मैदान
निर्माण, प्रमुख प्रकार और विश्व के महत्वपूर्ण मैदान
मैदान क्या है?
मैदान पृथ्वी की सतह का विस्तृत समतल या अपेक्षाकृत समतल तथा कम ढाल वाला भूभाग होता है। मैदान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता उसकी कम ऊबड़-खाबड़ सतह है, न कि केवल समुद्र तल से कम ऊँचाई। कुछ मैदान अपेक्षाकृत अधिक ऊँचाई पर भी पाए जा सकते हैं।
मैदानों का निर्माण मुख्यतः नदियों के निक्षेप, पवन द्वारा निक्षेपण, हिमनदों, झीलों और समुद्रों द्वारा निक्षेपण, चट्टानों के दीर्घकालीन अपरदन तथा भू-पर्पटी के उत्थान या अवतलन जैसी प्रक्रियाओं से होता है।
नदियों द्वारा बनाए गए जलोढ़ मैदानों में सामान्यतः उपजाऊ मिट्टी पाई जाती है। समतल स्थल, जल की उपलब्धता, कृषि, परिवहन और नगरों के विकास की सुविधा के कारण विश्व की बड़ी जनसंख्या मैदानों में निवास करती है। हालांकि यह आवश्यक नहीं कि प्रत्येक मैदान की मिट्टी अत्यंत उपजाऊ ही हो।
मैदानों के निर्माण के मुख्य आधार
मैदानों का निर्माण एक ही प्रक्रिया से नहीं होता। अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में इनकी उत्पत्ति भूगर्भीय संरचना, अपरदन और निक्षेपण के कारण होती है।
इसी आधार पर मैदानों को सामान्यतः तीन बड़े वर्गों—संरचनात्मक मैदान, अपरदनात्मक मैदान और निक्षेपात्मक मैदान—में समझना आसान होता है।
संरचनात्मक मैदान
जब पृथ्वी की पर्पटी के बड़े भूभागों में उत्थान, अवतलन या अन्य भूगर्भीय संरचनात्मक परिवर्तन के बाद विस्तृत और अपेक्षाकृत समतल स्थल का निर्माण होता है, तो ऐसे मैदानों को संरचनात्मक मैदान कहा जाता है।
कई संरचनात्मक मैदान विशाल अवसादी बेसिनों में विकसित होते हैं। इनमें लंबे समय तक अवसाद जमा होते रहते हैं और सतह धीरे-धीरे विस्तृत समतल भूभाग का रूप ले लेती है।
हंगरी का विशाल मैदान पैनोनियन बेसिन से संबंधित है और इसके निर्माण में भू-पर्पटी का अवतलन तथा बाद में हुआ व्यापक अवसादी निक्षेप महत्वपूर्ण रहा है। इसलिए पुराने शब्द “रचनात्मक मैदान” के स्थान पर इसे संरचनात्मक एवं निक्षेपात्मक विशेषताओं वाला मैदान समझना अधिक स्पष्ट है।
अपरदनात्मक मैदान
लंबे समय तक नदियों, वर्षा, पवन, हिमनद अथवा अन्य बाह्य शक्तियों द्वारा ऊँचे और असमतल भूभाग के कटते-घिसते रहने पर वह धीरे-धीरे कम ऊँचाई और कम उच्चावच वाला क्षेत्र बन सकता है। इससे बनने वाले मैदानों को अपरदनात्मक मैदान कहा जाता है।
दीर्घकालीन नदी-अपरदन से अत्यंत कम उच्चावच वाली लगभग समतल सतह को परंपरागत भू-आकृति विज्ञान में समप्राय मैदान कहा जाता है।
इसलिए समप्राय मैदान किसी भी सामान्य समतल क्षेत्र का नाम नहीं, बल्कि लंबे समय तक चले अपरदन से लगभग समतल हुई सतह के लिए प्रयुक्त विशेष भू-आकृतिक शब्द है।
निक्षेपात्मक मैदान
जब नदियाँ, हिमनद, पवन, झील अथवा समुद्री प्रक्रियाएँ अपने साथ लाए गए अवसाद को किसी क्षेत्र में जमा करती रहती हैं, तो लंबे समय में विस्तृत समतल भूभाग बन सकता है। इसे निक्षेपात्मक मैदान कहते हैं।
निक्षेप करने वाले कारक के आधार पर इनमें जलोढ़ मैदान, लोयस मैदान, हिमानी मैदान, झीलकृत मैदान और समुद्री मैदान जैसे विभिन्न प्रकार बन सकते हैं।
संयुक्त राज्य अमेरिका का ग्रेट प्लेन्स
ग्रेट प्लेन्स उत्तरी अमेरिका का एक विशाल मैदान है, जिसका बड़ा भाग संयुक्त राज्य अमेरिका में और उत्तरी विस्तार कनाडा तक पाया जाता है। यह रॉकी पर्वत के पूर्व में फैला हुआ विस्तृत भूभाग है।
इसके भूगर्भीय विकास में लंबे समय तक हुए अवसादी निक्षेप, क्षेत्रीय उत्थान तथा बाद के अपरदन सभी की भूमिका रही है। इसलिए इसे किसी एक साधारण प्रक्रिया से बना मैदान समझना उचित नहीं है।
पुरानी सूचियों में ग्रेट प्लेन्स के साथ निर्गमन अथवा अपरदन जैसा शब्द दिया जा सकता है, लेकिन अधिक सुरक्षित रूप में इसे विशाल संरचनात्मक-अवसादी मैदान मानना चाहिए जिसकी वर्तमान स्थलाकृति पर अपरदन का भी व्यापक प्रभाव पड़ा है।
⚠️ परीक्षा-सावधानी
ग्रेट प्लेन्स = केवल अपरदन से बना मैदान लिखना अत्यधिक सरल है। इसके विकास में अवसादी निक्षेप, भूगर्भीय उत्थान और अपरदन तीनों का योगदान रहा है।
पूर्व यूगोस्लाविया का कार्स्ट मैदान
कार्स्ट स्थलाकृति मुख्यतः चूना-पत्थर, डोलोमाइट जैसी घुलनशील चट्टानों के जल द्वारा धीरे-धीरे घुलने से विकसित होती है।
“कार्स्ट” नाम यूरोप के एड्रियाटिक सागर के निकट स्थित उस ऐतिहासिक क्षेत्र से जुड़ा है जिसका भाग पूर्व यूगोस्लाविया में था और जो आज मुख्यतः स्लोवेनिया तथा उसके आसपास के क्षेत्र से संबंधित है।
कार्स्ट क्षेत्र में बड़े और समतल तली वाले बंद अवसाद बन सकते हैं, जिन्हें पोल्ये कहा जाता है। पुराने भूगोल नोट्स में इसी कारण “यूगोस्लाविया का मैदान — कार्स्ट मैदान” जैसी जोड़ी मिलती है।
🎯 याद रखें
कार्स्ट स्थलाकृति — चूना-पत्थर का विलयन — डोलाइन, गुफाएँ, भूमिगत जलमार्ग तथा पोल्ये।
फ्लोरिडा का कार्स्ट मैदान
फ्लोरिडा के बड़े क्षेत्र के नीचे चूना-पत्थर जैसी कार्बोनेट चट्टानें पाई जाती हैं। भूमिगत जल द्वारा इनके घुलने से व्यापक कार्स्ट स्थलाकृति विकसित हुई है।
यहाँ सिंकहोल, भूमिगत जलमार्ग, झरने और गुफाएँ सामान्य कार्स्ट विशेषताएँ हैं। इसलिए फ्लोरिडा को कार्स्ट मैदान/कार्स्ट क्षेत्र का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।
उत्तर-पश्चिमी चीन का लोयस मैदान
लोयस अत्यंत महीन धूल और गाद जैसा अवसाद है, जिसे मुख्यतः पवन एक स्थान से उड़ाकर दूसरे स्थान पर जमा करती है। लंबे समय तक इसकी मोटी परतें जमा होने से व्यापक लोयस भूभाग बनते हैं।
उत्तर और उत्तर-पश्चिमी चीन का लोयस क्षेत्र विश्व के सबसे प्रसिद्ध लोयस निक्षेपों में है। यहाँ पवन द्वारा लाई गई महीन धूल बहुत मोटी परतों के रूप में जमा हुई है।
इसे अक्सर “लोयस मैदान” कहा जाता है, हालांकि चीन का प्रसिद्ध क्षेत्र व्यापक रूप से लोयस पठार के नाम से जाना जाता है और बाद में जल-अपरदन ने इसे बहुत अधिक काट दिया है।
🎯 सबसे महत्वपूर्ण
लोयस = पवन द्वारा उड़ाकर जमा की गई महीन धूल और गाद।
लद्दाख और हिमानी मैदान
लद्दाख उच्च पर्वतीय एवं ठंडा मरुस्थलीय क्षेत्र है जहाँ हिमनदों और हिमनदीय नदियों ने अनेक स्थलरूपों का निर्माण किया है। यहाँ हिमानी और हिम-जल निक्षेपों से बने स्थानीय समतल भूभाग भी पाए जाते हैं।
पुरानी परीक्षा-सूचियों में “लद्दाख का मैदान — हिमानीकृत मैदान” की जोड़ी दी जाती है। इसे इस अर्थ में समझना चाहिए कि लद्दाख की कई घाटियों और मैदानों के विकास पर हिमानी तथा हिम-जल प्रक्रियाओं का महत्वपूर्ण प्रभाव है।
लेकिन पूरा लद्दाख एक हिमानी मैदान नहीं है; यह पर्वतों, घाटियों, पठारी भागों तथा हिमानी स्थलरूपों वाला विशाल और विविध क्षेत्र है।
कश्मीर का झीलकृत मैदान
कश्मीर घाटी के भूगर्भीय इतिहास में विशाल प्राचीन झीलों और उनमें हुए निक्षेपण की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्राचीन झीलों में जमा मिट्टी, गाद, बालू और अन्य अवसादों से विशेष निक्षेप बने।
कश्मीर में पाए जाने वाले प्रसिद्ध करेवा निक्षेप मुख्यतः प्राचीन झीलों से संबंधित झीलकृत निक्षेप हैं। इसलिए पुराने भूगोल नोट्स में “कश्मीर का मैदान — झीलकृत मैदान” की जोड़ी मिलती है।
हालांकि वर्तमान कश्मीर घाटी की पूरी समतल सतह केवल झील निक्षेप से नहीं बनी है। यहाँ झेलम नदी तथा उसकी सहायक नदियों के जलोढ़ निक्षेप भी महत्वपूर्ण हैं।
🎯 विशेष तथ्य
कश्मीर — करेवा निक्षेप — प्राचीन झीलों से संबंधित अवसाद।
पेरिस बेसिन
पेरिस बेसिन फ्रांस का एक विशाल अवसादी बेसिन है। इसके भीतर लंबे भूगर्भीय समय में विभिन्न प्रकार की अवसादी चट्टानों की परतें जमा हुई हैं।
पुराने भूगोल नोट्स में इसे कभी-कभी समप्राय मैदान के उदाहरण के रूप में दिया जाता है, लेकिन यह वर्गीकरण भ्रम पैदा कर सकता है।
समप्राय मैदान का अर्थ दीर्घकालीन अपरदन द्वारा लगभग समतल हुई सतह है, जबकि पेरिस बेसिन मूलतः एक संरचनात्मक-अवसादी बेसिन है। इसकी स्थलाकृति में अपरदन से बनी समतल और हल्की ढाल वाली सतहें अवश्य मिल सकती हैं, लेकिन पूरे पेरिस बेसिन को सीधे समप्राय मैदान कहना सुरक्षित नहीं है।
⚠️ भ्रम से बचें
पेरिस बेसिन = निश्चित रूप से समप्राय मैदान याद न करें। अधिक सुरक्षित तथ्य — पेरिस बेसिन फ्रांस का विशाल अवसादी एवं संरचनात्मक बेसिन है।
भारत का विशाल मैदान
भारत का विशाल उत्तरी मैदान मुख्यतः सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र तथा उनकी सहायक नदियों द्वारा लाए गए विशाल मात्रा के अवसादों के निक्षेप से बना है।
हिमालय से निकलने वाली नदियाँ लाखों वर्षों से अपने साथ मिट्टी, बालू, गाद तथा अन्य अवसाद लाकर हिमालय के दक्षिण में स्थित विशाल गर्त में जमा करती रही हैं। इससे विस्तृत जलोढ़ मैदान का निर्माण हुआ।
अत्यधिक उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, पर्याप्त जल, समतल भूमि और अनुकूल परिवहन व्यवस्था के कारण यह विश्व के सर्वाधिक घनी आबादी वाले मैदानों में से एक है।
🎯 परीक्षा तथ्य
भारत का विशाल उत्तरी मैदान — सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र द्वारा किए गए जलोढ़ निक्षेप से निर्मित।
हंगरी का मैदान
हंगरी का विशाल मैदान मध्य यूरोप के पैनोनियन बेसिन का प्रमुख भाग है। यह भू-पर्पटी के लंबे समय तक अवतलन से बने बेसिन में विकसित हुआ।
बेसिन में नदियों तथा अन्य प्रक्रियाओं द्वारा विशाल मात्रा में अवसाद जमा होते रहे, जिससे वर्तमान समतल मैदान का विकास हुआ।
पुराने नोट्स में इसे “रचनात्मक मैदान” कहा गया है। इसका आशय भूमि के निर्माणकारी निक्षेपण से लिया जा सकता है, लेकिन अधिक स्पष्ट वर्गीकरण में इसे संरचनात्मक बेसिन में विकसित निक्षेपात्मक मैदान कहना उचित है।
रूसी प्लेटफॉर्म
रूसी प्लेटफॉर्म पूर्वी यूरोपीय प्लेटफॉर्म का विशाल और बहुत पुराना स्थिर भूगर्भीय क्षेत्र है। इसी क्षेत्र का बड़ा भाग विस्तृत पूर्वी यूरोपीय मैदान के अंतर्गत आता है।
पुराने भूगोल वर्गीकरण में इसे कभी-कभी उत्थित मैदान कहा जाता है, क्योंकि भू-पर्पटी के व्यापक उत्थान से कुछ पुराने समतल क्षेत्र ऊँचे हुए हैं।
लेकिन पूरे रूसी प्लेटफॉर्म को केवल उत्थित मैदान कहना पर्याप्त नहीं है। यह विशाल स्थिर संरचनात्मक प्लेटफॉर्म है जिसके विभिन्न भागों में उत्थान, अवतलन, अपरदन और निक्षेपण की अलग-अलग प्रक्रियाएँ हुई हैं।
⚠️ परीक्षा-सावधानी
पुरानी जोड़ी “रूसी प्लेटफॉर्म — उत्थित मैदान” याद रखी जा सकती है, लेकिन इसकी वास्तविक भूगर्भीय प्रकृति अधिक व्यापक संरचनात्मक प्लेटफॉर्म की है।
कच्छ का मैदान
कच्छ गुजरात का भूगर्भीय रूप से अत्यंत जटिल क्षेत्र है। यहाँ भू-पर्पटी के उत्थान और अवतलन, भ्रंशन, समुद्री प्रक्रियाओं तथा नदी एवं समुद्री अवसादों के निक्षेप ने मिलकर वर्तमान स्थलाकृति का विकास किया है।
कच्छ के कुछ क्षेत्रों में भूगर्भीय उत्थान के स्पष्ट प्रमाण मिलते हैं। विशेष रूप से लिटिल रण का क्षेत्र पुराने समुद्री क्षेत्र के उठे हुए तल से संबंधित माना गया है।
इसी कारण पुरानी परीक्षा-सूचियों में “कच्छ का मैदान — उत्थित मैदान” की जोड़ी दी जाती है। यह पूरी तरह निराधार नहीं है, लेकिन पूरे कच्छ के निर्माण को केवल उत्थान से समझना अधूरा होगा।
कच्छ में महान रण, छोटा रण, बन्नी मैदान, द्वीप-जैसे ऊँचे भाग और तटीय क्षेत्र जैसी विविध स्थलाकृतियाँ पाई जाती हैं।
विश्व के प्रमुख मैदान और निर्माण प्रक्रिया
| मैदान/क्षेत्र | आपके मूल वर्गीकरण का सुरक्षित रूप | मुख्य निर्माण प्रक्रिया |
|---|---|---|
| ग्रेट प्लेन्स — संयुक्त राज्य अमेरिका | संरचनात्मक-अवसादी मैदान; अपरदन का भी प्रभाव | अवसादी निक्षेप + क्षेत्रीय उत्थान + अपरदन |
| पूर्व यूगोस्लाविया का क्षेत्र | कार्स्ट मैदान | चूना-पत्थर जैसी घुलनशील चट्टानों का विलयन |
| फ्लोरिडा | कार्स्ट मैदान | कार्बोनेट चट्टानों का भूमिगत जल द्वारा विलयन |
| उत्तर-पश्चिमी चीन | लोयस मैदान/लोयस क्षेत्र | पवन द्वारा महीन धूल और गाद का निक्षेप |
| लद्दाख | हिमानी एवं हिम-जल प्रभावित मैदान | हिमनद और हिमनदीय जल द्वारा अपरदन तथा निक्षेप |
| कश्मीर | झीलकृत मैदान से संबंधित क्षेत्र | प्राचीन झील निक्षेप + बाद के नदीय निक्षेप |
| पेरिस बेसिन | संरचनात्मक-अवसादी बेसिन | अवसादी परतों का निक्षेप; बाद में अपरदन |
| भारत का विशाल उत्तरी मैदान | जलोढ़ निक्षेपात्मक मैदान | सिंधु–गंगा–ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र द्वारा अवसाद जमाव |
| हंगरी का मैदान | संरचनात्मक एवं निक्षेपात्मक मैदान | बेसिन का अवतलन + अवसाद निक्षेप |
| रूसी प्लेटफॉर्म | संरचनात्मक मैदान; कुछ भाग उत्थित | प्राचीन स्थिर प्लेटफॉर्म पर व्यापक भूगर्भीय उत्थान-अवतलन |
| कच्छ | उत्थान से प्रभावित मैदान | विवर्तनिक उत्थान-अवतलन + समुद्री एवं अवसादी प्रक्रियाएँ |
महत्वपूर्ण शब्द
जलोढ़ मैदान — नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी, गाद, बालू और अन्य अवसादों के जमाव से बनने वाला मैदान।
लोयस मैदान — मुख्यतः पवन द्वारा लाई गई अत्यंत महीन धूल और गाद के निक्षेप से बनने वाला मैदान।
हिमानी मैदान — हिमनद और हिम-जल द्वारा लाए गए पदार्थों के निक्षेप अथवा हिमानी क्रिया से प्रभावित समतल भूभाग।
झीलकृत मैदान — किसी प्राचीन झील के तल में लंबे समय तक जमा अवसादों से विकसित मैदान।
कार्स्ट मैदान — चूना-पत्थर, डोलोमाइट जैसी घुलनशील चट्टानों पर जल की विलयन क्रिया से विकसित मैदान या समतल कार्स्ट भूभाग।
समप्राय मैदान — अत्यंत लंबे समय तक हुए अपरदन से लगभग समतल हो चुकी कम उच्चावच वाली सतह।
उत्थित मैदान — ऐसा पुराना समतल या निम्न भूभाग जो भू-पर्पटी की विवर्तनिक गति से ऊपर उठ गया हो।
भ्रम पैदा करने वाले प्रमुख तथ्य
भ्रम: सभी मैदान आसपास के क्षेत्रों से कम ऊँचाई पर ही होते हैं।
सही: मैदान की मुख्य पहचान कम ढाल और कम उच्चावच है; कुछ मैदान अधिक ऊँचाई पर भी हो सकते हैं।
भ्रम: सभी मैदानों की मिट्टी अत्यंत उपजाऊ होती है।
सही: विशेष रूप से नदी-निर्मित जलोढ़ मैदान बहुत उपजाऊ होते हैं, लेकिन प्रत्येक मैदान की मिट्टी समान रूप से उपजाऊ नहीं होती।
भ्रम: ग्रेट प्लेन्स केवल अपरदन से बना मैदान है।
सही: इसके विकास में अवसादी निक्षेप, भूगर्भीय उत्थान और अपरदन तीनों महत्वपूर्ण हैं।
भ्रम: पूरा लद्दाख हिमानी मैदान है।
सही: लद्दाख में हिमानी तथा हिम-जल से बने मैदान पाए जाते हैं, लेकिन पूरा क्षेत्र एक मैदान नहीं है।
भ्रम: वर्तमान कश्मीर घाटी पूरी तरह केवल प्राचीन झील के निक्षेप से बनी है।
सही: करेवा झीलकृत निक्षेप हैं, जबकि वर्तमान घाटी में नदीय जलोढ़ निक्षेप भी महत्वपूर्ण हैं।
भ्रम: पेरिस बेसिन एक निश्चित समप्राय मैदान है।
सही: यह मूलतः विशाल संरचनात्मक-अवसादी बेसिन है।
भ्रम: पूरा कच्छ केवल भू-पर्पटी के उत्थान से बना मैदान है।
सही: कच्छ के निर्माण में उत्थान, अवतलन, भ्रंशन, समुद्री तथा निक्षेपात्मक प्रक्रियाओं का संयुक्त प्रभाव है।
त्वरित पुनरावृत्ति
⚡ प्रमुख जोड़ियाँ
ग्रेट प्लेन्स — संरचनात्मक-अवसादी मैदान; अपरदन से भी प्रभावित।
पूर्व यूगोस्लाविया का क्षेत्र — कार्स्ट स्थलाकृति।
फ्लोरिडा — कार्स्ट मैदान/क्षेत्र।
उत्तर-पश्चिमी चीन — लोयस निक्षेप।
लद्दाख — हिमानी एवं हिम-जल प्रक्रियाओं से प्रभावित मैदान।
कश्मीर — प्राचीन झील निक्षेप; करेवा महत्वपूर्ण।
पेरिस बेसिन — संरचनात्मक-अवसादी बेसिन।
भारत का विशाल उत्तरी मैदान — नदी द्वारा अवसाद जमाव से बना जलोढ़ मैदान।
हंगरी का मैदान — बेसिन अवतलन और अवसादी निक्षेप।
रूसी प्लेटफॉर्म — विशाल स्थिर संरचनात्मक क्षेत्र; कुछ भाग उत्थित।
कच्छ — विवर्तनिक उत्थान-अवतलन और समुद्री-अवसादी प्रक्रियाओं से प्रभावित।
⚡ अंतिम पुनरावृत्ति बिंदु
मैदान विस्तृत समतल या अपेक्षाकृत समतल एवं कम ढाल वाला भूभाग होता है।
मैदानों के तीन मुख्य निर्माणात्मक वर्ग — संरचनात्मक, अपरदनात्मक और निक्षेपात्मक मैदान।
नदियों द्वारा अवसाद के निक्षेप से जलोढ़ मैदान बनते हैं।
पवन द्वारा महीन धूल और गाद के निक्षेप से लोयस मैदान बनते हैं।
घुलनशील चूना-पत्थर पर जल की विलयन क्रिया से कार्स्ट स्थलाकृति विकसित होती है।
दीर्घकालीन अपरदन से लगभग समतल हुई सतह समप्राय मैदान कहलाती है।
फ्लोरिडा — प्रसिद्ध कार्स्ट क्षेत्र।
उत्तर-पश्चिमी चीन — प्रसिद्ध लोयस क्षेत्र।
कश्मीर के करेवा — प्राचीन झीलों से संबंधित निक्षेप।
भारत का विशाल उत्तरी मैदान — सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र द्वारा लाए गए जलोढ़ अवसादों से निर्मित।
हंगरी का मैदान — संरचनात्मक बेसिन में अवसाद जमा होने से विकसित विशाल मैदान।
पेरिस बेसिन — इसे केवल समप्राय मैदान न समझें; यह मुख्यतः संरचनात्मक-अवसादी बेसिन है।
कच्छ — भू-पर्पटी के उत्थान-अवतलन, भ्रंशन तथा समुद्री एवं निक्षेपात्मक प्रक्रियाओं से प्रभावित क्षेत्र।