\n\n\n\n\n
VidyaGlobe
भारत की पंचवर्षीय योजनाएँ
FIVE YEAR PLANS OF INDIA

भारत की पंचवर्षीय योजनाएँ

1951 से 2017 तक आर्थिक नियोजन, प्रमुख उद्देश्य, उपलब्धियाँ और महत्वपूर्ण घटनाएँ

भारत में पंचवर्षीय योजनाओं की शुरुआत

स्वतंत्रता के बाद भारत ने आर्थिक विकास को योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के लिए पंचवर्षीय योजनाओं को अपनाया। पहली पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल 1951 से शुरू हुई। इन योजनाओं के माध्यम से कृषि, उद्योग, सिंचाई, ऊर्जा, रोजगार, गरीबी उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना जैसे क्षेत्रों के लिए निश्चित लक्ष्य निर्धारित किए गए।

भारत में पंचवर्षीय योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में योजना आयोग की प्रमुख भूमिका थी। बाद में योजना आयोग के स्थान पर 1 जनवरी 2015 को नीति आयोग का गठन किया गया।

01

प्रथम पंचवर्षीय योजना — 1951 से 1956

प्रथम पंचवर्षीय योजना को सामान्य प्रतियोगी परीक्षा परंपरा में हैरॉड-डोमर मॉडल से संबंधित माना जाता है।

स्वतंत्रता के समय भारत खाद्यान्न की कमी, शरणार्थी समस्या, मुद्रास्फीति और कमजोर कृषि उत्पादन जैसी समस्याओं का सामना कर रहा था। इसलिए इस योजना का मुख्य जोर कृषि, सिंचाई और कृषि उत्पादकता बढ़ाने पर था।

कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ सिंचाई, बिजली और ग्रामीण विकास के लिए बड़े बहुउद्देशीय नदी घाटी कार्यक्रमों को महत्व दिया गया।

भाखड़ा-नांगल परियोजना, दामोदर घाटी परियोजना और व्यास नदी से संबंधित विकास कार्य इस दौर की प्रमुख सिंचाई एवं बहुउद्देशीय परियोजनाओं से जुड़े रहे। इनमें से कुछ परियोजनाओं की शुरुआत प्रथम योजना से पहले हो चुकी थी, लेकिन प्रथम पंचवर्षीय योजना में इनके विकास को विशेष महत्व मिला।

दामोदर घाटी निगम की स्थापना 1948 में हो चुकी थी। इसलिए यह कहना कि दामोदर घाटी परियोजना पहली बार 1951 में शुरू हुई, पूरी तरह सही नहीं है।

प्रथम योजना को अपेक्षाकृत सफल माना जाता है। कृषि उत्पादन में सुधार हुआ और अर्थव्यवस्था ने निर्धारित लक्ष्य से अधिक वृद्धि दर्ज की।

आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य लगभग 2.1% वार्षिक रखा गया था, जबकि वास्तविक औसत वृद्धि लगभग 3.5 से 3.6% के आसपास रही।

🎯 परीक्षा के लिए

प्रथम योजना = कृषि + सिंचाई + हैरॉड-डोमर मॉडल

02

द्वितीय पंचवर्षीय योजना — 1956 से 1961

द्वितीय पंचवर्षीय योजना का आधार प्रसिद्ध अर्थशास्त्री पी. सी. महालनोबिस द्वारा विकसित महालनोबिस मॉडल था।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत में तेजी से औद्योगिकीकरण करना और विशेष रूप से भारी तथा आधारभूत उद्योगों का विकास करना था।

सार्वजनिक क्षेत्र को आर्थिक विकास का प्रमुख माध्यम बनाया गया। मशीन निर्माण, इस्पात, ऊर्जा, भारी इंजीनियरिंग और अन्य आधारभूत उद्योगों में सरकारी निवेश बढ़ाया गया।

इसी योजना के दौरान तीन प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात संयंत्रों का विकास हुआ— भिलाई, राउरकेला और दुर्गापुर

भिलाई इस्पात संयंत्र में सोवियत संघ, राउरकेला में पश्चिम जर्मनी और दुर्गापुर में ब्रिटेन का सहयोग महत्वपूर्ण था।

आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य लगभग 4.5% वार्षिक रखा गया था। उपलब्ध वृद्धि लगभग 4.1 से 4.2% के आसपास रही।

🎯 सबसे महत्वपूर्ण

द्वितीय योजना = महालनोबिस मॉडल + भारी उद्योग + सार्वजनिक क्षेत्र

03

तृतीय पंचवर्षीय योजना — 1961 से 1966

तृतीय पंचवर्षीय योजना का मुख्य उद्देश्य भारत को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी अर्थव्यवस्था बनाना था।

इसमें कृषि और उद्योग दोनों को महत्व दिया गया। विशेष रूप से खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाकर देश को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया गया।

कुछ प्रतियोगी परीक्षा पुस्तकों में तृतीय योजना को गाडगिल योजना से भी जोड़ा जाता है। इसे “सैंडी, चक्रवर्ती और महालनोबिस मॉडल” कहना मानक और व्यापक रूप से स्वीकार्य वर्गीकरण नहीं है।

योजना को कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा। 1962 का चीन-भारत युद्ध, 1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध और लगातार सूखे के कारण रक्षा व्यय बढ़ा और कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ।

इन परिस्थितियों के कारण तृतीय पंचवर्षीय योजना अपने निर्धारित लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकी और इसे असफल योजनाओं में गिना जाता है।

आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य लगभग 5.6% था, जबकि वास्तविक उपलब्धि लगभग 2.8% रही।

04

योजना अवकाश — 1966 से 1969

तृतीय पंचवर्षीय योजना की असफलता के बाद 1966 से 1969 तक नई पंचवर्षीय योजना लागू नहीं की गई। इस अवधि को योजना अवकाश कहा जाता है।

इस अवधि में लगातार तीन वार्षिक योजनाएँ चलाई गईं।

इसी समय भारत में नई कृषि तकनीक, उच्च उपज वाली बीज किस्मों, सिंचाई, रासायनिक उर्वरकों और आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग के साथ हरित क्रांति को गति मिली।

भारत में हरित क्रांति के प्रमुख वैज्ञानिक नेतृत्व से डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन का नाम जुड़ा है।

विश्व स्तर पर हरित क्रांति के प्रमुख प्रवर्तक नॉर्मन बोरलॉग माने जाते हैं।

📗 याद रखें

1966–69 = तीन वार्षिक योजनाएँ + हरित क्रांति का महत्वपूर्ण दौर

05

चतुर्थ पंचवर्षीय योजना — 1969 से 1974

चतुर्थ पंचवर्षीय योजना का प्रमुख उद्देश्य विकास के साथ आर्थिक स्थिरता और आत्मनिर्भरता प्राप्त करना था।

इस योजना में आर्थिक विकास को सामाजिक न्याय के साथ जोड़ने का प्रयास किया गया। गरीबी और आर्थिक असमानता को कम करना भी व्यापक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा था।

इसलिए इस योजना को केवल “गरीबी उन्मूलन की योजना” कहना अधूरा होगा। इसका प्रमुख आधिकारिक जोर स्थिरता के साथ विकास और क्रमिक आत्मनिर्भरता पर था।

19 जुलाई 1969 को 14 प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया।

15 अगस्त 1969 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो की स्थापना की गई।

योजना की वार्षिक आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य लगभग 5.7% था, जबकि वास्तविक उपलब्धि लगभग 3.2 से 3.3% रही।

🎯 महत्वपूर्ण घटनाएँ

14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण 1969 इसरो की स्थापना
06

पंचम पंचवर्षीय योजना — 1974 से 1979

पंचम पंचवर्षीय योजना के निर्माण से डी. पी. धर का नाम प्रमुख रूप से जुड़ा है।

इस योजना के दो प्रमुख उद्देश्य थे— गरीबी उन्मूलन और आत्मनिर्भरता

गरीबी कम करने, रोजगार बढ़ाने और समाज के कमजोर वर्गों तक विकास का लाभ पहुँचाने के लिए कई कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया गया।

“गरीबी हटाओ” नारा इंदिरा गांधी द्वारा 1971 के आम चुनाव के दौरान प्रमुख राजनीतिक नारे के रूप में दिया गया था। इसलिए यह कहना कि यह नारा पहली बार पंचम योजना में दिया गया, सही नहीं है। हालांकि गरीबी उन्मूलन पंचम योजना का प्रमुख उद्देश्य था।

1975 में बीस सूत्रीय कार्यक्रम प्रारंभ किया गया, जिसका उद्देश्य गरीबी, बेरोजगारी और सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन को कम करना था।

आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य लगभग 4.4% रखा गया था। अलग-अलग स्रोतों में वास्तविक वृद्धि लगभग 4.7 से 4.8% के आसपास दी जाती है।

जनता पार्टी सरकार ने पंचम पंचवर्षीय योजना को निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले 1978 में समाप्त कर दिया।

⚠️ भ्रम से बचें

गरीबी हटाओ नारा = 1971, जबकि गरीबी उन्मूलन = पंचम योजना का प्रमुख उद्देश्य

07

रोलिंग योजना — 1978 से 1980

1977 में केंद्र में गैर-कांग्रेस जनता पार्टी सरकार बनने के बाद पंचम पंचवर्षीय योजना को समाप्त कर रोलिंग योजना की व्यवस्था अपनाई गई।

रोलिंग योजना का अर्थ केवल “एक-एक वर्ष की योजना” नहीं था। इसमें योजना के लक्ष्यों और संसाधनों की हर वर्ष समीक्षा करके अगले वर्षों के लिए संशोधन किया जाता था।

भारत में रोलिंग योजना का प्रयोग मुख्य रूप से 1978 से 1980 के बीच हुआ।

1980 में कांग्रेस सरकार के सत्ता में लौटने पर रोलिंग योजना समाप्त कर दी गई और छठी पंचवर्षीय योजना शुरू की गई।

08

षष्ठ पंचवर्षीय योजना — 1980 से 1985

छठी पंचवर्षीय योजना में आर्थिक विकास के साथ गरीबी और बेरोजगारी को कम करने, तकनीकी आधुनिकीकरण और आधारभूत संरचना के विकास पर जोर दिया गया।

कृषि उत्पादकता, ऊर्जा, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने का प्रयास किया गया।

कुछ सामान्य अध्ययन पुस्तकों में इस योजना को आगत-निर्गत दृष्टिकोण से जोड़ा जाता है, लेकिन इसे योजना का एकमात्र आधिकारिक मॉडल मानना उचित नहीं है।

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक — नाबार्ड की स्थापना 12 जुलाई 1982 को हुई। इसलिए इसकी स्थापना छठी पंचवर्षीय योजना के दौरान हुई थी।

आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य लगभग 5.2% था। विभिन्न आधिकारिक श्रृंखलाओं में वास्तविक वृद्धि लगभग 5.5 से 5.7% के आसपास मिलती है।

🎯 परीक्षा तथ्य

नाबार्ड — 1982 — छठी पंचवर्षीय योजना

09

सप्तम पंचवर्षीय योजना — 1985 से 1990

सप्तम पंचवर्षीय योजना का मुख्य जोर खाद्यान्न उत्पादन, रोजगार, उत्पादकता और आर्थिक आधुनिकीकरण पर था।

इसे प्रायः “भोजन, कार्य और उत्पादकता” से संबंधित योजना के रूप में याद किया जाता है।

कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ औद्योगिक क्षमता, संचार और आधुनिक तकनीक के विकास पर भी जोर दिया गया।

“उधारी में कमी” को इस योजना का मुख्य उद्देश्य कहना पर्याप्त नहीं है। इसके व्यापक लक्ष्य उत्पादन, रोजगार और उत्पादकता से संबंधित थे।

आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य लगभग 5% था। वास्तविक वृद्धि विभिन्न श्रृंखलाओं में लगभग 5.6 से 6% के आसपास मानी जाती है।

10

योजना अवकाश — 1990 से 1992

सप्तम पंचवर्षीय योजना के बाद देश में राजनीतिक अस्थिरता और गंभीर आर्थिक समस्याओं के कारण आठवीं योजना तुरंत शुरू नहीं हो सकी।

इसलिए 1990-91 और 1991-92 में दो वार्षिक योजनाएँ लागू की गईं।

इस अवधि को सामान्यतः 1990 से 1992 का योजना अवकाश कहा जाता है।

इसी समय भारत गंभीर भुगतान संतुलन संकट से गुजरा और 1991 में नई आर्थिक नीति के तहत उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण संबंधी आर्थिक सुधार शुरू किए गए।

11

आठवीं पंचवर्षीय योजना — 1992 से 1997

आठवीं पंचवर्षीय योजना भारत में 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद शुरू होने वाली पहली पंचवर्षीय योजना थी।

इसका मुख्य जोर आर्थिक विकास के साथ मानव संसाधन विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना पर था।

उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की नीतियों के प्रभाव से निजी क्षेत्र और विदेशी निवेश की भूमिका बढ़ी।

कुछ सामान्य अध्ययन पुस्तकों में आठवीं योजना के साथ “मिलर मॉडल” का उल्लेख मिलता है, लेकिन इसे भारत की आठवीं योजना का मानक आधिकारिक मॉडल मानना सुरक्षित नहीं है।

योजना का वार्षिक आर्थिक वृद्धि लक्ष्य लगभग 5.6% था और वास्तविक वृद्धि इससे अधिक, लगभग 6.5 से 6.8% के आसपास रही।

📗 महत्वपूर्ण संबंध

1991 आर्थिक सुधार → 1992 से आठवीं पंचवर्षीय योजना

12

नवम पंचवर्षीय योजना — 1997 से 2002

नवम पंचवर्षीय योजना का प्रमुख उद्देश्य सामाजिक न्याय और समानता के साथ विकास को बढ़ावा देना था।

कृषि और ग्रामीण विकास को महत्व दिया गया तथा गरीबी उन्मूलन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सेवाओं के विस्तार पर जोर दिया गया।

टिकाऊ विकास और मानव संसाधन विकास के साथ कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र में संतुलित सुधार का प्रयास किया गया।

कुछ पुस्तकों में इस योजना को आगत-निर्गत मॉडल से जोड़ा जाता है, पर इसे योजना की सबसे महत्वपूर्ण आधिकारिक पहचान के रूप में याद करना आवश्यक नहीं है।

आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य लगभग 6.5% था, जबकि वास्तविक वृद्धि लगभग 5.4 से 5.5% के आसपास रही।

13

दसवीं पंचवर्षीय योजना — 2002 से 2007

दसवीं पंचवर्षीय योजना का मुख्य उद्देश्य तेज आर्थिक विकास के साथ गरीबी कम करना और रोजगार के अवसर बढ़ाना था।

योजना में शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना, तकनीकी विकास और सामाजिक संकेतकों में सुधार के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए।

क्षेत्रीय असमानता कम करना और राज्यों के बीच विकास के अंतर को घटाना भी महत्वपूर्ण लक्ष्य था।

योजना का लक्ष्य लगभग 8% वार्षिक आर्थिक वृद्धि प्राप्त करना था।

पुराने विभिन्न आँकड़ा-स्रोतों में उपलब्धि लगभग 7.5 से 7.7% के आसपास मिलती है।

14

ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना — 2007 से 2012

ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना का मुख्य विषय तेज और अधिक समावेशी विकास था।

इसका उद्देश्य आर्थिक विकास के लाभ को गरीबों, ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य कमजोर वर्गों तक पहुँचाना था।

शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कौशल विकास और आधारभूत संरचना को विशेष महत्व दिया गया।

गरीबी कम करना और आर्थिक तथा सामाजिक असमानताओं को घटाना योजना के महत्वपूर्ण लक्ष्यों में शामिल था।

योजना का प्रारंभिक औसत आर्थिक वृद्धि लक्ष्य 9% था।

वैश्विक वित्तीय संकट और अन्य आर्थिक परिस्थितियों के कारण वास्तविक वृद्धि लक्ष्य से कम रही। अलग-अलग राष्ट्रीय लेखा श्रृंखलाओं के कारण उपलब्धि के आँकड़ों में कुछ अंतर मिलता है और सामान्य परीक्षा पुस्तकों में लगभग 8% के आसपास वृद्धि बताई जाती है।

🎯 याद रखें

ग्यारहवीं योजना = तेज और अधिक समावेशी विकास

15

बारहवीं पंचवर्षीय योजना — 2012 से 2017

बारहवीं पंचवर्षीय योजना भारत की अंतिम पंचवर्षीय योजना थी।

इसका प्रमुख विषय तेज, अधिक समावेशी और सतत विकास था।

योजना में आर्थिक वृद्धि के साथ सामाजिक समानता, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, ऊर्जा, आधारभूत संरचना और पर्यावरणीय स्थिरता को महत्व दिया गया।

नवीकरणीय ऊर्जा, प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग और पर्यावरण-सुरक्षित विकास पर विशेष ध्यान दिया गया।

आधुनिक तकनीकी विकास और उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास भी योजना का हिस्सा थे।

इसे केवल “आत्मनिर्भरता और समाजवादी विकास” पर केंद्रित योजना कहना सही नहीं है। इसका आधिकारिक व्यापक उद्देश्य तेज, समावेशी और टिकाऊ विकास था।

बारहवीं पंचवर्षीय योजना का विकास लक्ष्य 8% था, न कि 9%।

योजना अवधि के वास्तविक विकास के आँकड़े अलग-अलग राष्ट्रीय लेखा श्रृंखलाओं के कारण विभिन्न पुस्तकों में अलग मिल सकते हैं। इसलिए पुराने स्रोत में दिए गए 8% उपलब्धि को बिना संदर्भ के निश्चित तथ्य नहीं मानना चाहिए।

⚠️ महत्वपूर्ण सुधार

बारहवीं योजना का वृद्धि लक्ष्य = 8%

16

योजना आयोग से नीति आयोग

भारत में पंचवर्षीय योजनाओं के निर्माण और राष्ट्रीय स्तर की आर्थिक योजना के लिए योजना आयोग का गठन 15 मार्च 1950 को किया गया था।

योजना आयोग एक संवैधानिक संस्था नहीं था। इसका गठन केंद्र सरकार के प्रस्ताव द्वारा किया गया था।

बदलती आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप योजना आयोग के स्थान पर 1 जनवरी 2015 को नीति आयोग की स्थापना की गई।

नीति आयोग का पूरा नाम राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान है।

नीति आयोग का उद्देश्य राज्यों के साथ सहयोगपूर्ण संघवाद को बढ़ावा देना, दीर्घकालीन नीतिगत सोच विकसित करना और विकास के लिए नीति संबंधी सलाह देना है।

🎯 महत्वपूर्ण तिथियाँ

योजना आयोग — 1950 नीति आयोग — 2015
17

पंचवर्षीय योजनाओं का अंत

बारहवीं पंचवर्षीय योजना की अवधि 2012 से 2017 तक थी।

योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग बनने के बाद पुरानी केंद्रीकृत पंचवर्षीय योजना प्रणाली को आगे जारी नहीं रखा गया।

इसलिए 2017 के बाद भारत में नई पंचवर्षीय योजना शुरू नहीं की गई

बारहवीं पंचवर्षीय योजना इस प्रकार भारत की अंतिम पंचवर्षीय योजना बनी।

18

सभी योजनाएँ — एक नज़र में

योजना अवधि मुख्य फोकस
प्रथम 1951–56 कृषि और सिंचाई
द्वितीय 1956–61 भारी उद्योग और औद्योगिकीकरण
तृतीय 1961–66 आत्मनिर्भरता और कृषि
योजना अवकाश 1966–69 वार्षिक योजनाएँ और हरित क्रांति
चतुर्थ 1969–74 स्थिरता के साथ विकास और आत्मनिर्भरता
पंचम 1974–79 गरीबी उन्मूलन और आत्मनिर्भरता
रोलिंग योजना 1978–80 वार्षिक समीक्षा और संशोधन
षष्ठ 1980–85 गरीबी, रोजगार और आधुनिकीकरण
सप्तम 1985–90 भोजन, कार्य और उत्पादकता
योजना अवकाश 1990–92 दो वार्षिक योजनाएँ
आठवीं 1992–97 मानव विकास और आर्थिक सुधार
नवम 1997–2002 सामाजिक न्याय के साथ विकास
दसवीं 2002–07 तेज विकास और गरीबी में कमी
ग्यारहवीं 2007–12 तेज और अधिक समावेशी विकास
बारहवीं 2012–17 तेज, समावेशी और सतत विकास
19

मॉडल और योजनाएँ — परीक्षा सावधानी

योजना प्रचलित संबंध परीक्षा में कैसे पढ़ें?
प्रथम योजना हैरॉड-डोमर मॉडल सामान्य प्रतियोगी परीक्षाओं में व्यापक रूप से स्वीकार
द्वितीय योजना महालनोबिस मॉडल सबसे महत्वपूर्ण और स्पष्ट संबंध
तृतीय योजना कुछ पुस्तकों में गाडगिल योजना “सैंडी-चक्रवर्ती-महालनोबिस मॉडल” को मानक तथ्य न मानें
पंचम योजना डी. पी. धर योजना निर्माण से प्रमुख संबंध
षष्ठ योजना कुछ पुस्तकों में आगत-निर्गत दृष्टिकोण इसे एकमात्र आधिकारिक मॉडल न समझें
आठवीं योजना कुछ पुस्तकों में मिलर मॉडल मानक आधिकारिक पहचान के रूप में सुरक्षित नहीं
नवम योजना कुछ पुस्तकों में आगत-निर्गत मॉडल मुख्य परीक्षा फोकस उद्देश्य और अवधि पर रखें
20

महत्वपूर्ण योजनाएँ और घटनाएँ

🧠 जल्दी याद करने का क्रम

प्रथम — कृषि द्वितीय — उद्योग तृतीय — आत्मनिर्भरता
1966–69 — हरित क्रांति चतुर्थ — बैंक राष्ट्रीयकरण पंचम — गरीबी उन्मूलन
1978–80 — रोलिंग योजना षष्ठ — नाबार्ड सप्तम — भोजन, कार्य, उत्पादकता
1990–92 — योजना अवकाश आठवीं — सुधारों के बाद बारहवीं — अंतिम योजना
21

भ्रम वाले महत्वपूर्ण तथ्य

भ्रम: दामोदर घाटी परियोजना प्रथम पंचवर्षीय योजना में पहली बार शुरू हुई।
सही: दामोदर घाटी निगम 1948 में स्थापित हो चुका था; प्रथम योजना में इसे विशेष महत्व मिला।

भ्रम: तीसरी पंचवर्षीय योजना का निश्चित मॉडल सैंडी-चक्रवर्ती-महालनोबिस था।
सही: इसे मानक परीक्षा तथ्य नहीं माना जाता; कुछ पुस्तकों में तीसरी योजना को गाडगिल योजना से जोड़ा जाता है।

भ्रम: चौथी योजना का एकमात्र मुख्य उद्देश्य गरीबी हटाना था।
सही: इसका प्रमुख जोर स्थिरता के साथ विकास और आत्मनिर्भरता पर था।

भ्रम: “गरीबी हटाओ” नारा पंचम योजना में पहली बार दिया गया।
सही: यह नारा 1971 के चुनाव से प्रमुख रूप से जुड़ा है; गरीबी उन्मूलन पंचम योजना का प्रमुख उद्देश्य था।

भ्रम: रोलिंग योजना का अर्थ केवल हर वर्ष नई एक-वर्षीय योजना बनाना था।
सही: इसमें योजना के लक्ष्यों की हर वर्ष समीक्षा और संशोधन किया जाता था।

भ्रम: आठवीं पंचवर्षीय योजना निश्चित रूप से मिलर मॉडल पर आधारित थी।
सही: कुछ सामान्य अध्ययन पुस्तकों में यह संबंध मिलता है, लेकिन यह योजना की मानक आधिकारिक पहचान नहीं है।

भ्रम: बारहवीं पंचवर्षीय योजना का आर्थिक वृद्धि लक्ष्य 9% था।
सही: बारहवीं पंचवर्षीय योजना का लक्ष्य लगभग 8% था।

⚡ अंतिम पुनरावृत्ति बिंदु

भारत की प्रथम पंचवर्षीय योजना 1951–56 में लागू हुई और इसका मुख्य जोर कृषि तथा सिंचाई पर था।

प्रथम योजना — हैरॉड-डोमर मॉडल से संबंधित मानी जाती है।

द्वितीय योजना — महालनोबिस मॉडल — भारी उद्योग और सार्वजनिक क्षेत्र

भिलाई, राउरकेला और दुर्गापुर के प्रमुख इस्पात संयंत्र द्वितीय योजना के औद्योगिक विकास से जुड़े हैं।

तृतीय योजना — आत्मनिर्भरता और कृषि; चीन युद्ध, पाकिस्तान युद्ध और सूखे से प्रभावित हुई।

1966–69 = योजना अवकाश + तीन वार्षिक योजनाएँ + हरित क्रांति का महत्वपूर्ण दौर

भारत में हरित क्रांति के प्रमुख वैज्ञानिक नेतृत्व से एम. एस. स्वामीनाथन और वैश्विक स्तर पर नॉर्मन बोरलॉग का नाम जुड़ा है।

चतुर्थ योजना — 1969–74 — स्थिरता के साथ विकास और आत्मनिर्भरता

1969 — 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण और इसरो की स्थापना

पंचम योजना — गरीबी उन्मूलन और आत्मनिर्भरता

गरीबी हटाओ नारा 1971 से प्रमुख रूप से जुड़ा है।

1978–80 = रोलिंग योजना

छठी योजना — 1980–85; नाबार्ड की स्थापना 1982

सप्तम योजना — भोजन, कार्य और उत्पादकता

1990–92 = दो वार्षिक योजनाएँ और योजना अवकाश

आठवीं योजना — 1992–97 और यह 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद शुरू होने वाली पहली पंचवर्षीय योजना थी।

नवम योजना — सामाजिक न्याय और समानता के साथ विकास

दसवीं योजना — लगभग 8% विकास लक्ष्य

ग्यारहवीं योजना — तेज और अधिक समावेशी विकास

बारहवीं योजना — तेज, अधिक समावेशी और सतत विकास

बारहवीं योजना का विकास लक्ष्य लगभग 8% था।

1 जनवरी 2015 — नीति आयोग की स्थापना

2012–17 की बारहवीं योजना भारत की अंतिम पंचवर्षीय योजना थी।

2017 के बाद भारत में नई पंचवर्षीय योजना प्रारंभ नहीं की गई।

Scroll to Top