\n\n\n\n\n
VidyaGlobe
पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन
ANIMAL HUSBANDRY & DAIRY DEVELOPMENT

पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन

पशुधन, प्रमुख नस्लें, दुग्ध उत्पादन, श्वेत क्रांति, कुक्कुट पालन एवं अनुसंधान संस्थान

भारत में पशुपालन

पशुपालन भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग है। गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और कुक्कुट जैसे पशु ग्रामीण परिवारों को दूध, मांस, अंडे, ऊन, खाद तथा आय के अतिरिक्त स्रोत प्रदान करते हैं। विशेष रूप से छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए पशुधन आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण साधन है।

भारत के पशुपालन क्षेत्र में दुग्ध उत्पादन का विशेष महत्व है। श्वेत क्रांति और डेयरी सहकारी व्यवस्था के विकास के कारण भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बन चुका है।

01

पशुधन घनत्व और बिहार

Livestock Density

पशुधन घनत्व से किसी निश्चित क्षेत्रफल की तुलना में वहाँ पाए जाने वाले पशुओं की संख्या का बोध होता है। अलग-अलग स्रोतों में इसकी गणना कुल भौगोलिक क्षेत्र, कृषि क्षेत्र अथवा सकल कृषित क्षेत्र के आधार पर की जा सकती है।

परंपरागत भारतीय भूगोल और अनेक प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रति 100 हेक्टेयर सकल कृषित क्षेत्र पर मवेशियों की संख्या के आधार पर बिहार को बहुत अधिक पशुधन अथवा मवेशी घनत्व वाला राज्य बताया जाता है।

इस तथ्य को पढ़ते समय कुल पशुधन संख्या और पशुधन घनत्व में अंतर रखना आवश्यक है। किसी राज्य में कुल पशुओं की संख्या अधिक होना और प्रति इकाई भूमि पर पशुओं का घनत्व अधिक होना दो अलग बातें हैं।

🎯 परीक्षा तथ्य

प्रति 100 हेक्टेयर सकल कृषित क्षेत्र के संदर्भ में बिहार को उच्च मवेशी घनत्व वाला राज्य माना जाता है।

02

जमुनापारी बकरी

Jamunapari Goat

जमुनापारी भारत की प्रसिद्ध बकरी नस्ल है। इसका मूल क्षेत्र मुख्यतः उत्तर प्रदेश में यमुना, चंबल और उनके आसपास का क्षेत्र माना जाता है।

जमुनापारी को भारत की महत्वपूर्ण दूध एवं मांस दोनों उद्देश्यों वाली बकरी नस्ल माना जाता है। भारतीय बकरी नस्लों में यह विशेष रूप से अपनी अच्छी दुग्ध उत्पादन क्षमता के लिए प्रसिद्ध है।

सामान्य प्रतियोगी परीक्षाओं में “भारत में अधिक दूध देने वाली बकरी की नस्ल” पूछे जाने पर जमुनापारी प्रमुख उत्तर के रूप में दी जाती है।

इसके शरीर का आकार अपेक्षाकृत बड़ा, कान लंबे एवं लटकते हुए और नाक उभरी हुई होती है।

📗 याद रखें

जमुनापारी — प्रमुख दुग्धक्षम भारतीय बकरी नस्ल — उत्तर प्रदेश क्षेत्र।

03

थारपारकर गाय

Tharparkar Cattle

थारपारकर भारत की प्रसिद्ध देशी गाय नस्लों में से एक है। इसका नाम थार मरुस्थलीय क्षेत्र से जुड़ा है।

भारत में यह नस्ल मुख्य रूप से पश्चिमी राजस्थान और भारत–पाकिस्तान सीमा से लगे शुष्क क्षेत्रों से संबंधित मानी जाती है। इसका मूल प्रजनन क्षेत्र ऐतिहासिक थारपारकर क्षेत्र से संबंधित है, जिसका एक बड़ा भाग वर्तमान पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र में स्थित है।

थारपारकर को द्वि-उद्देशीय नस्ल माना जाता है। गायें दूध उत्पादन के लिए उपयोगी होती हैं, जबकि बैल कृषि कार्यों के लिए उपयोग किए जाते रहे हैं।

यह नस्ल गर्म और शुष्क जलवायु को सहन करने की क्षमता के लिए भी प्रसिद्ध है।

🎯 परीक्षा तथ्य

थारपारकर — राजस्थान के पश्चिमी/सीमावर्ती शुष्क क्षेत्र — दूध एवं कृषि कार्य दोनों के लिए उपयोगी।

04

विश्व में भारत का दुग्ध उत्पादन

India in World Milk Production

भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है। भारत ने दुग्ध उत्पादन में विश्व स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया है और वर्तमान में वैश्विक दूध उत्पादन का लगभग एक-चौथाई भाग भारत से आता है।

भारत का दुग्ध क्षेत्र गाय और भैंस दोनों पर आधारित है। देश के कुल दूध उत्पादन में भैंसों का योगदान भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त बकरी का दूध भी कुल दुग्ध उत्पादन में योगदान देता है।

वर्ष 2024–25 में भारत का कुल दूध उत्पादन लगभग 247.87 मिलियन टन रहा।

🎯 अत्यंत महत्वपूर्ण

विश्व में दूध उत्पादन — भारत प्रथम स्थान पर।

05

भारत की श्वेत क्रांति

White Revolution

भारत में दूध उत्पादन बढ़ाने और दुग्ध सहकारी व्यवस्था को मजबूत करने वाले व्यापक परिवर्तन को श्वेत क्रांति कहा जाता है।

डॉ. वर्गीज कुरियन को भारत की श्वेत क्रांति का जनक कहा जाता है। उन्होंने भारत में संगठित डेयरी सहकारिता के विस्तार में केंद्रीय भूमिका निभाई।

डॉ. कुरियन राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष थे। गुजरात के आनंद में विकसित सहकारी डेयरी व्यवस्था आगे चलकर देशव्यापी डेयरी विकास का आधार बनी।

श्वेत क्रांति ने किसानों को संगठित बाजार उपलब्ध कराने, दूध संग्रह एवं शीतकरण व्यवस्था विकसित करने और उपभोक्ताओं तक दूध पहुँचाने की प्रणाली मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

🎯 सीधा प्रश्न

भारत में श्वेत क्रांति के जनक — डॉ. वर्गीज कुरियन।

06

ऑपरेशन फ्लड

Operation Flood

ऑपरेशन फ्लड का संबंध भारत में दूध उत्पादन, संग्रह, प्रसंस्करण और वितरण की व्यवस्था के विस्तार से था।

ऑपरेशन फ्लड को 1970 में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा प्रारंभ किया गया। इसके पीछे डॉ. वर्गीज कुरियन की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण दुग्ध उत्पादकों को सहकारी संस्थाओं के माध्यम से सीधे बड़े उपभोक्ता बाजारों से जोड़ना था। इससे किसानों को दूध का बेहतर मूल्य मिलने और उपभोक्ताओं को नियमित दूध आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायता मिली।

ऑपरेशन फ्लड को विश्व के सबसे बड़े डेयरी विकास कार्यक्रमों में गिना जाता है और इसने भारत को दूध की कमी वाले देश से विश्व के सबसे बड़े दूध उत्पादक देश में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

📗 याद रखने का क्रम

डॉ. वर्गीज कुरियन राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ऑपरेशन फ्लड श्वेत क्रांति
07

मुर्गी के अंडे का कवच

Egg Shell Composition

मुर्गी के अंडे का बाहरी कठोर भाग अंड कवच कहलाता है। इसका मुख्य खनिज घटक कैल्शियम कार्बोनेट है, जिसका रासायनिक सूत्र CaCO₃ है।

अंडे के कवच में कैल्शियम कार्बोनेट के साथ थोड़ी मात्रा में अन्य खनिज और कार्बनिक पदार्थ भी पाए जाते हैं।

अंडे का कवच पूर्णतः ठोस एवं वायुरुद्ध नहीं होता। इसमें बहुत छोटे-छोटे सूक्ष्म छिद्र पाए जाते हैं, जिनके माध्यम से गैसों का सीमित आदान-प्रदान संभव होता है।

🎯 सीधा प्रश्न

मुर्गी के अंडे के कवच का प्रमुख घटक — कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO₃)।

08

लेगहॉर्न मुर्गी

Leghorn Chicken

लेगहॉर्न विश्व की सबसे प्रसिद्ध अंडा उत्पादक मुर्गी नस्लों में से एक है। विशेष रूप से व्हाइट लेगहॉर्न का उपयोग व्यावसायिक अंडा उत्पादन में व्यापक रूप से किया गया है।

यह नस्ल मूल रूप से इटली से संबंधित है और अधिक अंडे देने तथा कम शरीर भार के कारण व्यावसायिक लेयर पक्षियों के विकास में इसका विशेष महत्व रहा है।

सामान्य प्रतियोगी परीक्षाओं में इसे अत्यधिक अंडा देने वाली विदेशी मुर्गी नस्ल के रूप में याद किया जाता है।

इसे बिना किसी विशेष उत्पादन परिस्थिति या नस्लीय तुलना के “विश्व में निश्चित रूप से सबसे अधिक अंडा देने वाली नस्ल” कहना अत्यधिक निश्चित कथन होगा, क्योंकि आधुनिक व्यावसायिक संकर लेयर भी बहुत अधिक उत्पादन देती हैं।

🎯 परीक्षा तथ्य

व्हाइट लेगहॉर्न — प्रमुख अंडा उत्पादक नस्ल — मूल स्थान इटली।

09

भैंसों की प्रमुख देशी नस्लें

Important Indian Buffalo Breeds

भारत में भैंसों की अनेक महत्वपूर्ण देशी नस्लें पाई जाती हैं। इनमें मुर्रा, नीली-रावी और जाफराबादी अत्यंत प्रसिद्ध नस्लें हैं।

मुर्रा भारत की सबसे प्रसिद्ध दुग्ध भैंस नस्लों में से एक है। इसका प्रमुख क्षेत्र हरियाणा और आसपास का उत्तर-पश्चिमी भारत है। इसका रंग सामान्यतः काला तथा सींग छोटे और घुमावदार होते हैं।

नीली-रावी नस्ल का मूल क्षेत्र पंजाब का रावी नदी क्षेत्र माना जाता है। यह भी अच्छी दुग्ध क्षमता वाली भैंस नस्ल है।

जाफराबादी गुजरात की प्रसिद्ध भारी शरीर वाली भैंस नस्ल है और इसका संबंध विशेष रूप से सौराष्ट्र क्षेत्र से है।

इनके अलावा मेहसाणा, सुरती, भदावरी और नागपुरी भी भारत की महत्वपूर्ण भैंस नस्लें हैं।

मुर्रा

हरियाणा क्षेत्र
प्रमुख दुग्ध नस्ल

नीली-रावी

पंजाब क्षेत्र
दुग्ध नस्ल

जाफराबादी

गुजरात
भारी शरीर वाली नस्ल

10

स्टॉक फार्मिंग

Stock Farming

स्टॉक फार्मिंग का संबंध मुख्य रूप से पशुओं के व्यवस्थित पालन और प्रजनन से है। इसमें उपयोगी गुणों वाली पशु नस्लों को विकसित करने तथा पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने पर बल दिया जाता है।

पशु प्रजनन का उद्देश्य दूध, मांस, ऊन, अंडा, श्रम क्षमता अथवा अन्य उपयोगी गुणों में सुधार करना हो सकता है। इसके लिए चयनित प्रजनन, नस्ल सुधार और वैज्ञानिक पशुपालन जैसी विधियों का उपयोग किया जाता है।

📗 याद रखें

स्टॉक फार्मिंग — पशुपालन एवं पशुओं के प्रजनन से संबंधित।

11

केंद्रीय भेड़ प्रजनन फार्म

Central Sheep Breeding Farm

केंद्रीय भेड़ प्रजनन फार्म हरियाणा के हिसार में स्थित है। इसकी स्थापना देश में भेड़ों की नस्ल सुधार और बेहतर गुणवत्ता के प्रजनन पशु उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी।

इस फार्म की स्थापना लगभग 1968–70 के दौरान भारत सरकार और ऑस्ट्रेलिया सरकार के सहयोग से कोलंबो योजना के अंतर्गत की गई थी।

यह भेड़ प्रजनन, नस्ल सुधार, ऊन एवं मांस उत्पादन क्षमता में सुधार और किसानों को उन्नत प्रजनन पशु उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण संस्थान है।

🎯 परीक्षा तथ्य

केंद्रीय भेड़ प्रजनन फार्म — हिसार, हरियाणा।

12

केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान

Central Institute for Research on Goats

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में मखदूम, फरह में स्थित है।

इस संस्थान की स्थापना 12 जुलाई 1979 को की गई थी। इसका प्रमुख उद्देश्य बकरी पालन से संबंधित वैज्ञानिक अनुसंधान, नस्ल सुधार, पोषण, प्रजनन, स्वास्थ्य, मांस और दूध उत्पादन तथा बकरी उत्पादों से संबंधित तकनीक विकसित करना है।

संस्थान में जमुनापारी, बरबरी, जखराना और सिरोही जैसी महत्वपूर्ण भारतीय बकरी नस्लों पर अनुसंधान एवं नस्ल सुधार कार्य किए जाते हैं।

🎯 याद रखें

केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान — मखदूम, फरह, मथुरा, उत्तर प्रदेश।

13

प्रमुख पशु नस्लें — एक नज़र में

Important Livestock Breeds

पशु नस्ल प्रमुख क्षेत्र / विशेषता
गाय थारपारकर पश्चिमी राजस्थान और थार क्षेत्र; द्वि-उद्देशीय नस्ल
बकरी जमुनापारी उत्तर प्रदेश; अच्छी दुग्ध क्षमता
भैंस मुर्रा हरियाणा क्षेत्र; प्रमुख दुग्ध नस्ल
भैंस नीली-रावी पंजाब क्षेत्र; दुग्ध नस्ल
भैंस जाफराबादी गुजरात; भारी शरीर वाली नस्ल
मुर्गी व्हाइट लेगहॉर्न मूल स्थान इटली; उच्च अंडा उत्पादन
14

दुग्ध विकास — महत्वपूर्ण क्रम

Dairy Development

🧠 एक साथ याद करें

डॉ. वर्गीज कुरियन श्वेत क्रांति ऑपरेशन फ्लड दुग्ध सहकारी व्यवस्था विश्व में भारत प्रथम
15

परीक्षा में भ्रम से बचें

Important Corrections

भ्रमित करने वाला तथ्य सही एवं सुरक्षित तथ्य
बिहार में भारत की कुल पशुधन संख्या सबसे अधिक है पशुधन की कुल संख्या और प्रति इकाई कृषित भूमि पशुधन घनत्व अलग-अलग माप हैं। बिहार वाला पारंपरिक प्रश्न प्रति 100 हेक्टेयर सकल कृषित क्षेत्र के मवेशी घनत्व से संबंधित है।
जमुनापारी विश्व की सबसे अधिक दूध देने वाली बकरी है जमुनापारी भारत की प्रमुख उच्च दुग्ध क्षमता वाली देशी बकरी नस्ल है।
लेगहॉर्न विश्व में निश्चित रूप से सबसे अधिक अंडा देने वाली मुर्गी है व्हाइट लेगहॉर्न विश्व की प्रसिद्ध उच्च अंडा उत्पादक नस्लों में से एक है और व्यावसायिक लेयर उत्पादन में इसका विशेष महत्व है।
सभी भैंसों की केवल तीन देशी नस्लें हैं मुर्रा, नीली-रावी और जाफराबादी तीन प्रमुख नस्लें हैं; इनके अलावा मेहसाणा, सुरती, भदावरी, नागपुरी आदि भी महत्वपूर्ण भारतीय नस्लें हैं।
केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान केवल “मथुरा शहर” में है इसका सही स्थान मखदूम, फरह, मथुरा, उत्तर प्रदेश है।
16

त्वरित रिविजन

Quick Revision

दुग्ध उत्पादन

विश्व में भारत प्रथम

श्वेत क्रांति

डॉ. वर्गीज कुरियन

ऑपरेशन फ्लड

दूध उत्पादन एवं वितरण

जमुनापारी

प्रमुख दुग्धक्षम बकरी

थारपारकर

राजस्थान का शुष्क क्षेत्र

मुर्रा

प्रमुख दुग्ध भैंस नस्ल

व्हाइट लेगहॉर्न

उच्च अंडा उत्पादक नस्ल

अंडे का कवच

कैल्शियम कार्बोनेट

भेड़ प्रजनन फार्म

हिसार, हरियाणा

बकरी अनुसंधान संस्थान

मखदूम, मथुरा

⚡ अंतिम रिविजन बिंदु

पशुधन घनत्व को कुल पशुधन संख्या से अलग समझें; प्रति 100 हेक्टेयर सकल कृषित क्षेत्र वाला बिहार संबंधी तथ्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछा जाता है।

जमुनापारी भारत की प्रमुख उच्च दुग्ध क्षमता वाली बकरी नस्ल है और इसका प्रमुख क्षेत्र उत्तर प्रदेश है।

थारपारकर गाय पश्चिमी राजस्थान एवं थार के सीमावर्ती शुष्क क्षेत्र से संबंधित महत्वपूर्ण देशी नस्ल है।

विश्व में दूध उत्पादन में भारत प्रथम स्थान पर है।

भारत में श्वेत क्रांति के जनक — डॉ. वर्गीज कुरियन।

ऑपरेशन फ्लड — दूध उत्पादन, संग्रह, प्रसंस्करण और वितरण से संबंधित कार्यक्रम — शुरुआत 1970।

मुर्गी के अंडे के कवच का प्रमुख घटक — कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO₃)।

व्हाइट लेगहॉर्न — विश्व की प्रमुख उच्च अंडा उत्पादक मुर्गी नस्लों में से एक — मूल स्थान इटली।

मुर्रा — हरियाणा क्षेत्र की प्रसिद्ध दुग्ध भैंस नस्ल।

नीली-रावी — पंजाब क्षेत्र की प्रसिद्ध भैंस नस्ल।

जाफराबादी — गुजरात की प्रसिद्ध भैंस नस्ल।

स्टॉक फार्मिंग — पशुओं के पालन एवं प्रजनन से संबंधित।

केंद्रीय भेड़ प्रजनन फार्म — हिसार, हरियाणा।

केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान — मखदूम, फरह, मथुरा, उत्तर प्रदेश — स्थापना 1979।

जमुनापारी, बरबरी, जखराना और सिरोही जैसी बकरी नस्लों पर केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान में अनुसंधान एवं नस्ल सुधार कार्य किया जाता है।

Scroll to Top