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भारत में ऊर्जा संसाधन एवं विद्युत उत्पादन
ENERGY RESOURCES & POWER GENERATION IN INDIA

भारत में ऊर्जा संसाधन एवं विद्युत उत्पादन

कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, परमाणु, सौर, पवन, जल एवं ज्वारीय ऊर्जा

भारत के ऊर्जा संसाधन

भारत में विद्युत उत्पादन के लिए कोयला, लिग्नाइट, प्राकृतिक गैस, जलविद्युत, परमाणु ऊर्जा, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जैव ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय स्रोतों का उपयोग किया जाता है। देश की ऊर्जा संरचना में समय के साथ बड़ा परिवर्तन हुआ है और विशेष रूप से सौर तथा पवन ऊर्जा की स्थापित क्षमता तेजी से बढ़ी है।

विद्युत क्षेत्र को समझते समय स्थापित उत्पादन क्षमता और वास्तविक विद्युत उत्पादन को अलग-अलग समझना आवश्यक है। किसी स्रोत की स्थापित क्षमता अधिक होने का अर्थ यह आवश्यक नहीं है कि वास्तविक विद्युत उत्पादन में भी उसका हिस्सा उसी अनुपात में अधिक हो।

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भारत में विद्युत ऊर्जा के प्रमुख स्रोत

Installed Capacity and Generation

भारत में लंबे समय से वास्तविक विद्युत उत्पादन में तापीय ऊर्जा, विशेषकर कोयला आधारित बिजली, का सबसे बड़ा योगदान रहा है।

पुरानी प्रतियोगी-परीक्षा पुस्तकों में विद्युत उत्पादन के स्रोतों का क्रम तापीय → जलीय → पवन → परमाणु दिया मिलता है। यह पुराने समय की ऊर्जा संरचना को दर्शाता है और वर्तमान स्थापित क्षमता के लिए सही क्रम नहीं है।

वर्तमान भारत में सौर और पवन ऊर्जा की तीव्र वृद्धि के कारण नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता जलविद्युत से बहुत आगे निकल चुकी है

इसलिए परीक्षा में प्रश्न यदि विद्युत उत्पादन पूछे तो तापीय ऊर्जा की प्रधानता याद रखें, जबकि स्थापित क्षमता पूछे जाने पर नवीनतम आँकड़ों के अनुसार उत्तर देना चाहिए।

🎯 सबसे महत्वपूर्ण अंतर

वास्तविक उत्पादन में — तापीय ऊर्जा प्रमुख।
स्थापित क्षमता में — नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा अब अत्यंत बड़ा है।

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राष्ट्रीय सौर मिशन

Jawaharlal Nehru National Solar Mission

जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन भारत में सौर ऊर्जा के बड़े पैमाने पर विकास के लिए शुरू की गई प्रमुख राष्ट्रीय पहल है।

इस मिशन का औपचारिक शुभारंभ 11 जनवरी 2010 को किया गया। इसे राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना के प्रमुख मिशनों में शामिल किया गया था।

इसका उद्देश्य भारत में सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता बढ़ाना, सौर प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रोत्साहित करना और सौर ऊर्जा की लागत कम करना था।

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भारत में सौर ऊर्जा का विकास

Solar Power

भारत में सौर ऊर्जा सबसे तेजी से विकसित होने वाले ऊर्जा स्रोतों में से एक है। देश में बड़े सौर पार्कों के साथ-साथ छतों पर सौर संयंत्र, कृषि सौर पंप तथा विकेंद्रीकृत सौर प्रणालियों का तेजी से विस्तार हुआ है।

वर्ष 2026 तक भारत की सौर स्थापित क्षमता 160 गीगावाट से अधिक हो चुकी है और सौर ऊर्जा देश की ऊर्जा संरचना का प्रमुख हिस्सा बन चुकी है।

राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र सौर ऊर्जा विकास के प्रमुख राज्यों में शामिल हैं।

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पवन ऊर्जा

Wind Power

पवन ऊर्जा भारत के प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में से एक है। तमिलनाडु लंबे समय तक भारत में पवन ऊर्जा स्थापित क्षमता का अग्रणी राज्य रहा और इसकी मुप्पंडल जैसी पवन परियोजनाएँ बहुत प्रसिद्ध हैं।

लेकिन नवीनतम स्थापित क्षमता के अनुसार गुजरात तमिलनाडु से आगे निकल चुका है। इसलिए वर्तमान प्रश्न में पवन ऊर्जा स्थापित क्षमता में प्रथम राज्य के रूप में गुजरात को पढ़ना अधिक सही है।

सतारा महाराष्ट्र के प्रमुख पवन ऊर्जा क्षेत्रों में शामिल है। महाराष्ट्र के सतारा जिले में चालकेवाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पवन टर्बाइन स्थापित किए गए हैं।

⚠️ पुराना और वर्तमान तथ्य

पुराना GK — तमिलनाडु प्रथम।
वर्तमान स्थापित पवन क्षमता — गुजरात प्रथम।

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कोयला और गोंडवाना शैल तंत्र

Coal Resources

भारत के अधिकांश महत्वपूर्ण कोयला भंडार गोंडवाना शैल तंत्र में पाए जाते हैं। गोंडवाना कोयला मुख्यतः प्रायद्वीपीय भारत की नदी घाटियों में मिलता है।

दामोदर, सोन, महानदी, गोदावरी और वर्धा घाटियाँ भारत के महत्वपूर्ण गोंडवाना कोयला क्षेत्रों से संबंधित हैं।

भारत के कुल कोयला संसाधनों का अधिकांश भाग ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ में केंद्रित है।

पुरानी पुस्तकों में झारखंड को सर्वाधिक कोयला भंडार वाला राज्य लिखा मिलता है, लेकिन नवीनतम राष्ट्रीय कोयला सूची के अनुसार ओडिशा के कुल कोयला संसाधन झारखंड से अधिक हैं

🎯 वर्तमान क्रम

कोयला संसाधन — ओडिशा → झारखंड → छत्तीसगढ़।

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भारत के प्रमुख कोयला क्षेत्र

Important Coalfields

कोयला क्षेत्रराज्यविशेष तथ्य
नामचिक–नामफुक अरुणाचल प्रदेश पूर्वोत्तर भारत का प्रसिद्ध कोयला क्षेत्र
कोरबा छत्तीसगढ़ प्रमुख कोयला एवं ताप विद्युत क्षेत्र
तालचेर ओडिशा भारत के विशाल कोयला क्षेत्रों में से एक
विश्रामपुर छत्तीसगढ़ कोयला खनन के लिए प्रसिद्ध
झरिया झारखंड उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोयले के लिए प्रसिद्ध
रानीगंज पश्चिम बंगाल भारत के प्राचीनतम कोयला खनन क्षेत्रों में से एक
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कोयले का उपयोग और प्रमुख उत्पादक राज्य

Coal Production and Use

भारत में कोयले का सर्वाधिक उपयोग ताप विद्युत उत्पादन में होता है। इसके अलावा इस्पात, सीमेंट तथा अन्य उद्योगों में भी इसका बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है।

भारत के प्रमुख कोयला उत्पादक राज्यों में ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड का विशेष स्थान है। इनके साथ मध्य प्रदेश और तेलंगाना भी महत्वपूर्ण उत्पादक हैं।

कोयला भारत के विद्युत क्षेत्र का प्रमुख पारंपरिक ईंधन है और देश की बड़ी ताप विद्युत क्षमता आज भी कोयले पर आधारित है।

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लिग्नाइट एवं एंथ्रेसाइट

Types of Coal

लिग्नाइट अपेक्षाकृत निम्न श्रेणी का भूरा कोयला है। भारत में लिग्नाइट के विशाल संसाधनों का प्रमुख क्षेत्र तमिलनाडु का नेवेली है।

तमिलनाडु भारत का अत्यंत महत्वपूर्ण लिग्नाइट संसाधन और उत्पादन क्षेत्र है। गुजरात तथा राजस्थान में भी लिग्नाइट पाया जाता है।

एंथ्रेसाइट को कोयले की सर्वोत्तम प्राकृतिक श्रेणी माना जाता है। इसमें कार्बन की मात्रा बहुत अधिक, नमी कम और ऊष्मीय क्षमता अधिक होती है।

एंथ्रेसाइट में कार्बन की मात्रा सामान्यतः लगभग 86 प्रतिशत से 97 प्रतिशत तक हो सकती है। भारत में इसका सीमित भंडार मुख्यतः जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में मिलता है।

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भारत में पेट्रोलियम

Petroleum Resources

भारत में पेट्रोलियम का उत्पादन स्थलीय और अपतटीय दोनों क्षेत्रों से किया जाता है। पश्चिमी अपतटीय क्षेत्र, जिसमें मुंबई हाई प्रमुख है, लंबे समय से देश के कच्चे तेल उत्पादन का महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है।

स्थलीय राज्यों में गुजरात भारत के महत्वपूर्ण पेट्रोलियम उत्पादक राज्यों में है। राजस्थान और असम भी महत्वपूर्ण कच्चा तेल उत्पादक राज्य हैं।

इसलिए केवल “भारत का सर्वाधिक पेट्रोलियम उत्पादक राज्य गुजरात” कहते समय ध्यान रखें कि राष्ट्रीय उत्पादन में अपतटीय तेल क्षेत्रों का भी बड़ा योगदान है।

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भारत में तेल की खोज का प्रारंभ

Beginning of Petroleum Exploration

भारत में पेट्रोलियम खोज का इतिहास असम से जुड़ा है। उन्नीसवीं शताब्दी में ऊपरी असम के माकुम क्षेत्र में तेल के प्रारंभिक प्रमाण और तेल कुओं से संबंधित गतिविधियाँ शुरू हुईं।

इसके बाद डिगबोई असम का प्रमुख तेल उत्पादन केंद्र बन गया और भारत के पेट्रोलियम उद्योग के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया।

भारत की सबसे पुरानी चालू तेल शोधन इकाइयों में डिगबोई रिफाइनरी का विशेष स्थान है। इसका वाणिज्यिक इतिहास बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ से जुड़ा है।

🎯 याद रखें

प्रारंभिक तेल खोज — असम का माकुम क्षेत्र।
ऐतिहासिक तेल क्षेत्र एवं रिफाइनरी — डिगबोई, असम।

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भारत में तेल एवं गैस की खोज

Oil and Gas Exploration

ऑयल इंडिया लिमिटेड भारत की प्रमुख सरकारी तेल एवं गैस अन्वेषण तथा उत्पादन कंपनियों में से एक है। इसका ऐतिहासिक कार्यक्षेत्र विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत से जुड़ा है।

लेकिन भारत में तेल के अन्वेषण का कार्य केवल ऑयल इंडिया लिमिटेड ही नहीं करती। ओएनजीसी भारत की सबसे बड़ी प्रमुख तेल एवं प्राकृतिक गैस अन्वेषण और उत्पादन कंपनियों में से एक है तथा कई निजी और संयुक्त कंपनियाँ भी इस क्षेत्र में कार्य करती हैं।

⚠️ अंतर याद रखें

भारत में तेल खोज = केवल ऑयल इंडिया नहीं। ओएनजीसी की भी अत्यंत प्रमुख भूमिका है।

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प्राकृतिक गैस

Natural Gas

भारत में प्राकृतिक गैस का उत्पादन पश्चिमी अपतटीय क्षेत्र, कृष्णा–गोदावरी बेसिन, असम, गुजरात, राजस्थान तथा अन्य क्षेत्रों से होता है।

मुंबई हाई और पश्चिमी अपतटीय क्षेत्र प्राकृतिक गैस उत्पादन के ऐतिहासिक महत्वपूर्ण क्षेत्रों में रहे हैं। लेकिन वर्तमान उत्पादन को केवल मुंबई हाई से जोड़ना उचित नहीं है।

कृष्णा–गोदावरी बेसिन भारत के प्रमुख हाइड्रोकार्बन बेसिनों में से एक है। इसके केजी–डी6 ब्लॉक में प्राकृतिक गैस के महत्वपूर्ण भंडार खोजे गए और यहाँ से बड़े पैमाने पर गैस उत्पादन हुआ है।

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एचबीजे गैस पाइपलाइन

Hazira–Vijaipur–Jagdishpur Pipeline

एचवीजे पाइपलाइन का पूरा नाम हजीरा–विजयपुर–जगदीशपुर गैस पाइपलाइन है। यह भारत की ऐतिहासिक प्रमुख प्राकृतिक गैस पाइपलाइनों में से एक है।

इस पाइपलाइन का प्रारंभ गुजरात के हजीरा क्षेत्र से होता है और यह मध्य भारत से होते हुए उत्तर भारत तक प्राकृतिक गैस पहुँचाती है।

इसे “दक्षिणी बेसिन से प्राकृतिक गैस लाने वाली पाइपलाइन” कहना सही नहीं है। इसका मूल संबंध पश्चिमी तट और हजीरा से गैस को उत्तर एवं मध्य भारत तक पहुँचाने से है।

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भारत का तेल संकट

Oil Crisis

1970 के दशक में विश्व अर्थव्यवस्था को गंभीर तेल संकटों का सामना करना पड़ा और भारत भी उनसे प्रभावित हुआ।

विशेष रूप से 1973 का प्रथम वैश्विक तेल संकट अरब–इजराइल युद्ध और तेल निर्यातक देशों की नीतियों से जुड़ा था। इसके बाद 1979 का दूसरा बड़ा तेल संकट ईरानी क्रांति से जुड़ा था।

इसलिए भारत में “प्रथम तेल संकट 1970 से 1980 के बीच” कहने की अपेक्षा 1973 के वैश्विक तेल संकट को प्रमुख परीक्षा तथ्य के रूप में याद करना अधिक सही है।

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हाइड्रोजन ऊर्जा

Hydrogen Energy

हाइड्रोजन को भविष्य के स्वच्छ ऊर्जा वाहक के रूप में देखा जाता है। इसका उपयोग परिवहन, उद्योग, बिजली उत्पादन और ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है।

पुराने सामान्य ज्ञान में मिलने वाला “हाइड्रोजन विजन–2025 पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण से संबंधित है” कथन सही नहीं है। हाइड्रोजन संबंधी राष्ट्रीय योजनाओं का उद्देश्य हाइड्रोजन को वैकल्पिक एवं स्वच्छ ईंधन/ऊर्जा वाहक के रूप में विकसित करना रहा है।

भारत ने आगे चलकर राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन भी प्रारंभ किया, जिसका उद्देश्य हरित हाइड्रोजन उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देना है।

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जलविद्युत ऊर्जा

Hydro Power

जलविद्युत में बहते या गिरते जल की स्थितिज और गतिज ऊर्जा को टरबाइन की सहायता से विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है।

विश्व विद्युत उत्पादन में जलविद्युत नवीकरणीय ऊर्जा का अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत है, लेकिन वर्तमान समय में इसे विश्व के कुल ऊर्जा उत्पादन का एक-चौथाई कहना सही नहीं है।

वैश्विक बिजली उत्पादन में जलविद्युत का हिस्सा समय और वर्ष के अनुसार बदलता है और यह कुल विश्व ऊर्जा का एक-चौथाई नहीं है।

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राणा प्रताप सागर जलविद्युत केंद्र

Rana Pratap Sagar

राणा प्रताप सागर बाँध राजस्थान में चंबल नदी पर स्थित है और चंबल घाटी परियोजना का महत्वपूर्ण भाग है।

इस बाँध से जुड़ा जलविद्युत गृह रावतभाटा क्षेत्र में स्थित है। रावतभाटा राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में कोटा के निकट स्थित महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्र है।

इसलिए इसे सरल रूप से “कोटा में विद्युत गृह” कहने की अपेक्षा रावतभाटा, राजस्थान लिखना अधिक सटीक है।

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भारत में परमाणु ऊर्जा

Nuclear Energy

भारत में परमाणु विद्युत उत्पादन के लिए यूरेनियम आधारित रिएक्टरों का उपयोग किया जाता है और दीर्घकालिक परमाणु कार्यक्रम में देश के विशाल थोरियम संसाधनों के उपयोग की योजना बनाई गई है।

भारत में थोरियम प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, विशेष रूप से दक्षिण और पूर्वी तट की मोनाजाइट बालू में। भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के तीसरे चरण में थोरियम से प्राप्त यूरेनियम–233 के उपयोग की कल्पना की गई है।

थोरियम स्वयं सामान्य रूप से सीधे विखंडनीय ईंधन नहीं है; इसे उपयुक्त परमाणु प्रक्रिया के माध्यम से यूरेनियम–233 में परिवर्तित किया जाता है।

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काकरापार परमाणु विद्युत स्टेशन

Kakrapar Atomic Power Station

काकरापार परमाणु विद्युत स्टेशन गुजरात में स्थित है। यह गुजरात के तापी जिले के काकरापार क्षेत्र में स्थापित महत्वपूर्ण परमाणु ऊर्जा केंद्र है।

यहाँ पुराने 220 मेगावाट इकाइयों के साथ भारत द्वारा विकसित 700 मेगावाट क्षमता वाले स्वदेशी दाबित भारी जल रिएक्टर भी स्थापित किए गए हैं।

काकरापार की तीसरी और चौथी इकाइयाँ भारत के स्वदेशी 700 मेगावाट परमाणु रिएक्टर कार्यक्रम के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

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कुडनकुलम परमाणु विद्युत स्टेशन

Kudankulam Nuclear Power Station

कुडनकुलम परमाणु विद्युत स्टेशन तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित है।

यह भारत और रूस के परमाणु ऊर्जा सहयोग से विकसित महत्वपूर्ण परियोजना है। यहाँ वीवीईआर प्रकार के रिएक्टर स्थापित किए गए हैं।

कुडनकुलम की पहली दो परिचालित इकाइयों की क्षमता प्रत्येक 1000 मेगावाट है तथा अतिरिक्त इकाइयों का विकास भी किया जा रहा है।

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रावतभाटा परमाणु ऊर्जा केंद्र

Rajasthan Atomic Power Station

राजस्थान परमाणु विद्युत स्टेशन रावतभाटा, राजस्थान में स्थित है। यह भारत के सबसे पुराने और महत्वपूर्ण परमाणु ऊर्जा केंद्रों में से एक है।

रावतभाटा में समय-समय पर नई परमाणु इकाइयाँ स्थापित की गई हैं। इसलिए पुरानी पुस्तकों में मिलने वाला “भारत का 25वाँ परमाणु विद्युत संयंत्र रावतभाटा में है” कथन स्थायी तथ्य नहीं है, क्योंकि देश में चालू और निर्माणाधीन परमाणु इकाइयों की संख्या समय के साथ बदलती रहती है।

परीक्षा के लिए अधिक सुरक्षित तथ्य है — राजस्थान परमाणु विद्युत स्टेशन = रावतभाटा, राजस्थान

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परमाणु ऊर्जा का हिस्सा

Share of Nuclear Power

पुराने आँकड़ों में भारत की कुल विद्युत क्षमता अथवा उत्पादन में परमाणु ऊर्जा का हिस्सा लगभग 2 प्रतिशत बताया जाता रहा है।

लेकिन 2.01 प्रतिशत को स्थायी तथ्य की तरह याद नहीं करना चाहिए, क्योंकि कुल स्थापित क्षमता तथा विद्युत उत्पादन लगातार बदलते रहते हैं।

वर्तमान में परमाणु ऊर्जा भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा है, लेकिन यह स्थिर आधारभूत विद्युत आपूर्ति और कम कार्बन ऊर्जा स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण है।

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ज्वारीय ऊर्जा

Tidal Energy

समुद्र में ज्वार और भाटा के कारण जल स्तर में होने वाले नियमित परिवर्तन से प्राप्त ऊर्जा को ज्वारीय ऊर्जा कहा जाता है।

भारत में ज्वारीय ऊर्जा की संभावनाओं वाले प्रमुख क्षेत्रों में गुजरात की खंभात की खाड़ी और कच्छ की खाड़ी तथा पश्चिम बंगाल का सुंदरबन क्षेत्र शामिल हैं।

खंभात की खाड़ी में ऊँचे ज्वार-भाटा अंतर के कारण ज्वारीय ऊर्जा की बड़ी तकनीकी संभावना मानी जाती है। भावनगर क्षेत्र इसी खंभात की खाड़ी के तट पर स्थित है।

🎯 याद रखें

ज्वारीय ऊर्जा — खंभात की खाड़ी एवं कच्छ की खाड़ी, गुजरात।

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भारत–भूटान जलविद्युत सहयोग

Hydropower Cooperation

भारत और भूटान के बीच जलविद्युत ऊर्जा क्षेत्र में लंबे समय से महत्वपूर्ण सहयोग है। भारत ने भूटान की कई बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण और विकास में सहायता की है।

चुखा, ताला और मांगदेछू भारत के सहयोग से भूटान में विकसित प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएँ हैं।

सांकोश भी भारत–भूटान के बीच प्रस्तावित/विचारित बड़ी बहुउद्देशीय जलविद्युत परियोजनाओं से संबंधित नाम है। इसे चुखा और ताला की तरह लंबे समय से चालू स्थापित परियोजना समझना उचित नहीं है।

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ओबरा ताप विद्युत केंद्र

Obra Thermal Power Station

ओबरा ताप विद्युत केंद्र उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में स्थित महत्वपूर्ण ताप विद्युत परियोजना है।

ओबरा परियोजना के प्रारंभिक विकास में तत्कालीन सोवियत संघ की तकनीकी सहायता महत्वपूर्ण रही थी। इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं में इसे रूस/सोवियत सहयोग से संबंधित परियोजना के रूप में पूछा जाता है।

सोनभद्र क्षेत्र को बड़ी संख्या में ताप एवं जलविद्युत परियोजनाओं के कारण भारत की महत्वपूर्ण ऊर्जा पट्टियों में गिना जाता है।

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सौर तापीय विद्युत परियोजनाएँ

Solar Thermal Power

राजस्थान के जैसलमेर, जोधपुर तथा पश्चिमी मरुस्थलीय क्षेत्र में उच्च सौर विकिरण के कारण सौर ऊर्जा की व्यापक संभावनाएँ हैं।

पुरानी पुस्तकों में जैसलमेर में देश का प्रथम सौर तापीय विद्युत स्टेशन स्थापित किया जा रहा है जैसे कथन मिलते हैं। यह अब वर्तमान तथ्य नहीं है, क्योंकि भारत में अनेक सौर तापीय और फोटोवोल्टिक परियोजनाएँ विकसित हो चुकी हैं।

वर्तमान परीक्षा में जैसलमेर और पश्चिमी राजस्थान को भारत के प्रमुख सौर ऊर्जा संभाव्यता क्षेत्रों के रूप में पढ़ना अधिक सुरक्षित है।

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रामपुर और ग्रामीण सौर ऊर्जा

Village Solar Electrification

भारत में ग्रामीण विद्युतीकरण के शुरुआती चरणों में विभिन्न राज्यों के गाँवों में सौर ऊर्जा आधारित प्रणालियाँ स्थापित की गईं।

पुराने सामान्य ज्ञान में उत्तर प्रदेश के रामपुर को “भारत में सौर ऊर्जा प्लांट लगाने वाला प्रथम गाँव” बताया जाता है, लेकिन यह दावा स्पष्ट सर्वमान्य राष्ट्रीय आधिकारिक रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित नहीं है।

भारत में अनेक अलग-अलग कार्यक्रमों के अंतर्गत अलग समय पर सौर विद्युतीकरण के प्रयोग हुए हैं। इसलिए परीक्षा में इस कथन को तभी चुनें जब प्रश्न किसी विशेष पुरानी पुस्तक या दिए गए विकल्पों पर आधारित हो।

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मैंगनीज के भंडार

Manganese Resources

मैंगनीज लौह-इस्पात उद्योग में अत्यंत महत्वपूर्ण खनिज है। इसका उपयोग फेरो-मैंगनीज और मिश्रधातुओं के निर्माण में व्यापक रूप से किया जाता है।

पुरानी सामान्य ज्ञान पुस्तकों में महाराष्ट्र को भारत में सर्वाधिक मैंगनीज निक्षेप वाला राज्य लिखा मिलता है, लेकिन भारतीय खान ब्यूरो के उपलब्ध संसाधन आँकड़ों के अनुसार ओडिशा में मैंगनीज के कुल संसाधनों का सबसे बड़ा हिस्सा पाया जाता है।

ओडिशा के बाद कर्नाटक, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र भी महत्वपूर्ण मैंगनीज संसाधन वाले राज्य हैं।

⚠️ महत्वपूर्ण सुधार

मैंगनीज संसाधन में महाराष्ट्र प्रथम नहीं; ओडिशा प्रमुख राज्य है।

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अभ्रक की प्रमुख किस्में

Types of Mica

अभ्रक एक महत्वपूर्ण अधात्विक खनिज है जो पतली, लचीली और चमकीली परतों में विभाजित हो सकता है। विद्युत तथा इलेक्ट्रॉनिक उद्योग में इसके उत्कृष्ट विद्युतरोधी गुणों के कारण इसका विशेष महत्व रहा है।

अभ्रक की प्रमुख किस्मों में मस्कोवाइट, फ्लोगोपाइट और बायोटाइट शामिल हैं।

मस्कोवाइट सामान्यतः हल्के या श्वेत रंग का होता है, फ्लोगोपाइट पीले से भूरे रंग का और बायोटाइट गहरे अथवा काले रंग का अभ्रक होता है।

इन्हें सामान्य भाषा में क्रमशः श्वेत अभ्रक, पीत अभ्रक और श्याम अभ्रक के रूप में भी समझा जा सकता है।

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ऊर्जा स्रोत — एक नज़र में

Important Energy Sources

ऊर्जा स्रोतप्रमुख क्षेत्र / तथ्य
कोयला विद्युत उत्पादन का प्रमुख पारंपरिक ईंधन
लिग्नाइट तमिलनाडु का नेवेली प्रमुख क्षेत्र
पेट्रोलियम पश्चिमी अपतटीय क्षेत्र, गुजरात, राजस्थान, असम
प्राकृतिक गैस पश्चिमी अपतटीय क्षेत्र, कृष्णा–गोदावरी बेसिन आदि
जलविद्युत हिमालय एवं प्रायद्वीपीय नदी परियोजनाएँ
सौर ऊर्जा राजस्थान, गुजरात सहित अनेक राज्य
पवन ऊर्जा गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान
परमाणु ऊर्जा काकरापार, कुडनकुलम, रावतभाटा आदि
ज्वारीय ऊर्जा खंभात और कच्छ की खाड़ी
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परीक्षा में भ्रम से बचें

Important Corrections

भ्रमित करने वाला तथ्यसही एवं सुरक्षित तथ्य
वर्तमान विद्युत स्रोत क्रम तापीय → जलीय → पवन → परमाणु है यह पुराना क्रम है। वर्तमान स्थापित क्षमता में सौर एवं अन्य नवीकरणीय स्रोत बहुत आगे बढ़ चुके हैं। वास्तविक उत्पादन में तापीय ऊर्जा अभी प्रमुख है।
पवन ऊर्जा में तमिलनाडु प्रथम है तमिलनाडु ऐतिहासिक अग्रणी था; वर्तमान स्थापित क्षमता में गुजरात प्रथम है।
भारत में सर्वाधिक कोयला भंडार झारखंड में है नवीनतम कुल कोयला संसाधनों में ओडिशा प्रथम, झारखंड द्वितीय और छत्तीसगढ़ तृतीय है।
एचवीजे पाइपलाइन दक्षिणी बेसिन से गैस लाती है एचवीजे = हजीरा–विजयपुर–जगदीशपुर; इसका मूल प्रारंभ हजीरा, गुजरात से है।
भारत में तेल खोज केवल ऑयल इंडिया करती है ऑयल इंडिया के साथ ओएनजीसी और अन्य कंपनियाँ भी तेल एवं गैस अन्वेषण करती हैं।
भारत की अधिकांश गैस केवल मुंबई हाई से आती है पश्चिमी अपतटीय क्षेत्र महत्वपूर्ण है, लेकिन केजी बेसिन सहित कई क्षेत्रों से गैस उत्पादन होता है।
परमाणु ऊर्जा का हिस्सा हमेशा 2.01 प्रतिशत है यह बदलने वाला आँकड़ा है; इसे स्थायी तथ्य न मानें।
विश्व ऊर्जा का एक-चौथाई जलविद्युत से आता है यह वर्तमान वैश्विक ऊर्जा संरचना के लिए सही नहीं है।
महाराष्ट्र में सर्वाधिक मैंगनीज निक्षेप हैं कुल मैंगनीज संसाधनों में ओडिशा प्रमुख राज्य है।
हाइड्रोजन विजन का संबंध पेट्रोलियम उत्पाद भंडारण से है हाइड्रोजन कार्यक्रम का संबंध हाइड्रोजन को वैकल्पिक स्वच्छ ऊर्जा वाहक के रूप में विकसित करने से है।
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त्वरित रिविजन

Quick Revision

काकरापार

गुजरात
परमाणु ऊर्जा

कुडनकुलम

तमिलनाडु
परमाणु ऊर्जा

रावतभाटा

राजस्थान
परमाणु ऊर्जा

कोरबा

छत्तीसगढ़
कोयला क्षेत्र

तालचेर

ओडिशा
कोयला क्षेत्र

नामचिक–नामफुक

अरुणाचल प्रदेश
कोयला क्षेत्र

नेवेली

तमिलनाडु
लिग्नाइट

डिगबोई

असम
तेल एवं रिफाइनरी

केजी–डी6

कृष्णा–गोदावरी बेसिन
प्राकृतिक गैस

खंभात की खाड़ी

गुजरात
ज्वारीय ऊर्जा

सतारा

महाराष्ट्र
पवन ऊर्जा

ओबरा

उत्तर प्रदेश
ताप विद्युत

⚡ अंतिम रिविजन बिंदु

भारत के वास्तविक विद्युत उत्पादन में तापीय ऊर्जा का प्रमुख योगदान है; स्थापित क्षमता के क्रम को पुराने GK क्रम से न मिलाएँ।

जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन — 11 जनवरी 2010।

काकरापार परमाणु विद्युत स्टेशन — गुजरात।

कुडनकुलम परमाणु विद्युत स्टेशन — तमिलनाडु।

राजस्थान परमाणु विद्युत स्टेशन — रावतभाटा, राजस्थान।

भारत में थोरियम के बड़े संसाधन उपलब्ध हैं और यह भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के तीसरे चरण के लिए महत्वपूर्ण है।

गोंडवाना शैल तंत्र — भारत के प्रमुख कोयला भंडार।

वर्तमान कुल कोयला संसाधन — ओडिशा प्रथम, झारखंड द्वितीय, छत्तीसगढ़ तृतीय।

नामचिक–नामफुक — अरुणाचल प्रदेश।

कोरबा — छत्तीसगढ़।

तालचेर — ओडिशा।

विश्रामपुर — छत्तीसगढ़; कोयला खनन के लिए प्रसिद्ध।

नेवेली — तमिलनाडु का प्रमुख लिग्नाइट क्षेत्र।

कोयले का सर्वाधिक उपयोग — ताप विद्युत उत्पादन में।

एंथ्रेसाइट — कोयले की सर्वोत्तम प्राकृतिक श्रेणी; कार्बन मात्रा बहुत अधिक।

1973 — पहला बड़ा वैश्विक तेल संकट।

माकुम और डिगबोई — भारत के प्रारंभिक पेट्रोलियम इतिहास से संबंधित असम के महत्वपूर्ण क्षेत्र।

डिगबोई — भारत की सबसे पुरानी तेल शोधन इकाइयों में से एक।

ऑयल इंडिया तथा ओएनजीसी — भारत की प्रमुख तेल एवं प्राकृतिक गैस अन्वेषण कंपनियाँ।

एचवीजे — हजीरा–विजयपुर–जगदीशपुर प्राकृतिक गैस पाइपलाइन।

केजी–डी6 — कृष्णा–गोदावरी बेसिन का महत्वपूर्ण प्राकृतिक गैस क्षेत्र।

खंभात एवं कच्छ की खाड़ी — ज्वारीय ऊर्जा की प्रमुख संभावनाएँ।

चुखा, ताला और मांगदेछू — भूटान में भारत के सहयोग से विकसित प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएँ।

गुजरात — वर्तमान स्थापित पवन क्षमता में अग्रणी राज्य।

सतारा — महाराष्ट्र का प्रसिद्ध पवन ऊर्जा क्षेत्र।

ओबरा ताप विद्युत केंद्र — उत्तर प्रदेश; प्रारंभिक विकास में सोवियत सहयोग।

मैंगनीज के कुल संसाधनों में ओडिशा प्रमुख राज्य है।

अभ्रक — मस्कोवाइट/श्वेत, फ्लोगोपाइट/पीत तथा बायोटाइट/श्याम प्रमुख किस्में।

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