\n\n\n\n\n
VidyaGlobe
भारत की कृषि एवं प्रमुख फसलें
AGRICULTURE AND CROPS

भारत की कृषि एवं प्रमुख फसलें

फसल ऋतुएँ, प्रमुख खाद्य एवं नकदी फसलें, कृषि पद्धतियाँ और महत्वपूर्ण तथ्य

भारत की कृषि

भारत में जलवायु, मिट्टी, वर्षा और तापमान की विविधता के कारण अनेक प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं। कृषि वर्ष को मुख्य रूप से रबी, खरीफ और जायद ऋतुओं में बाँटा जाता है। खाद्यान्न, दलहन, तिलहन, नकदी फसलें, बागवानी, चाय, कॉफी, रबर तथा मसालों का भारतीय कृषि और अर्थव्यवस्था में विशेष महत्व है।

01

रबी फसलें

शीतकालीन फसल ऋतु

रबी फसलों की बुआई सामान्यतः अक्टूबर से नवंबर के बीच की जाती है और कटाई मार्च से अप्रैल के बीच होती है। इनके विकास के समय ठंडा मौसम तथा पकते समय शुष्क और अपेक्षाकृत गर्म मौसम अनुकूल होता है।

रबी की प्रमुख फसलों में गेहूँ, जौ, चना, मटर, सरसों, मसूर, राई और आलू शामिल हैं।

02

खरीफ फसलें

वर्षाकालीन फसल ऋतु

खरीफ फसलों की बुआई दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के साथ सामान्यतः जून से जुलाई में की जाती है तथा कटाई अक्टूबर से नवंबर के बीच होती है।

खरीफ की प्रमुख फसलों में चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का, तिल, मूंगफली, उड़द, कपास, रागी और सोयाबीन शामिल हैं।

03

जायद फसलें

रबी और खरीफ के बीच की फसलें

जायद फसलें रबी की कटाई और खरीफ की बुआई के बीच गर्मियों की छोटी अवधि में उगाई जाती हैं। सामान्यतः इनकी बुआई मार्च-अप्रैल तथा कटाई जून-जुलाई तक की जाती है।

तरबूज, खरबूजा, ककड़ी, खीरा, भिंडी तथा विभिन्न प्रकार की गर्मी की सब्जियाँ जायद ऋतु की प्रमुख फसलें हैं।

04

कृषि शब्द और फसल प्रणाली

मूल अवधारणाएँ

एग्रीकल्चर शब्द की उत्पत्ति लैटिन के एगर/एग्री अर्थात खेत या भूमि तथा कल्चुरा अर्थात खेती या संवर्धन से मानी जाती है। इसलिए इसका व्यापक अर्थ भूमि की खेती करना है।

युग्म फसल या दोहरी फसल प्रणाली का आशय एक ही कृषि भूमि पर एक कृषि वर्ष में अलग-अलग मौसमों में दो फसलें लेना है। इससे भूमि के उपयोग की तीव्रता बढ़ती है।

गहन कृषि का उद्देश्य अपेक्षाकृत कम भूमि पर श्रम, सिंचाई, उर्वरक, उन्नत बीज और तकनीक के अधिक उपयोग द्वारा अधिकतम उत्पादन प्राप्त करना है।

05

कृषि जोत और उत्पादकता

क्षेत्रीय विशेषताएँ

पुरानी सामान्य ज्ञान पुस्तकों में भारत में चालू जोतों का सबसे बड़ा औसत आकार राजस्थान बताया गया है, लेकिन इसे पूरे भारत के लिए स्थायी प्रथम स्थान नहीं मानना चाहिए। कृषि जनगणना में औसत जोत का आकार राज्य और वर्ष के अनुसार अलग होता है और कुछ छोटे राज्यों में औसत जोत राजस्थान से बड़ी रही है।

दक्षिण भारत में उच्च कृषि उत्पादकता वाले प्रमुख क्षेत्रों में तमिलनाडु का तटीय मैदान और कावेरी डेल्टा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यहाँ सिंचाई, बहुफसली कृषि और धान की सघन खेती विकसित है।

⚠️ परीक्षा सावधानी

औसत जोत आकार से जुड़े “भारत में प्रथम राज्य” को संबंधित कृषि जनगणना के वर्ष के बिना स्थायी तथ्य न मानें।

06

रासायनिक उर्वरक और अनुबंध कृषि

महत्वपूर्ण कृषि तथ्य

उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े रासायनिक उर्वरक उपभोक्ता राज्यों में रहता है। महाराष्ट्र भी बड़े उपभोक्ता राज्यों में है, लेकिन “उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र हमेशा प्रथम-द्वितीय” वाला क्रम वर्ष तथा उर्वरक की श्रेणी के अनुसार बदल सकता है।

पंजाब अनुबंध कृषि के लिए अलग राज्य कानून बनाने वाले शुरुआती राज्यों में था और उसने 2013 में पंजाब अनुबंध कृषि अधिनियम बनाया। इसलिए सामान्य परीक्षा पुस्तकों में पंजाब को अनुबंध कृषि लागू करने वाला प्रथम राज्य लिखा मिलता है।

07

गेहूँ

रबी की प्रमुख खाद्यान्न फसल

गेहूँ रबी की प्रमुख फसल है। अच्छी गेहूँ की खेती के लिए बुआई और वृद्धि के समय मध्यम से ठंडा तापमान तथा मध्यम वर्षा उपयुक्त होती है, जबकि पकते समय साफ और शुष्क मौसम लाभकारी रहता है।

कल्याण सोना गेहूँ की प्रसिद्ध उन्नत किस्म है और भारतीय हरित क्रांति के प्रारंभिक वर्षों में इसका विशेष महत्व रहा।

सोनालिका भी गेहूँ की प्रमुख उन्नत किस्म है। सामान्य कृषि-GK में अर्जुन और सोना नाम भी गेहूँ की किस्मों से जुड़े मिलते हैं; किस्मों के स्थानीय और संस्थागत नामों में क्षेत्रीय अंतर हो सकता है।

करनाल बंट गेहूँ का कवक-जनित रोग है। इसका प्रमुख रोगकारक कवक टिलेटिया इंडिका है।

🎯 याद रखें

कल्याण सोना और सोनालिका — गेहूँ; करनाल बंट — गेहूँ का कवक रोग।

08

धान या चावल

भारत की प्रमुख खाद्य फसल

चावल भारत की सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसलों में से एक है और विशाल जनसंख्या का मुख्य भोजन है। भारत में खाद्यान्न फसलों में धान बहुत बड़े क्षेत्र पर उगाया जाता है।

धान की खेती के लिए सामान्यतः लगभग 25° सेल्सियस या उससे अधिक तापमान, अधिक आर्द्रता और पर्याप्त जल की आवश्यकता होती है। परंपरागत रूप से 100 सेंटीमीटर या उससे अधिक वर्षा वाले क्षेत्र इसकी खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त माने जाते हैं, यद्यपि सिंचाई की सहायता से कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी इसकी सफल खेती होती है।

भारत में धान का क्षेत्रफल बहुत विशाल है। किसी विशेष वर्ष में “सर्वाधिक धान क्षेत्र वाला राज्य” आधिकारिक आँकड़ों पर निर्भर करता है; इसलिए उत्तर प्रदेश को स्थायी रूप से प्रत्येक वर्ष प्रथम लिखना सुरक्षित नहीं है।

कृष्णा-गोदावरी डेल्टा आंध्र प्रदेश का अत्यंत उपजाऊ धान उत्पादक क्षेत्र है और इसे प्रायः चावल का कटोरा कहा जाता है।

जया और पद्मा प्रसिद्ध धान किस्में हैं। पूसा सुगंध-5 सुगंधित धान की किस्म है। विभिन्न कृषि स्रोतों में जमुना, कृष्णा तथा बोरो धान से जुड़े नाम भी मिलते हैं; इनमें बोरो वास्तव में धान की एक मौसम/फसल प्रणाली भी है, इसलिए इसे केवल एक किस्म समझना उचित नहीं है।

धान के खेत में नील-हरित शैवाल का उपयोग जैव उर्वरक के रूप में किया जाता है। ये वायुमंडलीय नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सहायता करते हैं।

09

अनाज का सुरक्षित भंडारण

आर्द्रता का महत्व

अनाज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए कटाई के बाद उसमें नमी की मात्रा कम करना आवश्यक है। सामान्य भंडारण के लिए लगभग 14 प्रतिशत या उससे कम नमी को सुरक्षित सीमा माना जाता है, यद्यपि सही सुरक्षित नमी फसल, भंडारण अवधि और भंडारण प्रणाली के अनुसार कुछ भिन्न हो सकती है।

अधिक नमी होने पर फफूँद, कीट प्रकोप, अंकुरण और दानों की गुणवत्ता में कमी का खतरा बढ़ जाता है।

10

मक्का

बहुउपयोगी अनाज फसल

मक्का मुख्यतः खरीफ की फसल है, लेकिन भारत के विभिन्न क्षेत्रों में सिंचाई और अनुकूल तापमान के कारण इसकी खेती खरीफ, रबी तथा वसंत ऋतु सहित वर्ष के अलग-अलग समय में की जा सकती है।

मक्का की फसल तैयार होने की अवधि किस्म और मौसम पर निर्भर करती है। कई मध्यम अवधि की किस्में लगभग 120 से 140 दिनों में तैयार होती हैं; इसलिए 140 दिन को सभी मक्का किस्मों का निश्चित औसत नहीं मानना चाहिए।

शक्तिमान-1 और शक्तिमान-2 को आनुवंशिक रूप से परिवर्तित मक्का कहना सही नहीं है। ये गुणवत्ता-प्रोटीन मक्का से संबंधित उन्नत संकर हैं, जिनमें प्रोटीन की गुणवत्ता सुधारने पर बल दिया गया है।

❌ महत्वपूर्ण सुधार

शक्तिमान-1 और शक्तिमान-2 = आनुवंशिक रूप से परिवर्तित मक्का नहीं; इन्हें गुणवत्ता-प्रोटीन मक्का संकर के रूप में पढ़ें।

11

दलहन

प्राकृतिक नाइट्रोजन स्थिरीकरण

चना, अरहर, मसूर, मूंग, उड़द और मटर जैसी दलहनी फसलों की जड़ों में राइजोबियम जीवाणुओं की गांठें बनती हैं, जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर करके मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायता करती हैं।

इसी कारण दलहनी फसलों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण की विशेष क्षमता होती है और फसल चक्र में इनका उपयोग मिट्टी के लिए लाभकारी माना जाता है।

दलहनी फसलों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण की प्रक्रिया से जुड़े सूक्ष्मजीवों के लिए मोलिब्डेनम विशेष रूप से महत्वपूर्ण सूक्ष्मतत्व है। कोबाल्ट भी राइजोबियम की गतिविधि और गांठ निर्माण में लाभकारी भूमिका निभा सकता है, लेकिन दलहन के लिए केवल कोबाल्ट को ही सबसे आवश्यक तत्व कहना अधूरा होगा।

उकठा रोग चना की महत्वपूर्ण बीमारी है और यह फ्यूजेरियम कवक से संबंधित है।

भारत में दलहन उत्पादन में मध्य प्रदेश लंबे समय से प्रमुख राज्यों में है, लेकिन राजस्थान सहित अन्य राज्यों का योगदान भी बहुत बड़ा है और प्रथम स्थान वर्ष के अनुसार बदल सकता है।

12

सोयाबीन और तिलहन

प्रमुख तेलबीज फसलें

सोयाबीन भारत की महत्वपूर्ण खरीफ तिलहनी फसल है। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र इसके दो सबसे बड़े उत्पादक राज्यों में हैं। अनेक वर्षों तक मध्य प्रदेश अग्रणी रहा है, लेकिन राज्यवार प्रथम स्थान उत्पादन वर्ष के अनुसार बदल सकता है।

मध्य प्रदेश भारत के सबसे बड़े तिलहन उत्पादक राज्यों में है। राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र भी तिलहन उत्पादन में महत्वपूर्ण हैं; इसलिए किसी एक राज्य का स्थायी प्रथम स्थान वर्ष के बिना नहीं लिखना चाहिए।

राजस्थान सरसों का प्रमुख उत्पादक राज्य है और देश के सरसों उत्पादन में इसका बहुत बड़ा योगदान है। राजस्थान बाजरा उत्पादन में भी प्रमुख राज्यों में है।

13

मूंगफली

तिलहनी फसल की विशेषताएँ

मूंगफली एक महत्वपूर्ण तिलहनी फसल है। फलियों के निर्माण में पेगिंग अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। निषेचन के बाद विकसित पेग मिट्टी के अंदर प्रवेश करता है और वहीं मूंगफली की फलियाँ विकसित होती हैं।

सामान्य कृषि स्रोतों में कौशल नाम मूंगफली की उन्नत किस्म के रूप में मिलता है। किस्मों के नाम कृषि विश्वविद्यालय और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

14

कपास

सफेद सोना

कपास भारत की प्रमुख नकदी और रेशेदार फसल है तथा इसे सामान्यतः सफेद सोना कहा जाता है।

मध्य प्रदेश का खरगोन जिला कपास उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है और कपास की अधिकता के कारण इसे स्थानीय रूप से सफेद सोने के क्षेत्र से जोड़ा जाता है।

महाराष्ट्र कपास के अंतर्गत बहुत बड़े क्षेत्र वाला राज्य है। लेकिन “भारत का सबसे बड़ा कपास उत्पादक राज्य हमेशा महाराष्ट्र” कहना सही नहीं है, क्योंकि वास्तविक उत्पादन में महाराष्ट्र और गुजरात सहित राज्यों की स्थिति अलग-अलग वर्षों में बदलती रहती है।

15

गन्ना

भारत की प्रमुख नकदी फसल

उत्तर प्रदेश भारत का प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य है और गन्ना तथा चीनी उद्योग की अत्यधिक सघनता के कारण इसे सामान्यतः भारत का शक्कर का कटोरा कहा जाता है।

भारत की प्रमुख फसलों में गन्ने की खेती का बहुत बड़ा भाग सिंचित क्षेत्र में होता है, क्योंकि गन्ने को लंबे बढ़वार काल के दौरान पर्याप्त जल की आवश्यकता होती है। प्रमुख फसलों में इसके अंतर्गत सिंचित क्षेत्र का प्रतिशत बहुत अधिक है।

लाल सड़न गन्ने की अत्यंत महत्वपूर्ण कवक-जनित बीमारी है। पुराने नोट्स में इसे कभी-कभी गलत उच्चारण के कारण “लाल बिग्लन” लिखा मिलता है। इसका सही नाम लाल सड़न है।

⚠️ सही नाम

“लाल बिग्लन” नहीं — लाल सड़न, गन्ने की प्रमुख बीमारी।

16

हरित क्रांति

भारतीय कृषि का परिवर्तन

विश्व स्तर पर हरित क्रांति से सबसे अधिक जुड़ा नाम अमेरिकी कृषि वैज्ञानिक नॉर्मन अर्नेस्ट बोरलॉग का है। उन्हें सामान्यतः हरित क्रांति का जनक कहा जाता है।

भारत में हरित क्रांति के विकास में डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन की केंद्रीय भूमिका रही और उन्हें भारत में हरित क्रांति का जनक कहा जाता है।

भारत में हरित क्रांति का सबसे स्पष्ट और प्रारंभिक लाभ गेहूँ उत्पादन में दिखाई दिया। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश इसके प्रमुख लाभार्थी क्षेत्र बने।

हरित क्रांति के प्रारंभिक चरण में मैक्सिकन बौनी गेहूँ किस्मों और उनसे विकसित उच्च उपज वाली किस्मों का व्यापक उपयोग हुआ। इसलिए हरित क्रांति को केवल “मैक्सिकन गेहूँ का सबसे अधिक उत्पादन” कहना अधूरा है; सही अर्थ उच्च उपज वाली गेहूँ किस्मों के तेजी से प्रसार से है।

17

चाय

प्रमुख बागान फसल

भारत में असम चाय उत्पादन का सबसे महत्वपूर्ण राज्य है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल भी प्रमुख चाय उत्पादक राज्य हैं।

दक्षिण भारत में चाय की खेती पश्चिमी घाट की नीलगिरि पहाड़ियों तथा दक्षिणी पर्वतीय क्षेत्रों की ठंडी, नम ढालों पर की जाती है। इलायची पहाड़ियों के आसपास भी बागान कृषि विकसित है।

ग्रीन गोल्ड नाम कुछ कृषि एवं चाय स्रोतों में चाय की किस्म/क्लोन के संदर्भ में मिलता है, लेकिन केवल इसी नाम को सर्वमान्य प्रमुख चाय किस्म के रूप में याद करना उचित नहीं है क्योंकि चाय में अनेक क्लोन और क्षेत्रीय किस्में उपयोग होती हैं।

पुरानी सामान्य ज्ञान पुस्तकों में चाय को सर्वाधिक विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाली कृषि निर्यात फसल लिखा जाता था। वर्तमान समय में कृषि निर्यात संरचना बहुत बदल चुकी है, इसलिए चाय से ही सर्वाधिक विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है को वर्तमान स्थायी तथ्य नहीं मानना चाहिए।

भारतीय चाय बोर्ड का मुख्यालय कोलकाता में है।

18

कॉफी

दक्षिण भारत की बागान फसल

कर्नाटक भारत का सबसे बड़ा कॉफी उत्पादक राज्य है। इसके बाद प्रमुख उत्पादक राज्यों में केरल और तमिलनाडु आते हैं।

भारत में कॉफी मुख्यतः पश्चिमी घाट की छायादार पर्वतीय ढालों पर उगाई जाती है। कर्नाटक के कोडगु, चिकमगलूर और हासन क्षेत्र कॉफी उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं।

19

मसाले

काली मिर्च, लौंग और अदरक

केरल भारत में मसालों की ऐतिहासिक और व्यावसायिक महत्ता के कारण प्रायः मसालों का बगीचा कहा जाता है।

लौंग पौधे की सूखी बंद पुष्पकली से प्राप्त होती है। केरल लौंग उत्पादक राज्यों में महत्वपूर्ण है, लेकिन सर्वाधिक उत्पादन का राज्य समय और बागवानी आँकड़ों के अनुसार बदल सकता है।

काली मिर्च को मसालों का राजा भी कहा जाता है और सामान्य कृषि-GK में इसे काला सोना कहा जाता है।

अदरक का खाने योग्य भाग भूमिगत प्रकंद है। यह वास्तविक जड़ नहीं, बल्कि भूमिगत परिवर्तित तना है।

20

केसर, अमरूद और काजू

बागवानी फसलें

भारत में वाणिज्यिक स्तर पर प्रसिद्ध केसर उत्पादन मुख्यतः जम्मू-कश्मीर के कश्मीर क्षेत्र, विशेषकर पम्पोर क्षेत्र में होता है।

ललित अमरूद की उन्नत किस्म है। यह केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान द्वारा विकसित महत्वपूर्ण किस्मों में गिनी जाती है।

महाराष्ट्र भारत के प्रमुख काजू उत्पादक राज्यों में है और हाल के कई वर्षों में उत्पादन में अग्रणी रहा है। काजू का राज्यवार क्रम वर्ष के अनुसार बदल सकता है।

21

जूट

सुनहरा रेशा

पश्चिम बंगाल भारत में जूट की खेती और उत्पादन का प्रमुख राज्य है। गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा की गर्म एवं आर्द्र जलवायु जूट के लिए अनुकूल है।

जूट को उसके चमकीले सुनहरे रंग और आर्थिक महत्व के कारण सुनहरा रेशा या स्वर्णिम तंतु कहा जाता है।

सुनहरा रेशा क्रांति का संबंध जूट उत्पादन और जूट क्षेत्र के विकास से जोड़ा जाता है।

22

रबर और नारियल

दक्षिण भारत की महत्वपूर्ण फसलें

केरल प्राकृतिक रबर का भारत का प्रमुख उत्पादक राज्य है। गर्म, आर्द्र और अधिक वर्षा वाली जलवायु रबर के लिए अनुकूल होती है।

नारियल उत्पादन में केरल ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है और नारियल संस्कृति से इसका गहरा संबंध है। लेकिन भारत का सर्वाधिक नारियल उत्पादक राज्य हमेशा केरल कहना वर्तमान आँकड़ों के लिए सुरक्षित नहीं है; कर्नाटक और तमिलनाडु भी उत्पादन में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और प्रथम स्थान वर्ष के अनुसार बदल सकता है।

23

तंबाकू

व्यावसायिक फसल

आंध्र प्रदेश भारत के प्रमुख तंबाकू उत्पादक राज्यों में है, विशेष रूप से फ्लू-क्योर्ड वर्जीनिया तंबाकू के लिए इसका विशेष महत्व है।

हालाँकि कुल तंबाकू उत्पादन में गुजरात सहित अन्य राज्यों का योगदान भी बहुत अधिक है, इसलिए आंध्र प्रदेश को प्रत्येक प्रकार के तंबाकू के कुल उत्पादन में स्थायी प्रथम नहीं मानना चाहिए।

24

रेशम

मूगा और अन्य रेशम

मूगा रेशम भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र, विशेष रूप से असम, की विशिष्ट रेशम परंपरा है। इसका प्राकृतिक सुनहरा रंग इसकी प्रमुख विशेषता है। असम मूगा रेशम को भौगोलिक संकेतक दर्जा प्राप्त है और इसका पंजीकरण 2007 से जुड़ा है।

यह कहना कि मूगा रेशम संसार में बिल्कुल केवल असम की भौगोलिक सीमा में ही पैदा हो सकता है, अत्यधिक कठोर कथन होगा; लेकिन इसका प्रमुख और पारंपरिक वाणिज्यिक केंद्र असम ही है।

कर्नाटक भारत का प्रमुख रेशम उत्पादक राज्य है और विशेष रूप से शहतूत रेशम उत्पादन में इसका बहुत बड़ा स्थान है।

25

झूम कृषि

स्थानांतरित कृषि पद्धति

झूम कृषि स्थानांतरित कृषि की एक पद्धति है जिसमें वनस्पति को काटकर और जलाकर भूमि को कुछ समय के लिए खेती योग्य बनाया जाता है। इसलिए इसे कर्तन एवं दहन कृषि भी कहा जाता है।

यह पद्धति विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत के अनेक पहाड़ी क्षेत्रों में परंपरागत रूप से प्रचलित रही है।

26

एक्वापोनिक कृषि

पौधे और मछली पालन

एक्वापोनिक कृषि में मछली पालन और बिना मिट्टी वाली पौध उत्पादन प्रणाली को जोड़ा जाता है। मछलियों से प्राप्त पोषक अपशिष्ट पौधों के लिए पोषण का स्रोत बनता है और पौधे पानी को साफ करने में सहायता करते हैं।

इस प्रकार पौधे उगाने के साथ मछली पालन करना एक्वापोनिक्स का मूल सिद्धांत है।

27

राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड

बागवानी विकास

राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की स्थापना भारत सरकार द्वारा 1984 में की गई थी। इसका उद्देश्य बागवानी क्षेत्र के समन्वित विकास, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, उत्पादन, कटाई-पश्चात प्रबंधन और विपणन को बढ़ावा देना है।

राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड का मुख्यालय वर्तमान में गुरुग्राम, हरियाणा में है।

28

प्रमुख फसल और तथ्य

एक नज़र में

फसल/विषयमहत्वपूर्ण तथ्य
गेहूँरबी; कल्याण सोना, सोनालिका; करनाल बंट रोग
धानखरीफ; उच्च ताप एवं पर्याप्त जल; नील-हरित शैवाल जैव उर्वरक
मक्कामुख्यतः खरीफ; वर्ष के अन्य मौसमों में भी खेती संभव
गन्नाअधिक सिंचाई वाली नकदी फसल; लाल सड़न प्रमुख रोग
कपाससफेद सोना
जूटसुनहरा रेशा; पश्चिम बंगाल प्रमुख
चायअसम प्रमुख; चाय बोर्ड मुख्यालय कोलकाता
कॉफीकर्नाटक प्रथम; केरल और तमिलनाडु प्रमुख
काली मिर्चकाला सोना / मसालों का राजा
लौंगसूखी पुष्पकली
अदरकखाने योग्य भाग — प्रकंद
केसरजम्मू-कश्मीर का प्रमुख वाणिज्यिक उत्पादन क्षेत्र
29

भ्रम से बचने वाले तथ्य

परीक्षा में विशेष सावधानी

राजस्थान में भारत की सबसे बड़ी औसत चालू जोत — सभी राज्यों और सभी कृषि जनगणनाओं के लिए सही नहीं।

उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र ही हमेशा प्रथम-द्वितीय उर्वरक उपभोक्ता — वर्ष के अनुसार बदल सकता है।

उत्तर प्रदेश ही हमेशा सर्वाधिक धान क्षेत्र वाला राज्य — संबंधित वर्ष के कृषि आँकड़े देखें।

मध्य प्रदेश हमेशा सोयाबीन, दलहन और तिलहन में प्रथम — अलग-अलग वर्षों में राज्य क्रम बदल सकता है।

महाराष्ट्र हमेशा सबसे बड़ा कपास उत्पादक — कपास क्षेत्रफल और कपास उत्पादन अलग बातें हैं; उत्पादन में राज्य क्रम बदल सकता है।

केरल हमेशा सर्वाधिक नारियल उत्पादक — वर्तमान आँकड़ों में क्रम बदल सकता है।

आंध्र प्रदेश सभी प्रकार के तंबाकू में हमेशा प्रथम — तंबाकू की श्रेणी और वर्ष के अनुसार स्थिति अलग हो सकती है।

शक्तिमान-1 और शक्तिमान-2 आनुवंशिक रूप से परिवर्तित मक्का हैं — गलत; ये गुणवत्ता-प्रोटीन मक्का संकर हैं।

बोरो केवल धान की उन्नत किस्म है — अधूरा; बोरो धान की एक विशेष मौसमीय फसल प्रणाली भी है।

चाय से ही वर्तमान में भारत को सर्वाधिक कृषि निर्यात विदेशी मुद्रा मिलती है — पुराना सामान्य ज्ञान कथन; वर्तमान निर्यात संरचना में इसे स्थायी तथ्य न मानें।

30

त्वरित पुनरावृत्ति

परीक्षा के लिए याद रखने योग्य क्रम

⚡ त्वरित याद

रबी—गेहूँ खरीफ—धान जायद—तरबूज कपास—सफेद सोना जूट—सुनहरा रेशा काली मिर्च—काला सोना असम—चाय कर्नाटक—कॉफी

⚡ अंतिम पुनरावृत्ति

रबी — गेहूँ, जौ, चना, मटर, सरसों, मसूर, राई, आलू; बुआई अक्टूबर-नवंबर और कटाई मार्च-अप्रैल।

खरीफ — चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का, तिल, मूंगफली, उड़द, कपास, रागी, सोयाबीन; बुआई जून-जुलाई और कटाई अक्टूबर-नवंबर।

जायद — तरबूज, खरबूजा, ककड़ी, खीरा, भिंडी एवं अन्य गर्मी की सब्जियाँ।

गेहूँ — कल्याण सोना और सोनालिका; करनाल बंट रोग — टिलेटिया इंडिका।

धान — उच्च ताप, पर्याप्त जल; नील-हरित शैवाल जैव उर्वरक; कृष्णा-गोदावरी डेल्टा प्रमुख धान क्षेत्र।

मक्का — मुख्यतः खरीफ लेकिन अलग मौसमों में खेती संभव; शक्तिमान-1 और शक्तिमान-2 गुणवत्ता-प्रोटीन मक्का संकर।

दलहन — राइजोबियम द्वारा नाइट्रोजन स्थिरीकरण; चना — उकठा रोग।

मूंगफली — पेगिंग महत्वपूर्ण प्रक्रिया।

कपास — सफेद सोना; महाराष्ट्र बहुत बड़ा कपास क्षेत्र वाला राज्य।

गन्ना — उत्तर प्रदेश प्रमुख; लाल सड़न महत्वपूर्ण रोग।

नॉर्मन बोरलॉग — विश्व हरित क्रांति; एम. एस. स्वामीनाथन — भारतीय हरित क्रांति।

हरित क्रांति का सबसे अधिक प्रारंभिक लाभ गेहूँ उत्पादन को मिला।

असम — प्रमुख चाय उत्पादक राज्य; चाय बोर्ड मुख्यालय — कोलकाता।

कर्नाटक — भारत का सबसे बड़ा कॉफी उत्पादक राज्य।

केरल — मसालों के लिए प्रसिद्ध; काली मिर्च — काला सोना; लौंग — पुष्पकली; अदरक — प्रकंद।

जम्मू-कश्मीर — भारत का प्रमुख वाणिज्यिक केसर उत्पादन क्षेत्र।

पश्चिम बंगाल — जूट का प्रमुख राज्य; जूट — सुनहरा रेशा।

मूगा रेशम — असम की विशिष्ट रेशम परंपरा; कर्नाटक — प्रमुख रेशम उत्पादक राज्य।

झूम — कर्तन एवं दहन कृषि; गहन कृषि — कम भूमि से अधिक उत्पादन।

एक्वापोनिक्स — पौध उत्पादन और मछली पालन की संयुक्त प्रणाली।

राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड — स्थापना 1984; मुख्यालय गुरुग्राम।

Scroll to Top