कथक
उद्भव, घराने, विशेषताएँ, महान गुरु, प्रमुख नृत्यांगनाएँ और परीक्षा-उपयोगी सम्मान
कथक नृत्य
कथक उत्तर भारत की प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैली है। इसका नाम संस्कृत के कथा शब्द से संबंधित माना जाता है। कथा सुनाने वाले परंपरागत कलाकारों को कथक या कथाकार कहा जाता था, जो कथा को संगीत, अभिनय और नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत करते थे।
समय के साथ कथक मंदिर और भक्ति परंपरा से निकलकर राजदरबारों तक पहुँचा। मुगल और अवध दरबारों के प्रभाव से इसमें नृत्य की सूक्ष्मता, भाव-अभिनय, ठुमरी, आकर्षक वेशभूषा तथा दरबारी सौंदर्य का भी विकास हुआ।
कथक में तत्कार, चक्कर, हस्त-मुद्राएँ, भाव-अभिनय, तोड़ा, टुकड़ा, परन, तिहाई और गत-निकास विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। घुँघरुओं और लयकारी का इसमें विशेष स्थान है।
कथक के प्रमुख घराने
Major Gharanas
कथक की प्रमुख परंपराओं में लखनऊ, जयपुर और बनारस घराना विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। रायगढ़ परंपरा को भी कथक के विकास में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।
लखनऊ घराना भाव, नजाकत, अभिनय और श्रृंगार के लिए प्रसिद्ध है। इसका विकास अवध के नवाबी दरबार में विशेष रूप से हुआ। कालका प्रसाद, बिंदादीन महाराज, अच्छन महाराज, लच्छू महाराज, शंभू महाराज और बिरजू महाराज इस परंपरा से जुड़े प्रमुख नाम हैं।
जयपुर घराना कठिन लयकारी, शक्तिशाली तत्कार, तेज चक्कर, परन और ताल की जटिलताओं के लिए प्रसिद्ध है। नारायण प्रसाद, सुंदर प्रसाद, कुंदनलाल गंगानी और प्रेरणा श्रीमाली जैसे कलाकार इस परंपरा से जुड़े रहे हैं।
बनारस घराना को जानकी प्रसाद की परंपरा से जोड़ा जाता है। नलिनी और कमलिनी अस्थाना ने गुरु जितेंद्र महाराज से बनारस घराने की शिक्षा प्राप्त की और इस परंपरा के प्रचार में योगदान दिया।
🎯 परीक्षा में याद रखें
लखनऊ — भाव एवं अभिनय
जयपुर — लयकारी एवं शक्तिशाली तत्कार
बनारस — जानकी प्रसाद परंपरा
कथक की प्रमुख विशेषताएँ
Main Features
तत्कार पैरों द्वारा उत्पन्न की जाने वाली लयबद्ध पदचाप है। कथक में घुँघरुओं के साथ पैरों की जटिल लयकारी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
चक्कर कथक की सबसे पहचान योग्य विशेषताओं में से एक हैं। कलाकार ताल और लय के भीतर तेजी से अनेक चक्कर लेता है।
तिहाई किसी बोल या लयबद्ध रचना को तीन बार इस प्रकार प्रस्तुत करना है कि उसका अंतिम भाग सम पर समाप्त हो।
तोड़ा और टुकड़ा कथक की छोटी लयबद्ध नृत्य रचनाएँ हैं, जबकि परन में प्रायः पखावज से संबंधित शक्तिशाली बोलों का प्रयोग होता है।
गत-निकास और गत-भाव में कलाकार चाल, मुद्रा और अभिनय के माध्यम से पात्र अथवा कथा को प्रस्तुत करता है।
कथक में ठुमरी का भाव-अभिनय से विशेष संबंध है। राधा-कृष्ण और श्रृंगार से संबंधित प्रसंगों की प्रस्तुति में ठुमरी का व्यापक प्रयोग हुआ।
बिंदादीन महाराज और कालका प्रसाद
Bindadin Maharaj & Kalka Prasad
बिंदादीन महाराज कथक के लखनऊ घराने के महान आचार्यों में गिने जाते हैं। उन्होंने कथक में भाव, अभिनय और ठुमरी आधारित प्रस्तुति को समृद्ध किया। अनेक ठुमरियों और नृत्य रचनाओं की परंपरा उनसे जुड़ी है।
कालका प्रसाद महाराज भी लखनऊ घराने के प्रमुख गुरु थे। उन्हें केवल “कालिका प्रसाद” लिखना उचित नहीं; उनका प्रचलित नाम कालका प्रसाद है।
कालका प्रसाद के पुत्र अच्छन महाराज, लच्छू महाराज और शंभू महाराज आगे चलकर कथक के महान गुरु बने। इसी परिवार से पंडित बिरजू महाराज की प्रसिद्ध परंपरा आगे बढ़ी।
⚠️ नाम में सावधानी
कालका प्रसाद सही प्रचलित नाम है; इसे कालिका प्रसाद लिखकर अलग व्यक्ति न समझें।
अच्छन महाराज
Achhan Maharaj
अच्छन महाराज का वास्तविक नाम जगन्नाथ प्रसाद था। वे लखनऊ घराने के महान कथक गुरु और कालका प्रसाद के पुत्र थे।
वे पंडित बिरजू महाराज के पिता और गुरु थे। कथक में भाव-अभिनय, नजाकत और लखनऊ शैली की सूक्ष्मता के लिए उन्हें विशेष रूप से याद किया जाता है।
लच्छू महाराज
Lachhu Maharaj
लच्छू महाराज का वास्तविक नाम बैजनाथ प्रसाद था। वे कालका प्रसाद के पुत्र और अच्छन महाराज तथा शंभू महाराज के भाई थे।
वे कथक के महान नर्तक और नृत्य-निर्देशक थे। कथक की भावपूर्ण प्रस्तुति तथा फिल्म नृत्य-निर्देशन में उनका विशेष योगदान रहा।
उन्होंने मुगल-ए-आजम और पाकीज़ा जैसी प्रसिद्ध फिल्मों में कथक आधारित नृत्य-निर्देशन किया।
उन्हें 1957 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया।
🎯 परीक्षा तथ्य
लच्छू महाराज — कथक — संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1957
पंडित बिरजू महाराज
Birju Maharaj
पंडित बिरजू महाराज कथक के लखनऊ घराने के सबसे प्रसिद्ध आधुनिक आचार्यों में से एक थे। उनका जन्म कथक के प्रसिद्ध कालका-बिंदादीन परिवार में हुआ था।
उनके पिता अच्छन महाराज उनके प्रारंभिक गुरु थे। पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने लच्छू महाराज और शंभू महाराज से भी प्रशिक्षण प्राप्त किया।
वे नृत्य के साथ गायन, तबला और संगीत की गहरी समझ के लिए भी प्रसिद्ध थे। कथक को विश्व स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाने में उनका अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा।
उन्हें 1964 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और 1986 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
🎯 High Yield
बिरजू महाराज — लखनऊ घराना — पद्म विभूषण 1986
सितारा देवी
Sitara Devi
सितारा देवी भारत की महान कथक नृत्यांगनाओं में गिनी जाती हैं। उन्होंने कथक को बड़े मंचों और फिल्मों के माध्यम से लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्हें 1969 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया और 1973 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
वे अपनी ऊर्जावान प्रस्तुति, तेज लयकारी और प्रभावशाली मंचीय व्यक्तित्व के लिए प्रसिद्ध थीं।
🎯 परीक्षा तथ्य
सितारा देवी — कथक — पद्म श्री 1973
गोपी कृष्ण
Gopi Krishna
गोपी कृष्ण प्रसिद्ध कथक नर्तक, अभिनेता और नृत्य-निर्देशक थे। उन्हें “गोपीकृष्णन” लिखने के बजाय गोपी कृष्ण लिखना उचित है।
उन्होंने कथक की तेज गति, चक्कर और प्रभावशाली मंचीय शैली के कारण विशेष लोकप्रियता प्राप्त की तथा फिल्मों में भी कथक आधारित नृत्य को लोकप्रिय बनाने में योगदान दिया।
⚠️ नाम सुधार
गोपी कृष्ण — न कि “गोपीकृष्णन”।
शोवना नारायण
Shovana Narayan
शोवना नारायण प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना हैं। उनका संबंध लखनऊ घराने की परंपरा से है और उन्होंने बिरजू महाराज से भी प्रशिक्षण प्राप्त किया।
वे भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी होने के साथ-साथ कथक की प्रतिष्ठित कलाकार भी रही हैं।
उन्हें 1992 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया और 1999-2000 के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ।
कुछ सामान्य ज्ञान पुस्तकों में उन्हें “1992 में सबसे कम उम्र की पद्म श्री प्राप्त कथक नृत्यांगना” लिखा गया है, लेकिन इसे सर्वमान्य आधिकारिक पद्म रिकॉर्ड के रूप में याद करना सुरक्षित नहीं है। परीक्षा में सबसे सुरक्षित तथ्य शोवना नारायण — पद्म श्री 1992 है।
🎯 सुरक्षित परीक्षा तथ्य
शोवना नारायण — कथक — पद्म श्री 1992
कुमुदिनी लखिया
Kumudini Lakhia
कुमुदिनी लखिया आधुनिक कथक की प्रमुख नृत्यांगना, गुरु और नृत्य-निर्देशिका हैं। उन्होंने पारंपरिक कथक को समूह नृत्य और आधुनिक मंचीय संरचना के साथ नए रूप में प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने अहमदाबाद में कदंब नृत्य एवं संगीत केंद्र की स्थापना की।
उन्हें 1982 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ। वे आधुनिक कथक की सबसे प्रभावशाली गुरुओं में गिनी जाती हैं।
प्रेरणा श्रीमाली
Prerana Shrimali
प्रेरणा श्रीमाली जयपुर घराने की प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना और गुरु हैं। उन्होंने गुरु कुंदनलाल गंगानी से कथक की शिक्षा प्राप्त की।
वे कठिन लयकारी, पारंपरिक बंदिशों और जयपुर घराने की विशिष्ट नृत्य शैली के लिए जानी जाती हैं।
उन्हें कथक के क्षेत्र में योगदान के लिए 2009 का संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया।
🎯 परीक्षा तथ्य
प्रेरणा श्रीमाली — जयपुर घराना — संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2009
नारायण प्रसाद
Narayan Prasad
नारायण प्रसाद कथक की जयपुर परंपरा से जुड़े प्रमुख गुरु और कलाकारों में गिने जाते हैं। कथक की पारंपरिक लयकारी और जयपुर घराने की तकनीकी विशेषताओं को आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उन्हें अन्य समान नाम वाले कलाकारों से अलग पहचानते हुए जयपुर घराने के कथक गुरु नारायण प्रसाद के रूप में याद करना अधिक सुरक्षित है।
मंजुश्री चटर्जी
Manjushree Chatterjee
मंजुश्री चटर्जी कथक की वरिष्ठ नृत्यांगना और गुरु हैं। आपके पुराने नोटों में नाम “मंजूश्री टर्जी” जैसा लिखा मिल सकता है; सही प्रचलित नाम मंजुश्री चटर्जी है।
उन्होंने लखनऊ घराने के महान गुरु शंभू महाराज और जयपुर घराने के सुंदर प्रसाद से प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस कारण उनकी कला में दोनों प्रमुख परंपराओं का प्रभाव दिखाई देता है।
उन्हें 2011 का संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ।
⚠️ नाम सुधार
मंजुश्री चटर्जी — न कि “मंजूश्री टर्जी”।
मालविका सरकार
Malavika Sarkar
मालविका सरकार का नाम कथक कलाकारों की अनेक सामान्य ज्ञान सूचियों में मिलता है। उन्हें कथक से संबंधित कलाकार के रूप में पढ़ा जा सकता है।
हालाँकि प्रमुख राष्ट्रीय पुरस्कारों और घराना-संबंधी मानक सूचियों में उनके बारे में जानकारी अपेक्षाकृत सीमित मिलती है। इसलिए परीक्षा में उनके नाम को कथक से जोड़ना पर्याप्त है; अतिरिक्त पुरस्कार या घराना बिना विश्वसनीय स्रोत के निश्चित रूप से न जोड़ें।
विद्या गौरी अड़कर
Vidya Gauri Adkar
विद्या गौरी अड़कर कथक की प्रसिद्ध नृत्यांगना हैं। उन्हें कथक की आधुनिक कलाकारों की सूची में महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है।
उनका नाम कई प्रतियोगी परीक्षाओं की शास्त्रीय नृत्य कलाकार सूचियों में कथक के साथ पूछा जाता है।
रोशन कुमारी
Roshan Kumari
रोशन कुमारी कथक के जयपुर घराने की प्रसिद्ध नृत्यांगना, अभिनेत्री और नृत्य-निर्देशिका हैं। पुराने नोटों में उनका नाम “रोशिनी कुमारी” लिखा मिल सकता है, लेकिन सही प्रचलित नाम रोशन कुमारी है।
उन्होंने कथक को मंच तथा फिल्मों दोनों के माध्यम से लोकप्रिय बनाया और अनेक प्रसिद्ध फिल्मों में कथक प्रस्तुतियाँ दीं।
उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार तथा पद्म श्री 1984 से सम्मानित किया गया।
🎯 नाम याद रखें
रोशन कुमारी — जयपुर घराना — पद्म श्री 1984
नलिनी और कमलिनी अस्थाना
Nalini & Kamalini Asthana
नलिनी अस्थाना और कमलिनी अस्थाना प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना बहनें हैं। इन्हें सामान्यतः नलिनी-कमलिनी कथक युगल के रूप में जाना जाता है।
उन्होंने गुरु जितेंद्र महाराज से बनारस घराने की कथक परंपरा में प्रशिक्षण प्राप्त किया और मंदिर-आधारित कथक शैली के संरक्षण एवं प्रचार में योगदान दिया।
दोनों को संयुक्त रूप से 2022 का संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया। वे पद्म श्री से भी सम्मानित कथक नृत्यांगनाओं के रूप में जानी जाती हैं।
🎯 परीक्षा तथ्य
नलिनी + कमलिनी अस्थाना — कथक युगल — बनारस घराना
सुरतदेव महाराज — नाम संबंधी सावधानी
Suratdev Maharaj
सुरतदेव महाराज नाम कई पुरानी सामान्य ज्ञान पुस्तकों और संकलनों में कथक कलाकारों की सूची में मिलता है।
लेकिन कथक के प्रमुख घरानों, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सूचियों और मानक सांस्कृतिक स्रोतों में इस नाम की स्पष्ट और समान पहचान आसानी से नहीं मिलती। इसलिए इसे बिना अतिरिक्त विवरण के प्रसिद्ध ऐतिहासिक गुरु के रूप में निश्चित रूप से प्रस्तुत करना सुरक्षित नहीं है।
इसे पुरानी परीक्षा-सूचियों में कथक से जुड़ा नाम मानकर पढ़ें और इसे सुरेंद्र सैकिया से न मिलाएँ। सुरेंद्र सैकिया एक अलग मान्य कथक कलाकार हैं और उन्हें 2000 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला था।
⚠️ परीक्षा-सावधानी
सुरतदेव महाराज नाम को पुराने GK स्रोत का तथ्य मानें; सुरेंद्र सैकिया अलग कथक कलाकार हैं।
चन्द्रलेखा — सावधानी
Chandralekha
चन्द्रलेखा नाम भी कुछ सामान्य ज्ञान सूचियों में कथक कलाकारों के साथ लिखा मिलता है, लेकिन प्रसिद्ध आधुनिक भारतीय नृत्यांगना और नृत्य-निर्देशिका चन्द्रलेखा की मुख्य पहचान भरतनाट्यम से विकसित आधुनिक नृत्य प्रयोगों के लिए है।
इसलिए उन्हें बिना संदर्भ के प्रमुख कथक गुरु या कथक घराने की कलाकार लिखना सुरक्षित नहीं है। परीक्षा में यदि किसी निर्धारित पुस्तक में नाम कथक के साथ दिया गया हो तो उस प्रश्न के संदर्भ को देखें, लेकिन मानक तथ्य के रूप में कथक के प्रमुख कलाकारों में उनका नाम प्राथमिकता से न रखें।
अन्य अत्यंत महत्वपूर्ण कथक कलाकार
Other Important Exponents
शंभू महाराज लखनऊ घराने के महान गुरु और अभिनय के श्रेष्ठ आचार्यों में गिने जाते हैं। उन्हें 1955 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला।
सुंदर प्रसाद जयपुर घराने के महान गुरु थे और उन्होंने कथक की शिक्षा को संस्थागत रूप देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें 1959 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला।
दमयंती जोशी प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना थीं और उन्हें 1968 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला।
रोहिणी भाटे कथक की प्रसिद्ध नृत्यांगना, गुरु और विदुषी थीं। उन्हें 1979 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला।
दुर्गालाल जयपुर घराने के अत्यंत प्रसिद्ध कथक कलाकार थे और उन्हें 1984 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला।
उमा शर्मा प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना हैं और कथक के भाव-अभिनय तथा ग़ज़ल-काव्य आधारित प्रस्तुतियों के लिए जानी जाती हैं।
सास्वती सेन पंडित बिरजू महाराज की प्रमुख शिष्याओं में गिनी जाती हैं और उन्हें 2004 का संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला।
राजेंद्र गंगानी जयपुर घराने के प्रमुख कथक कलाकार और गुरु हैं तथा उन्हें 2002 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया।
प्रमुख कलाकार — एक नज़र में
Artists at a Glance
| कलाकार | प्रमुख पहचान | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|---|
| बिंदादीन महाराज | लखनऊ घराना | भाव-अभिनय और ठुमरी परंपरा |
| कालका प्रसाद | लखनऊ घराना | अच्छन, लच्छू और शंभू महाराज के पिता |
| अच्छन महाराज | लखनऊ घराना | बिरजू महाराज के पिता और गुरु |
| लच्छू महाराज | लखनऊ घराना | संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1957 |
| बिरजू महाराज | लखनऊ घराना | पद्म विभूषण 1986 |
| सितारा देवी | प्रमुख कथक नृत्यांगना | पद्म श्री 1973 |
| गोपी कृष्ण | कथक नर्तक एवं नृत्य-निर्देशक | तेज चक्कर और मंचीय शैली |
| शोवना नारायण | प्रमुख कथक नृत्यांगना | पद्म श्री 1992 |
| कुमुदिनी लखिया | आधुनिक कथक | संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1982 |
| प्रेरणा श्रीमाली | जयपुर घराना | संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2009 |
| नारायण प्रसाद | जयपुर परंपरा | प्रमुख गुरु |
| मंजुश्री चटर्जी | लखनऊ एवं जयपुर परंपरा | संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2011 |
| मालविका सरकार | कथक कलाकार | पुरानी परीक्षा-सूचियों में उल्लेख |
| विद्या गौरी अड़कर | कथक नृत्यांगना | आधुनिक कथक कलाकार |
| रोशन कुमारी | जयपुर घराना | पद्म श्री 1984 |
| नलिनी-कमलिनी अस्थाना | बनारस घराना | प्रसिद्ध कथक युगल |
नामों में होने वाली सामान्य गलतियाँ
Important Name Corrections
लच्छु महाराज को मानक रूप में लच्छू महाराज लिखा जाता है।
गोपीकृष्णन की जगह प्रसिद्ध कथक कलाकार का नाम गोपी कृष्ण है।
कालिका प्रसाद के स्थान पर लखनऊ घराने के गुरु का प्रचलित नाम कालका प्रसाद है।
मंजूश्री टर्जी से अभिप्राय मंजुश्री चटर्जी है।
रोशिनी कुमारी से अभिप्राय प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना रोशन कुमारी है।
नलिनी अस्थाना और कमलिनी अस्थाना दो बहनें हैं और इन्हें प्रसिद्ध नलिनी-कमलिनी कथक युगल के रूप में याद करें।
सुरतदेव महाराज नाम पुराने सामान्य ज्ञान संकलनों में मिलता है, लेकिन इसे सुरेंद्र सैकिया से न मिलाएँ।
चन्द्रलेखा को बिना संदर्भ के कथक की प्रमुख पारंपरिक कलाकार लिखना सुरक्षित नहीं है।
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⚡ अंतिम पुनरावृत्ति बिंदु
कथक उत्तर भारत की प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैली है और इसका संबंध कथा-कथन की प्राचीन परंपरा से माना जाता है।
कथक के प्रमुख घराने — लखनऊ, जयपुर और बनारस; रायगढ़ परंपरा भी महत्वपूर्ण है।
लखनऊ घराना भाव और अभिनय जबकि जयपुर घराना लयकारी, तत्कार और चक्कर के लिए प्रसिद्ध है।
बिंदादीन महाराज और कालका प्रसाद लखनऊ घराने की प्रसिद्ध परंपरा के महान आचार्य थे।
अच्छन महाराज पंडित बिरजू महाराज के पिता और गुरु थे।
लच्छू महाराज — संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1957।
बिरजू महाराज — लखनऊ घराना — संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1964 — पद्म विभूषण 1986।
सितारा देवी — संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1969 — पद्म श्री 1973।
गोपी कृष्ण प्रसिद्ध कथक नर्तक एवं नृत्य-निर्देशक थे।
शोवना नारायण — कथक — पद्म श्री 1992।
कुमुदिनी लखिया — आधुनिक कथक की प्रमुख गुरु — संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1982।
प्रेरणा श्रीमाली — जयपुर घराना — संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2009।
मंजुश्री चटर्जी — संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2011।
रोशन कुमारी — जयपुर घराना — पद्म श्री 1984।
नलिनी और कमलिनी अस्थाना — बनारस घराने की प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना बहनें।
तत्कार, चक्कर, तिहाई, तोड़ा, टुकड़ा, परन और गत-भाव कथक की महत्वपूर्ण तकनीकी विशेषताएँ हैं।
ठुमरी का कथक के भाव-अभिनय, विशेषकर लखनऊ घराने, से गहरा संबंध है।