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त्रिकोणमिति
TRIGONOMETRY

त्रिकोणमिति

त्रिकोणमितीय अनुपात, सर्वसमिकाएँ, मानक मान, कोण सूत्र एवं महत्वपूर्ण सूत्र

त्रिकोणमिति क्या है?

त्रिकोणमिति गणित की वह शाखा है जिसमें मुख्य रूप से त्रिभुज की भुजाओं और कोणों के बीच संबंधों का अध्ययन किया जाता है। समकोण त्रिभुज में किसी न्यून कोण के सापेक्ष लंब, आधार और कर्ण की सहायता से छह प्रमुख त्रिकोणमितीय अनुपात निर्धारित किए जाते हैं।

त्रिकोणमिति में कोण के अनुसार भुजाओं के अनुपात बदलते हैं, लेकिन समान कोण के लिए ये अनुपात त्रिभुज के आकार पर निर्भर नहीं करते। इसी कारण त्रिकोणमितीय अनुपातों का उपयोग ऊँचाई-दूरी, ज्यामिति और अनेक गणितीय प्रश्नों में किया जाता है।

01

महत्वपूर्ण संकेत एवं छह त्रिकोणमितीय अनुपात

Basic Trigonometric Ratios

महत्वपूर्ण संकेत

P = लंब अर्थात दिए गए कोण के सामने स्थित भुजा।

B = आधार अर्थात दिए गए कोण के पास स्थित वह भुजा जो कर्ण नहीं है।

H = कर्ण अर्थात समकोण के सामने स्थित तथा समकोण त्रिभुज की सबसे लंबी भुजा।

θ किसी कोण को प्रदर्शित करने वाला सामान्य संकेत है।

अनुपात सूत्र भुजाओं के रूप में
sin θ P/H लंब / कर्ण
cos θ B/H आधार / कर्ण
tan θ P/B लंब / आधार
cot θ B/P आधार / लंब
sec θ H/B कर्ण / आधार
cosec θ H/P कर्ण / लंब

🎯 याद रखने का आसान तरीका

sin = लंब/कर्ण, cos = आधार/कर्ण, tan = लंब/आधार। बाकी तीन अनुपात इनके व्युत्क्रम हैं।

02

व्युत्क्रम संबंध

Reciprocal Relations

sin θ × cosec θ = 1
cos θ × sec θ = 1
tan θ × cot θ = 1
cosec θ = 1 / sin θ
sec θ = 1 / cos θ
cot θ = 1 / tan θ

📗 मुख्य बात

sin और cosec, cos और sec तथा tan और cot एक-दूसरे के व्युत्क्रम होते हैं। ये संबंध वहीं लागू होते हैं जहाँ संबंधित अनुपात परिभाषित हो।

03

भागफल संबंध

Quotient Relations

tan θ = sin θ / cos θ
cot θ = cos θ / sin θ
04

पाइथागोरस सर्वसमिकाएँ

Pythagorean Identities

sin²θ + cos²θ = 1
1 + tan²θ = sec²θ
1 + cot²θ = cosec²θ

इन्हीं से प्राप्त महत्वपूर्ण रूप

1 − sin²θ = cos²θ
1 − cos²θ = sin²θ
sec²θ − tan²θ = 1
cosec²θ − cot²θ = 1
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मानक कोणों के त्रिकोणमितीय मान

Standard Values

अनुपात 30° 45° 60° 90°
sin θ 0 1/2 1/√2 √3/2 1
cos θ 1 √3/2 1/√2 1/2 0
tan θ 0 1/√3 1 √3 अपरिभाषित
cot θ अपरिभाषित √3 1 1/√3 0
sec θ 1 2/√3 √2 2 अपरिभाषित
cosec θ अपरिभाषित 2 √2 2/√3 1

⚠️ बहुत महत्वपूर्ण

tan 90° और sec 90° अपरिभाषित होते हैं, क्योंकि इन दोनों के हर में cos 90° = 0 आ जाता है। इसी प्रकार cot 0° और cosec 0° अपरिभाषित होते हैं, क्योंकि इनके हर में sin 0° = 0 आता है।

06

पूरक कोण संबंध

Complementary Angle Relations

sin(90° − θ) = cos θ
cos(90° − θ) = sin θ
tan(90° − θ) = cot θ
cot(90° − θ) = tan θ
sec(90° − θ) = cosec θ
cosec(90° − θ) = sec θ

🎯 याद रखें

90° − θ करने पर अनुपात अपने सह-अनुपात में बदल जाता है—sin ↔ cos, tan ↔ cot तथा sec ↔ cosec।

07

चतुर्थांश में चिन्हों का नियम

ASTC Rule

चतुर्थांश धनात्मक अनुपात कोण सीमा
प्रथम सभी अनुपात धनात्मक 0° से 90°
द्वितीय sin और cosec धनात्मक 90° से 180°
तृतीय tan और cot धनात्मक 180° से 270°
चतुर्थ cos और sec धनात्मक 270° से 360°

📗 चिन्ह समझने का नियम

प्रथम चतुर्थांश में सभी अनुपात धनात्मक होते हैं। द्वितीय में केवल sin और cosec, तृतीय में tan और cot तथा चतुर्थ में cos और sec धनात्मक होते हैं। बाकी अनुपात ऋणात्मक होते हैं।

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संबद्ध कोण सूत्र

Allied Angle Formula

🎯 मूल नियम

90° और 270° के साथ त्रिकोणमितीय अनुपात बदलता है, जबकि 180° और 360° के साथ अनुपात का नाम नहीं बदलता। अंतिम चिन्ह संबंधित कोण के चतुर्थांश से निर्धारित किया जाता है।

व्यंजक sin cos tan
90° − θ cos θ sin θ cot θ
90° + θ cos θ −sin θ −cot θ
180° − θ sin θ −cos θ −tan θ
180° + θ −sin θ −cos θ tan θ
270° − θ −cos θ −sin θ cot θ
270° + θ −cos θ sin θ −cot θ
360° − θ −sin θ cos θ −tan θ
360° + θ sin θ cos θ tan θ
09

ऋणात्मक कोण के सूत्र

Negative Angle Formula

sin(−θ) = −sin θ
cos(−θ) = cos θ
tan(−θ) = −tan θ
cot(−θ) = −cot θ
sec(−θ) = sec θ
cosec(−θ) = −cosec θ

📗 सम और विषम फलन

cos तथा sec सम फलन हैं, इसलिए ऋणात्मक कोण लगाने पर उनका चिन्ह नहीं बदलता। sin, cosec, tan और cot विषम फलन हैं, इसलिए उनका चिन्ह बदल जाता है।

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आवर्तिता के सूत्र

Periodicity Formula

sin(θ + 360°n) = sin θ
cos(θ + 360°n) = cos θ
sec(θ + 360°n) = sec θ
cosec(θ + 360°n) = cosec θ
tan(θ + 180°n) = tan θ
cot(θ + 180°n) = cot θ

ℹ️ यहाँ n क्या है?

इन सूत्रों में n कोई भी पूर्णांक हो सकता है, जैसे 0, ±1, ±2, ±3 आदि। sin, cos, sec और cosec का मूल आवर्तकाल 360° है, जबकि tan और cot का मूल आवर्तकाल 180° है।

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संयुक्त कोण के सूत्र

Compound Angle Formula

सूत्र परिणाम
sin(A + B) sin A cos B + cos A sin B
sin(A − B) sin A cos B − cos A sin B
cos(A + B) cos A cos B − sin A sin B
cos(A − B) cos A cos B + sin A sin B
tan(A + B) (tan A + tan B) / (1 − tan A tan B)
tan(A − B) (tan A − tan B) / (1 + tan A tan B)

⚠️ चिन्ह में सबसे अधिक गलती

cos(A + B) में बीच का चिन्ह ऋणात्मक और cos(A − B) में धनात्मक होता है। tan के सूत्र में ऊपर और नीचे के चिन्ह उलटे प्रकार से आते हैं।

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द्विगुण कोण के सूत्र

Double Angle Formula

sin 2A = 2 sin A cos A
cos 2A = cos²A − sin²A
cos 2A = 2cos²A − 1
cos 2A = 1 − 2sin²A
tan 2A = 2tan A / (1 − tan²A)
cot 2A = (cot²A − 1) / (2cot A)
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त्रिगुण कोण के सूत्र

Triple Angle Formula

sin 3A = 3sin A − 4sin³A
cos 3A = 4cos³A − 3cos A
tan 3A = (3tan A − tan³A) / (1 − 3tan²A)
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अर्ध कोण के सूत्र

Half Angle Formula

sin²(A/2) = (1 − cos A) / 2
cos²(A/2) = (1 + cos A) / 2
sin(A/2) = ±√[(1 − cos A)/2]
cos(A/2) = ±√[(1 + cos A)/2]
tan(A/2) = sin A / (1 + cos A)
tan(A/2) = (1 − cos A) / sin A
tan(A/2) = ±√[(1 − cos A)/(1 + cos A)]

⚠️ ± चिन्ह कैसे तय होगा?

अर्ध-कोण सूत्र में ± का चिन्ह A/2 जिस चतुर्थांश में स्थित है, उसी चतुर्थांश में संबंधित त्रिकोणमितीय अनुपात के चिन्ह के आधार पर निर्धारित किया जाता है।

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गुणनफल से योग के सूत्र

Product to Sum Formula

2sin A cos B = sin(A + B) + sin(A − B)
2cos A sin B = sin(A + B) − sin(A − B)
2cos A cos B = cos(A + B) + cos(A − B)
2sin A sin B = cos(A − B) − cos(A + B)
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योग से गुणनफल के सूत्र

Sum to Product Formula

sin C + sin D = 2sin[(C + D)/2] cos[(C − D)/2]
sin C − sin D = 2cos[(C + D)/2] sin[(C − D)/2]
cos C + cos D = 2cos[(C + D)/2] cos[(C − D)/2]
cos C − cos D = −2sin[(C + D)/2] sin[(C − D)/2]
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महत्वपूर्ण व्युत्पन्न सर्वसमिकाएँ

Important Derived Identities

क्रम सर्वसमिका
1 (sec θ + tan θ)(sec θ − tan θ) = 1
2 (cosec θ + cot θ)(cosec θ − cot θ) = 1
3 1 − cos 2A = 2sin²A
4 1 + cos 2A = 2cos²A
5 sin²A = (1 − cos 2A)/2
6 cos²A = (1 + cos 2A)/2
7 sin A cos A = (1/2)sin 2A
8 tan A + cot A = sec A cosec A
9 (1 − sin A)(1 + sin A) = cos²A
10 (1 − cos A)(1 + cos A) = sin²A

📗 विशेष ध्यान

tan A + cot A = sec A cosec A वहीं प्रयोग किया जाएगा जहाँ tan A और cot A दोनों परिभाषित हों।

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त्रिभुज के कोणों से संबंधित सूत्र

Triangle Angle Relations

यदि किसी त्रिभुज के तीन कोण A, B और C हैं, तो

A + B + C = 180°
sin(A + B) = sin C
cos(A + B) = −cos C
tan(A + B) = −tan C
tan A + tan B + tan C = tan A tan B tan C

ℹ️ क्यों?

क्योंकि A + B = 180° − C होता है। इसलिए संबद्ध कोण के सूत्रों से sin(A+B), cos(A+B) और tan(A+B) के ये परिणाम सीधे प्राप्त होते हैं।

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15° और 75° के महत्वपूर्ण सटीक मान

Important Exact Values

व्यंजक मान
sin 15° (√6 − √2)/4
cos 15° (√6 + √2)/4
tan 15° 2 − √3
sin 75° (√6 + √2)/4
cos 75° (√6 − √2)/4
tan 75° 2 + √3

🎯 संबंध समझें

15° और 75° पूरक कोण हैं। इसलिए sin 15° = cos 75° तथा cos 15° = sin 75° होता है।

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डिग्री और रेडियन में परिवर्तन

Degree and Radian Conversion

180° = π रेडियन
1° = π/180 रेडियन
1 रेडियन = 180°/π

📗 परिवर्तन का नियम

डिग्री को रेडियन में बदलने के लिए π/180 से गुणा करें और रेडियन को डिग्री में बदलने के लिए 180/π से गुणा करें।

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त्रिकोणमितीय समीकरणों के व्यापक हल

General Solutions

समीकरण व्यापक हल
sin θ = sin α θ = n×180° + (−1)nα
cos θ = cos α θ = 360°n ± α
tan θ = tan α θ = 180°n + α

ℹ️ यहाँ n पूर्णांक है

n = 0, ±1, ±2, ±3… लिया जा सकता है। व्यापक हल का अर्थ ऐसे सभी कोणों को व्यक्त करना है जो दिए गए त्रिकोणमितीय समीकरण को संतुष्ट करते हैं।

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सामान्य गलतियाँ और सावधानियाँ

Common Errors

  • tan 90° और sec 90° अपरिभाषित होते हैं।
  • cot 0° और cosec 0° अपरिभाषित होते हैं।
  • cos(A + B) में बीच का चिन्ह ऋणात्मक होता है।
  • cos(A − B) में बीच का चिन्ह धनात्मक होता है।
  • tan(A + B) के हर में 1 − tan A tan B होता है।
  • tan(A − B) के हर में 1 + tan A tan B होता है।
  • अर्ध-कोण के सूत्रों में ± चिन्ह A/2 के चतुर्थांश के अनुसार निर्धारित होता है।
  • 90° और 270° के साथ अनुपात का नाम बदलता है, जबकि 180° और 360° के साथ अनुपात का नाम वही रहता है।

⚠️ परिभाषित होने की शर्त

जिस त्रिकोणमितीय अनुपात के सूत्र में हर का मान 0 हो जाए, वह अनुपात उस कोण पर अपरिभाषित होगा। उदाहरण के लिए tan θ = sin θ/cos θ है, इसलिए cos θ = 0 होने पर tan θ परिभाषित नहीं होता।

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त्वरित पुनरावृत्ति

Quick Revision

sin θ = P/H,   cos θ = B/H,   tan θ = P/B
sin²θ + cos²θ = 1
1 + tan²θ = sec²θ
1 + cot²θ = cosec²θ
sin(A ± B) = sin A cos B ± cos A sin B
cos(A ± B) = cos A cos B ∓ sin A sin B
sin 2A = 2sin A cos A
cos 2A = cos²A − sin²A
tan 2A = 2tan A / (1 − tan²A)
sin 3A = 3sin A − 4sin³A
cos 3A = 4cos³A − 3cos A

⚡ अंतिम पुनरावृत्ति

छह मूल अनुपात: sin = लंब/कर्ण, cos = आधार/कर्ण, tan = लंब/आधार, cot = आधार/लंब, sec = कर्ण/आधार और cosec = कर्ण/लंब।

तीन मूल सर्वसमिकाएँ: sin²θ + cos²θ = 1, 1 + tan²θ = sec²θ तथा 1 + cot²θ = cosec²θ।

पूरक कोण: 90° − θ करने पर sin ↔ cos, tan ↔ cot तथा sec ↔ cosec हो जाते हैं।

चतुर्थांश नियम: प्रथम में सभी, द्वितीय में sin-cosec, तृतीय में tan-cot तथा चतुर्थ में cos-sec धनात्मक होते हैं।

संबद्ध कोण: 90° और 270° के साथ अनुपात बदलता है; 180° और 360° के साथ अनुपात का नाम नहीं बदलता। चिन्ह चतुर्थांश से लिया जाता है।

ऋणात्मक कोण: sin, tan, cot और cosec का चिन्ह बदलता है; cos और sec का नहीं।

आवर्तकाल: sin, cos, sec और cosec के लिए 360° तथा tan और cot के लिए 180°।

संयुक्त कोण: sin(A+B) में दोनों पद जुड़ते हैं, जबकि cos(A+B) में बीच का चिन्ह ऋणात्मक होता है।

द्विगुण कोण: sin 2A = 2sin A cos A तथा cos 2A = cos²A − sin²A।

त्रिगुण कोण: sin 3A = 3sin A − 4sin³A तथा cos 3A = 4cos³A − 3cos A।

डिग्री–रेडियन: 180° = π रेडियन।

विशेष सावधानी: tan 90°, sec 90°, cot 0° और cosec 0° अपरिभाषित होते हैं।

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