की गई थी।

ब्रिटिश सरकार ने इस पुस्तक के प्रसार को रोकने का प्रयास किया, लेकिन यह भारतीय क्रांतिकारियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हुई।

महत्वपूर्ण

विनायक दामोदर सावरकर → 1857 के विद्रोह को स्वतंत्रता संग्राम के रूप में प्रस्तुत करने वाले प्रमुख राष्ट्रवादी लेखकों में से एक।

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नासिक षड्यंत्र और जैक्सन की हत्या

महाराष्ट्र के क्रांतिकारी आंदोलन का एक अन्य महत्वपूर्ण केंद्र नासिक था, जहाँ अभिनव भारत की गतिविधियाँ सक्रिय थीं।

ब्रिटिश प्रशासन द्वारा गणेश दामोदर सावरकर के विरुद्ध कार्रवाई और उन्हें दंडित किए जाने से क्रांतिकारियों में भारी आक्रोश उत्पन्न हुआ।

21 दिसंबर 1909 ई. को नासिक के विजयानंद थिएटर में युवा क्रांतिकारी अनंत लक्ष्मण कान्हेरे ने नासिक के जिला मजिस्ट्रेट ए. एम. टी. जैक्सन की गोली मारकर हत्या कर दी।

इस मामले में अनंत कान्हेरे के साथ कृष्णाजी गोपाल कर्वे और विनायक नारायण देशपांडे भी अभियुक्त बनाए गए।

तीनों को मृत्युदंड दिया गया और 19 अप्रैल 1910 ई. को फाँसी दे दी गई।

परीक्षा में महत्वपूर्ण

21 दिसंबर 1909 → नासिक → ए. एम. टी. जैक्सन की हत्या → अनंत लक्ष्मण कान्हेरे।

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महाराष्ट्र के क्रांतिकारी आंदोलन का महत्व

महाराष्ट्र में विकसित क्रांतिकारी आंदोलन ने भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष में सशस्त्र क्रांतिकारी राष्ट्रवाद की एक महत्वपूर्ण धारा विकसित की।

चापेकर बंधुओं की कार्रवाई ने उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में ब्रिटिश अधिकारियों के विरुद्ध क्रांतिकारी प्रतिरोध का महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया।

इसके बाद मित्र मेला और अभिनव भारत जैसे संगठनों ने क्रांतिकारी गतिविधियों को अधिक संगठित स्वरूप प्रदान किया।

विनायक दामोदर सावरकर और उनके सहयोगियों के माध्यम से महाराष्ट्र की क्रांतिकारी गतिविधियों का संपर्क आगे भारत के बाहर सक्रिय भारतीय क्रांतिकारियों से भी स्थापित हुआ।

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घटनाओं का सही क्रम

वर्ष प्रमुख घटना
1896-97 पुणे में प्लेग और ब्रिटिश प्रशासन के कठोर प्लेग नियंत्रण उपाय
22 जून 1897 चापेकर बंधुओं द्वारा रैंड और आयर्स्ट पर हमला
18 अप्रैल 1898 दामोदर हरि चापेकर को फाँसी
1899 मित्र मेला की स्थापना
1904 मित्र मेला का विस्तार कर अभिनव भारत नाम दिया गया
1906 विनायक दामोदर सावरकर इंग्लैंड गए
21 दिसंबर 1909 अनंत लक्ष्मण कान्हेरे द्वारा नासिक के मजिस्ट्रेट जैक्सन की हत्या
19 अप्रैल 1910 अनंत कान्हेरे, कृष्णाजी कर्वे और विनायक देशपांडे को फाँसी
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परीक्षा में भ्रमित करने वाले तथ्य

चापेकर बंधु → दामोदर हरि चापेकर, बालकृष्ण हरि चापेकर और वासुदेव हरि चापेकर।

22 जून 1897 → पुणे → रैंड और आयर्स्ट पर हमला।

प्लेग अधिकारी का नाम वाल्टर चार्ल्स रैंड था।

रैंड के साथ घटना में मारा गया दूसरा ब्रिटिश अधिकारी लेफ्टिनेंट चार्ल्स एगर्टन आयर्स्ट था।

दामोदर हरि चापेकर को 18 अप्रैल 1898 को फाँसी दी गई।

मित्र मेला → 1899 → नासिक।

मित्र मेला → 1904 में अभिनव भारत।

मित्र मेला और अभिनव भारत से विनायक दामोदर सावरकर तथा गणेश दामोदर सावरकर का नाम प्रमुख रूप से जुड़ा है।

21 दिसंबर 1909 → अनंत लक्ष्मण कान्हेरे → नासिक के मजिस्ट्रेट ए. एम. टी. जैक्सन की हत्या।

19 अप्रैल 1910 → अनंत कान्हेरे, कृष्णाजी कर्वे और विनायक देशपांडे को फाँसी।

अंतिम त्वरित पुनरावृत्ति

महाराष्ट्र उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम वर्षों और बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में क्रांतिकारी राष्ट्रवाद का महत्वपूर्ण केंद्र बना।

1896-97 में पुणे में प्लेग फैलने के बाद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा अपनाए गए कठोर उपायों से जनता में असंतोष बढ़ा।

22 जून 1897 को दामोदर और बालकृष्ण चापेकर ने पुणे के प्लेग अधिकारी वाल्टर चार्ल्स रैंड को निशाना बनाया। इसी घटना में लेफ्टिनेंट चार्ल्स एगर्टन आयर्स्ट भी मारा गया।

दामोदर हरि चापेकर को 18 अप्रैल 1898 को फाँसी दी गई। बाद में बालकृष्ण और वासुदेव चापेकर को भी फाँसी दी गई।

1899 में नासिक में मित्र मेला नामक गुप्त क्रांतिकारी संगठन की स्थापना हुई।

इस संगठन से विनायक दामोदर सावरकर और गणेश दामोदर सावरकर प्रमुख रूप से जुड़े थे।

1904 में मित्र मेला का विस्तार करके उसका नाम अभिनव भारत रखा गया।

अभिनव भारत पर इटली के क्रांतिकारी ज्यूसेपे मैजिनी के विचारों का प्रभाव था।

विनायक दामोदर सावरकर ने 1857 के विद्रोह को स्वतंत्रता के राष्ट्रीय संघर्ष के रूप में प्रस्तुत किया और उस पर प्रसिद्ध पुस्तक लिखी।

21 दिसंबर 1909 को नासिक में अनंत लक्ष्मण कान्हेरे ने मजिस्ट्रेट ए. एम. टी. जैक्सन की हत्या की।

इस मामले में अनंत कान्हेरे, कृष्णाजी कर्वे और विनायक देशपांडे को 19 अप्रैल 1910 को फाँसी दी गई।

परीक्षा के लिए मुख्य क्रम है — 1897 चापेकर बंधु → 1899 मित्र मेला → 1904 अभिनव भारत → 1909 जैक्सन की हत्या → 1910 कान्हेरे, कर्वे और देशपांडे को फाँसी।

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