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भारत सरकार की प्रमुख योजनाएँ एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति
MAJOR GOVERNMENT SCHEMES

भारत सरकार की प्रमुख योजनाएँ

रोजगार, आवास, कौशल, उद्यमिता, स्वच्छता, शिक्षा और शहरी विकास

प्रमुख सरकारी योजनाएँ

भारत सरकार द्वारा रोजगार, गरीबी उन्मूलन, उद्यमिता, आवास, कौशल विकास, स्वच्छता, ऊर्जा, शिक्षा तथा शहरी एवं ग्रामीण विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण योजनाएँ चलाई गई हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में इन योजनाओं के शुभारंभ वर्ष, उद्देश्य, संबंधित मंत्रालय तथा प्रमुख विशेषताओं से प्रश्न पूछे जाते हैं।

01

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम

MGNREGA

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा बढ़ाने वाला अधिकार-आधारित कानून है। इसके अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण परिवार के उन वयस्क सदस्यों को एक वित्तीय वर्ष में कम-से-कम 100 दिनों के अकुशल शारीरिक मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी दी जाती है, जो स्वेच्छा से ऐसा कार्य करना चाहते हैं।

यहाँ 100 दिनों की गारंटी प्रति व्यक्ति नहीं बल्कि प्रति ग्रामीण परिवार होती है। यह अंतर परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।

अधिनियम में महिलाओं की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है। लाभार्थियों में कम-से-कम एक-तिहाई महिलाएँ होनी चाहिए। इससे ग्रामीण महिलाओं को रोजगार, आय और आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर मिलता है।

मनरेगा केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इसके अंतर्गत जल संरक्षण, सूखा-रोधी कार्य, भूमि विकास, सिंचाई, परंपरागत जलस्रोतों का पुनर्जीवन, वृक्षारोपण तथा मृदा एवं प्राकृतिक संसाधन संरक्षण जैसे कार्य किए जाते हैं। इससे टिकाऊ ग्रामीण परिसंपत्तियों के निर्माण और दीर्घकालिक आजीविका को बढ़ावा मिलता है।

इस कार्यक्रम का शुभारंभ 2 फरवरी 2006 को आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले से किया गया। पहले चरण में इसे देश के 200 जिलों में लागू किया गया और बाद में चरणबद्ध तरीके से इसका विस्तार देश के सभी ग्रामीण जिलों तक किया गया।

मूल कानून का नाम राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम था। 2 अक्टूबर 2009 से इसका नाम महात्मा गांधी के नाम पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम कर दिया गया।

मुख्य विशेषताएँ एवं पहल

  • 100 दिनों की रोजगार गारंटी: ग्रामीण परिवार के पात्र वयस्क सदस्यों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों तक अकुशल शारीरिक मजदूरी रोजगार की गारंटी।
  • 15 दिनों में रोजगार: काम की मांग करने के बाद सामान्यतः 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराया जाना चाहिए। ऐसा न होने पर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार बेरोजगारी भत्ता देय होता है, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार की होती है।
  • महिला भागीदारी: लाभार्थियों में कम-से-कम एक-तिहाई महिलाएँ होनी चाहिए।
  • पूर्ववर्ती रोजगार कार्यक्रम: राष्ट्रीय खाद्य के बदले काम कार्यक्रम तथा संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना जैसे पूर्ववर्ती कार्यक्रमों के संसाधनों और क्षेत्रों को मनरेगा के विस्तार के साथ समाहित किया गया।
  • कार्यस्थल सुविधाएँ: सुरक्षित पेयजल, प्राथमिक उपचार तथा निर्धारित परिस्थितियों में छोटे बच्चों की देखभाल जैसी सुविधाओं का प्रावधान है।
  • पारदर्शिता: ई-मस्टर रोल, डिजिटल निगरानी, प्रत्यक्ष बैंक/डाकघर भुगतान तथा आधार आधारित प्रणालियों का उपयोग पारदर्शिता बढ़ाने के लिए किया जाता है।
  • प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन: जल संरक्षण, भूमि एवं मिट्टी सुधार, वृक्षारोपण, सिंचाई तथा सूखा-रोधी कार्य इसके महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल हैं।
  • सामाजिक अंकेक्षण: ग्रामसभा द्वारा सामाजिक अंकेक्षण मनरेगा की जवाबदेही और पारदर्शिता का महत्वपूर्ण आधार है।
  • मजदूरी भुगतान: मजदूरी का समय पर भुगतान अधिनियम का महत्वपूर्ण प्रावधान है और भुगतान में देरी को कम करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों का उपयोग बढ़ाया गया है।

⚠️ वित्तीय व्यवस्था को सही समझें

मनरेगा के लिए सामान्य रूप से “केंद्र और राज्य का 90:10 अनुपात” लिखना सही नहीं है। केंद्र सरकार अकुशल मजदूरी की लागत वहन करती है तथा सामग्री और कुशल/अर्धकुशल मजदूरी की लागत में भी निर्धारित केंद्रीय हिस्सा देती है। राज्य सरकार पर सामग्री लागत का निर्धारित हिस्सा तथा बेरोजगारी भत्ते जैसी जिम्मेदारियाँ होती हैं।

🎯 परीक्षा तथ्य

अधिनियम — 2005 | क्रियान्वयन — 2 फरवरी 2006 | प्रारंभिक जिले — 200 | रोजगार — 100 दिन प्रति ग्रामीण परिवार | महिला भागीदारी — न्यूनतम 1/3

02

स्टार्टअप इंडिया

Startup India

स्टार्टअप इंडिया भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य देश में नवाचार, उद्यमिता और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देना है। इसका शुभारंभ 16 जनवरी 2016 को किया गया।

इस पहल का व्यापक उद्देश्य युवाओं और नवप्रवर्तकों को केवल नौकरी खोजने तक सीमित न रखकर नए उद्यम स्थापित करने, रोजगार उत्पन्न करने तथा नवाचार आधारित आर्थिक विकास में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करना है।

पात्र उद्यमों को उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग से स्टार्टअप मान्यता प्राप्त हो सकती है। मान्यता प्राप्त स्टार्टअप को निर्धारित शर्तों के अंतर्गत अनुपालन में सरलता, बौद्धिक संपदा अधिकार संबंधी सहायता, सार्वजनिक खरीद में कुछ रियायतें तथा वित्तीय सहायता तंत्र का लाभ मिल सकता है।

आयकर अधिनियम की धारा 80-IAC के अंतर्गत पात्र और स्वीकृत स्टार्टअप को निर्धारित शर्तों के अनुसार स्थापना के शुरुआती दस वर्षों में से लगातार तीन वित्तीय वर्षों के लिए आयकर कटौती का लाभ मिल सकता है। इसलिए यह कहना कि प्रत्येक स्टार्टअप को शुरू होते ही पहले तीन वर्षों के लिए स्वतः आयकर छूट मिल जाती है, सही नहीं है।

स्टार्टअप के वित्तपोषण को प्रोत्साहित करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के फंड ऑफ फंड्स की व्यवस्था की गई। इसका उद्देश्य विभिन्न वैकल्पिक निवेश कोषों के माध्यम से स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में पूंजी उपलब्ध कराना है।

स्टार्टअप इंडिया के अंतर्गत स्व-प्रमाणीकरण द्वारा कुछ श्रम एवं पर्यावरण संबंधी अनुपालनों में सरलता, पेटेंट आवेदन की तेज प्रक्रिया, पेटेंट शुल्क में रियायत और बौद्धिक संपदा संबंधी सहायता भी महत्वपूर्ण विशेषताएँ हैं।

यह पहल रोजगार सृजन, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देती है तथा मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और कौशल विकास जैसी व्यापक राष्ट्रीय पहलों के साथ भी जुड़ी हुई है।

🎯 परीक्षा तथ्य

स्टार्टअप इंडिया — 16 जनवरी 2016 | प्रमुख उद्देश्य — नवाचार + उद्यमिता + रोजगार सृजन | फंड ऑफ फंड्स — ₹10,000 करोड़

03

स्टैंड अप इंडिया

Stand Up India

स्टैंड अप इंडिया योजना का शुभारंभ 5 अप्रैल 2016 को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा महिला उद्यमियों में उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया।

योजना का उद्देश्य अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक की प्रत्येक बैंक शाखा से कम-से-कम एक अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के उधारकर्ता और कम-से-कम एक महिला उधारकर्ता को नया उद्यम स्थापित करने के लिए बैंक ऋण उपलब्ध कराने में सहायता करना है।

इसके अंतर्गत सामान्यतः ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक का समग्र ऋण उपलब्ध कराया जाता है। यह ऋण विनिर्माण, सेवा, व्यापार तथा कृषि से संबद्ध गतिविधियों में ग्रीनफील्ड अर्थात पहली बार स्थापित किए जाने वाले नए उद्यम के लिए है।

समग्र ऋण में सावधि ऋण और कार्यशील पूंजी दोनों शामिल हो सकते हैं। ऋण सामान्यतः परियोजना लागत के 75% तक को कवर कर सकता है; लेकिन यदि अन्य योजनाओं से सहायता के कारण उधारकर्ता का अपना योगदान और अन्य सहायता मिलाकर परियोजना लागत का 25% से अधिक हो जाता है तो यह 75% वाली शर्त लागू नहीं होती।

मार्जिन मनी सहायता को पात्र केंद्रीय या राज्य योजनाओं के साथ जोड़ा जा सकता है। फिर भी उधारकर्ता को परियोजना लागत का कम-से-कम 10% स्वयं देना होता है।

योजना में उद्यमियों को प्रशिक्षण, परियोजना तैयार करने, बैंक ऋण आवेदन और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं के लिए मार्गदर्शन तथा हैंडहोल्डिंग सहायता भी प्रदान की जाती है।

इससे सामाजिक समावेशन, आर्थिक सशक्तिकरण, स्वरोजगार और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलता है।

📗 भ्रम से बचें

स्टार्टअप इंडिया का मुख्य केंद्र नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र है, जबकि स्टैंड अप इंडिया विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला उद्यमियों को बैंक ऋण के माध्यम से उद्यम स्थापित करने में सहायता देता है।

04

प्रधानमंत्री आवास योजना

Pradhan Mantri Awas Yojana

प्रधानमंत्री आवास योजना को शहरी और ग्रामीण भागों के संदर्भ में अलग-अलग समझना आवश्यक है। शहरी क्षेत्र की योजना को प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्र की योजना को प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण कहा जाता है।

प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी का शुभारंभ 25 जून 2015 को किया गया था। इसका मूल लक्ष्य शहरी क्षेत्रों में पात्र परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने में सहायता करना और सभी के लिए आवास के लक्ष्य की दिशा में कार्य करना था।

मूल शहरी मिशन को चरणबद्ध तरीके से विभिन्न शहरों में लागू किया गया। परियोजनाओं और केंद्रीय सहायता के वित्तीय प्रबंधन एवं निगरानी में इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों का उपयोग किया गया।

मूल योजना का लक्ष्य वर्ष 2022 से जुड़ा था, लेकिन आवास कार्यक्रम इसके बाद समाप्त नहीं हुआ। स्वीकृत आवासों को पूरा करने के लिए अवधि बढ़ाई गई और बाद में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 को 1 सितंबर 2024 से लागू किया गया। इसका उद्देश्य अगले पाँच वर्षों में अतिरिक्त पात्र शहरी परिवारों को घर बनाने, खरीदने या किफायती किराये के आवास तक पहुँच में सहायता देना है।

ग्रामीण क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण को वर्ष 2016 में पूर्ववर्ती इंदिरा आवास योजना का पुनर्गठन करके लागू किया गया। इसलिए शहरी और ग्रामीण आवास योजनाओं की शुरुआत तथा विशेषताओं को एक-दूसरे से नहीं मिलाना चाहिए।

⚠️ महत्वपूर्ण सुधार

प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी की शुरुआत 1 जून 2015 नहीं, बल्कि 25 जून 2015 मानी जाती है। साथ ही “2022 तक आवास” मूल मिशन का लक्ष्य था; वर्तमान अध्ययन में इसके बाद के विस्तार और शहरी 2.0 को भी ध्यान में रखना चाहिए।

05

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना

Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का शुभारंभ 15 जुलाई 2015 को विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर किया गया। इसका उद्देश्य युवाओं को उद्योग की आवश्यकता के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार और आजीविका के योग्य बनाना है।

यह कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की प्रमुख कौशल प्रशिक्षण योजनाओं में से एक है और इसका क्रियान्वयन राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के माध्यम से किया जाता है।

योजना में अल्पकालिक कौशल प्रशिक्षण, प्रशिक्षण का आकलन एवं प्रमाणन, पूर्व अर्जित कौशल की मान्यता तथा रोजगार एवं आजीविका से जोड़ने पर बल दिया जाता है।

समय के साथ योजना के विभिन्न चरण लागू किए गए हैं और कौशल प्रशिक्षण को रोजगार बाजार की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया गया है।

🎯 परीक्षा तथ्य

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना — 15 जुलाई 2015 — विश्व युवा कौशल दिवस — कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय — राष्ट्रीय कौशल विकास निगम

06

अमृत योजना

AMRUT

अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन अर्थात अमृत योजना का शुभारंभ 25 जून 2015 को किया गया। इसका उद्देश्य शहरों में बुनियादी शहरी सुविधाओं और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना था।

मूल अमृत मिशन में लगभग 500 शहरों एवं कस्बों को शामिल किया गया। इसमें जलापूर्ति, सीवरेज एवं सेप्टेज प्रबंधन, वर्षाजल निकासी, गैर-मोटर चालित शहरी परिवहन तथा हरित क्षेत्रों और पार्कों के विकास पर बल दिया गया।

बाद में अमृत 2.0 शुरू किया गया, जिसमें शहरी क्षेत्रों में जल सुरक्षा, सार्वभौमिक नल जल कवरेज, सीवरेज एवं सेप्टेज प्रबंधन और जल निकायों के पुनर्जीवन पर अधिक बल दिया गया है।

⚠️ तिथि याद रखें

अमृत योजना का शुभारंभ 24 जून नहीं, 25 जून 2015 को हुआ था।

07

हृदय योजना

HRIDAY

राष्ट्रीय विरासत शहर विकास एवं संवर्धन योजना अर्थात हृदय योजना का शुभारंभ 21 जनवरी 2015 को किया गया था।

इसका उद्देश्य भारत के चयनित ऐतिहासिक एवं विरासत शहरों में सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ उनसे जुड़ी शहरी आधारभूत संरचना का विकास करना था।

योजना के अंतर्गत 12 विरासत शहर चुने गए थे—अजमेर, अमरावती, अमृतसर, बादामी, द्वारका, गया, कांचीपुरम, मथुरा, पुरी, वाराणसी, वेलंकन्नी और वारंगल।

यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना थी और इसमें 100% केंद्रीय वित्तीय सहायता का प्रावधान था।

08

स्मार्ट सिटी मिशन

Smart Cities Mission

स्मार्ट सिटी मिशन की शुरुआत 25 जून 2015 को की गई। इसका उद्देश्य चयनित शहरों में आर्थिक विकास, बेहतर शहरी सेवाओं और नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना था।

इसके अंतर्गत बेहतर आधारभूत संरचना, जल एवं बिजली आपूर्ति, स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, शहरी परिवहन, सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सेवाओं, ई-शासन, सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता पर बल दिया गया।

मिशन के अंतर्गत 100 शहरों का चयन प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया के माध्यम से किया गया। शहरों में क्षेत्र-आधारित विकास तथा पूरे शहर के लिए तकनीक आधारित समाधान इसके प्रमुख दृष्टिकोण रहे।

09

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना

Pradhan Mantri Ujjwala Yojana

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का शुभारंभ 1 मई 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया से किया गया। इसका उद्देश्य गरीब परिवारों की वयस्क महिलाओं को स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन के रूप में एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराना है।

मूल योजना में पात्र परिवार की महिला के नाम पर एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए ₹1,600 प्रति कनेक्शन की सरकारी सहायता का प्रावधान किया गया था। इसका उद्देश्य जमा-रहित एलपीजी कनेक्शन की लागत में सहायता देना था।

इस योजना का प्रमुख उद्देश्य लकड़ी, उपले, कोयला और अन्य पारंपरिक ईंधनों से निकलने वाले धुएँ से महिलाओं और परिवारों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को कम करना तथा स्वच्छ ऊर्जा तक पहुँच बढ़ाना है।

बाद में उज्ज्वला 2.0 के माध्यम से योजना का विस्तार किया गया। वर्तमान पात्रता को केवल पुराने अर्थ में “बीपीएल सूची की महिला” तक सीमित समझना उचित नहीं है; निर्धारित गरीब परिवारों की पात्र वयस्क महिलाएँ वर्तमान नियमों के अनुसार आवेदन कर सकती हैं।

📗 याद रखें

उज्ज्वला योजना = महिला + गरीब परिवार + स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन + एलपीजी कनेक्शन

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आत्मनिर्भर भारत अभियान

Atmanirbhar Bharat Abhiyan

आत्मनिर्भर भारत अभियान की घोषणा प्रधानमंत्री द्वारा 12 मई 2020 को कोविड-19 महामारी के दौरान की गई। इसका उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत, प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनाना तथा भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में विकसित करना था।

इस अभियान के संदर्भ में लगभग ₹20 लाख करोड़ के विशेष आर्थिक एवं व्यापक पैकेज की घोषणा की गई थी।

अभियान में घरेलू उत्पादन, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, कृषि, निवेश, वित्तीय क्षेत्र और विभिन्न आर्थिक गतिविधियों को सहायता देने के उपाय शामिल किए गए। भूमि, श्रम, तरलता और कानूनों से संबंधित सुधारों पर भी बल दिया गया।

आत्मनिर्भर भारत का अर्थ दुनिया से अलग होना नहीं, बल्कि भारत की घरेलू क्षमता को मजबूत करते हुए वैश्विक अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखलाओं में अधिक प्रभावी भागीदारी करना है।

आत्मनिर्भर भारत के पाँच स्तंभ

अर्थव्यवस्था अवसंरचना प्रौद्योगिकी आधारित व्यवस्था जीवंत जनसांख्यिकी मांग
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उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना

UDAY

उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना को वर्ष 2015 में बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय और परिचालन स्थिति सुधारने के उद्देश्य से शुरू किया गया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे 5 नवंबर 2015 को मंजूरी दी।

योजना का उद्देश्य ऋणग्रस्त विद्युत वितरण कंपनियों को वित्तीय राहत देना, उनकी परिचालन दक्षता बढ़ाना, बिजली वितरण में होने वाली तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों को कम करना तथा बिजली क्षेत्र को दीर्घकालिक रूप से अधिक टिकाऊ बनाना था।

योजना के मूल ढाँचे में भाग लेने वाली राज्य सरकारों द्वारा विद्युत वितरण कंपनियों के 30 सितंबर 2015 तक के बकाया ऋण का 75% अपने ऊपर लेने की व्यवस्था महत्वपूर्ण थी।

इसका व्यापक लक्ष्य सस्ती और सुलभ 24×7 बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में वितरण क्षेत्र को मजबूत करना था।

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श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन

Shyama Prasad Mukherji Rurban Mission

श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन का शुभारंभ 21 फरवरी 2016 को किया गया। इसका संबंध ग्रामीण विकास मंत्रालय से है।

इस मिशन का उद्देश्य ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों का समूह विकसित करना था जिनमें ग्रामीण समुदाय की मूल प्रकृति और पहचान को बनाए रखते हुए शहरों जैसी आर्थिक, सामाजिक और आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा सकें।

योजना के अंतर्गत देश में 300 रूर्बन क्लस्टर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया। इन क्लस्टरों में कौशल विकास, आर्थिक गतिविधियों, सड़क संपर्क, डिजिटल सुविधाओं, स्वच्छता, जलापूर्ति तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं को बढ़ावा दिया गया।

रूर्बन शब्द ग्रामीण और शहरी विशेषताओं के संयोजन को व्यक्त करता है—अर्थात ग्रामीण क्षेत्र में शहरी स्तर की सुविधाओं का विकास।

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स्वच्छ भारत मिशन

Swachh Bharat Mission

स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर की गई। इसका प्रमुख प्रारंभिक लक्ष्य 2 अक्टूबर 2019 तक खुले में शौच से मुक्ति, शौचालयों का निर्माण और उपयोग तथा स्वच्छता के प्रति व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देना था।

मिशन को मुख्य रूप से स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण और स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के रूप में लागू किया गया। ग्रामीण भाग का संचालन पेयजल एवं स्वच्छता विभाग और शहरी भाग का संचालन आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय से जुड़ा है।

इसके अंतर्गत घरेलू एवं सामुदायिक शौचालयों का निर्माण, स्वच्छता जागरूकता, व्यवहार परिवर्तन, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन और साफ-सफाई को बढ़ावा दिया गया।

प्रथम चरण में खुले में शौच से मुक्ति पर विशेष बल था। बाद के चरणों में ओडीएफ स्थिति की स्थिरता तथा ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर अधिक ध्यान दिया गया।

🎯 परीक्षा तथ्य

शुभारंभ — 2 अक्टूबर 2014 | प्रारंभिक प्रमुख लक्ष्य — 2 अक्टूबर 2019 तक खुले में शौच से मुक्ति

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मध्याह्न भोजन योजना / प्रधानमंत्री पोषण योजना

Mid-Day Meal / PM POSHAN

राष्ट्रीय स्तर पर विद्यालयी पोषण कार्यक्रम की शुरुआत 15 अगस्त 1995 को प्राथमिक शिक्षा के लिए पोषण सहायता के राष्ट्रीय कार्यक्रम के रूप में की गई थी। इसका उद्देश्य बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के साथ विद्यालय में नामांकन, उपस्थिति और बच्चों को विद्यालय में बनाए रखने में सहायता करना था।

बाद में इसका विस्तार उच्च प्राथमिक कक्षाओं तक किया गया। वर्तमान में यह योजना प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण अर्थात पीएम पोषण के नाम से जानी जाती है और पात्र विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को गर्म पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने पर केंद्रित है।

यह केंद्र प्रायोजित योजना है, इसलिए इसके क्रियान्वयन में केंद्र तथा राज्य/केंद्रशासित प्रदेश दोनों की भूमिका होती है।

प्राथमिक स्तर अर्थात कक्षा 1 से 5 के बच्चे के भोजन का पोषण मानक प्रतिदिन कम-से-कम 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन है।

उच्च प्राथमिक स्तर अर्थात कक्षा 6 से 8 के लिए यह मानक प्रतिदिन कम-से-कम 700 कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन है।

⚠️ बहुत महत्वपूर्ण सुधार

700 कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन को प्राथमिक विद्यालय के सभी बच्चों का मानक न लिखें। यह उच्च प्राथमिक स्तर का मानक है। प्राथमिक स्तर के लिए 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन निर्धारित है।

स्तरकक्षाएँऊर्जाप्रोटीन
प्राथमिक1–5450 कैलोरी12 ग्राम
उच्च प्राथमिक6–8700 कैलोरी20 ग्राम
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020

National Education Policy 2020

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 29 जुलाई 2020 को मंजूरी दी गई। इसने वर्ष 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति, जिसे 1992 में संशोधित किया गया था, का स्थान लिया। इसका उद्देश्य भारतीय शिक्षा प्रणाली को अधिक समग्र, लचीला, बहुविषयक, समावेशी और आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना है।

नीति में वर्ष 2030 तक पूर्व-प्राथमिक से माध्यमिक स्तर तक शिक्षा में 100% सकल नामांकन अनुपात प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।

पारंपरिक 10+2 शैक्षिक संरचना के स्थान पर पाठ्यचर्या एवं शिक्षण की 5+3+3+4 संरचना प्रस्तावित की गई है, जो लगभग 3 से 18 वर्ष की आयु को समाहित करती है।

चरणअवधिआयुशैक्षिक स्तर
आधारभूत चरण5 वर्ष3–8 वर्ष3 वर्ष पूर्व-विद्यालय/आंगनवाड़ी + कक्षा 1–2
तैयारी चरण3 वर्ष8–11 वर्षकक्षा 3–5
मध्य चरण3 वर्ष11–14 वर्षकक्षा 6–8
माध्यमिक चरण4 वर्ष14–18 वर्षकक्षा 9–12

नीति में जहाँ संभव हो, कम-से-कम कक्षा 5 तक और वरीयता के रूप में कक्षा 8 तथा उसके आगे तक शिक्षा का माध्यम मातृभाषा, स्थानीय भाषा या क्षेत्रीय भाषा रखने की अनुशंसा की गई है। इसे पूरे देश के लिए किसी एक भाषा की अनिवार्यता नहीं समझना चाहिए।

विषयों के चयन में अधिक लचीलापन देने और कला, विज्ञान तथा वाणिज्य के बीच कठोर विभाजन को कम करने पर बल दिया गया है। इससे विद्यार्थी अपनी रुचि और आवश्यकता के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों के विषयों का संयोजन कर सकते हैं।

कक्षा 6 से व्यावसायिक शिक्षा, कौशल आधारित गतिविधियों तथा उपयुक्त इंटर्नशिप के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

बोर्ड परीक्षाओं को केवल रटने की क्षमता जाँचने के बजाय मुख्य अवधारणाओं, ज्ञान के प्रयोग और दक्षताओं को जाँचने की दिशा में विकसित करने की बात कही गई है।

सीखने के परिणामों पर आधारित मूल्यांकन, विद्यार्थियों के समग्र विकास और नियमित प्रगति के आकलन को बढ़ावा दिया गया है।

उच्च शिक्षा में प्रमुख परिवर्तन

राष्ट्रीय शिक्षा नीति में वर्ष 2035 तक उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात को 50% तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।

उच्च शिक्षा के नियमन के लिए भारतीय उच्च शिक्षा आयोग की परिकल्पना की गई है। इसके अंतर्गत नियमन, मानक निर्धारण, वित्तपोषण और प्रत्यायन से संबंधित अलग-अलग कार्यात्मक निकायों की व्यवस्था प्रस्तावित है। चिकित्सा और विधि शिक्षा इसके सामान्य दायरे से अलग रखी गई हैं।

उच्च शिक्षा को अधिक बहुविषयक बनाने, संस्थानों और कॉलेजों को चरणबद्ध रूप से अधिक स्वायत्तता देने तथा विद्यार्थियों को विषयों के चयन में अधिक लचीलापन देने पर बल दिया गया है।

विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी द्वारा सामान्य प्रवेश परीक्षा उपलब्ध कराने की परिकल्पना नीति में की गई। बाद में केंद्रीय विश्वविद्यालयों सहित अनेक संस्थानों में साझा विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा का प्रयोग शुरू हुआ। इसे नीति की मूल घोषणा और बाद के क्रियान्वयन के बीच अंतर के साथ समझना चाहिए।

डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए दीक्षा, स्वयं और डिजिटल शैक्षिक सामग्री जैसे माध्यमों के विस्तार पर बल दिया गया है।

शिक्षक प्रशिक्षण और शिक्षकों की व्यावसायिक क्षमता में सुधार, समावेशी एवं समान शिक्षा, भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहन, अनुसंधान और नवाचार तथा जीवनभर सीखने की संस्कृति को विकसित करना भी इस नीति के महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं।

📗 5+3+3+4 को ऐसे याद रखें

3–8 वर्ष 8–11 वर्ष 11–14 वर्ष 14–18 वर्ष

🎯 परीक्षा तथ्य

राष्ट्रीय शिक्षा नीति — 29 जुलाई 2020 | पुरानी नीति — 1986 | स्कूली संरचना — 5+3+3+4 | स्कूली सकल नामांकन लक्ष्य — 2030 तक 100% | उच्च शिक्षा सकल नामांकन लक्ष्य — 2035 तक 50%

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त्वरित पुनरावृत्ति

Quick Revision

योजना/नीतिप्रारंभमुख्य उद्देश्य
मनरेगा 2 फरवरी 2006 ग्रामीण परिवार को 100 दिन रोजगार की गारंटी
स्टार्टअप इंडिया 16 जनवरी 2016 स्टार्टअप, नवाचार और उद्यमिता
स्टैंड अप इंडिया 5 अप्रैल 2016 अनुसूचित जाति/जनजाति एवं महिला उद्यमिता
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 25 जून 2015 शहरी आवास
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 15 जुलाई 2015 युवाओं का कौशल विकास
अमृत 25 जून 2015 शहरी आधारभूत संरचना
हृदय 21 जनवरी 2015 विरासत शहरों का संरक्षण एवं विकास
स्मार्ट सिटी मिशन 25 जून 2015 आधुनिक और बेहतर शहरी सुविधाएँ
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना 1 मई 2016 गरीब परिवारों की महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन
आत्मनिर्भर भारत अभियान 12 मई 2020 घरेलू क्षमता और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था
उदय 2015 विद्युत वितरण कंपनियों का वित्तीय सुधार
श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन 21 फरवरी 2016 ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी स्तर की सुविधाएँ
स्वच्छ भारत मिशन 2 अक्टूबर 2014 स्वच्छता एवं खुले में शौच से मुक्ति
मध्याह्न भोजन कार्यक्रम 15 अगस्त 1995 विद्यालयी बच्चों का पोषण एवं उपस्थिति
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 29 जुलाई 2020 शिक्षा प्रणाली का व्यापक सुधार

⚡ अंतिम पुनरावृत्ति

मनरेगा — प्रति ग्रामीण परिवार एक वित्तीय वर्ष में 100 दिन अकुशल मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी।

स्टार्टअप इंडिया — नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र; स्टैंड अप इंडिया — अनुसूचित जाति/जनजाति और महिला उद्यमियों को बैंक ऋण सहायता।

प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी, अमृत और स्मार्ट सिटी मिशन — तीनों का महत्वपूर्ण शुभारंभ दिवस 25 जून 2015 है।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना — 15 जुलाई 2015, विश्व युवा कौशल दिवस।

हृदय योजना — 21 जनवरी 2015; चयनित विरासत शहरों के संरक्षण और विकास से संबंधित।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना — 1 मई 2016; गरीब परिवारों की पात्र वयस्क महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन।

आत्मनिर्भर भारत — अर्थव्यवस्था, अवसंरचना, प्रौद्योगिकी आधारित व्यवस्था, जीवंत जनसांख्यिकी और मांग इसके पाँच स्तंभ हैं।

उदय योजना — बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय एवं परिचालन स्थिति सुधारने से संबंधित।

रूर्बन मिशन — ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी स्तर की सुविधाएँ और आर्थिक अवसर विकसित करना।

स्वच्छ भारत मिशन — 2 अक्टूबर 2014; प्रथम चरण में 2 अक्टूबर 2019 तक खुले में शौच से मुक्ति प्रमुख लक्ष्य था।

पीएम पोषण — प्राथमिक स्तर पर 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन; उच्च प्राथमिक स्तर पर 700 कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 — 5+3+3+4 संरचना; 2030 तक स्कूली शिक्षा में 100% सकल नामांकन और 2035 तक उच्च शिक्षा में 50% सकल नामांकन का लक्ष्य।

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