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ब्रह्मांड, आकाशगंगा एवं तारे

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ब्रह्मांड, आकाशगंगा एवं तारे
UNIVERSE, GALAXIES & STARS

ब्रह्मांड, आकाशगंगा एवं तारे

ब्रह्मांड की उत्पत्ति, आकाशगंगाएँ, तारों का निर्माण, जीवन-चक्र एवं प्रमुख खगोलीय पिंड

ब्रह्मांड

ब्रह्मांड में समस्त अंतरिक्ष, समय, पदार्थ और ऊर्जा सम्मिलित हैं। इसके अंतर्गत आकाशगंगाएँ, तारे, ग्रह, उपग्रह, निहारिकाएँ, धूमकेतु, क्षुद्रग्रह, उल्कापिंड, गैस, धूल, विकिरण तथा अन्य सभी ज्ञात खगोलीय संरचनाएँ आती हैं।

पृथ्वी, सूर्य और हमारा पूरा सौरमंडल भी ब्रह्मांड का अत्यंत छोटा भाग है। हमारा सौरमंडल मिल्की वे या आकाशगंगा नामक विशाल तारकीय प्रणाली में स्थित है।

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ब्रह्मांड की उत्पत्ति

आधुनिक ब्रह्मांड विज्ञान की प्रमुख अवधारणा

ब्रह्मांड की उत्पत्ति और विकास को समझाने के लिए वैज्ञानिकों ने समय-समय पर अनेक सिद्धांत प्रस्तुत किए हैं। वर्तमान ब्रह्मांड विज्ञान में बिग बैंग मॉडल सबसे व्यापक रूप से स्वीकार किया जाने वाला वैज्ञानिक मॉडल है।

इसके अनुसार ब्रह्मांड लगभग 13.8 अरब वर्ष पहले अत्यंत गर्म और अत्यधिक घनी अवस्था में था और इसके बाद ब्रह्मांड का तीव्र विस्तार प्रारंभ हुआ।

वैज्ञानिक ब्रह्मांड के अत्यंत प्रारंभिक क्षणों का अध्ययन कर सकते हैं, लेकिन वर्तमान विज्ञान यह निश्चित रूप से नहीं बताता कि उस आरंभिक अवस्था से पहले क्या था अथवा प्रारंभिक विस्तार किस कारण शुरू हुआ।

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बिग बैंग सिद्धांत

ब्रह्मांड के विस्तार का वैज्ञानिक मॉडल

बिग बैंग से संबंधित आधुनिक विचारों के विकास में बेल्जियम के वैज्ञानिक और पादरी जॉर्ज लेमैत्रे की महत्वपूर्ण भूमिका थी। 1920 के दशक में उन्होंने एक फैलते हुए ब्रह्मांड की अवधारणा प्रस्तुत की।

इसके बाद एडविन हबल के आकाशगंगाओं से संबंधित प्रेक्षणों ने दिखाया कि दूर स्थित आकाशगंगाएँ सामान्यतः हमसे दूर जा रही हैं और अधिक दूर आकाशगंगाएँ अधिक तेजी से पीछे हटती हुई दिखाई देती हैं। इन प्रेक्षणों ने फैलते हुए ब्रह्मांड की अवधारणा को मजबूत वैज्ञानिक आधार प्रदान किया।

यह कहना अधिक सही है कि हबल के प्रेक्षणों ने ब्रह्मांड के विस्तार का महत्वपूर्ण प्रमाण दिया; उन्होंने अकेले बिग बैंग सिद्धांत को “सिद्ध” नहीं किया था।

🎯 याद रखें

जॉर्ज लेमैत्रे — प्रारंभिक फैलते ब्रह्मांड की अवधारणा।
एडविन हबल — आकाशगंगाओं के दूर जाने और ब्रह्मांड के विस्तार का प्रमुख प्रेक्षणीय प्रमाण।

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बिग बैंग की प्रमुख अवस्थाएँ

गर्म एवं घने प्रारंभिक ब्रह्मांड से वर्तमान ब्रह्मांड तक

लगभग 13.8 अरब वर्ष पहले ब्रह्मांड अत्यंत गर्म और घनी अवस्था में था। लोकप्रिय पुस्तकों में इसे कभी-कभी अत्यंत सूक्ष्म “सिंगुलैरिटी” कहा जाता है, लेकिन आधुनिक विज्ञान उस प्रारंभिक अवस्था की वास्तविक प्रकृति के बारे में पूरी तरह निश्चित नहीं है।

बिग बैंग को सामान्य बम विस्फोट की तरह पहले से मौजूद खाली अंतरिक्ष में हुआ विस्फोट नहीं समझना चाहिए। इसमें स्वयं अंतरिक्ष का विस्तार हुआ।

प्रारंभिक तीव्र विस्तार के बाद ब्रह्मांड धीरे-धीरे फैलता और ठंडा होता गया। इससे उपपरमाण्विक कण और बाद में परमाणु बनने की परिस्थितियाँ विकसित हुईं।

प्रारंभिक ब्रह्मांड में मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम तथा थोड़ी मात्रा में लिथियम जैसे हल्के तत्व बने।

बाद में गुरुत्वाकर्षण के कारण गैस के विशाल बादल एकत्र हुए, जिनसे प्रथम तारे और आकाशगंगाएँ बनीं। तारों के भीतर परमाणु संलयन तथा सुपरनोवा जैसी प्रक्रियाओं से आगे चलकर भारी तत्वों का निर्माण हुआ।

⚠️ महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अंतर

बिग बैंग = अंतरिक्ष का तीव्र विस्तार। इसे सामान्य विस्फोट की तरह समझना उचित नहीं है।

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आकाशगंगा

गुरुत्वाकर्षण से बंधी विशाल तारकीय प्रणाली

आकाशगंगा तारों, तारकीय अवशेषों, ग्रह प्रणालियों, गैस, धूल और डार्क मैटर की विशाल गुरुत्वीय प्रणाली होती है।

छोटी आकाशगंगाओं में कुछ हजार अथवा लाखों तारे हो सकते हैं, जबकि बड़ी आकाशगंगाओं में अरबों से लेकर खरबों तक तारे हो सकते हैं।

ब्रह्मांड में आकाशगंगाओं की वास्तविक कुल संख्या निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है। विभिन्न दूरबीनों और गणनाओं से अरबों से लेकर बहुत अधिक संख्या का अनुमान लगाया गया है। लगभग 2 लाख करोड़ आकाशगंगाओं का अनुमान भी एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक अध्ययन में लगाया गया था, लेकिन इसे अंतिम और निश्चित संख्या नहीं माना जाता।

हमारा सौरमंडल मिल्की वे नामक विशाल आकाशगंगा में स्थित है।

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आकाशगंगाओं के प्रमुख प्रकार

आकार के आधार पर वर्गीकरण

प्रकार मुख्य विशेषता उदाहरण
सर्पिल आकाशगंगा चक्राकार डिस्क तथा घुमावदार भुजाएँ मिल्की वे, एंड्रोमेडा
दीर्घवृत्तीय आकाशगंगा गोल अथवा अंडाकार; सामान्यतः गैस और धूल कम विशाल दीर्घवृत्तीय आकाशगंगाएँ
लेंटिकुलर आकाशगंगा डिस्क और केंद्रीय उभार होते हैं, लेकिन स्पष्ट सर्पिल भुजाएँ नहीं सर्पिल और दीर्घवृत्तीय के बीच का रूप
अनियमित आकाशगंगा कोई सुव्यवस्थित निश्चित आकार नहीं बड़े और छोटे मैगेलैनिक बादल

एडविन हबल ने आकाशगंगाओं के आकार के आधार पर प्रसिद्ध वर्गीकरण विकसित किया। उसके मूल वर्गीकरण में दीर्घवृत्तीय, सर्पिल और बार्ड सर्पिल जैसी संरचनाओं को विशेष स्थान मिला।

द्वारकाय आकाशगंगा कोई अलग मूल हबल आकृति नहीं है। “द्वारकाय” मुख्यतः आकाशगंगा के छोटे आकार और कम तारकीय द्रव्यमान को दर्शाता है। कोई द्वारकाय आकाशगंगा अनियमित, दीर्घवृत्तीय अथवा अन्य आकृति की हो सकती है।

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तारे

स्वयं प्रकाश उत्पन्न करने वाले विशाल खगोलीय पिंड

तारे अत्यंत विशाल, गर्म और मुख्यतः प्लाज्मा से बने खगोलीय पिंड होते हैं। इनमें मुख्यतः हाइड्रोजन और हीलियम पाए जाते हैं।

तारे के केंद्र में अत्यधिक ताप और दबाव के कारण परमाणु संलयन होता है। मुख्य अनुक्रम तारों में हाइड्रोजन के नाभिक मिलकर हीलियम बनाते हैं और बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकलती है।

सूर्य भी एक तारा है और पृथ्वी पर प्रकाश एवं ऊष्मा का सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक स्रोत है।

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तारे कैसे बनते हैं?

निहारिका से मुख्य अनुक्रम तारे तक

तारों की उत्पत्ति अंतरतारकीय अंतरिक्ष में स्थित गैस और धूल के विशाल बादलों से होती है। ऐसे तारकीय जन्म-क्षेत्रों को सामान्यतः निहारिका अथवा आणविक बादल कहा जाता है।

गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से बादल के किसी घने भाग का संकुचन शुरू हो सकता है। पदार्थ केंद्र की ओर गिरने लगता है और एक प्रारंभिक तारकीय पिंड बनता है।

तारे बनने की यह प्रक्रिया लाखों वर्ष तक चल सकती है और इसका समय बनने वाले तारे के द्रव्यमान तथा उसके आसपास की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

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निहारिका और प्रोटोस्टार

तारकीय जन्म की प्रारंभिक अवस्थाएँ

निहारिका अंतरिक्ष में गैस और धूल का विशाल बादल हो सकती है। तारों के निर्माण वाले क्षेत्रों में मुख्यतः हाइड्रोजन गैस तथा धूल उपस्थित रहती है।

गुरुत्वाकर्षण के कारण पदार्थ के संकुचित होने पर केंद्रीय भाग अधिक घना और गर्म होता जाता है और प्रोटोस्टार बनता है।

प्रोटोस्टार अभी पूर्ण विकसित मुख्य अनुक्रम तारा नहीं होता, क्योंकि उसके केंद्र में स्थायी हाइड्रोजन संलयन प्रारंभ नहीं हुआ होता।

जब केंद्रीय तापमान लगभग 1 करोड़ से 1.5 करोड़ केल्विन के स्तर तक पहुँचता है तो हाइड्रोजन संलयन प्रारंभ हो सकता है और नया तारा मुख्य अनुक्रम अवस्था में प्रवेश करता है।

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मुख्य अनुक्रम तारा

तारे के जीवन का सबसे लंबा स्थिर चरण

मुख्य अनुक्रम अवस्था तारे के जीवन का लंबा और अपेक्षाकृत स्थिर चरण है। इस अवस्था में तारे के केंद्र में हाइड्रोजन का संलयन होकर हीलियम बनता रहता है।

संलयन से उत्पन्न बाहरी दबाव और गुरुत्वाकर्षण के अंदर की ओर खिंचाव के बीच संतुलन के कारण तारा स्थिर बना रहता है।

हमारा सूर्य वर्तमान में मुख्य अनुक्रम अवस्था में है। सूर्य जैसे तारे का कुल मुख्य अनुक्रम जीवन लगभग 10 अरब वर्ष के आसपास होता है। सूर्य इनमें से लगभग 4.6 अरब वर्ष व्यतीत कर चुका है।

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तारों का रंग और तापमान

रंग से सतही तापमान का संबंध

तारे का रंग उसके सतही तापमान से निकटता से संबंधित है। सामान्यतः नीले और नीले-सफेद तारे अधिक गर्म तथा लाल तारे अपेक्षाकृत ठंडे होते हैं।

सबसे गर्म सामान्य तारकीय वर्णक्रमीय वर्गों में O और B श्रेणी के तारे आते हैं। इनका तापमान कई दस हजार केल्विन तक हो सकता है।

सूर्य का वर्णक्रमीय वर्ग G है और इसका प्रभावी सतही तापमान लगभग 5,500°C है।

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नीले, पीले और लाल तारे

रंग आधारित सरल पहचान

नीले तारे

अत्यधिक गर्म। रिगेल जैसे नीले-सफेद महादानव इसके प्रसिद्ध उदाहरण हैं।

पीले तारे

सूर्य G-श्रेणी का मुख्य अनुक्रम तारा है और पीला-सफेद दिखाई देता है।

लाल तारे

सतही तापमान अपेक्षाकृत कम। लाल दानव और लाल महादानव इस रंग में दिखाई दे सकते हैं।

⚠️ सिरियस B में भ्रम

सिरियस B नीले मुख्य अनुक्रम तारे का उदाहरण नहीं है। यह अत्यंत गर्म लेकिन बहुत छोटा सफेद बौना तारा है।

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लाल दानव और लाल महादानव

तारकीय जीवन की विकसित अवस्थाएँ

जब सूर्य जैसे तारे के केंद्र में हाइड्रोजन ईंधन कम होने लगता है, तो उसका आंतरिक संतुलन बदलता है और बाहरी परतें फैलने लगती हैं। इससे वह लाल दानव अवस्था में प्रवेश करता है।

अल्डेबारन लाल अथवा नारंगी दानव तारे का प्रसिद्ध उदाहरण है।

बहुत अधिक द्रव्यमान वाले तारे अपने विकास के अंतिम चरणों में अत्यंत विशाल लाल महादानव बन सकते हैं। बेटलग्यूस और अंटारेस इसके प्रसिद्ध उदाहरण हैं।

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सफेद बौने तारे

सूर्य जैसे तारों का घना तारकीय अवशेष

सूर्य जैसे कम और मध्यम द्रव्यमान वाले तारे अपने जीवन के अंतिम चरण में बाहरी परतें अंतरिक्ष में छोड़ देते हैं और उनका गर्म, घना केंद्र बच जाता है। इसे सफेद बौना कहा जाता है।

सफेद बौने का आकार पृथ्वी के आसपास हो सकता है, लेकिन उसमें सूर्य के बराबर के आसपास द्रव्यमान अत्यंत छोटे आयतन में समाहित हो सकता है।

सिरियस B प्रसिद्ध सफेद बौना तारा है। यह सिरियस A का छोटा और अत्यंत घना साथी है।

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न्यूट्रॉन तारे, पल्सर और मैग्नेटार

विशाल तारों के अत्यंत घने अवशेष

अधिक द्रव्यमान वाले कुछ तारों के सुपरनोवा विस्फोट के बाद उनका केंद्र अत्यधिक संकुचित होकर न्यूट्रॉन तारा बन सकता है।

न्यूट्रॉन तारे अत्यंत घने होते हैं। उनका व्यास सामान्यतः केवल कुछ दर्जन किलोमीटर के आसपास हो सकता है, जबकि उनका द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान के आसपास या उससे अधिक हो सकता है।

पल्सर ऐसा तेजी से घूमता न्यूट्रॉन तारा है जिसके चुंबकीय ध्रुवों से विकिरण की किरणें निकलती हैं। पृथ्वी की ओर बार-बार घूमती किरण हमें नियमित धड़कन जैसी दिखाई देती है।

मैग्नेटार अत्यंत शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र वाला विशेष प्रकार का न्यूट्रॉन तारा है।

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ब्लैक होल

अत्यंत प्रबल गुरुत्व वाला खगोलीय पिंड

ब्लैक होल स्वयं तारे की कोई सामान्य श्रेणी नहीं है, बल्कि कुछ अत्यधिक विशाल तारों के जीवन के अंत में होने वाले गुरुत्वीय पतन से बनने वाला तारकीय अवशेष हो सकता है।

ब्लैक होल का गुरुत्व इतना प्रबल होता है कि एक निश्चित सीमा, जिसे घटना क्षितिज कहा जाता है, के भीतर से प्रकाश भी बाहर नहीं निकल सकता।

सभी ब्लैक होल तारों से नहीं बनते। आकाशगंगाओं के केंद्र में पाए जाने वाले अतिविशाल ब्लैक होल लाखों से अरबों सूर्य द्रव्यमान तक के हो सकते हैं और उनकी उत्पत्ति का पूरा इतिहास अभी भी शोध का विषय है।

सैजिटेरियस A* हमारी मिल्की वे आकाशगंगा के केंद्र में स्थित अतिविशाल ब्लैक होल है।

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तारे का जीवन चक्र

द्रव्यमान के अनुसार अलग-अलग अंतिम अवस्थाएँ

किसी तारे का पूरा जीवन-चक्र उसके प्रारंभिक द्रव्यमान पर बहुत अधिक निर्भर करता है। अधिक द्रव्यमान वाले तारे सामान्यतः अपना परमाणु ईंधन तेजी से खर्च करते हैं और उनका जीवन कम होता है।

कम और मध्यम द्रव्यमान वाले तारों तथा बहुत अधिक द्रव्यमान वाले तारों के अंतिम चरण एक-दूसरे से अलग होते हैं।

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सूर्य जैसे तारे का जीवन-चक्र

कम और मध्यम द्रव्यमान वाले तारों का विकास

🧠 प्रमुख क्रम

निहारिका प्रोटोस्टार मुख्य अनुक्रम लाल दानव बाहरी परतों का निष्कासन सफेद बौना

सूर्य जैसे तारे के लाल दानव बनने के बाद उसकी बाहरी गैसीय परतें अंतरिक्ष में फैल सकती हैं और एक ग्रहीय निहारिका बना सकती हैं। केंद्र में सफेद बौना बच जाता है।

बहुत लंबे समय के बाद सफेद बौना धीरे-धीरे ठंडा होगा। सैद्धांतिक रूप से अत्यंत ठंडा हो चुका सफेद बौना काला बौना कहलाएगा।

लेकिन ब्रह्मांड अभी इतना पुराना नहीं है कि कोई सफेद बौना पूर्णतः ठंडा होकर वास्तविक काला बौना बन चुका हो। इसलिए काला बौना अभी सैद्धांतिक अवस्था है।

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विशाल तारे का जीवन-चक्र

सुपरनोवा से न्यूट्रॉन तारा अथवा ब्लैक होल

🧠 प्रमुख क्रम

निहारिका प्रोटोस्टार विशाल मुख्य अनुक्रम तारा लाल महादानव सुपरनोवा न्यूट्रॉन तारा / ब्लैक होल

अधिक द्रव्यमान वाला तारा अपने केंद्र में क्रमशः भारी तत्वों का संलयन कर सकता है। अंततः जब ऊर्जा उत्पादन तारे के गुरुत्व के विरुद्ध पर्याप्त दबाव बनाए रखने में असमर्थ हो जाता है, तो उसका केंद्र तेजी से ढह सकता है।

इसके बाद विशाल सुपरनोवा विस्फोट हो सकता है। शेष केंद्र के द्रव्यमान के अनुसार न्यूट्रॉन तारा अथवा ब्लैक होल बन सकता है।

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सूर्य

पृथ्वी का निकटतम तारा

सूर्य पृथ्वी का निकटतम तारा तथा सौरमंडल का केंद्रीय पिंड है। सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के कारण ग्रह और अन्य सौरमंडलीय पिंड इसके चारों ओर परिक्रमा करते हैं।

सूर्य G-श्रेणी का मुख्य अनुक्रम तारा है। इसे सामान्य भाषा में पीला बौना भी कहा जाता है।

सूर्य की दृश्यमान सतह का तापमान लगभग 5,500°C और केंद्र का तापमान लगभग 1.5 करोड़°C है।

सूर्य का द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का लगभग 3,33,000 गुना है।

सूर्य की आयु लगभग 4.6 अरब वर्ष है।

सूर्य का व्यास लगभग 13.9 लाख किलोमीटर है, जो पृथ्वी के व्यास का लगभग 109 गुना है।

सूर्य की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी की तुलना में लगभग 28 गुना है।

सूर्य की ऊर्जा मुख्यतः उसके केंद्र में होने वाले हाइड्रोजन संलयन से उत्पन्न होती है।

सूर्य जैसा तारा लगभग 10 अरब वर्ष तक मुख्य अनुक्रम अवस्था में रह सकता है। सूर्य अपने मुख्य अनुक्रम जीवन का लगभग आधा भाग पूरा कर चुका है।

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सिरियस

रात्रि आकाश का सबसे चमकीला तारा

सिरियस पृथ्वी से दिखाई देने वाले रात्रि आकाश का सबसे चमकीला तारा है। यह कैनिस मेजर तारामंडल में स्थित है।

सिरियस वास्तव में दो तारों की प्रणाली है—सिरियस A और सिरियस B

सिरियस A एक A-श्रेणी का नीला-सफेद मुख्य अनुक्रम तारा है। इसे सफेद बौना नहीं समझना चाहिए।

सिरियस B इसका छोटा, अत्यंत घना और बहुत गर्म सफेद बौना साथी है।

सिरियस प्रणाली पृथ्वी से लगभग 8.6 प्रकाशवर्ष दूर है।

🎯 अंतर याद रखें

सिरियस A = चमकीला मुख्य अनुक्रम तारा।
सिरियस B = सफेद बौना।

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प्रॉक्सिमा सेंटॉरी

सूर्य के बाद हमारा निकटतम तारा

प्रॉक्सिमा सेंटॉरी सूर्य के बाद हमारे सौरमंडल का निकटतम ज्ञात तारा है।

यह सेंटॉरस तारामंडल की दिशा में स्थित M-श्रेणी का लाल बौना तारा है।

यह पृथ्वी से लगभग 4.24 प्रकाशवर्ष दूर है।

प्रॉक्सिमा सेंटॉरी अल्फा सेंटॉरी तारकीय प्रणाली का दूर स्थित तीसरा सदस्य है।

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अल्फा सेंटॉरी प्रणाली

हमारी निकटतम तारकीय प्रणाली

अल्फा सेंटॉरी हमारे सौरमंडल की निकटतम तारकीय प्रणाली है। इसमें अल्फा सेंटॉरी A, अल्फा सेंटॉरी B और प्रॉक्सिमा सेंटॉरी शामिल हैं।

अल्फा सेंटॉरी A सूर्य के समान G-श्रेणी का मुख्य अनुक्रम तारा है, जबकि अल्फा सेंटॉरी B K-श्रेणी का मुख्य अनुक्रम तारा है।

अल्फा सेंटॉरी A और B लगभग 4.37 प्रकाशवर्ष दूर हैं, जबकि प्रॉक्सिमा उनसे थोड़ा निकट लगभग 4.24 प्रकाशवर्ष दूर है।

इसलिए निकटतम तारा = प्रॉक्सिमा सेंटॉरी और निकटतम तारकीय प्रणाली = अल्फा सेंटॉरी प्रणाली याद रखें।

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बेटलग्यूस

ओरियन का विशाल लाल महादानव

बेटलग्यूस ओरियन तारामंडल का प्रसिद्ध लाल महादानव तारा है।

यह अपने तारकीय जीवन के बहुत विकसित चरण में है और भविष्य में खगोलीय समयमान पर सुपरनोवा बन सकता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि विस्फोट निकट भविष्य के कुछ वर्षों में होना निश्चित है।

इसकी सतह का तापमान लगभग 3,500°C के आसपास है।

बेटलग्यूस की दूरी के मापन में कुछ अनिश्चितता है; सामान्यतः इसे पृथ्वी से लगभग सैकड़ों प्रकाशवर्ष, लगभग 600–700 प्रकाशवर्ष के आसपास माना जाता है।

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रिगेल

ओरियन का चमकीला नीला महादानव

रिगेल ओरियन तारामंडल का अत्यंत चमकीला नीला-सफेद महादानव तारा है और दृश्य चमक के आधार पर सामान्यतः ओरियन का सबसे चमकीला तारा माना जाता है।

रिगेल की सतह का तापमान लगभग 12,000°C के आसपास है।

यह पृथ्वी से लगभग 860 प्रकाशवर्ष के आसपास दूर माना जाता है।

इसे “पूरे ब्रह्मांड का सबसे चमकीला नीला तारा” कहना उचित नहीं है; यह पृथ्वी के आकाश में दिखाई देने वाले प्रसिद्ध नीले महादानवों में से एक है।

25

वेगा

लायरा का प्रमुख चमकीला तारा

वेगा लायरा तारामंडल का सबसे चमकीला तारा है और रात्रि आकाश के सबसे चमकीले तारों में शामिल है।

यह A-श्रेणी का सफेद अथवा नीला-सफेद मुख्य अनुक्रम तारा है। इसका सतही तापमान लगभग 9,600°C के आसपास है।

वेगा पृथ्वी से लगभग 25 प्रकाशवर्ष दूर है।

वेगा, डेनैब और अल्टेयर मिलकर प्रसिद्ध ग्रीष्म त्रिभुज बनाते हैं।

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पोलारिस

उत्तर दिशा का प्रसिद्ध ध्रुव तारा

पोलारिस उर्सा माइनर तारामंडल में स्थित प्रसिद्ध ध्रुव तारा है।

यह आकाश में उत्तरी खगोलीय ध्रुव के बहुत निकट दिखाई देता है, इसलिए उत्तरी गोलार्ध में दिशा निर्धारण के लिए ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है।

पोलारिस बिल्कुल स्थिर नहीं है, लेकिन पृथ्वी की धुरी की दिशा के बहुत निकट होने के कारण अन्य तारों की तुलना में लगभग स्थिर दिखाई देता है।

पोलारिस एक बहु-तारकीय प्रणाली है और इसका प्रमुख तारा पीला-सफेद महादानव तथा सेफीड परिवर्ती तारा है।

इसकी दूरी के अलग-अलग आधुनिक माप मिलते हैं; सामान्य अध्ययन में इसे लगभग चार सौ से अधिक प्रकाशवर्ष दूर माना जाता है।

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अल्डेबारन

वृषभ तारामंडल का चमकीला नारंगी दानव

अल्डेबारन वृषभ तारामंडल का सबसे चमकीला तारा है।

यह नारंगी रंग का विकसित दानव तारा है। इसका सतही तापमान लगभग 3,900°C के आसपास है।

अल्डेबारन पृथ्वी से लगभग 65 प्रकाशवर्ष दूर है।

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अंटारेस

स्कॉर्पियस का प्रसिद्ध लाल महादानव

अंटारेस स्कॉर्पियस तारामंडल का सबसे चमकीला तारा है और एक विशाल लाल महादानव है।

इसका सतही तापमान लगभग 3,500–3,600°C के आसपास है।

यह पृथ्वी से लगभग 550 प्रकाशवर्ष के आसपास दूर माना जाता है।

अंटारेस आकार में सूर्य से बहुत बड़ा है, लेकिन इसे “स्कॉर्पियस का निश्चित रूप से सबसे बड़ा तारा” कहना आवश्यक नहीं है; इसका सुरक्षित परीक्षा तथ्य है कि यह स्कॉर्पियस का सबसे चमकीला प्रमुख लाल महादानव है।

29

कैनोपस

रात्रि आकाश का दूसरा सबसे चमकीला तारा

कैनोपस सिरियस के बाद रात्रि आकाश का दूसरा सबसे चमकीला तारा है।

यह कारिना तारामंडल में स्थित अत्यधिक चमकीला विकसित तारा है। इसे सामान्यतः पीला-सफेद अथवा सफेद चमकीला दानव/महादानव श्रेणी में रखा जाता है।

इसकी सतह का तापमान लगभग 7,500°C के आसपास तथा दूरी लगभग 310 प्रकाशवर्ष है।

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डेनैब

सिग्नस का चमकीला सफेद महादानव

डेनैब सिग्नस अर्थात हंस तारामंडल का सबसे चमकीला तारा है।

यह अत्यंत चमकीला सफेद महादानव तारा है और पृथ्वी से बहुत दूर होने के बावजूद स्पष्ट दिखाई देता है।

इसका सतही तापमान लगभग 8,500°C के आसपास है। इसकी दूरी लगभग 2,600 प्रकाशवर्ष के आसपास मानी जाती है, हालांकि दूरस्थ तारों की दूरी में कुछ मापन अनिश्चितता हो सकती है।

डेनैब, वेगा और अल्टेयर मिलकर प्रसिद्ध ग्रीष्म त्रिभुज बनाते हैं।

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आर्कटुरस

बूटेस का चमकीला नारंगी दानव

आर्कटुरस बूटेस तारामंडल का सबसे चमकीला तारा और रात्रि आकाश के सबसे चमकीले तारों में से एक है।

यह नारंगी दानव तारा है। इसका सतही तापमान लगभग 4,300°C के आसपास है और यह पृथ्वी से लगभग 37 प्रकाशवर्ष दूर है।

आर्कटुरस का आकाश में प्रत्यक्ष स्थान परिवर्तन अपेक्षाकृत बड़ा है, इसलिए यह अपनी उच्च उचित गति के लिए जाना जाता है।

लेकिन इसे “ब्रह्मांड का सबसे तेजी से गति करने वाला तारा” कहना गलत है। ब्रह्मांड में इससे कहीं अधिक वेग वाले हाइपरवेलोसिटी तारे ज्ञात हैं।

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प्रमुख तारों की एक नज़र में तुलना

नाम, प्रकार और मुख्य पहचान

तारा प्रमुख प्रकार मुख्य पहचान लगभग दूरी
सूर्य G-श्रेणी मुख्य अनुक्रम पृथ्वी का निकटतम तारा लगभग 15 करोड़ किमी
सिरियस A A-श्रेणी मुख्य अनुक्रम रात्रि आकाश का सबसे चमकीला तारा 8.6 प्रकाशवर्ष
सिरियस B सफेद बौना सिरियस A का घना साथी 8.6 प्रकाशवर्ष
प्रॉक्सिमा सेंटॉरी लाल बौना सूर्य के बाद निकटतम तारा 4.24 प्रकाशवर्ष
बेटलग्यूस लाल महादानव ओरियन का प्रसिद्ध विकसित तारा लगभग 600–700 प्रकाशवर्ष
रिगेल नीला-सफेद महादानव ओरियन का अत्यंत चमकीला तारा लगभग 860 प्रकाशवर्ष
वेगा A-श्रेणी मुख्य अनुक्रम लायरा का सबसे चमकीला तारा लगभग 25 प्रकाशवर्ष
पोलारिस पीला-सफेद महादानव ध्रुव तारा लगभग 400 से अधिक प्रकाशवर्ष
अल्डेबारन नारंगी दानव वृषभ का सबसे चमकीला तारा लगभग 65 प्रकाशवर्ष
अंटारेस लाल महादानव स्कॉर्पियस का सबसे चमकीला तारा लगभग 550 प्रकाशवर्ष
कैनोपस चमकीला विकसित तारा रात्रि आकाश का दूसरा सबसे चमकीला तारा लगभग 310 प्रकाशवर्ष
डेनैब सफेद महादानव ग्रीष्म त्रिभुज का सदस्य लगभग 2,600 प्रकाशवर्ष
आर्कटुरस नारंगी दानव बूटेस का सबसे चमकीला तारा लगभग 37 प्रकाशवर्ष
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सुपरनोवा

तारे के जीवन का अत्यंत ऊर्जावान विस्फोट

सुपरनोवा अत्यंत शक्तिशाली तारकीय विस्फोट है। विशाल तारे अपने जीवन के अंतिम चरण में कोर के ढहने के बाद सुपरनोवा विस्फोट कर सकते हैं।

सुपरनोवा विस्फोट के बाद तारे के शेष केंद्र से न्यूट्रॉन तारा अथवा ब्लैक होल बन सकता है, जो प्रारंभिक तारे के द्रव्यमान तथा विस्फोट के बाद बचे द्रव्यमान पर निर्भर करता है।

सुपरनोवा ब्रह्मांड में भारी तत्वों के वितरण और नई तारकीय पीढ़ियों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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पल्सर

तेजी से घूमता न्यूट्रॉन तारा

पल्सर अत्यधिक तेजी से घूमने वाला चुंबकीय न्यूट्रॉन तारा होता है।

इसके चुंबकीय ध्रुवों के आसपास से रेडियो तरंगों सहित विद्युतचुंबकीय विकिरण की किरणें निकल सकती हैं।

यदि ये किरणें घूमते समय बार-बार पृथ्वी की दिशा से गुजरें तो हमें नियमित अंतराल पर संकेत प्राप्त होते हैं और तारा धड़कता हुआ प्रतीत होता है।

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क्वासर

अत्यंत चमकीला सक्रिय आकाशगंगीय नाभिक

क्वासर कोई तारा नहीं है। यह अत्यंत चमकीला सक्रिय आकाशगंगीय नाभिक है।

आकाशगंगा के केंद्र में स्थित अतिविशाल ब्लैक होल के आसपास भारी मात्रा में पदार्थ गिरने पर एक गर्म अभिवृद्धि चक्र बन सकता है। इस पदार्थ से अत्यधिक ऊर्जा और विकिरण निकलता है।

क्वासर इतने चमकीले हो सकते हैं कि बहुत विशाल दूरी से भी दिखाई देते हैं और कभी-कभी उनकी चमक पूरी मेजबान आकाशगंगा से अधिक प्रतीत हो सकती है।

⚠️ बहुत महत्वपूर्ण

क्वासर = तारे जैसा दिखने वाला तारा नहीं; यह अतिविशाल ब्लैक होल द्वारा संचालित सक्रिय आकाशगंगीय नाभिक है।

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परीक्षा में भ्रम से बचें

महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अंतर

भ्रमित करने वाला कथन सही तथ्य
बिग बैंग खाली अंतरिक्ष में हुआ बहुत बड़ा विस्फोट था बिग बैंग मॉडल स्वयं अंतरिक्ष के प्रारंभिक तीव्र विस्तार का वर्णन करता है।
ब्रह्मांड निश्चित रूप से एक भौतिक सिंगुलैरिटी बिंदु में था विज्ञान अत्यंत गर्म और घनी प्रारंभिक अवस्था तक ब्रह्मांड का वर्णन करता है; वास्तविक प्रारंभिक सिंगुलैरिटी की प्रकृति निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है।
एडविन हबल ने अकेले बिग बैंग सिद्ध कर दिया हबल के प्रेक्षण ब्रह्मांड के विस्तार के प्रमुख प्रमाण बने।
आकाशगंगाएँ चार प्रकार की हैं और चौथा प्रकार द्वारकाय है द्वारकाय आकार की श्रेणी है; मुख्य आकृतिक प्रकारों में सर्पिल, दीर्घवृत्तीय, लेंटिकुलर और अनियमित आदि शामिल हैं।
ब्रह्मांड में ठीक 2 लाख करोड़ आकाशगंगाएँ हैं यह एक प्रसिद्ध अनुमान है; वास्तविक कुल संख्या निश्चित नहीं है।
सिरियस B नीले तारे का उदाहरण है सिरियस B सफेद बौना है; रिगेल नीले-सफेद महादानव का अच्छा उदाहरण है।
सिरियस A सफेद बौना है सिरियस A मुख्य अनुक्रम तारा है; उसका साथी Sirius B सफेद बौना है।
ब्लैक होल तारे का एक प्रकार है तारकीय ब्लैक होल विशाल तारे के अंतिम गुरुत्वीय पतन से बनने वाला तारकीय अवशेष हो सकता है।
पल्सर और मैग्नेटार अलग सामान्य तारे हैं दोनों न्यूट्रॉन तारों की विशेष श्रेणियाँ हैं।
सभी सफेद बौने अंततः अभी काले बौने बन चुके हैं काला बौना सैद्धांतिक भविष्य की अवस्था है; ब्रह्मांड अभी इसके लिए पर्याप्त पुराना नहीं है।
आर्कटुरस ब्रह्मांड का सबसे तेज तारा है आर्कटुरस उच्च उचित गति वाला चमकीला तारा है, लेकिन ब्रह्मांड का सबसे तेज तारा नहीं है।
क्वासर अत्यंत चमकीला तारा है क्वासर अतिविशाल ब्लैक होल द्वारा संचालित सक्रिय आकाशगंगीय नाभिक है।
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त्वरित रिविजन

महत्वपूर्ण तथ्य एक साथ

⚡ ब्रह्मांड और तारे

ब्रह्मांड — लगभग 13.8 अरब वर्ष लेमैत्रे — फैलता ब्रह्मांड हबल — विस्तार का प्रेक्षण
निहारिका प्रोटोस्टार मुख्य अनुक्रम
सूर्य — निकटतम तारा प्रॉक्सिमा — सूर्य के बाद निकटतम सिरियस — रात्रि का सबसे चमकीला
कैनोपस — दूसरा सबसे चमकीला पोलारिस — ध्रुव तारा सैजिटेरियस A* — मिल्की वे का केंद्रीय ब्लैक होल

⚡ अंतिम रिविजन बिंदु

ब्रह्मांड — समस्त अंतरिक्ष, समय, पदार्थ और ऊर्जा का समुच्चय।

ब्रह्मांड की आयु — लगभग 13.8 अरब वर्ष।

बिग बैंग — अत्यंत गर्म और घनी प्रारंभिक अवस्था से ब्रह्मांड के विस्तार का वैज्ञानिक मॉडल।

जॉर्ज लेमैत्रे — फैलते ब्रह्मांड की प्रारंभिक आधुनिक अवधारणा से संबंधित।

एडविन हबल — दूरस्थ आकाशगंगाओं के पीछे हटने के प्रेक्षण और ब्रह्मांड के विस्तार से संबंधित।

बिग बैंग को सामान्य विस्फोट नहीं, स्वयं अंतरिक्ष के विस्तार के रूप में समझें।

प्रारंभिक प्रमुख तत्व — हाइड्रोजन और हीलियम।

आकाशगंगा — तारों, गैस, धूल, ग्रह प्रणालियों और डार्क मैटर की गुरुत्व से बंधी विशाल प्रणाली।

मुख्य आकाशगंगा आकृतियाँ — सर्पिल, दीर्घवृत्तीय, लेंटिकुलर और अनियमित।

द्वारकाय — मुख्यतः आकाशगंगा के आकार की श्रेणी, स्वतंत्र मूल आकृति नहीं।

मिल्की वे — हमारी आकाशगंगा।

तारे — मुख्यतः हाइड्रोजन और हीलियम से बने गर्म प्लाज्मीय पिंड, जिनमें परमाणु संलयन से ऊर्जा उत्पन्न होती है।

तारे का निर्माण — निहारिका → प्रोटोस्टार → मुख्य अनुक्रम तारा।

हाइड्रोजन संलयन लगभग एक करोड़ केल्विन या उससे अधिक केंद्रीय तापमान पर प्रारंभ हो सकता है।

सूर्य — G-श्रेणी मुख्य अनुक्रम तारा; आयु लगभग 4.6 अरब वर्ष।

सूर्य की सतह — लगभग 5,500°C; केंद्र — लगभग 1.5 करोड़°C।

सूर्य का द्रव्यमान — पृथ्वी से लगभग 3,33,000 गुना।

सूर्य का व्यास — लगभग 13.9 लाख किमी; पृथ्वी के व्यास का लगभग 109 गुना।

सूर्य जैसे तारे का अंतिम क्रम — लाल दानव → ग्रहीय निहारिका → सफेद बौना।

काला बौना — भविष्य की सैद्धांतिक अवस्था; अभी कोई वास्तविक काला बौना बनने जितना ब्रह्मांड पुराना नहीं है।

विशाल तारा — लाल महादानव → सुपरनोवा → न्यूट्रॉन तारा अथवा ब्लैक होल।

सिरियस — रात्रि आकाश का सबसे चमकीला तारा; कैनिस मेजर; दूरी लगभग 8.6 प्रकाशवर्ष।

सिरियस A — मुख्य अनुक्रम तारा; सिरियस B — सफेद बौना।

प्रॉक्सिमा सेंटॉरी — सूर्य के बाद निकटतम तारा; लगभग 4.24 प्रकाशवर्ष।

अल्फा सेंटॉरी — निकटतम तारकीय प्रणाली; A, B और प्रॉक्सिमा सेंटॉरी इसके सदस्य हैं।

बेटलग्यूस — ओरियन का प्रसिद्ध लाल महादानव।

रिगेल — ओरियन का अत्यंत चमकीला नीला-सफेद महादानव।

वेगा — लायरा का सबसे चमकीला तारा; ग्रीष्म त्रिभुज का सदस्य।

पोलारिस — उर्सा माइनर का ध्रुव तारा।

अल्डेबारन — वृषभ का सबसे चमकीला नारंगी दानव।

अंटारेस — स्कॉर्पियस का सबसे चमकीला लाल महादानव।

कैनोपस — सिरियस के बाद रात्रि आकाश का दूसरा सबसे चमकीला तारा।

डेनैब — सिग्नस का चमकीला सफेद महादानव; ग्रीष्म त्रिभुज का सदस्य।

आर्कटुरस — बूटेस का चमकीला नारंगी दानव; उच्च उचित गति वाला तारा, लेकिन ब्रह्मांड का सबसे तेज तारा नहीं।

पल्सर — तेजी से घूमने वाला न्यूट्रॉन तारा।

मैग्नेटार — अत्यंत शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र वाला न्यूट्रॉन तारा।

सैजिटेरियस A* — मिल्की वे के केंद्र का अतिविशाल ब्लैक होल।

क्वासर — अतिविशाल ब्लैक होल के आसपास पदार्थ के तीव्र अभिवृद्धि से संचालित अत्यंत चमकीला सक्रिय आकाशगंगीय नाभिक; यह तारा नहीं है।

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