भारत के तटवर्ती मैदान
पश्चिमी एवं पूर्वी तट, डेल्टा, लैगून, बैकवॉटर और प्रमुख बंदरगाह
भारत के तटवर्ती मैदान
भारत के प्रायद्वीपीय पठार के दोनों ओर समुद्र के साथ संकरे और चौड़े मैदानी क्षेत्र विकसित हुए हैं, जिन्हें तटवर्ती मैदान कहा जाता है।
पश्चिम में अरब सागर के किनारे स्थित मैदान को पश्चिमी तटवर्ती मैदान और पूर्व में बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित मैदान को पूर्वी तटवर्ती मैदान कहा जाता है।
दोनों तटों की बनावट, चौड़ाई, नदियों के मुहानों, डेल्टा, झीलों तथा बंदरगाहों में स्पष्ट अंतर पाया जाता है।
तटवर्ती मैदानों का मुख्य विभाजन
भारत के दो प्रमुख तटीय मैदान
पश्चिमी तटवर्ती मैदान
अरब सागर और पश्चिमी घाट के बीच
पूर्वी तटवर्ती मैदान
बंगाल की खाड़ी और पूर्वी घाट के बीच
पश्चिमी तटवर्ती मैदान
अरब सागर के किनारे
पश्चिमी तटवर्ती मैदान भारत के पश्चिमी भाग में अरब सागर और पश्चिमी घाट के बीच स्थित है।
इसका विस्तार उत्तर में गुजरात के तटीय क्षेत्र से लेकर दक्षिण में केरल और कन्याकुमारी के निकट तक पाया जाता है।
यह मैदान पूर्वी तटवर्ती मैदान की तुलना में सामान्यतः अधिक संकीर्ण है।
अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी चौड़ाई बदलती रहती है। कई स्थानों पर पश्चिमी घाट समुद्र के अत्यंत निकट पहुँच जाते हैं, जिससे तटीय मैदान बहुत संकीर्ण हो जाता है।
इसलिए पूरे पश्चिमी तट की चौड़ाई को केवल 10 से 25 किमी मानना उचित नहीं है। कुछ क्षेत्रों में इसकी चौड़ाई इससे अधिक भी होती है।
पश्चिमी तट की प्रमुख विशेषताएँ
संकीर्ण मैदान और डूबा हुआ तट
पश्चिमी तटवर्ती मैदान कई स्थानों पर निमज्जित अथवा डूबे हुए तट की विशेषताएँ प्रदर्शित करता है।
इस तट पर बहने वाली अधिकांश नदियाँ अपेक्षाकृत छोटी और तीव्र ढाल वाली हैं।
पश्चिमी घाट समुद्र के निकट होने के कारण नदियों को लंबा मैदानी मार्ग नहीं मिलता और वे तेजी से अरब सागर में गिरती हैं।
इसी कारण पश्चिमी तट की अधिकांश नदियाँ बड़े डेल्टा बनाने के बजाय ज्वारनदमुख बनाती हैं।
नर्मदा और ताप्ती जैसी पश्चिम की ओर बहने वाली बड़ी नदियाँ भी प्रमुख ज्वारनदमुख बनाती हैं।
🎯 मुख्य अंतर
पश्चिमी तट — ज्वारनदमुख अधिक
पूर्वी तट — डेल्टा अधिक
पश्चिमी तट के प्रमुख भाग
उत्तर से दक्षिण
पश्चिमी तटवर्ती मैदान को क्षेत्रीय रूप से कई भागों में बाँटा जाता है।
गुजरात के तटीय मैदान के दक्षिण में कोंकण तट, कनारा अथवा कर्नाटक तट और मालाबार तट प्रमुख हैं।
🧠 उत्तर से दक्षिण
गुजरात का तटीय मैदान
कच्छ और काठियावाड़ क्षेत्र
पश्चिमी तटीय मैदान के उत्तरी भाग में गुजरात का विस्तृत तटीय प्रदेश स्थित है।
इसमें कच्छ, काठियावाड़ अर्थात सौराष्ट्र और गुजरात का मुख्य तटीय मैदान महत्वपूर्ण हैं।
कच्छ क्षेत्र अपनी खाड़ी, दलदली रण तथा ज्वारीय मैदानों के लिए प्रसिद्ध है।
गुजरात तट पर कच्छ की खाड़ी और खंभात की खाड़ी विशेष भौगोलिक महत्व रखती हैं।
कोंकण तट
महाराष्ट्र और गोवा का तट
पश्चिमी तटीय मैदान के उत्तरी-मध्य भाग को कोंकण तट कहा जाता है।
इसका प्रमुख विस्तार महाराष्ट्र के समुद्री तट तथा गोवा तक पाया जाता है।
यह क्षेत्र पश्चिमी घाट और अरब सागर के बीच संकीर्ण तटीय मैदान के रूप में विकसित है।
मुंबई और आसपास का तटीय क्षेत्र इसी व्यापक कोंकण प्रदेश का हिस्सा है।
कनारा तट
कर्नाटक का पश्चिमी तटीय मैदान
कोंकण तट के दक्षिण में स्थित कर्नाटक के पश्चिमी तटीय मैदान को कनारा अथवा कन्नड़ तट कहा जाता है।
यह अरब सागर और पश्चिमी घाट के बीच स्थित संकीर्ण और हरित तटीय प्रदेश है।
कर्नाटक की कई छोटी पश्चिमवाहिनी नदियाँ इसी तट से होकर अरब सागर में गिरती हैं।
मंगलुरु इस तटीय प्रदेश का प्रमुख बंदरगाह और नगर है।
मालाबार तट
केरल का लैगून और बैकवॉटर क्षेत्र
पश्चिमी तटवर्ती मैदान के दक्षिणी भाग को मालाबार तट कहा जाता है।
इसका प्रमुख विस्तार केरल के समुद्री तट पर है।
यह क्षेत्र अपने लैगून, झीलों और बैकवॉटर के लिए प्रसिद्ध है।
केरल में समुद्र के समानांतर फैले जलमार्गों को स्थानीय रूप से कायल भी कहा जाता है।
केरल की अनेक झीलें और बैकवॉटर समुद्र से संकरी बालू पट्टियों द्वारा अलग हैं।
वेम्बनाड झील
केरल का प्रमुख बैकवॉटर
वेम्बनाड झील केरल की प्रसिद्ध तटीय झील और बैकवॉटर प्रणाली है।
यह केरल की सबसे बड़ी झीलों में से एक है और अरब सागर के समानांतर लंबे क्षेत्र में फैली हुई है।
कोच्चि क्षेत्र की तटीय जल-व्यवस्था का भी वेम्बनाड से निकट संबंध है।
यह नौका परिवहन, मत्स्य पालन, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
पश्चिमी तट के प्रमुख बंदरगाह
अरब सागर के व्यापारिक केंद्र
| बंदरगाह | राज्य | महत्व |
|---|---|---|
| मुंबई | महाराष्ट्र | भारत के प्रमुख प्राकृतिक बंदरगाहों में से एक |
| मोरमुगाओ | गोवा | गोवा का प्रमुख बंदरगाह |
| न्यू मंगलुरु | कर्नाटक | कर्नाटक का प्रमुख समुद्री बंदरगाह |
| कोच्चि | केरल | महत्वपूर्ण प्राकृतिक बंदरगाह |
पूर्वी तटवर्ती मैदान
बंगाल की खाड़ी के किनारे
पूर्वी तटवर्ती मैदान भारत के पूर्वी भाग में पूर्वी घाट और बंगाल की खाड़ी के बीच स्थित है।
इसका विस्तार सामान्यतः पश्चिम बंगाल के दक्षिणी तटीय क्षेत्र से ओडिशा, आंध्र प्रदेश होते हुए तमिलनाडु और कन्याकुमारी तक माना जाता है।
यह पश्चिमी तटवर्ती मैदान की तुलना में सामान्यतः अधिक चौड़ा और समतल है।
इसकी चौड़ाई विभिन्न स्थानों पर बदलती है और अनेक भागों में लगभग 50 से 100 किमी या उससे अधिक हो सकती है।
पूर्वी तट की प्रमुख विशेषताएँ
विशाल डेल्टा और चौड़ा मैदानी प्रदेश
पूर्वी तट पर बहने वाली अधिकांश प्रमुख प्रायद्वीपीय नदियाँ लंबी हैं और वे विशाल जलग्रहण क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में अवसाद लेकर आती हैं।
बंगाल की खाड़ी के निकट ढाल कम होने पर ये नदियाँ अवसाद जमा करती हैं और बड़े डेल्टा बनाती हैं।
महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी पूर्वी तट के सबसे महत्वपूर्ण डेल्टा बनाने वाली नदियाँ हैं।
गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना नदी प्रणाली भी बंगाल की खाड़ी में एक अत्यंत विशाल डेल्टा बनाती है।
🎯 डेल्टा वाली प्रमुख नदियाँ
महानदी → गोदावरी → कृष्णा → कावेरी
पूर्वी तट के प्रमुख भाग
उत्तर से दक्षिण
पूर्वी तटीय मैदान को सामान्यतः दो बड़े भागों में बाँटा जाता है।
उत्तरी भाग को उत्तरी सरकार तट कहा जाता है। यह मुख्यतः ओडिशा तथा आंध्र प्रदेश के तटीय भागों से संबंधित है।
दक्षिणी भाग को कोरोमंडल तट कहा जाता है। यह मुख्यतः तमिलनाडु और दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र से संबंधित है।
🧠 याद रखें
सुंदरबन डेल्टा
गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना का विशाल डेल्टा
भारत और बांग्लादेश के तटीय क्षेत्र में गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना नदी प्रणाली द्वारा विशाल डेल्टा का निर्माण किया गया है।
इस डेल्टा के दक्षिणी ज्वारीय और मैंग्रोव भाग को सुंदरबन कहा जाता है।
सुंदरबन क्षेत्र भारत के पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश दोनों में फैला हुआ है।
यह विश्व के सबसे बड़े सक्रिय डेल्टा क्षेत्रों में से एक है तथा इसके मैंग्रोव वन विश्व के सबसे बड़े मैंग्रोव वन क्षेत्रों में गिने जाते हैं।
सुंदरबन का नाम यहाँ पाए जाने वाले सुंदरी वृक्ष से संबंधित माना जाता है।
🎯 महत्वपूर्ण
सुंदरबन — गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना डेल्टा — मैंग्रोव वन
महानदी डेल्टा
ओडिशा का महत्वपूर्ण डेल्टा
महानदी ओडिशा के तटीय मैदान में विस्तृत डेल्टा बनाती है।
कटक और आसपास का क्षेत्र महानदी तथा उसकी शाखाओं द्वारा निर्मित उपजाऊ डेल्टाई मैदान का हिस्सा है।
महानदी डेल्टा कृषि और जनसंख्या की दृष्टि से ओडिशा का महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
गोदावरी और कृष्णा डेल्टा
आंध्र प्रदेश का उपजाऊ तटीय मैदान
गोदावरी और कृष्णा आंध्र प्रदेश के तटीय मैदान में विशाल और उपजाऊ डेल्टा बनाती हैं।
दोनों नदियों के डेल्टा क्षेत्र में नहरों का व्यापक विकास हुआ है और यह क्षेत्र धान की खेती के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
गोदावरी को उसके विशाल आकार और जल प्रवाह के कारण कभी-कभी दक्षिण गंगा भी कहा जाता है।
कावेरी डेल्टा
तमिलनाडु का महत्वपूर्ण कृषि क्षेत्र
कावेरी नदी तमिलनाडु में बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले एक विस्तृत डेल्टा बनाती है।
कावेरी डेल्टा अत्यंत उपजाऊ है और लंबे समय से धान की खेती के लिए प्रसिद्ध है।
इस कारण इसे तमिलनाडु के प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्रों में गिना जाता है।
चिल्का झील
ओडिशा की प्रमुख तटीय लैगून
चिल्का झील ओडिशा के तट पर स्थित विशाल खारे अथवा अर्ध-खारे जल की लैगून है।
यह बंगाल की खाड़ी से संकरे समुद्री मार्ग द्वारा जुड़ी हुई है।
चिल्का प्रवासी पक्षियों, मत्स्य संसाधनों और जैव विविधता के लिए अत्यंत प्रसिद्ध है।
यह भारत की सबसे महत्वपूर्ण तटीय लैगूनों में से एक है।
पुलीकट झील
आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की तटीय लैगून
पुलीकट झील आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की सीमा के निकट स्थित एक महत्वपूर्ण खारे पानी की लैगून है।
इसका बड़ा भाग आंध्र प्रदेश में स्थित है।
इसे बंगाल की खाड़ी से श्रीहरिकोटा द्वीप अलग करता है।
श्रीहरिकोटा भारत के प्रमुख अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र के लिए भी प्रसिद्ध है।
पूर्वी तट के प्रमुख बंदरगाह
बंगाल की खाड़ी के व्यापारिक केंद्र
| बंदरगाह | राज्य | विशेषता |
|---|---|---|
| कोलकाता | पश्चिम बंगाल | हुगली नदी पर स्थित नदीय बंदरगाह |
| पारादीप | ओडिशा | महत्वपूर्ण गहरे जल का बंदरगाह |
| विशाखापत्तनम | आंध्र प्रदेश | भारत के प्रमुख प्राकृतिक बंदरगाहों में से एक |
| चेन्नई | तमिलनाडु | महत्वपूर्ण कृत्रिम बंदरगाह |
पश्चिमी और पूर्वी तटीय मैदान में अंतर
सबसे महत्वपूर्ण तुलना
| आधार | पश्चिमी तटवर्ती मैदान | पूर्वी तटवर्ती मैदान |
|---|---|---|
| स्थिति | अरब सागर और पश्चिमी घाट के बीच | बंगाल की खाड़ी और पूर्वी घाट के बीच |
| चौड़ाई | तुलनात्मक रूप से संकीर्ण | तुलनात्मक रूप से चौड़ा |
| नदियाँ | अधिकांश छोटी और तीव्र प्रवाह वाली | कई बड़ी और लंबी नदियाँ |
| मुहाना | ज्वारनदमुख अधिक | डेल्टा अधिक |
| प्रमुख भू-आकृति | लैगून, बैकवॉटर, ज्वारनदमुख | विशाल डेल्टा, लैगून |
| प्रमुख भाग | कोंकण, कनारा, मालाबार | उत्तरी सरकार, कोरोमंडल |
लैगून और बैकवॉटर
दोनों में अंतर
लैगून समुद्र के किनारे स्थित उथली जलराशि होती है जो बालू की पट्टी, अवरोधक द्वीप अथवा तटीय निक्षेप द्वारा खुले समुद्र से आंशिक या लगभग पूर्ण रूप से अलग हो जाती है।
बैकवॉटर विशेष रूप से केरल के तट पर पाए जाने वाले झीलों, लैगूनों, नहरों और धीमे जलमार्गों का परस्पर जुड़ा तंत्र है।
वेम्बनाड पश्चिमी तट का प्रसिद्ध उदाहरण है, जबकि चिल्का और पुलीकट पूर्वी तट की प्रमुख लैगून हैं।
डेल्टा और ज्वारनदमुख
परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है
जब नदी समुद्र में मिलने से पहले अवसाद जमा करके कई शाखाओं में बँट जाती है और त्रिभुजाकार अथवा पंखाकार मैदान बनाती है, तो उसे डेल्टा कहा जाता है।
जब नदी का मुहाना चौड़ा और गहरा होकर समुद्र की ओर खुलता है और ज्वार का प्रभाव अंदर तक दिखाई देता है, तो उसे ज्वारनदमुख कहा जाता है।
पूर्वी तट पर महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी बड़े डेल्टा बनाती हैं।
पश्चिमी तट की नर्मदा और ताप्ती प्रमुख ज्वारनदमुख बनाती हैं।
🧠 याद रखें
परीक्षा में होने वाले प्रमुख भ्रम
एक बार में सही याद करें
पश्चिमी तट की चौड़ाई हर जगह 10–25 किमी है — सही नहीं। पश्चिमी तटीय मैदान सामान्यतः संकीर्ण है, लेकिन इसकी वास्तविक चौड़ाई स्थान के अनुसार बदलती है।
पश्चिमी तट केवल गुजरात से केरल तक है — इसका तटीय विस्तार दक्षिण में कन्याकुमारी के निकट तक समझा जाता है।
कोंकण = केवल महाराष्ट्र — कोंकण का विस्तार महाराष्ट्र के साथ गोवा तक भी माना जाता है।
मालाबार = पूरा कर्नाटक और केरल — सामान्य परीक्षा वर्गीकरण में कर्नाटक का भाग कनारा तट और केरल का भाग मालाबार तट कहा जाता है।
पूर्वी तट गंगा, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी के डेल्टा से ही बना है — यह अत्यधिक सरल कथन है। पूर्वी तटीय मैदान में महानदी सहित अनेक नदियों के डेल्टाई निक्षेप और अन्य समुद्री-नदीय निक्षेप शामिल हैं।
सुंदरबन केवल गंगा नदी का डेल्टा है — अधिक सही तथ्य यह है कि यह विशाल गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना डेल्टा का हिस्सा है।
चिल्का मीठे पानी की झील है — गलत। यह खारे-अर्धखारे जल की तटीय लैगून है।
पुलीकट केवल तमिलनाडु में है — गलत। यह आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु दोनों में फैली है, हालाँकि इसका बड़ा भाग आंध्र प्रदेश में है।
अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य
त्वरित परीक्षा पुनरावृत्ति
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| पश्चिमी तट किसके बीच है? | पश्चिमी घाट और अरब सागर |
| पूर्वी तट किसके बीच है? | पूर्वी घाट और बंगाल की खाड़ी |
| कौन-सा तट अधिक संकीर्ण है? | पश्चिमी तट |
| कौन-सा तट अधिक चौड़ा है? | पूर्वी तट |
| पश्चिमी तट के प्रमुख भाग | कोंकण, कनारा, मालाबार |
| पूर्वी तट के प्रमुख भाग | उत्तरी सरकार, कोरोमंडल |
| केरल का प्रमुख बैकवॉटर | वेम्बनाड |
| ओडिशा की प्रमुख लैगून | चिल्का |
| आंध्र प्रदेश–तमिलनाडु की लैगून | पुलीकट |
| पुलीकट को समुद्र से कौन अलग करता है? | श्रीहरिकोटा |
| प्रमुख डेल्टा बनाने वाली नदियाँ | महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी |
| प्रमुख ज्वारनदमुख बनाने वाली नदियाँ | नर्मदा और ताप्ती |
| सुंदरबन किस नदी तंत्र का डेल्टा है? | गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना |
⚡ अंतिम त्वरित पुनरावृत्ति
भारत के तटवर्ती मैदान — पश्चिमी तटवर्ती मैदान + पूर्वी तटवर्ती मैदान।
पश्चिमी तट — पश्चिमी घाट और अरब सागर के बीच — पूर्वी तट की तुलना में संकीर्ण।
पश्चिमी तट पर बड़ी नदियों के डेल्टा कम और ज्वारनदमुख अधिक पाए जाते हैं।
पश्चिमी तट के प्रमुख भाग — गुजरात तट → कोंकण → कनारा → मालाबार।
कोंकण — महाराष्ट्र एवं गोवा।
कनारा — कर्नाटक।
मालाबार — केरल।
केरल — लैगून + बैकवॉटर + वेम्बनाड।
पश्चिमी तट के प्रमुख बंदरगाह — मुंबई, मोरमुगाओ, न्यू मंगलुरु, कोच्चि।
पूर्वी तट — पूर्वी घाट और बंगाल की खाड़ी के बीच — पश्चिमी तट की तुलना में चौड़ा।
पूर्वी तट के प्रमुख भाग — उत्तरी सरकार तट + कोरोमंडल तट।
पूर्वी तट की प्रमुख डेल्टा नदियाँ — महानदी → गोदावरी → कृष्णा → कावेरी।
सुंदरबन — गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना डेल्टा।
चिल्का — ओडिशा — तटीय लैगून।
पुलीकट — आंध्र प्रदेश एवं तमिलनाडु — श्रीहरिकोटा द्वारा समुद्र से अलग।
पूर्वी तट के प्रमुख बंदरगाह — कोलकाता, पारादीप, विशाखापत्तनम, चेन्नई।
सबसे आसान अंतर — पश्चिमी तट = संकीर्ण + ज्वारनदमुख; पूर्वी तट = चौड़ा + बड़े डेल्टा।