आर्थिक शब्दावली
राष्ट्रीय आय, बैंकिंग, कर, बजट, विदेशी व्यापार, निवेश और अर्थशास्त्र के प्रमुख नियम
आर्थिक शब्दावली
अर्थव्यवस्था में अनेक ऐसे शब्द प्रयोग किए जाते हैं जो देखने में समान लगते हैं लेकिन उनका अर्थ अलग होता है। सकल घरेलू उत्पाद, मुद्रास्फीति, घाटा, कर, मुद्रा विनिमय, विदेशी निवेश, बैंकिंग तथा आर्थिक नियमों से संबंधित प्रमुख शब्दों की स्पष्ट समझ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है।
सूक्ष्म एवं समष्टि अर्थशास्त्र
Micro & Macro Economics
सूक्ष्म अर्थशास्त्र में किसी एक उपभोक्ता, परिवार, फर्म, उद्योग या बाजार की आर्थिक गतिविधियों का अध्ययन किया जाता है। मांग, पूर्ति, कीमत, उत्पादन, लागत और उपभोक्ता व्यवहार इसके प्रमुख विषय हैं।
समष्टि अर्थशास्त्र में पूरी अर्थव्यवस्था का अध्ययन किया जाता है। राष्ट्रीय आय, सकल घरेलू उत्पाद, बेरोजगारी, मुद्रास्फीति, आर्थिक वृद्धि और सरकारी नीतियाँ इसके प्रमुख विषय हैं।
🎯 सरल अंतर
सूक्ष्म = छोटी आर्थिक इकाई
समष्टि = पूरी अर्थव्यवस्था
सकल घरेलू उत्पाद
Gross Domestic Product
सकल घरेलू उत्पाद किसी निश्चित अवधि में देश की आर्थिक सीमा के भीतर उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को दर्शाता है।
उत्पादन करने वाला व्यक्ति या संस्था भारतीय हो या विदेशी, यदि उत्पादन भारत की आर्थिक सीमा के भीतर हुआ है तो वह भारत के सकल घरेलू उत्पाद में शामिल हो सकता है।
अंतिम वस्तुओं और सेवाओं को शामिल करने का उद्देश्य एक ही उत्पादन के मूल्य की बार-बार गणना से बचना है।
🎯 याद रखें
सकल घरेलू उत्पाद में स्थान महत्वपूर्ण है, राष्ट्रीयता नहीं।
सकल मूल्य वर्धन
Gross Value Added
सकल मूल्य वर्धन किसी उत्पादक या आर्थिक क्षेत्र द्वारा उत्पादन प्रक्रिया में जोड़े गए नए मूल्य को दर्शाता है।
इसे सरल रूप में कुल उत्पादन के मूल्य में से उत्पादन में प्रयुक्त मध्यवर्ती वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य घटाकर समझा जा सकता है।
सकल घरेलू उत्पाद और सकल मूल्य वर्धन के बीच मुख्य संबंध उत्पादों पर लगाए जाने वाले कर और उत्पादों पर दी जाने वाली सब्सिडी से बनता है।
🎯 सूत्र
सकल घरेलू उत्पाद = सकल मूल्य वर्धन + उत्पाद कर − उत्पाद सब्सिडी
सकल राष्ट्रीय आय
Gross National Income
सकल राष्ट्रीय आय किसी देश के निवासी आर्थिक इकाइयों द्वारा देश के भीतर तथा विदेशों से अर्जित कुल प्राथमिक आय को दर्शाती है।
इसलिए सकल घरेलू उत्पाद मुख्यतः उत्पादन के स्थान से संबंधित है, जबकि सकल राष्ट्रीय आय निवासी आर्थिक इकाइयों की आय से संबंधित है।
सकल और शुद्ध
Gross & Net
मशीन, भवन और अन्य स्थायी पूँजीगत वस्तुओं के उपयोग के कारण समय के साथ होने वाली घिसावट या मूल्य में कमी को मूल्यह्रास कहा जाता है।
सकल माप में मूल्यह्रास घटाया नहीं जाता, जबकि शुद्ध माप प्राप्त करने के लिए सकल राशि में से मूल्यह्रास घटाया जाता है।
शुद्ध घरेलू उत्पाद = सकल घरेलू उत्पाद − मूल्यह्रास।
नाममात्र एवं वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद
Nominal & Real GDP
नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद की गणना वर्तमान कीमतों पर की जाती है। इसलिए इसमें उत्पादन की मात्रा और कीमत दोनों के परिवर्तन का प्रभाव दिखाई देता है।
वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की गणना स्थिर कीमतों पर की जाती है, जिससे कीमतों में परिवर्तन के प्रभाव को हटाकर वास्तविक उत्पादन वृद्धि को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।
🎯 याद रखें
नाममात्र = वर्तमान कीमत
वास्तविक = स्थिर कीमत
प्रति व्यक्ति आय
Per Capita Income
प्रति व्यक्ति आय किसी देश की कुल आय को उसकी जनसंख्या से विभाजित करने पर प्राप्त औसत आय है।
यह औसत आर्थिक स्थिति का संकेत देती है, लेकिन इससे आय के वितरण की समानता या असमानता का पता नहीं चलता।
🎯 सूत्र
प्रति व्यक्ति आय = राष्ट्रीय आय ÷ कुल जनसंख्या
आर्थिक वृद्धि और आर्थिक विकास
Economic Growth & Development
आर्थिक वृद्धि मुख्य रूप से वास्तविक उत्पादन और वास्तविक आय में वृद्धि को दर्शाती है।
आर्थिक विकास अधिक व्यापक अवधारणा है। इसमें आर्थिक वृद्धि के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, जीवन स्तर, गरीबी में कमी और सामाजिक कल्याण में सुधार भी शामिल होता है।
इसलिए आर्थिक वृद्धि आर्थिक विकास का एक भाग है, लेकिन दोनों समान नहीं हैं।
मुद्रास्फीति
Inflation
मुद्रास्फीति वह स्थिति है जिसमें अर्थव्यवस्था के सामान्य मूल्य स्तर में लगातार वृद्धि होती है।
मुद्रास्फीति बढ़ने पर सामान्यतः मुद्रा की क्रय शक्ति घटती है, अर्थात समान राशि से पहले की तुलना में कम वस्तुएँ और सेवाएँ खरीदी जा सकती हैं।
किसी एक वस्तु की कीमत बढ़ जाना अकेले मुद्रास्फीति नहीं कहलाता; इसमें सामान्य मूल्य स्तर की व्यापक वृद्धि महत्वपूर्ण होती है।
मुद्रा संकुचन या अपस्फीति
Deflation
अपस्फीति वह स्थिति है जिसमें वस्तुओं और सेवाओं के सामान्य मूल्य स्तर में लगातार गिरावट आती है।
यदि यह गिरावट व्यापक और लंबे समय तक बनी रहे तो उपभोग और निवेश स्थगित हो सकते हैं, उत्पादन तथा रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और अर्थव्यवस्था मंदी की ओर जा सकती है।
इसे केवल मुद्रा की मात्रा में कमी तक सीमित नहीं समझना चाहिए; आधुनिक अर्थशास्त्र में इसका मुख्य अर्थ सामान्य मूल्य स्तर में निरंतर गिरावट है।
अवस्फीति
Disinflation
अवस्फीति का अर्थ मुद्रास्फीति की दर में कमी होना है। इसमें वस्तुओं की कीमतें आवश्यक रूप से कम नहीं होतीं, बल्कि उनकी बढ़ने की गति धीमी हो जाती है।
उदाहरण के लिए यदि मुद्रास्फीति 8% से घटकर 5% हो जाए तो यह अवस्फीति है। इसका अर्थ यह नहीं कि कीमतें 3% गिर गई हैं।
⚠️ सबसे महत्वपूर्ण अंतर
अपस्फीति = कीमतों में गिरावट
अवस्फीति = कीमत बढ़ने की गति में कमी
मुद्रास्फीति सहित ठहराव
Stagflation
मुद्रास्फीति सहित ठहराव वह कठिन आर्थिक स्थिति है जिसमें उच्च मुद्रास्फीति के साथ आर्थिक वृद्धि कमजोर रहती है और बेरोजगारी भी अधिक हो सकती है।
इसमें केवल मुद्रास्फीति और बेरोजगारी बढ़ना ही पर्याप्त नहीं; आर्थिक गतिविधियों में ठहराव या कमजोर वृद्धि भी इसकी प्रमुख विशेषता है।
क्रय शक्ति
Purchasing Power
क्रय शक्ति मुद्रा की वह क्षमता है जिससे वस्तुएँ और सेवाएँ खरीदी जा सकती हैं।
सामान्यतः मुद्रास्फीति बढ़ने पर मुद्रा की क्रय शक्ति घटती है, जबकि कीमतों में गिरावट होने पर समान राशि की क्रय शक्ति बढ़ सकती है।
मौद्रिक नीति
Monetary Policy
मौद्रिक नीति भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मुद्रा, ब्याज दर और बैंकिंग प्रणाली में तरलता की परिस्थितियों को प्रभावित करने के लिए अपनाई जाने वाली नीति है।
रेपो दर, नकद आरक्षित अनुपात, स्थायी जमा सुविधा, सीमांत स्थायी सुविधा और खुले बाजार की कार्रवाइयाँ इसके महत्वपूर्ण साधनों में शामिल हैं।
राजकोषीय नीति
Fiscal Policy
राजकोषीय नीति सरकार द्वारा कर, सार्वजनिक व्यय, उधारी और बजटीय उपायों के माध्यम से अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने की नीति है।
⚠️ भ्रम से बचें
मौद्रिक नीति — भारतीय रिजर्व बैंक
राजकोषीय नीति — सरकार
रेपो दर
Repo Rate
रेपो दर भारतीय रिजर्व बैंक की प्रमुख नीतिगत ब्याज दर है, जिसके अंतर्गत पात्र बैंक सरकारी प्रतिभूतियों के बदले भारतीय रिजर्व बैंक से अल्पकालीन धन प्राप्त कर सकते हैं।
सामान्यतः रेपो दर बढ़ने से बैंक ऋण की लागत बढ़ने का दबाव बन सकता है, जबकि रेपो दर घटने से ऋण लागत कम होने की दिशा में प्रभाव पड़ सकता है।
नकद आरक्षित अनुपात
Cash Reserve Ratio
नकद आरक्षित अनुपात बैंकों की शुद्ध मांग और समय देयताओं का वह निर्धारित प्रतिशत है जिसे उन्हें भारतीय रिजर्व बैंक के पास नकद शेष के रूप में रखना होता है।
इसके बढ़ने पर सामान्यतः बैंकों के पास ऋण देने योग्य धन कम होता है, जबकि इसके घटने पर ऋण देने योग्य संसाधन बढ़ सकते हैं।
वैधानिक तरलता अनुपात
Statutory Liquidity Ratio
वैधानिक तरलता अनुपात बैंक की शुद्ध मांग और समय देयताओं का वह निर्धारित हिस्सा है जिसे बैंक अनुमत तरल परिसंपत्तियों के रूप में बनाए रखते हैं।
इनमें नकद, सोना तथा अनुमत प्रतिभूतियाँ शामिल हो सकती हैं।
🎯 मुख्य अंतर
नकद आरक्षित अनुपात — भारतीय रिजर्व बैंक के पास
वैधानिक तरलता अनुपात — बैंक द्वारा अनुमत परिसंपत्तियों में
व्हाइट लेबल एटीएम
White Label ATM
व्हाइट लेबल एटीएम ऐसे एटीएम हैं जिन्हें बैंक के स्थान पर भारतीय रिजर्व बैंक से अधिकृत गैर-बैंक संस्थाएँ स्थापित करती हैं, उनका स्वामित्व रखती हैं और उनका संचालन करती हैं।
इन्हें केवल गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी द्वारा संचालित एटीएम कहना पूरी तरह सही नहीं है, क्योंकि अधिक व्यापक और सुरक्षित परिभाषा गैर-बैंक संस्था है।
ये किसी एक बैंक के अपने एटीएम नहीं होते। विभिन्न सदस्य बैंकों के पात्र कार्डधारक नेटवर्क और कार्ड की शर्तों के अनुसार इनका उपयोग कर सकते हैं।
व्हाइट लेबल एटीएम पर किसी बैंक की ब्रांडिंग नहीं होती; इसके स्थान पर एटीएम संचालक की पहचान दिखाई देती है।
भारत में इसका प्रसिद्ध प्रारंभिक उदाहरण टाटा कम्युनिकेशंस पेमेंट सॉल्यूशंस का इंडिकैश रहा है।
🎯 परीक्षा तथ्य
बैंक का एटीएम → बैंक द्वारा स्थापित
व्हाइट लेबल एटीएम → अधिकृत गैर-बैंक संस्था द्वारा स्थापित, स्वामित्व एवं संचालन
करंसी चेस्ट
Currency Chest
करंसी चेस्ट भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अधिकृत बैंक शाखाओं में बनाए गए सुरक्षित मुद्रा भंडारण केंद्र हैं। इनका उपयोग बैंक नोट और सिक्कों के वितरण तथा मुद्रा प्रबंधन के लिए किया जाता है।
भारतीय रिजर्व बैंक नए और पुनः जारी किए जा सकने वाले नोटों को करंसी चेस्ट के माध्यम से बैंकिंग व्यवस्था तक पहुँचाता है। बैंक शाखाएँ अपनी अतिरिक्त मुद्रा भी निर्धारित व्यवस्था के अनुसार यहाँ जमा कर सकती हैं।
करंसी चेस्ट में रखा मुद्रा भंडार भारतीय रिजर्व बैंक के खाते से संबंधित होता है। इसलिए करंसी चेस्ट सामान्य बैंक शाखा की अपनी नकदी तिजोरी के समान नहीं है।
गंदे और पुनः जारी करने योग्य न रहने वाले नोट बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से मुद्रा प्रबंधन व्यवस्था में वापस आते हैं और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उनका निपटान किया जाता है।
मुद्रा विनिमय
Currency Exchange
मुद्रा विनिमय एक देश की मुद्रा को दूसरे देश की मुद्रा में बदलने की प्रक्रिया है।
यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार, पर्यटन, विदेश में शिक्षा, निवेश और अन्य अंतरराष्ट्रीय भुगतान के लिए आवश्यक होता है।
एक मुद्रा के बदले दूसरी मुद्रा कितनी प्राप्त होगी, यह विनिमय दर पर निर्भर करता है।
विनिमय दर
Exchange Rate
विनिमय दर वह दर है जिस पर एक देश की मुद्रा को दूसरे देश की मुद्रा में बदला जाता है।
बाजार आधारित या फ्लोटिंग विनिमय दर मुख्यतः विदेशी मुद्रा बाजार में मांग और पूर्ति से निर्धारित होती है।
स्थिर विनिमय दर व्यवस्था में मौद्रिक प्राधिकरण मुद्रा की विनिमय दर को किसी निश्चित स्तर या दूसरी मुद्रा के संदर्भ में बनाए रखने का प्रयास करता है।
कई देशों में पूरी तरह स्थिर या पूरी तरह स्वतंत्र फ्लोटिंग व्यवस्था के बजाय इनके बीच की मिश्रित व्यवस्थाएँ भी पाई जाती हैं।
अवमूल्यन और मुद्रा का मूल्यह्रास
Devaluation & Depreciation
अवमूल्यन स्थिर या नियंत्रित विनिमय दर व्यवस्था में सरकार अथवा मौद्रिक प्राधिकरण द्वारा घरेलू मुद्रा के आधिकारिक बाहरी मूल्य को कम करने की प्रक्रिया है।
मुद्रा का मूल्यह्रास बाजार आधारित विनिमय दर व्यवस्था में मांग और पूर्ति जैसी बाजार शक्तियों के कारण मुद्रा के बाहरी मूल्य में गिरावट को कहा जाता है।
🎯 याद रखें
अवमूल्यन = आधिकारिक निर्णय
मूल्यह्रास = बाजार शक्तियाँ
हार्ड करेंसी
Hard Currency
हार्ड करेंसी ऐसी मुद्रा को कहा जाता है जिसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय लेन-देन में व्यापक स्वीकार्यता प्राप्त हो तथा जिस पर निवेशकों और व्यापारियों का अपेक्षाकृत अधिक विश्वास हो।
ऐसी मुद्राएँ सामान्यतः अपेक्षाकृत स्थिर अर्थव्यवस्था, विकसित वित्तीय बाजार और उच्च अंतरराष्ट्रीय मांग से जुड़ी होती हैं।
अमेरिकी डॉलर, यूरो, ब्रिटिश पाउंड, जापानी येन और स्विस फ्रैंक हार्ड करेंसी के सामान्य उदाहरण माने जाते हैं।
विदेशी मुद्रा भंडार
Foreign Exchange Reserves
विदेशी मुद्रा भंडार केंद्रीय बैंक के पास उपलब्ध बाहरी आरक्षित परिसंपत्तियाँ हैं जिनका उपयोग अंतरराष्ट्रीय भुगतान तथा बाहरी वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में किया जा सकता है।
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ, स्वर्ण भंडार, विशेष आहरण अधिकार और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में आरक्षित स्थिति जैसे घटक शामिल होते हैं।
व्यापार संतुलन
Balance of Trade
व्यापार संतुलन किसी निश्चित अवधि में किसी देश के वस्तु निर्यात और वस्तु आयात के मूल्य के अंतर को दर्शाता है।
यदि वस्तुओं का निर्यात आयात से अधिक हो तो व्यापार अधिशेष और आयात निर्यात से अधिक हो तो व्यापार घाटा होता है।
व्यापार संतुलन देश के बाह्य क्षेत्र की महत्वपूर्ण जानकारी देता है, लेकिन केवल इसी से देश की पूरी विदेशी मुद्रा स्थिति का निर्णय नहीं किया जा सकता। सेवाएँ, विदेशी निवेश और अन्य भुगतान भी महत्वपूर्ण होते हैं।
भुगतान संतुलन
Balance of Payments
भुगतान संतुलन किसी निश्चित अवधि में देश के निवासियों और शेष विश्व के बीच होने वाले सभी आर्थिक लेन-देन का व्यवस्थित लेखा है।
इसमें वस्तुओं का व्यापार, सेवाएँ, आय, अंतरण, विदेशी निवेश तथा अन्य वित्तीय लेन-देन शामिल होते हैं।
इसलिए भुगतान संतुलन की अवधारणा व्यापार संतुलन से अधिक व्यापक है।
⚠️ अंतर
व्यापार संतुलन = केवल वस्तुओं का निर्यात और आयात
भुगतान संतुलन = शेष विश्व के साथ सभी आर्थिक लेन-देन
राजस्व घाटा
Revenue Deficit
राजस्व घाटा तब होता है जब सरकार का राजस्व व्यय उसकी राजस्व प्राप्तियों से अधिक होता है।
यह इस बात का संकेत है कि सरकार की नियमित राजस्व आय उसके नियमित राजस्व व्यय को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
राजस्व घाटा अधिक होने पर सरकार को अपने राजस्व खर्च का एक हिस्सा उधार अथवा अन्य पूँजीगत प्राप्तियों से पूरा करना पड़ सकता है।
🎯 सूत्र
राजस्व घाटा = राजस्व व्यय − राजस्व प्राप्तियाँ
राजकोषीय घाटा
Fiscal Deficit
राजकोषीय घाटा सरकार के कुल व्यय और उसकी ऐसी कुल प्राप्तियों के बीच का अंतर है जिसमें उधारी को शामिल नहीं किया जाता।
यह सरकार की कुल उधारी आवश्यकता का प्रमुख संकेतक माना जाता है।
🎯 सूत्र
राजकोषीय घाटा = कुल व्यय − (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण पूँजी प्राप्तियाँ)
प्राथमिक घाटा
Primary Deficit
प्राथमिक घाटा राजकोषीय घाटे में से ब्याज भुगतान घटाने पर प्राप्त होता है।
इससे यह समझने में सहायता मिलती है कि सरकार का वर्तमान राजकोषीय असंतुलन पुराने ऋणों पर किए जाने वाले ब्याज भुगतान को छोड़कर कितना है।
इसे केवल “सरकार कर्ज के अलावा कितना खर्च कर रही है” कहना पूर्ण परिभाषा नहीं है। इसका सही अर्थ राजकोषीय घाटे से ब्याज भुगतान को अलग करना है।
🎯 सूत्र
प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान
अनुदान
Grant
अनुदान ऐसी वित्तीय सहायता है जिसे सामान्यतः वापस चुकाने की बाध्यता नहीं होती। सरकार केंद्र, राज्य, स्थानीय निकाय, संस्था, व्यक्ति या किसी विशेष योजना के लिए अनुदान प्रदान कर सकती है।
अनुदान का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण, विकास योजनाओं, अनुसंधान और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए किया जा सकता है।
इसे केवल “दान” मानना उचित नहीं है। सरकारी अनुदान निश्चित सार्वजनिक उद्देश्य, नियम और बजटीय प्रावधानों से जुड़ा हो सकता है।
प्रत्यक्ष कर
Direct Tax
प्रत्यक्ष कर ऐसा कर है जिसका वैधानिक दायित्व जिस व्यक्ति या संस्था पर लगाया जाता है, सामान्यतः उसी को उसका भुगतान करना होता है।
आयकर और निगम कर इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
अप्रत्यक्ष कर
Indirect Tax
अप्रत्यक्ष कर वस्तुओं या सेवाओं पर लगाया जाता है और उसका आर्थिक भार कीमत के माध्यम से अंतिम उपभोक्ता तक स्थानांतरित हो सकता है।
वस्तु एवं सेवा कर तथा सीमा शुल्क इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
प्रगतिशील कर
Progressive Tax
प्रगतिशील कर ऐसी कर प्रणाली है जिसमें कर योग्य आय या कर आधार बढ़ने के साथ लागू कर दर भी बढ़ती जाती है।
इस व्यवस्था में उच्च आय वाले व्यक्तियों पर अपेक्षाकृत अधिक कर दर लग सकती है, जबकि निम्न आय वर्ग पर अपेक्षाकृत कम कर भार रखा जाता है।
इसका संबंध भुगतान क्षमता और आय के पुनर्वितरण की अवधारणा से होता है।
प्रतिगामी कर
Regressive Tax
प्रतिगामी कर ऐसी कर व्यवस्था या कर प्रभाव को कहा जाता है जिसमें कम आय वाले व्यक्ति अपनी आय का अपेक्षाकृत अधिक हिस्सा कर के रूप में वहन करते हैं, जबकि अधिक आय वाले व्यक्ति की आय के अनुपात में कर भार कम होता है।
कुछ समान दर वाले उपभोग कर व्यावहारिक रूप से प्रतिगामी प्रभाव उत्पन्न कर सकते हैं, क्योंकि गरीब परिवार अपनी आय का बड़ा भाग उपभोग पर खर्च करते हैं।
वस्तु एवं सेवा कर को हर स्थिति में सीधे “प्रतिगामी कर” कहना उचित नहीं है, क्योंकि विभिन्न वस्तुओं पर अलग दरें, छूट और आवश्यक वस्तुओं पर रियायतें इसके वास्तविक वितरणात्मक प्रभाव को प्रभावित करती हैं।
आनुपातिक कर
Proportional Tax
आनुपातिक कर वह व्यवस्था है जिसमें कर आधार बढ़ने के बावजूद कर की प्रतिशत दर समान रहती है।
यदि प्रत्येक आय स्तर पर 10% की समान कर दर हो, तो वह आनुपातिक कर का सरल उदाहरण होगा।
विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांड
Foreign Currency Convertible Bond
विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांड ऐसा ऋण साधन है जिसे कोई पात्र कंपनी विदेशी मुद्रा में जारी करती है और जिसकी शर्तों के अनुसार इसे बाद में जारीकर्ता कंपनी के इक्विटी शेयरों में परिवर्तित किया जा सकता है।
इसमें बांड और शेयर दोनों की विशेषताएँ होती हैं। परिवर्तन होने से पहले निवेशक बांडधारक होता है; निर्धारित शर्तों पर शेयर में परिवर्तन होने के बाद वह शेयरधारक बन सकता है।
यह कंपनियों द्वारा विदेशी बाजार से पूँजी जुटाने का एक माध्यम है। इसे केवल “विदेशी निवेशक खरीदते हैं” कहने से इसकी पूरी विशेषता स्पष्ट नहीं होती; इसका प्रमुख गुण विदेशी मुद्रा में जारी होना और शेयरों में परिवर्तनीय होना है।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
Foreign Direct Investment
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश किसी विदेशी निवेशक द्वारा दूसरे देश के उद्यम में दीर्घकालीन व्यावसायिक हित और प्रभाव स्थापित करने के उद्देश्य से किया गया निवेश है।
इसमें नई उत्पादन इकाई स्थापित करना, कंपनी में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी लेना या कारोबार का विस्तार करना शामिल हो सकता है।
ग्रीनफील्ड निवेश
Greenfield Investment
ग्रीनफील्ड निवेश वह निवेश है जिसमें निवेशक किसी देश में पहले से मौजूद कंपनी या उत्पादन इकाई को खरीदने के बजाय नई सुविधा, कारखाना, कार्यालय या उत्पादन इकाई स्थापित करता है।
विदेशी कंपनी द्वारा भारत में भूमि लेकर नया कारखाना स्थापित करना प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के अंतर्गत ग्रीनफील्ड निवेश का उदाहरण हो सकता है।
इसके विपरीत पहले से मौजूद कंपनी या परिसंपत्ति को खरीदकर निवेश करना सामान्यतः ब्राउनफील्ड निवेश कहलाता है।
🎯 याद रखें
ग्रीनफील्ड = नया प्रोजेक्ट
ब्राउनफील्ड = पहले से मौजूद परियोजना/व्यवसाय में निवेश
हॉट मनी
Hot Money
हॉट मनी ऐसी अल्पकालिक अंतरराष्ट्रीय पूँजी को कहा जाता है जो बेहतर ब्याज दर, अधिक प्रतिफल, विनिमय दर में लाभ या अन्य अल्पकालिक अवसरों की तलाश में एक देश से दूसरे देश में तेजी से स्थानांतरित हो सकती है।
इस प्रकार की पूँजी तेजी से आने और बाहर जाने के कारण विनिमय दर, बॉण्ड बाजार और शेयर बाजार में अस्थिरता बढ़ा सकती है।
इसे सामान्यतः दीर्घकालीन प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की तुलना में अधिक अस्थिर माना जाता है।
टोबिन कर
Tobin Tax
टोबिन कर का मूल प्रस्ताव अर्थशास्त्री जेम्स टोबिन ने विदेशी मुद्रा लेन-देन पर बहुत कम दर का कर लगाने के रूप में दिया था।
इसका उद्देश्य अत्यधिक अल्पकालिक और सट्टात्मक मुद्रा लेन-देन की गति को कम करना था, ताकि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अस्थिर पूँजी प्रवाह को सीमित किया जा सके।
इसलिए इसे हॉट मनी और अल्पकालिक विदेशी मुद्रा सट्टेबाजी से जोड़कर पढ़ा जाता है।
गिफिन वस्तुएँ
Giffen Goods
गिफिन वस्तु एक विशेष प्रकार की निम्नस्तरीय वस्तु है जिसमें कुछ परिस्थितियों में कीमत बढ़ने पर उसकी मांग भी बढ़ सकती है और कीमत घटने पर मांग घट सकती है।
यह सामान्य मांग नियम का दुर्लभ अपवाद माना जाता है।
गिफिन प्रभाव तब संभव होता है जब वस्तु उपभोक्ता के बजट का बड़ा हिस्सा लेती हो, वह निम्नस्तरीय वस्तु हो और कीमत बदलने से उत्पन्न आय प्रभाव विपरीत दिशा में कार्य करने वाले प्रतिस्थापन प्रभाव से अधिक शक्तिशाली हो।
गरीब परिवारों के लिए मुख्य खाद्य वस्तुओं जैसे चावल, मोटा अनाज या अन्य मुख्य भोजन को समझाने के लिए उदाहरण दिया जाता है, लेकिन हर सस्ती वस्तु या हर चावल/आटा अपने-आप गिफिन वस्तु नहीं होता।
केवल विकल्पों का कम होना गिफिन वस्तु बनने के लिए पर्याप्त शर्त नहीं है।
⚠️ महत्वपूर्ण सुधार
कीमत बढ़ी → मांग बढ़ी वाली हर वस्तु गिफिन वस्तु नहीं है। गिफिन प्रभाव के लिए मजबूत ऋणात्मक आय प्रभाव आवश्यक होता है।
प्रशासित मूल्य
Administered Price
प्रशासित मूल्य ऐसा मूल्य है जिसका निर्धारण या महत्वपूर्ण नियंत्रण केवल स्वतंत्र बाजार की मांग और पूर्ति से नहीं, बल्कि सरकार या किसी अधिकृत सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा किया जाता है।
इसका उद्देश्य उत्पादक संरक्षण, उपभोक्ता हित, सार्वजनिक वितरण, रणनीतिक क्षेत्र या अन्य नीतिगत लक्ष्य हो सकता है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य सरकार द्वारा घोषित कृषि समर्थन मूल्य का प्रमुख उदाहरण है। कुछ नियंत्रित या विनियमित वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में भी सरकारी हस्तक्षेप पाया जा सकता है।
एलपीजी की कीमत को हमेशा पूर्णतः सरकार द्वारा निर्धारित प्रशासित मूल्य कहना सही नहीं है, क्योंकि मूल्य निर्धारण व्यवस्था समय और नीति के अनुसार बदल सकती है तथा बाजार-संबद्ध घटक भी हो सकते हैं।
लॉरेन्ज वक्र
Lorenz Curve
लॉरेन्ज वक्र आय या संपत्ति वितरण की असमानता को ग्राफ के माध्यम से दर्शाता है।
ग्राफ में पूर्ण समानता को 45° की सीधी रेखा से दर्शाया जाता है। वास्तविक लॉरेन्ज वक्र इस समानता रेखा से जितना अधिक नीचे झुका होगा, आय या संपत्ति की असमानता उतनी अधिक मानी जाती है।
इसलिए केवल “वक्र तिरछा है” कहना पर्याप्त नहीं है; महत्वपूर्ण बात यह है कि वह पूर्ण समानता की रेखा से कितना दूर है।
गिनी गुणांक
Gini Coefficient
गिनी गुणांक आय या संपत्ति वितरण में असमानता का सांख्यिकीय मापक है।
इसे सामान्यतः 0 से 1 के बीच व्यक्त किया जाता है। 0 पूर्ण समानता और 1 पूर्ण असमानता को दर्शाता है।
इसे कभी-कभी प्रतिशत के रूप में 0 से 100 के पैमाने पर भी व्यक्त किया जाता है।
गिनी गुणांक का संबंध लॉरेन्ज वक्र से है। समानता रेखा और लॉरेन्ज वक्र के बीच क्षेत्र जितना अधिक होगा, गिनी गुणांक सामान्यतः उतना अधिक होगा।
एंजील का नियम
Engel’s Law
एंजील का नियम जर्मन सांख्यिकीविद् अर्न्स्ट एंजील से संबंधित है।
इस नियम के अनुसार परिवार की आय बढ़ने पर भोजन पर किया जाने वाला कुल खर्च बढ़ सकता है, लेकिन कुल आय में भोजन पर खर्च का प्रतिशत सामान्यतः घटता जाता है।
इसके साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन, परिवहन और अन्य गैर-खाद्य मदों पर खर्च का अनुपात बढ़ सकता है।
इस कारण भोजन पर खर्च का अनुपात किसी परिवार के जीवन स्तर को समझने के लिए उपयोगी संकेतक माना जाता है।
🎯 मुख्य तथ्य
आय बढ़ती है → भोजन पर खर्च का प्रतिशत घटता है।
ग्रेशम का नियम
Gresham’s Law
ग्रेशम का नियम प्रसिद्ध कथन “बुरी मुद्रा अच्छी मुद्रा को प्रचलन से बाहर कर देती है” से समझाया जाता है।
यह नियम विशेष परिस्थितियों में लागू होता है, जब दो प्रकार की मुद्राओं को कानून द्वारा समान अंकित मूल्य पर स्वीकार किया जाता हो, लेकिन उनमें से एक का वास्तविक या धात्विक मूल्य दूसरे से अधिक हो।
लोग अधिक मूल्यवान अर्थात “अच्छी मुद्रा” को अपने पास जमा करने या अन्य उपयोग में लगाने लगते हैं और कम मूल्यवान “बुरी मुद्रा” को लेन-देन में प्रयोग करते हैं।
इसलिए इसका अर्थ केवल यह नहीं कि खराब गुणवत्ता वाला नोट अच्छे नोट को बाजार से बाहर कर देता है। यह मूलतः मुद्रा के आंतरिक मूल्य और कानूनी विनिमय मूल्य के अंतर से संबंधित नियम है।
लाफेर वक्र
Laffer Curve
लाफेर वक्र कर की दर और सरकार को प्राप्त कर राजस्व के बीच सैद्धांतिक संबंध को दर्शाता है।
बहुत कम कर दर पर कर राजस्व कम हो सकता है। कर दर बढ़ने पर राजस्व बढ़ सकता है, लेकिन एक निश्चित सीमा के बाद अत्यधिक कर दर आर्थिक गतिविधि, काम करने की इच्छा, निवेश, कर अनुपालन और घोषित कर आधार को प्रभावित कर सकती है।
ऐसी स्थिति में कर दर और बढ़ाने पर कर राजस्व बढ़ने के बजाय घट भी सकता है।
इसका कारण केवल कर चोरी नहीं है; काम, निवेश, उत्पादन और कर बचाव से जुड़े व्यवहार में परिवर्तन भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
लाफेर वक्र किसी एक निश्चित सार्वभौमिक “सर्वोत्तम कर दर” को निर्धारित नहीं करता।
फिलिप्स वक्र
Phillips Curve
फिलिप्स वक्र का मूल संबंध अर्थशास्त्री ए. डब्ल्यू. फिलिप्स के अध्ययन से जुड़ा है। बाद में इसे मुद्रास्फीति और बेरोजगारी के बीच संबंध से समझाया जाने लगा।
सरल पारंपरिक रूप में अल्पकाल में मुद्रास्फीति और बेरोजगारी के बीच विपरीत संबंध बताया जाता है—बेरोजगारी कम होने पर मुद्रास्फीति बढ़ सकती है और बेरोजगारी बढ़ने पर मुद्रास्फीति कम हो सकती है।
लेकिन यह संबंध हर समय और हर परिस्थिति में स्थायी नहीं रहता। अपेक्षाएँ, आपूर्ति झटके और अन्य आर्थिक कारक इसे बदल सकते हैं।
1970 के दशक में कई अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रास्फीति और बेरोजगारी दोनों का ऊँचा रहना पारंपरिक सरल फिलिप्स वक्र की सीमाओं का महत्वपूर्ण उदाहरण बना।
⚠️ परीक्षा-सावधानी
सरल प्रश्न में फिलिप्स वक्र = मुद्रास्फीति और बेरोजगारी का अल्पकालीन विपरीत संबंध याद रखें; इसे सार्वभौमिक स्थायी नियम न मानें।
से का बाजार नियम
Say’s Law
से का बाजार नियम फ्रांसीसी अर्थशास्त्री जे. बी. से से संबंधित शास्त्रीय आर्थिक विचार है।
इसे सामान्यतः कथन “पूर्ति अपनी मांग स्वयं उत्पन्न करती है” द्वारा याद किया जाता है।
इस विचार का मूल आशय यह है कि वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन से आय उत्पन्न होती है और वह आय अन्य वस्तुओं तथा सेवाओं की मांग का आधार बनती है।
यह कथन सरल परीक्षा-सूत्र है; इसका अर्थ यह नहीं कि प्रत्येक अलग वस्तु को स्वतः ग्राहक मिल ही जाएगा या अर्थव्यवस्था में कभी मांग की कमी नहीं हो सकती।
जॉन मेनार्ड कीन्स ने व्यापक मांग की कमी और बेरोजगारी की संभावना पर जोर देते हुए शास्त्रीय दृष्टिकोण की आलोचना की।
ले-ऑफ
Lay-off
ले-ऑफ सामान्य अर्थ में ऐसी स्थिति है जिसमें नियोक्ता आर्थिक, उत्पादन, तकनीकी या अन्य व्यावसायिक कारणों से कर्मचारियों को अस्थायी रूप से काम उपलब्ध नहीं करा पाता या काम से अलग रखता है।
ले-ऑफ में सामान्यतः कर्मचारी का रोजगार संबंध स्वतः स्थायी रूप से समाप्त नहीं माना जाता। इसलिए यह नौकरी की स्थायी समाप्ति से अलग अवधारणा है।
उत्पादन में गिरावट, कच्चे माल की कमी, मशीन खराब होना, बिजली की समस्या या व्यावसायिक संकट जैसी परिस्थितियाँ ले-ऑफ से जुड़ सकती हैं।
⚠️ अंतर समझें
ले-ऑफ = काम अस्थायी रूप से उपलब्ध नहीं
स्थायी छँटनी = रोजगार संबंध समाप्त होना
गोल्डन हैंडशेक
Golden Handshake
गोल्डन हैंडशेक कर्मचारी को सेवा छोड़ने, समय से पहले सेवानिवृत्ति लेने या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति स्वीकार करने के लिए दिया जाने वाला आकर्षक वित्तीय पैकेज या क्षतिपूर्ति है।
कंपनियाँ कर्मचारियों की संख्या कम करने, पुनर्गठन करने या लागत घटाने के लिए ऐसी योजना अपना सकती हैं।
भारत में इसे अक्सर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना से जोड़कर समझाया जाता है, हालांकि दोनों शब्द हर संदर्भ में पूरी तरह समान नहीं हैं।
ग्रे मार्केट
Grey Market
ग्रे मार्केट वह बाजार है जिसमें वास्तविक वस्तुओं या प्रतिभूतियों का लेन-देन आधिकारिक या अधिकृत वितरण व्यवस्था से बाहर होता है।
यह ब्लैक मार्केट से अलग है। ब्लैक मार्केट में प्रायः प्रतिबंधित या अवैध लेन-देन शामिल होते हैं, जबकि ग्रे मार्केट में वस्तु स्वयं वैध हो सकती है लेकिन उसकी बिक्री अधिकृत वितरण चैनल के बाहर होती है।
उदाहरण के लिए किसी वास्तविक इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद को निर्माता के अधिकृत वितरक के बजाय अनधिकृत विक्रेता द्वारा बेचा जाना ग्रे मार्केट का उदाहरण हो सकता है।
शेयर बाजार के संदर्भ में किसी नए सार्वजनिक निर्गम के शेयर सूचीबद्ध होने से पहले होने वाले अनौपचारिक लेन-देन को भी ग्रे मार्केट कहा जाता है। ऐसा बाजार आधिकारिक स्टॉक एक्सचेंज की नियमित व्यापार व्यवस्था का हिस्सा नहीं होता।
⚠️ याद रखें
ग्रे मार्केट = आधिकारिक चैनल से बाहर
ब्लैक मार्केट = अवैध/प्रतिबंधित लेन-देन से जुड़ा बाजार
फ्री पोर्ट
Free Port
फ्री पोर्ट ऐसा बंदरगाह या निर्धारित सीमा-शुल्क क्षेत्र होता है जहाँ विदेशी वस्तुओं को विशेष सीमा-शुल्क रियायतों के साथ लाया, संग्रहीत, संसाधित या पुनः निर्यात किया जा सकता है।
ऐसे क्षेत्र में सामान्य घरेलू सीमा-शुल्क क्षेत्र की तुलना में शुल्क कम हो सकता है या वस्तुओं के पुनः निर्यात तक शुल्क स्थगित या माफ किया जा सकता है।
इसका अर्थ यह नहीं कि हर वस्तु पर हर परिस्थिति में शून्य सीमा शुल्क ही लगता है। व्यवस्था देश के कानून और विशेष फ्री-पोर्ट नियमों पर निर्भर करती है।
विनिवेश और निजीकरण
Disinvestment & Privatisation
विनिवेश सरकार द्वारा किसी सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम में अपनी हिस्सेदारी का कुछ भाग या पूरा भाग बेचने की प्रक्रिया है।
निजीकरण में सरकारी उद्यम का नियंत्रण या स्वामित्व निजी क्षेत्र को स्थानांतरित हो जाता है।
इसलिए प्रत्येक विनिवेश निजीकरण नहीं होता। यदि सरकार थोड़ी हिस्सेदारी बेचती है लेकिन नियंत्रण अपने पास रखती है, तो यह विनिवेश है लेकिन आवश्यक नहीं कि निजीकरण हो।
सब्सिडी
Subsidy
सब्सिडी सरकार द्वारा किसी वस्तु, सेवा, उत्पादक या उपभोक्ता को दी जाने वाली आर्थिक सहायता या रियायत है।
इसका उद्देश्य आवश्यक वस्तुएँ सुलभ बनाना, उत्पादन को प्रोत्साहित करना, किसी विशेष वर्ग की सहायता करना या नीतिगत लक्ष्य प्राप्त करना हो सकता है।
मुद्रा बाजार और पूँजी बाजार
Money Market & Capital Market
मुद्रा बाजार मुख्यतः अल्पकालीन धन और वित्तीय साधनों का बाजार है। इसमें सामान्यतः एक वर्ष तक की अवधि वाले साधनों का लेन-देन होता है।
पूँजी बाजार मध्यम और दीर्घकालीन वित्त से संबंधित बाजार है। शेयर और दीर्घकालीन बॉण्ड इसके प्रमुख साधन हैं।
🎯 याद रखें
मुद्रा बाजार = अल्पकालीन
पूँजी बाजार = मध्यम एवं दीर्घकालीन
प्राथमिक और द्वितीयक बाजार
Primary & Secondary Market
प्राथमिक बाजार वह बाजार है जहाँ नई प्रतिभूतियाँ पहली बार निवेशकों को जारी की जाती हैं और जारीकर्ता संस्था पूँजी जुटाती है।
द्वितीयक बाजार वह बाजार है जहाँ पहले से जारी प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री निवेशकों के बीच होती है।
🎯 अंतर
प्राथमिक बाजार = नई प्रतिभूति
द्वितीयक बाजार = पहले से जारी प्रतिभूति
शेयर और बॉण्ड
Share & Bond
शेयर किसी कंपनी में स्वामित्व के एक हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। शेयरधारक कंपनी का आंशिक स्वामी होता है।
बॉण्ड एक ऋण साधन है। बॉण्ड खरीदने वाला निवेशक जारीकर्ता को धन उधार देता है और निर्धारित शर्तों के अनुसार ब्याज तथा मूलधन प्राप्त करता है।
🎯 सरल अंतर
शेयर = स्वामित्व
बॉण्ड = ऋण
तरलता
Liquidity
तरलता किसी परिसंपत्ति को उसके मूल्य में बहुत अधिक हानि किए बिना कितनी आसानी और तेजी से नकद में बदला जा सकता है, इसे दर्शाती है।
नकद अत्यधिक तरल होता है, जबकि भूमि और भवन जैसी परिसंपत्तियों को नकद में बदलने में अधिक समय लग सकता है।
तेजी और मंदी का बाजार
Bull & Bear Market
तेजी का बाजार वह स्थिति है जिसमें प्रतिभूतियों की कीमतों में व्यापक वृद्धि हो रही हो या निवेशकों में कीमत बढ़ने की उम्मीद हो। तेजी की धारणा से जुड़े निवेशक को प्रचलित रूप से बुल कहा जाता है।
मंदी का बाजार वह स्थिति है जिसमें प्रतिभूतियों की कीमतों में व्यापक गिरावट हो रही हो या आगे गिरावट की आशंका हो। मंदी की धारणा से जुड़े निवेशक को बेयर कहा जाता है।
महत्वपूर्ण आर्थिक नियम — एक नज़र में
Important Economic Laws
| नियम / वक्र | मुख्य तथ्य |
|---|---|
| एंजील का नियम | आय बढ़ने पर भोजन पर खर्च का प्रतिशत घटता है। |
| ग्रेशम का नियम | विशेष परिस्थितियों में बुरी मुद्रा अच्छी मुद्रा को प्रचलन से बाहर करती है। |
| लाफेर वक्र | कर दर और कर राजस्व के बीच संबंध दर्शाता है। |
| फिलिप्स वक्र | पारंपरिक अल्पकालीन रूप में मुद्रास्फीति और बेरोजगारी के बीच विपरीत संबंध। |
| से का नियम | शास्त्रीय विचार — पूर्ति अपनी मांग स्वयं उत्पन्न करती है। |
| लॉरेन्ज वक्र | आय या संपत्ति वितरण की असमानता का ग्राफीय प्रदर्शन। |
| गिनी गुणांक | आय या संपत्ति असमानता का सांख्यिकीय मापक। |
सबसे अधिक भ्रम वाले आर्थिक शब्द
Important Confusing Pairs
| पहला शब्द | दूसरा शब्द | मुख्य अंतर |
|---|---|---|
| अपस्फीति | अवस्फीति | अपस्फीति में कीमतें गिरती हैं; अवस्फीति में महँगाई की दर घटती है। |
| अवमूल्यन | मुद्रा मूल्यह्रास | अवमूल्यन आधिकारिक निर्णय से; मूल्यह्रास बाजार शक्तियों से। |
| व्यापार संतुलन | भुगतान संतुलन | व्यापार संतुलन केवल वस्तुओं तक सीमित; भुगतान संतुलन सभी बाहरी आर्थिक लेन-देन। |
| राजस्व घाटा | राजकोषीय घाटा | राजस्व घाटा राजस्व खाते का अंतर; राजकोषीय घाटा सरकार की कुल उधारी आवश्यकता का प्रमुख संकेतक। |
| राजकोषीय घाटा | प्राथमिक घाटा | प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान। |
| प्रत्यक्ष विदेशी निवेश | हॉट मनी | प्रत्यक्ष विदेशी निवेश अपेक्षाकृत दीर्घकालीन; हॉट मनी अल्पकालीन और तेजी से स्थानांतरित होने वाली पूँजी। |
| ग्रीनफील्ड | ब्राउनफील्ड | ग्रीनफील्ड में नई परियोजना; ब्राउनफील्ड में पहले से मौजूद परियोजना या व्यवसाय। |
| ग्रे मार्केट | ब्लैक मार्केट | ग्रे मार्केट आधिकारिक वितरण चैनल से बाहर; ब्लैक मार्केट अवैध या प्रतिबंधित लेन-देन से जुड़ा। |
| विनिवेश | निजीकरण | विनिवेश हिस्सेदारी बिक्री है; निजीकरण में नियंत्रण निजी क्षेत्र को जाता है। |
त्वरित पुनरावृत्ति
Quick Revision
🧠 एक लाइन में याद करें
⚡ अंतिम पुनरावृत्ति बिंदु
सकल घरेलू उत्पाद देश की आर्थिक सीमा के भीतर अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन को दर्शाता है।
सकल मूल्य वर्धन उत्पादन प्रक्रिया में जोड़े गए नए मूल्य को दर्शाता है।
नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद वर्तमान कीमत पर और वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद स्थिर कीमत पर मापा जाता है।
मुद्रास्फीति सामान्य मूल्य स्तर की वृद्धि और अपस्फीति सामान्य मूल्य स्तर की गिरावट है।
अवस्फीति में कीमतें आवश्यक रूप से नहीं गिरतीं; केवल मुद्रास्फीति की दर कम होती है।
स्टैगफ्लेशन में उच्च मुद्रास्फीति के साथ आर्थिक ठहराव और उच्च बेरोजगारी जैसी स्थिति होती है।
व्हाइट लेबल एटीएम भारतीय रिजर्व बैंक से अधिकृत गैर-बैंक संस्था द्वारा स्थापित, स्वामित्व और संचालित एटीएम होता है।
करंसी चेस्ट भारतीय रिजर्व बैंक की मुद्रा वितरण व्यवस्था से संबंधित अधिकृत मुद्रा भंडारण केंद्र है।
राजस्व घाटा = राजस्व व्यय − राजस्व प्राप्तियाँ।
प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान।
प्रगतिशील कर में आय बढ़ने पर कर दर बढ़ती है।
प्रतिगामी कर में कम आय वर्ग पर आय के अनुपात में कर का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है।
हार्ड करेंसी अंतरराष्ट्रीय बाजार में व्यापक रूप से स्वीकार्य और विश्वसनीय मुद्रा है।
विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांड विदेशी मुद्रा में जारी ऐसा बांड है जिसे निर्धारित शर्तों पर शेयरों में बदला जा सकता है।
गिफिन वस्तु विशेष प्रकार की निम्नस्तरीय वस्तु है जिसमें मजबूत आय प्रभाव के कारण कीमत बढ़ने पर मांग भी बढ़ सकती है।
हॉट मनी तेजी से एक देश से दूसरे देश में जाने वाली अल्पकालीन अंतरराष्ट्रीय पूँजी है।
प्रशासित मूल्य में मूल्य निर्धारण पर सरकार या सार्वजनिक प्राधिकरण का महत्वपूर्ण नियंत्रण होता है।
लॉरेन्ज वक्र असमानता का ग्राफीय प्रदर्शन और गिनी गुणांक उसका संख्यात्मक मापक है।
एंजील नियम — आय बढ़ने पर भोजन पर खर्च का प्रतिशत घटता है।
ग्रेशम नियम — विशेष परिस्थितियों में बुरी मुद्रा अच्छी मुद्रा को प्रचलन से बाहर करती है।
लाफेर वक्र कर दर और कर राजस्व के बीच संबंध दर्शाता है।
फिलिप्स वक्र पारंपरिक अल्पकालीन रूप में मुद्रास्फीति और बेरोजगारी के बीच विपरीत संबंध दर्शाता है।
से का नियम शास्त्रीय विचार है — पूर्ति अपनी मांग स्वयं उत्पन्न करती है।
टोबिन कर का मूल प्रस्ताव विदेशी मुद्रा लेन-देन पर छोटे कर से सट्टात्मक अल्पकालीन पूँजी प्रवाह कम करने से संबंधित था।
अवमूल्यन आधिकारिक निर्णय से और मुद्रा मूल्यह्रास बाजार शक्तियों से मुद्रा के बाहरी मूल्य में गिरावट है।
ग्रीनफील्ड निवेश में नई उत्पादन इकाई या परियोजना स्थापित की जाती है।
ग्रे मार्केट आधिकारिक वितरण या व्यापार व्यवस्था के बाहर का बाजार है; इसे ब्लैक मार्केट के समान न समझें।
फ्री पोर्ट विशेष सीमा-शुल्क रियायत वाला बंदरगाह या सीमा-शुल्क क्षेत्र होता है।
गोल्डन हैंडशेक कर्मचारी को स्वैच्छिक या समयपूर्व सेवा-त्याग के लिए दिया जाने वाला आकर्षक वित्तीय पैकेज है।