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हिमालयी अपवाह एवं नदी तंत्र
HIMALAYAN DRAINAGE SYSTEM

हिमालयी अपवाह एवं नदी तंत्र

सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र तथा उनकी प्रमुख सहायक नदियाँ

हिमालयी नदी तंत्र

भारत की हिमालयी नदियाँ मुख्यतः हिमालय के हिमनदों, हिमपात और वर्षा से जल प्राप्त करती हैं। इसलिए इनमें से अधिकांश नदियाँ बारहमासी होती हैं।

भारत के हिमालयी अपवाह तंत्र को मुख्यतः तीन विशाल नदी प्रणालियों में विभाजित किया जाता है — सिंधु नदी तंत्र, गंगा नदी तंत्र और ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र

हिमालयी नदियाँ लंबी दूरी तय करती हैं तथा अपने मार्ग में गहरे गॉर्ज, घाटियाँ, जलोढ़ मैदान, विसर्प और विशाल डेल्टा जैसी अनेक भू-आकृतियाँ बनाती हैं।

01

हिमालय के तीन प्रमुख नदी तंत्र

उत्तर भारत की विशाल नदी प्रणालियाँ

🧠 मुख्य क्रम

सिंधु नदी तंत्र गंगा नदी तंत्र ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र
02

सिंधु नदी

उत्तर-पश्चिम भारत का प्रमुख नदी तंत्र

सिंधु नदी तिब्बत के कैलाश पर्वत और मानसरोवर क्षेत्र के निकट से निकलती है।

केंद्रीय जल आयोग के विवरण में इसका उद्गम कैलाश पर्वत की उत्तरी ढाल पर बोखार-चू हिमनद क्षेत्र से माना गया है।

इसलिए सिंधु का उद्गम चेमायुंगडुंग हिमनद से बताना सही नहीं है। चेमायुंगडुंग नाम पुरानी पुस्तकों में मुख्यतः ब्रह्मपुत्र के उद्गम के संदर्भ में मिलता है।

सिंधु तिब्बत से निकलकर भारत के लद्दाख क्षेत्र में प्रवेश करती है। इसके बाद यह पाकिस्तान-प्रशासित गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान से होते हुए दक्षिण की ओर बहती है।

अंततः यह पाकिस्तान में कराची के निकट विशाल डेल्टा बनाते हुए अरब सागर में गिरती है।

03

सिंधु की प्रमुख सहायक नदियाँ

पंचनद एवं अन्य सहायक नदियाँ

पंजाब क्षेत्र की प्रसिद्ध पाँच नदियाँ हैं — झेलम, चिनाब, रावी, व्यास और सतलज

इन पाँचों नदियों के संयुक्त नदी तंत्र को पंचनद कहा जाता है।

ये सभी पाँच नदियाँ सीधे अलग-अलग सिंधु में नहीं गिरतीं। इनका जल क्रमशः मिलकर अंततः पंचनद नदी बनाता है, जो पाकिस्तान में सिंधु से मिलती है।

सिंधु की अन्य महत्वपूर्ण सहायक नदियों में जास्कर, श्योक, काबुल, कुर्रम और गोमल शामिल हैं।

⚠️ बाएँ किनारे वाला भ्रम

“सतलज, व्यास, रावी, चिनाब और झेलम सभी सीधे सिंधु की बाएँ किनारे की सहायक नदियाँ हैं” कहना पूर्णतः सही नहीं है। मैदानी भाग में इनका संयुक्त प्रवाह पंचनद के रूप में सिंधु में मिलता है।

04

सिंधु जल संधि

भारत और पाकिस्तान — 1960

सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितंबर 1960 को हस्ताक्षरित हुई थी।

भारत की ओर से तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान की ओर से राष्ट्रपति अयूब खान ने इस पर हस्ताक्षर किए।

विश्व बैंक ने दोनों देशों के बीच समझौता कराने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण मध्यस्थ भूमिका निभाई।

संधि के अंतर्गत रावी, व्यास और सतलज को पूर्वी नदियाँ माना गया और इनके जल का उपयोग मुख्यतः भारत को आवंटित किया गया।

सिंधु, झेलम और चिनाब को पश्चिमी नदियाँ माना गया और इनका जल मुख्यतः पाकिस्तान को आवंटित किया गया, हालाँकि भारत को संधि में निर्धारित कुछ घरेलू, गैर-उपभोगी, कृषि और जलविद्युत उपयोग की अनुमति थी।

समूह नदियाँ 1960 की संधि का मूल आवंटन
पूर्वी नदियाँ रावी, व्यास, सतलज मुख्यतः भारत
पश्चिमी नदियाँ सिंधु, झेलम, चिनाब मुख्यतः पाकिस्तान; भारत को निर्धारित सीमित उपयोग

⚠️ 80%–20% वाला नियम गलत है

संधि में ऐसा नियम नहीं है कि सिंधु-झेलम-चिनाब का प्रत्येक 80% पाकिस्तान और 20% भारत तथा रावी-व्यास-सतलज का 80% भारत और 20% पाकिस्तान को निश्चित रूप से दिया गया हो।

संधि का मूल ढाँचा नदियों के समूह के आवंटन पर आधारित है, न कि हर नदी के पानी के सरल 80:20 बँटवारे पर।

🎯 वर्तमान स्थिति — अगस्त 2026 तक

भारत सरकार ने 23 अप्रैल 2025 को सिंधु जल संधि को स्थगित अवस्था में रखने की घोषणा की थी।

अगस्त 2026 तक भारत सरकार की घोषित स्थिति यही है कि यह निर्णय प्रभावी बना हुआ है।

इसलिए परीक्षा में 1960 की मूल संधि और 2025 के बाद की वर्तमान स्थिति को अलग-अलग समझें।

05

झेलम नदी

कश्मीर घाटी की प्रमुख नदी

झेलम नदी का उद्गम जम्मू-कश्मीर में वेरीनाग झरने से होता है।

इसलिए झेलम का उद्गम शेषनाग झील से बताना सही नहीं है।

झेलम कश्मीर घाटी से होकर बहती है और वुलर झील से होकर गुजरती है।

इसके बाद यह पाकिस्तान-प्रशासित क्षेत्र और पाकिस्तान में प्रवेश करती है तथा आगे चिनाब नदी में मिल जाती है।

प्राचीन यूनानी लेखकों ने झेलम को हाइडेस्पीस नाम से उल्लेखित किया था।

🎯 झेलम

वेरीनाग → कश्मीर घाटी → वुलर झील → चिनाब

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चिनाब नदी

चंद्र और भागा का संयुक्त प्रवाह

चिनाब सिंधु नदी तंत्र की प्रमुख नदी है।

हिमाचल प्रदेश के लाहौल क्षेत्र में चंद्र और भागा नामक दो नदियाँ मिलकर चंद्रभागा नदी बनाती हैं।

चंद्र नदी का उद्गम बारालाचा ला क्षेत्र के निकट होता है, जबकि भागा नदी का उद्गम सूरजताल के निकट से होता है।

दोनों नदियाँ तांदी के निकट मिलती हैं। इसके बाद इसे चंद्रभागा कहा जाता है और जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में आगे चलकर इसका नाम चिनाब हो जाता है।

⚠️ सुधार

चिनाब को सीधे “बारालाचा दर्रे के निकट से निकलने वाली एक नदी” न मानें। यह चंद्र + भागा नदियों के मिलन से बनती है।

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रावी नदी

हिमाचल से पाकिस्तान तक

रावी नदी हिमाचल प्रदेश के हिमालयी क्षेत्र से निकलती है।

इसका उद्गम क्षेत्र हिमाचल प्रदेश के चंबा-कांगड़ा की उच्च पहाड़ियों से संबंधित है।

पुरानी पाठ्यपुस्तकों में इसका उद्गम रोहतांग दर्रे के पश्चिम में हिमाचल की पहाड़ियों के रूप में भी बताया जाता है।

रावी हिमाचल प्रदेश से बहते हुए पंजाब क्षेत्र की ओर जाती है और आगे पाकिस्तान में चिनाब नदी तंत्र में मिल जाती है।

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व्यास नदी

व्यास कुंड से कुल्लू घाटी तक

व्यास नदी हिमाचल प्रदेश में रोहतांग दर्रे के निकट व्यास कुंड से निकलती है।

यह प्रसिद्ध कुल्लू घाटी से होकर बहती है। कुल्लू घाटी मुख्यतः व्यास नदी द्वारा निर्मित महत्वपूर्ण हिमालयी घाटी है।

व्यास आगे पंजाब में प्रवेश करती है और हरिके के निकट सतलज नदी में मिलती है।

⚠️ रावी और व्यास अलग रखें

व्यास कुंड और कुल्लू घाटी का सीधा संबंध व्यास नदी से है। इसे रावी नदी के साथ न मिलाएँ।

09

सतलज नदी

तिब्बत से पंजाब तक

सतलज सिंधु नदी तंत्र की महत्वपूर्ण पूर्वी नदी है।

इसका उद्गम तिब्बत में मानसरोवर के निकट राक्षसताल क्षेत्र से माना जाता है।

यह तिब्बत से पश्चिम की ओर बहती हुई शिपकी ला क्षेत्र के निकट भारत के हिमाचल प्रदेश में प्रवेश करती है।

स्पीति नदी इसकी प्रमुख हिमालयी सहायक नदियों में से एक है।

प्रसिद्ध भाखड़ा बाँध सतलज नदी पर स्थित है। नांगल बाँध इसके नीचे की ओर स्थित है और दोनों मिलकर भाखड़ा-नांगल परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

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गंगा नदी तंत्र

भारत का सबसे विशाल नदी बेसिन

गंगा नदी तंत्र भारत का सबसे महत्वपूर्ण और सबसे विशाल नदी बेसिन है।

भागीरथी को गंगा की प्रमुख उद्गम धारा माना जाता है। यह उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री हिमनद के गोमुख से निकलती है।

देवप्रयाग में भागीरथी और अलकनंदा के संगम के बाद संयुक्त नदी को गंगा कहा जाता है।

इसके बाद गंगा हिमालय को छोड़कर हरिद्वार के निकट उत्तरी मैदान में प्रवेश करती है।

🎯 गंगा का निर्माण

भागीरथी + अलकनंदा देवप्रयाग गंगा
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गंगा की प्रमुख सहायक नदियाँ

बाएँ और दाएँ किनारे की महत्वपूर्ण नदियाँ

किनारा प्रमुख सहायक नदियाँ
बाएँ किनारे से रामगंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, बूढ़ी गंडक, कोसी, महानंदा आदि
दाएँ किनारे से यमुना, सोन आदि

वरुणा वाराणसी क्षेत्र की स्थानीय महत्वपूर्ण सहायक नदी है, लेकिन प्रमुख अखिल भारतीय गंगा सहायक नदियों की मानक सूची में इसे रामगंगा, घाघरा, गंडक या कोसी के समान स्तर पर नहीं रखा जाता।

टोंस को गंगा की दाएँ किनारे की सीधी सहायक नदी कहना गलत है। प्रमुख हिमालयी टोंस नदी यमुना की सहायक नदी है।

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बांग्लादेश में गंगा

पद्मा से मेघना तक

भारत से बांग्लादेश में प्रवेश करने के बाद गंगा की मुख्य धारा को पद्मा कहा जाता है।

आगे ब्रह्मपुत्र की बांग्लादेशी धारा जमुना पद्मा से मिलती है।

इसके बाद यह संयुक्त प्रवाह मेघना तंत्र से जुड़ता है और विशाल गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना डेल्टा बनाते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरता है।

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यमुना नदी

गंगा की सबसे लंबी प्रमुख सहायक नदी

यमुना नदी उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में बंदरपूँछ पर्वत समूह की दक्षिण-पश्चिमी ढाल पर स्थित यमुनोत्री हिमनद से निकलती है।

यह उत्तराखंड, हरियाणा-दिल्ली और उत्तर प्रदेश से होकर बहती हुई प्रयागराज में गंगा से मिलती है।

यमुना की प्रमुख हिमालयी सहायक नदी टोंस है, जो ऊपरी यमुना में बहुत अधिक जल प्रदान करती है।

मैदानी भाग में यमुना की प्रमुख दाएँ किनारे की सहायक नदियाँ चंबल, सिंध, बेतवा और केन हैं।

यमुना गंगा नदी तंत्र की सबसे लंबी प्रमुख सहायक नदियों में से एक है। इसे केवल “सबसे बड़ी” कहना मापदंड स्पष्ट किए बिना भ्रम पैदा कर सकता है।

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चंबल नदी

बीहड़ और अवनालिका अपरदन

चंबल नदी मध्य प्रदेश में विंध्य क्षेत्र की जनापाव पहाड़ियों के निकट से निकलती है।

पुरानी पुस्तकों में इसके उद्गम को मऊ के निकट विंध्य पर्वत के रूप में भी लिखा जाता है।

यह मध्य प्रदेश और राजस्थान से होकर बहती है तथा उत्तर प्रदेश में इटावा के निकट यमुना नदी में मिलती है।

बनास चंबल की महत्वपूर्ण सहायक नदी है।

चंबल घाटी अवनालिका अपरदन और बीहड़ भू-आकृति के लिए प्रसिद्ध है।

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सोन नदी

अमरकंटक से गंगा तक

सोन नदी मध्य प्रदेश के अमरकंटक क्षेत्र से निकलती है।

यह उत्तर-पूर्व दिशा में बहते हुए मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार के क्षेत्रों को प्रभावित करती है।

अंततः यह बिहार में पटना के पश्चिम में गंगा से मिलती है।

सोन गंगा की प्रमुख दाएँ किनारे की सहायक नदी है।

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रामगंगा नदी

कुमाऊँ हिमालय से गंगा तक

रामगंगा उत्तराखंड के कुमाऊँ हिमालय से निकलती है।

यह उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से होकर बहती है।

उत्तर प्रदेश में यह आगे कन्नौज के निकट गंगा में मिलती है।

यह गंगा की महत्वपूर्ण बाएँ किनारे की सहायक नदी है।

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घाघरा नदी

नेपाल में कर्णाली

घाघरा हिमालय की विशाल बारहमासी नदी है।

तिब्बत और नेपाल के ऊपरी भाग में इसे कर्णाली नाम से जाना जाता है।

नेपाल से भारत में प्रवेश करने के बाद इसका नाम घाघरा प्रचलित होता है।

यह उत्तर प्रदेश और बिहार से होकर बहती हुई छपरा के निकट गंगा में मिलती है।

यह गंगा की सबसे अधिक जल वाली महत्वपूर्ण बाएँ किनारे की सहायक नदियों में से एक है।

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गंडक नदी

नेपाल हिमालय से गंगा तक

गंडक नदी का नदी तंत्र नेपाल हिमालय में विकसित होता है।

इसकी प्रमुख हिमालयी धाराओं में काली गंडकी और त्रिशूली जैसी नदियाँ शामिल हैं।

नेपाल में इसे नारायणी नाम से भी जाना जाता है।

भारत में प्रवेश करने के बाद यह बिहार से होकर बहती है और सोनपुर-हाजीपुर क्षेत्र के निकट गंगा में मिलती है।

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कोसी नदी

बिहार का शोक

कोसी पूर्वी नेपाल और तिब्बती हिमालय के विशाल जलग्रहण क्षेत्र की नदी है।

इसकी तीन प्रमुख धाराएँ हैं — अरुण, सुनकोसी और तमूर

इन धाराओं के संयुक्त तंत्र को सप्तकोसी भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें सात प्रमुख हिमालयी धाराओं का व्यापक तंत्र शामिल है।

कोसी नेपाल से बिहार में प्रवेश करती है और विशाल मात्रा में अवसाद लेकर आती है।

बिहार के मैदानी भाग में ऐतिहासिक रूप से इसकी धारा बार-बार स्थान बदलती रही है।

इसी बार-बार धारा परिवर्तन और विनाशकारी बाढ़ के कारण इसे “बिहार का शोक” कहा जाता है।

अंततः कोसी बिहार में कुरसेला के निकट गंगा में मिलती है। यह क्षेत्र कटिहार जिले में स्थित है और खगड़िया क्षेत्र के पूर्व में है।

⚠️ दो बड़े सुधार

कोसी की प्रमुख धाराएँ अरुण + सुनकोसी + तमूर हैं। “अरुण, गोसा, ईनाथ” सही नाम नहीं हैं।

कोसी का गंगा से संगम सीधे खगड़िया नगर के पास नहीं, बल्कि मुख्यतः कुरसेला क्षेत्र में माना जाता है।

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ब्रह्मपुत्र नदी

तिब्बत से भारत और बांग्लादेश तक

ब्रह्मपुत्र विश्व की विशाल नदी प्रणालियों में से एक है।

इसका उद्गम तिब्बत में कैलाश-मानसरोवर क्षेत्र के निकट उच्च हिमालयी क्षेत्र से संबंधित है।

पुरानी भारतीय भूगोल पुस्तकों में इसका उद्गम चेमायुंगडुंग हिमनद से बताया जाता रहा है। आधुनिक भौगोलिक अध्ययनों में इसके स्रोत क्षेत्र को आंग्सी/कैलाश क्षेत्र की उच्च हिमनदीय धाराओं से भी जोड़ा जाता है।

तिब्बत में नदी को यारलुंग त्सांगपो कहा जाता है।

यह तिब्बत में हिमालय के समानांतर पूर्व की ओर लंबी दूरी तक बहती है।

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नामचा बरवा और ब्रह्मपुत्र का महान मोड़

त्सांगपो से सियांग-दिहांग

तिब्बत में पूर्व की ओर बहते हुए यारलुंग त्सांगपो नामचा बरवा पर्वत क्षेत्र के निकट विशाल मोड़ लेती है।

यहाँ नदी गहरा गॉर्ज बनाते हुए हिमालय को काटकर दक्षिण की ओर मुड़ती है।

अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करने के बाद इसे सियांग कहा जाता है और निचले भाग में दिहांग नाम भी प्रचलित है।

इसलिए यह कहना कि नदी “नामचा बरवा चोटी को काटती है” शाब्दिक रूप से सही नहीं है; यह नामचा बरवा क्षेत्र के निकट गहरा गॉर्ज बनाकर हिमालय को काटती है।

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ब्रह्मपुत्र नाम कैसे पड़ता है?

दिहांग, दिबांग और लोहित का संगम

अरुणाचल प्रदेश से नीचे उतरने के बाद दिहांग/सियांग नदी से दिबांग और लोहित नदियाँ मिलती हैं।

इन नदियों के संगम के बाद असम के मैदान में विशाल नदी को ब्रह्मपुत्र नाम से जाना जाता है।

यह संगम क्षेत्र ऊपरी असम में सादिया के आसपास के विस्तृत नदी प्रदेश से जुड़ा है।

🧠 नाम का क्रम

यारलुंग त्सांगपो सियांग / दिहांग + दिबांग + लोहित ब्रह्मपुत्र
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ब्रह्मपुत्र की प्रमुख सहायक नदियाँ

उत्तर और दक्षिण से मिलने वाली नदियाँ

ब्रह्मपुत्र की प्रमुख सहायक नदियों में सुबनसिरी, कामेंग, मानस, संकोश, दिबांग, लोहित, धनसिरी और बूढ़ी दिहिंग आदि शामिल हैं।

सुबनसिरी ब्रह्मपुत्र की सबसे महत्वपूर्ण उत्तर तट की सहायक नदियों में से एक है।

मानस भूटान से निकलकर असम में ब्रह्मपुत्र से मिलती है।

धनसिरी दक्षिण की ओर से मिलने वाली महत्वपूर्ण सहायक नदी है।

तीस्ता वर्तमान में बांग्लादेश में ब्रह्मपुत्र की जमुना धारा में मिलती है और व्यापक ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र की महत्वपूर्ण सहायक नदी मानी जाती है।

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माजुली और उमानंद

ब्रह्मपुत्र के प्रसिद्ध नदी द्वीप

माजुली असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर स्थित विश्व प्रसिद्ध विशाल नदी द्वीप है।

असम सरकार के अनेक आधिकारिक स्रोत इसे विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप बताते हैं, जबकि कुछ स्रोत इसे विश्व के सबसे बड़े आबाद नदी द्वीपों में गिनते हैं।

माजुली असम की वैष्णव सत्र संस्कृति का भी महत्वपूर्ण केंद्र है।

उमानंद द्वीप गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी पर स्थित है। इसे पीकॉक द्वीप भी कहा जाता है।

असम सरकार के अनुसार उमानंद को विश्व का सबसे छोटा आबाद नदी द्वीप कहा जाता है।

⚠️ सही शब्द

उमानंद को केवल “विश्व का सबसे छोटा नदी द्वीप” कहने के बजाय “विश्व का सबसे छोटा आबाद नदी द्वीप” लिखना अधिक सटीक है।

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बांग्लादेश में ब्रह्मपुत्र

जमुना → पद्मा → मेघना

ब्रह्मपुत्र असम से आगे दक्षिण की ओर बहते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है।

बांग्लादेश में इसकी मुख्य धारा को जमुना कहा जाता है।

जमुना आगे गंगा की बांग्लादेशी धारा पद्मा से मिलती है।

इसके बाद संयुक्त प्रवाह आगे मेघना नदी तंत्र से जुड़ता है।

अंततः विशाल संयुक्त नदी तंत्र बंगाल की खाड़ी में गिरता है।

🧠 बांग्लादेश में क्रम

ब्रह्मपुत्र = जमुना पद्मा से संगम मेघना बंगाल की खाड़ी
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सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र की तुलना

एक नज़र में तीनों नदी तंत्र

नदी प्रमुख उद्गम क्षेत्र भारत में प्रमुख क्षेत्र अंतिम समुद्र
सिंधु कैलाश-मानसरोवर क्षेत्र, तिब्बत लद्दाख अरब सागर
गंगा भागीरथी–गंगोत्री हिमनद; देवप्रयाग में गंगा नाम उत्तराखंड एवं उत्तरी मैदान बंगाल की खाड़ी
ब्रह्मपुत्र तिब्बत का उच्च हिमालयी क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश एवं असम बंगाल की खाड़ी
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परीक्षा में होने वाले प्रमुख भ्रम

एक बार में सही याद करें

सिंधु चेमायुंगडुंग हिमनद से निकलती है — सही नहीं। सिंधु का उद्गम कैलाश-मानसरोवर क्षेत्र में बोखार-चू हिमनदीय क्षेत्र से संबंधित माना जाता है।

सिंधु जल संधि = प्रत्येक नदी का 80:20 बँटवारा — गलत। मूल संधि पूर्वी और पश्चिमी नदियों के समूह-आवंटन पर आधारित है।

झेलम शेषनाग झील से निकलती है — गलत। झेलम का उद्गम वेरीनाग से होता है।

चिनाब सीधे बारालाचा ला से निकलती है — गलत। चंद्र और भागा के संगम से चंद्रभागा/चिनाब बनती है।

रावी और व्यास दोनों व्यास कुंड से निकलती हैं — गलत। व्यास नदी का उद्गम व्यास कुंड से है।

गंगा गोमुख से ही गंगा नाम से निकलती है — गोमुख से निकलने वाली धारा भागीरथी है; देवप्रयाग के बाद इसे गंगा कहा जाता है।

टोंस गंगा की सीधी दाएँ किनारे की सहायक नदी है — प्रमुख टोंस नदी यमुना की सहायक है।

कोसी की मुख्य धाराएँ अरुण, गोसा और ईनाथ हैं — गलत। मुख्य धाराएँ अरुण, सुनकोसी और तमूर हैं।

ब्रह्मपुत्र नामचा बरवा पर्वत को काटती है — अधिक सही रूप में यह नामचा बरवा क्षेत्र के निकट विशाल गॉर्ज बनाकर हिमालय को काटती है।

उमानंद विश्व का सबसे छोटा नदी द्वीप — अधिक सुरक्षित तथ्य: विश्व का सबसे छोटा आबाद नदी द्वीप

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अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य

त्वरित परीक्षा पुनरावृत्ति

प्रश्न उत्तर
हिमालयी अपवाह के तीन मुख्य नदी तंत्र सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र
सिंधु का उद्गम कैलाश-मानसरोवर क्षेत्र, तिब्बत
सिंधु कहाँ गिरती है? अरब सागर
पंचनद की पाँच नदियाँ झेलम, चिनाब, रावी, व्यास, सतलज
सिंधु जल संधि 19 सितंबर 1960
पूर्वी नदियाँ रावी, व्यास, सतलज
पश्चिमी नदियाँ सिंधु, झेलम, चिनाब
झेलम का उद्गम वेरीनाग
व्यास का उद्गम व्यास कुंड, रोहतांग क्षेत्र
चिनाब कैसे बनती है? चंद्र + भागा
सतलज पर प्रमुख परियोजना भाखड़ा-नांगल
भागीरथी का उद्गम गोमुख, गंगोत्री हिमनद
गंगा नाम कहाँ से? देवप्रयाग — भागीरथी + अलकनंदा
गंगा मैदान में कहाँ प्रवेश करती है? हरिद्वार
यमुना का उद्गम यमुनोत्री हिमनद
यमुना कहाँ गंगा से मिलती है? प्रयागराज
चंबल किसके लिए प्रसिद्ध? बीहड़ / अवनालिका अपरदन
सोन का उद्गम अमरकंटक
घाघरा का ऊपरी नाम कर्णाली
कोसी की तीन मुख्य धाराएँ अरुण, सुनकोसी, तमूर
बिहार का शोक कोसी
तिब्बत में ब्रह्मपुत्र यारलुंग त्सांगपो
अरुणाचल में सियांग / दिहांग
बांग्लादेश में ब्रह्मपुत्र जमुना
बांग्लादेश में गंगा पद्मा
ब्रह्मपुत्र का प्रसिद्ध विशाल नदी द्वीप माजुली
सबसे छोटा आबाद नदी द्वीप उमानंद

⚡ अंतिम त्वरित पुनरावृत्ति

हिमालयी नदी तंत्र — सिंधु + गंगा + ब्रह्मपुत्र

सिंधु — कैलाश-मानसरोवर क्षेत्र → लद्दाख → पाकिस्तान → अरब सागर

पंचनद — झेलम + चिनाब + रावी + व्यास + सतलज

सिंधु जल संधि — 19 सितंबर 1960 — जवाहरलाल नेहरू + अयूब खान — विश्व बैंक की मध्यस्थ भूमिका

1960 की मूल व्यवस्था — पूर्वी नदियाँ: रावी-व्यास-सतलज → मुख्यतः भारत; पश्चिमी नदियाँ: सिंधु-झेलम-चिनाब → मुख्यतः पाकिस्तान

80:20 प्रति नदी वाला नियम नहीं है।

अप्रैल 2025 से भारत ने संधि को स्थगित अवस्था में रखा है; अगस्त 2026 तक भारत की घोषित स्थिति जारी है।

झेलम — वेरीनाग → वुलर झील → चिनाब

चिनाब — चंद्र + भागा → तांदी → चंद्रभागा/चिनाब

व्यास — व्यास कुंड → कुल्लू घाटी → सतलज

सतलज — राक्षसताल क्षेत्र → शिपकी ला → भाखड़ा-नांगल

भागीरथी — गोमुख, गंगोत्री हिमनद

देवप्रयाग — भागीरथी + अलकनंदा = गंगा

हरिद्वार — गंगा का मैदान में प्रवेश

यमुना — यमुनोत्री हिमनद → प्रयागराज में गंगा से संगम

यमुना की प्रमुख सहायक नदियाँ — टोंस, चंबल, सिंध, बेतवा, केन

चंबल — बीहड़ और अवनालिका अपरदन

सोन — अमरकंटक → गंगा

रामगंगा — कुमाऊँ हिमालय → कन्नौज के निकट गंगा

घाघरा — ऊपरी भाग में कर्णाली → छपरा के निकट गंगा

गंडक — नेपाल हिमालय → सोनपुर-हाजीपुर के निकट गंगा

कोसी — अरुण + सुनकोसी + तमूर → बिहार का शोक → कुरसेला के निकट गंगा

ब्रह्मपुत्र — तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो → अरुणाचल में सियांग/दिहांग

दिहांग + दिबांग + लोहित → असम में ब्रह्मपुत्र

ब्रह्मपुत्र की प्रमुख सहायक नदियाँ — सुबनसिरी, मानस, कामेंग, धनसिरी, दिबांग और लोहित

माजुली — ब्रह्मपुत्र का प्रसिद्ध विशाल नदी द्वीप

उमानंद — विश्व का सबसे छोटा आबाद नदी द्वीप

बांग्लादेश में — ब्रह्मपुत्र = जमुना; गंगा = पद्मा

अंतिम क्रम — जमुना + पद्मा → मेघना तंत्र → बंगाल की खाड़ी

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