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हिमनदीय स्थलाकृतियाँ
GLACIAL LANDFORMS

हिमनदीय स्थलाकृतियाँ

हिमनदों के अपरदन, परिवहन और निक्षेपण से निर्मित प्रमुख स्थलरूप

हिमनदीय स्थलाकृतियाँ क्या हैं?

हिमनदीय स्थलाकृतियाँ वे भू-आकृतियाँ हैं जिनका निर्माण हिमनदों की गति तथा उनके द्वारा किए जाने वाले अपरदन, परिवहन और निक्षेपण से होता है।

हिमनद अपने विशाल भार के साथ धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं। इस दौरान वे चट्टानों को तोड़ते, उखाड़ते और घिसते हुए अपने साथ मलबा लेकर चलते हैं। बाद में जब हिमनद पिघलता या उसकी वहन क्षमता कम होती है, तो यह मलबा विभिन्न स्थानों पर जमा हो जाता है।

हिमनदीय अपरदन में मुख्यतः घर्षण और उत्पाटन जैसी प्रक्रियाएँ महत्वपूर्ण होती हैं। घर्षण में हिम में जमे चट्टानी टुकड़े नीचे की चट्टानों को रगड़कर चिकना तथा खरोंचयुक्त बनाते हैं, जबकि उत्पाटन में हिमनद चट्टानों के टुकड़ों को उखाड़कर अपने साथ ले जाता है।

हिमनदीय स्थलरूपों को सामान्यतः अपरदनात्मक स्थलरूप और निक्षेपणात्मक स्थलरूप दो प्रमुख वर्गों में समझा जाता है।

01

हिमनदीय अपरदन

बर्फ द्वारा चट्टानों का कटाव और घर्षण

जब हिमनद अपने भार के कारण ढाल की दिशा में धीरे-धीरे आगे बढ़ता है, तो उसके भीतर और तल पर मौजूद चट्टानों के टुकड़े भूमि तथा आधारशिला को काटते और घिसते हैं।

हिमनद द्वारा किया गया यह कार्य पर्वतीय क्षेत्रों की पुरानी नदी घाटियों को चौड़ा और गहरा कर सकता है।

इसके परिणामस्वरूप सर्क, अरैट, हॉर्न, U-आकार की घाटी, रॉश मूटोने, लटकती घाटी, कोल और फियोर्ड जैसे अनेक विशिष्ट स्थलरूप विकसित होते हैं।

02

सर्क

हिमनद के शीर्ष भाग की कटोरेनुमा गर्त

सर्क पर्वतीय हिमनद के ऊपरी या उद्गम क्षेत्र में विकसित होने वाला अर्धवृत्ताकार, कटोरे या रंगमंच जैसी आकृति वाला गहरा गर्त है।

यह हिमनद के लगातार घर्षण और चट्टानों को उखाड़ने की क्रिया के कारण धीरे-धीरे गहरा और चौड़ा होता जाता है।

सर्क के पीछे की दीवार सामान्यतः खड़ी होती है, जबकि उसका तल अपेक्षाकृत गहरा और कटोरेनुमा होता है।

हिमनद के पिघल जाने के बाद सर्क गर्त में जल भर जाने पर छोटी हिमनदीय झील बन सकती है, जिसे टार्न झील कहा जाता है।

🎯 याद रखें

सर्क → कटोरेनुमा गर्त → हिमनद का ऊपरी भाग → जल भरने पर टार्न झील।

03

अरैट

दो हिमनदीय गर्तों के बीच तीखी धार

जब किसी पर्वतीय भाग के दोनों ओर स्थित हिमनद या सर्क लगातार अपरदन करते हैं, तो उनके बीच की पर्वतीय चट्टान संकरी और तीखी धार के रूप में बच जाती है।

इस संकरी, लंबी और चाकू की धार जैसी पर्वतीय कटक को अरैट कहा जाता है।

इसलिए अरैट को “दो हिमनदों के बीच की तीखी चोटी” कहने की बजाय दो हिमनदीय घाटियों या सर्कों के बीच बनी तीखी संकरी पर्वतीय धार कहना अधिक सटीक है।

04

हॉर्न

पिरामिड जैसी तीखी पर्वतीय चोटी

जब किसी पर्वत के चारों ओर तीन या अधिक दिशाओं से सर्क या हिमनद लगातार अपरदन करते हैं, तो बीच में बचा पर्वतीय भाग अत्यंत तीखी और पिरामिड जैसी चोटी का रूप ले लेता है।

ऐसी नुकीली हिमनदीय चोटी को हॉर्न कहा जाता है।

स्विट्जरलैंड और इटली की सीमा पर स्थित प्रसिद्ध मैटरहॉर्न इसका प्रमुख उदाहरण है।

सर्क दो ओर अपरदन अरैट तीन या अधिक ओर अपरदन हॉर्न
05

U-आकार की घाटी

हिमनदीय गर्त या हिमनदीय घाटी

पर्वतीय क्षेत्रों में नदी द्वारा बनाई गई घाटी सामान्यतः V-आकार की होती है। जब बाद में इस घाटी से विशाल हिमनद गुजरता है, तो वह घाटी के तल और दोनों किनारों का तीव्र अपरदन करता है।

इससे घाटी चौड़ी और गहरी हो जाती है तथा उसकी पार्श्व दीवारें अधिक खड़ी और तल अपेक्षाकृत चौड़ा तथा समतल हो जाता है।

इस प्रकार बनी हिमनदीय घाटी को U-आकार की घाटी कहा जाता है।

🎯 नदी और हिमनद का अंतर

नदी → V-आकार की घाटी

हिमनद → U-आकार की घाटी

06

रॉश मूटोने

हिमनदीय घर्षण से बना असममित चट्टानी उभार

रॉश मूटोने हिमनद के नीचे स्थित आधारशिला पर अपरदन से बना एक असममित चट्टानी उभार होता है।

जिस दिशा से हिमनद आता है, उस ओर की चट्टानी सतह घर्षण के कारण सामान्यतः चिकनी, मंद ढाल वाली और खरोंचयुक्त बन जाती है।

इसके विपरीत जिस दिशा में हिमनद आगे बढ़ता है, उस ओर चट्टानों के उत्पाटन के कारण सतह अपेक्षाकृत खड़ी, टूटी-फूटी और ऊबड़-खाबड़ हो सकती है।

इस प्रकार यह स्थलरूप हिमनद के प्रवाह की दिशा समझने में भी उपयोगी होता है।

07

लटकती घाटी

मुख्य घाटी के ऊपर स्थित सहायक हिमनदीय घाटी

जब मुख्य हिमनद अपनी घाटी को अधिक गहराई तक काटता है, जबकि उसमें मिलने वाला छोटा सहायक हिमनद अपनी घाटी को उतना गहरा नहीं काट पाता, तो हिम पिघलने के बाद सहायक घाटी मुख्य घाटी से ऊपर स्थित दिखाई देती है।

ऐसी ऊँचाई पर समाप्त होने वाली सहायक घाटी को लटकती घाटी कहा जाता है।

लटकती घाटियों से नीचे मुख्य घाटी में गिरती नदियाँ कई स्थानों पर सुंदर जलप्रपात बनाती हैं।

08

कोल

दो हिमनदीय गर्तों के बीच पर्वतीय दर्रा

जब पर्वत के विपरीत ओर स्थित दो सर्क पीछे की ओर बढ़ते हुए लगातार अपरदन करते हैं, तो उनके बीच की पर्वतीय धार का कोई भाग नीचा हो सकता है।

इस नीची दर्रानुमा जगह को कोल कहा जाता है।

कोल एक प्रकार का पर्वतीय दर्रा है जो एक हिमनदीय घाटी या गर्त को दूसरी ओर की घाटी से जोड़ सकता है।

कोल को निक्षेपणीय स्थलरूप नहीं माना जाता; इसका संबंध मुख्यतः हिमनदीय अपरदन से है।

09

नूनाटक

हिम क्षेत्र से बाहर निकली पर्वतीय चोटी

विशाल हिमचादर या हिमक्षेत्र से चारों ओर घिरी हुई ऐसी पर्वतीय चोटी या चट्टानी ऊँचाई जो हिम के ऊपर दिखाई देती है, नूनाटक कहलाती है।

अर्थात हिमक्षेत्र के बीच जो ऊँची पर्वतीय चोटियाँ पूरी तरह बर्फ से नहीं ढकतीं और उनका ऊपरी भाग बाहर निकला रहता है, वे नूनाटक हैं।

नूनाटक हिमनद द्वारा जमा किए गए पदार्थ से नहीं बनता। यह मूल पर्वतीय भूभाग का वह ऊँचा हिस्सा है जो आसपास फैले हिम से ऊपर निकला रहता है।

📗 याद रखें

नूनाटक = हिमचादर के ऊपर निकली चट्टानी पर्वतीय चोटी।

10

फियोर्ड

समुद्र में डूबी हिमनदीय U-आकार की घाटी

पर्वतीय तटीय क्षेत्रों में हिमनद गहरी, चौड़ी और खड़ी दीवारों वाली U-आकार की घाटियाँ बनाते हैं।

जब हिमनद पीछे हट जाता है और समुद्र का जल ऐसी गहरी हिमनदीय घाटी में प्रवेश कर जाता है, तो बनने वाले लंबे, संकरे और गहरे समुद्री प्रवेश मार्ग को फियोर्ड कहा जाता है।

फियोर्ड की पार्श्व दीवारें सामान्यतः बहुत खड़ी होती हैं और इसकी गहराई काफी अधिक हो सकती है।

इस प्रकार फियोर्ड मूलतः समुद्र में डूबी हुई हिमनदीय घाटी है।

नॉर्वे फियोर्डों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इसके अतिरिक्त ग्रीनलैंड, अलास्का, कनाडा, चिली और न्यूजीलैंड में भी प्रमुख फियोर्ड पाए जाते हैं।

🎯 सबसे महत्वपूर्ण

समुद्र में डूबी U-आकार की हिमनदीय घाटी = फियोर्ड।

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हिमनदीय निक्षेपण

हिमनद द्वारा मलबे का जमाव

हिमनद अपने साथ मिट्टी, बालू, कंकड़, बजरी और बड़े-बड़े शिलाखंडों सहित विभिन्न आकार की सामग्री लेकर चलता है।

जब हिमनद पिघलता है, पीछे हटता है या उसकी मलबा ढोने की क्षमता कम हो जाती है, तो वह इस सामग्री को जमा कर देता है।

हिमनद द्वारा सीधे जमा की गई असंस्तरित और बिना छँटी सामग्री को सामान्यतः टिल कहा जाता है।

हिमनद तथा उससे निकलने वाले पिघले जल द्वारा किए गए निक्षेपण से मोरीन, ड्रमलिन, एस्कर, केम और आउटवॉश मैदान जैसे प्रमुख स्थलरूप विकसित होते हैं।

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मोरीन

हिमनद द्वारा लाए गए मलबे का जमाव

हिमनद अपने साथ विभिन्न आकार की चट्टानें, कंकड़, मिट्टी और अन्य मलबा लेकर चलता है।

हिमनद के पीछे हटने या पिघलने पर जब यह मलबा जमा होता है, तो ऐसे निक्षेप को सामान्यतः मोरीन कहा जाता है।

मोरीन में पदार्थ सामान्यतः नदी द्वारा जमा अवसादों की तरह अच्छी तरह आकार के अनुसार छँटे हुए नहीं होते।

मोरीन के प्रमुख प्रकारों में पार्श्व मोरीन, मध्य मोरीन, अंतिम मोरीन और तलीय मोरीन शामिल हैं।

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अंतिम मोरीन

हिमनद के अग्रभाग का निक्षेप

हिमनद के अग्रभाग या अंतिम सिरे के सामने मलबे का जो संचय होता है, उसे अंतिम मोरीन कहा जाता है।

यह अक्सर उस सीमा को दर्शाता है जहाँ तक हिमनद किसी समय आगे बढ़ा था।

यदि हिमनद लंबे समय तक लगभग एक ही स्थान पर स्थिर रहता है, तो उसके अग्रभाग पर बड़ी मात्रा में मलबा जमा होकर स्पष्ट मोरीन कटक बना सकता है।

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पार्श्व मोरीन

हिमनद के दोनों किनारों पर मलबे का जमाव

हिमनद जब किसी पर्वतीय घाटी से होकर बहता है, तो घाटी की दीवारों से टूटने वाली चट्टानें और मलबा हिमनद के दोनों किनारों पर एकत्रित होते रहते हैं।

हिमनद के किनारों के साथ जमा इस सामग्री को पार्श्व मोरीन कहा जाता है।

15

मध्य मोरीन

दो हिमनदों के मिलने से मध्य में बनी मलबा-पट्टी

जब दो घाटी हिमनद आपस में मिलते हैं, तो उनके मिलने वाले किनारों की पार्श्व मोरीनें एक साथ आ जाती हैं।

इससे संयुक्त हिमनद के मध्य में मलबे की लंबी पट्टी बन जाती है, जिसे मध्य मोरीन कहा जाता है।

हिमनद का किनारा पार्श्व मोरीन दो हिमनद मिलें मध्य मोरीन
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तलीय मोरीन

हिमनद के नीचे जमा मलबा

हिमनद के नीचे और उसके पीछे हटने के बाद विस्तृत क्षेत्र में फैली हुई मलबे की परत को तलीय मोरीन कहा जाता है।

यह सामान्यतः असंस्तरित तथा विभिन्न आकार के कणों से बनी होती है।

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ड्रमलिन

हिमनद की दिशा में लंबा अंडाकार टीला

ड्रमलिन हिमनदीय मलबे से बने लम्बे, अंडाकार या उलटी नाव जैसे आकार वाले टीले होते हैं।

इनका लंबा अक्ष सामान्यतः हिमनद की गति की दिशा के समानांतर होता है।

ड्रमलिन का एक सिरा अपेक्षाकृत चौड़ा और खड़ा तथा दूसरा सिरा लंबा और मंद ढाल वाला हो सकता है।

बहुत बड़ी संख्या में पास-पास स्थित ड्रमलिनों वाले क्षेत्र को कभी-कभी ड्रमलिन क्षेत्र कहा जाता है।

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एस्कर

हिमनद के नीचे बहने वाली जलधारा का निक्षेप

हिमनद के नीचे या भीतर पिघला हुआ जल सुरंगनुमा मार्गों से नदी की तरह बह सकता है।

ये जलधाराएँ अपने साथ बालू, बजरी और अन्य अवसाद लेकर चलती हैं और उन्हें अपने मार्ग में जमा करती हैं।

हिमनद के पिघल जाने के बाद यह निक्षेप धरातल पर लंबी, संकरी और टेढ़ी-मेढ़ी कटक के रूप में दिखाई देता है, जिसे एस्कर कहा जाता है।

अतः एस्कर कोई “रेतीली चट्टान” नहीं, बल्कि मुख्यतः हिमनदीय पिघले जल द्वारा जमा बालू और बजरी की लंबी कटक है।

19

केम

पिघले जल द्वारा निर्मित अनियमित निक्षेप

हिमनद के पिघलते समय उसके ऊपर, किनारों या बर्फ की दरारों और गर्तों में पिघले जल द्वारा बालू और बजरी जमा हो सकती है।

जब हिम पूरी तरह पिघल जाती है, तो यह सामग्री असमान टीले या छोटी अनियमित पहाड़ियों के रूप में रह जाती है।

इन्हें केम कहा जाता है।

केम क्षेत्रों का धरातल सामान्यतः उबड़-खाबड़ और अनियमित दिखाई देता है।

20

आउटवॉश मैदान

हिमनद के आगे पिघले जल से बना मैदान

हिमनद के पिघलने से निकलने वाली जलधाराएँ बड़ी मात्रा में बालू, बजरी, गाद और अन्य अवसाद अपने साथ लेकर जाती हैं।

हिमनद के अग्रभाग से बाहर निकलकर ये जलधाराएँ व्यापक क्षेत्र में फैलती हैं और अवसादों को आकार के अनुसार कुछ हद तक छाँटकर जमा करती हैं।

इससे बनने वाले विस्तृत और अपेक्षाकृत समतल निक्षेपित मैदान को आउटवॉश मैदान कहा जाता है।

यह हिमनद द्वारा सीधे जमा किए गए मोरीन से अलग है क्योंकि आउटवॉश मैदान की सामग्री मुख्यतः पिघले हुए हिमजल द्वारा परिवाहित और जमा की जाती है।

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हिमनदीय विस्थापित शिलाखंड

दूर से लाकर छोड़े गए बड़े पत्थर

हिमनद अपने साथ बहुत बड़े चट्टानी खंडों को भी लंबी दूरी तक ले जा सकता है।

हिमनद के पिघलने पर ये विशाल शिलाखंड ऐसे स्थानों पर छूट सकते हैं जहाँ की स्थानीय चट्टानों से उनका कोई संबंध नहीं होता।

ऐसे दूर से लाकर जमा किए गए बड़े चट्टानी खंडों को हिमनदीय विस्थापित शिलाखंड कहा जाता है।

इनकी चट्टान की संरचना और मूल क्षेत्र का अध्ययन करके पुराने हिमनदों की गति की दिशा का अनुमान लगाया जा सकता है।

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हिमनदीय स्थलरूपों का वर्गीकरण

एक नज़र में सही श्रेणी

स्थलरूप प्रमुख प्रक्रिया मुख्य विशेषता
सर्क अपरदन कटोरेनुमा हिमनदीय गर्त
अरैट अपरदन दो सर्कों या घाटियों के बीच तीखी धार
हॉर्न अपरदन पिरामिडनुमा तीखी चोटी
U-आकार की घाटी अपरदन खड़ी दीवारें और चौड़ा तल
रॉश मूटोने अपरदन चिकनी अग्र ढाल और खड़ी पिछली ढाल वाला चट्टानी उभार
लटकती घाटी अपरदन मुख्य घाटी के ऊपर समाप्त होने वाली सहायक घाटी
कोल अपरदन दो सर्कों के बीच नीचा पर्वतीय दर्रा
फियोर्ड अपरदन + समुद्री जलमग्नता समुद्र में डूबी U-आकार की घाटी
मोरीन निक्षेपण हिमनदीय मलबे का जमाव
ड्रमलिन मुख्यतः हिमनदीय निक्षेप लंबा अंडाकार टीला
एस्कर हिमजल निक्षेपण लंबी टेढ़ी-मेढ़ी बालू-बजरी कटक
केम हिमजल निक्षेपण अनियमित बालू-बजरी के टीले
आउटवॉश मैदान हिमजल निक्षेपण हिमनद के आगे फैला समतल निक्षेपित मैदान
नूनाटक अवशिष्ट पर्वतीय भूभाग हिमचादर से ऊपर निकली चट्टानी चोटी
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मोरीन के प्रमुख प्रकार

स्थिति के आधार पर पहचान

मोरीन स्थिति
पार्श्व मोरीन हिमनद के किनारों पर
मध्य मोरीन दो हिमनदों के मिलने पर संयुक्त हिमनद के मध्य में
अंतिम मोरीन हिमनद के अग्रभाग पर
तलीय मोरीन हिमनद के नीचे विस्तृत क्षेत्र में
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भ्रम से बचने वाली महत्वपूर्ण जोड़ियाँ

परीक्षा में अंतर पहचानें

सर्क — कटोरा अरैट — धार हॉर्न — चोटी
U-घाटी — हिमनद फियोर्ड — डूबी U-घाटी
पार्श्व मोरीन — किनारा मध्य मोरीन — बीच अंतिम मोरीन — अग्रभाग
एस्कर — लंबी कटक केम — अनियमित टीला आउटवॉश — समतल मैदान
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त्वरित पुनरावृत्ति

मुख्य स्थलरूप एक नज़र में

🎯 अत्यंत महत्वपूर्ण

सर्क — कटोरे जैसी गर्त।

अरैट — दो हिमनदीय गर्तों के बीच तीखी संकरी धार।

हॉर्न — पिरामिड जैसी नुकीली चोटी; मैटरहॉर्न प्रमुख उदाहरण।

U-आकार की घाटी — हिमनद द्वारा चौड़ी और गहरी की गई घाटी।

फियोर्ड — समुद्र में डूबी U-आकार की हिमनदीय घाटी।

नूनाटक — हिमचादर के ऊपर निकली पर्वतीय चोटी।

मोरीन — हिमनद द्वारा लाए गए मलबे का जमाव।

ड्रमलिन — अंडाकार या उलटी नाव जैसा हिमनदीय टीला।

एस्कर — हिमनद के नीचे बहने वाले पिघले जल द्वारा जमा लंबी बालू-बजरी की कटक।

केम — पिघले हिमजल के निक्षेप से बना अनियमित टीला।

आउटवॉश मैदान — हिमनद के आगे पिघले जल द्वारा बनाया गया निक्षेपित मैदान।

⚡ अंतिम पुनरावृत्ति बिंदु

हिमनदीय स्थलाकृतियों का निर्माण हिमनदों द्वारा किए जाने वाले अपरदन, परिवहन और निक्षेपण से होता है।

हिमनदीय अपरदन में घर्षण और उत्पाटन महत्वपूर्ण प्रक्रियाएँ हैं।

सर्क पर्वतीय हिमनद के ऊपरी भाग में बनने वाला कटोरेनुमा गर्त है।

सर्क में जल भर जाने से बनने वाली छोटी झील को टार्न कहा जाता है।

अरैट दो हिमनदीय गर्तों या घाटियों के बीच बनने वाली संकरी और तीखी पर्वतीय धार है।

हॉर्न तीन या अधिक ओर से हिमनदीय अपरदन के कारण बनी पिरामिड जैसी तीखी चोटी है; मैटरहॉर्न इसका प्रसिद्ध उदाहरण है।

नदी मुख्यतः V-आकार की घाटी, जबकि हिमनद U-आकार की घाटी बनाता है।

रॉश मूटोने हिमनदीय अपरदन से निर्मित असममित चट्टानी उभार है जिसकी एक ओर अपेक्षाकृत चिकनी ढाल तथा दूसरी ओर खड़ी और ऊबड़-खाबड़ सतह होती है।

लटकती घाटी मुख्य हिमनदीय घाटी से ऊपर समाप्त होने वाली सहायक घाटी है।

कोल दो हिमनदीय गर्तों के बीच बनने वाला नीचा पर्वतीय दर्रा है।

नूनाटक हिमचादर या हिमक्षेत्र के ऊपर निकली हुई पर्वतीय चोटी है।

फियोर्ड समुद्र के जल से भर गई गहरी U-आकार की हिमनदीय घाटी है।

मोरीन हिमनद द्वारा परिवाहित और जमा किए गए मलबे का निक्षेप है।

पार्श्व मोरीन हिमनद के किनारे, मध्य मोरीन हिमनद के मध्य और अंतिम मोरीन उसके अग्रभाग पर बनती है।

ड्रमलिन लंबा अंडाकार अथवा उलटी नाव जैसा हिमनदीय टीला है।

एस्कर हिमनद के भीतर या नीचे बहने वाले पिघले जल द्वारा जमा बालू और बजरी की लंबी, संकरी तथा टेढ़ी-मेढ़ी कटक है।

केम पिघले हिमजल के निक्षेप से बना अनियमित बालू-बजरी का टीला है।

आउटवॉश मैदान हिमनद के अग्रभाग से निकलने वाले पिघले जल द्वारा जमा अवसादों से निर्मित विस्तृत समतल क्षेत्र है।

हिमनद द्वारा दूर से लाकर छोड़े गए बड़े चट्टानी खंडों को हिमनदीय विस्थापित शिलाखंड कहा जाता है।

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