\n\n\n\n\n
VidyaGlobe
कथकली
KATHAKALI

कथकली

केरल की शास्त्रीय नृत्य-नाट्य परंपरा, प्रमुख कलाकार एवं परीक्षा-उपयोगी तथ्य

कथकली क्या है?

कथकली केरल की प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य-नाट्य शैली है। इसमें नृत्य, अभिनय, संगीत, मुख-मुद्राएँ, हस्त-मुद्राएँ, रंग-बिरंगी वेशभूषा और विस्तृत श्रृंगार का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।

कथकली शब्द को सामान्यतः “कथा” अर्थात कहानी और “कली” अर्थात खेल या अभिनय से जोड़ा जाता है। इसकी कथाएँ मुख्य रूप से रामायण, महाभारत और पुराणों के प्रसंगों पर आधारित होती हैं।

कथकली का विकसित स्वरूप लगभग 17वीं शताब्दी में केरल में उभरा। इसके विकास में रामनाट्टम, कृष्णनाट्टम, कूडियाट्टम, स्थानीय अनुष्ठानिक कलाओं तथा केरल की युद्धकला कलरिपयट्टु जैसी परंपराओं का प्रभाव देखा जाता है।

01

कथकली की उत्पत्ति और विकास

उत्पत्ति एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कथकली का जन्म और विकास मुख्य रूप से केरल में हुआ। यह केवल नृत्य नहीं बल्कि एक अत्यंत विकसित नृत्य-नाट्य परंपरा है, जिसमें कलाकार शरीर, आँखों, चेहरे और हाथों के माध्यम से कथा और भाव व्यक्त करता है।

कथकली के आरंभिक विकास में रामनाट्टम का विशेष महत्व माना जाता है। कोट्टारक्करा के राजा द्वारा रामायण की कथाओं को प्रस्तुत करने के लिए रामनाट्टम विकसित किया गया था। आगे चलकर विभिन्न गुरुओं और राजाश्रय के कारण इसका रूप विकसित होते हुए आधुनिक कथकली की ओर बढ़ा।

कथकली ने केरल की पहले से विद्यमान शास्त्रीय, लोक और अनुष्ठानिक कलाओं से अनेक तत्व ग्रहण किए। इसके अभिनय पर कूडियाट्टम, शारीरिक प्रशिक्षण पर कलरिपयट्टु तथा वेशभूषा एवं श्रृंगार पर केरल की विभिन्न अनुष्ठानिक कलाओं का प्रभाव माना जाता है।

🎯 परीक्षा तथ्य

कथकली — केरल — शास्त्रीय नृत्य-नाट्य — लगभग 17वीं शताब्दी में विकसित स्वरूप।

02

कथकली की प्रमुख विशेषताएँ

अभिनय, वेशभूषा और संगीत

  • कथकली में नृत्य, नाटक, अभिनय, संगीत और वेशभूषा का संयुक्त रूप दिखाई देता है।
  • कलाकार कहानी को व्यक्त करने के लिए हस्त-मुद्राओं, नेत्र-संचालन और चेहरे के भावों का व्यापक प्रयोग करते हैं।
  • कथकली का श्रृंगार अत्यंत विस्तृत और प्रतीकात्मक होता है। पात्र का स्वभाव उसके चेहरे के रंग और श्रृंगार से पहचाना जा सकता है।
  • इसकी कथाएँ मुख्य रूप से रामायण, महाभारत और पुराणों से ली जाती हैं।
  • कथकली के कलाकारों को शरीर, आँखों, चेहरे, मुद्राओं और लय पर नियंत्रण के लिए लंबे और कठिन प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है।
  • परंपरागत कथकली में पात्रों के संवाद कलाकार स्वयं नहीं बोलते; कथा का गायन गायक करते हैं और कलाकार अभिनय एवं मुद्राओं द्वारा उसका अर्थ व्यक्त करता है।
03

कथकली में पात्रों का श्रृंगार

रंगों द्वारा चरित्र की पहचान

श्रृंगार का प्रकार सामान्य पहचान उदाहरण
पच्चा हरा चेहरा; महान, वीर और सद्गुणी पात्र कृष्ण, अर्जुन, राम जैसे आदर्श पात्र
काठी शक्तिशाली लेकिन अहंकारी या दुष्ट चरित्र रावण और दुर्योधन जैसे पात्र
थाड़ी दाढ़ी वाले विशिष्ट पात्र; रंग के अनुसार चरित्र अलग वानर, वनवासी या उग्र पात्र
करी काला श्रृंगार; दानवी या वनवासी स्त्री पात्रों से संबंधित राक्षसी पात्र
मिनुक्कु कोमल एवं चमकीला श्रृंगार स्त्री, ब्राह्मण, ऋषि एवं शांत पात्र

📗 महत्वपूर्ण

कथकली में चेहरे का रंग केवल सजावट नहीं होता, बल्कि वह पात्र के स्वभाव और चरित्र का संकेत भी देता है।

04

वल्लथोल नारायण मेनन

कथकली के आधुनिक पुनरुत्थान में योगदान

वल्लथोल नारायण मेनन प्रसिद्ध मलयालम कवि और केरल की पारंपरिक कलाओं के महान संरक्षकों में से एक थे। पुराने सामान्य ज्ञान नोट्स में उनका नाम कभी-कभी “बल्लतोल नारायण मेनन” लिखा मिलता है, जबकि सही और प्रचलित नाम वल्लथोल नारायण मेनन है।

20वीं शताब्दी के प्रारंभ में कथकली सहित केरल की कई परंपरागत कलाओं को राजाश्रय कम होने के कारण कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इस समय वल्लथोल ने इनके संरक्षण और व्यवस्थित प्रशिक्षण की आवश्यकता को पहचाना।

वल्लथोल नारायण मेनन ने मनक्कुलम मुकुंद राजा सहित अन्य सहयोगियों की सहायता से वर्ष 1930 में केरल कलामंडलम की स्थापना की। इस संस्था ने कथकली सहित केरल की पारंपरिक प्रदर्शन कलाओं के संरक्षण, प्रशिक्षण और पुनरुत्थान में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वल्लथोल स्वयं मुख्य रूप से कवि, कला-संरक्षक और संस्थापक थे। इसलिए उन्हें कथकली के पेशेवर नर्तक के रूप में पढ़ने की बजाय कथकली के आधुनिक पुनरुत्थान के प्रमुख संरक्षक के रूप में पढ़ना अधिक सही है।

⚠️ नाम और भूमिका में भ्रम न करें

बल्लतोल नहीं — वल्लथोल नारायण मेनन। वे मुख्य रूप से कवि और केरल कलामंडलम के संस्थापक थे, कथकली के मंचीय कलाकार के रूप में उनकी प्रमुख पहचान नहीं है।

05

गुरु गोपीनाथ

कथकली से आधुनिक भारतीय नृत्य तक

सामान्य कलाकार-सूची में दिया गया “गोपीनाथ” नाम प्रसिद्ध नर्तक गुरु गोपीनाथ से संबंधित है। वे कथकली में प्रशिक्षित भारत के प्रसिद्ध नर्तक और नृत्य-गुरु थे।

गुरु गोपीनाथ केरल कलामंडलम के आरंभिक विद्यार्थियों में रहे और उन्होंने प्रसिद्ध कथकली गुरु कुंजु कुरुप सहित महान आचार्यों से प्रशिक्षण प्राप्त किया।

गुरु गोपीनाथ ने कथकली की तकनीकों को मंचीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रयोग करते हुए अपनी विशिष्ट नृत्य-शैली विकसित की। आगे चलकर उनसे जुड़ी शैली को केरल नटनम के विकास से भी जोड़ा गया।

इसलिए उन्हें कथकली से गहराई से जुड़ा कलाकार अवश्य माना जाता है, लेकिन उनकी पूरी कलात्मक पहचान केवल पारंपरिक कथकली तक सीमित नहीं थी।

🎯 परीक्षा तथ्य

गुरु गोपीनाथ — कथकली में प्रशिक्षित प्रसिद्ध नर्तक — केरल कलामंडलम से संबंध।

06

कलामंडलम कृष्णन नायर

कथकली के महान अभिनेता

आपकी सूची में दिया गया कृष्ण नायर नाम सामान्यतः महान कथकली कलाकार कलामंडलम कृष्णन नायर के संदर्भ में पढ़ा जाता है। उनका जन्म वर्ष 1914 में केरल में हुआ था और वे 20वीं शताब्दी के प्रमुख कथकली कलाकारों में गिने जाते हैं।

उन्होंने केरल कलामंडलम में पट्टिक्कमथोडी रावुन्नी मेनन, गुरु कुंजु कुरुप सहित प्रसिद्ध गुरुओं से प्रशिक्षण प्राप्त किया। उनके अभिनय में रस, भाव और चेहरे की अभिव्यक्ति विशेष रूप से प्रसिद्ध थी।

कलामंडलम कृष्णन नायर को 1967 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार तथा 1970 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

🎯 याद रखें

कलामंडलम कृष्णन नायर — कथकली — संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1967 — पद्म श्री 1970।

07

कृष्णनकुट्टी

नाम की सही पहचान

कृष्णनकुट्टी नाम कथकली की सामान्य कलाकार-सूचियों में मिलता है, लेकिन केवल यह एक नाम लिखने से भ्रम हो सकता है क्योंकि कथकली परंपरा में कृष्णनकुट्टी नाम वाले एक से अधिक कलाकार रहे हैं।

प्रमुख आधुनिक कलाकारों में सदनम कृष्णनकुट्टी एक प्रसिद्ध कथकली अभिनेता और गुरु हैं। उन्होंने कथकली में विविध प्रकार के पात्रों का अभिनय किया और प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी योगदान दिया।

सदनम कृष्णनकुट्टी को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भी प्रदान किया गया और बाद में उन्हें अकादमी की फेलोशिप से भी सम्मानित किया गया।

कथकली पुरस्कार-सूचियों में कोट्टक्कल कृष्णन कुट्टी नायर नाम भी मिलता है। इसलिए किसी प्रश्न में पूरा नाम दिया हो तो केवल “कृष्णनकुट्टी” देखकर दोनों कलाकारों को एक न समझें।

⚠️ परीक्षा-सावधानी

कृष्णनकुट्टी अकेला नाम पर्याप्त स्पष्ट नहीं है। सामान्य आधुनिक संदर्भ में सदनम कृष्णनकुट्टी प्रमुख कथकली कलाकार हैं, जबकि कोट्टक्कल कृष्णन कुट्टी नायर अलग कलाकार हैं।

08

आनंद शिवराम

केरल कलामंडलम के आरंभिक कलाकार

सामान्य पुस्तकों में आनंद शिवरामन या आनंद शिवराम का नाम कथकली से जुड़े कलाकार के रूप में मिलता है। उनका संबंध कथकली परंपरा और केरल कलामंडलम के आरंभिक प्रशिक्षण से था।

वे कथकली की पृष्ठभूमि वाले परिवार से आए थे और केरल कलामंडलम के आरंभिक विद्यार्थियों में शामिल रहे। बाद में उन्होंने भारतीय नृत्य को केरल से बाहर तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाने में योगदान दिया।

उनकी कलात्मक गतिविधियाँ केवल पारंपरिक कथकली तक सीमित नहीं रहीं, इसलिए उन्हें कथकली में प्रशिक्षित और उससे जुड़े नर्तक के रूप में समझना अधिक उचित है।

09

मृणालिनी साराभाई

बहुशैलीय शास्त्रीय नृत्यांगना

मृणालिनी साराभाई भारत की महान शास्त्रीय नृत्यांगना, नृत्य-संयोजक और शिक्षिका थीं। उनका नाम कथकली से जुड़ा है, लेकिन उनकी पहचान केवल कथकली कलाकार के रूप में सीमित नहीं थी।

उन्होंने भारतीय शास्त्रीय नृत्य की विभिन्न परंपराओं का प्रशिक्षण प्राप्त किया और कथकली की अभिनय तथा नाट्य परंपरा का भी अध्ययन किया। उनकी प्रमुख मंचीय पहचान में भरतनाट्यम का भी महत्वपूर्ण स्थान था।

उन्होंने अहमदाबाद में दर्पणा अकादमी की स्थापना की, जिसने नृत्य, नाटक, संगीत और अन्य प्रदर्शन कलाओं के प्रशिक्षण तथा प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मृणालिनी साराभाई को वर्ष 1970 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार दिया गया।

📗 भ्रम से बचें

मृणालिनी साराभाई को केवल कथकली की नृत्यांगना न लिखें। वे बहुशैलीय शास्त्रीय नृत्यांगना थीं और कथकली से उनका महत्वपूर्ण प्रशिक्षण-संबंध था।

10

शांता राव

कई शास्त्रीय शैलियों में दक्ष कलाकार

शांता राव भारत की प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना थीं। उन्होंने कथकली का प्रशिक्षण प्राप्त किया और उस समय महिलाओं के लिए असामान्य माने जाने वाले इस कठिन नृत्य-नाट्य रूप का अध्ययन किया।

कथकली के अतिरिक्त उन्होंने भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी सहित अन्य भारतीय नृत्य-परंपराओं में भी प्रशिक्षण और प्रदर्शन किया। इसलिए उनकी पहचान एक बहुशैलीय शास्त्रीय नृत्यांगना के रूप में अधिक व्यापक है।

शांता राव को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित कई महत्वपूर्ण सम्मानों से सम्मानित किया गया।

📗 महत्वपूर्ण

शांता राव = कथकली + भरतनाट्यम + कुचिपुड़ी। उन्हें केवल एक शैली तक सीमित करके न पढ़ें।

11

उदय शंकर

कथकली कलाकार नहीं, आधुनिक भारतीय नृत्य के अग्रदूत

उदय शंकर का नाम कई पुरानी सामान्य ज्ञान पुस्तकों में कथकली के कलाकारों के साथ दिया जाता है, लेकिन उन्हें पारंपरिक कथकली कलाकार कहना सही नहीं है।

उदय शंकर भारत के आधुनिक नृत्य के महान अग्रदूत थे। उन्होंने भारतीय मूर्तिकला, चित्रकला और विभिन्न शास्त्रीय एवं लोक नृत्य-परंपराओं से प्रेरणा लेकर अपनी स्वतंत्र आधुनिक भारतीय नृत्य-शैली विकसित की।

उनकी नृत्य-रचनाओं पर कथकली सहित भारतीय प्रदर्शन परंपराओं का प्रभाव देखा जा सकता है, लेकिन उन्होंने किसी एक पारंपरिक शास्त्रीय नृत्य-शैली को अपनी एकमात्र पहचान नहीं बनाया।

उदय शंकर का सही परीक्षा-संबंध आधुनिक भारतीय नृत्य के अग्रदूत के रूप में याद रखना अधिक सुरक्षित है।

⚠️ बहुत महत्वपूर्ण सुधार

उदय शंकर = पारंपरिक कथकली के शुद्ध कलाकार नहीं। वे आधुनिक भारतीय नृत्य के अग्रदूत थे और उनकी शैली पर कथकली सहित अनेक भारतीय कला-परंपराओं का प्रभाव था।

12

प्रमुख कलाकार — एक नज़र में

नाम और सही पहचान

नाम कथकली से संबंध मुख्य पहचान
आनंद शिवराम कथकली में प्रशिक्षण एवं आरंभिक कलामंडलम संबंध नर्तक एवं मंचीय कलाकार
कृष्णनकुट्टी कथकली कलाकार पूरा नाम देखकर पहचान आवश्यक; सदनम कृष्णनकुट्टी प्रमुख नाम
मृणालिनी साराभाई कथकली का प्रशिक्षण बहुशैलीय शास्त्रीय नृत्यांगना
वल्लथोल नारायण मेनन कथकली पुनरुत्थान के प्रमुख संरक्षक कवि एवं केरल कलामंडलम के संस्थापक
उदय शंकर कथकली से प्रेरणा आधुनिक भारतीय नृत्य के अग्रदूत
कलामंडलम कृष्णन नायर प्रमुख कथकली कलाकार महान अभिनेता एवं गुरु
शांता राव कथकली में प्रशिक्षित बहुशैलीय शास्त्रीय नृत्यांगना
गुरु गोपीनाथ कथकली में प्रशिक्षित प्रसिद्ध नर्तक एवं नृत्य-गुरु
13

केरल कलामंडलम

कथकली के संरक्षण का प्रमुख केंद्र

केरल कलामंडलम कथकली और केरल की अन्य पारंपरिक प्रदर्शन कलाओं के संरक्षण एवं प्रशिक्षण की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक है। इसकी स्थापना वर्ष 1930 में वल्लथोल नारायण मेनन और उनके सहयोगियों के प्रयासों से हुई।

कथकली कलामंडलम का आरंभिक और प्रमुख प्रशिक्षण विषय था। संस्था ने गुरु-शिष्य परंपरा के आधार पर कलाकारों को कठोर प्रशिक्षण उपलब्ध कराया और अनेक महान कथकली कलाकारों को तैयार किया।

गुरु कुंजु कुरुप इसके आरंभिक प्रमुख कथकली गुरुओं में थे। बाद में पट्टिक्कमथोडी रावुन्नी मेनन जैसे महान गुरुओं ने भी कथकली प्रशिक्षण को व्यवस्थित और समृद्ध किया।

🎯 उच्च महत्व का तथ्य

केरल कलामंडलम — स्थापना 1930 — वल्लथोल नारायण मेनन — कथकली के संरक्षण और पुनरुत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका।

14

परीक्षा में भ्रम पैदा करने वाले तथ्य

महत्वपूर्ण सावधानियाँ

  • बल्लतोल नारायण मेनन के स्थान पर सही नाम वल्लथोल नारायण मेनन है।
  • वल्लथोल नारायण मेनन को कथकली नर्तक के बजाय कवि, कला-संरक्षक और केरल कलामंडलम के संस्थापक के रूप में याद करें।
  • उदय शंकर पारंपरिक कथकली कलाकार नहीं थे; वे आधुनिक भारतीय नृत्य के अग्रदूत थे और कथकली सहित अनेक भारतीय कलाओं से प्रेरित थे।
  • कृष्ण नायर से सामान्यतः कलामंडलम कृष्णन नायर अभिप्रेत होते हैं।
  • गोपीनाथ से सामान्यतः गुरु गोपीनाथ अभिप्रेत होते हैं।
  • कृष्णनकुट्टी अकेला नाम भ्रमित कर सकता है; सदनम कृष्णनकुट्टी और कोट्टक्कल कृष्णन कुट्टी नायर अलग कलाकार हैं।
  • मृणालिनी साराभाई और शांता राव को केवल कथकली नृत्यांगना न समझें; दोनों का प्रशिक्षण और कार्य कई भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपराओं से जुड़ा था।
15

त्वरित पुनरावृत्ति

परीक्षा से पहले एक नज़र

कथकली—केरल नृत्य-नाट्य रामनाट्टम वल्लथोल—कलामंडलम 1930 कृष्णन नायर—कथकली गुरु गोपीनाथ—कथकली प्रशिक्षण

⚡ अंतिम पुनरावृत्ति

कथकली केरल की प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य-नाट्य शैली है, जिसमें नृत्य, अभिनय, संगीत, हस्त-मुद्राएँ, नेत्र-अभिनय, विस्तृत श्रृंगार और वेशभूषा का समन्वय होता है।

कथकली का विकसित स्वरूप लगभग 17वीं शताब्दी में सामने आया और इसके विकास में रामनाट्टम सहित केरल की अनेक पुरानी कला-परंपराओं का योगदान रहा।

वल्लथोल नारायण मेनन — प्रसिद्ध कवि और कथकली के आधुनिक पुनरुत्थान के प्रमुख संरक्षक; केरल कलामंडलम की स्थापना 1930 में की।

कलामंडलम कृष्णन नायर — महान कथकली कलाकार; संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1967 और पद्म श्री 1970।

गुरु गोपीनाथ — कथकली में प्रशिक्षित प्रसिद्ध नर्तक और गुरु; केरल कलामंडलम के आरंभिक विद्यार्थियों से जुड़े प्रमुख नाम।

सदनम कृष्णनकुट्टी — प्रमुख कथकली अभिनेता एवं गुरु; केवल “कृष्णनकुट्टी” लिखे जाने पर अन्य समान नाम वाले कलाकारों से भ्रम न करें।

मृणालिनी साराभाई — बहुशैलीय शास्त्रीय नृत्यांगना; कथकली का भी प्रशिक्षण प्राप्त किया।

शांता राव — कथकली, भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी सहित कई शास्त्रीय नृत्य शैलियों में प्रशिक्षित कलाकार।

आनंद शिवराम — कथकली में प्रशिक्षित तथा केरल कलामंडलम के आरंभिक दौर से जुड़े कलाकार।

उदय शंकर — पारंपरिक कथकली कलाकार नहीं; आधुनिक भारतीय नृत्य के अग्रदूत, जिनकी शैली पर कथकली सहित अनेक भारतीय कलाओं का प्रभाव था।

मुख्य नाम: आनंद शिवराम, कृष्णनकुट्टी, मृणालिनी साराभाई, वल्लथोल नारायण मेनन, उदय शंकर, कलामंडलम कृष्णन नायर, शांता राव और गुरु गोपीनाथ।

Scroll to Top