राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज एवं प्रमुख शेयर सूचकांक
एनएसई, ओटीसीईआई, रेसिडेक्स और विश्व के प्रमुख शेयर बाजार सूचकांक
शेयर बाजार और सूचकांक
शेयर बाजार वह संगठित बाजार है जहाँ कंपनियों के शेयर, बॉन्ड और अन्य प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री की जाती है।
स्टॉक एक्सचेंज निवेशकों, कंपनियों और अन्य बाजार सहभागियों को प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री के लिए एक संगठित और विनियमित मंच प्रदान करता है।
वहीं शेयर सूचकांक किसी शेयर बाजार या उसके किसी हिस्से के चयनित शेयरों के मूल्य प्रदर्शन को एक संख्या के रूप में दर्शाता है।
इसलिए राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज एक स्टॉक एक्सचेंज है, जबकि निफ्टी-50 उसका प्रमुख शेयर सूचकांक है।
राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज
भारत का प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक स्टॉक एक्सचेंज
राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना वर्ष 1992 में की गई थी। इसकी स्थापना भारतीय प्रतिभूति बाजार में पारदर्शिता, दक्षता, प्रतिस्पर्धा और देशव्यापी पहुँच बढ़ाने के उद्देश्य से की गई।
इसे वर्ष 1993 में स्टॉक एक्सचेंज के रूप में मान्यता प्राप्त हुई और वर्ष 1994 में इसने परिचालन शुरू किया। :contentReference[oaicite:3]{index=3}
एनएसई की स्थापना प्रतिभूति बाजार में सुधार के लिए गठित फेरवानी समिति की सिफारिशों से जुड़ी थी। NSE के पुराने आधिकारिक दस्तावेज भी इसकी स्थापना को फेरवानी समिति की सिफारिशों से जोड़ते हैं। :contentReference[oaicite:4]{index=4}
इसका मुख्यालय मुंबई, महाराष्ट्र में है।
🎯 तीन वर्ष याद रखें
1992 — स्थापना
1993 — स्टॉक एक्सचेंज के रूप में मान्यता
1994 — परिचालन प्रारंभ
पूर्णतः स्वचालित स्क्रीन आधारित ट्रेडिंग
भारतीय शेयर बाजार में तकनीकी परिवर्तन
राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज भारत का पहला ऐसा राष्ट्रीय एक्सचेंज था जिसने पूर्णतः स्वचालित स्क्रीन आधारित ट्रेडिंग प्रणाली लागू की।
एनएसई की इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था ने पुराने ट्रेडिंग फ्लोर आधारित मॉडल के स्थान पर देश के विभिन्न भागों से कंप्यूटर टर्मिनल के माध्यम से शेयर कारोबार की सुविधा दी।
एनएसई की ट्रेडिंग प्रणाली को राष्ट्रीय एक्सचेंज फॉर ऑटोमेटेड ट्रेडिंग के नाम से विकसित किया गया। वर्तमान प्रणाली का विकसित स्वरूप पूर्णतः स्वचालित और ऑर्डर आधारित है। :contentReference[oaicite:5]{index=5}
इस तकनीक ने खरीद और बिक्री आदेशों के मिलान, मूल्य पारदर्शिता, तेज लेन-देन और बाजार की देशव्यापी पहुँच को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
📗 परीक्षा तथ्य
भारत में पहली पूर्णतः स्वचालित स्क्रीन आधारित राष्ट्रीय ट्रेडिंग व्यवस्था — एनएसई।
एनएसई की स्थापना का उद्देश्य
पारदर्शिता और देशव्यापी बाजार
एनएसई की स्थापना का प्रमुख उद्देश्य भारतीय प्रतिभूति बाजार में अधिक पारदर्शिता लाना था।
इलेक्ट्रॉनिक ऑर्डर आधारित प्रणाली ने निवेशकों को बाजार में उपलब्ध खरीद और बिक्री कीमतों की बेहतर जानकारी प्रदान की।
देश के अलग-अलग क्षेत्रों के निवेशकों और ब्रोकरों को एक ही राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक बाजार से जोड़ना इसका एक महत्वपूर्ण उद्देश्य था।
इससे ट्रेडिंग की गति बढ़ी, लेन-देन की लागत कम करने में सहायता मिली और शेयर बाजार में प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहन मिला।
एनएसई से पहले भारतीय शेयर बाजार में अनेक क्षेत्रीय एक्सचेंज और ट्रेडिंग फ्लोर आधारित प्रणालियाँ थीं। इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय ट्रेडिंग ने इस संरचना में बड़ा परिवर्तन किया।
एनएसई के प्रवर्तक
प्रमुख भारतीय वित्तीय संस्थाएँ
राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज को प्रारंभ में भारत की प्रमुख वित्तीय संस्थाओं, बैंकों और बीमा संस्थानों द्वारा प्रवर्तित किया गया था।
आईडीबीआई इसकी स्थापना में महत्वपूर्ण संस्थागत प्रवर्तकों में शामिल था।
इसके अतिरिक्त भारतीय जीवन बीमा निगम, भारतीय सामान्य बीमा निगम तथा अन्य सार्वजनिक वित्तीय संस्थाओं और बैंकों ने इसकी स्थापना में भूमिका निभाई।
इसलिए IDBI, LIC और GIC को एनएसई की प्रारंभिक संस्थागत स्थापना से जुड़े प्रमुख नामों के रूप में याद किया जा सकता है।
लेकिन वर्तमान शेयरधारिता और प्रारंभिक प्रवर्तक संरचना को एक समान नहीं समझना चाहिए, क्योंकि समय के साथ NSE की शेयरधारिता संरचना बदली है।
निफ्टी-50
एनएसई का प्रमुख शेयर सूचकांक
एनएसई का सबसे प्रसिद्ध बेंचमार्क सूचकांक निफ्टी-50 है।
यह भारतीय शेयर बाजार की बड़ी और अधिक तरल कंपनियों के प्रदर्शन को दर्शाने वाला प्रमुख सूचकांक है।
इसे पहले एस एंड पी सीएनएक्स निफ्टी और बाद में सीएनएक्स निफ्टी के नाम से जाना जाता था।
वर्ष 2015 में इसका नाम बदलकर निफ्टी-50 किया गया। :contentReference[oaicite:6]{index=6}
निफ्टी-50 भारतीय इक्विटी बाजार की दिशा समझने के लिए सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले बेंचमार्क सूचकांकों में से एक है।
🎯 नाम क्रम
एस एंड पी सीएनएक्स निफ्टी → सीएनएक्स निफ्टी → निफ्टी-50
निफ्टी-500
व्यापक शेयर बाजार सूचकांक
निफ्टी-500 एनएसई से संबंधित एक व्यापक बाजार सूचकांक है।
यह पात्र शेयरों में पूर्ण बाजार पूंजीकरण के आधार पर चुनी गई शीर्ष 500 कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है। :contentReference[oaicite:7]{index=7}
इसे पहले एस एंड पी सीएनएक्स-500 और बाद में सीएनएक्स-500 जैसे नामों से जाना जाता था।
वर्तमान नाम निफ्टी-500 है।
यह निफ्टी-50 की तुलना में भारतीय शेयर बाजार के अधिक व्यापक हिस्से के प्रदर्शन को दर्शाता है।
📗 अंतर
निफ्टी-50 = 50 प्रमुख कंपनियाँ
निफ्टी-500 = 500 कंपनियों वाला व्यापक सूचकांक
स्टॉक एक्सचेंजों में विदेशी निवेश
पुरानी 26% + 23% व्यवस्था में सुधार
पुराने नोट्स में स्टॉक एक्सचेंजों में अधिकतम 49 प्रतिशत विदेशी निवेश की सीमा के भीतर 26 प्रतिशत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश और 23 प्रतिशत विदेशी संस्थागत निवेश का अलग-अलग विभाजन दिया जाता था।
यह पुरानी व्यवस्था थी। SEBI के पुराने दस्तावेजों में वास्तव में 49 प्रतिशत कुल विदेशी निवेश के भीतर 26 प्रतिशत FDI और 23 प्रतिशत FII की सीमा का उल्लेख मिलता है। :contentReference[oaicite:8]{index=8}
बाद के वर्षों में विदेशी निवेश व्यवस्था में बदलाव किए गए और पुराने 26 प्रतिशत FDI तथा 23 प्रतिशत FII वाले कठोर विभाजन को वर्तमान नियम समझना सही नहीं है।
स्टॉक एक्सचेंजों की विदेशी शेयरधारिता आज SEBI के स्वामित्व एवं शासन नियमों, विदेशी निवेश नीति तथा अन्य लागू नियमों के अधीन होती है।
उदाहरण के लिए 31 मार्च 2026 को NSE में कुल विदेशी शेयरधारिता लगभग 28.1 प्रतिशत थी, जिसमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश दोनों शामिल थे। :contentReference[oaicite:9]{index=9}
⚠️ पुराना तथ्य
49% = 26% FDI + 23% FII को वर्तमान स्थायी व्यवस्था न मानें। यह पुराने नियामकीय ढाँचे से संबंधित तथ्य है।
विश्व स्तर पर एनएसई का महत्व
बड़े इलेक्ट्रॉनिक बाजारों में स्थान
राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज आज भारत के सबसे महत्वपूर्ण प्रतिभूति बाजार संस्थानों में से एक है।
वित्त वर्ष 2025-26 में NSE ने अपने आधिकारिक विवरण में नकद इक्विटी में ट्रेड की संख्या और इक्विटी डेरिवेटिव अनुबंधों के संदर्भ में स्वयं को विश्व के सबसे बड़े एक्सचेंजों में शामिल बताया है। :contentReference[oaicite:10]{index=10}
इसकी सफलता में इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग, देशव्यापी नेटवर्क, उच्च ट्रेडिंग मात्रा और तकनीकी आधारभूत संरचना की बड़ी भूमिका रही है।
इसलिए सामान्य रूप से इसे दुनिया के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों में गिना जाता है, लेकिन “विश्व में कौन-सा स्थान” जैसे प्रश्न में वर्ष और माप—जैसे ट्रेड की संख्या, बाजार पूंजीकरण या डेरिवेटिव अनुबंध—स्पष्ट होना चाहिए।
ओवर द काउंटर एक्सचेंज ऑफ इंडिया
छोटी एवं मध्यम कंपनियों के लिए स्थापित बाजार
ओवर द काउंटर एक्सचेंज ऑफ इंडिया को छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों को पूंजी बाजार तक पहुँच प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था।
इसका गठन 1990 के दशक के प्रारंभिक दौर में हुआ और इसे भारत में इलेक्ट्रॉनिक तथा स्क्रीन आधारित प्रतिभूति कारोबार के शुरुआती प्रयोगों में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।
इसके प्रमुख संस्थागत प्रवर्तकों में यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई, आईडीबीआई, भारतीय जीवन बीमा निगम, भारतीय सामान्य बीमा निगम, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स तथा अन्य वित्तीय संस्थाएँ शामिल थीं।
इसका उद्देश्य ऐसी कंपनियों के लिए संगठित बाजार उपलब्ध कराना था जिन्हें बड़े पारंपरिक स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध होने में कठिनाई होती थी।
⚠️ NSE और OTCEI में भ्रम
OTCEI भारत में स्क्रीन आधारित ट्रेडिंग के शुरुआती प्रयोगों में था, जबकि NSE को भारत का पहला पूर्णतः स्वचालित स्क्रीन आधारित राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज माना जाता है।
कागजरहित शेयर लेन-देन
डीमैट व्यवस्था में सावधानी
OTCEI ने इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग और प्रतिभूति बाजार के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण प्रयोग किए।
पुरानी प्रतियोगी परीक्षा पुस्तकों में OTCEI को भारत के प्रारंभिक कागजरहित या डीमैट आधारित शेयर कारोबार से जोड़ा जाता है।
लेकिन भारत में व्यापक वैधानिक डिपॉजिटरी और डीमैट व्यवस्था बाद में डिपॉजिटरी अधिनियम, 1996 तथा एनएसडीएल और अन्य डिपॉजिटरी संस्थाओं के विकास के साथ स्थापित हुई।
इसलिए “भारत का पहला डीमैट शेयर लेन-देन निश्चित रूप से OTCEI पर हुआ” जैसे कथन को बिना आधिकारिक ऐतिहासिक संदर्भ के स्थायी तथ्य की तरह याद करना उचित नहीं है।
OTCEI का अंत
2015 में स्टॉक एक्सचेंज के रूप में exit
समय के साथ NSE और BSE जैसे राष्ट्रीय स्तर के बड़े इलेक्ट्रॉनिक एक्सचेंजों के विस्तार के कारण OTCEI का महत्व और ट्रेडिंग गतिविधि कम होती गई।
इसके बाद OTCEI ने स्टॉक एक्सचेंज के रूप में बाहर निकलने की प्रक्रिया अपनाई।
SEBI ने 31 मार्च 2015 के आदेश द्वारा OTCEI को स्टॉक एक्सचेंज के रूप में exit प्रदान किया। :contentReference[oaicite:11]{index=11}
इसलिए इसे केवल “SEBI ने 2015 में स्थगित कर दिया” कहना सही नहीं है। अधिक सटीक तथ्य है कि 31 मार्च 2015 को SEBI ने इसे स्टॉक एक्सचेंज के रूप में exit दिया।
🎯 परीक्षा तथ्य
OTCEI — 31 मार्च 2015 को स्टॉक एक्सचेंज के रूप में exit।
रेसिडेक्स
भारत का आधिकारिक आवास मूल्य सूचकांक
रेसिडेक्स राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा विकसित भारत का पहला आधिकारिक आवास मूल्य सूचकांक है।
इसे भारत सरकार के वित्त मंत्रालय की पहल पर राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा विकसित किया गया।
इसका प्रारंभिक संस्करण जुलाई 2007 में शुरू किया गया। :contentReference[oaicite:12]{index=12}
इसका उद्देश्य देश के विभिन्न शहरों में आवासीय संपत्तियों की कीमतों में होने वाले परिवर्तन को मापना और आवास बाजार के रुझानों की जानकारी उपलब्ध कराना है।
⚠️ भूमि मूल्य सूचकांक नहीं
रेसिडेक्स को सामान्य “भूमि और रियल एस्टेट मूल्य सूचकांक” कहना बहुत व्यापक है। यह मुख्यतः आवासीय संपत्ति के मूल्य को मापने वाला आवास मूल्य सूचकांक है।
रेसिडेक्स का विकास
पुराने सूचकांक से नई प्रणाली तक
रेसिडेक्स का प्रारंभिक संस्करण 2007 को आधार वर्ष मानकर तैयार किया गया था।
यह सूचकांक मार्च 2015 तक समय-समय पर अद्यतन किया गया और उस समय इसकी कवरेज धीरे-धीरे बढ़ाकर 26 शहरों तक की गई थी। :contentReference[oaicite:13]{index=13}
इसके बाद राष्ट्रीय आवास बैंक ने रेसिडेक्स की कार्यप्रणाली और डेटा प्रणाली को नया रूप दिया।
वर्तमान NHB RESIDEX व्यवस्था आवास मूल्य परिवर्तन के विश्लेषण के लिए अधिक व्यापक डेटाबेस और सूचकांक प्रणाली प्रदान करती है।
इससे नीति निर्माताओं, बैंकों, आवास वित्त संस्थाओं, निवेशकों, खरीदारों और शोधकर्ताओं को आवास बाजार की दिशा समझने में सहायता मिलती है।
शेयर बाजार और सूचकांक में अंतर
विश्व सूची समझने के लिए
स्टॉक एक्सचेंज एक वास्तविक संगठित बाजार या संस्था है जहाँ प्रतिभूतियों का कारोबार होता है।
इसके विपरीत शेयर सूचकांक चयनित कंपनियों के शेयरों के प्रदर्शन को मापने वाली सांख्यिकीय संख्या है।
उदाहरण के लिए न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज एक एक्सचेंज है, जबकि डॉव जोन्स औद्योगिक औसत एक सूचकांक है।
इसी प्रकार जापान एक्सचेंज समूह/टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज बाजार संस्था है, जबकि निक्केई-225 जापान का प्रसिद्ध शेयर सूचकांक है।
🎯 बहुत महत्वपूर्ण
एक्सचेंज = जहाँ शेयर खरीदे-बेचे जाते हैं
सूचकांक = बाजार के प्रदर्शन का माप
विश्व के प्रमुख शेयर सूचकांक
सही और वर्तमान नाम
| सूचकांक / पुराना नाम | देश / बाजार | सही वर्तमान संदर्भ |
|---|---|---|
| डॉव जोन्स औद्योगिक औसत | अमेरिका | अमेरिकी ब्लू-चिप कंपनियों का प्रमुख सूचकांक; इसे केवल न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक न समझें |
| निक्केई-225 | जापान | टोक्यो बाजार का प्रसिद्ध शेयर सूचकांक |
| नास्डैक | अमेरिका | NASDAQ स्वयं एक स्टॉक एक्सचेंज है; NASDAQ Composite उसका प्रमुख व्यापक सूचकांक है |
| बोवेस्पा | ब्राजील | वर्तमान प्रमुख नाम इबोवेस्पा; B3 का प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक :contentReference[oaicite:14]{index=14} |
| IBX / IBrX | ब्राजील | B3 द्वारा संचालित ब्राजील के व्यापक शेयर सूचकांक परिवार से संबंधित |
| हैंग सेंग | हांगकांग | हांगकांग शेयर बाजार का प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक :contentReference[oaicite:15]{index=15} |
| सिमेक्स | सिंगापुर | यह वर्तमान शेयर सूचकांक नहीं; पुराना Singapore International Monetary Exchange था, जो 1999 में SGX में विलय हुआ :contentReference[oaicite:16]{index=16} |
| स्ट्रेट्स टाइम्स सूचकांक | सिंगापुर | SGX में सूचीबद्ध 30 प्रमुख कंपनियों का प्रमुख सूचकांक :contentReference[oaicite:17]{index=17} |
| कोस्पी | दक्षिण कोरिया | कोरिया के मुख्य शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक |
| मिब्टेल | इटली | पुराना सूचकांक; 2009 में बंद, FTSE Italia All-Share ने स्थान लिया :contentReference[oaicite:18]{index=18} |
| KLSE कम्पोजिट | मलेशिया | पुराना नाम; वर्तमान प्रमुख सूचकांक FTSE Bursa Malaysia KLCI |
| शंघाई कम्पोजिट | चीन | शंघाई स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख व्यापक सूचकांक |
| मिड डैक्स / MDAX | जर्मनी | जर्मनी की मध्यम आकार की सूचीबद्ध कंपनियों का महत्वपूर्ण सूचकांक |
| SET सूचकांक | थाईलैंड | स्टॉक एक्सचेंज ऑफ थाईलैंड का प्रमुख सूचकांक |
| TAIEX | ताइवान | ताइवान स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख पूंजीकरण-भारित सूचकांक |
| S&P/TSX Composite | कनाडा | टोरंटो स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख व्यापक सूचकांक |
| IPC | मैक्सिको | मैक्सिको शेयर बाजार का प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक |
| FTSE-100 | यूनाइटेड किंगडम | लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध 100 बड़ी कंपनियों का प्रमुख सूचकांक |
| जकार्ता कम्पोजिट | इंडोनेशिया | इंडोनेशिया स्टॉक एक्सचेंज का व्यापक शेयर सूचकांक |
| सियोल कम्पोजिट | दक्षिण कोरिया | पुरानी पुस्तकों में प्रयुक्त नाम; वर्तमान मानक संदर्भ कोस्पी है, इसलिए इसे अलग प्रमुख वर्तमान सूचकांक न समझें |
पुराने नाम जिनसे भ्रम हो सकता है
वर्तमान परीक्षा के लिए सुधार
बोवेस्पा शब्द अभी भी सामान्य अध्ययन पुस्तकों में मिलता है, लेकिन ब्राजील के प्रमुख बेंचमार्क का सही नाम इबोवेस्पा है और इसे B3 संचालित करता है। :contentReference[oaicite:19]{index=19}
मिब्टेल वर्तमान इटली का प्रमुख सूचकांक नहीं है। इसे 2009 में बंद कर दिया गया और नई FTSE Italia श्रृंखला ने इसका स्थान लिया। वर्तमान प्रमुख इतालवी ब्लू-चिप सूचकांक FTSE MIB है। :contentReference[oaicite:20]{index=20}
सिमेक्स कोई वर्तमान सिंगापुर शेयर सूचकांक नहीं है। यह पुराना डेरिवेटिव एक्सचेंज था जिसका Singapore Exchange के गठन में विलय हुआ।
सिंगापुर का प्रमुख शेयर सूचकांक स्ट्रेट्स टाइम्स इंडेक्स है। :contentReference[oaicite:21]{index=21}
सियोल कम्पोजिट और कोस्पी को दो स्वतंत्र प्रमुख वर्तमान सूचकांकों की तरह याद करना भ्रम पैदा कर सकता है। सामान्य परीक्षा में दक्षिण कोरिया का प्रमुख सूचकांक कोस्पी याद रखें।
प्रमुख देश और सूचकांक
त्वरित याद करने की सूची
| देश / क्षेत्र | प्रमुख सूचकांक |
|---|---|
| भारत | निफ्टी-50, सेंसेक्स |
| अमेरिका | डॉव जोन्स, S&P 500, नास्डैक कम्पोजिट |
| जापान | निक्केई-225 |
| हांगकांग | हैंग सेंग |
| चीन | शंघाई कम्पोजिट |
| यूनाइटेड किंगडम | FTSE-100 |
| दक्षिण कोरिया | कोस्पी |
| सिंगापुर | स्ट्रेट्स टाइम्स इंडेक्स |
| ब्राजील | इबोवेस्पा |
| कनाडा | S&P/TSX Composite |
| इटली | FTSE MIB |
| थाईलैंड | SET Index |
| ताइवान | TAIEX |
| मैक्सिको | IPC |
| इंडोनेशिया | Jakarta Composite |
⚡ अंतिम पुनरावृत्ति बिंदु
राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज — स्थापना 1992।
एनएसई को 1993 में स्टॉक एक्सचेंज के रूप में मान्यता मिली।
एनएसई ने 1994 में परिचालन शुरू किया।
एनएसई की स्थापना फेरवानी समिति की सिफारिशों से जुड़ी थी।
एनएसई भारत का पहला पूर्णतः स्वचालित स्क्रीन आधारित राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज था।
एनएसई का मुख्यालय मुंबई में है।
IDBI, LIC और GIC सहित प्रमुख वित्तीय संस्थाएँ इसकी प्रारंभिक स्थापना और प्रवर्तन से जुड़ी थीं।
एनएसई का प्रमुख सूचकांक निफ्टी-50 है।
एस एंड पी सीएनएक्स निफ्टी → सीएनएक्स निफ्टी → निफ्टी-50।
एस एंड पी सीएनएक्स-500 का वर्तमान नाम निफ्टी-500 है।
पुरानी 49% = 26% FDI + 23% FII व्यवस्था को वर्तमान नियम न समझें।
OTCEI छोटे और मध्यम उद्यमों को पूंजी बाजार से जोड़ने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था।
OTCEI में UTI, SBI Capital Markets, ICICI और अन्य वित्तीय संस्थाएँ प्रवर्तकों में शामिल थीं।
SEBI ने 31 मार्च 2015 को OTCEI को स्टॉक एक्सचेंज के रूप में exit प्रदान किया।
RESIDEX — राष्ट्रीय आवास बैंक — जुलाई 2007।
RESIDEX मुख्यतः आवासीय संपत्ति मूल्य सूचकांक है, सामान्य भूमि मूल्य सूचकांक नहीं।
डॉव जोन्स — अमेरिका।
निक्केई-225 — जापान।
नास्डैक कम्पोजिट — अमेरिका।
इबोवेस्पा — ब्राजील।
हैंग सेंग — हांगकांग।
स्ट्रेट्स टाइम्स — सिंगापुर।
कोस्पी — दक्षिण कोरिया।
शंघाई कम्पोजिट — चीन।
FTSE-100 — यूनाइटेड किंगडम।
S&P/TSX Composite — कनाडा।
TAIEX — ताइवान।
SET Index — थाईलैंड।
IPC — मैक्सिको।
Jakarta Composite — इंडोनेशिया।
मिब्टेल पुराना इतालवी सूचकांक है; वर्तमान प्रमुख इतालवी सूचकांक FTSE MIB है।
सिमेक्स वर्तमान शेयर सूचकांक नहीं है; यह पुराना सिंगापुर डेरिवेटिव एक्सचेंज था जो SGX में विलय हो गया।
सबसे महत्वपूर्ण अंतर याद रखें—स्टॉक एक्सचेंज व्यापार का मंच है, जबकि शेयर सूचकांक बाजार के प्रदर्शन का माप है।